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00:00:02:26 तो सभी को जय श्री राम आशा करते हैं आप सभी लोग कुशल मंगल होंगे आपकी आज की जो लाइव स्ट्रीम में बहुत विशेष है और विशेषता का कारण यह है कि अभी तक हमने स्पेशली रामपाल की जो स्टडी है पूरा उसका निचोड़ क्या है है उसकी आज थोड़ा सा उस पर बात करेंगे तो आपको सूत्रा क्मक शैली में काफी चीजें पता चल जाएंगी सूत्रा क्मक शैली इसलिए कि नॉलेज जो होती है वो हमें मिलती रहती है कि यहां ये लिखा है वहां वो लिखा है मगर जब तक वह एक संक्षिप्त विवरण में हमारे पास नहीं आती तो हम सरलता से उसका उपयोग नहीं कर पाते तो आज हम उस शैली में बात करेंगे सूत्रा क्मक शैली में कि हमें कौन-कौन से ऐसे सूत्र मिले हैं जिनके आधार पर रामपाल वालों का जो वास्तविकता है उनकी जो वह आपको समझ में आ जाती है तो

00:01:18:15 हम लोग शुरू करेंगे हम लोग शुरू करेंगे सबसे पहले जो रामपाल के द्वारा परिभाषित प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है उसकी सर्व सामर्थ्य पर सर्व व्यापकता पर

00:01:50:16 और वह कितना क्रेडिबिलिटी है उसकी क्योंकि इनका कहना है कि एक पांचवा वेद और है सूक्ष्म वेद वो उन्होने लिखा सबसे पहली बात है कि रामपाल दास जी के द्वारा जो प्रतिपादित होने वाला ईश्वर है वह कण कण में नहीं है अब्राम जो आइडल जीी है उसके अनुसार जो वहां का जो भी देवी देवता टाइप का जो ईश्वर है उसके अनुसार यह भी किसी सातव आसमान नाम की जगह पर बैठता है

00:02:27:15 और वहां बैठ कर के पूरी दुनिया को ऑपरेट करता है अब इसमें सवाल वही आ जाता है जो हम हर बार पूछते हैं रामपाल वालों से कि अगर वह पूरे ब्रह्मांड में सर्वव्यापक नहीं है बराबर रूप से तो फिर उसकी जो सत्ता है उसमें अंतर आएगा जहां पर वह स्वयं बैठा है वहां पर सत्ता ज्यादा होगी और जहां पर व स्वयं नहीं है उसकी शक्ति है जो कि यह कहते हैं कि वह नहीं उसकी शक्ति पूरे पूरे ब्रह्मांड में व्याप्त तो हां शायद 72 आसमान होंगे 72 आसमान होंगे इस बारे में ज्यादा क्लेरिटी नहीं मगर हा वह किसी एक विशेष परि विशेष जगह पर स्थान पर बैठता है

00:03:23:28 तो जब वह हर जगह समान रूप से व्याप्त नहीं है तो इसका म मतलब है कि उसकी जो सत्ता है वह कहीं पर कम और कहीं पर ज्यादा है इसका अर्थ है कि वह सर्वव्यापक समान रूप से नहीं है वह बाधित है सीमित है जितना वह अपने सतलोक में बैठ कर के या व जो 7वा आसमान है सातवा आसमान है वहां पर बैठ कर के जितना पावरफुल है उसकी उतनी पावर यहां पर नहीं है दूसरी जगह इसके साथ ही साथ दूसरा दार्शनिक वाला प्रश्न य आता है कि जहां पर वो कबीर अनंत अनादि से बैठे हैं वो जगह किसने बनाई क्योंकि वो तो वहां पर बैठे हैं उनसे बाहर है वो जगह तभी तो वहां बैठे हैं तो वह जगह किसने बनाई यह प्रश्न हो जाता है तो अगर इसमें देखा जाए अगर हमें यह मानना पड़ेगा कि अगर वह जो कबीर है वह कहीं पर बैठा हुआ है ईश्वर तो वह जहां पर बैठा है वो जगह उसने नहीं बनाई यानी कि प्रकृति को उसने बनाया नहीं है अब जब प्रकृति को उसने बनाया नहीं है तो उसमें सवाल यह आ जाएगा कि यहां पर जो ईश्वर है वह सर्वोच्च रचयिता सिद्ध नहीं

00:04:38:28 होगा वह एक कुहार की तरीके से सिद्ध होगा जो मिट्टी लेकर घड़ा बनाता है एक कुमार क्या होता है घड़ा तो बनाता है मगर वह घड़े का सर्वोच्च रचयिता नहीं होता है क्यों नहीं होता है क्योंकि घड़े को बनाने के लिए जो मटेरियल है वो उसने नहीं बनाया उस मटेरियल को उसने प्राप्त किया वो पहले से उपलब्ध था ठीक इसी प्रकार अगर हम यह मानेंगे कि कबीर जो है 72 में या सातवे आसमान पर कहीं बैठा है तो उसने जो है प्रकृति को नहीं बनाया जहां वो बैठा उसने उस जगह को नहीं बनाया यानी स्पेस इत्यादि उसका निर्माण नहीं है तो जब निर्माण उसका नहीं है तो फिर हमें यह भी मानना पड़ेगा कि उसने कुम्हार की तरह केवल शेप दिया है मटेरियल उसको मिला पहले से उसने उसको शेप दिया है तो सर्व सर्व सर्वोच्च रचयिता सिद्ध नहीं होगा अब इसके बाद आगे हमारा जो फेवरेट जो सबसे ज्यादा हम लोग जिसका प्रचार प्रसार कर रहे हैं वह सवाल आ जाता है कि क्या रामपाल जी के द्वारा प्रतिपादित परिभाषित होने वाला जो ईश्वर है वह सर्वशक्तिमान है कि नहीं सर्व

