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00:00:01:01 तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे। हमारे साथ यहां पर हमारी गुरु बहन है विजयश्री और हम लोग लेट हैं। दिया गया जो आपको समय था उससे करीब 40 से 45 मिनट लगभग लेट हो चुके हैं। 47 मिनट हमको दिखाई दे रहा है कि लेट हैं हम लोग। तो इसके लिए हम क्षमा प्रार्थी हैं। मैं तो अपनी बात बताऊं तो भैया टेक्निकल हैंड जो है मेरा बहुत कमजोर है और जो क्या कहते हैं इस तरह के जो साथी होते हैं जो टेक्नो होते हैं टेक्नो टोनी स्टार टाइप के वो ऑफ पे है दूर है कोई चट पर बनाने गया है और तो और ये मेरा फर्स्ट लाइव है और मुझे भी ज्यादा कुछ पता नहीं था तो हमारे साथ प्रेयर करने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद पर हम डेफिनेटली क्षमा प्रार्थी है कि आप लोगों को इंतजार करना पड़ा। पर आई प्रॉमिस यू कि जितना आपको इंतजार करना पड़ा है यह कन्वर्सेशन उतनी ही अमेजिंग होने वाली है। एंड वी आर गोइंग टू कवर अ लॉट ऑफ़ थिंग्स एंड वी आर आल्सो गोइंग टू टेक क्यूएनए। सो फर्स्ट ऑफ़ ऑल पीपल बिकॉज़ दिस विल बी शेयर्ड ऑन माय पेज एस वेल।

00:01:16:07 एंड देयर आर टू थिंग्स दैट आर हैप्पेनिंग। आई विल सेट द टोन टू व्हाट द डिस्कशन इज़ अबाउट। ये डिस्कशन में दो भाषाओं का प्रयोग किया जाएगा। हिंदी और अंग्रेजी क्योंकि हमारे व्यूअर्स हिंदी और अंग्रेजी दोनों में ही कंफर्टेबल है। एंड वी बोथ हैव दैट कंफर्ट इन द लैंग्वेज। आई हैव अ गुड कंफर्ट इन इंग्लिश एंड ऑफ कोर्स इज़ हिंदी इज़ ग्रेड एज वी ऑल नो वी हैव ऑल सीन। बिफोर स्टार्टिंग दिस लाइव आई वांट टू इंट्रोड्यूस यू टू शिवश फॉर द पीपल हु डोंट नो हु शिवश जी इज़। शिवश जी एक ऐसे सनातनी है जिन्होंने अपने धर्म को जाना और अपने धर्म को जानते हुए उन्होंने यह देखा कि समाज में धर्म के नाम पर लोग कितना अधर्म फैला रहे हैं। नॉट जस्ट दिस बट ही इज एक्टिवली पार्टिसिपेटिंग इन रीइंफोर्सिंग धर्म फॉर एवरीबडी अराउंड अस। इमेजिन पीपल हु स्टार्ट राइटिंग रॉन्ग थिंग्स अबाउट आवर धर्मा। सोचिए एक बार कि आपके पढ़ पढ़ पढ़ पढ़ पोते पोतियां किसी दिन एक पुस्तक उठाएं और उसमें पढ़े कि

00:02:31:25 शिव जी तो इतने गंदे थे या पार्वती माता कितनी बुरी थी तो आपको कैसा लगेगा? बातें इतनी गंदी है कि मैं उनको शब्दों में भी बोल नहीं पा रही। बट हियर व्हाट वी आर ट्राइंग टू अंडरस्टैंड दैट वी वुडंट वांट दैट। सो देयर आर अ लॉट ऑफ पीपल हु आर स्टिल ट्राइंग टू डू दैट विद आवर ओन धर्म। एंड लेट मी रिमाइंड यू दीज़ आर नॉट पीपल फ्रॉम आउटसाइड। दीज़ आर पीपल हु आर इंडियन। एंड शिमाश जी हैज़ बीन वर्किंग डे एंड नाइट टू वर्क ऑन दैट एंड वेरी वेरी लीगली एंड सून वी विल फाइंड अमेजिंग रिजल्ट्स फ्रॉम दैट मूविंग फॉरवर्ड शिवश जी इज़ आल्सो माय गुरु ब्रदर वी कम फ्रॉम द सेम गुरु परंपरा एंड टुडे ऑल द डिस्कशन वी आर गोइंग टू हैव हैज़ वन अमेजिंग बेनिफिट और वो मोस्ट अमेजिंग यूनिक बेनिफिट एंड द यूनिक क्वालिटी ऑफ़ दिस चर्चा इज़ कि आपको जो भी इंफॉर्मेशन हम देंगे वो इंफॉर्मेशन शास्त्रीय होगी इसकी गारंटी हम लेते हैं। दिस पॉडकास्ट इज़ अनलाइक एनी अदर पॉडकास्ट व्हेयर वी टेल यू इन अ डिस्क्लेमर इन द

00:03:46:28 बिगिनिंग कि दिस कन्वर्सेशन इज़ जस्ट फॉर द सेक ऑफ़ कन्वर्सेशन सेल्फ ओपिनियन हां दीज़ आर सेल्फ ओपिनियंस एंड आप इसको सीरियसली मत ले एंड आई हैव सीन दिस हैपनिंग इन मेनी पडकास्ट दैट दे गिव यू दिस डिस्क्लेमर सो आवर डिस्क्लेमर इज कि हम जो भी चर्चा करेंगे वो शास्त्रीय प्रमाणित होगी आप इसके बारे में अगर तो शास्त्रीय प्रमाणिक परंपराओं के पास जाके उन आचार्यों से पूछेंगे तो वो भी आपको सेम ही एडवाइस करेंगे। सो वेलकम टू अ वन ऑफ अ काइंड पडकास्ट धर्म अनवी विद विजयश्री एंड ऑफ कोर्स शिवश द्विवेदी जी। हम लोग क्या-क्या टॉपिक्स कवर करेंगे उसके ऊपर तो हमने ऑब्वियसली शेयर किया ही था। बट टू मूव फॉरवर्ड इन अ लिटिल डिफरेंट डायरेक्शन एंड फाइनली स्टार्ट आवर पडकास्ट। आई विल हैव शिवश्री टॉक अबाउट अ फ्यू थिंग्स विद यू एंड देन वी विल डेफिनेटली टेक योर क्वेश्चन। तो हमारी गुरु बहन ने भी बहुत सारा परिचय दिया है और काफी सारा आपको अवगत कराया कि आज की चर्चा का उद्देश्य क्या है और अगर हम देखें कि प्राथमिकता में इस चर्चा का उद्देश्य है कि हमारी गुरु बहन है वो काफी दिनों से

00:05:02:02 जब से वो पूरी गीताधीश्वर जी के सानिध्य में आई उन्होंने दीक्षा प्राप्त की और उन्होंने अपने जीवन में जो यथोचित परिवर्तन लाते हैं आध्यात्मिक उन्नति की ओर उन्होंने और भी ज्यादा स्पीडली उनको को पकड़ा और उस पथ पर वो आगे बढ़ी हैं। तो ऐसे में क्या है कि जो उनको फॉलो करते हैं डायरेक्टली जो उनसे जुड़े हुए हैं उनके Instagram पेज आप जानते हैं तो उसमें उनके पास आए दिन कई क्वेरीज आती है धर्म से रिलेटेड ब्रह्म से रिलेटेड जो लोग मेरे फॉलोवर है वो इन दो शब्दों को अच्छे से जानते होंगे। धर्म और ब्रह्म जिन चीजों पर हमारा सारा पूरा जो सार्वभौम सिद्धांत है वो टिके हुए तो धर्म जिज्ञासा अथातो ब्रह्म जिज्ञासा तो इनको बहुत सारी क्वेरीज आती है तो इसमें जो प्राथमिकता एक इनकी ओर से जो दी गई है वो इनके जो वो फॉलोअर्स हैं जो कहीं ना कहीं धर्मनिष्ठ हो रहे हैं और वो धर्म की ओर आकर्षित हो रहे हैं। धर्म की जो ऐसी चीजें है ना वही अकाट अकाट्य सिद्धांत सनातन धर्म के उनकी ओर आकृष्ट हो रहे हैं और उनकी कई क्वेरीज होती है वर्णाश्रम को लेकर के धर्म को लेकर के या सर्वशक्तिमान ईश्वर को लेकर के अपार विषय ग्रंथों को लेकर के

00:06:17:03 गुरु परंपरा को लेकर के और उसमें भी सार्वभौम गुरु परंपरा को लेकर के तो इन जो हमारे यहां आहान के जो बेसिक फंडामेंटल्स है जिनके ऊपर आहान टिका हुआ है आहान का कोई बहुत वृद्ध वो नहीं है। मगर आप कभी भी स्वतंत्र रूप से अगर गुरुदेव का जो जगतुगुरु शंकराचार्य जी है उनका अगर आप कोई सेशन देखेंगे जिसमें कि वो किसी के प्रश्न का उत्तर नहीं दे रहे हैं। कोई अधिवेशन है तो उसमें जो उनका एक धारा होती है वो लगभग इनहीं पांच सिद्धांतों के ऊपर वो चल रही होती है कि नास्तिकता का कैसे जवाब दिया है हमारे सनातन धर्म ने। फिर हमारा ईश्वर ही ईश्वर कैसे सिद्ध होता है। है ना? सत्यम ज्ञान अनंतम ब्रह असतो मास सदगमया पहला उसके बाद सत्यम ज्ञान अनंतम ब्रह फिर अपुषय ग्रंथ फिर ज्ञान वही प्रमाणित जो परंपरा से प्राप्त हो और लास्ट में परंपरा और परंपरा का जो वास्तविक ज्ञान है वो हमें किससे मिलता है श्री राम जी से तो श्री राम जी को फॉलो कर लो या किसी परंपरा प्राप्त गुरु के आश्रय हो के आप अपने धर्म के पथ पर आगे बढ़े तो ये इन पांच सिद्धांतों के आसपास हमारा जो स्ट्रक्चर है खड़ा हुआ है सिद्धांतों का। तो अब

00:07:32:04 इन्हीं सिद्धांतों को लेकर के इनके पास बहुत सारी क्वेरीज आती हैं। तो उन्हीं को लेकर के आज हम आगे बढ़ने वाले हैं। आज हमारे पास जो कुछ क्वेरीज है आई हैव आल्सो मेंशन देम इन द क्वेश्चन स्पेशली इन द पोस्टर दैट वी ऑल शेयर विद यू टुडे अबाउट आवर लाइव पडकास्ट। एंड द मोस्ट अमेजिंग थिंग इज कि हम लोग इस समय लाइव है। यू आर वाचिंग अस लाइव। सो वी विल आल्सो सी द क्वेश्चन वी गेट एंड वी विल आल्सो ट्राई टू आंसर यू। पर आज के डिस्कशन का जो हमारा पहला टॉपिक है वो ये है कि व्हाट डस इट मीन टू फॉलो ऑथेंटिक नॉलेज स्ट्रेट फ्रॉम द शास्त्र एंड नॉट फ्रॉम सोशल मीडिया ट्रेंड्स। इस प्रश्न को हम थोड़ा तोड़ते हैं कि जैसे आजकल अ इट्स वेरी कॉमन है ना कि रील्स के अंदर बोल देते हैं कि महामृत्युंजय मंत्र बोल दीजिए। जी या फिर कोई भी बीज अक्षर के साथ आपको वो मंत्र दे देते हैं स्पेशली प्रणव के साथ तो वो जो हम मंत्र ले लेते हैं है ना तो वो मंत्र हमें कैसे पता चले कि हमें वो मंत्र पढ़ने हैं या नहीं पढ़ने हैं या फिर हम सबसे ज्यादा ये सोचे कि क्या ये जो मंत्र हैं सोशल मीडिया पे जो हमें मिल रहे हैं हम उसको फॉलो करें ना करें और एक

00:08:47:06 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरर की क्या रिस्पांसिबिलिटी बनती है आपको बताने के लिए कि यह मंत्र किसके लिए है या किसके लिए नहीं। जी तो इसके ऊपर जब हम डिस्कशन करते हैं मेरा पॉइंट ऑफ व्यू ये रहता है कि जो मंत्र पहले तो दीक्षा के साथ होते हैं वो आप दीजिए ही मत। है ना? बीज अक्षर को हटा ही दें। पर ऐसे बहुत सारे श्लोक हैं, कुछ पद है जिसको बोलकर भी हमें बहुत फल प्राप्त होता है या सबसे ज्यादा नाम जप है तो आप उसको क्लेरिफाई कर दे कि आप ये कर सकते हैं। इसके लिए आपको दीक्षा की जरूरत नहीं है। है ना? तो इसके ऊपर आप भी अगर थोड़ा बताएं हमारे जो व्यूअर्स है उनको तो दे कैन अंडरस्टैंड इट मोर। एंड द सेकंड फेस हियर इज टू आल्सो अंडरस्टैंड कि सोशल मीडिया पर आपको मंत्र देने वाले लोग आपको मंत्र नहीं दे सकते। है ना? स्पेशली जो 20 अक्षर वाले मंत्र है और ऐसा क्यों है? जी दैट इज समथिंग दैट वी आर ट्राइंग टू अंडरस्टैंड। देखिए ये प्रश्न बहुत वैसे अगर मैं अपनी बात करूं तो हमारे लगभग हर वीडियो में प्रश्न आ ही जाता है कि भाई

00:10:02:12 किसी के भी द्वारा प्राप्त होने वाली जो धर्म धर्म की शिक्षा है वो हम क्यों प्राप्त करें? तो सबसे पहले बात तो यह है कि आप धर्म को लेकर के कि आप धर्म का ज्ञान लेने के लिए सुन किसको रहे हो यह जानना बहुत आवश्यक होता है और ये जानना बहुत आवश्यक होता है कि आप धर्म के विषय में किसको सुन रहे हो किसकी बातें सुनकर के आप अपनी चीजों का निर्णय कर रहे हो। पहली बात ये कि हम सुन किसको रहे हैं? तो सुनने के विषय में यदि हम कहे कि हम शिव जी को मानते हैं। यदि हम कहे कि राम जी को मानते हैं। जैसे मैं अभी कुछ दिन पहले जो तथाकथित वो सेल्फ प्रोक्लेम आचार्य है आचार्य प्रशांत उनके अनुयायियों के पास में गया था। एक छोटी सी कन्वर्सेशन हुई थी हमारे YouTube चैनल पर डली हुई है। तो उन्होंने कहा कि भाई श्री राम श्री रामचंद्र जी को ले कोई क्लेम किया था मैंने कि श्री रामचंद्र जी मनुस्मृति को मानते थे। तो वो जो अनुयाई थे सो कॉल्ड आचार्य के वो बोलते हैं कि श्री रामचंद्र जी ने लिखी है क्या रामायण? हां हमने देखा है ये वो कहते हैं कि श्री रामचंद्र जी ने रामायण लिखी है क्या? तो फिर आप ये कैसे मान सकते हो कि श्री रामचंद्र जी मानते थे अच्छा तो मेरा प्रश्न वहां पर ये था कि आपको राम शब्द कहां से मिला?

00:11:17:27 कहां से मिला राम राम शब्द? यदि आप राम के अस्तित्व को स्वीकार करते हैं कि हां भाई कोई मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र आए थे जिनके लिए रामो विग्रह धर्म कहा गया श्री राम धर्म का साक्षात स्वरूप है तो जहां से आपको आप राम के अस्तित्व को मान रहे हैं वहीं से राम के विषय में जो दूसरी जानकारियां है वो आपको माननी होंगी अगर आप उसी ग्रंथ की दी हुई दूसरी जानकारियों को डिनाइड कर रहे हैं कि भैया हम इस रामायण से राम को तो ले रहे हैं मगर मगर जो राम जी के विषय में दूसरी जानकारियां दे दी गई है कि वो ऐसे थे वो ऐसे करते थे वो वैसे करते थे वो उन जानकारियों को हम अपने मनो मुताबिक मानेंगे उसको हम मानते हैं ये किसी ने अज्ञानता वश या फिर लालचवश द्वेषवश भयवश किसी कारण से प्रभावित रूप से वहां लिख दिया है कि राम जी वनस्पति को मानते थे तो हमें मानना पड़ेगा यदि हम किसी के कहे हुए के अनुसार श्री राम जी चंद्र जी तो रामायण लिख के आपको नहीं दे रहे हैं कि भैया मैं था मैंने यही प्रश्न किया कि रामचंद्र जी ने तो ये नहीं कहा ना कि मैं था। वाल्मीकि जी ने ही कहा ना कि वो थे। तो अगर वाल्मीकि जी के कहे अनुसार आप राम का श्री रामचंद्र जी का अस्तित्व स्वीकार कर रहे हैं तो वाल्मीकि जी के कहे अनुसार ही आपको स्वीकार करना होगा कि रामचंद्र जी मनुस्मृति

00:12:33:15 को मानते थे। इसी प्रकार से जो लोग ये कहते हैं कि हम शिव जी को मानते हैं मगर जो शास्त्र है ना शास्त्रों में यू ही कुछ अपने मन से ऋषियों ने लिख दिया उसको मानना आवश्यक नहीं होता। तो बात ये आती है कि वो शिव जी को मानते कहां से हैं? कहां से आपने शिव जी को लिया है? शिव जी का स्वरूप शिव जी की जो लीलाएं हैं, शिव जी की जो शक्तियां है, जो भी उनकी कथाएं हैं जिनके कारण आप शिव जी को जानते हो, उन्हें मानते हो, उन्हें भजते हो वो सारी चीजें आप जो सोर्स ऑफ नॉलेज जहां से आपको मिल रही है वहीं से आपको मानना पड़ेगा। हां तो जो लोग ये कहते हैं कि ना कि आधी अधूरी शास्त्र की इतनी बात मान लो इतनी बात मत मानो इसका खंडन किया गया है हमारे न्याय शास्त्रों में इसको कहा गया है अर्ध कुकुट न्याय इसको कहा गया है अधूट न्याय मतलब किसी की एक चीज आपने मान ली और उसी व्यक्ति की दूसरी चीज आपने नहीं मानी आपने कहा शिवजी देखो ऐसे डमरू बजाते हैं ये प्रमाण है शिवजी के पास डमरू है ये हमने मान लिया मगर शिवजी के पास त्रिशूल है ये हमने नहीं माना तीसरा नेत्र है ये हमने नहीं माना यदि आप तीसरा नेत्र नहीं मानते तो आप यह भी मत मानो कि डमरू है। यदि आप तीसरा नेत्र नहीं मानते तो यह भी मत मानो कि शिवजी थे। कोई और अपना स्वतंत्र रूप से ऐसा सोर्स ऑफ नॉलेज लाओ जिसमें ये क्लियर हो कि शिवजी

00:13:48:21 थे। तो पहली बात तो ये हो गई कि शास्त्रों को पूरा का पूरा मानना आवश्यक है। उसी को कहते हैं प्रमाण्य बुद्धि। अब दूसरी बात आती है कि जैसा कि विजय जी ने बताया कि नॉलेज किससे ले? तो शास्त्रों के द्वारा बताया गया कि नॉलेज किससे ले? इसकी नॉलेज आपके लिए ऑथेंटिक हो सकती है। हां, ये बहुत जरूरी है क्योंकि इस बात में मैं एक और चीज ऐड करना चाहूंगी। स्पेशली फॉर माय व्यूअर्स जो भी इनके व्यूअर्स हैं आप लोग फिर भी बहुत कुछ समझ पाएंगे ऑलरेडी। बट अ लॉट ऑफ़ माय व्यूअर्स दे आर बिगिनर्स। एंड वो बहुत क्यूरियस है। एंड यू ऑल वांट टू नो एंड अंडरस्टैंड अ लॉट ऑफ़ थिंग्स एंड दैट्स व्हाई आई एम गोइंग टू टेक ब्रेक्स एंड ब्रेक इट डाउन फॉर यू। सो यू कैन अंडरस्टैंड फास्टर। तो अब बात यहां पर दोबारा ये आ जाती है कि इस इनफ्लुएंसरर ने डाला कि बे महामृत्युंजय मंत्र बोल लो। इस इनफ्लुएंसरर ने डाला गायत्री मंत्र बोल लो। और दूसरा बोल रहा है कि नहीं बोलना है दीक्षा की जरूरत है या ये मंत्र आप नहीं बोल सकते हैं। तो फट से हम चले जाएंगे। ये तो डिस्क्रिमिनेशन है। कैसे नहीं बोल सकते? जस्ट बिकॉज़ मंत्र आपको अवेलेबल है। Google पर लोगों ने गाने गा लिए हैं। तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप

