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00:00:02:16 सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और आपने टाइटल देख ही लिया होगा। हमारे साथ में के एक फॉलोअ हैं जुड़ चुके हैं। हम उन्हें ऊपर ले लेते हैं। जी तथागत जी आप अपना कैमरा ऑन कर लें। जय श्री राम जी

00:00:34:28 थोड़ा सा तथागत जी आप हमारे [गला साफ़ करने की आवाज़] दर्शकों को अपना एक परिचय दे दीजिए कहां से जुड़े हुए हैं कौन से स्क मंदिर में जाते हैं कौन है आपके मेंटोर वहां पर जो आपको शिक्षा दीक्षा दे हरे कृष्णा मैं हूं मैं वेस्ट बंगाल से हूं तो इसलिए मेरा जो जो हिंदी है वो वो थोड़ा वीक होगा तो इसके लिए मैं मैं पहले ही आप सभी के माफी मांगता हूं। तो उसके बाद मैं कहना चाहता हूं कि मैं दो साल से इस को फॉलो कर रहा हूं और और उनके दिए हुए जो नीति नियम है और और वो गुरु परंपरा है उनके नियम अनुसार हम भारतीय जीवन का अनुसरण करने का प्रयास कर रहे हैं। तो बस जो मतलब जो

00:01:36:02 परिचय है वो इतना ही है। आपकी आवाज बहुत कम आ रही है। मेरी आवाज ठीक आ रही है? आपकी आवाज आ रही है। नहीं मैं दर्शकों से पूछ रहा हूं। आवाज ठीक आ रही है मेरी सबको कोई कमेंट कर दे मेरी ठीक है आप क्या कुछ हेडफोन वगैरह लगा के बात कर रहे हैं क्या नहीं कुछ हेडफोन आप आप अगर हो सके तो मोबाइल को ऐसे रखिए वो अच्छा रहेगा ज्यादा

00:02:23:03 ठीक है थोड़ा थोड़ा सेंटर में आ जाइए बस। थोड़ा आपका सर भी कट रहा है। ठीक है। ठीक है। [गला साफ़ करने की आवाज़] अब ठीक आ रही है सबको आवाज इनकी। बोलिए जरा। ठीक आ रही है मुझे? तो ठीक आ रही है। चलिए तो आपने मुझे लग रहा है हमारे रीसेंट वीडियोस देखे होंगे। हां जिसके जिसके कारण आपने फैसला लिया कि आपको हमसे चर्चा करनी चाहिए। देखिए मैं तो इतना लायक नहीं हूं कि आपके साथ मैं चर्चा कर सकूं। मैं तो एक छोटा सा बालक हूं। लेकिन जो मेरे मन में जो जो आंसर देने की उत्तर देने की जो इच्छा जगी मैं बस उसी को ही व्यक्त करने के लिए यहां पर आया हूं और और मैं पहले ही ये बता देना चाहती हूं कि मैं यहां पर कोई तर्क या डिबेट करने के लिए मैं यहां पर नहीं आई हूं क्योंकि जो

00:03:40:14 आपका जो वीडियो है जो त है इसके मध्य कभी भी जो परम सत्य है उनको नहीं जाना जा सकता है। एक मिनट एक मिनट केवल मात्र महाजन ग अर्थात जो है उनको भी रुक गई है। हेलो हेलो आपको सुनाई दे रहा है मेरी आवाज? आपकी पिक्चर फ्रीज हो गई है। हां हां सुनाई दे ठीक है। आप मोबाइल मोबाइल को ऐसे रखें कि बार-बार हिले ना।

00:04:16:02 अच्छा अच्छा ठीक है। ठीक है। नहीं हां कोई नेटवर्क इशू होगा नेटवर्क। बार बार हिलाइए मत। उसको एक जगह रख दीजिए। अभी भी मूव कर रहा है। अच्छा रुकिए। ऐसे हम क्या बात? नहीं ऐसे बात नहीं कर सकते। नहीं ऐसे बात नहीं कर सकते। आप चेहरे के साथ ही बात करें। शिवश जी भीख सिंह पाली हां जी जय श्री राम।

00:05:08:16 अब ठीक है जो लोग हां ठीक है काम चल जाएगा अ हां देखिए आपने कहा कि भगवान को तर्क से नहीं जाना जा सकता है। अच्छी बात है। तो फिर तर्क देकर के दूसरे की मान्यता पर प्रहार भी ना करें। है ना? अब दूसरे को क्रॉस आ रही है। हां फिर बोलिए। मेरी आवाज आ रही है सबको? हां। हेलो आवाज आ रही है मेरी? हां बोलिए बोलिए।

00:05:47:27 मैं कह रहा हूं आपने जैसे कि कहा कि तर्क से भगवान को जाना नहीं जा सकता है। प्राप्त नहीं किया जा सकता है। ठीक है अच्छी बात है। महाभारत का श्लोक एक मिनट भाई साहब एक मिनट फिर तर्क से आप दूसरे की मान्यता के लिए तर्क प्रस्तुत मत करिए ना। हां आप दूसरे की मान्यता पर तर्क प्रस्तुत करके अपनी मान्यता को हावी करना चाहते हैं। और जब वह तर्क करता है तब आप कहते हैं कि तर्क करो ही मत। ये गलत है। है ना? नहीं। एक होता है प्रश्न और एक होता है तर्क। इन दोनों में अंतर है। क्या अंतर है और ये कहां लिखा है? मतलब प्रश्न का एक एक जो प्रश्न है उनके पीछे में मतलब उनके जो ये होता है मतलब हिंदी में उसकी म उन उनका जो रीजन होता है तो वो यदि जो जो ज्ञान है उसको लाभ करने के लिए यदि हम हम एक जिज्ञासा करते हैं तो वो बहुत अच्छी बात है। लेकिन जो मेरा जो मत है वही एकमात्र सही मत

00:07:03:03 है और और जो बाकी जो जो आचार्य लोग है वो सब गलत है तो ऐसा जो जो चीज है ये होता है तर्क और और इसलिए ही कहा गया है ये कहां लिखना है ये कहां लिखा है ये तर्क है वो जो महाभारत का जो यह तर्क की जो परिभाषा आपने दी है यह कहां नाना मुनी नाना

00:07:39:20 मैं अभी अभी बोल रही हूं आपकी आवाज बार-बार फ्रीज हो रही है। आपकी पिक्चर बार-बार फ्रीज हो रही है। इसको थोड़ा फिक्स करिए आप प्लीज। और तब तक थोड़ा सा कोई अगर जुड़ना चाहता है [गहरी सांस लेने की आवाज़] तो वह जुड़ सकता है। हां जो महाभारत का जो वन पर्व में हम महाभारत का जो वन पर्व है उसमें कहा गया है कि जो ये जो श्रुति है तो इसमें बहुत सारे भेद है लेकिन इस भेद को जो अपने दृष्टिकोण से जो देखना चाहता है तो वही तर्क है। महाभारत के वन पर्व का यह श्लोक है। युधिष्ठिर महाराज यहां पर कह रहे हैं विदुर जी को। अरे भाई मैं प्रश्न ये कर रहा हूं अपने दृष्टिकोण से देखना सिद्ध कैसे होगा सामने वाले? आपको मेरी बात सुनाई दे रही है क्या? ऐसा नहीं। मेरी बात आपको सुनाई दे रही है क्या? सुनाई दे रही है। बोलिए प्रभुपाद जी ने प्रभुपाद जी ने अपनी बुक में अपने जो गुरुजन है उनके अलावा कौन-कौन से संप्रदाय

00:08:54:28 को यह मान लिया है। क्या किसी भी गुरुजन या किसी भी आचार्य को उन्होंने ऐसा कहा है कि वो वो भी सही बात बता रहे हैं। प्योर पूरी शंकराचार्य के लिए तो उन्होंने लिख दिया कि वो तो मायावादी हैं। और उनको नहीं सुनना चाहिए। ये क्या है? बहुत सारे जो इस के गीता बोलिए या जो मैंने क्या मैंने भाई साहब मैंने प्रश्न ये किया है भाई साहब भाई साहब अपना इंटरनेट सही कर लीजिए आप अपना इंटरनेट सही कर लीजिए आप इस तरह से बात नहीं हो पाएगी क्योंकि मुझे लगता है मेरी आवाज आप तक पहुंच नहीं रही है। आप अपनीप बोलते जाते हो आगे बढ़ जाते हो। मैंने आपसे एक प्रश्न यह किया है कि प्रभुपाद जी ने अगर आचार्य आचार्य को गलत नहीं कहना है तो उन्होंने शंकराचार्य को गलत क्यों कहा? दूसरी बात इस पर एक प्रश्न ये उठ सकता है कि पहले जो दूसरा व्यक्ति है जिसको हम आचार्य कह करके प्रश्न ना करने प्रश्न करने पर आपत्ति जता रहे उसका आचार्यत्व सिद्ध करो। तो आचार्यत्व सिद्ध करने के लिए उसको धर्म का बोध कराने वाला सिद्ध करना होगा। ईश्वर का बोध कराने वाला सिद्ध करना होगा। और जब धर्म और ईश्वर का बोध कराने वाला उसको हम सिद्ध करेंगे। जब धर्म और ईश्वर का बोध कराने वाला सिद्ध

00:10:10:09 करेंगे तो वहां पर वही बात आ जाएगी कि जो हमारी मान्यता है धर्म और ईश्वर के संबंध में वही सही है और दूसरे की मान्यता को हम काटेंगे। यही होगा ना? अंततवा दूसरी बात दूसरी बात। दूसरी बात ये है। देखिए मेरी बात सुन लीजिए। पूरा कर लेने दीजिए। अंतत गत्वा बात यह है कि जब मैं प्रश्न कर रहा हूं तो आप यह आक्षेप लगाने वाले नहीं हो सकते हैं कि मैं प्रश्न जो है जो है क्या कहते हैं तर्क कर रहा हूं या दूसरे को हराने के लिए कर रहा हूं वहां पर यह भी हो सकता है कि मैं वास्तविकता में मेरे अंदर से वो प्रश्न उठ रहा होगा जैसे अर्जुन के मन से उठा था प्रश्न जैसे अथातो धर्म जिज्ञासा अथातो अथातो ब्रह्म जिज्ञासा सुन लीजिए पूरा सुन लीजिए तो हमारा जो हमारा जो धर्म है हमारा जो वैदिक वांगमय है वह प्रश्न करने के लिए ही कहता है। ठीक है? एक मिनट भाई साहब बीच में प्लीज तो प्रश्न करने के लिए ही कहता है और प्रश्न जो होता है प्रश्न करने के लिए कहता है। बस वो यह कहता है कि मरदित होकर के करें। सत्य की खोज करने के लिए करें। अपना दबदबा बनाने के लिए सामने वाले को नीचा दिखाने

00:11:25:18 के लिए ना करें। अब यह जो बात है अपना दबदबा बनाना और सामने वाले को नीचा दिखाना इस मामले में एक मिनट भाई साहब अब यह जो बात है अपना दबदबा बनाना सामने वाले को नीचा दिखाना प्रश्न करने के पीछे मेरा क्या भाव है यह सामने वाला पता नहीं लगा सकता है वह बात और है कि उसके उसके पास अधिकार है कि वह प्रश्न का उत्तर देना चाहता है कि नहीं देना चाहता है देने पर क्या असर होगा यह जनता देखेगी ना देने पर क्या होगा यह भी जनता देखेगी| वो बात एक अलग है। पर वह यह क्लेम नहीं कर सकता है कि मैं इसलिए ऐसा कर रहा हूं। यह क्लेम कौन कर सकता है? भगवान। क्योंकि वो अंतर्यामी है। वो मेरे हृदय में जानते हैं कि मैं क्या सोच रहा हूं। ठीक है? तो यह जो लाइन है ना कि प्रश्न जो है सामने वाले को नीचा दिखाने के लिए नहीं होगा तो वह तर्क है तो वह प्रश्न है और यदि सामने वाले को नीचा दिखाने के लिए होगा तो वो तर्क है जो आपने लाइन कही है ये लाइन भगवान के लिए है जो ये पता लगाएंगे कि अगर मैंने तर्क किया है तो मेरे साथ क्या होना है एक एक मिनट भाई साहब और मैंने प्रश्न किया है तो मेरे साथ क्या होना है दूसरी बात यह है आचार्य यास्क भी प्रमाण और युक्ति के आधार पर निरुक्त का अर्थ करते

00:12:40:21 हैं। और यह भी एक तर्क है कि प्रमाण आप शास्त्र से क्यों दे रहे हो? यह तर्क है। इसमें लॉजिक है कि मैं शास्त्र से अपनी बात बता रहा हूं। यह भी अपने आप में एक लॉजिक है। शास्त्र से ही क्यों बता रहे? तो यह लॉजिक है तो प्रमाण और युक्ति के परस्पर सामंजस्य से चला जाता है और यह वाली जो बात है यह बात है जब आपके जो तर्क है वह निराधार होते हैं और आप जो है सभा की जो मर्यादा है उसको भंग करते हुए करते हैं उन विषयों के लिए है और यदि ऐसा होगा भी तब जो निराधार तर्क कर रहा होगा उसको भी नेस्तोनाबूत तो किया ही जाएगा ऐसा नहीं है कि उसको छोड़ दिया जाए यदि कोई नास्तिक आ जाए। चलो ठीक है। हम और आप शास्त्र को मानते हैं। ठीक है? इसलिए हम यह बात कर रहे हैं। नास्तिक आएगा तो क्या हम उसको भगवान की सिद्धि ना करें उसके समक्ष छोड़ दें।

00:13:35:03 वो तो साक्ष को नहीं मानता है। नहीं छोड़ेंगे तो उसको तो तर्क के जवाब देने पड़ेंगे ना। इसलिए तर्क को सर्वदा के लिए नहीं छोड़ देना है। ये धर्म में परायण लोगों की बात है कि हम लोगों को ऐसी प्रैक्टिसिंग करनी चाहिए। यह स्वाता सुखाय के लिए है। सामने वाला मुझे रोक नहीं सकता तर्क तार्किक प्रश्न करने से। यह भगवान हमको दंड देंगे। यदि मैंने द्वेष पूर्ण तर्क किया होगा तो। समझ रहे हैं? ठीक है ना? अच्छा

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→ Used in: B · Video महादेव से किस बात की शत्रुता है #iskcon at 0:03 ↗

00:14:02:28 अब थोड़ा सा मूल विषयों पे आ जाते हैं कि इस कौन शिव जी को भगवान क्यों नहीं मानता है? मतलब अच्छा अच्छा। अब मैं इसको क्लियर कर दूं कि शिवजी को भगवान नहीं मानता है और दूसरी तरफ कृष्ण और क्राइस्ट को कृष्ण यहोवा को कृष्ण और अल्लाह को एक करता है और शिव जी को भगवान नहीं मानता है। तो सबसे पहले तो इस संबंध में एक युक्ति दी जाती है। जिस प्रकार दूध से दही बनता है उसी प्रकार जिस प्रकार दूध से दही बन सकता है पर दही से दूध नहीं उसी प्रकार क्या कहते हैं? शिव श्री कृष्ण से शिव तो बन सकते हैं मगर शिव जी से वापस कृष्ण नहीं बन सकते। तो क्या यह युक्ति आपको सही लगती है? अच्छा अब मैं बोल रहा हूं। तो यह जो श्लोक है यह ब्रह्म संगीिता का श्लोक और इसका जो तात्पर्य है वो हमारे महान आचार्य श्री विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर जो जो गौ परंपरा के एक एक महान आचार्य हुए आज से लगभग 400 साल पहले तो उन्होंने इन इस श्लोक का तो तब तो इस वगैरह कोई नहीं था। तो उन्होंने इस श्लोक का जो सार्थ दर्शनी जो टीका हुआ है मतलब