00:05:54:13 सामर्थ वान है कि नहीं तो जैसे अन्य जितने भी और विरोधी सनातन विरुद्ध तंत्र है उसी प्रकार से इनका भी ईश्वर बाधित हो जाता है क्योंकि यह जिस रूप में वहां बैठता है सतलोक में उसी शरीर को लेकर के य नीचे आता है व्यवहारिक हो जाता है अव्यावहारिक लोक जो केवल प्राप्त का विषय है वहां पर जो उसकी बॉडी है व उस बॉडी को लेकर नीचे आ जाता है और जब वह नीचे आ जाता है तो फिर वह बाधित हो जाता है क्यों बाधित हो जाता है क्योंकि वो अपनी दे को परिवर्तित नहीं कर पाएगा और यदि परिवर्तित कर पा रहा है तो इसका मतलब जो वास्तविक तत्व है वो कुछ और है उसकी बॉडी जो है वो ट्रांसफॉर्मेबल है शाश्वत नहीं है उसकी बॉडी तो दोनों में से एक चीज हम पकड़ पाएंगे यह बात हो जाती है इसीलिए व्यवहार में ना आ सकने वाले रूप को व्यवहारिक मत बनाओ और व्यवहारिक रूप को व्यवहार में ना आ सकने वाले रूप का स्थान मत दो ये हमेशा ध्यान तो ये तीन हो गए अब इससे रिलेटेड एक चीज और है जो सूक्ष्म वेद है मैंने बात की थी क्रेडिबिलिटी तो अब यह कहते हैं कि हमारा जो वेद और वेदा आदि जो शास्त्र है उनसे ईश्वर के बारे में मालूम पड़ता है मगर

00:07:09:18 उसे प्राप्त करने के बारे में नहीं मालूम पड़ता या फिर ईश्वर के बारे में मालूम नहीं पड़ता सॉरी उसको प्राप्त करने के बारे में मालूम पड़ता है इनमें से कोई एक चीज है इनके द्वारा जो कही जाती है दोनों में से जो एक चीज बाकी रह जाती है वो इनको सूक्ष्म वेद से प्राप्त होती है इनका जिसको ये जोय कबीर दास जी के नाम से जो कहते हैं कि उन्होंने उन्होंने जो लिखा है वो सूक्ष्म वेद है अब बात य आ जाती है कि हम उन शास्त्रों को मानते हैं जिन्हें ईश्वर ने भी रचा नहीं है वो उसी तरह से विद्यमान है ईश्वर की सांस के रूप में जिस तरह से ईश्वर विद्यमान है मगर प्रॉब्लम यह है कि जो यह जो क्या कहते हैं कबीर के द्वारा जो लिखे गए ग्रंथ है वो कबीर ने लिखे हैं और कबी कौन है कबीर इनके अनुसार वह है जिसने दुनिया बनाई दुनिया बनाई इसका अर्थ है कि कबीर ने ही राक्षस भी बनाए कबीर नहीं ही देवता भी बनाए कबीर नेही झूठों को भी बनाया है कबीर नहीं सच्च को भी बनाया यानी कि अच्छाई और बुराई दोनों को निर्मा दोनों का निर्माता कबीर है तो जब कबीर झूठों को बना रहा है तो उसकी क्रेडिबिलिटी वही खत्म हो जाती है इसका मतलब उसके द्वारा लिखा गया कोई अगर ग्रंथ है तो उस पर हम विश्वास

00:08:24:19 नहीं कर सकते क्योंकि वो उसने झूठ बोलने वालों को बनाया है वह चाहता है कि दुनिया में कोई हो झूठ बोलने वाला वह चाहता है कि दुनिया में लोग भ्रमित भी हो तो जब भ्रमित होने के लिए उसने व्यवस्था की है तो क्या गारंटी है कि यह जो सूक्ष्म वेद लिख कर के उसने व्यवस्था नहीं की है यह प्रश्न आ जाता है तो जो

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→ Used in: A · Live ईश्वर अवतार निषेध- Arya Samaj Acharya Live Discussion #aryasamaj at 1:51:50 ↗

00:08:46:16 आवान के जो पांच मूल सिद्धांत है पहला कि संसार का प्रत्येक मनुष्य भगवान को ही ढूंढ रहा है फिर वो भले ही स्वयं को नास्तिक ही क्यों ना कहता हो दूसरा ईश्वर वही जो कुछ भी कर सकता है तीसरा ईश्वर के विषय में केवल वही शास्त्र प्रमाणिक जिन्ह ईश्वर ने भी ना रचा हो चौथा

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00:09:07:01 ज्ञान वही जो परंपरा से प्राप्त हो और पांचवा अगर सोशलाइज दृष्टि से देखे तो पांचवा सिद्धांत है रामो विग्रहवां धर्म श्री राम धर्म का साक्षात स्वरूप है यदि आपको कुछ भी नहीं पता है जैसा जैसा श्री राम ने किया वैसा वैसा करते जाइए और जो शास्त्रों की क्रेडिबिलिटी को करने के लिए सत्यापित करने के लिए जो पांचवा सिद्धांत है ऑब्लिक में है वो वो क्या है कि परंपरा तो कौन सी परंपरा सार्वभौम गुरु परंपरा शंकराचार्य परंपरा यह पांच मूल सिद्धांत है जिनका हम प्रचार प्रसार कर रहे हैं आवान के द्वारा तो हम लोग बहुत ज्यादा इधर उधर नहीं जाते हैं इन्हीं पांच में से कुछ तीन या चार सिद्धांतों में जो ठीक नहीं होते हैं जिसके सिद्धांत अकाट्य नहीं होते हैं सिद्धांत वो यही जो है वो हल्का हो जाता है उसकी बातें जो है कमजोर हो जाती है ठीक है तो यह तो थी दार्शनिक का अब इसके बाद हम आगे चले कि एक क्लेम किया वैसे हमने इनके बहुत से क्लेम बहुत से क्लेम का निवारण करते हुए एक संक्षिप्त छह वीडियोस की सीरीज बना चुके हैं मगर जो नहीं उसमें बात आई उसको