00:15:03:25 वो कर लें। मेरा प्रश्न उनके यही सबसे पहले तो हम थोड़ा पीछे चलते हैं कि माय क्वेश्चन गोस टू यू। आप पहले ये समझिए आपको मंत्र कहां से मिला? आपको मंत्र पुस्तक से मिला है। अब वो पुस्तक में वो मंत्र लिखा है। उसका अर्थ क्या है? उसको आपको देने का दीक्षा होगी ना। इसीलिए तो गुरु अपना शिष्य बनाता था। मंत्र देके तो शिष्य बनते हैं। अब क्योंकि आपको गुरु ने मंत्र देके शिष्य नहीं बनाया तो आप ऐसे ही मंत्र मत उठाइए। अब और पीछे जाते हैं कि अब आपको वो मंत्र गुरु से कैसे प्राप्त होगा? क्या वीडियो में सुन के प्राप्त होगा? और कौन गुरु है जो आपको वो मंत्र प्राप्त कराएंगे? तो ऑब्वियसली कोई वीडियो में बोल के आपको मंत्र नहीं दे सकता। फोन पे मंत्र बोल के आपकी दीक्षा नहीं कर सकता। पैसे लेके आपको मंत्र देके या चार पांच योगिक ट्रिक्स करवा के आपको वो नहीं कर सकता। तो अब यह बात आपको समझनी पड़ेगी और जो भी इनफ्लुएंसरर आपको सबसे पहले क्योंकि हमारा सेकंड टॉपिक इसके बाद यही आएगा कि आप सबसे पहले देखिए कि आप जिसे फॉलो कर रहे हैं वो कौन से गुरु परंपरा से आ रहे हैं। अगर वो किसी गुरु परंपरा से नहीं आ रहे हैं जो शास्त्र प्रमाणित

00:16:18:28 है। आप उनकी बातों को सीरियसली मत लें। आप उनको बस एक कंटेंट वैल्यू उनकी है डिपेंडिंग अपॉन हाउ मच मनी यू कैन इन्वेस्ट। आप पांच कैमरे में इन्वेस्ट करते हैं आपका कंटेंट वैसा बनेगा। आप एडिटर में इन्वेस्ट कीजिए, कॉपीराइटर में इन्वेस्ट कीजिए, सोशल मीडिया मैनेजर में इन्वेस्ट कीजिए। दिस इज़ व्हाट आई कॉल फंडिंग। तो, इट्स नॉट अबाउट द क्वालिटी ऑफ़ द प्रोडक्शन क्वालिटी ऑफ़ द कंटेंट। बट इट इज रियली अबाउट द ऑथेंटिसिटी ऑफ द कंटेंट दैट एनीबडी इज गिविंग यू एंड टू नो इट सिंपली इज टू क्वेश्चन ये कौन से गुरु का चेला है या ये कौन से गुरु की चेली है एंड हाउ इज दिस पर्सन गिविंग मी दिस इन तो अब हम यहां से जब आगे बढ़ेंगे व्हाट आई वांट यू टू टेल टू द व्यूअर्स कि भाई ये गुरु परंपरा है क्या है ना और एक मतलब संक्षिप्त में कि अलग-अलग जो हमारी संप्रदाय हैं क्योंकि देखा जाए तो सारे के सारे जो हमारे संत है चाहे हम चैतन्य महाप्रभु ले चाहे हम मधवाचार्य ले चाहे हम शंकराचार्य हमारे खुद की जो गुरु परंपरा है वो ले एवरीबडी इज कंप्लीटली इंटरवाइन है ना

00:17:34:16 तो इसमें एक मैं चीज थोड़ा सा फंडामेंटली अगर सूत्रात्मक शैली में पीछे से बेस क्लियर करता चलूं हां तो सबसे पहले हम इस पर नहीं जाएंगे कि भाई किसी को ये मंत्र पढ़ना क्यों निषेध किया गया और किसी को क्यों कहा गया कि तुम ये करो ये एक अलग चैप्टर है मगर मगर मगर क्या है कि हमको नॉलेज आ रही है और हमको किससे लेनी है किससे नहीं लेनी है तो इसके लिए हम अगर जिससे हम शिव जी को ले रहे हैं जिससे हम राम जी को ले रहे हैं तो राम जी के और शिव जी के विषय में जो अन्य नियम है वो भी उसी से लेने होंगे ये बात क्लियर हो गई तो जो अन्य नियम है कि शिव जी और राम जी की पूजा कैसे करनी गायत्री माता की पूजा कैसे करनी है? गायत्री मंत्र पढ़ना है, किसको पढ़ना है, किसको नहीं पढ़ना है? या फिर महामृत्युंजय मंत्र पढ़ना है, नहीं पढ़ना है, किसको पढ़ना है? ये सारी चीजें भी हमें शास्त्रों से लेनी होंगी। तो शास्त्रों में क्या बताया गया है कि आपको धर्म की व्याख्या किसकी सुननी है, स्पष्ट बहुत सूत्रात्मक शैली में वो मैं आपको पहले क्लियर कर दूं। क्योंकि उसी का एक भाग है परंपरा। तो हम अगले स्टेप परंपरा को क्लियर करेंगे। तो

00:18:43:03 सबसे पहला जो नियम है जो अंतिम निर्णायक हो आपका आपके जीवन में आध्यात्मिक विषय में अगर आप भगवत गीता पढ़ेंगे तो आपको अंतिम निर्णय निर्णायक जो प्राप्त होगा चार 34 और 15 वे अध्याय के अनुसार और अथर्ववेद 11 पांच 16 के अनुसार और मनुस्मृति 12वा अध्याय 112 से 114 के अनुसार जो अंतिम निर्णय निर्णायक आपके जीवन में होना चाहिए वो होना चाहिए कोई सन्यासी कोई विरक्त कोई वैराग्य को पा प्राप्त कर चुका व्यक्ति कोई महापुरुष जिसके अंदर वैराग्य के लक्षण हो कोई सन्यासी हो तो आपके जीवन में मान लीजिए कि आप किसी गृहस्थ से दीक्षा शिक्षा ले भी रहे हैं मगर उसके पीछे भी कोई सन्यासी हो जिसके अंडर अंडर में वो अनुगत रह के आपको कोई सिद्धांत दे रहा हो और आपको ये मालूम होना चाहिए कि जिन अंशों में ये वो सन्यासी जिनके ये शिष्य हैं और मेरे मेरे गुरु जिन अंशों में उनके विरुद्ध जाएंगे तो हम वहां पर उनको मानेंगे क्योंकि वो अंतिम निर्णायक है और उनको ही हम इनके रूप में प्राप्त कर रहे हैं। मान लीजिए कि मैं मेरे मेरा मेरे अंतिम निर्णायक है जगतुगुरु शंकराचार्य ठीक है पूरी पीठाधीश्वर अब मैं उनसे शिक्षा दीक्षा लेने नहीं

00:19:58:04 जा पा रहा हूं या शिक्षा लेने नहीं जा पा रहा हूं परंतु उनहीं की ही शिष्य परंपरा में कोई है जो मेरे घर के काफी निकट है आचार्य है और उन्होंने वेद वेदांगों का अध्ययन किया है। पर मैं उनसे वो मेरे लिए सुलभ है। मैं उनसे शिक्षा ले रहा हूं। मगर मेरे अंतिम निर्णायक तब भी कौन है? सन्यासी पूरी पीठाधीश्वर मैंने दीक्षा शिक्षा इनसे ले रहा हूं। ठीक है। मगर जितने अंशों में ये उनके विरुद्ध जाए क्योंकि मैं इनसे शिक्षा और दीक्षा इसलिए ले रहा हूं। इनके रूप में मैं उनहीं से उन्हीं को अपना गुरु बनाया है। तो अंतिम निर्णायक आपका कौन होना चाहिए? जिसके जीवन में विरक्तता हो। अलग शब्द भेद से अलग-अलग जगह पर ये बात स्पष्ट लिखी है। जैसे 11 5 16 अथर्ववेद ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता है। मनुस्मृति 12वा अध्याय 112 से 114 धर्म प्रसंशय होने पर अधिष्ठाता ब्रह्मचारी को अधिष्ठाता ब्रह्मचारी को बनाए। फिर इसी बात को भगवत गीता में कहा गया है कि जो क्या कहते हैं जो वैराग्य के शस्त्र से ये माया रूपी प्रपंच का जो मूल है उसको काट दिया जाता है तो वो वैराग्य का शस्त्र यानी वैरागी के पास होता है। इसी तरीके से कई अध्याय है उसमें गीता में जहां पर वैराग्य को प्रमोट किया गया है और 15 वे अध्याय में भी बताया गया है कि वैराग्य को प्राप्त कर लेने वाला

00:21:13:10 जिसको जिसके लिए मोक्ष सुलभ हो जाता है तो वो उसके लक्षण बताए गए हैं जो जितेंद्रिय हो जिसका मान मोह नष्ट हो चुका हो जिसका राग द्वेष में जिसका भाव ना रह गया हो तो ये सारे लक्षण घटित होते हैं सन्यासी तो पहला लक्षण क्या है कि आपके जीवन में धर्म और अध्यात्म को लेकर के कोई ना कोई एक सन्यास ्यासी होना चाहिए। पहला नियम आ गया। पहला नियम आ गया सन्यासी। दूसरा नियम है कि वो जो सन्यासी है वो आपको जो शिक्षा दे रहा हो धर्म शास्त्रों का ज्ञान दे रहा हो। वो ज्ञान भी उसने किसी गुरु परंपरा से ही प्राप्त किया हो। पीछे से गुरु परंपरा से उसके पास आ रहा हो। अब गुरु परंपरा क्यों आवश्यक है? मैं अभी बता रहा हूं। पहले क्लियर कर लो। गुरु परंपरा से वो ज्ञान आपके पास उनके पास आ रहा हो वो परंपरा से आपको दे रहे हो। एक तीसरा विषय और है कि वो जितने भी हमारे प्रामाणिक शास्त्र है समस्त श्रुति स्मृति शास्त्र उनमें सामंजस्य की शिक्षा दे रहा हो। ये वही अर्ध्या अभी मैंने कहा ना ऐसा नहीं कर सकते कि अथर्ववेद की इतनी चीज मान ली। अथर्ववेद की इतनी चीज नहीं मानी। ऐसा नहीं कर सकते कि शिव पुराण की एक चीज मान ली और शिव पुराण की दूसरी चीज नहीं मान ली। इसमें हम वो 3G मेथड के बारे में बात कर रहे हैं। गुरु

00:22:28:12 और ग्रंथ जी जी तो हमारा एक मिशन है आहान का। आप जब भी आान का कोई वीडियो देखेंगे लास्ट में एक मिशन आता है। मिशन गुरु गोविंद और ग्रंथ इसको हमने शॉर्ट में नाम दिया है एम थ्री जी। तो इस इसमें ये जो फंडामेंटल्स है हम क्लियर करते हैं सबसे पहले किसी के भी कि आपका जो गुरु वो अंतिम निर्णायक हो वो सन्यासी हो। फिर वो ज्ञान परंपरा से देता हो। परंपरा की बात अगर प्रमाण की करें तो भगवत गीता तीन 16 चार दो शिव पुराण में निरुक्त में कई जगह पर परंपरा की बात हो रही है। मुंडकोपनिषद में ऋषि लोग अपनी परंपरा बता रहे हैं। ऋषि गण जो है वो अपनी परंपरा बता रहे हैं कि सबसे पहले ज्ञान उन्होंने उनको दिया। फिर उन्होंने उन्होंने कहा तक आया। तो ये आपको परंपरा के उदाहरण हमारे धर्म शास्त्रों में प्रामाणिक धर्म शास्त्रों में जगह मिल जाएंगे। अब परंपरा का महत्व क्या है? वो भी थोड़ा सा समझ लीजिए। जब आप अपने घर के किसी बालक को विद्यालय में एडमिशन कराने ले जाते हैं या फिर उसको कहीं कोचिंग में पढ़ने के लिए ले जाते हैं तो आप ये देखते हैं कि जिससे मैं अपने बालक को शिक्षा दिलवा रहा हूं उसने शिक्षा कहां से ली है? स्कूल कैसा है? वो कहां से वो वो कहां से प्रामाणिक

00:23:43:18 है? वो कहां से सर्टिफाइड है? वो स्कूल कहां से प्रमाणिक है? जब भी हम किसी का सर्टिफिकेशन देखते हैं किसी भी मामले तो उस सर्टिफिकेशन में यह लिखा होता है कि उसने वो फलानी शिक्षा कहां से प्राप्त की है यानी कि उसके गुरु का नाम। जैसे इसमें हम ये भी ये भी उदाहरण दे सकते हैं कि जैसे जब हम बच्चे को जैसे कोई बच्चा है बच्चा बीमार होता है तो आप पीडियाटिशियन के पास जाते हैं। उसके पास उस चीज की डिग्री है। हार्ट की बीमारी है तो आप दिल के डॉक्टर के पास जाएंगे। आप कैंसर के डॉक्टर के पास नहीं जाएंगे। कैंसर का बीमारी है तो कैंसर वाले के पास जाएंगे तो हर एक फील्ड के स्पेशलिस्ट हैं। है ना? आप उनके पास जाते हैं। आपको मानसिक पीड़ा आप साइकोलॉजिस्ट के पास जाते हैं। वैसे ही सनातन धर्म जो एक आध्यात्मिक बॉडी है। एक लिविंग आध्यात्मिक बॉडी है जिसके अंदर जो आप पीछे देख रहे हैं इट्स अ स्माल एग्जांपल ऑफ क्या हमारे सनातन धर्म में रस है, ज्ञान है, विज्ञान है। तो उनकी एक्सपर्टीज भी ट्रेडिशनली हमारे पास गुरु परंपरा के माध्यम से आती है। इसकी मैं आपको एक और एक स्मॉल एग्जांपल दूंगी जिसके अंदर मैं थोड़ा ये बोलूंगी कि लोग थोड़े ना दोगले हो जाते हैं। पर दोगले कैसे होते हैं?

00:24:58:28 हैरीपॉटर देखेंगे वहां पे हाउसेस को मान लेंगे कि हैरी इस हाउस का था। वो लड़का दूसरे हाउस का था। वो तीसरे हाउस का था। और वो जो हाउसेस दिखा रहे हैं वो उनकी गुरु परंपरा है। है ना? तो वो हम मानते हैं शुरू को शुरू से कि दुनिया सबसे शुरू हुई तो हॉब्स में इतने स्कूल्स थे। तो द स्कूल्स दैट दे आर ट्राइंग टू शो यू देयर इज एकजेक्टली व्हाट गुरु परंपरा इज। और गुरु परंपरा हमारी स्टार्ट किसी मनुष्य से नहीं हो रही है। भगवान से डायरेक्टली स्टार्ट हो रही है। सो दिस इज अ सिस्टम दैट इज अरेंज्ड बाय द डिवाइन इटसेल्फ। इट्स अ लिविंग बॉडी टिल नाउ सारी संप्रदाय अभी है। है ना? तो आपको अब आप बताइए आपको अगर वैसा उस क्वालिटी का ज्ञान चाहिए जहां पे कुछ भी गोलमोल नहीं हो। कोई आपको लूटने की कोशिश नहीं कर रहा है तो आप यहां संप्रदाय में जाएंगे या फिर आप फिर वो साधना के कोर्सेस खरीदेंगे। जी है ना? अच्छा इसमें मैं कुछ अभी भी जो मोड लोग अपने आप को कहते हैं या फिर बहुत ज्यादा नहीं समझ पाए होंगे इन बातों को तो थोड़ा सा लॉजिकली समझा मान लीजिए कि सबसे पहले अगर कोई ये कहे कि वेद में ये

00:26:14:02 लिखा है या शिव जी के बारे में मैं आपको ये बता रहा हूं या गायत्री माता के बारे में गायत्री मंत्र के बारे में मैं आपको ये बता रहा हूं या कोई कुछ भी क्लेम करे कोई यूट्यूबर करे कोई इंस्टाग्रामर करे वो कुछ भी क्लेम करे हां क्लेम तो कर ही देते हैं कि मंदिर में बजता है तो ये मंत्र तो मंदिर में बजता है तो हर कोई तो गलत नहीं हो मंदिर में बजता है। कोई गलत नहीं हो सकता। जब कचरे वाला गाड़ी लेने वो कचरा लेने आता है ना तो वो भी आजकल किसी किसी की बेल बजाता है तो वहां पे भी लोगों ने गायत्री मंदिर लगा रखा है। उसको भी लोग प्रमाण मान के यूज़ करने डोर बेल्ट डोर बेल्ट और एक और चीज हम ऐड करेंगे। हमने हाल फिलहाल में एक वीडियो देखी थी। हम इसको अपने तक अब और रख नहीं पा रहे हैं। आई थिंक मुझे एक्सप्रेस कर ही देना चाहिए। तो ये माता जी है देवी जी। ये पहले तो गायत्री मंत्र के साथ आपको अ कॉपर का छोटा सा एक वो हवन कुंड इतने साइज का इतने साइज का उसके ऊपर चावल और गुड़ को मिक्स करिए और गैस के ऊपर आप सोचिए गैस के ऊपर आप उस कॉपर के बर्तन को रखिए और गायत्री मंत्र की आहुति देके स्वाहा कर दीजिए और इसको बलिव यज्ञ तो आप रोज घर पे कर सकते हैं। अब आप इस चीज को कितना

00:27:29:10 मानेंगे? है ना? और इसमें लोग मान रहे हैं ओह माय गॉड यह तो बहुत इजी है। यह तो मैं कर सकता हूं। मुझे इसका अध्ययन करके ये समझ आया कि आधे से ज्यादा लोग करने वाले नहीं है। बट फिर भी एक तो कंडीशनिंग आ रही है दिमाग में कि लोगों को कंटेंट बनाना है तो कुछ भी बना दो। है ना? कि फूल डाल दो, तिल डाल दो, कौवे के लिए रख दो कि कौवा आकर खाएगा तो ठीक है। अगर कौवे ने नहीं खाया तो तो क्या होगा? तो मतलब और फिर आप देखेंगे कि ये जो इनफ्लुएंसर्स हैं ये आपको तो बोलेंगे कि चावल और तिल डाल के रख दो कौवे के लिए और पता नहीं कौन सा मंत्र बोल दो। है ना पितृ पक्ष में। पर खुद एक ब्राह्मण से ही कर्मकांड करवाएंगे। जी जी। तो ये इस मैंने एक बहुत अच्छी अभी एक डॉक्यूमेंट्री टाइप की देखी थी उसका चैनल हां मुझे नहीं पता कि वो मतलब कहीं गुरु परंपरा से जुड़ा हुआ है कि नहीं मगर मुझे लगता है कि अगर थोड़ी बहुत उसमें कमियां होंगी भी उसकी मेंटालिटी में तो शायद थोड़ी बहुत बातचीत करके सुधर जाए अभी तक मैंने देखा नहीं स्पष्ट रूप से कि क्या कमियां है मगर अगर निकलती है तो उसका नाम चैनल का नाम है इंडिक्स नाम है शायद तो उसने अभी एक डॉक्यूमेंट्री बनाई है