00:15:18:07 उन्होंने जो अभी लिखा है उन श्लोक में उन्होंने इस श्लोक का बहुत बड़ा करके इनका जो व्याख्यान किया है और और अक्सर हम लोग जो जो मतलब कि ये श्लोक का जैसा अर्थ हम समझते हैं वैसा उन टीिका में नहीं लिखा हुआ

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00:15:37:20 है। तो वहां पर क्या मतलब वहां पर क्या क्या मतलब वहां पर क्या लिखा हुआ है वहां पर लिखा हुआ है कि जो भगवान जो महाविष्णु है उन महा विष्णु जब कारणोदक शाही मतलब जो जो कारण समुद्र में जब टीका ना सार्थ दर्शनी विश्वनाथ पाद जी का है ना? हां हां भगवत गीता नहीं नहीं भगवत गीता के नहीं ब्रह्म संगीता के अरे भगवत गीता के भाष्य में इस श्लोक का सही अर्थ बताया ना उन्होंने नहीं नहीं ऐसा कहां पर नहीं जो हमारे ये आपने बोला विश्वनाथ पाद जी ने सार्थ दर्शनी टीका में सार्थ दर्शनी किसकी टीका है दर्शनी उन्होंने मतलब की लिखा हुआ है लेकिन मैं मैं बोल रहा हूं कि जो लोगों भाई साहब मैं पूछ रहा हूं सार्थनी एक मिनट सार्थ दर्शनी सार्थ दर्शनी किसका किस पर कमेंट्री की है

00:16:52:24 उन्हें कौन से ग्रंथ पर कमेंट्री है वो गीता के भाष्य तो ये विश्वनाथ पाद जी का गीता भाष्य है सार्थ वर्ष इसका नाम सार्थ दर्शनी नहीं है वर्ष है नहीं मैं इनका नहीं जो सॉरी सॉरी गलती हुआ है एक मिनट एक मिनट ये विश्वनाथ पाद जी का ही टीका है उसका हिंदी अनुवाद फिर किया गया है अब आप बताइए हां तो यहां पर मतलब जो ब्रह्म संिता का टीका है मैं उनके ऊपर बात बोल रहा हूं सारदनी या मुझे नाम सटीक नहीं हो रहा है लेकिन वो जो ब्रह्म संहिता के ऊपर उन्होंने जो जो टीका दिया हुआ है वो आप गूगल करके आप आप अभी आप निकाल सकते हैं और जो वो है लघु क्या डालू गूगल में जो कहता है हां वही हां हां मैं बोल रहा हूं जो अच्छा श्री विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर है सॉरी मैं बांग्ला में बोल रहा हूं तो ब्रह्मा संिता टीका आप आप आप डाल दीजिए गौरिया

00:18:08:02 मठ या कोई भी आप जो गौरिया मठ का जो टीका है ना वहां पर उनका जो लिखा है वहां पर ये ये हुआ है कि पब्लिश किया गया है गौ मठ का जो टीका है आप आप निकालिए ब्रह्म संगीिता के ऊपर मैं वहां से ही बोल रही हूं ब्रह्म संगीिता हां और वो जो श्लोक है उन श्लोक आपको आप निकालिए उसके बाद मैं बोल रही हूं। एक मिनट गोिया मठ आपने लिखा है? एक मिनट हां ठीक है। सिद्धांत सरस्वती का टीका है इंग्लिश में इनका। हिंदी में मतलब हां आप अपनी बात आप अपनी बात बताइए। हां तो वहां पर जो लिखा हुआ है और और इसके साथ लघु भागवतम जो जो ग्रंथ है लघु भागवतम वहां पर भी ये लिखा हुआ है कि जब जब महा विष्णु मतलब वो जो कारण विष्णु है वो जब इस इस ज ब्रह्मांड की सृष्टि की इच्छा प्रकट करते हैं तब

00:19:24:02 उनके उनके बाम अंग से शिव जी और और दाहिने अंग से ब्रह्मा जी प्रकट होते हैं। ऐसा वहां पर कहा गया है और एक स्थान पर यह भी कहा गया है उसी टीका में यह भी कहा गया है कि जब भगवान महा विष्णु जो महातत्व है अर्थात इस समग्र जगत की जो जो जननी है मतलब कि महामाया दुर्गा देवी उनके ऊपर जब दृष्टि डालते हैं मतलब वो ऐसा नहीं कि वो देवी है और उनको जस्ट इशन कर रहे हैं नहीं ऐसा नहीं मैं बोल रहा हूं कि महत्वत मतलब मतलब जो ये जो अष्ट आवरण के जो अधश्वरी है उनका जो लोक है तो उसको कहा जाता है वो महत्वत तो उनके तो उस उस महत्व के ऊपर जब महा विष्णु जब अवलोकन करता है मतलब कि इशन करता है ये वर्ड वहां पर एकजेक्टली लिखा है शत अर्थात इशन जब करता है तो वो जो इशन है मतलब उनका जो जो दृष्टि है भगवान का उस उस दृष्टिपात से ही ये जो ये जो लिंगो जो भूता वहां पर ये वर्ड है कि

00:20:39:06 ये जो वो जो दृष्टिपात है वो है लिंग के स्वरूप और और इसको भी शिव जी के स्वरूप माना गया है तो वो अर्थ क्या हुआ कि जो भगवान स्वयं अपनी जो बहिरंगा शक्ति है महामाया उनके साथ डायरेक्ट रिलेशन में कभी नहीं आता डायरेक्ट रिलेशन में जब आना होता है तब वो तब उनके जो दृष्टिपात है उनसे जो भगवान शिव जी का जो जो लिंग प्रकट होता है तो वही मतलब शिव जी के रूप में जो भगवान का जो दृष्टिपात है वही आ रहा है और जैसे भगवान के वाक्य में और भगवान में कोई अंतर नहीं मतलब की भगवान के दृष्टि में और भगवान में कोई अंतर नहीं मेरी बात सुनिए भाई भाई साहब आप खामखा ना बहुत ज्यादा एक्सप्लेनेशन कर रहे हैं। प्रश्न यह है कि क्या मैं वही उत्तर दे रहा हूं। नहीं उत्तर आप खामखा एक्सटेंडेड चीज है। एक्सटेंडेड वर्जन मेरी बात सुन लीजिए। मेरा प्रश्न सटीकता से समझिए थोड़ा कि विष्णु और शिव में अंतर है। कृष्ण भगवान में मैं सीधे कृष्ण की बात कर रहा हूं। अभी महा विष्णु भी छोड़ दीजिए।

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00:21:54:21 अच्छा कृष्ण भगवान कृष्ण भगवान में और शिव जी में अंतर है और अंतर कैसे बताया जा रहा है कि कृष्ण भगवान तो शिव बन सकते हैं और शिव जी जो है कृष्ण नहीं बन सकते। अब आप मुझे बता दीजिए शिव जी कृष्ण बन सकते हैं एज इट इज जो वाकई में कृष्ण है परम तत्व कि नहीं बन सकते? बस ये बताइए

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00:22:15:20 ये वैसा नहीं है। देखिए इस प्रश्न का उत्तर देने के पहले हमें थोड़ा सा कॉन्टेक्स्ट एक थोड़ा सा तो समझना पड़ेगा क्योंकि यहां पर ऐसा नहीं है कि मेरी बात समझिए मैं एक एक मिनट मैं एक चीज क्लियर कर दूं। कोई नहीं करना। एक एक मिनट एक मिनट भाई साहब कॉन्टेक्स्ट की आवश्यकता तब होती है जब हमें यह मालूम होता है कि हम क्या जानने निकले हैं। एक हेडलाइन तो आप पहले हेडलाइन को क्लियर कर दीजिए। फिर उस हेडलाइन पे अगर मुझे आपत्ति होगी या मुझे कॉन्टेक्स्ट चाहिए होगा ये कैसे वो कैसे तो आप कॉन्टेक्स्ट समझा दीजिए। मुझे आपकी हेडलाइन तो क्लियर करिए कि शिवजी और कृष्ण में भेद है कि नहीं और अगर भेद है तो क्या यही भेद है कि शिवजी जो है कृष्ण नहीं बन सकते। बस ये क्लियर करिए फिर श्री कृष्ण की गुणवतारजी है श्री कृष्ण की ही गुण अवतार अवतार और और अवतारी में जैसा भेद होता है वैसा ही भेद है और और जैसा अभेद होता है वैसा ही अभेद भी है यही तो मैं पूछ रहा हूं बन सकते हैं कि नहीं कौन कौन क्या बन सकते हैं बन सकते हैं कि नहीं

00:23:24:26 कृष्ण

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00:23:25:10 भी शिव जी नहीं बन सकते ठीक है और शिव जी भी कभी कृष्ण नहीं बन सकते यही हां यही यही यही तो सिद्धांत है आप मतलब जो प्रचार है तो जो दूध वाला एग्जांपल है वो तो कैंसिल हो गया मैं बोल रहा हूं तो हां तो आप देखिए वहां पर क्या कहा गया है खीरंग यथा ददी विकार विशेष मतलब जैसे कि दूध के साथ आप आप अम्ल का जोड़ दें तो वो एक जो दही में रूपांतरित हो जाता है लेकिन लेकिन भगवान में क्या विकार आ सकता है? क्या कृष्णा में क्या कोई माया का कोई विकार आ गया और वो शिव जी बन गए। ऐसा कभी हो सकता है क्या? अब बोलिए ऐसा कभी हो सकता है इसीलिए तो इसीलिए तो व्यवहार की सारी घटनाएं माया मात्र है। प्रपंच मात्र है और क्यों है द्वैत?

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00:24:21:15 वो बात अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा हां तो भगवान की जो माया है तो वो इतना पार तो वो इतना मतलब कि है ऐसा होता है सुन लीजिए अच्छा आप सुन लीजिए ऐसा होता है कि जो भी कुछ चीजें हो रही हैं संसार में घटित वो जब हम ईश्वर से जोड़ेंगे तो वो वो जब ईश्वर से जोड़ेंगे तो ये सारी चीजें आने लगेंग ऐसा हो सकता है क्या ऐसा भला हो सकता है क्या ऐसा भला हो सकता है क्या? तब अंत में सारी फिलोसफीस के बाद हमें लाना पड़ता है अद्वैत कि भाई वास्तविकता में कुछ हो ही नहीं रहा है। इसलिए कोई भी दोष ईश्वर पर लग ही नहीं सकता। समझ रहे हो? जैसे कि ईश्वर को सृष्टि एक एक मिनट। ईश्वर को सृष्टि बनाने की आवश्यकता क्या है? अभाव था क्या कोई ईश्वर को? ऐसा हो सकता है क्या कि उसको अभाव हो जाए? तो इस तरीके से जितने भी कुछ भी करने जाओगे वह जब ईश्वर से आप लगाओगे क्योंकि ईश्वर है सच्चिदानंद पूर्ण तो जब वो ईश्वर से आप कनेक्ट करोगे तो वहां लॉजिकल चीजें आने लग जाएंगी। ऐसा हो सकता है क्या? ऐसा हो सकता है क्या?

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00:25:28:28 इसीलिए ईश्वर को सच्चिदानंद सर्वशक्तिमान सर्व नियंता सर्वाधार सिद्ध करने के लिए फिर यह मानना पड़ेगा कि भाई यह जो संसार है जितना भी व्यवहार जगत है यह माया मात्र है। यह बात होती है। खैर अब ये आपने मेरे से पूछा था तो मैंने अपनी चीजें बता दी। अब मैं वापस उस पर आता हूं जो विशेष मुद्दा चल रहा है वो

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00:25:52:28 ये चल रहा है। अब इसमें तीन चीजें हो गई। एक तो कि जो लोग आपके यहां के जो रिप्रेजेंटेटिव हैं ऑथेंटिक वो शिव जी में और कृष्ण जी में भेद करते समय स्पष्ट बोलते हुए मिल जाएंगे। कईयों के बहुत मुझे पता है। पता है। एक मिनट भाई साहब एक मिनट। थोड़ा सा प्रयास करें। मतलब जैसे अगर मैं कोई धारा में कोई बात बोल रहा हूं और बहुत फ्लुएंटली बोल रहा हूं। मैं आपकी तरह रुक रुक के अटक अटक के नहीं बोल रहा हूं और टू द पॉइंट बात कर रहा हूं। तो थोड़ा प्रयास करें कि बीच-बीच में एक इंटरप्ट ना करें। वैसे ये ह्यूमन नेचर होता है कि हमें कोई बात ठीक नहीं लग रही है या फिर ठीक लग रही तो हम अपना रिएक्शन दे देते हैं। तो अगर होगा तो कोई बात नहीं है। मगर प्रयास करें कि ना हो। उससे क्या होता है कि वो भंग हो जाता है ध्यान जो बोलना होता है। खैर चलिए आगे चलते हैं। तो क्या है? कहां पर था? बुलवा दिया।

00:26:53:15 क्या चल रहा था? क्या बोल रहा था मैं? कुछ तो नहीं चल रहा है क्योंकि सब तो माया ही है। देखिए अगर आप कटाक्ष के उद्देश्य से आए तो कटाक्ष मेरे पास डलिया भर के है। मैं इतने कटाक्ष सुनाऊंगा आपको मैं इतने कटाक्ष सुनाऊंगा आपको आप खून के आंसू रोओगे। आपको ये भावनाएं तक आ सकती है कि मैं आत्महत्या कर लूंगा। अभी के अभी तो कटाक्ष के बारे में मत सोचिए। मैं फ्रेंडली आपसे बात करने के लिए बैठा हूं। फ्रेंडली बात करिए। टू द पॉइंट बात करिए। ठीक है? अगर आपने स्वीकार कर लिया कुछ नहीं चल रहा है तो आप जा सकते हैं फिर क्यों बैठे हुए हैं स्वीकार कर लिया ना कुछ नहीं चल रहा है हां तो फिर क्यों बैठे हुए हैं तो ये तो आप स्वीकार कर रहे हैं ना मैं तो आपसे स्वीकार आपने आपने स्वीकार कर लिया ना के सब वो कुछ नहीं चल रहा सब माया है स्वीकार कर लिया कि नहीं कर लिया कर लिया कि नहीं बोल लिया तो फिर आप ये जवाब क्यों दे रहे हो अपनी ओर से आप ये क्यों कह रहे हो कि कुछ नहीं चल रहा है आपने ये क्यों कहा कि कुछ नहीं चल रहा आप तो उसको काउंट करो आपको उसको नहीं आपने उसको लिया मैं कोई मैं कोई डिबेट के भावना से नहीं बोल रहा हूं तो आपने ये कटाक्ष क्यों किया सम्मान के मैडम आप है मैं पूछ रहा हूं कि