00:10:22:07 हम यहां लेंगे कि एक इनके द्वारा बात फैलाई जाती है एक इनके द्वारा बात फलाई जाती है कि यदि दुर्गा जी से जन्म हो रहा है ब्रह्मा विष्णु महेश का तो फिर वह उनके पति कैसे हो सकते हैं यानी कि दुर्गा माता के जो पति है जिसको शिव कहा गया है वह कोई और है क्योंकि ब्रह्मा विष्णु महेश को तो उन्होंने स्वयं उत्पन्न किया है तो इस बारे में मैं बताना चाहूंगा देवी भागवत में माता खुद बता रही है माता के दो रूप है एक जो व्यवहार में ना आ सकने वाला रूप है परम तत्व के रूप में और दूसरा कार्य कोटि का कार्य करने वाला लीला में आ जाने वाला रूप तो जिसको भगवान शिव की पत्नी के रूप में खित किया गया जिस रूप को वोह माता का लीला वाला रूप है वो परम तत्व वाला रूप नहीं है जिसने ब्रह्मा विष्णु महेश को जन्म दिया इसको हम लोग सिद्ध कर लेते हैं इस बात को कि देवी भागवत में कह रही है माता कि

00:11:44:25 तत्त वह ना ही स्त्री है ना ही पुरुष है और ना ही नपुंसक है यानी कि जिसने ब्रह्मा विष्णु महेश को उत्पन्न किया है उनको उनका महिमा का गान करने के लिए उनकी उनकी स्तुति करने के लिए जरूर कहा गया है कि आपने हमें जन्म दिया आप मां हो मगर तत्त वो जो तत्व परम तत्व जो परम सत्ता है उसने ब्रह्मा विष्णु महेश को बायोलॉजिकली जन्म नहीं दिया है वो निर्माता है वो कारण जो जिसको कहीं पर शिव कहा गया है जिस परम तत्व को कहीं पर विष्णु कहा गया है जिस परम तत्व को उसी को यहां पर देवी मां के रूप में ख्या पित किया गया है मगर यह देवी मां का रूप खुद यह बता रहा बताया जा रहा है यहां पर कि भगवती ना ही स्त्री है ना ही पुरुष है और ना ही नपुंसक ही है तो जिनसे ब्रह्मा विष्णु महेश की उत्पत्ति हो रही है वो स्त्री पुरुष इत्यादि कोई महिला नहीं है जिससे कि उनको यह कहा जाए कि भाई ये तो इनके पुत्र हैं वो किसी की माता सिद्ध नहीं होती बायोलॉजिकल जिस तरीके से प्रूव करते हैं उस तरीके से व्यावहारिक रूप से तो जिस परम तत्व ने ब्रह्मा विष्णु महेश को उत्पन्न किया वो परम तत्व ये है वो ना ही स्त्री है वो ना ही पुरुष है और वो ना ही नपुंसक

00:12:59:27 ही है वो सिर्फ है मगर वो स्त्री पुरुष नपुंसक कुछ नहीं वो व्यवहार में ना आ सकने वाला है वाणी का अ विषय है जिसकी व्याख्या भी ना की जा सके वो वो है उसके बाद यही परम तत्व लीला पूर्वक एक देह धारण करता है एक रूप धारण करता है मां दुर्गा का और तब मां दुर्गा शिव जी की पत्नी बनती ठीक है तो अब यहां पर यह वाली चीज नहीं होती कि शिव जी उनके पुत्र है तो उनसे ही विवाह कैसे हो जाए उन्होंने उनका निर्माण किया है यही बात ब्रह्मा सरस्वती के विवाह में भी है कि ब्रह्मा जी ने सरस्वती माता को बायोलॉजिकली जन्म नहीं दिया उनका निर्माण किया है और लोगों को समझ में आए य उत्पत्ति स्थिति समार तो इसमें ऐसी भाषा उपयोग में ली जाती है कि मां है वो ये है मगर वो परम तत्व के रूप में आप अगर हम परम तत्व परम तत्व करते रहेंगे तो हम उसके प्रति व्यवहारिक नहीं हो पाएंगे इसलिए उसके लिए कोई ना कोई एक शब्द रखना पड़ेगा उस शब्द के रूप में कहीं पर उस परम तत्व को विष्णु बोला जाता है कहीं पर कृष्ण बोला जाता कहीं पर माता के रूप में ख्या पित किया जाता है तो ऐसे वही परम तत्व जो एक परमेश्वर है वही ब्रह्मा विष्णु महेश के भगवती और गणेश के रूप में वह अपने आप को प्रकट कर देता है व्यवहारिक हो जाता है तो यह बात हो गई अब इसके बाद एक बात आती

00:14:15:06 है कि इनका कहना है कि जो ब्रह्मा विष्णु महेश है वो जो ब्रह्मा विष्णु महेश है वो अविनाशी नहीं है उनकी जो देह है वो पांच तत्वों से बनी हुई है ऐसा देवी भागवत मेंहा तो सबसे पहली बात तो यह है कि ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है तो ईश्वर वो है जो अपनी देह का नाश भी कर सकता है तो ब्रह्मा विष्णु महेश यदि अपनी देह का नाश करके दिखा रहे हैं तो इसमें तो हमें गर्व होना चाहिए कि वो कुछ भी करके दिखा रहा है जब चाहे तब अपनी इच्छा से दूसरी बात ये है कि ब्रह्मा विष्णु महेश भी उसी तरीके से हैं जैसे माता भगवती है जैसे एक परम तत्व के रूप में और एक लीला पूर्वक तो लीला पूर्वक वाला जो उनका रूप होता है ब्रह्मा विष्णु महेश का वो उसको चाहे तो कभी भी नष्ट कर सकते यह कर सकते वो कर सकते आ जा सकते हैं और एक रूप है उनका परम तत्व के रूप में जहां पर उन्हें अविनाशी भी कहा गया है कई जगह अविनाशी कहा गया है एक दो जगह का मैं विवरण आपको दे देता

00:15:20:13 हूं जैसे ब्रह्मा विष्णु और शंकर रूप से जगत की उत्पत्ति

00:15:25:24 स्थिति एवं संहार कारण विकार रहित अविनाशी परमात्मा अविनाशी परमात्मा सर्वदा एक रस सर्व विजय भगवान वासुदेव विष्णु है ठीक