00:28:44:12 छोटी सी जिसमें उसने ये बताया है कि एक फैशन आया है नया। एक समृद्ध लोगों ने एक फैशन नया निकाला है। भाई लोगों के पास इतना टाइम कहां से होता है? तो मैं तो पहले तो यही सोच लेता हूं कि लोग इतनी अब इसको क्या कहेंगे? साधारण भाषा में कहे तो चोचलेबाजी। इन चोचलेबाजियों के लिए कहां से आपके पास टाइम आता है कि अब लोगों ने एक नया फैशन निकाला कि अब लोग अब जो उनके हिसाब से जो कपड़े होते हैं वो उनके लिए फैशन नहीं है या फिर ज्वेलरी होती है वो उनके लिए अब फैशन नहीं है या फिर हेयर स्टाइल वो जावेद हबीब ये वो सब ये सब उनका अब नया फैशन है कि हम किसी विचारधारा को जोड़ के अपना फैशन दिखाते कि हम इसको मानते हैं समझ विचारधारा कैसी कि मैं सपोर्ट करता हूं समलैंगिकता को मैं सपोर्ट करता हूं वो जो आजकल वो चेंज हो रहा है ना लिंग परिवर्तन इत्यादि मैं इन सब चीजों को मतलब जो हमारे धर्म के विरुद्ध चीजें हैं और जिसको लेकर के एक ताना बाना बुना जाता है सनातन धर्म के विरोध में उन चीजों को लेकर के वो लोग खुद कहते हैं कि मैं जो है उसको सपोर्ट करता हूं ऐसे कई लोग आपको मिल जाएंगे बट खुद की पर्सनल लाइफ में उन लोगों वो चीजें ओन नहीं कर अपने

00:29:59:18 लिए वो एक ब्राह्मण ढूंढेंगे हवन कराने के लिए जबकि दूर जाकर के कहेंगे कि मैं जो वर्ण व्यवस्था को नहीं मानता मैं कास्टिज्म को नहीं मानता कास्टिज्म घृणा मूलक अलग है और व्यवस्था मूलक अलग है उसप हम फिर बात करेंगे तो ये जो एक नया फैशन समृद्ध लोगों ने ओन किया है क्या नया फैशन कि जो चीज हम नहीं भी मानते हैं भले ही मगर हम सपोर्ट उसको करके दिखाते हैं कि देखो देखो हमारी कितनी ब्रॉड माइंडेड विचारधारा है हम कितने ज्यादा ज्यादा ओपन माइंडेड है। ये सब वो करके दिखा। हमारे एक मित्र हैं। उन्होंने हमें बताया कि एक कोई ऐसे मतलब इनफ्लुएंसरर है जो कंटेंट बनाते हैं। कंटेंट है, व्यूअरशिप है। लोग देखते हैं, कंज्यूम करते हैं। उसमें उनको किसी आचार्य ने बोला साउथ में कि आप ये काम गलत करते हैं। कुछ कुछ चीजों को लेके सारा नहीं कुछ कुछ चीजों को लेके ये मत करिए। उसके बाद और वो आचार्य है। है ना? और उस आचार्य से जब वो व्यक्ति वापस आता है तो वो बोलता है कि दे आर सो ट्रेडिशनलिस्ट हम भाई पूरा ज्ञान आप सनातन धर्म का ट्रेडिशन का ही तो दे रहे हो एक एक ग्रंथ एक एक मंत्र एक एक साधना तो उसके बाद पीछे में जाके व्यक्ति बोल रहा है कि आप बड़े ट्रेडिशनलिस्ट

00:31:15:13 है मतलब फ्लेक्स मतलब को ले पर करने दो परंपरा को ले हीन भावना और सच कहूं तो लोगों को आजकल धर्म नहीं चाहिए। लोगों को आजकल कस्टमाइज धर्म चाहिए। कस्टमाइज समझ मुझे मंत्र बोल के मजा आया मतलब मजेदार बस बस बस तो मैं इसमें वो एक बात खत्म करने वाला था जो तर्क मैं बताने वाला हूं परंपरा को लेकर। हां अब परंपरा की बात परंपरा को लेकर के एक लॉजिकल ग्राउंड है कि मान लीजिए कोई आज आपसे यह कहे कि भाई टी एच ए टी यानी दैट दैट का मतलब दैट का प्रोनाउंसिएशन दैट नहीं होता है दैट होता है कोई आपसे ये कहे तो आप उससे सबसे पहला प्रश्न क्या करोगे भाई कहां से तूने पढ़ाई की है हां कोई भी बोलता है अंग्रेजी का शब्द गलत हो जाता है तो व्यक्ति बोलता कहां से पढ़ा? कहां से पढ़ा है। इसका मतलब कि आजकल कोई एक्सेप्ट करे या ना करे एक्सेप्ट करे या ना करे वो डायरेक्ट और इनडायरेक्टली वो परंपरा को फॉलो कर रहा है। हम अपने जीवन के हर क्षेत्र में परंपरा को फॉलो ही कर रहे हैं। जो भी व्यक्ति पढ़ाई कर रहा है जो भी व्यक्ति किसी से बाजा बजाना तक सीख रहा है वो देखता है कि

00:32:30:21 सर्टिफाइड कहां से? हां इसका मतलब हम अपने जीवन के हर क्षेत्र में परंपरा को ही चाहते हैं। बट नाम लेकर के शंकराचार्य परंपरा नाम लेकर के और जीवन की सबसे महत्वपूर्ण जो विषय है यानी कि धर्म अध्यात्म उसको लेकर के हम लोग परंपरा नहीं चाहते हैं। उसमें हम मनचाही चीजें चाहते हैं। जबकि हम डॉक्टर के पास जाएंगे तो ये सर्टिफाइड है कि नहीं? ये कहीं राह चलता कोई झोलाचाप तो नहीं है। ये सारी चीजें अब इसमें एक बात आती है कि ये तो हमने टेक्निकली समझ लिया। मैं एक छोटा सा उदाहरण और दे दूं। एक बार कहीं डिस्कशन चल रहा था मुस्लिम के साथ। मुस्लिम लोग हमारे ग्रंथों का अर्थ करते हैं उल्टा पुल्टा अपने हिसाब से। आपने जाकिर नायक का नाम अगर सुना होगा। उसने उल्टा पुल्टा अपने हिसाब से खूब अर्थ किया मुस्लिम। अब हम उससे अगर यह कहे कि भैया तुम इसके अर्थ करने का अधिकार नहीं रखते हो क्योंकि तुमने परंपरा से अध्ययन नहीं किया है। जिस प्रकार से कोई अगर डैड को दाट बोलेगा तो हम उससे कह सकते हैं भैया तुम्हारा सर्टिफिकेशन कहां से किसने तुमको 10थ पास किया है क्या उसने ये माना है ऐसे नहीं बोलते हां इसे ऐसे नहीं बोलते तो वहां तो हम जब उससे ये कहेंगे तो वो कहेगा भाई मैं परंपरा को नहीं मानता जबकि उनके यहां परंपरा को ना मानने

00:33:46:00 की स्थिति में भी वो स्वयं परंपरा को मानते हैं कि कुरान का अर्थ हम वही मानेंगे जो हमारे यहां चैन ऑफ नरेशन से आ रहा होगा। चैन ऑफ नरेशन से जो अर्थ आ रहा होगा हम वो अर्थ मानेंगे नहीं तो हर व्यक्ति अपना अपना अर्थ लगाएगा तो धर्म के बहुत सारे अर्थ हो जाएंगे और धर्म का अर्थ क्या होता है जो आपको मर्यादा देता है मर्यादा यानी आपको लिमिटेड करता है आपकी रेखा खींचता है कि ये नहीं करना है ये धर्म है और ये करना है ये धर्म है तो धर्म का अर्थ धर्म का अर्थ ही है धर्म का पर्यावसान है निश्चितता में यानी कि वो फिक्स होना चाहिए धर्म का मतलब ही फिक्स होना चाहिए और जब हम ऐसी खुली छूट दे देंगे कि कोई व्यक्ति अपने मन से धर्म का कुछ भी अर्थ कर रहा है तो निश्चितता कहां रह गई? तो फिर वो धर्म नहीं रहेगी। वो फिर धर्म नहीं रहा। वो तो फिर वो पशु तुल्य चीजें हो गई। पर एग्जांपल आ जाती है कि अगर हम जो आप भी बोलते हैं बहुत बार अगर हम इतनी ओपन विंडो दे देंगे ना कि जो जिसको यू नो सब अपनी मर्जी के मालिक है। एवरीबडी इज गोइंग टू थिंक द वे दे आर तो फिर आप आपको फिर बुरा लगेगा जब वो व्यक्ति माता बहन और बेटी में फर्क नहीं कर पाएगा। ये जो माता बहन और बेटी का फर्क है ये वो लिमिट है। ये

00:35:01:03 वो लिमिट कैसे है कि इट लिमिट्स यू टुवर्ड्स द अधर्म दैट यू डोंट बिकम अ धार्मिक। आप अधार्मिक कार्य नहीं करें। वो लिमिट जो क्रिएट करता है दैट इज मर्यादा। और वो मर्यादा क्या है? वो हमारे शास्त्र हमारा धर्म सनातन धर्म इटसेल्फ इज दैट मर्यादा। जी जब हम मुझे ऐसा लगता है कभी-कभी हम बोलते हैं कि हमारा धर्म है ना तो मुझे लगता है कि लोग धर्म को अपने से अलग करके देखते हैं। जबकि धर्म ये है कि एक माता बहन और बेटी में फर्क है ना तो जब आप में इतनी वेरिएशन डिस्टिंशन है टू अंडरस्टैंड ऑल दी थिंग्स तो आप उसको अलग मत कीजिए। सनातन धर्म कैन नॉट बी अ डिफरेंट थिंग फ्रॉम यू। इट इज यू। इट इज व्हेन यू वांट एवरीबडी टू ट्रीट यू राइट। इट इज़ व्हेन यू वांट द राइट रिजल्ट्स। सो अब दोबारा वापस आ जाते हैं कि थोड़ा सूत लायक भी आ जाता है। इस बात को लेके मैं अपनी एक बात खत्म कर दूं। हां। अभी आपने कहा जय धर्म की बात आपने की तो श्री रामचंद्र जी की मुझे याद आ जाती है। जबकि धर्म की बात होती है। अह एक बार कोई कॉलेज में एक कार्यक्रम चल रहा था तो एक कोई लड़का था जिसने ये कहा था जय श्री

00:36:16:07 राम। वहां पर उसने उद्घोष कर दिया था। तो उसको वहां के जो उसके जो प्रिंसिपल थे या मैनेजर थे जो भी थे कॉलेज के उन्होंने प्रशासन ने उसको नीचे उतार दिया स्टेज से क्यों उतारते समय उन्होंने ये पूछा था कि इसका क्या लॉजिक है जय श्री राम यहां क्यों बोल रहे हो क्या लॉजिक है हां वो लेडी थी शायद वो लेडी तो ये जो बात कह रही है अभी विजय जी वो बात ही वहां पर उस बच्चे को मालूम होनी चाहिए वो क्या बात कि राम जब हम कहते हैं जय श्री राम तो हमको सबसे पहले पता होना चाहिए राम कौन है राम के के लिए लिखा हुआ है वाल्मीकि रामायण 337 13 में रामो विग्रह धर्मा राम धर्म का साक्षात स्वरूप है विग्रह है और धर्म क्या है धर्म ही ना पशु भी समाना

00:37:01:18 सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में कौन माता है कौन बहन है कौन पत्नी है इस ये जो निर्णय है ये हम धर्म के आधार पर कर पाते हैं। अगर हमारे पास धर्म नहीं है तो हम सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में कौन माता है कौन बहन है कौन पत्नी है इसका निर्णय नहीं कर सकते किसके साथ कैसा व्यवहार करना है इसका निर्णय नहीं कर सकते फिर हम में और जानवरों में कोई अंतर नहीं रह जाएगा क्योंकि जानवरों में हम में जो मुख्य चीजें है वो सेम है क्या कहते हैं उनको भी भूख लगती है आहार निद्रा भय मैथुन ये चार चीजें हम में और उनमें सामान्य है आहार यानी कि खाना निद्रा यानी कि सोना भय यानी कि सर्वाइवल और मैथुन यानी कि जो रिप्रोडक्शन वाली जो एक शक्ति है जीवो में वो। तो यह चार चीजें हम में और उनमें समान है। बस एक चीज हमारे पास एक्स्ट्रा है। धर्म उनके पास धर्म नहीं है। वो अपनी माता बहन और पत्नी में अंतर नहीं कर सकते और हम कर सकते हैं। यही अंतर है पशु और मनुष्यों में। तो जब हम कहते हैं जय श्री राम। तो हम यह नहीं कहते पर्टिकुलर हम अपनी किसी आईडियोलॉजी की चय कर रहे हैं या हम हमारा उस मान लो कि वो आपके अनुसार एक पात्र है श्री रामचंद्र अन्यों के लिए पात्र है तो हम जब कह रहे हैं जय श्री राम तो हमारे लिए हो सकता है कि वो पात्र मगर वो समष्टि के रूप से जो राम को नहीं भी जानता

00:38:16:26 उसके लिए भी जय श्री राम कहना इसलिए उचित है कि राम का अर्थ है धर्म धर्म का अर्थ है वो नियम जो आपको पशुओं से भिन्न मनुष्य बनाते है यानी कि जब हम कहते हैं जय श्री राम तो हम कहते है उन नियमों की जय जो हमें हमें इंसान बनाते हैं। तो इसका अर्थ क्या हुआ? इसका अर्थ क्या हुआ? कि ये नियम सदा जीवित रहने चाहिए। इसलिए कहते हैं जय श्री राम। और जो मैं एक जो तर्क पूर्ण एक बात कहने वाला था कि इनफ्लुएंसर्स की बात क्यों नहीं सुनी जाए? परंपरा प्राप्त आचार्यों की बात क्यों सुनी जाए? तो उसमें फाइनली जो एक बात आती है कि हम श्री राम, श्री शिव जी या किसी की भी आराधना कर रहे हैं, कोई भी आराधना कर रहे हैं। ये आराधना का बेस होता है हमारे शास्त्र। अब आप कहेंगे कि ठीक है हम शास्त्रों से ले लेते हैं। आप ये कह देंगे तो शास्त्र आपको मिलते कहां से हैं? दुकानों से। आप पब्लिश पब्लिशिंग हाउस से मिलते हैं। पब्लिशिंग हाउस के पास वो शास्त्र आए कहां से? हां। कहां से? ये बहुत भाई ऐसे तो मैंने भी कभी सोचा होता है। हां। तो ये जो शिव पुराण है, जो वेद है, उपनिषद है, ये क्या अभी 1000 साल पहले लिखे गए हैं? नहीं लिखे गए। तो फिर ये पब्लिशिंग हाउस के पास ये हजारों लाखों साल पुराने जो शास्त्र हैं वो कैसे आए? तब पता चलेगा कि वो शास्त्र हमारे

00:39:32:02 पास आए हैं परंपरा प्राप्त आचार्यों से। तो फिर इसका अर्थ क्या है? कि हम वेद किससे ले रहे हैं? आचार्य से। परंपरा प्राप्त। हम उपनिषद किससे ले रहे हैं? आचार्यों से। परंपरा प्राप्त। अब हम ये मान रहे हैं कि ईश्वर की वाणी है। ये मान रहे हैं ना हम? ये ईश्वर की वाणी है। ईश्वर प्रदत्त है। ठीक है? ईश्वर के द्वारा दिए गए हैं। ये हमारे जीवन का अंतिम प्रमाण है। ये कोई बस मजेदार ट्रिक पे गया हुआ एक्सपीरियंस नहीं है किसी तो यदि हम ये मानते हैं कि ये ईश्वरीय है ये जो ग्रंथ है ये ईश्वरीय है हम किस आधार पर मानते हैं क्योंकि इस आचार में जिसने हमको दिया है इस आचार्य पर हमें विश्वास है इसलिए हम ये मानते हैं ये ग्रंथ ईश्वरीय है तो जब हम इसका अर्थ करेंगे तो हमें ये देखना होगा कि जो अर्थ हम मान रहे हैं इसका वो इस आचार्य ने भी माना है कि नहीं हां तो हमें हमें जब परंपरा प्राप्त आचार्यों से मिलने वाले ग्रंथों पर विश्वास है तो परंपरा प्राप्त आचार्यों के अर्थ पर विश्वास क्यों नहीं होगा? तो अगर इसको सूत्रात्मक शैली में कहे तो यदि हमें परंपरा प्राप्त आचार्यों के द्वारा मिलने वाले अर्थ पर विश्वास नहीं है तो हमें उनके द्वारा मिलने वाले ग्रंथ पर विश्वास होना सिद्ध नहीं होता। और यदि हमें उनके द्वारा मिलने वाले ग्रंथ पर विश्वास है तो उनके द्वारा मिलने वाले अर्थ

00:40:47:08 पर विश्वास ना होना सिद्ध नहीं होता। मूर्खता है। हां। तो इसके अंदर हम और आप यह नहीं कह सकते कि नहीं ये आचार्य लालची है या अज्ञानी है इसलिए उन्होंने गलत अर्थ कर दिया। अरे भाई अगर वो तुमको गलत अर्थ दे सकते हैं वो तुम्हें गलत ग्रंथ भी तो दे सकते हैं। ग्रंथ पर विश्वास क्यों? तो यदि मान रहे हो शिव जी को तो पूरा मानो पूरा शास्त्रों को और यदि पूरा शास्त्रों को मान रहे हो तो पूरा गुरु परंपरा है। हां और ये आज बहुत ही सुंदर बात हुई है। दिस इज द फर्स्ट टाइम आई हैव आल्सो लाइक एक्सप्लोर दिस आईडिया विद हिम कि किसी भी पब्लिशिंग हाउस के पास आपके शास्त्र आने से पहले उनके पास भी कैसे पहुंचे? उनके पास पहुंचे। आपके ऋषियों के कारण ऋषियों ने लिखे थे। और बात यहां पर आ जाती है कि जब आपके पास ये शास्त्र ग्रंथ आए हैं आप उसकी ट्रांसलेशन पढ़ के भी उसका अर्थ स्वयं से खुद मत निकालिए। जब आपको कोई आचार्य गुरु बोलते हैं ना कि खुद से अकेले नहीं पढ़ना है। उसका मतलब यह नहीं है कि आप बुरे हैं या आप खराब हैं और आप योग्य नहीं है। ऐसे वो सिर्फ यह चाहते हैं कि अगर आप किसी कैपेबल टीचर के अंदर पढ़ेंगे तो आपसे कोई भी पॉइंट

00:42:02:12 मिस नहीं होगा। आप किसी चीज का गलत अर्थ नहीं निकाल लेंगे और वो आपके चित्त के अंदर वो कंफ्यूजन बैठेगी नहीं है ना तो हमें बहुत ज्यादा ध्यान रखना चाहिए एंड मैं क्यों इसके ऊपर इतना एफ एम्फसाइज कर रही हूं क्योंकि मुझे यह रियलाइज हुआ है कि जब तक हम लोगों को इस चीज के बारे में क्वेश्चन करने में मजबूर नहीं करेंगे तब तक ये लोग अपने आचार्य परंपरा गुरु गुरु परंपरा की तरफ देखेंगे ही इन्हें। क्यों? क्योंकि स्क्रोल करना इजी है। है ना? मैं भी कंटेंट बनाती हूं। आई आल्सो मेक कंटेंट ऑन इट। बट आई मेक कंटेंट विद अ लॉट ऑफ रिस्पांसिबिलिटी। मेरे को कितनी बार आपको पूछना पड़ता है कि ये ठीक है, ये ठीक था? ये वाला फैक्ट ठीक है। क्या ये मंत्र में मतलब बीज अक्षर है? नहीं है। और जब मैं गुरुदेव से नहीं मिली थी, मेरी दीक्षा नहीं हुई थी, मैं कितनी गलतियां कर रही थी। पर मैंने वो सब हटाया है। जी और आप एक जब मेरा दीक्षा का समय है दीक्षा के बाद का आप देखिए कुछ चीजें आप देखेंगे कि पहले हो रही थी और उसके बाद आप एक बहुत बड़ा एक बहुत बड़ा चेंज तो मैंने देखा है कि ये पहले अपने

00:43:17:22 हर वीडियो के अंत में बोलती थी प्रणव शक्ति प्रणव आप तो बोल सकते हैं क्योंकि लोगों को नहीं पता प्रणव क्या है? मुझे तो क्या है कि मैं स्वयं को सदैव अशुद्ध जैसा एक लगता है वो दासत्व भाव होता है तो वो मेरे अंदर रहता है कि मैं निकृष्ट हूं तो सदैव ऐसा लगता है कि मैं पवित्र चीजों को ना बोलूं ना उपचारित करूं बहुत रेयर केसेस में उपचारित करूं तो असहज सा लगता है फिर भी मैं बोल देता हूं जिससे जो सुनने वाले उनको समझ में आउट है क्योंकि हमने तो पूछा था कि अगर एजुकेशन पपस के लिए कुछ बोलना भी पड़े सामने वाले को नहीं समझ आ रहा तो मैंने कहा था फिर आप समझा सकते ये अपने वीडियो के अंत में ओम शक्ति ओम बोलती थी। तो इसके पीछे भी एक कहानी है कि वो कैसे बोलना बंद किया मगर वो फिर कभी लंबा होता चला जाएगा। मगर आज के आप इनके वीडियोस देखेंगे तो एक बहुत ही स्पष्ट उदाहरण है कि इनके जीवन में कैसे इन्होंने चेंजेस किए कि अब ये अपने किसी वीडियो के अंत में प्रण ओम शक्ति ओम नहीं बोलती है। अपने अच्छा मेरे से जुड़ चुकी थी। मैंने इनको कभी नहीं कहा अपने से कि आप ऐसा मत करो। ये ये चीज इनके अंदर अपने से आई इन्होंने एक दिन मुझसे बोला कि आपने मुझे सब कुछ बता दिया। गायत्री मंत्र नहीं बोलना है या स्त्रियों को नहीं बोलना चाहिए या अमुक अमुक ऐसे कार्य करना चाहिए। मगर आपने मुझे ये क्यों नहीं बोला?