00:28:08:16 आप कटाक्ष क्यों किया ये ठीक है ठीक है आप बोलिए बोलिए यही तो बात है सम्मान रास नहीं आता है किसी को हां हां मैंने आपके पति सम्मान अच्छे भाव से तुम्हारे साथ बैठा हुआ हूं तो तुम कटाक्ष कर रहे हो यही यही होता है देने का फायदा ये कटाक्ष ही था भाई साहब अब फिर इस पर बहस होगी जब आपकी वो फिलोसफी आपको स्वीकार नहीं है आप क्यों बोल रहे हो कुछ नहीं चल रहा सब माया ही तो है ये मैं मैं द्वेष से नहीं कह रहा ये आपने जस्ट कहा इसलिए मैंने अपने मुंह से ये मतलब की निकल आया ठीक है अच्छा यदि आपके मन में हां यदि कोई दुख है तो इसके लिए माफी मांग लेते हो ठीक है ठीक है मैं माफी मांगते माफ़ मांग रहे हो माफी मांग रहे हो तो ये माफी मांग रहे हो तो यह मत कहो कि कटाक्ष नहीं था स्वीकार करो वो कटाक्ष ही था वो कटाक्ष था तब तुम माफी मांगो तब तो सही भी है अंधे में माफी क्यों मांगोगे अंधेरे में माफी क्यों मांगोगे भाई जब आपको यह लग ही नहीं रहा कि आपने कुछ गलत किया तो माफी क्यों मांगोगे नहीं नहीं जो आपके हृदय में यदि कोई दुख हुआ तो तो उसके लिए ही मैं

00:29:23:18 मांग रहा हूं वो कटा था ना अच्छा सुनिए चलिए हृदय में दुख अगर हम कोई सामने वाला गलत कर रहा होगा और हम कुछ करेंगे उसके अगेंस्ट तो उसके हृदय में दुख होगा कि नहीं होगा हां होगा तो हम क्या माफी मांगेंगे उससे जो पापी होगा उसका वध करते टाइम नहीं नहीं क्योंकि वो तो धर्म है ना हां तो फिर अगर हम सही बात कर रहे हैं सही राह पे चल रहे हैं और सामने वाले को दुख हो भी रहा है तो डजंट मैटर क्योंकि हम सत्य पे हैं तो दो तो आपको माफ़ी कब मांगनी है? जब हम गलत राह पे चल रहे हैं और सामने वाले को दुख दुख रहा है। तब माफ़ी मांगते हैं। [हंसी] ठीक है। ठीक है। हां। तो मैंने कहा तो फिर आप ये क्यों कह रहे हो कि ये क्यों कह रहे हो कि वो जो है कटाक्ष नहीं था। ये मत कहो कटाक्ष नहीं था। हां मेरी कोई द्वेष भावना नहीं है। मैं यही आपने कोई भावना नहीं है आपके प्रति द्वेष नहीं वो सम्मान की भावना के साथ साथ आपने अभी कटाक्ष किया है। आप अपनी अंतरात्मा से पूछिए क्यों किया है? अच्छा ठीक है। अच्छा अच्छा अच्छा ठीक है। नहीं सीधा ठीक है। अच्छा ठीक है। नहीं सीधा ठीक है। काम चलाने वाला ठीक है नहीं? हां

00:30:39:01 ठीक है। कटाक्षिया है। चलिए ठीक है ठीक है अभी आपको कुछ एक्सप्लेनेशन देनी है कटाक्ष पर नहीं नहीं आप आप बोलिए आप बोलिए नहीं कटाक्ष पे वो देनी है एक्सप्लेनेशन नहीं नहीं वो मुद्दे से आउट हो जाएगा नहीं मुद्दे से आउट नहीं आप उसको क्लियर करिए अब आपने गलती की है कि नहीं कटाक्ष करके नहीं नहीं आपने जो कह रहे थे थोड़े थोड़े से पहले तो मैंने बस उसको वो क्या सहमत किया आप जो आपने सहमत किया सहमत किया मेरे से आपने

00:31:24:14 आपकी दृष्टिकोण से मैंने सहमत किया क्यों क्यों किया इसकी आवश्यकता क्या थी क्या क्या क्योंकि मैं हमारे बीच में मैं इसके बाद जो जो मेरा वाला जो एक्सप्लेनेशन है मैं वो वो देने वाला हूं। इसलिए ही मैंने ये बोला था। ठीक है? कौन से कौन से एक्सप्लेनेशन? दो तरीके का एक्सप्लेनेशन है। एक है कि माया के विरोध में आपको एक्सप्लेनेशन करना है या फिर जो अपना मुद्दा चल रहा है दूर वाला उसका एक्सप्लेनेशन करना है। हां वो जो माया के विरोध में वही कहना है। माया का विरोध करना है। तो माया का विरोध करने के लिए आप यह कहेंगे कि आप जो बोल रहे हो माया मान रहे हो जगत को वो गलत कह रहे हो। या यह कहेंगे कि सब माया ही तो है। कुछ नहीं चल रहा था। जब मैं पूछ रहा हूं मैं क्या कह रहा था? आपने किस बात के लिए कहा है कि मैं क्या कह रहा था? आपने कहा कि कुछ नहीं चल रहा है। सब माया ही तो है। आप अगर माया का खंडन करने आ रहे हो तो आप यह कहोगे ये संसार माया नहीं है। अब मैं सिद्ध करूंगा। आपने जब मैं जब मैं आपने जब मैं ये बोल रहा हूं कि मैं क्या कह रहा था तो आपने कहा कुछ भी तो नहीं चल रहा। सब माया ही तो है। ये क्या था? क्या हूं? हूं ये

00:32:39:25 थोड़ा सा लड़ो ये थोड़ा सा टिप्पणी है। टिप्पणी हां टिप्पणी है काहे की टिप्पणी मतलब हां मेरा जो मतवाद है मतलब हां मेरा जो मत है उसके उसके जो बोलने के पहले जो पटभूमि होता है उन उसको ही मैं मतलब कि तैयार करना चाह रहा था। इसलिए ही मैंने ये बोला था। तो यह वाली बात पर क्यों बोल रहे हो कि क्या चल रहा है भाई जब अभी तक आपने संसार को माया माना नहीं है एक मिनट एक एक मिनट आपने मेरे पहली बात तो माया के संबंध में मेरे पूर्व पक्ष को अभी तक पूरा जाना ही नहीं है कि संसार माया होने के बावजूद भी उसमें कुछ होना ना होना यह मानते हैं नहीं मानते हैं मानते हैं तो क्यों मानते हैं नहीं मानते हैं तो क्यों नहीं मानते हैं जब उस पर मेरी पूरी एक्सप्लेन आपने सुनी नहीं। दूसरी बात यदि आपको सैद्धांतिक खंडन करना था तो आप सैद्धांतिक खंडन करते। ये जगत माया नहीं है। आपने मेरी एक चीज जो हमारे बीच में बातें हो रही है सब लोग देख रहे हैं। तो आप ये मेरा पक्ष एक मिनट भाई साहब आप मेरा पक्ष जानते नहीं है कि व्यवहार और परमार्थ

00:33:55:08 में क्या है? क्या नहीं है। ठीक है? फिर आपने मैं कुछ पूछ रहा हूं कि क्या बोल रहा था मैं और मैं उससे जस्ट पहले आपसे बताया बता रहा हूं कि आप बीच में बोलते तो मैं भूल जाता हूं। ठीक है आप प्रयास एक मिनट एक मिनट एक मिनट तो मैंने जब आपसे पूछा कि मैं क्या बोल रहा था आपने कहा कुछ भी नहीं चल रहा है सब माया ही तो है जबकि आप माया का खंडन करने भी नहीं बैठे थे आप बैठे थे दूध दही वाली एक्सप्लेनेशन के लिए वो मेन मुद्दा था और माया की बात तो तब आ गई जब आपने मुझसे कहा क्या ऐसा हो सकता है क्या तब मुझे आपको बताना पड़ा क्या कुछ भी कर्म करेंगे तो वो आक्षेप लग जाएगा ईश्वर पे इसलिए माया मानना पड़ता है कुछ भी हम करते हैं तो आक्षेप ईश्वर पर जाता है। इसलिए माया मानना पड़ता है संसार को। ईश्वर की सिद्धि के लिए ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध करने के लिए ईश्वर की जीव ईश्वर को जीव की चाह का वास्तविक विषय सिद्ध करने के लिए नास्तिकों का मुंह बंद करने के लिए माया के अस्तित्व को स्वीकार करना पड़ेगा। और वही अद्वैत है। ये अंत में ये हमारी बात दूसरी है। बाद की बात है। ठीक है? अब जब मैं आ रहा था वापस अपने टॉपिक पर तो आपने एक छोटा सा एक कटाक्ष किया हंसते हुए कि भाई यह कटाक्ष आपने किया क्या बोल रहे थे

00:35:10:09 आप कुछ भी तो नहीं बोल सब माया ही तो है तो इसका ना तो कोई पूर्व पक्ष से मतलब है क्या कर रहे थे एक मिनट भाई साहब इसका ना तो पूर्व पक्ष से कोई मतलब है कि आप मेरा पूर्व पक्ष रख रहे हैं। पूर्व पक्ष रख रहे होते तो आप ये कहते कि आपने कहा कि संसार माया मात्र है। अब मैं इसका खंडन कर रहा हूं। आप पर्टिकुलर व्यक्तिगत मेरी किसी कार्य विधि को बोल रहे हैं कि अरे सम माया ही तो है। यह कटाक्ष है। अब बोलिए। हां मैं बोल तो मेरे जो ये जो आचरण है तो ये मैंने इसलिए किया कि कि मुझे एक आचार्य का याद आ गया और उन्होंने ऐसा ही किया था तो इसलिए ही मैं उनका ही पुन किया उन्होंने उन्होंने सुनो उन्होंने किसी पर कटाक्ष किया होगा ना उन्होंने किसी पर कटाक्ष किया होगा

00:36:06:09 उन्होंने किसी उन्होंने उन्होंने किसी उन्होंने किसी के बारे में विनोद किया होगा, कटाक्ष किया होगा। ये कटाक्ष ही तो है। कटाक्ष किसे कहते हैं? बताइए। अब वो हां तो अब वो स्टोरी जरा सुन लीजिए। मैं एक मिनट में ही मैं अभी बोल रही हूं कि एक वन में एक बाग आ रहा था और और जो और अरे भैया जो आपकी फिलॉसफी को नहीं मानते हैं उनका हंसी उनकी हंसी उड़ा रहे थे ना इसके द्वारा। जो आपकी फिलोसफी को नहीं मानते हैं इस कहानी के द्वारा उनकी हंसी उड़ाते हो ना सीधी बात करो ना यार भय क्यों लगता है सच बोलने से आप भाग रहे हो नहीं नहीं आप सामने वाले को आपने नीचा प्रकाश से हां ये ज्ञानार्थक भागना होता है और चलो इसको कहते हैं ज्ञानार्थक भागना बैठे वहीं पर हो पर विषय छोड़ के कहीं और जा रहे हो इसको इसको कहते हैं ज्ञानार्थक भागना जैसे की जैसे की अर्जुन सुनिए और आप ये माया पर आपने कटाक्ष कटाक्ष आपने क्यों किया अच्छा माया पे क्यों आया आपने मुझसे पूछा था ना ऐसे क्या हो सकता है क्या

00:37:21:22 मैंने ये बोल रहा था कि भगवान में क्या विकार आ सकता है क्या मैं ये मैं उसका उत्तर दे रहा हूं ना मेरा क्या मानना है उस बारे में मैं बताऊंगा ना जब आप पूछोगे क्या या तो आप लिख दो जब मैं पूछू तो बताना मत भाई जब आप जब आप कुछ पूछोगे ऐसा हो सकता है क्या तो उस बारे में मेरे पास क्या एक्सप्लेनेशन है मेरे पास उस उत्तर क्या है वो मैं बताऊंगा वो मैंने बताया जब मैंने बताया तो आप गए और कटाक्ष और कटाक्ष सीरियस सीरियस मोड पे नहीं किया आपने हंसते हुए किया बत्तीसी दिखाते हुए वीडियो दिखाऊं आपका वीडियो दिखाऊं आपका मैं क्या बोल रहा हूं मैं क्या बोल रहा था हां मैं क्या बोल रहा था? ये प्रश्न क्या आप मुझे कर रहे थे कि मैं मैं अभी क्या बोल रहा था? ये प्रश्न क्या आप क्या मुझे कह रहे थे क्या? या आप अपने ही मन में मैं अगर मैं कह रहा हूं कि आपको अगर मैं एक जनरल तरीके से कह रहा हूं कि शायद कोई मेरी मदद कर दे। स्पेशली आपके लिए नहीं दर्शकों के लिए भी है। तो आपने वहां पर बोला कुछ भी तो नहीं चल रहा है। आपने हां अब आप आप

00:38:36:28 तो मुझे बोलने दीजिए प्लीज। हां आपने आपने आपने मुझे जैसे मतलब मुझको टारगेट कर कर नहीं जैसे बोल रहे थे वैसे मैं भी आपको टारगेट कर कर नहीं बोल रहा था। मैं यहां पर बैठे हूं और और मैं यहां पर ही मेरे मन में जो बात आया मैं मैं वही बोल रहा हूं वो बात मुझसे संबंधित नहीं थी वो बात वो बात मुझसे संबंधित थी कि नहीं और आपके उत्तर समाप्त हो गया है ये समझकर मैंने वो बोल रहा था और मैं यहीं से मेरा जो एक्सप्लेनेशन है वो मैं शुरू करना चाह रहा था तो आप ये बताइए तो आप माफी क्यों मांग रहे हैं चलिए हां मैं माफी मांग रहा हूं कि यदि आपके हृदय में थोड़ा सा भी दुख हो तो इसके लिए मैं मैं आपके चरणों में जब आपने कुछ जब आपने कुछ गलत किया नहीं तो माफी क्यों मांगोगे? दिखावा करोगे पाखंड करोगे। माफी होती है पश्चाताप पूर्वक। तो आपने तो कोई पाप नहीं किया। तो मैं क्यों मांग रहे हो? हां नहीं माफी हां मुझे बोलने दीजिए माफी दो केस

00:39:52:02 पे हम मांग सकते हैं कि आपने अधर्म किया है मतलब आपने कुछ गलत आपने कुछ काम कर दिया है और और इसके और इसके लिए मैं आपको कोई दुख दिया तो तो यहां पर मेरी माफी मांगने की कोई आपके पास भगवत गीता है गीता है ले आइए सामने दिखाइए। अच्छा हां है मेरे पास जो बंगाली वाला वो है। ठीक है। इस पर हाथ रख के कहिए कि मैंने आपकी बात के उत्तर में वो बात नहीं कही थी। मेरे मन में बस यूं ही भाव आ गया। वो बात आ गई याद। कुछ भी तो नहीं चल रहा। मेरे मुंह से निकल गई। रखिए। हां। यह मैं इस जो गीता को मैं हाथ रखकर मैं बोल रहा हूं कि मैं यह बात सिर्फ आपको उद्देश्य करके नहीं कहा था। ठीक है? अब तो विश्वास हुआ। अब तो विश्वास हुआ ना? विश्वास विश्वास नहीं हुआ है। विश्वास नहीं करता हूं तो ये जो भगवान है वो तो उन्होंने तो मुझको तो दंड देगा ही ना। हम तो ठीक है। ठीक है। कोई बात नहीं। ठीक है। विश्वास नहीं हुआ है। मगर