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00:15:36:04 है अब अच्छा इसके साथ ही साथ एक बात और जैसे हमने दुर्गा माता से उत्पन्न होना देखा ब्रह्मा विष्णु महेश का वैसे ही इनसे ब्रह्मा विष्णु महेश से भी मां भगवती भी उत्पन्न होती है दूसरे कल्पों में जैसे कि जैसे कि शिव पुराण में देवी की उत्पत्ति हो रही है किससे शिवजी से और भागवत पुराण में देवी की उत्पत्ति हो रही है कृष्ण भगवान से देवी भागवत में ठीक है नौवे स्कंद में तो इसलिए एक ही परम तत्व लीला पूर्वक कभी पहले ब्रह्मा विष्णु महेश को प्रकट कर रहा है खुद देवी बन जा रहा है फिर वही पर परम तत्व कभी देवी को शिव गणेश ब्रह्मा को उत्पन्न कर रहा है और खुद विष्णु बन जा रहा है फिर इसी तरीके से वही परम तत्व कभी शिव बन जा रहा है पहले और बाकी सबको उत्पन्न कर रहा है तो यह चीज है जिसको आपको समझ लेना चाहिए और कभी भी रामपाल वालों से बातचीत हो तो उन्हें भी यह समझाने का प्रयास करना चाहिए अब इसमें एक बात आ जाती है कि जब हम यह कहते हैं अब यहां से इनकी उधेड़ बुंद शुरू हो जाती है कि

00:16:51:04 जब हम यहां पर इनसे यह कहते हैं कि यह ब्रह्मा विष्णु महेश लीला पूर्वक यह करते हैं अपनी देह का नाश करके भी दिखा देते हैं मगर यही ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश परम तत्व के रूप में भी विराजमान तो ये कहते हैं नहीं वो जो परम तत्व है वो आदि शिव है आदि राम है आदि गणेश है यह सब आदि आदि लगा के कर देते तो मेरे भाई आदि शिव ही सही आदि गणेश ही सही आदि राम ही सही इनका नाम तो है स्पष्ट रूप से वेदों में पुराणों में तुमने कभी कहा वेदों में प्रमाण है शिवजी भगवान है आदि वाले वो शिवजी अलग है वाले नहीं है जिनको हम पूछ रहे हैं क्यों नहीं कहते जिसका प्रमाण क्लियर कट कहीं भी नहीं है भगवान के रूप में उसको तुम मैच करा करा करके कहते हो कि वेदों में प्रमाण है और कबीर भगवान और जिसका प्रमाण क्लियर कट है कि शिवजी भगवान है तुम भी कह रहे हो कि वो आदि वाले हैं वो परम तत्व है परमेश्वर है परम ब्रह्म है और वही कबीर है अरे तो वही उसको कबीर के रूप में क्यों कबीर को उसके रूप में बोलो ना उसको कबीर के रूप में क्यों कबीर को उसके रूप में बोलो ना जिसका उसम में नाम है वेद में उस नाम को बोलो अपनी टैगलाइन को बदलो वेदों में प्रमाण है शिवजी भगवान है ये शिवजी वो वाले शिवजी

00:18:06:16 नहीं है तुम्हारे अनुसार जिन्हें हम मानते व बाद वो हम अगले उसमें कर लेंगे मगर फिलहाल ये बात आती है ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश का वेद में नाम है तुम्हारे हिसाब से ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश वो वाले नहीं है जिनकी हम पूजा करते हैं मगर जो भी है इनका नाम क्यों नहीं बोलते तुम कि ब्रह्मा विष्णु महेश वे में प्रमाण है ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश भगवान है नहीं बोल बोल पाओगे अच्छा अब बात ये आती है इससे अगला चरण ये हो जाता है कि इनका कहना है कि उनकी देह नष्ट हो जाती है और यह है वो है चलिए मैंने आपको दोनों चीजें दिखा दी कि हां भैया देह नष्ट होने वाला रूप भी बता दिया और नष्ट ना होने वाला रूप भी बता दिया अब आप कबीर के बारे में कहां लिखा है कि उसकी देह नष्ट नहीं होती उसके लिए आपको अपना मन गणन ग्रंथ लाना पड़ेगा जो कि लोगों के लिए प्रमाण नहीं है आप दिखाओ कहां लिखा है कि कबीर की देह नष्ट नहीं होती आप जब भी दिखाओगे वह कवि के रूप में दिखाओगे कवि कबीर स्पष्ट रूप से कहीं पर लिखा है कि कबीर की देह नष्ट नहीं होती मैंने आपको दिखा दिया विष्णु अविनाशी है आप ऐसे दिखाओ कबीर अविनाशी है नहीं दिखा पाओगे ठगा

00:19:21:28 है ना इसके बाद आप यह कहते हो कि कवि का अर्थ कबीर है अगर कवि का अर्थ कबीर है तो वेदों में लिख के आया है कि कवियों का कवि गणपति है कवि का अर्थ अगर कबीर है तो वेदों में लिख के आया है कि कवियों का कवि गणपति है तो आप यह क्यों नहीं कहते कि गणपति जो है कबीर का भी कबीर है परमात्मा का भी परमात्मा है या फिर वेदों में प्रमाण है गणपति भगवान यह क्यों नहीं कहते इसको कहते दोगलापन इसको कहते पक्षपात हीनता ना होन भाई लाइट