00:44:32:24 मैं अपने वीडियो के हर वीडियो के अंत में बोल रही हूं ओम शक्ति ओम। आपने मुझे बोला क्यों? तो मैंने इसको जवाब दिया। एक बार गुरुदेव ने कहा था जगतुगुरु शंकराचार्य जी ने कि भैया किसी को पूरा पूरा घी एक ही दिन में नहीं पिला देना चाहिए। तो मुझे ऐसा लगता है कि मैं शुरुआत में इनको कह देता कि भाई तुम्हें प्रणव बोलना नहीं चाहिए तो हो सकता है इनका कुछ और हल्ट हो जाता जयकांत का [हंसी] आता है क्वेश्चन तो अंदर से वो एक जो फील आई तो इन्होने जो है प्रणव का उच्चारण करना बंद किया तो ये एक स्पष्ट चेंज था प्रणव के अलावा और भी जैसे क्योंकि स्कूल में है ना जैसे आप अभी देखते है बच्चों को गायत्री मंत्र कराते हमारे स्कूल में भी करा ही देते चीज तो मुझे जब समझ आया अब कैसे इतनी डिटेल में जाए बिना कि कुछ मंत्र जिनका उच्चारण हम कर रहे थे इनफैक्ट महामृत्युंजय मंत्र का उच्चारण आई यूज टू डू अ लॉट अपने क्लासेस में भी मैं करती थी एंड देन वी वुड चट अ लॉट ऑफ़ मंत्र वि द बीज अक्षर क्योंकि मुझे नहीं पता था ना एंड आई ओपनली टॉक अबाउट इट एंड आई ओपनली से इट कि जब मुझे नहीं पता था तो मैं भी करती थी पर जब मुझे समझ आया और एक दिन में समझ नहीं आया आया ओवर द पीरियड टाइम रह के आई स्टार्टेड

00:45:47:27 क्वेश्चनिंग क्योंकि मुझे यह पता था कि मेरे पास इतना ज्ञान नहीं है जितना उनके पास है तो मुझे क्वेश्चन करना चाहिए समझना चाहिए नॉट क्वेश्चनिंग टू आर्ग्यू क्वेश्चनिंग टू लर्न है ना तो जब मैंने धीरे धीरे धीरे धीरे मुझे समझ आया और फिर मेन बात ये आती है कि चलो समझ आया मैंने छोड़ा उसका फायदा क्या हुआ उसका बहुत फायदा हुआ मतलब मुझे ऐसा लग रहा था। यह उस टाइम की बात है कि मेरी लाइफ में मुझे ऐसा लग रहा था प्रॉब्लम्स जा ही रही है। कुछ ना कुछ कुछ ना कुछ गलत होता ही रहता है। और क्यों हो रहा है मुझे समझ नहीं आया। और जैसे ही ये छोटा सा शोधन हुआ ना कि बस ये मंत्र नहीं बोलना है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि कुछ मंत्र ना बोलने से मेरी लाइफ की प्रॉब्लम्स खत्म हो जाए। पर ऐसा हुआ है मनुष्य मनुस्मृति में भी है वाल्मीकि रामायण में तो नारद जी स्पष्ट बोलते हैं श्री रामचंद्र जी से कि आप आपके आसपास जब कभी अकालिक घटनाएं होने लगे ये वाल्मीकि रामायण में वचन जब कभी आसपास देखिए अकाल वाली चीजें होने लगे जो अनएक्सेक्टेड होती है अचानक से घटनाएं तो आप समझ लीजिए कि आपके

00:47:02:28 पास आसपास जो अविजन कोई तप कोई ऐसी चीजें चल चल रही अवधि पूर्ण मतलब विधि विरुद्ध हो के चल रही है। अब वो विधियां क्यों बनी है वो एक अलग सेक्शन है कि भेद का नाम ही संसार है। भेद का नाम ही संसार है। तो इसी का रास्ता अलग है। इसी का रास्ता अलग है। मगर गंतव्य सबका एक है। क्योंकि कार्मिक साइकिल डिफरेंट है। जी। आज अगर हम सबका एक ही कार्मिक साइकिल होता तो हम अमीबा अमीबा की तरह होते। बट हम अमीबा नहीं है। वी आर नॉट वन सेल्फ। आई एम इन माय बॉडी। ऑल यू व्यूअर्स आर इन योर ओन बॉडीज। आपके पेरेंट्स अलग हैं। मेरे पेरेंट्स अलग हैं। भाई बहन अलग हैं। मित्र अलग हैं। जन्म का स्थान अलग है। हमारे आर्थिक स्थिति अलग है। है ना? हमारी सोशल स्थिति अलग है। मानसिक स्थिति अलग है। ये अलग क्यों है? क्यों हमारे जीवन में कुछ लोग आए कुछ लोग गए कुछ घटनाएं होगी हुई है क्योंकि हमारे कर्म अलग है इसी कर्म के आधार पे हमें ये सब मिला है अगर मैं एक प्रश्न पूछू मैंने ऐसा क्या मुझे मेरे ये माता पिता ही क्यों मिले तो आपका पॉइंट नहीं जाएगा ना कि कर्म से मिले ना बिल्कुल अभी मैं इसमें एक चीज ले लेता हूं आर्य समाज का ये कहना है कि भगवान जो है वो भेद क्यों करेगा

00:48:18:00 भगवान जो है वो भेद क्यों करेगा जबकि भगवान ने स्त्री और पुरुष में भेद किया कि बॉडी वाइज भेद किया। भगवान ने पेड़ को अलग बनाया, मोटरसाइकिल को अलग बनाया, माइक को अलग बनाया, चार्जर को अलग बनाया। कान बनाया नाक बनाया आंख जब तक जब तक दो चीजें एक दूसरे से डिफरेंट है तब तक ही संसार है जब तक ये डिफरेंट नहीं है भेद नहीं है तो अद्वैत की स्थिति है वो तो मोक्ष की स्थिति है। अच्छा अब एक छोटी सी बात सोचिए कि किसी को मान लीजिए कि चलिए ठीक है हम लोग इस बात पे ध्यान नहीं देते कि स्त्री पुरुष का ही है या फिर अमुक वर्ण परंपरा है दूसरी वर्ण परंपरा है हम अगर इस पर ध्यान दें किसी को साउथ अफ्रीका के ऐसे जंगलों में जन्म दिया कि शायद उसका पूरा जीवन बीत जाए वो वेद शब्द का नाम तक ना सुन पाए क्यों दिया ईश्वर ने अगर अगर आपके पूर्व जन्म से कोई अंतर नहीं नहीं होता है। कोई मतलब नहीं होता है पूर्व जन्म से इस जन्म का और आपको जो है बिल्कुल वो ईश्वर बिल्कुल यथावत सबको एक ही जैसे जन्म देता है। तो सबको बिल्कुल वहां उसके जहां वेद मंत्र का उच्चारण चल रहा हो उसके बगल में जन्म ले सबको इक्वली जन्म ले निकलते ही माता

00:49:33:01 के गर्भ से और तुरंत वेद मंत्र कानों में गया। मगर ऐसा तो नहीं होता है। किसी किसी का जीवन बीत जाता है। शायद वो वेदों तक ना पहुंच पाए। अपने कर्म ही सुधार पाए जीवन में। हां इसकी और सिंपल एग्जांपल है थोड़ी मतलब और कैजुअल एग्जांपल है कुछ लोगों का जीवन बीत जाता है उन्हें पता नहीं होता है कि दाल चावल क्या है तो ऐसा क्यों है क्यों है है ना ऐसा क्यों है सिंपल कर लो बिल्कुल कि जीवन बीत जाता है ये नहीं पता है कि पाव भाजी क्या है तो इसका अर्थ है कि ईश्वर ने कुछ सोच समझ के ही आपको अमुक अमुक शरीर में भेजा है और अब उस अमुक शरीर के अनुसार जो आपकी विधियां है जो आपको प्राप्त हुई है कि आप अगर इस तरह के शरीर में आए हैं तो आपको भगवान को प्राप्त करने का रास्ता ये है। आप अगर इस तरह के शरीर में आए हैं तो आपके द्वारा भगवान को प्राप्त किए जाने का रास्ता ये है। वो विधियां ही हमें डिफरेंट करती है कि ये जो स्त्रियां है वो अपने पति के लिए करवा का व्रत रखेंग। हरतालिका वो तीज का व्रत रखेंग। क्या कहते हैं ये जो अभी आज छठ पर्व है छठ पूजा ये व्रत रखेंग। वहीं पर पुरुषों के लिए दूसरी चीजें और कहीं-क पर तो यह तक कहा गया कि स्त्रियों को स्पेशली अलग से कोई भी जो मंत्र इत्यादि

00:50:48:14 है या तप इत्यादि करने की आवश्यकता नहीं। यदि वो पूरी निष्ठा पूर्वक अपने उस पति की सेवा कर दे। उस पति का सेवा का मतलब सहयोग कर दे जो पति धर्म पर आए। जो पति अपनी धर्म के प्रति जो अध्यात्म के प्रति पूरी निष्ठा से चल रहा है तो यदि पत्नी उसका पूर्ण रूप से सहयोग करेगी तो उसको मिलने वाला जो पुण्य है वो पत्नी को भी प्राप्त होगा और इसका मतलब यह नहीं है कि जो महिलाएं काम कर रही हैं वो भी एक सहयोग ही है। जो महिलाएं काम कर रही हैं जिनके जो अपने शील की रक्षा करते हुए शील की सुरक्षा की सीमा में रहते हुए अगर वो आज इस विपत्ति काल में संक्रमण काल भी कहते हैं और अपने पति का उसकी इच्छा के अनुगत रहते हुए सहमति से यदि वो अगर कर रही है तो इसमें कोई दोष दृष्टि नहीं देखनी चाहिए क्योंकि आज का समय भी ऐसा नहीं रह गया है कि क्या कहते हैं हां बहुत अलग बहुत डिफरेंट वातावरण और आज के समय को देखते हुए मतलब बात सिर्फ इतनी है कि इस टॉपिक के ऊपर स्पेशली कि इट्स मतलब ऐसा नहीं है कि सिर्फ वही है। है ना? दोनों की इक्वली रोल प्ले होता है। है

00:52:03:15 ना? एक पुरुष के ऊपर जो जिम्मेदारियां है वो है ही। एंड हम लोग बहुत एक हेल्दी रिलेशनशिप के बारे में बात कर रहे हैं। आई नो कि कुछ लोग क्वेश्चन करते हैं ओ बट ऐसा हो जाता है। दे स्टार्ट टॉकिंग द नेगेटिव नैरेटिव ऑफ द सोसाइटी बट वी आर टॉकिंग अबाउट द एक्यूट मतलब कंप्लीट पॉजिटिव सिनेरियो ऑफ अ रिलेशनशिप। एक हम लोग एक ऐसे रिलेशनशिप की बात कर रहे हैं जिसमें नेगेटिविटी है ही नहीं जिसमें केवल समर्पण भाव है पुरुष और स्त्री दोनों के तरफ से। है ना? तो हम उसको ले आपको उदाहरण दे रहे हैं। नहीं तो फिर देखा जाए तो फिर अगर प्रॉब्लम्स है तो आप देखिए कोर्ट में कितनी लाइन लगी हुई है। प्रॉब्लम्स तो बहुत है। बट हम उनको अपना आधार नहीं मानते हैं। जब हमें अपने लिए कुछ करना होता है। है ना? हम एक लेवल सेट करते हैं तो हम ऊपर देखते हैं कि मुझे आगे बढ़ना है। आप पीछे नहीं देखते हो कि अरे ये व्यक्ति तो मतलब शराब पीता है और गंदे काम करता है। मैं तो इससे बहुत अच्छा हूं। आप आगे देखिए आपसे और कितने अच्छे हैं। आपको कहां जाना है। जी तो वैसी बात है और इसके अंदर अब हम थोड़ा आगे बढ़ अभी तक का एक मैं वो दे दूं कि धर्म का ज्ञान किससे लेना है? परंपरा प्राप्त

00:53:18:24 आचार्य से अंतिम निर्णायक लक्षण संपन्न सन्यासी तीसरा समस्त श्रुति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा और चौथा गुरु वही जो आपका अज्ञानता रूपी अंधकार दूर कर दे। भू का मतलब अंधकार और रू का मतलब निकालने वाला। भगवत गीता में कहा गया है कि संशय आत्मा विनति चार 40 अद्वतार का उपनिषद में कहा गया है और स्कंद पुराण में भी कहा गया है कि गुरु ही आपके संशय को खत्म करता है। भगवत गीता ने क्या कहा कि संशयात्म विनति संशय आपके विनाश का कारण है। और स्कंद पुराण ने क्या कहा? गुरु गीता ने क्या कहा? संशय का निवारण क्या है? गुरु। तो गुरु वही जो आपका संशय रूपी अंधकार दूर कर दे। तो ये चार पॉइंट लेकर के आप जिस पर भी घटित हो जाए ये चार पॉइंट परंपरा सन्यास सामंजस्य की शिक्षा और आपका अज्ञानता रूपी अंधकार दूर कर दे कि भैया ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है। इस तरह के जो सवाल आते हैं सुतो

00:54:21:25 इन सवालों का उत्तर दे सके आपको है ना तो वो आपका गुरु होने के लायक है। इस तरह से अपने गुरु का निर्णय करें। धर्म के विषय में किसको सुनना है और किसको नहीं सुनना है। अब आप अगला चैप्टर अब अगला चैप्टर हमारा है एक श ठीक है एक शॉर्ट इंट्रोडक्शन कि ये जो हमारे गुरुजन है है ना संत जन जो संतों की कम्युनिटी है कि कैसे सही जगह पहुंचना है। है ना? चमत्कार को तो नमस्कार होता ही है। बट चमत्कार कुछ क्षण का है ना? पर हमें तो मरना है और वह तो परम सत्य है। उसके बाद मृत्यु के बाद का जो चमत्कार है उस वो चमत्कार को नमस्कार कहां पे होगा? वो चमत्कार किसके पास है? हम उसको नमस्कार करें। इस तरह के जो हमारे गुरुजन है इस तरह का जो गुरु परंपरा ज्ञान है अलग-अलग संप्रदाय संप्रदायों का तो उन संप्रदायों के कुछ संप्रदायों के नाम हम आपके सामने प्रस्तुत करेंगे जो आपको शिवा जी बताएंगे। देखिए पहुंचना कैसे है इसके लिए मैं आपको बहुत ही सरल रास्ता बता रहे हैं। पहुंचना कैसे है क्योंकि अगर ज्यादा हम डीप में जाएंगे और थोड़ा सा कठिन हो जाएगा समझने में। मगर पानी थोड़ा सा रुक जाइए। हमें थोड़ा सा जल पीना है। है ना?