00:41:07:10 इस कारण से अब हम इस चर्चा को आगे बढ़ा सकते हैं। ठीक है? क्योंकि आपने जो है वो हाथ रख के कह दिया है। और ये ध्यान रखिए कि इस तरह की चीजें ना हो जो खामखा एक दूसरे वे पे चली जाए बात। है ना? और मैंने शुरू में भी यही कहा था। जब आपने आपके मुख से कटाक्ष निकला था ना तो आप शुरू में सबसे पहले ये कह सकते थे कि भाई मैंने आपको टारगेट करके नहीं कहा है। वो ऐसे मुझे कुछ याद आ गया। आपने कुछ कहा था तो उससे रिलेटेड मुझे याद आ गया तो मेरे मुख से निकल गया। वही बात खत्म हो जाती। आपने पहले कहा कि भाई मैं तो आपका पूर्व पक्ष रख रहा था। आपने कहा कि नहीं कहा? अब आप कह रहे हो कि आपको टारगेट करके नहीं रखा है। मैं तो आपकी बात के खंडन के लिए रख रहा था। हां नहीं मैं ऐसा कभी नहीं। मतलब कि मैं भी ऐसा करके या मैं ऐसा करके कुछ भी बोलूं। तो इसका मतलब यह नहीं है कि मैं कह रहा हूं। आपने आपने यह कहा था अभी थोड़ी देर पहले कि भाई मैं आपकी बात का खंडन करने के लिए वो प्लेस कर रहा था आपकी चीज को यानी यानी यानी कि मुझसे रिलेट करके ही बोला ना फिर वो भाई खंडन मेरा कर रहे हो किसका कर रहे हो वेट वेट आप मैंने ये समझ लिया कि आपका ये जो आपका

00:42:22:12 जो उत्तर वो समाप्त हो गया है और इसके बात मैं जो कह रहा था कि कि मेरे मन में जो याद आ रहा था मैं वही कहा था बस इसके आपने आपने भाई साहब ये थोड़ी देर पहले एक एक मिनट भाई साहब आपने थोड़ी देर पहले ये बोला है कि मैं एक तरीके से आपका पूर्व पक्ष प्लेस कर रहा था क्योंकि उसके बाद मुझे उसका खंडन करना था ये आपने बोला हां हां उसके बाद आपको उसका खंडन करना था हां मुझे वो मैं अभी एक्सप्लेन नहीं हां मैं अभी स्टार्ट नहीं किया किसका देना था एक्सप्लेनेशन किस बात का देना था मैं अभी एक्सप्लेनेशन स्टार्ट नहीं किया था ना मैं पूछ रहा हूं किसकी बात का एक्सप्लेनेशन देना था वो जो माया के बारे में वो माया का टॉपिक आया कहां से था आपने ही तो वो बोला था इसलिए इसका मतलब मेरा इसका मतलब मेरे लिए बोली गई थी ना वो लाइन फिर आपने जो बोला था तो उनको सुनकर मेरे मन में जो याद याद आया तो मैंने वो मतलब कि मेरे मुंह से निकल गया लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप सामने बैठे हो और और मैंने जो अभी आपने कहा कि

00:43:37:20 आपने मेरे लिए नहीं बोला यही कहा ना अब आपने आपके लिए नहीं कहा यहां पे कुछ भी नहीं है आप प्रभुपाद जी की जो एक्सप्लेनेशन है उसके लिए यहां बैठे हो मैं शंकराचार्य की जो एक्सप्लेनेशन उसके लिए यहां बैठा हूं। स्पेसिफिकली हमारे आपके बीच में कुछ भी नहीं है। हां आप वो जो है ना वो जो बात मैंने कही है कि क्या बोल रहा था मैं क्या कह रहा था मैं उस पर अगर आप डायरेक्ट उस पर आप अगर डायरेक्ट ये कहेंगे कि भैया कुछ भी तो नहीं हो रहा है। माया मात्र तो जरूर वो स्पेसिफिकली आपने मेरी किसी चीज को पकड़ के बात कही। ठीक है? वो एक मानी जाएगी। मगर अभी मैं एक बात कह रहा हूं। आपने कहा कि मैं मैंने एक बात कही माया के ऊपर। आपने कहा कि मैं आपकी बात यूं ही निकल गई और उस पर मैं एक्सप्लेनेशन देने वाला था। ठीक है? और वो बात आई कहां से थी? मेरे द्वारा आई। अब आप कह रहे हो वो वो वो हां तो वो जो है अब आप ये कह रहे हो वो एक्सप्लेनेशन मेरी बात का मेरी बात का काउंटर नहीं था। वो नहीं नहीं था। नहीं था। एकदम नहीं था।

00:44:47:15 एक एक मनुष्य का एक एक भावना होता है। तो मैं अपनी भावना को अपने ही अब आप आप उसको एक्सप्लेन मत करिए। आगे चलिए आप उसको एक्सप्लेन मत करिए। ठीक है? हां। ठीक है। तो मैं ये कह

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00:45:01:20 रहा था कि इस के कई सारे प्रामाणिक रिप्रेजेंटेटिव ऐसे हैं जो यह जो श्लोक है दूध दही वाला इसकी हिंदी करते हुए यही बोलते हैं कि शिव और कृष्ण में वैसा ही भेद है जैसा कि दूध और दही में दूध तो दही बन सकता है पर दही दूध नहीं बन

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00:45:17:13 सकता। तो सबसे पहले आप जब यह कह रहे हैं कि इसका वो मीनिंग नहीं है जो प्रचलित है जो माना जाता है। सबसे पहले आप उन सारे रिप्रेजेंटेटिव को गलत कह रहे हैं। वो ये गलत कहते हैं। अच्छा ठीक है। आप बोलिए। हां। मैं उसके बाद मैं पूछ रहा हूं आपसे। पूछ रहा हूं आपसे। हम बोलिए। वो गलत कहते हैं। तो देखिए जब सिद्धांत जब जब वो जब सही होगा तो तो सबको ही वो सही लगेगा। लेकिन जब वो सही नहीं मतलब कि सही ढंग से वो वो प्रचार नहीं किया जाएगा तो तो इसका जो जो गलत अर्थ वो मतलब कि थोड़ा सा जो गलत अर्थ वो वो समझ जा सकता ही है। मतलब ये बात

00:46:05:27 सही बोल रहे हैं। हां सही बोल रहे हैं लेकिन सही एक्सप्लेनेशन नहीं है। मतलब कि जो एक्सप्लेनेशन देना चाहिए वैसा एक्सप्लेनेशन नहीं हो रहा है। मैं यही बोलना चाहता हूं। तो वो लोग वहां पर एक्सप्लेनेशन देने के लिए बैठे हैं ना। हां हां लेकिन देखिए ये भी तो एक मिनट भाई साहब नहीं तो आप ये कहिए जो ऐसा बोल रहे हैं जो प्रचलित है जिनके वीडियोस में वो लोग गलत है। ये कहिए आपने कहीं सही जगह सीख लिया। ना एक बात देखिए कि आम का रंग एक जो पीला होता है लेकिन ऐसा नहीं है कि कि आम का रंग हर समय ही वो हम जो पीला रहे हैं और और उसके मतलब उसके जो रीजन है वो अलग-अलग हो सकता है कि कि आम बहुत पक गए हैं या या जो क्लोरोफिल वाला सॉरी सॉरी क्लोरोफिल जो जो फ्रूट के छिलके के जो जो पिगमेंटेशन जो फैक्टर है उनके कारण भी हो सकता है तो ये तो वाक्य तो सही है लेकिन इनका जो एक्सप्लेनेशन वो

00:47:20:28 थोड़ा सा वाक्य तो भाई साहब वाक्य तो हमें ग्रंथ से मिल जा रहा है ना अभी बात कर रहा हूं इस वाक्य का अर्थ जो लोग बताते हैं कि भैया शिव और शिव और कृष्ण में वही भेद है जो दूध और दही में भेद है क्योंकि दूध तो दही बन सकता दही दूध नहीं बन सकता वाक्यता का है अच्छा हां ब्रह्म संिता में वाक्य ब्रह्म सम्यता का है ददी वो वाला ठीक है ठीक है अब अब आपने कहा वाक्य तो सही है तो वाक्य सही वाली बात तो ले रहा हूं मैं ठीक है अब उसके बाद एक्सप्लेनेशन देते हैं आपके ऑथेंटिक रिप्रेजेंटेटिव ठीक है वो यह कहते हैं कि इसका अर्थ यह है कि जिस प्रकार दूध से दही नहीं बन सकता। दही से दूध नहीं। उसी प्रकार शिव जी कृष्ण तो शिव बन सकते पर शिव जी कृष्ण नहीं बन सकते।

00:48:39:27 ऐसी सूचना प्राप्त हो रही है कि भाई जो इस का बोबड़ा गुंडा है उसका कहना है कि हमने आवाहन को कई बार जो है सामने सामने वार्ता के लिए बुलाया है और वो वो आया नहीं भाई तूने अपना कोई सूचना संपर्क सूत्र इत्यादि क्या छोड़ा था जब बुलाया था हमने तो छोड़ा हुआ है तू फोन कर अपने लोगों के द्वारा तू नहीं कर सकता तू अगर गूंगा बह रहा है कुछ है तो भैया किसी से करवा फोन क्यों नहीं करवाया अब तो खैर तूने ऐसी कोई कसर छोड़ी नहीं है जो तेरे तेरी शक्ल मनुष्य शक्ल को देखा जाए मगर फिर भी अगर तुझे ऐसा ही था तो हमने तो अपना नंबर सार्वजनिक कर रखा है ना सीधे बात करो और चर्चा फिक्स करो। मगर नहीं अपने लोगों को उल्लू बनाना है कि हमने बड़ा बुलाया बार-बार वो आया नहीं। हम लोगों के यहां घर में घुस घुस कर जा के उनका उनके मुंह पर टेप लगा के आ रहे हैं। बोबड़े का बोबड़े से हम बचते घूमेंगे। ह

00:49:43:18 यही रह गया है। बस अब यही दिन देखना बाकी रह गया था शिवश नारायण द्विवेदी को। [हंसी] कि वो बोबड़े से डर डर के भाग रहे हैं। शिवाश नारायण द्विवेदी। कहां गए भाई साहब? ये सज्जन व्यक्ति लग रहे थे। वो इनसे हो गया। नेचर वो होता है ना एक जो स्वरूप भूत लक्षण तो इनके यहां पर एक स्वरूप भूत लक्षण है शंकर परंपरा वालों के विरोध में उनको मायावादी कह कह करके और जो है ये ये जो हंसी है हीन हीन भावना है कटाक्ष है सब भरे हुए हैं तो वो स्वरूप भूत लक्षण निकलेगा बाहर जिसके बिना ये जी नहीं सकते वो आ गया था बाहर विचारों का हैं सज्जन मगर वो उसमें पिरो दिया गया इंजेक्ट कर दिया गया है इसलिए लिए अब वो बेचारे पहले बोल रहे हैं कि मैंने आपका पूर्व पक्ष प्लेस किया था और हंसते हुए किया था। दांत दिखाते हुए किया था। हां।

00:50:42:28 इसीलिए कहते हैं मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं टक्कर में। सर्वशक्तिमान धर्म। अनिकेत जी आप जुड़ सकते हैं। शास्त्रवाद जी भी जुड़ सकते हैं। लिंक मैंने सेंड किया हुआ है। तो

00:51:18:15 [संगीत][घंटी की आवाज़] [खांसने की आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़] तो आप देख सकते हैं किस तरीके से व्यक्ति एक अच्छे से चलती हुई यही यही कुछ दिन पहले जो है एक व्यक्ति आया था आर्य समाज की ओर से उसने भी यही किया था जब हम अच्छे से बात करना चाहते हैं सामने वाले से तो व्यक्ति कटाक्ष में आता है और कटाक्ष सामने वाले को हीन दिखाना हंसी उड़ाना यह सब इस बात का द्योतक होता है कि उसका जो सैद्धांतिक पक्ष है ना वो कहीं ना कहीं कमजोर है जिस कारण से उसे सैद्धांतिक चर्चा के बीच में ये सब करना पड़ रहा है

00:52:12:07 [खांसने की आवाज़] तो [गला साफ़ करने की आवाज़] भाई मैंने मैंने मैंने जो है लिंक प्रोवाइड करा दिया है। अनिकेत जी आ गए हैं। जय श्री राम। अनिकेत जी जय श्री राम। जय श्री राम। तो जो है ये व्यक्ति क्या हुआ? कहां जाने गए भैया? पता नहीं क्या हुआ। आपके पीछे बहुत शोर आ रहा है।

00:53:18:12 [गला साफ़ करने की आवाज़] यहां पे भी लिंक दे दीजिए। किसी को आना हो चेहरे के साथ तो वो आ सकता है। जय श्री राम। सैद्धांतिक मतभेद के निमित्त यदि चर्चा करनी है तो आप फॉर्म भर के आएंगे। अभी सैद्धांतिक मतभेद के निमित्त चर्चा केवल उनसे हो रही है जिनका नाम है क्या कहते हैं जिनका नाम है अभी जो आए थे ना तथागत जी केवल उनके साथ सैद्धांतिक मतभेद होगा। तथागत जी वापस आ गए।

00:53:55:13 हां जय श्री राम सासवाद जी। हरे कृष्णा। तो मेरे जो नेटवर्क थे वो थोड़ा सा गड़बड़ रही तो इसलिए आप आप एक जगह स्थाई होकर बात करें। जय श्री राम। एक जगह बैठ के बात करिए आप। हां। ठीक है। हम अब आप बता दीजिए कि ठीक है। भैया अपना कैमरा ऑन कर लीजिएगा जिसको भी स्टेज पर आना है। हां अब

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00:54:31:10 आप बताइए कि जो ऑथेंटिक लोग हैं वो श्लोक का जो अर्थ दे रहे हैं कि इस श्लोक का यही अर्थ है कि शिव कृष्ण तो शिव बन सकते हैं पर शिव जी कृष्ण नहीं बन सकते। यही ये अर्थ सही है या अर्थ गलत है?