00:19:59:01 है ना तो यह हो गया दूसरी बात अब आ जाते हैं आपके नामकरण संस्कार पर आप कहते हैं कि वेदों में जो कवि कहा गया है उसी को हम लोग कबीर कहते हैं अच्छा अब इस बारे में कोई व्याकरण संबंधी कोई भी ग्रामेटिकल कोई नियमावली आपने नहीं दिखाई उसके बाद फिर आप आगे कह देते कि कवि उसके बाद विसर्ग उसके बाद देव कबीर देव जो विसर्ग के कारण वहां पर रा उत्पन्न हो गया तो कबीर देव आ गया तो कबीर देव वेदों में जो कबीर देव आया वही कबीर देव है अब ये कबीर कबीर कैसे बना आपके पास कोई जवाब ठीक है हमारे पास हम जिसे भगवान कह रहे हैं उसका नाम है अच्छा दूसरी बात अब बात ये आती है जैसे आप यह कह देते हो कि जिसकी हम पूजा करते हैं ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती गणेश यह वो वाले ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती गणेश नहीं है जिनकी वेदों में बात हो रही है मगर नहीं भागवत पुराण में स्पष्ट लिखा है वेदों द्वारा जानने योग्य जो विष्णु है वही है शिव पुराण में लिखा है वेदों द्वारा जानने योग्य जो शंकर है उनकी बात हो रही है गणेश जी के बारे में लिखा है वेदों द्वारा जो जानने योग्य हैं उनकी बात हो रही तो हमने तो सिद्ध हमने तो प्रामाणिक जो शास्त्र जिनको आप भी प्रामाणिक मानते हो उसमें

00:21:14:03 सिद्ध कर लिया कि हम जिस ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश को पूज रहे हैं वही ब्रह्मा विष्णु गणेश है जिनकी वेदों में बात हो रही है मगर आपने कहां लिखा दिखाया कि जिस कबीर को आप पूछ रहे हैं वो वही वाले कबीर है जिनकी वेदों में बात हो रही है नहीं दिखा पाओगे इसके बाद अगला चरण क्या है कि वही वाली बात कि अगर वेदों में मान लो कबीर आ गया मैं कह रहा हूं कबीर आ गया वेदों में ठीक है अब यह बताओ कि यह कबीर आप ही वाला कबीर क्यों माना जाए तो आप यह कहते हो कि कवियों के आचरण किए क्या किसी और ने हा भैया शास्त्र लिखे हैं भगवान गणेश ने जाकर देखो भगवान गणेश ने भी गणेश ने भी शास्त्रों की रचना की है दूसरी बात कवि का जो अर्थ लिया गया है वोह सर्वज्ञ लिया गया है वो कविता करने वाला नहीं लिगा लिया गया है तो सर्वज्ञ तो यह है विष्णु शिव शंकर सब तीसरी बात कि अगर आप कि भैया क्योंकि ब्रह्मा विष्णु महेश कवि नहीं थे इसलिए कबीर वो हो जाएगा वही वाला जिसकी बात वेदों में हो रही नहीं भाई कोई भी आके कह देगा कि ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश ने कविता नहीं की मैंने कविता की है मेरा नाम कबीर है इसलिए मेरी बात हो रही है वेद में ये कौन सी बात भाई

00:22:29:04 जब तक कोई ठोक के ये नहीं कह देगा कि फलाने देश काल में जो पहचाना जाएगा कोई शास्त्र ऐसा वर्णन नहीं कर देगा कि वह जो होगा वह कविता भी करेगा अगर हम मान ले आपकी बात तब है आपकी ही बात को मान ले जब तक कोई शास्त्र ऐसा वर्णन नहीं करेगा कि भैया फलाना वाला फलानी जगह का जो कबीर है वही है जिसकी वेदों में बात हो रही है बहुत हो जाएंगे नहीं तो कोई भी आ जाएगा मेरा नाम कबीर है मैं भी कविता करता हूं लो है ना तो यह बात हो गई अब इसके बाद एक बात का जवाब हमने देही दिया जो ब्रज वाली बात है कल शॉर्ट ट पर भी आ जाएगा आज इग्राम पर डाल दिया है ब्रज शब्द का अर्थ जो बताया गया है उसमें कि वहां आप लोग यह दावा करते हो कि व्रज शब्द का अर्थ है कि भगवान कह रहे हैं उसकी शरण में जा व्रज शब्द का अर्थ आना और जाना दोनों है अब वो आपका वाक्य क्या है उसके अनुसार आपको उसका अर्थ लेना पड़ेगा आना या जाना जो भी है जैसे तीन बेर खाती थी वो तीन बेर खाती है इसमें बेर शब्द दो बार आया दोनों बार अलग अर्थ है एक ही शब्द के दो अर्थ है तो हमें देखना पड़ेगा लिखने वाले से प्रसंग अनुसार

00:23:44:08 समझना पड़ेगा कि बेर शब्द का कहां पर कौन सा अर्थ है तो यहां पर जो ब्रज शब्द आया है उसका अर्थ आना इसलिए लेना पड़ेगा क्योंकि वहां पीछे जो कहा मा मेकम शरणम वो वहां पर भगवान श्री कृष्ण कह रहे हैं मेरी मुझ परमात्मा की शरण में तो वहां पर जाना नहीं शरण में जा वहां पर आ आना सिद्ध हो जाएगा दूसरी बात ये जो अर्थ है ये परंपरा से प्राप्त है जिस परंपरा से हमें भगवत गीता वेद शास्त्र प्राप्त होते हैं उन्हीं पर उसी उन्हीं परंपराओं से ये अर्थ भी प्राप्त है तो प्रामाणिक भी हो गया तार्किक भी हो गया और प्रामाणिक भी हो

00:24:25:28 गया तो कुल मिलाकर के कबीर को भगवान बनाने के लिए आपके पास कोई भी ठोस प्रमाण नहीं है यह सारी सूत्रा क्मक शैली में मैंने आपको वर्णन करने करने का प्रयास किया और जैसे आप कहते हो कि क्या गीता में लिखा है कहीं पर कि यह गीता श्री कृष्ण नहीं बोली है जब वहां पर लिखा है श्री कृष्ण बोल रहे हैं उनके लिए आ रहा है श्री भगवान उवाच भगवान ने कहा तो अलग से जिस रूप में आप चाहते हो उस रूप में लिखा क्यों होना चाहिए मगर चलो इसको थोड़ी देर के लिए मान लेते हैं कि श्री कृष्ण के लिए नहीं बोला हमारे पास पस प्रमाण है उसके मगर हम उसके बाद आपसे पूछते हैं कि आपने जो दावा किया है कि गीता को भगवान श्री कृष्ण ने नहीं उनके शरीर में काल ने बोला है वो कहां लिखा है दिखा दोगे नहीं दिखा पाओगे ठेंगा अपनी सारी बातें मन ग्रंथ लगा लो और दूसरा वाला जब प्रामाणिक बातें कहे तो उस पर यह नहीं ये कैसे ये नहीं य कैसे उसमें भी जब कोई बात सिद्ध हो जाए तो दूसरा चैप्टर खोल दो भाई आपने दिखाया लिखा कहीं पर कि यह जो है काल ने बोली है श्री कृष्ण ने नहीं बोली नहीं दिखा