00:55:36:26 क्योंकि हमारा एकदम वी हैव अ वेरी सिंपल सेटअप एंड आई एम थस्टी एंड हम लोग का बिकॉज़ दिस इज द लाइव पडकास्ट ऐसा नहीं है कि हम कट कर सकते हैं। फिर वीडियो कट करेंगे फिर एडिट करके डालेंगे। आप तब तक मैं अपना चीजें बताता हूं। संप्रदाय। तो सबसे पहले तो यह है कि अगर हमारे शास्त्रों का हम अध्ययन करते तो हमें कई प्रामाणिक संप्रदाय हमें प्राप्त होते हैं। जैसे कि जिस परंपरा से हमने अध्ययन कर किया है मतलब जिन परंपरा प्राप्त आचार्य के द्वारा दिए गए सिद्धांतों की सीमा में रहकर हम अपने शास्त्रों का अध्ययन करते हैं वो है शंकराचार्य परंपरा। यह भगवान नारायण से प्रारंभ होती है और नारायण जी ज्ञान देते हैं ब्रह्मा जी को ब्रह्मा जी ज्ञान देते हैं वशिष्ठ जी को वशिष्ठ जी ज्ञान देते हैं शक्ति को शक्ति ज्ञान देते हैं पाराशर को पारासर जी ज्ञान देते हैं व्यास जी को व्यास जी ज्ञान देते हैं सुखदेव जी को सुखदेव जी ज्ञान देते हैं ग पादाचार्य को वो ज्ञान देते हैं गोविंद पाद जी को वो ज्ञान देते हैं आदि शंकराचार्य आदि शंकराचार्य जी के बारे में अगर हम शास्त्रों का अध्ययन करें तो वो शिव जी के अवतार अनेक पुराण है पूर्ण पुराण शिव पुराण उसमें

00:56:51:27 शिव जी के अवतार का वर्णन मिलता है शिव जी के अवतार माने गए उसके बाद शिव जी जब आते हैं कब आते हैं जब यहां पर नास्तिकवाद फैला हुआ था कि भगवान है ही नहीं कोई नित्य ईश्वर है ही नहीं बौद्धों का फैला हुआ था कि भाई भगवान है ही नहीं वेदों का खंडन तो उसको आकर के वो नास्तिकवाद को खत्म करते हैं और चार पीठों की स्थापना करते हैं और उसमें उनके गुरु शिष्य परंपरा से आज भी शंकराचार्य और ये लिख के जाते हैं कि भाई मेरे द्वारा स्थापित पीठ पर आरूढ़ लक्षण संपन्न सन्यासी मुझ शिव का रूप ही मान्य है। इसलिए जो उनकी गद्दी पर अब विराजमान होता है उनके उनकी परंपरा में उसको शंकराचार्य कहा जाता है। इसी तरीके से कुछ और परंपराएं हैं। रामानुज परंपरा है। श्री संप्रदाय कहते हैं इसे और निकाचार्य परंपरा है और मधवाचार्य परंपरा है। रामानंद रामानंदाचार्य वो रामानंदाचार्य उनमें बीच में अलग हो गया था मगर कई बार ऐसा भी सुनने में आता है कि रामानंदाचार्य मगर अब वो अलग मानते तो अलग ही हमें मानना चाहिए ना रामानंदाचार्य परंपरा है और शैव परंपराएं भी है कई प्रामाणिक शैव परंपराएं भी है शाक परंपराएं भी है सौर परंपराएं भी है कुछ लुप्त हो जाती है मगर जो आपको आपके धर्म का जो प्रामाणिक ज्ञान

00:58:07:08 है वो देने के लिए पर्याप्त रूप से अभी भी हमारे आचार्य गण विराजमान है इससे मुझे याद आ गया कि परंपरा से रिलेटेड एक बात मेरे अंदर बार-बार आ रही थी जो बहुत इंटरेस्टिंग है पर मैं बता नहीं पाया। अभी कर देते हैं इस बात को कि यदि आपसे कोई कहे है ना कि तीन बेर खाती थी वो तीन बेर खाती है। तीन बेर खाती थी वो तीन बेर खाती है। ये किसी कवि है कोई उसने ये बात लिखी थी। अपनी कविता की एक लाइन है। एक रानी थी जो पहले दिन भर में थ्री टाइम्स इन ए डे भोजन करती थी। तीन बेर खाती थी। आज वो दिन भर में सिर्फ तीन बेर खा रही है छोटेोटे। तो कवि ने अपनी लिखते समय एक ही शब्द लिखा। तीन बेर खाती थी वो तीन बेर खाती है। अब अगर हम इसका अर्थ उस जिसने उस लाइन को लिखा है। उसकी ट्रेडिशन से नहीं लेंगे। तो इसका अर्थ कोई भी अपने मनमर्जी से लगा सकता है। कि हो सकता है पहले वो तीन बेर खाती थी। अब वो थ्री टाइम्स इन अ डे खा रही है। पहले वो वो दोनों बार तीन बेर ही खाती थी। मतलब वो कंफ्यूजन हो जाएगी। तो इसलिए जिसने उस लाइन को लिखा है कि तीन बेर खाती थी वो तीन बेर खाती है। उसकी ट्रेडिशन जो होगी वो अपने शिष्य को बताएगा मैंने इसका क्या अर्थ है? क्यों लिखा है? फिर वो अपने शिष्य को बताएगा।

00:59:22:12 तो इसी तरीके से जो शास्त्र इत्यादि है वो आपके पास जब परंपरा से आए हैं तो उसी परंपरा से आपको ज्ञान भी लेना चाहिए। जी जी। मुझे आपने जो भी समझाया उससे एक चीज याद आती है मेबी क्लास 12 में हम लोग इंग्लिश पढ़ रहे थे उसमें मैकप पढ़ा रहे थे तो वो इंग्लिश लिटरेचर में जो सर आते थे पढ़ाने के लिए वो हम लोग पढ़ लेते थे और फिर वो क्योंकि दाय साइन ऐसे करके लिखा होता था वो इंग्लिश अलग से लिखी होती थी उन्होंने तो उसके बाद जो लिटरेचर का हमारा टीचर थे वो उसका अर्थ लगाते थे और हमें उसका का अर्थ समझाते थे। जी। तो जब हमें मैकथ के लिए अर्थ लगाने के लिए पिक्चर की जरूरत पड़ रही। तो हमें अपने संस्कृत पहले तो आपको लैंग्वेज ही नहीं आती। इंग्लिश में तो तुक्का चल भी जाएगा। है ना? उसका अर्थ लगाने का और उसके अर्थ का अर्थ लगाने का। जैसे अभी वो वृण्यक उपनिषद में जब भांति का वो है वो पढ़ के भी नहीं समझ आता है कभी-कभी कि क्या लिखा है क्या बोल रहे हैं। तो आपको आचार्य की जरूरत पड़ेगी ही पड़ेगी। अब इसीलिए स्कंद पुराण में गुरु गीता में एक बात कही गई है कि मनुष्य चाहे चारों वेद

01:00:37:15 पढ़ ले, सारे पुराण पढ़ ले, उपनिषद पढ़ ले, जप, तप, व्रत, दान, पुण्य, यज्ञ सब कुछ व्यर्थ है। अगर आपका कोई प्रामाणिक आचार्य गुरु नहीं है। क्योंकि व्यक्ति ये सभी चीजें गुरु के बिना आपको भ्रम में डाल देंगे। भ्रमित हो जाएंगे आप। जैसे एक छोटा सा एग्जांपल दे। भ्रम में कैसे हो जाएंगे? बहुत छोटा सा एग्जांपल हनुमान जी जब माता सीता को ढूंढने जाते हैं अशोक वाटिका में तो वाल्मीकि रामायण में बहुत स्पष्टीकरण के साथ वहां पर ये तक लिखा है कि हनुमान जी माता सीता के शरीर के उन अंगों के बारे में भी विचार कर रहे हैं जिन अंगों के बारे में विचार करना आपत्तिजनक दिखाई देता है किसी पुरुष के द्वारा किसी महिला अब वहां पर हनुमान जी कौन है जो उनको माता कहते मगर उनके उन अंगों की भी व्याख्या करता है वो व्याख्या स्पष्ट शब्दों में वहां लिखी हुई है तो अगर कोई व्यक्ति गुरु के द्वारा प्राप्त सिद्धांतों की सीमा गलत उत्तर निकाल नहीं पड़ेगा तो उसको यह आएगा कि हनुमान जी ऐसा कैसे सोच सकते हैं सीता माता के बारे में और ऐसी ही चीजों का फायदा उठा के सनातन विरोधी हम पर प्रहार करते हैं ऐसी चीजों का अब इसका अर्थ क्या है अर्थ ये है कि हम माने या ना माने हम अपनी माताओं बहनों को भी अगर किसी कहीं पर

01:01:52:16 ढूंढने जाते हैं हनुमान जी ने तो सीता माता को कभी देखते हैं बाल देखते हैं हनुमान जी ने तो कभी सीता माता को नहीं देखा था। मगर हम जब अपनी माता माताओं को बहनों को ढूंढने जाते हैं कहीं पर कि भाई वो यहां पर होंगी वहां पर होंगी। तो पहला जो पैरामीटर होता है कि हम किसको ढूंढने आए हैं तो वो पहला पैरामीटर होता है कि हम किसी स्त्री को ढूंढने आए। जी। तो जब स्त्री को ढूंढने आए हैं तो स्त्री से जुड़ी हुई चीजें हमारे सबकॉन्शियस माइंड में चलती है। हां हम पुरुष वो नहीं देख। हां। हम पुरुष को नहीं देखे। क्यों नहीं देखे? क्योंकि हमें कुछ पता है कि स्त्री ऐसी दिखेगी और पुरुष ऐसा दिखेगा। तो उस मंतव्य से उस वर्गीकरण के निमित्त जो हमारे सबकॉन्शियस माइंड में जो सोच चल रही होगी अभी भी होता है जब हम बोलते हैं कि आप वहां पे देखेंगे लड़की होगी उसने पिंक कलर की टीशर्ट डाली होगी चोटी बनाई होगी। बिल्कुल बिल्कुल तो जो जो जिन कारणों से हम ये सेट करते हैं कि भैया हम एक लड़की को ढूंढ रहे हैं उनहीं कारणों को वहां पर स्पष्ट रूप से व्याख्या कर दी कि वाल्मीकि जी क्योंकि हमारे यहां पर हर चीज मतलब ट्रांसपेरेंसी के साथ चली है ना स्पष्ट चीजें बताई गई है आपको कई जगह पे काफी सेंसिटिव टॉपिक था हां तो इसी कारण से अब इसको अगर आप गुरु के द्वारा

01:03:07:27 समझने का प्रयास नहीं करोगे तो आप उल्टा ले जाओगे इन बातों को और स्पेशली इसीलिए आप देखेंगे कि स्पेशली सबसे ज्यादा का जो विरोध लोग करते हैं वो राधा और कृष्ण जी का करते हैं वो इसलिए करते हैं क्योंकि वो लीला को अपने दिमाग की गंदगी से समझते हैं। जबकि लीला तो मतलब जितना हमने सुना है कि जो आचार्य गण भी है जिन लोगों से मेरी बात हुई है वो कहते हैं लीला तो अंत की बात है। आप समझ ही नहीं पाएंगे कि लीला का रहस्य क्या है। उसके लिए आपको रसिक बनना पड़ेगा। वो है ना जानवी जानवी और वो मीनाक्षी रावत वगैरह जो हां उन्होंने अभी मैंने मेरे पास भी कोई रिक आई थी हमने देखा था जिसमें वो बोलते हैं कि कृष्ण तो थोड़ी है वस्त्र थोड़ी चुराते हैं या माखन थोड़ी चुराते थे तो मुझे इतना बुरा लगा वो देखकर कि पांच आयु पांच वर्ष की आयु का बालक भगवान को छोड़ दे एक बार जी पांच वर्ष की आयु का बालक पिठोरी करता है मजाक करता है। वह तो कभी महिलाओं को उस नजरिए से नहीं देखता है। कपड़े ले भाग गया। आप पांच वर्ष के थे जब कृष्ण जी उनके अंदर इतनी गंदी चीज कैसे सोच

01:04:22:28 सकते हैं? और फिर उसका लीला चिंतन एक अलग जानवी को तो मैं देख रहा हूं जो जानवी है उनका तो पता नहीं समझ में नहीं आता है आज वो छठ पर्व का वो प्रमोशन कर रही है अरे भैया पहले तुम निश्चित कर लो कि क्या तुम जिस धारणा को मानती हो आज समाजी धारणा को जहां ईश्वर निराकार है वहां छठ पर्व किस तरह से बनाया जाता है बनाया जाता है कि नहीं बनाया जाता फिर तुम प्रमोशन करो तुम एक तरफ आ जाओगी स्पॉन का प्रमोशन करने जहां मतलब जहां पे तुम्हें चांदनी दिख जाएगी वहीं पर तुम चांद बन जाओगे चलिए तो वो तो जने कपड़ों के ऊपर से डाल अब इसके बारे में हम आगे ये जाएंगे कि भगवान की लीला अगर टॉपिक आया तो मैं बताता हूं छोटी सी बात है तो बहुत सिंपल देखिए वो गुण रखते हैं बहुत रस क्या है क्या है वो एक चीज है एक चीज ऐसी है जो आपको जो सार्वभौम सिद्धांत है जो आपको पकड़ के रखना है हमेशा काम आएगा भगवान ने ये क्यों किया भगवान ने वो क्यों किया सब में काम आएगा क्या ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है। ईश्वर किसी भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है। ईश्वर सभी नियमों के बनाने वाला सर्व नियामक। इसलिए ईश्वर हसेगा भी, ईश्वर रोएगा भी। रोएगा भी। और अगर इसको थोड़ा सा तर्क से अगर हम समझना चाहे तो जो

01:05:38:07 लोग ईश्वर को कृष्ण के रूप में आने वाला नहीं मानते। ठीक है? जैसे आर्य समय उनका भी ईश्वर सब जगह व्याप्त है। सब जगह है। तो वो सगुण रूप में आ के किसी को देखे या ना देखे मगर वो सबको देख रहा है। तो जब ईश्वर सबको देख रहा है तो ईश्वर ने आपको सरलता से समझाने के लिए एक रूप लेकर के एक लीला रच करके बताया कि मैं सब कुछ देख रहा हूं। मुझसे कुछ भी छुपा नहीं है। मैं सर्व सामर्थ्यवान हूं। तो फिर इसमें आपको आपत्ति क्यों हो गई? क्या निराकार क्या निराकार ईश्वर सब कुछ नहीं देख रहा है? क्या निराकार ईश्वर वहां पर नहीं है जहां पर स्त्रियां स्नान कर रही है वो भी देख रहा है मगर यदि वो कृष्ण के रूप में आ के उसने देख लिया तो इनको आपत्ति होगी कृष्ण जी को कैसे देख सकते हैं अरे भाई तुम्हारा निराकार ईश्वर नहीं जानता क्या वहां स्नान कर रही है अज्ञान है क्या वहां अज्ञानी है क्या ईश्वर तो ये छोटी सी बातें है आप इस बात को सदव ध्यान रखें ईश्वर सर्व सामर्थ्यवान है वो कहीं पर प्राकट रूप से होते हुए भी अथवा ना होते हुए भी वो सारे कार्य कर और देख रहे हैं। उन सब में उपलब्ध है जो जो भी कार्य इस दुनिया में घटित हो रहे हैं उनसे वो जुड़े हुए हैं।

01:06:53:08 हम आपको इनका थोड़ा और सिंपल करके बता देंगे इन केस यू नो लाइक फॉर फ्यू ये ये बोलना चाह रहे हैं कि जब भगवान जब आप समाज में जाएंगे क्योंकि बात हमारी धर्म की हुई, गुरु परंपरा की हुई है, शास्त्रों की हुई है। फिर अब नेक्स्ट टॉपिक ये आता है कि अब आप कुछ ऐसे हिंदू खुद को हिंदू कहने वाले लोगों को देखेंगे जो बोलेंगे कि हम केवल ये पांच पुस्तकों को मानते हैं और बाकी की आठ को हम नहीं मानते हैं तो हमें ऐसे लोगों पर विश्वास नहीं करना है और जब वो लोग आपको बोलेंगे कि इतनी गंदी गंदी बातें लिखी हुई है। अब होता क्या है कि जब ये लोग बोलते हैं दो चार लाइनें सुनते हैं और जो लोग मान लेते हैं वो कभी ग्रंथ खोल के पढ़ते नहीं है। जी आपको जब कोई मंत्र बताता है तो आप कभी टाइम निकाल के पढ़ते नहीं है कि कि इसने जो मंत्र बताया यह सही है या नहीं। यह गलत है या नहीं। है ना? तो अब उसी के कारण आपको यह बताया जा रहा है जब आपके धर्म पर ये मेरी माता जी ने मुझे सिखाया था कि बेटा जब आप ये मेरी माता की बेटी कहे बेटी बेटी बेटी माता में जो कभी भी किसी बिटिया को आप बेटा ना कहे क्योंकि इससे हम उसे बता रहे हैं कि

01:08:08:16 भाई तुम्हारे बेटी होने से हमें दिक्कत है हम जो है उसको उसको उसमें भी बेटा ही ढूंढ रहे हैं ये गलत बात है और जगुरु शंकराचार्य जी ने भी इस ये बात एक बार बताइए अपने चीजों में से। ठीक है। ठीक है। हम समझ रहे हैं। चलिए वापस जाते हैं। रिवाइंड करते हैं थोड़ा सा इसको। तो जैसे मेरी माताजी की सबसे बड़ी सीख मुझे क्या है? है ना? मेरी माता जी ने मुझे बताया बेटी आप मैं आपके सारे प्रश्नों का उत्तर आपको नहीं दे सकती हूं क्योंकि सभी प्रश्नों का उत्तर मेरे पास नहीं है पर हमारा धर्म बहुत महान है। हमारे देश ने बहुत सारी परिस्थितियां देखी हैं और हर परिस्थिति में सबसे ज्यादा हमला हमारे धर्म पे धर्म ग्रंथों पे और धर्म धर्माचार्यों पे किया गया है। तो कभी भी कोई भी अगर तुम्हें बोले कि तुम्हारा धर्म ऐसा है वैसा है यह गलत है सही है कभी भी विश्वास मत करना अपने धर्म पर विश्वास करना एक दिन तुम्हें ऐसा व्यक्ति या कोई व्यक्ति जरूर मिलेगा जो तुम्हें उसका सही अर्थ बता पाएगा अभी मेरे पास उत्तर नहीं है। दिस वास द पेशेंस ऑफ माय मदर एंड वो बात क्योंकि मैं बहुत ही छोटी थी तो बहुत महान बात कह

01:09:23:20 गई आपकी माता जी मैं उनको प्रणाम करता हूं तो वो बात मेरे साथ रह गई मैं आपको बताती हूं क्योंकि वो बात मेरे साथ रह गई उस बात के कारण ही मैं इतना ओपन माइंडेड और अपने आप को मूर्ख समझकर कि मुझे कोई क्वेश्चन मतलब मैं मैं क्वेश्चन भी कर रही हूं तो मैं मूर्ख ही हूं कि मैं समझूंगी मैं जानूंगी और जैसेजैसे आप समय देते जाएंगे, जानते जाएंगे, आपकी लाइफ सिंपल होती जाएगी। आप चीजों को समझते लाएंगे। एंड थिंग्स विल बिकम इज़ियर। सो हियर द पॉइंट कमिंग बैक टू द टॉपिक। हियर द पॉइंट वाज़ दैट एनीबडी हु टेल्स यू कि ये चीज लिखी है, वो चीज लिखी है। डोंट बिलीव इन इट। अंटिल और अनलेस आपने उसका अध्ययन एक शास्त्र प्रमाणिक गुरु के साथ नहीं किया है। आप मेरे व्यूज भी देखेंगे। आप देखेंगे मैं बार-बार बोल रही हूं। शास्त्र प्रमाणिक गुरु शास्त्र प्रमाणिक आचार्य शास्त्र प्रमाणिक संप्रदाय तो उसका मेन रीजन एक ही है मेरी लाइफ में क्योंकि मुझे ये एक क्या बोलेंगे कि पुण्य की तरह मुझे प्रारब्ध पूर्वक मिल गया मिला है और उसके बाद मेरे जीवन में जो परिवर्तन आए हैं क्योंकि ये सत्य का मार्ग है तो मेरा सिर्फ वही है शेयर करने का नहीं तो कोई अपनी तिजोरी खोल कर बैठता नहीं

01:10:38:21 है ना जैसे मिल जाता है वो ले लेता है मैं गुरु गोविंद ग्रंथ के ऊपर जो बात कर रहा था उसमें मैं एक जो इन्होंने क्वेश्चन किया था ना कि जो हमारी कुछ परंपराएं उनके बारे में बता दीजिए और कैसे पहुंचा जाए एक प्रामाणिक गुरु तक ये आपका प्रश्न था वो कैसे पहुंचा जाए वाली बात नहीं हो पाई क्योंकि बहुत बढ़त विषय है तो बार-बार कभी-कभी हां और कभी-कभी हम लोग थोड़े इमोशनल भी हो जाते हैं इस चर्चा में क्योंकि हमें हमारे सामने ये सब चीजें आती रहती है कि कुछ लोग क्या कर रहे हैं और हमें बुरा थोड़ा ये लगता है क्योंकि जो कंज्यूमर है ऑन द अदर साइड ऑफ द स्क्रीन इतने मतलब भोले हैं कि मतलब किसी ने मतलब भारतीय वेशभूषा बनाई नहीं और चार पंक्तियां प्यारी सी बोल दी और आप उसके दीवाने हो जाते हैं। तो उसके लिए हमें बुरा भी लगता है। तो माफ़ कीजिए कि किस किस व्यक्ति को हम किस चीज के लिए देख रहे हैं। इससे हमें किस चीज का श्रवण करना चाहिए। तो मैं सरलता में एक रास्ता बताता हूं। देखिए सबसे पहले हमने नीव क्या है? मिशन, गुरु, गोविंद और ग्रंथ। इनके सामंजस्य से ही इनमें इसको क्या कहेंगे? सामंजस्य को क्या कहते हैं इंग्लिश में? एक बार सेंटेंस बताइए। मतलब जैसे तीनों में तीनों की बात रह जाए जिसमें