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00:54:46:26 हम यह तो सही है। यानी वो ऑथेंटिक जो लीडर्स है वो सही बोल रहे हैं। सही एक्सप्लेनेशन है। हां सही। हां सही। अभी थोड़ी देर अभी थोड़ी देर पहले तो आप कह रहे थे एक्सप्लेनेशन एक्सप्लेनेशन अधूरी। एक्सप्लेनेशन मतलब की थोड़ा सा डिटेल्स होना चाहिए। ऐसे छोटे से वाक्य में नहीं होना चाहिए। मैं यही बोल। अब अब आप बता दीजिए। चलिए अच्छा इतना क्लियर है कि उनको ये सोचना चाहिए कि हम ऐसी सेंसिटिव चीजों पर बात कर रहे हैं तो और डिटेल से बता दे जिससे कि किसी को हर्ट ना हो। ये तो आप मानते हैं। फिर हां हां येस इतने में इतने अंश में वो गलती कर रहे हैं वो। देखिए गलती मैं किसे कहूंगा? गलती मैं कहूंगा कि वो वो एक काम जो जो कर रही है वो अनुचित है और और एक सत्य को जो एक्सप्लेनेशन नहीं करना मतलब कि डिटेल्स में एक्सप्लेनेशन नहीं करना ये तो कोई गलत बात नहीं है ना मतलब कि ये तो उतना गलत तो नहीं है ना और थोड़ा सा भी गलत नहीं है क्योंकि वो तो सत्य ही कह रहे

00:56:01:27 हैं वो तो मिथ्या कुछ नहीं कह रहे थे देखिए ऐसा है [गला साफ़ करने की आवाज़] कि जब हमें ये मालूम है कि ये मैटर जो है एक शिव भक्तों की हम बात कर रहे हैं। शिव जी के और कृष्ण के बीच की बात कर रहे हैं। और उस टॉपिक पर आकर आपसे ही कह रहा हूं। जब हम जब हम शिव जी शिव जी की बात कर रहे हैं कृष्ण जी की बात कर रहे हैं वो लोग जानते हैं कि कुछ लोग हैं जो शिव के भक्त हैं और उनको बुरा लगता है जब हम ऐसे कहते हैं तो उनको वहां पर जब ये टॉपिक बताते हैं तो ऑथेंटिकली ये सही से बताना चाहिए। आप मुझे एक वीडियो दिखा दीजिए जहां पर उन्होंने सही एक्सप्लेनेशन किया हो। पूरा कंप्लीट एक वीडियो हां हां YouTube में है मैं आपको हां वो आपको लिंक भेजूंगा जो आज गोविंद स्वामी जो है प्रभुपाद जी के जो शिष्य है उनके ऐसा बहुत सारे जो शिव तत्व के ऊपर जो बहुत सारे मैं उन मैं उन लीडर्स की बात कर रहा हूं जिन लीडर्स के वीडियोस प्रसिद्ध है उनमें से ही किसी एक लीडर का आप सही से पूरा वीडियो का

00:57:17:27 एक एक बहुत बड़ा गुरु है और उनका वीडियो बहुत प्रसिद्ध है। ठीक है? तो आप वो चैनल का नाम बताइए। तप्त जीवनम करके है या आप आप एक काम करिए। आप यहां से लीव करिए। आप यहां से लीव करिए। लीव करके वो मुझे सेंड कर दीजिए। वो लिंक जिससे कि मैं अपने ऑपरेटर को सेंड कर दू। फिर हम लोग बात करते हैं। अभी तो मुझे सर्च करना पड़ेगा ना। मतलब से लगभग एक साल पहले मैं ये सुना था अब अब वो वीडियो में मैं कब आऊंगा ये तो थोड़ा आपके पास प्रूफ नहीं है प्रूफ अभी अभी आप जो इस बात का कि वो लोग सही एक्सप्लेनेशन देते हैं इस बात का प्रूफ है ऑब्वियसली है आज आज भी दे सकते हैं एक घंटे के एक घंटे के अंदर मैं मैं आपको दे सकता हूं। ठीक है? एक घंटे के अंदर या आधा घंटे आप दीजिए। आधा घंटे के अंदर मैं आपको दे सकता हूं। अच्छा मुझे भी तो करना पड़ेगा ना। एक एक घंटे के अंदर आप ये प्रूफ देंगे

00:58:33:08 कि इसकी जो सही एक्सप्लेनेशन है ये जो जितनी एक्सप्लेनेशन सुनाई जाती है उससे आगे बढ़कर एक्सप्लेनेशन है वो दी गई है इस के प्रीचर्स के द्वारा। हां अब आप अब आप एक्सप्लेनेशन बता दीजिए क्या

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00:58:46:21 है? हां मैं तो हां आप मुझे बता कि जो भगवान श्री कृष्ण का जो प्रकाश है वो है बलदेव और उन बलदेव से आते हैं जो संकर्षण उन संकर्षण के जो जो प्रकाश है उसे कहते हैं कि आगे जो रुद्र कहते हैं और हां और और श्री भगवान के जो अंश के रूप में जो मतलब कि जिनको हम सदाशिव कहते है वो वो साक्षात विष्णु तत्व है मतलब वो जो सदा शिव जो अप्राकृत कैलाश धाम में है वो वो तो स्वयं ही विष्णु है और वही इस इस अवतार में श्री अद्वैत आचार्य प्रभु के रूप में आए हैं जिसको इस भी पूजा करता है और और उनके चरणों में तुलसी पत्र भी अर्पण करता है तो वो कौन है स्वयं सदा शिव है तो इस सदा शिव के चरण में तुलसी पत्र अर्पण कर रहा है ये भी आपको देखना पड़ेगा इस के आप आप जिस किसी भी आप आप मंदिर में जाइए और और आप जिज्ञासा कीजिए कि कि यह जो अद्वैत आचार्य है ये कौन है? तो आपको इसका उत्तर आपको ही मिल जाएगा। अद्वैत आचार्य ये हमारे जो

01:00:01:27 गौ परंपरा के अनुसार गौ परंपरा के अनुसार कोई कोई वैष्णव यदि यदि शिवरात्रि यदि पालन नहीं करता तो तो उसे वैष्णव नहीं माना जाता। प्लीज प्लीज आप मुझे उस मंत्र का वो श्लोक का अर्थ आप श्लोक का अर्थ बताइए मुझे। हां हां तो हां तो वैसे तो अभी तक आपने अभी तक अभी तक आपने जो कहा है उसका मतलब ये है कि जो सदा शिव है और विष्णु है वो एक ही है। ऑब्वियसली हां सदा शिव विष्णु है ये तो ये तो शास्त्र का ये तो कोटेशन है ठीक है आप ठीक है बताइए अरे भैया आप अपना दूध दही कर दूध दही बताइए प्रभु का है मेरे गाय दूध दूध दही का अर्थ बताओ। हां हां दूध और दही। अच्छा अच्छा तो दूध जो है वो है मूल सारभ वस्तु। वस्तुतः दूध और दही में कोई अंतर नहीं है। वस्तुत दूध और दही में कोई अंतर नहीं है। किसका अंतर है? केवल गुण का। मतलब वो गुणगत जो भेद है उसी को मतलब कह रहे हैं गुणगत जो भेद मतलब भगवान के एक एक

01:01:17:03 स्वरूप का जो गुण का जो भेद होता है सतगुण रजोग भेद है भेद है भी और अभेद है अभेद क्या है हां अभेद अभेद ही है कि वो शिव भगवान से अभिन्न है और वो चिन्मय है मतलब शिव जी कोई कोई ऐसा कोई वो जो और मानने वाला कोई देव देवी ऐसा नहीं है। मतलब कि वो वो जन्म मृत्यु के अधीन है। ऐसा कोई बात नहीं है। ये इस भी ये मानता है कि शिव जी पूछ रहा हूं। मैं ये पूछ रहा हूं अभेद क्या है? आपका अभेद का मतलब होता है जहां पर भेद ना हो। अच्छा तो अचिंत भेदभेद ये कहां से आ गया? ये तो महाप्रभु ने दिया है। ये तो आप बताओ ना मुझे अचिंत भेदाभेद तत्व का वर्णन ये जो पहले इसका जो मतलब

01:02:16:14 सुनो सुनो सुनो सुनो ये बताओ अगर इस तरीके से देखेंगे कि उनमें भेद है भी और नहीं भी। ठीक है तो है भी और नहीं भी वाली बात है भी और नहीं भी वाली बात अगर है कि शिव जी में और कृष्ण जी में भेद है भी और नहीं भी। अब भेद है क्यों? भेद है क्यों? क्योंकि उनमें वो सारे गुण नहीं है जो सारे गुण कृष्ण जी में है। ठीक है? यही बात है ना? वो जो है गुना है मतलब कि अवतार होता है और एक होता है अवतारी। तो सारे गुण है उसमें शिव जी में सारे गुण है जीव गोस्वामी पाद ने अपने जो जो संदर्भ के अंतर यही कहा है कि विष्णु जी में 60 गुण है और और यानी कि सारे गुण नहीं है ना यार आप लोग पता नहीं क्यों देर करते हो सारे गुण नहीं है और शिव जी में जो 55 गुण होते हैं और श्री कृष्ण में 64 गुणावली होती है मैंने क्या पूछा मैंने आपसे सारे गुण है कि नहीं? मैं ये बोल रहा हूं कि इसको नहीं बता रहा है। ये जीव बोल रहा है। मैंने आपसे पूछा सारे गुण है कि नहीं? नहीं है। और ये नहीं बोला है। ये ये

01:03:31:22 एक अलग विषय है कि ये आपके पूर्वाचार्य बोल रहे हैं कि कौन बोल रहा है? जब आपकी बात हो रही है तो आपको अपनी बात को सही सिद्ध करना है। सारे गुण नहीं है। सारे गुण नहीं है। शिवजी आए कहां से है? जी आए तो वो तो भगवान से ही है और हम भी आए भगवान ठीक है तो पूर्ण से जब कोई चीज निकलती है तो पूर्ण होती है ना पूर्ण होती है लेकिन वो पूर्णता का प्रकाश नहीं करते है यही तो है मजा मतलब उनके अंदर तब तो है लेकिन वो वो मतलब कि उनके जो जो स्वरूप का जो जो एक संभ्रम होता है उस उस संभ्रम को बनाए रखने के लिए उन्होंने ये ये गुण उन्होंने प्रकट किया है। देखिए माया के मैं समझ रहा हूं। एक मिनट यानी कि कृष्ण से जब शिव आए तो शिव जी पूर्ण है। बस वो दिखा नहीं रहे पूर्ण हूं। दिखा नहीं रहे है मैं पूर्ण। है ना? यानी तत्व से वो वही है। यानी तत्व से वो कृष्ण ही है। वो है कृष्ण दत्त और यह विश्व और यह तत्व। मैंने पूछा तत्व से वो

01:04:47:01 पूर्ण है कि नहीं? वो दिखा नहीं रहे। मगर वास्तविकता में वो पूर्ण है कि नहीं? हां वास्तविकता में पूर्ण का सभी अंश ही पूर्ण बनेगा। यह तो इस का वाक्य है। यानी कि यानी कि तत्व से शिवजी और कृष्ण में कोई भेद नहीं है। तत्वत दिक से नहीं वो तो विष्णु तत्व है। क्योंकि हां आप देखिए तत्व का तत्व का मतलब क्या होता है? हां जो जो अंतिम सत्य है ना वो उस तत्व की बात कर रहा हूं। अंतिम सत्य जिसके बाद और कुछ बाकी नहीं रह जाता है। उस तत्व की दृष्टि से बात कर रहा हूं मैं। हां तो जी भी तो हां बोलिए मैंने पूछा शिव जी और विष्णु जी में कोई भेद नहीं है। हां ये अभेद दृष्टिकोण है। मैं पूछ रहा हूं तत्व से कोई तत्व से कृष्ण भगवान और शिव भगवान में कोई भेद नहीं है ना? तत्व के दृष्टि से नहीं है वैसे। लेकिन गुण के दृष्टि से है। अरे वो तो यहां लीला में है ना। फिर वो दिखा नहीं रहे। उनके अंदर गुण है। उनके अंदर भी है गुण मगर वो दिखा नहीं रहे। आपने

01:06:02:07 ही कहा ना प्रकाशित नहीं करते। होता सब कुछ है। यह होता ही नहीं है। हेलो

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01:06:23:22 [नाक से की जाने वाली आवाज़] नारायण [नाक से की जाने वाली आवाज़] ठीक है। इनके यहां नेटवर्क की कुछ वो है। आज हमने ये पता कर लिया कि भैया ये भी धीमीधीमी तौर पर इनके यहां पर भी वो इन्हें मानना ही पड़ रहा है कि शिव और विष्णु में कोई भेद नहीं है। शिव और कृष्ण में कोई भेद नहीं है। वह बात अलग है कि जब बिल्कुल क्लियर कट मानना पड़ेगा तो इस तरह से अटकेंगे लोग। इतना है कि आज हमने शिव जी की कृष्ण के साथ इस वालों के ही द्वारा जो है जो तत्व से अभेद होना प्राप्त कर लिया। वो लीला में शिव जी कुछ अलग गुण प्रकाशित कर रहे हैं और कृष्ण भगवान कुछ अलग गुण प्रकाशित कर रहे। इतनी बात है। है ना? [नाक से की जाने वाली आवाज़]

01:07:29:03 हां अब ठीक है। हां जी तथागत जी गुण उनके अंदर पूरे होते हैं। गुण उनके अंदर पूरे होते हैं। मगर वो लीला में दिखाते नहीं है। बस

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01:07:41:20 हां हां आप मुझे थोड़ा सा बोलने दीजिए। मैं क्या बोल सकता हूं? बोलो हां तो हां तो भगवान से मतलब कि जो जो पूर्ण तत्व है उनसे जो कुछ भी निकलता है वो सब पूर्ण है लेकिन वो वो तत्वगत रूप में मतलब कि सेम है और और जो गुणगत रूप में वो अवैध है मतलब जो जो भगवान का क्वालिटी है और और उनसे सृष्टि जो कुछ भी है सबका क्वालिटी तो सेम है लेकिन वो जो क्वांटिटी है वो सेम नहीं है यानी कि शिवजी उनसे निकले तो वो पूर्ण है कि नहीं हर तरह से हां क्वालिटी है यही तो है भदाभेद मैं पूछ रहा हूं क्वांटिटिवली मैं पूछ रहा हूं क्वांटिटिवली कमी है क्वांटिटिवली वो दिखाते हैं कि भोज जो कमी है लेकिन दिखाते हैं दिखाते हैं एक्चुअली कमी नहीं है पर वो दिखाते हैं हां क्योंकि देखिए मतलब मतलब उनमें कमी देखना माया मात्र है उनकी लीला मात्र है देखिए कमी देखना है उन्होंने मुझे नहीं उन्होंने अपने आप को ऐसा ही प्रकाश कर

01:08:56:21 रहा है हमारे सामने ठीक है तो मगर वो से है मगर तत्व से है हां बोलिए मगर तत्व से वो पूर्ण है ना हां तत्व से तो सभी पूर्ण है तो उनके अंदर सारे तो उनके अंदर जितने भी गुण है सारे गुण लेकिन वो मैंने बार-बार मैं बोल रहा हूं कि भाई साहब अब जरा अब जरा जरा मुझे बोल लेने दीजिए। ठीक है। ईश्वर सर्वव्यापक है। हां हां भगवान सर्व्यापक है। हां ठीक है। मगर भगवान अपने आप को एक कुरुक्षेत्र में खड़ा दिखा रहे हैं कि नहीं दिखा रहे हैं? हां वो हमें दिख रहे हैं। एक मिनट दिख रहे हैं। एक मिनट एक एक मिनट फिर भी हम ये मान रहे हैं सर्व्यापक है। जबकि वो हमें दिखा रहे मैं रथ में खड़ा हुआ हूं। इसोपनिषद में ऐसा लिखा है कि भगवान मैं ये कह रहा हूं कि श्री कृष्ण भगवान किसी एक देश काल परिस्थिति में हमें दिख रहे हैं। फिर भी हम ये कह रहे हैं स्पष्ट कि ये सर्व्यापक है तत्व से क्योंकि हम जानते हैं। उसी तरीके से भगवान