00:25:42:24 पाओगे और गीता का 5 पर दिखाओ कहां लिखा है गीता का 5 पर गीता का महात्मा हम आपको दिखा देंगे पद्म पुराण में जगह जगह पर गीता का महात्म खूब लिखा हुआ है तो यह सब बातें हैं यह सब आपकी जो अन्याय शुता पक्षपात पक्षपाती दृष्टिकोण यह सब आपका छलकाता है इसके साथ ही साथ अगर आप यह भी मान लो कि भगवान श्री कृष्ण नहीं काल नहीं बोली तो हम यह भी आपके शास्त्रों से सिद्ध कर देंगे कि जो जिस काल ने बोली है वह काल भी श्री कृष्ण ही है उस काल के बारे में विष्णु पुराण में जगह जगह में बताया जा रहा है राम गीता में बताया जा रहा है वो राम राम ही काल है श्री कृष्ण ही काल है सिद्ध कर देंगे और बोलो तो यह सारी चीजें हैं आप अपने लिए कोई प्र हा सबसे बड़ी बात कि आप कबीर कबीर को कबीर इसलिए कहते हो क्योंकि हमने कृष्ण को काना कह दिया हमने कृष्ण को काना कहा मगर यह दावा कभी नहीं किया कि वेदों में प्रमाण है काना भगवान जब हम वेदों की बात करेंगे तो हम कहेंगे वेदों में प्रमाण है विष्णु भगवान उसका अवतार है हम कहेंगे शति में प्रमाण

00:26:57:26 है कृ भगवान है उनका उनका वो है ये क काना तो हमने अपने भक्ति में कह दिया वो प्रमाणिक थोड़ी ना हो गया और दूसरी बात हम तो आपकी नजरों में मनमुक भक्ति करने वाले हैं ना तो आप हमें एस ए प्रमाण कैसे यूज कर सकते हैं आप हमें प्रमाण दिखाइए कि कबीर को कबीर कैसे बनाया आपने हमारे आधार पर चलेंगे तो हमारे आधार पर ब्रह्मा विष्णु महेश को क्यों नहीं मान रहे अगर हम आपके लिए प्रमाण है तो दूसरी बात और इसमें एक और बात है कि भाई वो दिखा दीजिए जरा चली रहने दीजिए वो दिखाइए मत मैं ऐसे ही बता देता हूं शास्त्र में कहीं पर कवि रस्तु के लिए कबीर आया है आगम शास्त्र में तो अब कवि रस्तु के लिए कबीर अनुवादक ने अनुवाद कर दिया कबीर के रूप में मगर अगर उसको आप प्रमाण मानेंगे तो उसको उसको तो पूरा मानना पड़ेगा उसमें क्या आया है कबीर के लिए कि वो प्रहलाद के अवतार थे वो राम के भक्त थे रामानंदाचार्य के शिष्य थे तो अगर उसको आप प्रमाण मानेंगे तो बाकी की चीजों को मानना पड़ेगा वहा भगवान थोड़ी ना कहा जा रहा है कबीर को वो वाला कबीर वो वाला कवि से कबीर कहां बना जो कि भगवान है आपका यहां तो भक्त है वो भगवान

00:28:13:08 के और भविष्य पुराण में हमें उनका जन्म प्राप्त है रामानंदाचार्य के शिष्य के रूप में और राम भक्त के रूप में आदि राम अगर है उनका कोई दूसरा राम है तो भाई ये तो कहो कि वेदों में प्रमाण है और राम भगवान है कहो ना जिसका नाम नहीं है उसका नाम क्यों ले रहे हो जो नाम है वो लो ना फस जाओगे लोग तो दिक्कत हो जाएगी तो यह मैंने कुछ आपको एक संक्षिप्त विवरण बताया कौन आए हैं मैं देख लेता हूं मयंक कुमार जी

00:28:51:24 हैं जय श्री राम मयंक कुमार जी आप आ चुके श्रम हां सर एक बारही आया था मैं कहां से है मैं राजस्थान जयपुर से हूं अच्छा रामपाल जी के फॉलोअर है आप नहीं जी बताइए मैं तोय रामपाल जी जो महाराज जी है ये कबीर साहब के बारे में ये एक्चुअली क्या कबीर साहब को एक मोहरा बना रखे हैं लोगों ने जबक कबीर साहब अच्छे संत हुए हैं अभ इनको देखा जाए तो कबीर साहब एक निर्गुण भक्ति धारा के संत रहे थे अच्छा रामपाल जी रामपाल जी उनको सगुण भक्ति धारा में बताते हैं कि कबीर साहब खुद भगवान है जबकि कबीर साहब तो खुद ही कहते हैं कि मैं कुत्ता राम का