01:11:53:22 गुरु, गोविंद और ग्रंथ उसको इंग्लिश में क्या कहेंगे? बैलेंस। बैलेंस कह सकते हैं। संतुलन बना रहे तीनों में मतलब तीनों में से किसी का भी खंडन ना हो। तीनों की बात रह के जो आपको बात प्राप्त हो गुरु, गोविंद और ग्रंथ। तीनों की बात। सो ही इस ट्राइंग टू से दैट यू शुड नॉट गो अगेंस्ट आइदर ऑफ दी स्त्री। मतलब ये तीनों में से किसी चीज को अगेंस्ट नहीं जाना है। लाइक यू हैव टू बिलीव इन ऑल ऑफ दी थ्री थिंग्स टूगेदर। मतलब क्या है? जैसे आपने आपको जो गुरु ने ज्ञान दिया है। ऐसा नहीं है कि केवल उसकी बात ही रह जाए। उसमें ग्रंथ की बात भी इन्वॉल्व होनी चाहिए। और इन दोनों चीजों से मिलकर के आपको प्राप्त होने वाला जो ईश्वर है वो ईश्वर होना चाहिए। गोविंद होना चाहिए। तो गुरु गोविंद और ग्रंथ केवल गुरु नहीं केवल ग्रंथ नहीं केवल गोविंद भी नहीं गोविंद भी अगर आपके पास आ जाए रूप बदल के कि मैं तुम्हें आज बोल रहा हूं जाओ जाकर के जो है चोरी कर लो अगर गोविंद आपके पास आ के ऐसा कह दे वेश बदल के लीला पूर्वक तो आप उनको कहिए भैया मैं आपको प्रणाम करता हूं आप कृष्ण जी बन के आए राम जी बन के आए मैं आपको प्रणाम करता हूं मगर जो परंपरा प्राप्त लेसन है जो मुझे मिले हैं लेसन मैं उनको उनका विरोध नहीं कर सकता और ऐसा हुआ भी है। हमारी हिस्ट्री में ऐसा हुआ भी है। बुद्ध

01:13:08:24 के रूप में भगवान विष्णु जी आए। उन्होंने यज्ञों की रक्षा के लिए सही पर वेदों का विरोध किया। जितने अंश में उन्होंने कहा तो हम सब ने कहा प्रणाम प्रणम में तो हो हमारे लिए पर आप हमारे लिए अनुसरणीय अनुकरणीय नहीं हो। हमने हमारे परंपरा प्राप्त सिद्धांतों को पकड़े रखा। नहीं तो आज हम सब लोग क्या हो गए होते? बद्ध बन गए होते। अच्छा या बुद्ध की विचारधारा को प्राप्त हो जाते या कम से कम वेद विरोधी तो बन ही जाते। क्योंकि कुछ लोग ये नहीं मानते ना कि दो दो बुद्धा है वो वाली फिर चैप्टर खुल जाएगा तो उस नहीं जाते

01:13:42:24 तो कैसे जाए प्रामाणिक आचार्य तक सिंपल आपके जीवन में इन तीन चीजें गुरु गोविंद या ग्रंथ में से कोई भी एक चीज होगी जो पहले आएगी हो सकता है आपके जीवन में ज्यादातर के जीवन में गोविंद पहले आते हैं क्यों क्योंकि वो जिस भी घर में जन्म लेते हैं वहां की माता जब मंदिर जाती है तो गोविंद दिखते हैं वहां मंदिर की ओर तो हो सकता है आपके जीवन में गोविंद पहले आए कि हम कृष्ण को मानते हम राम को पहले मानते थे। कुछ केसेस में ऐसा होता है कि आपके पास पहले शास्त्र आए। कुछ केसेस में ऐसा होता है कि आपके पास पहले गुरु आया। तो जो भी जिनके भी उसमें आप जाए सानिध्य में वहीं से आप अपनी जर्नी शुरू कर लीजिए। जिसके जीवन में गुरु पहले आ गया उसको तो बात खत्म हो गई। प्रारब्ध पूर्वक आ गया। वो आपको गोविंद ग्रंथ है ना? मगर यदि आपके जीवन में ग्रंथ पहले आए तो ग्रंथों का अध्ययन कर लीजिए। ग्रंथों में देख लीजिए कि प्रामाणिक गुरु की क्या व्याख्या हमने आपको बताया भी है 11 पांच 16 में आपको बताया दिस पोस्ट जब पोस्ट हो जाएगा तो आप पीछे जाके और जो ज्यादातर लोगों पर जो अप्लाई होता है जो रूल वो है गोविंद गोविंद सबके जीवन में आ जाते हैं बिना उसके चाहे वो शिव के रूप में हो किसी तो आपको क्या करना है गोविंद का पैर पकड़ लीजिए जी उनका

01:14:57:25 पैर मत छोड़िए राम राम राम राम राम राम राम राम शिव शिव शिवा शिव शिवा शिव इतना इतना जपिए इतना जपिए मैं छोडूंगा नहीं जी अपने आप आपके लिए जो अपेक्षित चीजें होंगी वो आप तक पहुंचंगी क्योंकि भगवान ने कहा है भगवत गीता में कहा है 92 में कि तू मेरी शरण में आ जा तेरी प्राप्ति की रक्षा और आप प्राप्ति की चिंता मैं करूंगा तो आपके जीवन में यदि गोविंद पहले आ गए तो उनके ही पैर पकड़ लो और पैर पकड़ने का सबसे सरल रास्ता है नाम जप जी नाम जप आप चालू कर दीजिए भगवान का पैर पकड़ भगवान मुझे जो भी आप दिलाना है आप दिलाते जाओ। आपके जीवन में ऐसे चेंजेस आएंगे, ऐसे चमत्कार होने शुरू हो जाएंगे कि आप बिलीव नहीं कर पाओगे। ये मेरा ही जीवन है किसी और का जीवन है। हे जी तो देखिए नाम जप इसीलिए वो सबसे ज्यादा बोलते हैं इट वास इजी टू ऑल कॉमन टू ऑल क्योंकि नाम जप से आप हर तरफ जिधर आपका रास्ता होगा ना आपका शिव जी की तरफ होगा वो आपको उधर ले जाएगा। चाहे आप अभी राम नाम जप रहे हो। आप मतलब इतना इंटरेस्टिंग है ये। तो शरद जी कह रही है कैसे भी आए बस सोशल मीडिया सो कॉल्ड इनफ्लुएंसर्स ना आए। बिल्कुल सही कह रही है। हां। तो हम आपको ये मतलब

01:16:12:28 बहुत दिनों से आई वास ट्राइंग पर क्योंकि बहुत सारी चीजें थी और एक जैसे कुछ लोग बोलेंगे ना एक मिनट की रील में मेरे पास भी बहुत लोग कमेंट करते थे कि ये ये आपने बताया नहीं पर ये अब एक मिनट में इतनी सारी बातें नहीं हो सकती है। और दूसरी बात ये है कि मुझे जितना पता है और मैं जितना समझा सकती हूं मैं उतनी कोशिश करती हूं। बट मैंने भी ये पहले लॉन्ग फॉर्मेट में अभी इससे पहले किया नहीं है। अभी स्टार्ट हुआ है। और दूसरा क्योंकि मुझे ऐसा लगता है कि मैं बहुत मेरा ना मतलब मैं कुछ भी नहीं हूं। मुझे तो कुछ पता ही नहीं है। तो मुझे एक ऐसा जैसे आज ये मेरे साथ हैं। है ना? तो जब इन्हें पता है तो हम किसी ऐसे व्यक्ति के साथ बैठ के आपसे बात करें जो आपको और स्पष्टता के साथ और क्लेरिटी के साथ और अलग-अलग परस्पेक्टिव के साथ और टेक्निकल्स के साथ जैसे ये बोलते हैं गीता 23 12 इस तरह से तो वो आपको बता पाए ताकि आपको भी समझ आए अलग-अलग प्रस्पेक्टिव से कि पॉइंट क्या है और एक्चुअली देखा जाए तो इस पूरे पडकास्ट का पॉइंट है आपको एक धर्मा अनबी नाम अनबेल अनबीर नाम रखा है हमने कि आपको पता चले कि

01:17:28:02 धर्म है क्या मतलब चल क्या रहा है कि कहां जाना है कहां नहीं जाना है कहां खोजना है क्योंकि जब हम रील डालते हैं कि गुरु के पास हाउ टू फाइंड अ गुरु क्वेश्चन यही आता रहता है कि मुझे मेरे गुरु पास से मिलेंगे मैं कैसे अपने गुरु को प्राप्त करूं है ना संप्रदाय कौन सी है मैं कहां पे जाऊं कैसे जाऊं धर्म क्या है जो अभी हमने अभी तक कवर कर लिया है अब सबसे सुंदर चीज अभी तक जो हुई है जो हमें अपने नेक्स्ट चरण के पास लेके जाती है वो ये है कि अगला क्वेश्चन जो हमारे पास सबसे ज्यादा आता है व्हाट इज द राइट वे टू डू साधना

01:18:06:24 है ना तो मैं थोड़ा सा उसके ऊपर बता दूंगी सबसे पहले मैं आप सबको एक बार दोबारा ये याद दिलाना चाहती हूं कि जब हम आजकल देख रहे हैं रजिस्टर फॉर शिव साधना 10 दिन पहले महाशिवरात्रि के 10 दिन नहीं 15 दिन पहले से आपको शिवरात्रि का कंटेंट मिलेगा। 10 दिन पहले आपको बता दिया जाएगा कि शिवरात्रि के इतने सोमवार में हम ये ये ये करेंगे। प्लीज रजिस्टर कर लीजिए। तो ये व्यक्ति को आपके पैसे चाहिए। आपको कुछ मंत्र पढ़ाने के और कुछ लिखवाने के और जो सब चार बातें महादेव के बारे में करने के लिए। है ना? अब मैं आपको एक चीज बताती हूं क्योंकि एक कमेंट आया था मेरे पास तो एक व्यक्ति ने बोला कि यह मेरे पैसे की एक बेस्ट इन्वेस्टमेंट थी। मैंने यह कोर्स किया। मैं यह बोल रही हूं क्यों आपको अच्छा लगेगा? आप शिव चालीसा पढ़ेंगे आपको अच्छा नहीं लगेगा। आप शिव जी का नाम लेंगे आपको अच्छा नहीं लगेगा। आपको शिव जी के बारे में कोई चार बातें बताएगा। आपको अच्छा नहीं लगेगा। आप अगर ऐसा कर रहे हैं तो उसे साधना मत बोले। आप कोर्स बोलिए ना कि शिवजी के ऊपर मैंने यह कोर्स बनाया है। इसमें मैं यह चीजें कवर कर रहा हूं। इट्स अ कोर्स। उसको साधना बोल के मत भेजें।

01:19:21:25 क्योंकि पहली बात साधना बिकती नहीं है। साधना मिलती है अपने गुरु से। दीक्षा में प्राप्त होती है। आपको गुरु बताता है कि तुम्हारा साधन क्या है? तुम्हें किसकी साधना करनी है। कितना मंत्र करना है, कैसे करना है, स्नान कब करना है? और पूरा उसका जो न्यास है, है ना? मुझे कितना अच्छा लग रहा है बातें बोलते हुए क्योंकि एक टाइम था जब मुझे जीरो पता था ये सब बातों के बारे में आई वास आल्सो अ जीरो आई डिड नॉट नो अबाउट एनीथिंग बट टुडे आई फील गुड एंड दैट इज व्हाई आई वांट टू शेयर बिकॉज़ आई नो मेनी पीपल आर आउट देयर लाइक जैसे मैं थी पहले तो इस इतनी सारी चीजें हैं तो जो आपको कोर्स दे रहा है ना अगर वो इतने सच्चा है ना आपको को मतलब साधना दे रहा है सॉरी नॉट द कोर्स जो कोर्स दे रहा है वो तो कोर्स ही पकड़ आएगा बट जो आपको साधना करवा रहा है साधना बेच बेच रहा है। उसको यही नहीं पता कि यह बेचने की चीज नहीं है। आप साधना मत बोले। हम आपका विरोध नहीं करेंगे। जी। हम आपको बोलेंगे कि आइए हम क्या कहते हैं? ये स्तोत्र सीखने वाले हैं। आ जाइए। ये फीस है और ये होगा। हम समझ सकते हैं कि कोर्स बोल रहा है। अब अगर मैं उसका अनुसरण करती हूं तो मेरे ऊपर। देखिए एक बात है शास्त्रों के अनुसार जो धर्म

01:20:37:06 की शिक्षा है उसका मूल्य नहीं दिया जा सकता। यदि कोई दान स्वरूप अपना जो सुविधा इत्यादि हम प्रदान कर रहे हैं। ये ऋषिकेश में एक चीज होती है। हम बताएंगे मैं मैं बोल रही हूं। नहीं नहीं प्लीज प्लीज आई हैव टू से दिस। ऋषिकेश में क्या होता है कि क्योंकि मैं तो वहीं पे रही हूं। अभी काफी साल हो गए। पांच साल से ज्यादा हो गए। तो ऋषिकेश में क्या होता है कि वॉकिंग क्लासेस होती है योगा क्लासेस या कोई भी क्लास आती है है ना हीलिंग ऑल दैट तो उसमें लोग बोलते हैं डोनेशन बेसिस है ना तो अब जो अंग्रेज आते हैं तो उनका क्योंकि सिस्टम थोड़ा वैसा रहता है तो वो आपको कोई ना कोई डोनेशन दे देते हैं लाइक पैसे वो आपको दे देते हैं और उनके लिए ₹500 देना आपको कोई बहुत बड़ी बात नहीं पर कोविड के बाद सीजन डाउन हो गया है ना तो शुरू शुरू में तो डोनेशन बेस पे लोग बहुत समझते थे कि है ना कि अच्छा ही लगता था कि कोविड के बाद एक आउटसाइड एक्सपीरियंस हो रहा है कि यार यह ले पैसे मुझे बहुत अच्छा लगा। पर फिर उसके टाइम पे उस थोड़े टाइम बाद लोगों के पास पैसे नहीं थे। है ना? पैसे बहुत कम थे। तो लोग क्या और लोग डोनेशन नहीं देते थे। है ना? तो क्या होता था कि सोचिए योगा क्लास या कोई इवेंट है डोनेशन बेस्ड। सब इवेंट में आए। सबने क्लास कर दी। किसी ने आपको ₹10

01:21:52:12 भी नहीं दिए। तो अब उससे नुकसान हो रहा है। पीपल आर लाइक कि यार डोनेशन नहीं आया। डोनेशन नहीं आई। जी। फिर उन्होंने क्या शुरू किया लिखना डोनेशन बेस्ड मिनिमम डोनेशन ₹0। तो जो आपको वो चार्ज कर रहे हैं ना वो इसलिए क्योंकि उन्हें चाहिए इतना तो चाहिए। ये कर सकते हैं कि जैसे मान लीजिए उनका कुछ एक सुविधा शुल्क होता है ना कि वो चीजें ऑर्गेनाइज करने में उनका इतना खर्च हो रहा है। वो एनजीओ नहीं है ना। मैं वही तो बोल रही हूं। एक प्राइवेट है। उस रूप में लिया जा सकता है। मगर धर्म शास्त्रों के हिसाब से इसको निम्न विहीन भावना से। बहुत अत्यंत व्यवस्था हो तो कहीं पर लागू करने की बात की गई तो बात परंतु सबसे पहला तो यही है कि आप धर्म को व्यापार की दृष्टि से देखें ही ना आप जो है अपने को त्याग करके बलिदान पूर्वक इस मैदान में कूदे और जब आप ऐसा करते हैं कि हमने भाई जो है समर्पण की भावना से ही केवल एक कल्याण की भावना से अपने रास्ते बनाए तो अवश्य ही फिर भगवान कहते ना तू मेरी शरण में आजा तेरी प्राप्ति की रक्षा अप्राप्ति की चिंता में आप बिलीव नहीं करोगे कि मैंने अपने जीवन में ये मैं अपने उसके लिए नहीं कह रहा हूं कि मैं अपनी बढ़वती मान क्योंकि मैं दिन भर ये चिंतन करता रहता हूं। मेरे से आज इतनी सारी गलतियां हो रही है। मेरा

01:23:07:15 इसमें दिमाग रहता है। मगर मैं आपको एक उदाहरण दे रहा हूं कि मैंने अपने जीवन में जहां जहां पर कठिन परिस्थितियों में भी धर्म का निर्वाह किया है। उसके बाद मेरे जीवन में ऐसे परिवर्तन हुए चमत्कारी जिसकी मैंने अपेक्षा नहीं की। जब जब मैंने कठिन परिस्थितियों में धर्म को पकड़े रहा कि नहीं नहीं मैं यही करूंगा इसको नहीं छोड़ सकता जहां जहां पर हम ऐसा कर जाते हैं ना जहां हम कठिन परिस्थितियों में विषम परिस्थिति विपरीत परिस्थितियों में जब हम धर्म का त्याग नहीं करते फिर आपके लिए आगे धर्म इतना सरल रास्ता कर देता है कि आप मतलब वो आपने अपने लिए सोचा भी नहीं होता है और आज भी मैं हूं मेरी कोई आर्थिक स्थिति कोई ऐसी नहीं है कि मैं बहुत बड़ा कुछ मैंने ऐसा खड़ा कर लिया हो मगर मुझे इतना विश्वास कि हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता मेरे पीछे राम है मेरे पीछे गुरु गोविंद ग्रंथ है मेरा कोई माई का लाल कुछ नहीं बिगाड़ सकता मेरे से कोई दुनिया में इस जीवन इस दुनिया में विजय प्राप्त नहीं कर सकता क्योंकि मेरे पास राम है और मेरा कोई भी काम नहीं रुकता है नहीं रुकता बस भगवान से प्रार्थना करता हूं जो भी काम है जो भी मेरे अभीष्ट फल होते हैं वो मुझे प्राप्त तो हमें ये भावना लेकर के आगे जी प्रश्न अब आगे आगे बढ़ रहे हैं। मैं

01:24:22:21 एक चीज कहूंगा कि मुझे लगता है कि काफी विषय होगा। तो हम इसको कई चैप्टर्स में करें और मुझे लगता है थोड़ा सा आप जो भी करें उसके बाद क्वेश्चन भी ले ले। कई लोग इंतजार में बार-बार पूछ रहे हैं कि क्वेश्चन कब लेंगे? तो एक्चुअली हमने जो बाद के कुछ क्वेश्चन थे वो ऑलरेडी कवर कर लिए है। जैसे हमने ये भी कवर कर लिए। हाउ टू आइडेंटिफाई फेक स्पिरिचुअल इनफ्लुएंसरर एंड सेल्फ डिक्लेयर्ड गुरुस। अगर आप हमारे वीडियो का फ्रंट मतलब जो इनिशियल कन्वर्सेशन देखेंगे एकजेक्टली हाउ यू विल आइडेंटिफाई कि है या नहीं है और अब आगे बढ़ेंगे कि एंड फाइनली हाउ इज सनातन धर्म डिफरेंट फ्रॉम ऑल द न्यू एज बिलीफ सिस्टम और इसके अंदर वही वाला आपका आ जाता है कि हमारा ईश्वर सर्वशक्तिमान है ये वाला सिद्धांत पर उससे पहले एक श छोटा सा एक क्वेश्चन जो हमारा बचा हुआ है वो यह है कि व्हाट इज द राइट वे टू डू साधना? तो ये दो चीजें हैं। इन्हें कवर करके अब हम प्रश्न उत्तर की तरफ बढ़ेंगे। तो पहले हम कवर करते हैं हाउ टू डू व्हाट इज द राइट वे टू डू साधना। क्योंकि लास्ट वाला जो पार्ट है वो बहुत सुंदर सी