01:10:12:28 यही भगवान का मैं पूछ रहा हूं। उसी प्रकार से भगवान शिव हमको आपकी जानकारी के अनुसार या आपकी थ्योरी के अनुसार भगवान शिव हमको कुछ कम गुणों से परिपूर्ण अपने आप को प्रस्तुत कर रहे हैं। ठीक है? सेवक का भाव से का भाव ठीक है। मगर मगर वो तत्व से मगर वो मगर वो तत्व से पूर्ण है। वो अभी बात करेंगे भाई साहब। वह अभी बात करेंगे। ठीक है? अभी बात चल रही शिव जी की कि जैसे भगवान कृष्ण कहीं पर कुरुक्षेत्र में महाभारत के रण में दिखाई दे रहे हैं किसी एक स्थान पर सारथी बन के बैठे हुए फिर भी वो सर्वत्र व्याप्त है। है ना? है ना? सर्व्यापी हां तो हम उनको हां तो इसी तरीके तो हम श्री कृष्ण भगवान को सारथी बने बैठा देखकर ये नहीं मान लेते कि जो सारथी है हम कहते हैं कि नहीं तत्व से तत्व से सर्व्यापक है पूर्ण है ठीक है इसी तरीके से आप इसी तरीके से आपकी थ्योरी के अनुसार शिवजी जो है अपने आप को थोड़े कम गुणों वाला प्रदर्शित

01:11:28:12 कर रहे हैं तो हम लीला में मान लेंगे व्यवहार में मान लेंगे लीला तो हम लीला में ये मान लेंगे कि शिव जी जो है कम गुणों वाले हैं क्योंकि वो अपने आप को ऐसा प्रस्तुत कर रहे हैं। तो यहां पर व्यवहार में हमने ये मान लिया जैसा वो दिखाना चाह रहे हैं। मगर तत्व से वो वही है। तत्व से शिव जी पूर्ण है। तत्व से उनके अंदर कोई अभाव नहीं है। नहीं कोई अभाव नहीं है। तत्व से शिव और कृष्ण एक ही है। आवाज चली गई क्या आपकी? हां हां इसी को तो अभेद कहते हैं। मैंने कहा मैंने कहा तत्व से शिव और कृष्ण एक है। हां ऑब्वियसली एक है। मैं मैं आपसे सुनना चाह रहा हूं। आप बोल दीजिए। तत्व से शिव और कृष्ण एक है। एक है। शिव और कृष्ण एक है। मैंने बोल दिया। हां ठीक है। तत्व से अब आप मुझे इस की किस प्रामाणिक पुस्तक में ये बात लिखी हुई है बता दीजिए। हां। शिव और ये ये थोड़ा मुझे क्लियर करने दीजिए कि शिव और कृष्ण एक है। ये जो हमारे जो जो गौरी आचार्य है उनके लिखे हुए जो ग्रंथ है वो मुझे मुझे मुझे मुझे मुझे इस से दिक्कत है। मुझे इस

01:12:43:15 से आप बताइए कहां लिखा है? आप जो भक्ति वेदांत जो जो लाइब्रेरी है वहां पर आप जाके आप स्वयं मुझे मुझे मुझे जीबीसी के द्वारा छापी जाने वाली किताबें बताइए कहां लिखा है? क्या लिखा है कि यहां पर हां यहां पर मैं आपको श्रीमद् भागवतम से आपको दिखा सकता हूं और और वो के ही है के वेबसाइट से मैं आपको दिखा सकता हूं ठीक है बताइए बताइए तो हां तो मैं क्या आउट हो सकता हूं अभी थोड़ा आप मुझे बताइए मेरे पास वो है श्रीमद् भागवतम है अच्छा अच्छा तो मैं थोड़ा सर्च करके मैं आपको दे रहा हूं। एक म एक बाद मैं आ रहा हूं। थोड़ी देर बाद मैं मैं आपको दे रहा हूं। वो अभी मतलब कि मेरे पास वो गन था तो अभी तो नहीं है ऑफलाइन में तो तो मैं आपको जो ऑनलाइन है मैं वही से आपको मैं आपको दिखाना चाहता हूं। ऐसा जाइए। ठीक है। जय

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01:13:51:25 श्री राम। [खांसने की आवाज़] ये ऐसा है ना ये जो आप इसको थोड़ा सा समझिए अनऑफिशियली कुछ भी स्वीकार करने को तैयार है। जैसे अनऑफिशली वो चर्च वाले ने सब कुछ मान लिया ना इसी तरीके से यह लोग अनऑफिशियली कुछ भी मान लेते हैं। वो वहां ईस्ट ऑफ कैलाश मंदिर में अनऑफिशली उसने सब मान लिया कि नहीं मान लिया? खैर हमारे लिए तो अच्छा ही है। अनऑफिशियली सही यहां तो आकर के माना ना। तो जब ऐसा है तो अभी अगला प्रश्न आएगा ना कि फिर भागवत में ये क्यों लिखा है कि शिव शिव को शिव के नाम को जपने वाले श्री कृष्ण के समान समझने वाले सब नीच है, मूर्ख है, पापी हैं। हां इसका क्या मतलब है? अच्छा एक बात और आ गई यहां से। अभी ये धीरे-धीरे व्यवहार परमार्थ में अंतर करते हुए ये अद्वैत की ओर ही जा रहे हैं। भाई जब कुछ तत्व से तो सब कुछ एक ही है। तो ये तो

01:15:06:26 अद्वैत मान रहे हैं। तो अद्वैत की फिलॉसफी को नए नाम से चिपकाया जा रहा है ना। फिर तो यह हो जाएगा। अद्वैत की फिलोसफी को नए नाम से चिपकाया जा रहा है। जब सब कुछ एक ही है। उनसे निकल रहा है। सब कुछ पूर्ण है। तो वहां भी जा रहे हैं। अगर ये वापस आते हैं तो अच्छा रहेगा। अनिकेत जी और शास्त्रवाद जी अगर जुड़ सकते हैं तो जुड़े। फिर आज की लाइव ओवर करते हैं। अगर ये आएंगे तो फिर इनसे कल बात होगी। अब एक घंटे 15 मिनट हो ही चुका है। बेकार में इन्होंने वह कटाक्ष कर दिया जिसके कारण [खांसने की आवाज़] [गला साफ़ करने की आवाज़]

01:15:46:02 शौर्य सिंह जी आप अपना चेहरा दिखाएं। एक एक मिनट हां एक मिनट। यह आज हमारा वीडियो रिलीज हो गया है चर्च का। कैथोलिक चर्च है ऋषिकेश में और इसमें बहुत सारी रोचक बातें आपको जानने को मिलेंग कि किस तरीके से कार्य करते हैं कैथोलिक चर्च और यह वह जगह है जहां पर पूरे भारतवर्ष के जो अलग-अलग चर्च है वहां के जो प्रीस्ट नियुक्त किए जाते हैं वो प्रीस्ट अपनी मतलब फादर जिन्हें हम कहते हैं वो अपनी वहां पर ज्वाइन करने से पहले चर्च को ज्वाइन करने से पहले एक साल के लिए यहां पर आकर ट्रेन किए जाते हैं और उनका मेन उद्देश्य यही होता है कि उनका मुख्य उद्देश्य यही होता है कि किस प्रकार से हम

01:16:52:00 सनातन धर्म इत्यादि जो हैं जो अन्य सभ्यताएं हैं अन्य मान्यताएं हैं उनकी चीजों को जान सके और उन उस जानकारी को प्राप्त करते हुए उस जानकारी का पर्यावसान उपयोग विनियोग हम कर सके किस में चर्च के प्रचार प्रसार में क्रिश्चियनिटी के प्रचार प्रसार में जी शास्त्रवाल जी जय श्री राम जय श्री राम भैया जय श्री राम आज का लाइव तो बहुत बढ़िया हुआ उसने तो मान ही लिया आखिरकार शिव और कृष्ण में कोई भेद नहीं है

01:17:27:20 जय श्री राम सौर जी जय श्री राम चौहान जी जी जी मेरी आवाज आ रही है जी आ रही है बताइए जी मेरा एक जिज्ञासा थी आपसे आपका परिचय जैसे कि जी मेरा नाम शौर्य सिंह गौर है। मैं सूर्यवंशी क्षत्रिय हूं और मैं किसी गुरु जी से ऐसे भी जुड़ा नहीं हूं। मैं बस ऑनलाइन देखता हूं जो परंपरागत गुरु जी वगैरह होते हैं जैसे शंकराचार्य जी महाराज तो मेरी जिज्ञासा थी जैसे आप कहते हैं कि जो वेद है वो जिज्ञासा जिज्ञासा की क्लासेस होती है हमारी फ्री में वहां पर आइए यहां पर वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा होती है वरना सब हम लोग समीक्षा करते हैं जो जैसे वो एक काउंटर भी उसे आप कह सकते हैं कि जो आप कहते हैं सर एक काउंटर मतलब मैं करता नहीं करना चाहता एक प्रश्न आ रहा है जैसे देखिए अगर आप अगर आप समर्पित भाव से प्रश्न को रखना चाहते हैं काउंटर है वो एक तो आप क्लासेस में आ जाइए और अगर आप एज ए काउंटर आ के यहां पर उसको एक विवाद का रूप देना चाहते हैं तो आप फॉर्म भर सकते हैं लाइव डिस्कशन के लिए तो आप यहां आ सकते हैं ठीक है

01:18:42:28 जी मैं क्लास में जी जय श्री राम हां जी शास्त्र जी बताएं जी भैया आपने बहुत बढ़िया से उसे जो अभी इस व्यक्ति आया था आपने उसे बहुत बढ़िया से समझा दिया कि कैसे कृष्णा सिर्फ एक है बेचारे को मानना पड़ गया अभी तक तो मान नहीं रहा था इधर उधर जा रहा था हिचक रहा था मानने से लेकिन आखिरकार उसने मान ही लिया ये बहुत बड़ा आज का लाइफ का एक बात है ऐसे ही करके एक एक व्यक्ति अभी अभी अभी मैं उस पे आने वाला हूं। पहले तो थोड़ा सा वो शिव जी की बातें पूरी करूंगा। उसके बाद फिर आऊंगा कि आपने कहा था कि भगवान से निकलने वाली सभी चीजें जो है वास्तविक तत्व से तो वो पूर्ण है। तो कहीं कोई भेद है ही नहीं। अंतर आ ही नहीं रहा है। फिर [नाक से की जाने वाली आवाज़] ये सृष्टि कहां पर बनी है भाई? ये सृष्टि कहां पर बन गई? जब सब जगह एक ही तत्व है तो ये बीच में अलग-अलग ये क्या है? फिर भैया यह तो लीला मात्र है, प्रपंच मात्र है, माया मात्र है। इसका मतलब एक ही तत्व है सब जगह। अलग-अलग तत्व का तो गैप होगा ना बीच में। यहां है, वहां नहीं है। जीव यहां है, वहां नहीं है। मगर अगर

01:19:58:00 उसको पूर्ण मानोगे जीव को तो सब वो सब जगह है जीव। खैर [गला साफ़ करने की आवाज़] हां भैया अर्पित जी को आप हमारा नंबर दे दीजिए। एक ये कह रहे हैं अर्पित जी से लाइव कर लीजिए। अर्पित जी को हमारा नंबर दे दीजिए। लाइव हो जाएगी उनके साथ और क्या है रियलिस्ट आजाद अगर तमीज के साथ बात करोगे और यह ह्यूमन वि साइंस वाला व्यक्ति एक बार अभी आया था मेरे संपर्क में तो भैया कहां चले गए?

01:21:00:00 सभी दर्शकों से अनुरोध है कि आप इस लाइव को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि लोगों को पता चले कि किस प्रकार से एक स्कनी व्यक्ति जो अभी-अभी मानना है कि कृष्ण और शिव में कोई भेद नहीं है। यह आज के लाइफ का बहुत बड़ा बात रहा है। इस समय हम उस चर्च के अंदर ही बैठे हुए हैं। तो ये 12 से लेकर के 30 के बीच में जीसस कहां रहे? तो अब ये आता है कि क्या क्रिश्चियनिटी का जो ईश्वर है यहोवा वो सर्वशक्तिमान है? अगर क्रिश्चियनिटी से देखा जाए तो जो भी व्यक्ति क्रिस्टनिटी के

01:22:15:01 अनुसार विवाह नहीं किया है वो अवैध विवाह है। या है ना? तो अब उस विवाह से उत्पन्न होने वाली संतान क्या कहलाएगी? तो लॉजिकली हम ईश्वर को सिद्ध कर सकते हैं किसी के समक्ष क्रिश्चियनिटी के अकॉर्डिंग। [हंसी] तो सभी को जय श्री राम। आप देख रहे हैं आहान कॉल ऑफ Dharma YouTube चैनल। यह वाला लोग जरूर देखें। अवश्य ही देखें। यह वाला चर्चा बहुत ही अच्छा हुआ है। इसमें बहुत कुछ जानने को मिलेगा।

01:23:26:26 [गला साफ़ करने की आवाज़] यहां थोड़ा सा वो आंधी तूफान आ रहा है ना तो बिजली कट गई थी। तो कहने का मतलब यह है कि अभी भाई साहब अभी थोड़ा सा इन्होंने अटकती हुई आवाज में माना इन्होंने कि कृष्ण और शिव में भेद नहीं है और अभी इसके आगे एक दो प्रश्न और इससे बात से किए जाएंगे। इसके बाद फिर वही वाली बात आ जाएगी। सब कुछ जब पूर्ण ही है तो

01:23:58:09 फिर अलगाव कहां से आया? भेद कहां से आया? तो अभेद हो गया। द्वैत हो गया। और देखिए वो एक बात है कि जब सारे सारी चीजें चुप हो जाती है तब अद्वैत बोलता है। हर बात की हर मर्ज की दवा है अद्वैत के शहर में आप अपना चेहरा दिखाएं सौमित्रो दे जी जय जय आदि शंकराचार्य भगवान नमस्ते जय हो नमस्ते मैं भी बांग्लादेश से हूं बांग्लादेश से हूं

01:24:34:24 मुझे लगता है वो जो व्यक्ति थी वो ठीक से म हिंदी बोल नहीं सकता तो अ उनको कोई बंगाली अद्वैतवादी से डिबेट करने की गुंजारिश हो तो मैं मैं वीडियो ऑन नहीं कर सकता। मेरी लैपटॉप में शायद कोई इशू हो रहा ही है। कोई बात नहीं मगर आपका भी हाल उनके ही जैसा है। मैं भी मैं तो बांग्लादेश से हूं। मैं तो और भी नहीं जानता। चलिए बहुत-बहुत आभार आपका। जय श्री राम। जय श्री राम। तो उनको बोलेंगे। उन्होंने सुन उन्होंने सुन लिया होगा। सुन लिया होगा। उन्होंने अपने जो कहा उन्होंने सुन लिया होगा।