00:29:45:09 मतम फिर वो राम कौन सा है हां अरे भाई अगर ईश्वर को आप ऐसे हंसी खेल बना दोगे ऐसे साकार कर दोगे जैसे ये कर रहे हैं ईश्वर साकार है मगर जैसे यह कर रहे हैं ऐसे कर दोगे तो ईश्वर ईश्वर ही नहीं रह जाएगा हर कोई आ कर के उसको बाधित कर देगा मुसलमानों का मुसलमान उसको वादित कर देंगे आर्य समाज उसको वादित कर सब वादित कर देगा उसकी बिल्कुल बकिया उधर जाएंगी अगर आप ऐसे ईश्वर को डिफाइन कर देंगे तो अभी कबीर साहब के जैसे अपन देखे कबीर साहब की शिक्षा में कबीर साहब के जो जैसे अपन उनको भक्त बोले संत रदास जी है संत पीपा जी है यह सब निर्गुण भक्ति धारा के रहे इन्होंने परमात्मा को निराकार बताया अब जब यह कबीर साहब को साकार बताते हैं तो ये किस आधार पर यानी कि परमात्मा दोनों रूप होते हैं हा दोनों रूप होते हैं और जो सर्वव्यापी परमात्मा है जो हमारी नजरों की उसम सीमा में नहीं आ सकता है वह परमात्मा हमारी नजरों की सीमा में आने वाला रूप लेता है सजाम में हम रूप होता है वो वो अपना सृजन करता है बिल्कुल तो

00:31:00:13 यह सारा संक्षिप्त विवरण है इसके अलावा एक संक्षिप्त विवरण में और देना चाह रहा था तत्वदर्शी का तो तत्वदर्शी का संक्षिप्त विवरण यह है कि पहली बात तो यह है कि जहां पर 15.1 में यह कहा गया है कि जो संसार रूपी उल्टे वृक्ष की व्याख्या कर दे वह तत्वदर्शी नहीं कहा गया है वहां पर 44 में अगर तत्वदर्शी के पास जाने की बात हो रही है तो 15.1 में ये नहीं कहा गया है कि उल्टे वृक्ष के रूप की व्याख्या करने वाला तत्वदर्शी है वहां पर कहा गया है वेदों को जानने वाला क्या कहा गया है वेदों को जानने वाला और इनके हिसाब से वेदों को जानना तत्व ज्ञान नहीं है क्योंकि अभी उसने सूक्ष्म वेद को नहीं जाना है उचार पांचवे वेद को नहीं जाना है तो वेदों को जानने वाला कहा गया है तत्वदर्शी तत्व ज्ञानी नहीं कहा गया है उसमें तत्वदर्शी शब्द नहीं है इनके ही तरीके से चलो मगर

00:31:58:08 अगर यह वेदों को जानने वाले को तत्वदर्शी मानते हैं तो वेदों को जानने वाले को देवी भागवत में कहा गया है कि जो देवी को परमात्मा के रूप में जान जाता है वह वेदों को जानने वाला है अगर वेदों को जानने वाला तत्वदर्शी है तो देवी भागवत में कहा गया है स्पष्ट रूप से य तो अंदाजा लगा रहे हैं क्योंकि उसने उल्टे वृक्ष की व्याख्या कर दी अंदाजा नहीं है वहा स्पष्ट लिखा है कि जो देवी को परमात्मा के रूप में परम ब्रह्म के रूप में जान है वही जो है वेदों को जानने वाला है और वेदों को जानने वाले को यह तत्वदर्शी मान रहे हैं तो मान ले कि तत्वदर्शी कौन है जो माता को परब्रह्म के रूप में स्वीकार करता हो दूसरी बात और आगे चलते हैं बहुत सारे पॉइंट है 15.3 में उल्टे वृक्ष को जान जाने के बाद उस उल्टे वृक्ष की जो जड़ है उसको काटने के लिए उस तत्वदर्शी के पास एक हथियार होना चाहिए जिसकी बात की जा रही है 15.3 में वो कौन सा हथियार है वैराग्य सन्यास 6.2 में भी यही बात की जा रही है परमात्मा के साथ योग कौन कर सकता है जिसके पास सन्यास हो हमने वो ब्रह्मचारी आचार्य बनता है वो तो कल दिखाई दिया तो कुल मिलाकर के अगर तत्वदर्शी ये

00:33:13:18 कह रहे उल्टे वृक्ष की व्याख्या करने वाला तो भैया उसके पास वैराग्य होना चाहिए सन्यास होना चाहिए ब्रह्मचर्य होना चाहिए कहां है दूसरी बात जो आप दिखा रहे हो वहां प उसको तत्वदर्शी नहीं वेदों को जानने वाला कहा गया वेदों को जानने वाला कौन है जो माता को भगवती व परम ब्रह्म के रूप में स्वीकार कर ले अब बताओ क्या करोगे कहीं से भी कोई एक चीज ऐसी नहीं है जो इनकी सिद्ध हो जाए कोही एक चीज बिल्कुल तो इनका तत्वदर्शी होना भी सिद्ध नहीं होता है और वेदों को मनुस्मृति को सबको ले लेंगे कि वेद अथर्ववेद 11 पा 16 ब्रह्मचारी आचार बनता है और उसके बाद मनुस्मृति 12वां अध्याय 112 से 114 धर्म में संशय होने पर अधिष्ठाता ब्रह्मचारी को बनाए ठीक है और इसके बाद ज्ञान प्राप्त होता है परंपरा से भगवत गीता चार दो बहुत जगह लिखा है न 16 परंपरा की बात बहुत जगह हो रही है और मंड कोप निषद में हो रही है परंपरा की बात निरुक्त में हो रही है तो सुति शास्त्र इनको का मना कर दोगे निरुक्त में हो रही है शति शास्त्र में हो रही है परंपरा की बातें तो जो ऋषि महा ऋषि गण है वो अपनी परंपरा बता रहे हैं मगर इनकी परंपरा चालू हो रही है कहां से कबीर से और कबीर जिससे ज्ञान ले रहे

00:34:28:22 हैं उसकी बात ये लोग कह रहे कबीर ने उनको दिखावा किया था कबीर देखो जब दिखावा कर सकता है इन्हीं के अनुसार गुरु के पास जाने का दिखावा किया वास्तविकता में उन्होंने वो गुरु के पास नहीं गए तो दिखावा कर सकता है उनकी वाणी को प्रमाण कैसे मान रहे हो फ खत्म हो गई वाणी जब वोह छल कर सकता है तो आपके साथ जब छल करेगा तो आपको बताएगा क्या भाई जिसके साथ छल करेगा तो उसको बता के करेगा मैं तेरे साथ कर र उसको तो खुब कहेगा मैंने सबसे छल किया पर तुझसे नहीं कर रहा हूं ऐसे ही तो कहेगा तो यह बात हो गई इसीलिए हम अपौरुषेय