01:25:37:25 समरी बनता है। जी। देखिए राइट वे टू डू साधना के विषय में मैंने अभी आपको एक चीज बताई कि आप सबसे पहले क्योंकि आपके घर में गोविंद तो होते ही तो आप गोविंद को समर्पित रूप से कि मुझे कोई प्राप्त नहीं करनी है कोई चीज इस भावना को मन में रखते हुए आदि शंकराचार्य जी ने अपने भगवत गीता भाष्य में कर्म करे का अर्थ करते हुए वहां पर एक बात कही कि उस समय आप ये भी मत सोचिए अपना कर्म करते समय कि मुझे मोक्ष मिलेगा सिर्फ अपने देखिए अंदरूनी सबकशसली हमारे मूल में वो है कि हमें मोक्ष चाहिए। हम जो भी ढूंढ रहे हैं वो है सत ही स्तर पर अपने आपको क्या बताना है बुद्धि पूर्वक अपने आपको क्या बताना है। किस सिद्धांत को कितना कहां लगाना है? हां वो है मूल में है कि हम क्या क्यों कर रहे हैं। अब हमारी हर चीज में एक ही चीज छुपी हुई है कि हमें सच्चिदानंद चाहिए। हमें मोक्ष चाहिए। इससे कोई डिनाई नहीं कर सकता है। मगर हम जब सत ही स्तर पर अपने मन को बताते हैं हमें क्या चाहिए? हम ये क्यों कर रहे हैं? तो हमें वहां पर सिर्फ इतना बताना है। मुझे नहीं पता मैं क्यों कर रहा हूं। मैं सिर्फ इसलिए कर रहा हूं क्योंकि शास्त्र ने कहा है क्योंकि भगवान ने कहा है। इस समर्पण भावना के साथ जब आप भक्ति

01:26:53:01 करना भगवान की शुरू करते हैं जो उन्होंने पूछा कि साधना के लिए सबसे राइट पथ क्या है? तो क्योंकि जब जब शास्त्रीय दृष्टि से जाते हैं तो उसमें अलग-अलग लोगों के अधिकार की सीमा सीमा में अलग-अलग साधनाएं होती है। स्त्री के अनुसार अलग साधना है। पुरुष के अनुसार अलग साधना है। उसमें भी विवाहित स्त्री की अलग है। अविवाहिता की अलग है। और सबसे सुंदर बात मैं आपको इसको और शॉर्ट में भी बताती हूं। स्पेशली फॉर फीमेल्स कि जैसे कुछ महिलाएं अब काम कर रही है। है ना? आपके डिफरेंट स्ेड्यूल है। इवन फॉर मेल है ना? स्टडीज हैं, कुछ पढ़ रही है, कॉलेज जाती है, स्कूल जाती हैं। तो हमें क्या होता है कि हमारा लाइफ स्टाइल पहली चीज क्या है कि आपका यूनिक कोड आपके लिए स्पेसिफिकली जो साधना होगी वो मेरे लिए जरूरी नहीं है वो सेम होगी। है ना? और ये चीज का जो ज्ञान है जिनको ये दिखता है जिनके पास ये दृष्टि है वो दोबारा हम शुरू में आ जाते हैं अपने वीडियो के कि वो एक परंपरा प्राप्त आचार्य है की दवा है आचार्य के शहर में तो आप आपका जो आंसर बनता है व्हाट इज द राइट वे टू डू साधना ये प्रश्न आपका उत्तर जो है वो आपको तब मिलेगा जब आप

01:28:08:09 एक शास्त्रीय प्रमाणित संप्रदाय से या किसी शास्त्रीय प्रमाणित मैं ये नहीं कह रही हूं तुरंत गुरु बना लीजिए। पहले किसी संप्रदाय के पास जाइए। अलग-अलग संप्रदायों में जाइए। देखिए आपका कहां पे भाव बन रहा है। फिर उनको समझिए। उनके सिद्धांत को समझिए कि इस संप्रदाय में ये फिलोसफी मानते हैं। इस संप्रदाय में ये फिलोसफी यहां पे बन जाती है। ये फिलोसफी फिर आगे जाके यहां ग्रो कर जाती है। उसको समझिए। उसके बाद साधना में आइए और तब तक यह जो एक्सप्लोरेशन फेस है ना हमारा तब तक आपकी साधना नाम जप और अपने कर्मों को सही रखना और मैंने एक बार मैं तो यहां तक कहता हूं कि अगर आपने नाम जप को पकड़ लिया तो आपके कर्म भी ऑटोमेटिकली सुधरते जाएंगे हां वो हमारी साधना है और बाकी बहुत जैसे चालीसा है चालीसा तो सब पढ़ते हैं 20 अक्षर हटा दीजिए चालीसा पढ़िए जितने भी जो रामचरितमानस इत्यादि जैसे हमारे इनसे जुड़ी हुई जितनी भी भक्ति के निमित्त जो बातें बताई गई है वो सारी आपके अधिकार की सीमा में आती है। सबके अधिकार की सीमा में आती है। तो आप सब उनका आलंबन ले सकते हैं। उससे आपके जीवन में जो भी अभीष्ट होगा वही कैरी ऑन होना होगा। वही कैरी ऑन होगा। या फिर किसी गुरु का आना अपेक्षित होगा तो वो गुरु

01:29:23:13 आएंगे। किसी मंत्र का आना, किसी ग्रंथ का आना जो भी आपके जीवन के लिए अपेक्षित होगा वो फिर आपको भगवान करेंगे। मगर भगवान को सर्वशक्तिमान रूप में स्वीकार करके करिएगा। ये बाधित वाला नहीं। निराकार टाइप के अवतार नहीं ले सकता। मूर्ति नहीं हो सकती। ये सब नहीं। भगवान सर्वशक्तिमान है। सर्व समर्थवान है। इस भावना को मन में लेते हुए ही उनका जप करिएगा। क्योंकि भगवत गीता में भगवान ने ये बात भी कही है कि जो लोग मुझे मानव रूप में देख के मुझे ब्रह्म नहीं समझते मेरे ब्रह्म भाव को भूल जाते हैं। मूर्ख है और ऐसे लोग मुझे प्राप्त नहीं कर पाते। तो उनके जीवन में अभी चेंज नहीं आएंगे। तो आपको जो सर्वशक्तिमत्ता है उनकी स्वीकार करती होगी। इसके जैसा कोई नहीं है। इसके आगे अब किसको ही हैज़ ऑलरेडी एक्चुअली एक्सप्लेन लास्ट पार्ट ऑफ आवर क्वेश्चन व्हिच इज़ आई विल रिपीट अगेन। हाउ इज सनातन धर्म डिफरेंट फ्रॉम द ऑल फ्रॉम ऑल न्यू एज बिलीफ सिस्टम्स हैशटग रिलीजन। जी इसको मैं आपको एक चीज आई विल शेयर विद यू कि द फर्स्ट थिंग इज टू अंडरस्टैंड द मेजर ये चीज मैंने अपने प्रोग्राम्स में भी इस बार रिसेंटली आई ट्राई टू टीच माय स्टूडेंट्स कि

01:30:38:24 ये आपने बहुत जगह सुना होगा कि लोग बोलते हैं सारे रास्ते अलग-अलग है बट जाना सबको एक ही जगह पे है। एकम शब्द विप्रदा इस तरह के चीजों का वो अलग अर्थ लेते हैं। यहां पर हम आपको इसके अंदर एक चीज बताते हैं कि ये जो मतलब ये हमें जो समझ आया आप बताइएगा हम अगर इस बात को ठीक समझ पाए। अब ये जो हम बोलते हैं कि सब रास्ते अलग-अलग है बट जाना हमें एक ही तरफ है। ये एक ही तरफ और रास्ते जो अलग-अलग है ये अलग-अलग दूसरे रिलीजंस नहीं है। कि ये सारे अलग-अलग रिलीजंस एक तरफ जाएंगे। यह जो अलग-अलग रास्ते हैं यह हमारे शास्त्र के दर्शन है जो अलग-अलग दर्शन है छह ये मैं हूं इट्स विद इन द सनातन धर्म दर्शन फिलोसफी द सिक्स हिंदू द सिक्स हिंदू फिलोसफीस ऑफ आवर सनातन धर्म इट इज दैट डिफरेंट डिफरेंट पार्ट दैट लीड टू वन निराकार कुल मिलाकर के परंपरा प्राप्त वैदिक जो हमारे सिद्धांत है उनके लिए बात कही गई है हां नॉट फॉर ये नहीं है कि किसी बच्चे ने अभी मेरे पास फोन आया था एक उसने कहा कि एकदम वो इस वाला व्यक्ति बार-बार परेशान कर रहा है कि से आपको

01:31:54:07 प्रॉब्लम है से आपको प्रॉब्लम है क्योंकि वो अलग कर देते हैं हां वो वो कई जगह अल्लाह और ये क्रिश्चियनिटी से जोड़ देते हैं और वो आपको महादेव से और बाकी कोई महादेव का अपमान करते हैं बहुत अपमान करते हैं तो वो मुझे बोल रहा था कि क्या प्रॉब्लम रिस्पांसिव है तो मैंने कहा ये प्रॉब्लम रिस्पांसिव तो वो बोला कि अरे भाई एकम विप्र सत बहुदा तो मैंने कहा कि भाई एक बच्चा सुपरमैन की कॉमिक्स ला के कहेगा ये भगवान है मान लोगे क्या हां सुपरम पढ़ के बोलेगा कि सुपरम से मुझे शिव जी मिल जाएंगे एकम एकम सद विप्रती है ना तो वही वो विप्र है मेरा मेरा यही ईश्वर है ये भी है ऐसा नहीं है जो परंपरा प्राप्त प्रमाणिक वैदिक सिद्धांत है उनके लिए ये बात कही अच्छा नाउ कमिंग टू डिफरेंट बता दू सनातन में वो कंपैरेटिव पर्सेक्टिव से मैं अब बता देता हूं। देखिए सबसे पहले आप ये समझ लीजिए कि धर्म क्या है? धर्म क्या है? जीव की चाह का वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर जिसको मोक्ष भी कहते हैं। जीव क्या ढूंढ रहा है? जीव की चाह का वास्तविक विषय क्या है? हम हर जगह क्या ढूंढ रहे हैं? सच्चित आनंद। हम ऐसा आनंद

01:33:09:18 ढूंढ रहे हैं जो कभी समाप्त ना हो। हम ऐसा ज्ञान ढूंढ रहे हैं जो कभी खत्म ना हो यानी उसका कहीं अंत ना हो और हम अपने अस्तित्व को भी सत वाला अस्तित्व ढूंढ रहे हैं कि हम कभी मरे नहीं कभी मृत्यु को प्राप्त ना हो इस बात को ही कहा गया अस्तो मा सग मृत्यु तो जीव की चाह का वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को परिभाषित कर सकने वाले वेदाद

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01:33:34:26 शास्त्रों द्वारा जीव की चाह के वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त करने के निमित्त बताई गई विधि का नाम धर्म है। यानी कि

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01:33:45:22 सिंपल भाषा में कहे तो जो ईश्वर है उसको प्राप्त कराने वाले जो डस एंड डोंट्स है वही धर्म है। ये करना अगर ईश्वर तक जाना है तो ये करना है ये नहीं करना है। डूस एंड डोंट्स। और ऐसे डूस एंड डोंट्स में क्या आ जाता है? सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में कौन माता है, कौन बहन है, कौन पत्नी है। इस स्त्री से विवाह नहीं करना है। इस स्त्री से करना है। ये क्या हो गया? डूस एंड डोंट्स। ठीक है? तो क्यों? ऐसा क्यों करना है? इससे विवाह नहीं करना। इससे करना है। ऐसा क्यों करना है? क्योंकि हमको ईश्वर तक जाना है। इसीलिए कहा गया कि धर्म उसी के पास है जो आस्तिक है। धर्म उसी के पास है जो ईश्वर को मानता है। अगर हम किसी नास्तिक को ले ले तो उसके पास सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में अंतर करने का आधार का कोई कारण नहीं है। वो कर रहा है क्योंकि उसके मां-बाप जो आस्तिक है उसने उसे सिखाया है और उसके पास कोई ठोस आधार नहीं है। हमारे पास है क्योंकि हमें ईश्वर तक जाना है। इसलिए हमें ये मान ठीक है? तो धर्म ये है। अब क्या आ जाती है बात कि किस तक जाना है? धर्म कहां से शुरू हुआ? जीव की चाह का वास्तविक विषय ईश्वर। ईश्वर कौन है? ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है। ईश्वर किसी भी तरह के व्यवधान से रहित है। ईश्वर किसी भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है। अगर नियम लग गया तो जिस पर नियम लगा वो ईश्वर नहीं है। ईश्वर में अभाव नहीं

01:35:00:24 हो सकता किसी चीज का। ईश्वर ये नहीं कर सकता। ईश्वर अवतार नहीं ले सकता। ईश्वर की मूर्ति नहीं हो सकती। ईश्वर उड़ नहीं सकता। ईश्वर का हम ईश्वर तक जा ही इसलिए रहे हैं क्योंकि ईश्वर अभाव रहित है। तो अगर हम ये कह दे ईश्वर ये नहीं कर सकता तो वो ईश्वर सिद्ध नहीं होगा। तो इसलिए हमारा धर्म धर्म क्यों है? अन्यों का धर्म धर्म क्यों नहीं है? कि सनातन धर्म के विरुद्ध जितनी भी आईडियोलॉजीस आई है उन सबका ईश्वर ईश्वर ही सिद्ध नहीं होता क्योंकि उन सबका ईश्वर खुद कहते हैं कि वो बाधित है यानी कि वो सर्वशक्तिमान नहीं है। वो सब कुछ नहीं कर सकता। इस्लाम का ईश्वर छह 150 में कहा गया कि उसकी कोई संतान कैसे हो सकती है? जबकि कोई उसकी पत्नी ही नहीं है। यानी कि वो ईश्वर कहां पर लिमिटेड हो गया कि पत्नी होगी तो संतान होगी। यह ना सकना वाली बात नहीं कर सकता। ही कांट डू इट। यह जो चीज है यह हमारे ईश्वर के साथ नहीं आती। इसलिए इस ईश्वर को प्राप्त कराने वाले जो ड्स एंड डोंट्स है वो धर्म कहलाते हैं। और वो जो ईश्वर के नाम पे ईश्वराभास या ईश्वर जैसा मिलता जुलता कोई वाइस कैप्टन या फिर उसको और एक कह सकते हैं कि ईश्वराभास जैसा और कोई भी शब्द है तो जो मिलता जुलता जो सो कॉल्ड ईश्वर है तथाकथित ईश्वर

01:36:16:04 तो उसको प्राप्त कराने वाली जो उन्होंने नियमावली दी है उसको धर्म नहीं कहा जा सकता क्योंकि वहां पर ईश्वर ही नहीं है। वो सब कुछ नहीं कर सकता। हमारा ईश्वर यदि कोई कहे कि वो जन्म नहीं ले सकता तो श्री राम कृष्ण के रूप में वो जन्म लेता है। अगर कोई कहे कि वो अपने शरीर का नाश नहीं कर सकता। इनहीं रूपों में आ के वो अपने शरीर को नष्ट करके दिखा देता है। कोई कहे कि वो मत्स्य नहीं बन सकता। वो मत्स अवतार लेता है। कोई कहे कि वो पूर्व नहीं बन सकता। वो पूर्व अवतार लेता है। कोई कहे वो वरा नहीं बन सकता। वो वरा अवतार लेता है। कोई कहे कि वो आधा जानवर आधा इंसान नहीं बन सकता। वो नरसिंह अवतार बन जाता है। कोई कहे कि वो झूठ नहीं बोल सकता तो वो छलिया कृष्ण

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01:36:57:03 बन जाता है। मोहिनी बन जाता है। और अगर कोई कहे कि वो केवल सत्य नहीं बोल सकता तो वो राम बन जाता है।

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01:37:04:14 तो हमारा वो ईश्वर है जो कुछ भी कर सकता है उसके लिए एक लाइन नहीं बोली जा सकती। ही कांट डू इट। यह लाइन जिसके सामने लग जाएगी वो बाधित ईश्वर है वह सनातन ईश्वर नहीं है। और जब यह लाइन लग जाएगी तो इसी लाइन के लग जाने के कारण सनातन विरोधी सारे जो आइडियोलॉजीस है वो हार जाती है। ढेर हो जाती है और वहीं पर हमारी जो जीत है वो सुनिश्चित होती है। हमारा धर्म धर्म कहलाता है। उस ईश्वर को प्राप्त करने के निमित्त जो मनुष्य की चाह का वास्तविक विषय है। जी हम क्या चाहते हैं? हम जैसे एक नास्तिक भी है वो भी अपने मन में कई बार ये सोचता है कि बारिश ज्यादा पड़ रही है तो कम हो जाए। धूप ज्यादा निकली है तो कम हो जाए। नास्तिक भी सोच रहा है विज्ञान के विरुद्ध जाकर के वो ये सोच रहा है कि धूप कम हो जाए। मेरे अनुसार ये दुनिया चलने लगे। क्यों सोच रहा है? क्या विज्ञान ने कहा है कि तुम्हारे अनुसार ये दुनिया चलेगी। तो इसका मतलब उसके उस नास्तिक के अंदर भी सब कुछ कर सकने वाला बनने की चाह विद्यमान है। जिससे यह सिद्ध होता है कि इस दुनिया में कोई है जो सब कुछ कर सकता है। तो जब हमारा ईश्वर सिद्ध कहां से हुआ कि एक नास्तिक के अंदर भी सब कुछ कर सकने वाला बनने की चाह है। जिससे ईश्वर सिद्ध हुआ, धर्म सिद्ध हुआ। तो फिर ईश्वर कौन

01:38:19:18 होगा? उसका जो सब कुछ कर सकता है। तो इसी कारण से हम सनातन को ही एकमात्र कहा जा सकता है कि वो धर्म है और सनातन के विरुद्ध जितनी भी और अन्य आइडियोलॉजीस आई है वो धर्म नहीं। उनको जो भी वो नाम दे एंड वि दैट वी विल कंक्लूड द सेशन बाय सेइंग दिस इज हाउ सनातन धर्म इज डिफरेंट फ्रॉम ऑल द डिफरेंट न्यू एज बिलीफ सिस्टम बिकॉज़ हियर वी हैव द डिवाइन एज़ द डिवाइन वर्किंग एज़ अ बॉडी दैट कैन डू एवरीथिंग एंड एनीथिंग एंड इज़ नॉट लिमिटेड एंड इज़ सेड ओ द डिवाइन डज़ंट नीड टू डू इट। डिवाइन नीड्स टू डू एवरीथिंग बिकॉज़ एवरीथिंग इज़ एनीवे हैपेनिंग एंड इफ अ पीपल आर गेटिंग मैरिड देन द डिवाइन इज़ मेकिंग दैट पॉसिबल। सो द डिवाइन इज़ मेकिंग इट हैपन। तो दिस इज़ जो इन्होंने अभी आपको जो सिद्धांत दिए हैं इसे एकदम रिवाइंड करके एक बार दोबारा सुन लीजिए। आपको और ज्यादा क्लेरिटी मिलेगी। बार-बार सुनिए कि सनातन धर्म बाकी सभी के सभी न्यू एज बिलीफ सिस्टम हैश स्लश रिलीजन से अलग क्यों है? एंड विथ दैट वी विल कंक्लूड आवर टुडेज़ वंडरफुल सेशन।