01:25:28:21 [गला साफ़ करने की आवाज़] ठीक है शास्त्रवाद जी कैसा लगा आज का लाइव आपको भैया बहुत बढ़िया है आज सही देखेंगे तो बहुत बढ़िया हम काफी अच्छा है ठीक है अनिकेत जी भी आ गए अनिकेत जी को जोड़ दीजिए सही आ गए क्या तथागत जी आ गए आ गए तथागत जी मोबाइल को वैसे रख लेते अच्छा अच्छा ठीक

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01:25:57:10 हां तो हां अब मैं बोलना हां आपके जो WhatsApp नंबर है मैं मैं वहां पर जो इस डिज ट्री का जो एक लिखा है मतलब वो इस के ही भक्त के द्वारा दिया गया है तो वो आप देख सकते हैं अपने मैं उसका लिंक भी शेयर किया है और और उसका जो मैं पॉइंट आउट भी किया है लॉर्ड शिवा एक्चुअली नॉट डिफाइन देन कृष्णा। मैं आपसे एक बार और क्लियर कर लूं। शिव और कृष्ण में कोई भेद नहीं है। तत्व से वास्तविक जो रियलिटी है रियलिटी में शास्त्रों में कहा गया है कि हां मैं मैं पहले बोल लूं। यह शास्त्रों का श्लोक है कि कि जो जो व्यक्ति भगवान नारायण के साथ भगवान रुद्र और और ब्रह्मा को समान मानता है वो एक पासंडी है। तो यह पूर्ण रूप से तो यह नहीं है लेकिन अभेद भी है और भेद भी है। यही तो मैं कहना चाहता हूं। देखिए बात ऐसी है

01:27:07:25 नारायण बात ऐसी है कि अगर हमने कहा कि तत्व से भगवान शिव में और विष्णु में कोई भेद नहीं है। ठीक है? अब आपने कहा कि शास्त्र का एक वचन है कि शिव और विष्णु को एक कोई मानता है तो वो पाखंडी है। ब्रह्मा और और बाकी सब देवता को मैं आपको क्या वो श्लोक दूं? अभी भाई साहब मुझे मेरी बात आप करने देंगे कि नहीं करने देंगे? अच्छा अच्छा अच्छा बोल लीजिए।

01:27:40:26 आपने कहा तत्व से शिव और कृष्ण में कोई भेद नहीं है। ठीक है। तो इस बात को हम माने कि ना माने? अभेद है और भेद भी है। इसको हमें मानना पड़ेगा। मैंने कहा इस बात को माने कि ना माने क्या है ये? [गला साफ़ करने की आवाज़] पूर्ण रूप से तो अभेद भी नहीं है। मतलब पूर्ण रूप से तो एक भी नहीं है लेकिन एक है भी। मैं बता रहा हूं क्या है? ऐसा है कि व्यवहार की दृष्टि से राम जी कौशल्या माता से जन्म लेते हैं। और तत्व की दृष्टि से वो उसे प्रकट होते हैं। जन्म नहीं लेते। तो हमें तत्व से ये मानना पड़ेगा। तत्व से हमें ये मानना पड़ेगा कि शिव और विष्णु एक हैं। और व्यवहार से आप ये कह रहे हैं कि हमारे पास एक श्लोक है जिसमें कि उनको व्यवहार में शिव और विष्णु को अभेद शिव और विष्णु को अभेद मानने वाले पाखंडी है। ठीक है? तत्व से तत्व से शिव और विष्णु में रियलिटी [नाक से की जाने वाली आवाज़] में जो वास्तविक जो अंतिम रियलिटी है ट्रुथ उसमें शिव और कृष्ण में कोई भेद नहीं है। और जो संसार भौतिक दृष्टि है। इसमें आपके पास एक श्लोक है जिसके कारण आप यह मानने के लिए वो है कि व्यवहार में हम शिव और विष्णु में भेद मानते हैं। ठीक है? इसका मतलब केवल

01:28:56:07 शास्त्र का ही एक शास्त्र वो शास्त्र ने जो चिन्हित किया है आपके अनुसार जो आपने शास्त्रों का अर्थ किया है उसके अनुसार शिव [नाक से की जाने वाली आवाज़] और विष्णु में भेद मानना। मैंने मांगा है क्या आपसे? जब मैं मांगूंगा तब दे दीजिएगा ना भाई। मैंने जो मांगा था आपने दिया। मैंने लिया आप जितनी बार मैं बोलता हूं बीचबीच में मैं मैं श्लोक दूं मैं श्लोक दूं ठीक है ठीक है आप बोलिए तो व्यवहार में आप ना मानने के लिए इसलिए मजबूर हैं क्योंकि आपको शास्त्र का एक वचन प्राप्त है जिसमें कि इनको अभेद मानने वाले पाखंड कुल मिलाकर के शास्त्र के एक वाक्य के कारण जो है आप मान रहे बाकी तत्व से आप भी शिव और कृष्ण को एक मानते हैं। हां ये तो हां ये तो है ये तो वास्तव यानी यानी कि तत्व से शिव जी कोई अलग से दूसरा तत्व नहीं है। कृष्ण ही है। हां कृष्ण का प्रकाश है। कृष्ण का प्रकाश और अंतर है कि मैं पूछ रहा हूं अंतर है कि नहीं? जरा सा भी प्रकाश जब आप प्रकाश लाओगे तो अंतर अंतर है। तत्व से कह रहा हूं। तत्व से कह रहा हूं। तत्व से जरा सा तो अंतर है। तत्व से कह रहा हूं।

01:30:12:02 हां। तत्व से कह रहा हूं। हां जरा सा तो अंतर है। यानी तत्व से भी अंतर है। जरा सा है। अरे जरा सा है। है ना भाई? हां हां। पता नहीं क्यों आप लोग अपनी फिलॉसफी को स्वीकार करने में भी डरते हो यार। अच्छा ठीक है। ठीक है। आप अब आप अपना आप अपना बोलो। बोलो बोलो बोलो। शर्म आती है क्या जो चीज़ गुरुओं ने सिखाई है जिनको आप गुरु कहते हो वो बातें एज इट इज बोलने में नहीं जब आप अपनी चीजों को जब आप अपनी चीजों को अपनी मान्यताओं को एज इट इज बोलोगे नहीं तो हम बात किस पे करेंगे बताइए जब मेरी बारी आई थी मैंने फट से बोला भले ही आप बाद में कटाक्ष कर दो मैंने फट से बोला ना ठीक है ठीक है आप अपना बोलिए बोलिए बोलिए एक एक फ्लो में आप चर्चा करने की वो नियत रखते ही नहीं हो कि भाई हम सत्य की खोज करने बैठे हैं। ऐसे बोलो ऐसा उसमें दिमाग लगाओ कहीं हमारी पटकनी ना हो जाए। यह ध्यान है।

01:31:15:06 नहीं नहीं आप बोलिए भाई जो आपको बताया आपके गुरुओं ने जो आपने पढ़ा है जो आप मानते हो जो आप जानते उसको बोलो ना यार डंके की चोट पे वो गलत है सही है बाद में सिद्ध होगा वो उसी को अभी कह रहे थे तत्व से भेद नहीं है अब कह रहे हो जरा सा है अब मैं बार अब मैं बार-बार कह रहा हूं तत्व से भी तत्व से भी भेद है तत्व से भेद है तत्व से है लेकिन वो जरा सा है वो हमें दिखाई दे रहा है वो हमें दिखाई दे रहा है लेकिन वास्तविक में वो नहीं है हो गया आप आप जाइए अब हो गया ठीक है अच्छा लगा आपकी बात कर जय श्री राम

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01:32:08:07 [हंसी] हां शास्त्रवाद जी कहां गए? उग्रतापस जी अपना कैमरा ऑन करें। जी मेरी आवाज आ रही है? नमस्कार। जय श्री राम। जी कैमरा तो मैं ऑन नहीं कर सकता हूं। कुछ कारण है तो ऐसे वार्तालाप हो सकती है क्या? किस बारे में? किस बारे में? आदि शंकराचार्य जी का फोटो लगा के यहां पर हमको मूर्ख समझा है। क्या?

01:32:56:16 ठीक है? जहां से सोचना शुरू कर जहां पर सोचना तुम्हारा बंद होता है ना, वहां से हमारी चीजें शुरू होती हैं। जो व्यक्ति अपनी बात पर अडिग नहीं रह रहा है, उससे क्या बात करें? पूर्व पक्षी फिक्स नहीं है। जब वह यह इसका जवाब दे तो वो उस पर भाग जाओ। उसका जवाब दे। इसीलिए एक शब्द निकाला है अचिंत वेदाभेद। [हंसी]

01:33:39:20 जय श्री राम। हां जी अनकत जी जय श्री राम जय श्री राम [हंसी] यार व्यक्ति परेशान है क्या बोल दूं यार मैं आके फंस गया हूं क्या आपकी आवाज नहीं आ रही है अंकित जी आप बोले शास्त्र जी तब तक सही

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01:34:09:01 बात है भैया इसने पहले बोला था कि कोई भेद नहीं फिर उसके बाद मानने लगा जरा सा जरा सा भेद है जरा सा मतलब वो खुद क्लियर नहीं कर पा रहा खुद में इतना डाउट में है कि आखिर भेद है कि नहीं है शतर उपनिषद का वो वाक्य वो माने कि नहीं माने क्या है इनका फिलोसफी कुछ भी नहीं पता तथागत जी तथागत जी आप समझ लीजिए तत्व से अभेद है तत्व से अद्वैत है और व्यवहार में द्वैत है। यही तो हम भी मानते हैं जो आप मान रहे हो। यही हम मानते हैं। मगर क्या हुआ है कि आपको अवमानना करनी है शंकराचार्य की। अपना घरौदा बसाना है। आपको नहीं मतलब जिसको आप मान रहे हो उस तंत्र को। तो इसलिए जरूरी है कि भैया हमको वह शब्द स्वीकार नहीं करना है। उसी शब्द को शब्दांतर से शब्दांतर भेद से हम जो है उसी शब्द को दूसरे तरीके से स्वीकार करके कह देंगे हमारी फिलोसफी तो द्वैत है।

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01:35:10:09 वो लोग नहीं मानते। द्वैत फिलॉसफी में अंत में नहीं माना गया कि एक ही है। और अगर माना गया तो फिर शब्दांतर भेद वहां भी आएगा। ज्यादातर तो जितने जो पूर्वाचार्य हैं जो आचार्य हैं उनमें और यह देखने में मिलता है शब्दांतर भेद है। बस शंकराचार्य जी की बात को आदि शंकराचार्य जी की बात को दूसरे शब्दों में मान लिया। बस उस एग्जैक्ट शब्द से नहीं माना जिस जिस शब्द से आदि शंकराचार्य जी ने सिद्धांत कहा है।

01:35:43:22 [गला साफ़ करने की आवाज़] अनिकेत जी नहीं आ रहे क्या? कौन से डिस्कशन की बात कर रहे हैं आप? जी आएंगे शायद ना। अच्छा मैं एक बार फिर से बता दूं ऋषिकेश में कैथोलिक चर्च में बैठकर के एक बहुत अच्छा डिस्कशन हुआ है जिसमें आपको मालूम पड़ेगा कि किस तरीके से जो चर्च वाले हैं कैथोलिक चर्च से जुड़े हुए लोग हैं अपना काम कर रहे हैं

01:36:19:08 और [गला साफ़ करने की आवाज़] हम इस समय ऋषिकेश में हैं। हां यह यह दिखा दीजिए आप। यह शो कर दीजिए। तो आप जरूर वह चर्चा देखें और आप उसमें देखें कि किस तरीके से कार्य कर रहे हैं और हिंदुओं की चीजों को सीखने जाते हैं। विशेषतः विशेष रूप से हिंदुओं के मंदिरों में जाते हैं। बड़े-बड़े बद्रीनाथ और जितने भी तीर्थ स्थल है वहां जाते हैं। उनको समझते हैं। उनकी फिलॉसफी को समझते हैं। और फिर किस तरीके से उनका पर्यावसान क्रिश्चियनिटी के प्रचार प्रसार में किया जा सकता है। इसमें बहुत अच्छे से सब सारी चीजें आपको प्राप्त होंगी और आप इन इस वीडियो के द्वारा जो आपके आसपास बहुत तेजी से कन्वर्जन हो रहा है उस पर आप उसके लिए कुछ सार्थक प्रयास कर सकते हैं।

01:37:20:19 मुझे [गला साफ़ करने की आवाज़] लगता है आएंगे नहीं। यह वो डिस्कशन है आप लोग जरूर देखें। ऋषिकेश की कंट्रोवर्सी उन्होंने प्राइवेसी की स्ट्राइक मार के फिलहाल वीडियो हटवा दिया है। अभी हम लोग कोर्ट का रुख कर चुके हैं। बहुत जल्द वो वीडियो वापस आएगा। जिस तरह से रामपाल ने फेक स्ट्र्राइक्स लगवा करके एक बार हमारे कुछ वीडियोस हटवाए थे और उसके बाद हमारा चैनल भी बंद होने की कगार पर था। पर हम लड़े और जीते उस लड़ाई को। [नाक से की जाने वाली आवाज़] हां जी अंकित जी मुझे लगता है आप ज्यादा अच्छे से डिफाइन कर पाओगे आज की चीजों को।

01:38:06:07 जी भैया आवाज आ रही है मेरी? अब आ रही है। [नाक से की जाने वाली आवाज़] हां नेटवर्क का इशू है थोड़ा। मैं कह रहा हूं वो बंदा लगता है जा रहा है कोई ढूंढ के आता है फिर जॉइ करता है फिर जाता है जॉइ करता है ढूंढता है जॉइ करता है और वो यह भी देखता है कि मुझे जाके कहना क्या है मतलब मुझसे कुछ गलती हो गई अब यह कहूंगा अब तो मैं यह कह आया मगर अब मैं यह कहूंगा जी शास्त्रवाद जी

01:38:43:10 जी भैया मेरे यहां पर आपका आवाज थोड़ा कट रहा है क्योंकि मेरा इंटरनेट थोड़ा आज वीक है। जो भी है आज का चर्चा देखने में बहुत ही अच्छा लगा। आज उस व्यक्ति ने बहुत बढ़िया से माना है। माना भी है और बाद में नहीं भी माना है। बेचारा कंफ्यूज था। इसमें भी इसमें भी इसमें भी अचंत वेदाभेद है। [हंसी] माना भी और नहीं भी। देखो सीधी सी बात है कि हम लोग जीते कैसे कि हम ऐसी चीज बोलेंगे कि कोई एक बात पर व्यक्ति प्रश्न ना कर पाए। अगर हम इससे कहे ये कैसे कहा? हमने ये भी तो कहा है। वही मैंने कहा था ना वो था ना वो एक वो थी ना थ्री इडियट्स उसमें वो कहता है हां कि मोटर कैसे स्टार्ट होती है? तो वह उसमें था उसने शायद कोई नशीला पदार्थ का सेवन किया था। तो वो कहता है