01:39:34:28 अगेन थैंक यू सो मच फॉर वेटिंग फॉर अस टुडे एंड प्लीज मेक श्योर दैट यू टेक अवे ऑल द फैक्ट्स दैट वी शेयर विद यू एंड यू आर मोर एंड मोर अवेयर अबाउट व्हाट काइंड ऑफ़ चॉइसेस यू आर मेकिंग इन लाइफ एंड आई जस्ट शेयर अ पर्सनल थिंग विद यू फ्यू इयर्स बैक आई वाज़ अ वेरी डिफरेंट पर्सन एंड आय डिडन्ट नो एनीथिंग लाइक आय सेड आय डिडन्ट इवन नो द मंत्रज़ आई वास अ चैंटिंग रोंग मंत्र्रास एंड आई हैड अ वेरी डिफिकल्ट लाइफ एंड प्रॉब्लम्स दैट आई डिडट नो व्हाई दे वर हैपनिंग टू मी बट एवर सिंस आई ट्राइड टू क्वेश्चन हंबली फ्रॉम अ प्लेस ऑफ जिज्ञासा नॉट आर्गुमेंट एंड गव मायसेल्फ द टाइम टू लर्न एंड आई एम स्टिल गिविंग मसेल्फ द टाइम टू लर्न आई होप आई मूव सक्सेसफुली फॉरवर्ड इन माय पाथ एंड सो डू सो यू ऑल आल्सो डू दैट इज व्हाई आई एम शेयरिंग विद यू क्वेश्चन हंबली एंड सीक ओनली द ट्रुथ। अपना स्टैंडर्ड इतना ऊंचा करो ना। इतना ऊंचा करो कि आपको कोई मूर्ख और बुद्धू बना ही ना पाए। बिकॉज़ यहां पे अगर आप मूर्ख और बुद्धू बन गए

01:40:50:02 तो योर लाइफ इज वेस्टेड एंड यू आर इन अ ह्यूमन बॉडी। एंड दिस जन्म इज वेरी वेरीरी प्रेशियस टू यू। एंड विथ दैट आई विल कंक्लूड द सेशन। थैंक यू सो मच फॉर गिविंग अस टाइम। एंड अभी हम आपके क्वेश्चन देखेंगे और उसके ऊपर थोड़ी सी चर्चा करेंगे। कुछ थोड़े से क्वेश्चन ले लेते हैं क्योंकि हम लोगों ने शुरू लेट किया था। एक्चुअली कुछ और काम भी थे। कुछ धरातल की चीजें भी थी तो लेट होने के कारण हम कर रहे थे। जी जी जी। सो यू कैन ऑल हु सो एवर इज देयर विद अस। प्लीज सेंड अस योर क्वेश्चन एंड आई विल जस्ट टेक सम टाइम टू गो थ्रू द चैट। लेट्स डू इट। साथ कंचन जी के बार-बार प्रश्न आ रहे हैं। कुछ कोई कंचन जी का कोई एक टॉपिक है वो आप ले सकते हैं। पीछे पीछे से लिख लीजिए। कंचन जी कोई एक मुख्य प्रश्न हो आपका तो जी धन्यवाद आपका। सरस जी बोल रही है कि इंग्लिश बोलते हुए अच्छे लिखते हैं। आपका धन्यवाद। और इंग्लिश के साथ मैं बहुत ज्यादा सहज नहीं हूं। वो शालू जी बोल रहे हैं कि आप जो भक्ति बताते हैं उससे मुझे क्या मिल सकता है? रिप्लाई करना भाई। हां इससे

01:42:05:10 आप उत्तर दीजिए हम और इससे आपको जो वास्तविक शांति है जो आप दिन भर ढूंढ रहे हैं। एक्चुअली क्या था एक दिन मुझे ये जो का संदर्भ है ना सच बता रहा हूं। जिस दिन मुझे इसका अर्थ पता चल गया था। उस दिन मुझे नींद आई थी। आप सच मैं बता रहा हूं। मैं अभी मैं थोड़ा सा भावुक भी हो रहा हूं अपने उस समय को याद करते हुए। जिस दिन आपको आपकी लाइफ का गोल मिल जाता है ना उस दिन आपको चैन की नींद आती है। पता है मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या क्या है? मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या है कि उसको पता नहीं कि मेरी समस्या क्या है। वो दिन भर इसी में ढूंढ रहा है। मुझे क्या चाहिए? वास्तविक है। आप कभी कैलकुलेट करिए। अच्छा वो सब छोड़िए। आपके जीवन की जो प्रॉब्लम्स वगैरह है जो भी उद्देश्य है कभी उनको एक नोटपड पर लिखिए। आप जिस दिन उसको लिख लेंगे ना उस दिन आपको संतुष्टि मिल जाएगी। रिलैक्स हो जाएंगे आप क्योंकि आपने नोट कर लिया। यानी कि अब आप सुनिश्चित हो गए हैं। ये जो विकराव है ना अपनी समस्याओं को ना जानना। ये आपकी तकलीफ है। तो आपकी जो सबसे मूल तकलीफ है, सबसे मूल तकलीफ है वो है कि आपको पता नहीं है कि आपको चाहिए क्या? एक्सजेक्टली। जिस दिन आपको ये पता चल जाता है चाहिए क्या? आपकी आत्मा भूखी है। असतो मासमया चिल्ला रही है। असतो मागया तमसो

01:43:20:12 मागया ये आपकी आत्मा चिल्ला रही है। आप इस पर ध्यान नहीं दे रहे। आप एसी पे ध्यान दे रहे हो। आप कार पे ध्यान दे रहे हो। आप Mahindra की नई कार आई है कर जैसी उस पर ध्यान दे रहे हो। सफारी पे ध्यान दे रहे हो नए मॉडल में आने वाली या फिर वो जो विदेशी कारें आ रही है उनपे ध्यान। मगर आत्मा आपकी रो रही है। उसको भोजन नहीं दे रहे हो। उसको राम नाम का उच्चारण नहीं सुना रहे हो। जिस दिन आप सुनाओगे ना मन से राम नाम का उच्चारण आपको तब संतोषजनक नींद आएगी। यह नींद मिलती है आपको धर्म के पथ पर चलने से साधना मार्ग पर आने से नींद चैन की नींद और फिर वो आपका परमार्थ तो बात अलग ही है। आपका व्यवहार तो अलग है ही वो सब सुनिश्चित होता है। मगर ये जो नींद है ना इसको आप चार तोले की चैन खरीद के फॉर्च्यूर खरीद के भी आप चैन की नींद प्राप्त नहीं कर पाओगे। वह नींद आपको आती है अस्तोमा सद्गमया को जानने के बाद यह प्रश्न करने के बाद और इसका उत्तर मिल जाने के बाद उत्तर क्या है? सत्यम ज्ञानम अंतम ब्रह्म और उसका सरल भाषा में जो उत्तर है वो है राम। तो ये आपको मिलता है। ठीक है? गायत्री मंत्र कौन से ग्रंथ में है? हमारे वेद में है। विश्वामित्र जी द्वारा इसका दर्शन किया गया है।

01:44:35:20 और गायत्री मंत्र में ऐसी क्या शक्ति है जिसके कारण हर कोई उसे नहीं कर सकता। हर कोई उसे कर सकता है मगर उसके अलग-अलग रूप है। जैसे कि गायत्री मंत्र का एक रूप मानस में है। जनक सुदा जननी जानकी अच्छे से करना जानकी। तो जैसे कि एक बॉलर का रोल अलग होता है। बैट्समैन का रोल अलग होता है। अब बॉलर कहे कि मैं पैड पहन के बॉलिंग कराऊंगा। तो बॉलर अगर वो भी फास्ट बॉलर और वो कहे कि मैं पैड पहन के और हाथों में ग्लव्स पहन करके बॉल कराऊंगा तो क्या बॉल स्विंग करेगी? तो क्योंकि बॉलिंग करनी है उसको और बॉलिंग करने के अनुसार वो टीम में एडमिट है तो उसके अनुसार उसकी विधि है कि भैया तुम्हें बिल्कुल फ्री रहना है। जिसको बल्लेबाजी करनी है वो पैड पहनेगा वो जो है ग्लव्स पहनेगा वो उस तरीके से पिच पर उतरेगा। तो इसी प्रकार से गायत्री मंत्र के कई रूप है। आपको बता दूं कि गायत्री मंत्र हमारा 24 अक्षरों का 24,000 श्लोकों की हमारी रामायण है। गायत्री मंत्र का ही वो एक्सप्लोर एक्सप्लोर किया गया गायत्री मंत्र को। तो क्यों किया गया? क्या आवश्यकता क्योंकि बॉलर के लिए अलग चीजें हैं। अब हमारा अगला क्वेश्चन है राधा वल्लभ

01:45:51:13 इन श अगर कहे कि गायत्री मंत्र नहीं पढ़ना चाहिए ये नहीं कहा जा रहा है। गायत्री मंत्र जिस रूप में आप पढ़ रहे हो वो वाला विश्वामित्र जी उस रूप में ना पढ़ के उसके कई अन्य रूप है उसमें आप गायत्री मंत्र भी किसका रूप है? फिर उस हिसाब से तो आप प्रणव का उच्चारण करो। शास्त्रों के अनुसार जो सूक्ष्म वेद है वो प्रणव है। ओम खाली ओम का बस हो गया गायत्री मंत्र उसी को एक्सप्लोर किया है गायत्री मंत्र में उसी को एक्सप्लोर किया चार वेदों में उसी को फिर आगे 18 पुराणों में उसी को आगे स्मृति में वही उसका व्याख्या ही तो चल रही है एक्सपेंशन देवी भागवत लेना है गीता प्रेस का ले या चौक चौखंबा का गीता प्रेस से भी आता है संस्कृत हिंदी दोनों में और चौखंबा से भी आता है फिलहाल मुझे लगता है सस्ता तो आपको वही पड़ जाएगा गीता प्रेस से जी सकते और अगर आपके पास ऐसा कोई मतलब इफ यू डोंट हैव द रिस्ट्रिक्शन ऑन मनी देन मे बी दे आज ही हमारी बात हो रही थी ना कि आप प्रश्न को ठीक से देख के कुछ वैसे तत्व भी रहते हैं हमारे चैनल पर जो केवल हां हां हम नहीं है वो और बहुत सारे लोग आपस में ही बात कर रहे हैं कोई प्रश्न पूछ रहा है उसका उत्तर दे रहा है तो जी का कोई एक प्रश्न था वो बहुत सटीक लग रहा था पर वो बहुत पीछे छूट गया वो दोबारा कर नहीं

01:47:06:16 रही है हां अच्छा प्रश्न था अब अगला है राधा वल्लभ संप्रदाय के बारे में कुछ बताना। राधा वल्लभ संप्रदाय के बारे में तो प्रेम जी महाराज से ही आप ज्यादा जानकारी वो अच्छे से देंगे और प्रामाणिक संप्रदाय है राधा वल्लभ संप्रदाय तो उनसे आप जुड़ सकते हैं। और इसी के साथ हम अपने क्वेश्चन को कंप्लीट करेंगे। आज हम आप सब हमारे साथ जुड़े उसका बहुत-बहुत धन्यवाद। जो लोग हमारे साथ बाद में जुड़े हैं, प्लीज समय निकाल के इस वीडियो को दोबारा देखिएगा। जब हम इसे पोस्ट कर देंगे। यह वीडियो यहीं पर ही रहेगी आप लोगों के लिए आप लोगों की सुविधा के लिए। हमें बहुत बहुत अच्छा लगा कि आप सब लोग हमारे साथ जुड़े और आपको अगर कुछ कहना है तो आप बोल दीजिए। मैं तो बस यही कहूंगा कि भगवान का आज का जो सेशन का जो अगर सूत्रात्मक अगर एक एंड कर दूं तो आप किससे शिक्षा लेनी है ये आपको पता चला और कैसे सही साधना तक पहुंचना है भगवान का पैर पकड़ लीजिए पैर मत छोड़िए चाहे जो हो जाए अपने आप किसी ना किसी दिन वो कहेंगे ये तो मान ही नहीं रहा पीछे ही पड़ गया तो फिर वो आपको दे देंगे आपका अभी भीष्ट फल जो होगा जी मैं आप सबके साथ एक अपना एक एक्सपीरियंस शेयर करना चाहूंगी की

01:48:21:22 मेरे जीवन में गुरुदेव आने से पहले और अभी भी मुझे मुझे लगता नहीं सच ही है। मैं अभी भी बहुत चीजें सीख रही हूं और मैं आशा करती हूं कि मेरे जीवन में जो मेरे जीवन को सार्थक करने वाले कर्म है और उस उन कर्मों को सार्थक करने के लिए जिस धर्म के जिस पथ पर और जिन सिद्धांतों से मेरा निर्वाह होगा जिससे मैं आगे बढूंगी वो मैं आशा करती हूं कि मेरे गुरुदेव की कृपा मुझ पर रहे और मुझे गोविंद के रास्ते रास्ते पर बनाए रखें। पर यहां पर पहुंचने से पहले मैं हर बार शेयर करती हूं। एक बार दोबारा शेयर कर दूंगी। मैंने बहुत प्रे किया था महादेव को और मैंने हमेशा यही प्रे किया था कि मुझे याद है तो मैं यही बोलती थी कि महादेव मुझे बहुत सारे टीचर्स मिल रहे हैं बट गुरु नहीं मिल रहे। एंड मैं कभी टीचर्स का डिसरिस्पेक्ट नहीं कर रही थी क्योंकि कल एक शिक्षक अध्यापक के पास एक गुण था जो मैं आज भी उनसे सीख रही हूं। तो पर मुझे ना गुरु नहीं मिल रहे थे क्योंकि वही बात हो रही थी ना कि एंड मुझे ऐसा एक जगह चाहिए जहां पर बस बोल दिया

01:49:36:24 तो अब बस यही है क्योंकि हर तरफ तो गुरु की बात होती है ना भगवान राम के भी गुरु थे तो गुरु की विशेषता तो है तो मैंने बहुत प्रे किया और मैं बोलती थी महादेव को जाके और आदि शंकर जी के जाके मैं बोलती थी कि मुझे आप ही चाहिए। मुझे ऐसे मुझे एकदम आप ही चाहिए तो मुझे आप ही दें। तो अब एक सर्कल ले लेते हैं बैक यू नो बिग स्टोरी लॉन्ग स्टोरी शॉर्ट कि मतलब मैं कृपा ही बोलूंगी कि भगवान की कृपा रही कि उन्होंने मुझे हमारे पूज्य गुरुदेव जो शंकराचार्य जी है वो हमें प्राप्त हुए तो वैसे ही मैं आप सभी को बोलूंगी कि आप लोगों का जो वो परफेक्ट मोमेंट है आपके जो भी गुरु बनेंगे आप उसके लिए किसी से भी प्रे करें है कि शिव जी से करें, राम जी से करें, राजा जी से करें, किसी से भी करें वो आप जिसमें आपकी आस्था बन रही है उनसे प्र उनसे प्रे कीजिए, उनसे प्रेम कीजिए और उनसे प्रार्थना कीजिए और नाम जप कीजिए। खूब नाम जप कीजिए। मंदिर जाइए। है ना? ये जो डेली है ना विदाउट एनी हसल बसल द डेली थिंग्स दैट यू कैन डू। आप वो करना शुरू करिए और आई प्रॉमिस

01:50:51:27 यू कि आप एक दिन आपके निश्चित गुरु के पास जरूर पहुंच जाएंगे और फिर उसके बाद आपकी जो जर्नी है वो दोबारा स्टार्ट होगी। यू विल हैव अ रिब्थ एक्सपीरियंस। एंड दैट्स ऑल आई हैव टू शेयर विद यू ऑल टुडे। एक छोटी छोटी सी बातें पूछी। एक पूछ रहे हैं कि शिव जी के लिए कौन सी चीज हम शिव शिवा शिवा शिव आप जपना शुरू करिए। पीछे पढ़ना पड़ेगा। शिव जी के पीछे पड़ना हां तभी मानते हैं पीछे पड़ जाना मैंने अभी बोला ना मैं पीछे पड़ गई और कोई पूछ रहे हैं बार बार क शायद लाइव के अंत में आपको बार दिखाई दे और एक पूछ रहे हैं कि सच्चिदानंद में जाने के बाद दोबारा जन्म नहीं होता तो हम पहले से ही तो सच्चिदानंद में थे तो जन्म क्यों हुआ जन्म लेने वाला ब्रह्म है और आप जीव है दूसरी बात ये है कि ब्रह्म है ये आपने माना कैसे अगर आपने मान लिया तो अब आप ये जो आप बात कह रहे हैं उसके आधार पर ब्रह्म का खंडन नहीं कर सकते और अगर आप ये किसी दिन आ जाना चर्चा में आ जाना तो आपको अच्छे से बता देंगे। ठीक है ना? सच्चिदानंद है ये कैसे सिद्ध होता है? पहले ये बताओ सच्चिदानंद है क्या? जब आप सच्चिदानंद को सिद्ध कर दोगे तो उसका खंडन नहीं कर सकते। खंडन कर रहे हो तो सिद्ध नहीं कर सकते। ठीक है? तो ये चीजें हमारे पास नहीं चलेंग। वो उनको आप बरगला दो जिन्होंने ग्रंथों

01:52:06:28 को ना देखा हो। और प्रांजल जी आप अगर क्या कहते हैं? प्रांजल जी आप अगर आवाहन कॉल ऑफ धर्मा के पेज पे जाएंगे वहां पे आपको उनके डिस्क्रिप्शन में क्यूआर कोड एक्सेस कोड सब मिल जाएगा। प्लीज मेक योर डोनेशन टुवर्ड्स आन टुडे एंड आई वुड लव फॉर ऑल और एक बहुत जरूरी घोषणा याद आ गया मुझे परसों के दिन गोपाष्टमी है। आप सब लोग जो भी हमारे फॉलोअ है जो भी देख रहे हैं इसको गौ माता का पूजन अवश्य करें और अपने छोटे छोटे से वीडियो क्लिप्स हमें शेयर करें। शेयर करने के लिए हमारा नंबर आपके पास है 740830 18869 अभी लाइव के अंत में भी पूरा एक पेज आपको दिखाई देगा तो आप जरूर से जरूर गोपाष्टमी के दिन गौ माता के पूजन करें और वो क्लिप्स हमारे साथ शेयर करें जिससे कि हम यहां पर वो क्लिप्स आपकी शेयर करके और अन्यों को भी प्रेरित करें गौ माता के लिए दीदी भैया मेरा भी अपने आप को नष्ट नहीं वो व्यवहार में अपने आप को नष्ट कई बार कर चुके हैं अपने शरीर को नष्ट करना उनके लिए कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। तो ठीक है। जी फिर जी चलिए अब आज के हमारे इस अमेजिंग सेशन को हम क्लोज करेंगे और आशा करते हैं कि आप लोगों के साथ

01:53:22:07 टाइम पर और जल्दी हम दोबारा मिले और यह दोबारा कर पाए। धन्यवाद आप सभी का हमारा साथ देने के लिए और अभी तक हमारे साथ बने रहने के लिए। हर हर महादेव। महादेव की कृपा आप सब पर बनी रहे। जय श्री राम। जय श्री राम जय गौ माता

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