01:39:43:06 याद है थ्री इयर्स में कॉलेज का सीन था। जी भैया जी भैया जिन्होंने देखा होगा वो याद होगा। तो ऐसे ही इस वालों से ऐसे इस वालों से कोई पूछता है कि भाई तुम्हारी फिलॉसफी क्या है? तुम्हारा सिद्धांत क्या है? तो ये भी क्या करते हैं? [हंसी] ए से ले जेड तक सब बोल दो। कुछ रह ना जाए। है ना? तो उसमें क्या होगा कि अरे भाई तुमने कैसे बोल दिया? अरे अरे हमने वो भी तो बोला है। अरे तुमने वो कैसे बोल दिया? हमने ये भी तो बोला है। हमने तो सब कुछ बोला है। हमारा सिद्धांत क्या है? हमारा कोई हमारा सिद्धांत क्या है? हमारा कोई सिद्धांत नहीं है। [हंसी] ये है स्थिति लोग ये लोग मानेंगे भी नहीं भी मानेंगे मतलब ये व्यक्ति पहले तो बोलता है कि हम मतलब सबसे बड़ा बात जो वहां पे आया कि बोलता है कि कटाक्ष जब उसने किया और बाद में बोलता है हम कटाक्ष नहीं कर रहे थे। यह जो बात है मुझे एक मिनट उग्र तापस जी आप अभी जाइए और हमारे वीडियो के अंत में हमारा नंबर

01:40:58:09 दिया होता है। ठीक है? वहां पर हमसे संपर्क करिए और फिर बताइए कि आपको क्या चर्चा करनी है। बेकार में परेशान होने की आवश्यकता नहीं है आपको। हां बोलिए शास्त्रवाद जी। जी भैया। उसने जो पहले कहा कि उसने आप पे कटाक्ष नहीं किया जबकि उसने कटाक्ष किया था मुझे ऐसा लगा और वही बात सभी पता नहीं अब वो तो जी लेकिन वो तो कह रहा था कि अब कटाक्ष नहीं किए जबकि कैसे सिद्ध हुआ वो मैंने कमेंट में भी लिखा था कि आपने आप जो बात कर रहे थे कि इस के जो कुछ जो बड़े-बड़े लोग होते हैं वो लोग ऐसा कुछ श्री कृष्ण और शिव जी के विषय में कुछ बोल स्पष्ट बोलते हैं। दूध दही का एग्जांपल देते हुए बोलते हैं दूध दही का एग्जांपल देते हुए इस के कई ऑथेंटिक रिप्रेजेंटेटिव है जो ये दावा करते हैं कि जिस प्रकार दूध से दही बनता है पर दही से दूध नहीं उसी प्रकार कृष्ण तो शिव बन सकते हैं पर शिव से कृष्ण नहीं तो ये बोलते हैं तो ये मैं बोल रहा था उसके बीच में उन्होंने कुछ तो बोल दिया तो मैंने फिर मैंने उनको बताया कि मैं भूल जाता हूं तो इसलिए आप ठोके ना

01:42:13:10 अब उन्होंने इतने में भूल गया मेरे मुख से निकला कि भाई मैं क्या बोल रहा था कि कुछ भी तो नहीं बोल रहे थे। सब माया ही तो है। कुछ नहीं हो रहा था। यह कटाक्ष था उनका क्योंकि वो वहां से सहम गए थे ना। ऐसा हो सकता है ऐसा हो सकता है क्या? मतलब वो इसके बियों्ड कभी गए नहीं ना। ऐसा हो सकता है क्या? ये जो चीज आती है ना ऐसा हो सकता है क्या? ये लोग इसके बियों्ड कभी गए नहीं। अगर जाते तो अद्वैती हो जाते। बिल्कुल बिल्कुल। यहां पर उसने माया शब्द जो ले आया कि माया ही है कट। तो भाई जब माया का बात चल ही नहीं रहा तो तुम माया क्यों बोल रहे हो? अगर तुम माया बोल रहे हो तो यह सीधी बात है कटाक्ष है कि तुम कह रहे हो कि सब तो माया ही है कुछ हो नहीं रहा। जबकि भैया पूछ रहे हैं कि क्या हुआ? क्या चल रहा था? तो उसने बोला कुछ चल ही नहीं रहा। सब माया ही है। तो यह तो कटाक्ष ही है ना। इसको कोई कैसे बोल देगा? कटाक्ष नहीं है। ऊपर से भाई इसने तो बहुत बड़ा बात कर दिया। आज तो अपने भगवत गीता पे हाथ रख के इसने ये बात बोली है कि मैंने आपके ऊपर आपके आपको विशेष करके नहीं बोला। जबकि सभी जानते हैं आप ही ने पूछा था और फिर उसने ऐसा बात बोला तो फिर उसका ये बात मुझे झूठ ही लग रहा है। लेकिन अब क्या बोले? उसके लिए भगवत गीता का भी कोई मूल नहीं है क्या?

01:43:29:06 बात ये है कि भाई अगर तुमने मेरे लिए नहीं बोला तो अपनी बोलने की टाइमिंग का आप ध्यान रखो ना। हम जैसे मान लो कि जी कोई मुझसे कोई मुझसे मेरे पिता का नाम पूछे या मैं तथागत जी से उनके पिता का नाम पूछूं कि इनके पिता का नाम है और इतने में कोई बोल दे किसी और नाम को हम और मंच पर बात चल रही हो सार्वजनिक रूप से बात चल रही हो तो तथागत जी कहेंगे ना क्या कर रहे हो भाई होश संभाल के रहो ना पिता का नाम बोला जा रहा है तुम उसमें ये बोल दे रहे हो नाम बदल दे रहे हो पिता का जबकि अब वो व्यक्ति कह कि भाई मैंने तुम्हारे लिए नहीं बोला था। मेरे मुंह से निकल गया। तो भाई मुंह से निकलना नहीं चाहिए। यह गलती है। होश रखो। बच्चे नहीं हो। है ना?

01:44:21:06 [गला साफ़ करने की आवाज़] जी अनिकेत जी बोलिए। जी मेरी आवाज आ रही है भैया? आ रही है। बिल्कुल साफ बोलिए। हां हां अब नेटवर्क थोड़ा तो मैं यह कह रहा था कि वो व्यक्ति कटाक्ष ही कर रहा था। मुझे भी कई लोगों ने मैसेज किया कह रहे हैं कि शिवश भैया से कहिए कि थोड़ा सा वो हंसकर बोल रहे हैं सीधा है साधा है। कटाक्ष देखिए समझ में आ जाता है। सब माया है। सब माया है। ये जो व्यक्ति आए थे ना अभी इन्होंने कई बार मैंने देखा है लाइव में भी और हमारे उसमें भी कमेंट कई बार किए हैं कटाक्ष भरे। मैं अभी मिल जाएगा। उसने डिलीट नहीं किया होगा तो मैं निकाल के दिखा दूंगा। ये कई दिनों से जो है वो देख रहे हैं वीडियो। बस शर्त ये है कि मैं एक चीज कहना चाहूंगा जो भी जुड़ना चाहता है इस की तरफ से वो पहले जाकर के शिवश भैया का वीडियो देख ले। उन्होंने लगभग एक जैसे ही प्रश्न किए और आप लोग का लगभग एक जैसा ही उत्तर आता है। अलग नहीं आता है। तो थोड़ा सा उसको देख लीजिए। कहां पर आपके लोग फंसते हैं फिर थोड़ा सा प्रिपेयर होकर आइएगा वो दूध दही लस्सी दूध दही लस्सी एक ही चीज ब्रह्म समिता ब्रह्म समिता खैर लेकिन ये अच्छा लगा बहुत अच्छा लगा भैया नया चीज देखने

01:45:36:07 मिला कि ये व्यक्ति ने माना कि शिव और हरि में कोई भेद नहीं है। बढ़िया था ये। वह असल में क्या है कि आप यदि सिद्धांत की रक्षा करने जाओगे तो धीरे धीरे धीरे धीरे करके आप वो अद्वैती हो जाओगे शंकराचार्य की शरण में आ जाओगे या फिर आप इन प्रश्नों से बचते रहोगे जो बिल्कुल क्लियर कट प्रश्न आएंगे तो उनसे फिर आप बचोगे यही तो मैं कहता हूं कि व्यक्ति अगर वास्तव में सिद्धांत की रक्षा करने निकलेगा तो व्यवहार में द्वैत परमार्थ में अद्वैत कोई दिक्कत नहीं है तो सिद्धांत की रक्षा करने निकलोगे तो अपने आप आप शंकराचार्य वाले हो जाओगे और वो व्यक्ति सिद्धांत की रक्षा करने के चक्कर में उसने जो है ये चीजें मान ली बस वो बात अलग है कि जब उसने कैमरा ऑफ किया या जहां वो गया तो उसको चीजें पता चली नहीं नहीं नहीं नहीं नो नो नो नो नो नो जैसे वो राम लखन में अंत में गाने के अंत में होता है ना वो एक कंपटीशन चल रहा होता है वो कहता है कि मैं हीरो हूं और वो कहता है मैं जीरो हूं तो लास्ट में वो नहीं हां लास्ट में जो नायक होता है वह खलनायक पक्ष

01:46:51:10 को उसके ही मुख से निकलवा देता है जो उसका पक्ष था। नायक अपने विपक्षी को अपने पक्ष की बात विपक्षी के मुख से निकलवा देता है। तो जब विपक्षी के मुख से बात निकल जाती है उसको सिद्ध करना था कि मैं हीरो हूं और वो बोल देता है मैं जीरो हूं। तो जब वो जीरो बोल देता है तो बोलता है नो नो नो नो नो नो नो तो वही हाल इनका हो रहा था कि इन्होंने बोल तो दिया कि शिव और कृष्ण एक है। नो नो नो नो नो नो जरा सा अंतर है। ये जरा सा अंतर है। जरा सा भाई एक बार बोलो ना सिद्धांत क्या है?

01:47:34:14 बात यही है कि अब देखिए कुछ ना कुछ ढूंढ कर लाएंगे। प्रयास तो करेंगे कि आज हां जी अरे भैया उन्होंने तो आज आज तो इतना ही ये भी कह दिया कि कृष्ण भी शिव नहीं बन सकते [हंसी] ये जो है ना स्टार्टिंग में उन्होंने बोला था अभी अभी अभी वो वाली बात आनी बाकी रह गई थी यहां तो बाधित भी कर दिया बाधित भी कर दिया यहां लो तो वही बात है वही कल जो बोबड़ा हमें कल बोबड़ा सोल बोल रहा था ना कि जब जब हम फसेंगे तो फिर कृष्ण भी बाधित है बस निरोत्तर नहीं होना चाहिए बस यही हाल है बोबड़ा बोबड़ा सोल आज बातें कर रहा है कृष्ण भी शिव नहीं बन सकते भैया बोबड़ा सोल आज बातें कर रहा है कि भाई उसने हमारे विरुद्ध जो है ऐसा वीडियो बनाया है इसलिए हम जवाब दे रहे हैं और यह यह भ्रम फैला रहा है कि हमने शिवश नारायण द्विवेदी को चर्चा के लिए बुलाया। भाई मुझे मेरी जानकारी जो है इसने यह कहा था कि भाई संस्कृत में होगी और मेरा यह कहना था भाई तू संस्कृत

01:48:49:15 में पहले तू वीडियो तो बना संस्कृत में तो हम देखेंगे संस्कृत में होगी कि नहीं होगी। मेरा क्या है मैं किसी ट्रांसलेट को ले आऊंगा अगर मुझे नहीं भी आती होगी तो। वो तो बाद की बात है। तुम अपने जो संभाषण है संस्कृत में करो ना। फिर देखते हैं उसका खंडन करना है कि नहीं करना है। दूसरी बात कि भाई सीधी सी बात है चर्चा के लिए हमने अपना नंबर दिया हुआ है। फिर नंबर पर संपर्क करो और चर्चा सुनिश्चित करो। पर नहीं अपने लोगों को मूर्ख बनाना है। अभी बोबड़ों से डर के भागना पड़ेगा। और एक चीज और बता रहा है कि हमने उसका उसकी अवमानना की है। सालों से वो तोता वो हज करने गए। वो तोता बने वो ये है वो वो है सालों से हैवान ये वो करता जा रहा है शक्ल शक्ल बिगाड़ता जा रहा है और फिर आज वो कह रहा है हमने उसके ऊपर वीडियो बनाया है उसकी अवमानना कर दी है थोड़ा सा विनोद पूर्ण वीडियो है वो हो गई उसकी अवमानना और तुम सालों से जो है यह पी पी कर रहा है ये वो सब कर रहे हो तब तुम्हें याद नहीं आया खैर कोई बात नहीं वो क्या कहते हो उसे वह

01:50:00:09 शंकराचार्य की लाइब्रेरी में कानून की किताब भी पढ़ी है हमने तो खेल अच्छा है तुम्हारा व्यक्ति गलत चुन लिया तो चीजें अभी आगे आपको प्रस्तुत की जाएगी बहुत सारी अच्छी अच्छी खैर तो फिर ठीक है पूरी पूरी करें चर्चा आज समापन वो सोचता होगा बस एक चीज भैया वो सोचता होगा कि जिसका वो चेहरा बिगाड़ता है और जो भी चीज वो कहता है उससे शायद शिवाय नारायण द्विवेदी को दुख हो जाएगा।

01:50:33:07 [हंसी] वो ये सोचता होगा शायद शिवाय नारायण द्विवेदी को दुख होगा तो वो बनाना बंद कर देगा वीडियो। हां ऐसा ही सोचता होगा या एक एक ये भी बात होती है कि भाई मैं कुछ कर तो सकता नहीं हूं। है ना? वो एक नपुंसक चेहरा तक नहीं दिखा सकता हूं। तो चलो यही कर लेते हैं। एक ज्ञानार्थक नपुंसकता भी होती है ना भाई। व्यवहारिक नपुंसकता अलग है पर कुछ ना करने के संबंध में एक ज्ञानार्थक नपुंसकता भी होती है कि ना कुछ कर पाने वाली जो हीन भावना है मन में उसके लिए क्या करें कि चलो एडिटिंग कर देते हैं। इतना तो कर ही सकते हैं। है ना? तो शारीरिक रूप से भले ही नपुंसकता ना हो मगर वो मानसिक रूप से कुछ ना कर सकने वाली भावना तो मन में आ ही रही है ना। वैचारिक तो है ही है ना नपुंसकता वो चीज चलिए ठीक है किसी भी प्रकार के वैचारिक मतभेद के निमित्त हम इस वीडियो के अंत में दिए गए WhatsApp पर नंबर पर WhatsApp करें और लाइव चर्चा के लिए फॉर्म भरे। ठीक है? और एक बात ध्यान रखें कि हां एक बात ध्यान रखें कि कोई नहीं एक बात ध्यान रखें कि यहां पर आपके साथ अच्छा एक सौहार्दपूर्ण

01:51:48:14 चर्चा हो सकती है। आप अपने जो स्वरूप भूत लक्षण है उनको थोड़ा कंट्रोल में करके आए जो आपके पिंच किए गए शोम शोम शोम सामो साशा वाला है ना कि वो जो भरा गया आपके अंदर उस पर थोड़ा कंट्रोल करके आइए ठीक है। ठीक है शास्त्रवाद जी जी भैया ठीक है जय श्री राम सभी को जय श्री राम जी भैया जी भैया जय श्री राम

01:52:42:28 [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 1:52:47 · 14 Jun 2026

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