00:35:17:08 कोई हिला नहीं सकता है कोई दुनिया का ऐसा नहीं है जो हिला जाए यह है हमारे सनातन सिद्धांत कबीर शब्द का विवेचन हो गया दुर्गा माता का पति पति होना और वह उनसे उत्पन्न होना वह कर दिया इसके अलावा हमने कवि नाम पर बहुत अच्छे से बात कर ली है और यह काल ने बोला कि नहीं बोला ये सब बातें हमने अच्छे से कर ली जैसे भैया देखा जाए तो ये बोलते हैं कि कबीर साहब जो लहर तारा ना लहर ताला तालाब था उसमें पत्ते पर बैठ ग तो इस आधार पर भगवान कैसे हो गए ऐसे तो राजस्थान का एक संत हुआ था संत दादू दयाल जी वो भी साबरमती नदी में संदूक में मिले थे तो क्या वो भी अपने आप में भगवान बन गए जिस चीज का यदि सिर पैर ना हो तो इसका मतलब ये थोड़ी ना है कि वो भगवान माना जाएगा जी कोई तो उस जय श्री राम जय श्री राम भैया जी

00:36:32:28 भैया मैं आपके वीडियोस देखता रहता हूं एक और एक पाकिस्तानी यूट्यूब है जिन्होंने इस्लाम छोड़ दिया है और वो नास्तिक है तो वो अपने चैनल प वो बुला के डिबेट करते हैं कि आप जो है भगवान को प्रूफ कीजिए तो सर हम चाहते हैं कि एक बार आप उनसे एक बार आप वार्तालाप करें तो आप हमारे चैनल का नंबर और दे दीजिए तो हम उनसे संपर्क कर लेंगे बात कर ले क्योंकि मैंने उनका देखा है वो जो मां दुर्गा के जो पोस्टर और व ऐसे अद चित्र बनाते रहते हैं अगसे कर पहले तो क्षमा मांगे हम उनके लिए वीडियो बना देंगे उनके कुतर को को तोड़ करके भाई जो व्यक्ति आपकी मां को गाली देगा उससे आप बात कैसे करोगे उसको तो पहले दूसरे तरीके से पूजा अर्चना होगी ना उसकी तो पूजा अर्चना नहीं कर रहे तो कम से कम इतना तो बना ले कि उससे दूर रहे स्कंद पुराण में एक वचन आया है कि जो जी आपके गुरुदेव की निंदा करता है मतलब गाली लोज देना सैद्धांतिक वो करना तर्क वितर्क करना एक अलग बात है मगर गाली गलोज देना

00:37:48:14 जो आपके गुरुदेव के साथ अभद्र आचरण ऐसा मर्यादित आचरण करे उसकी अगर पहली नंबर बात तो है कि जीवा काट दो काट सको तो उसको वहां से भगा दो और उतना भी दम नहीं है तो खुद भग जाओ वहा मत ो तो मां भी तो हमारी गुरु है जी वही भैया जी वो जैसे बहुत लोग जैसे उनके पोस्टर देख के उनसे बात करने के लिए जाते हैं तो वो उनको खुद को इतना जो है वेद और शास्त्र का इतना इम नहीं है तो वो उनके जो कटाक्ष उन वो इतना हमारे चैनल का वो दे दो और बता दो भैया यन चैलेंज करते हैं आप इनसे बात कर लीजिए मगर बात येय उन्होने ऐसा कर रखा है कि क्या बताए आप लिंक दीजिएगा देखेंगे ठीक है भया ऐसे गंदे व्यक्ति के साथ मंच साझा नहीं करना चाहिए ना वैसे तो वो इस्लाम की ज्यादा बात करते हैं लेकिन वो कभी कभार सनातन धर्म पर भी वो लोग वीडियो बना देते हैं वो कभी देखते तो अच्छा नहीं लगता है तो वही

00:38:59:16 तो कोई है जो आएगा वेदों में प्रमाण कबीर को भगवान सिद्ध करें पार्वती पटेल जी पार्वती पटेल जी बताइए जय श्री राम नम बोलिए नमस्ते जय श्री राम मैं संत रामपाल जी महाराज का शिष्य हूं अच्छा कब

00:39:40:12 से 2019 से 22 अक्टूबर से नाम दिख लिया हू बताइए कौन सा चैप्टर खोलना है आपको बोलिए आप पहले एक जगह स्थिर हो जाइए फिर बात करिए और थोड़ा प्रकाश में आ जाइए रोशनी में आ जाइए ठीक रोशनी में आके दोबारा से आप बात करें तब तक हम इनसे बात कर लेते हैं राजकुमार हिंदू

00:40:21:00 जी जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जी बताइए मैं तो यही कहूंगा सर जी कि जैसे कि रामपाल के जो भक्त है अध्याय नंबर दसवा अपने भागवत गीता में लिखा हुआ है उसमें भी प्रमाण है कि कवि जो कवि है वोह कबीर नहीं है वहां पर इतनी जगह प्रमाण है कि कवि कबीर कैसे कहेंगे नहीं इन्होने उसको चिल्लाया इतना है कि लोगों को लगने लगा जैसे ब्रेन वश के टाइम पर चिल्लाया जाता है ना कोई गलत चीज तो इन्होंने उसको चिल्लाया इतना है कि कोई यह ढूंढना भूल ही गया कि वास्तविकता में कभी कबीर है ही नहीं मगर हमने चिल्लाना चालू कर दिया कि वेदों में प्रमाण है कबीर साहब भगवान है मेरी बात सुनो इनकी वजह से चलो कुछ भी है बट क्या है कि इन्हो के मैंने इतने वीडियो देखे तो मेरे को भी ऐसा लगा कि हां मेरे को इसके बारे में जानना चाहिए तो मैंने सारे ग्रंथ है जो पीडीएफ फॉर्म में लिए उनको पढ़ा मगर जो इनकी तरह पढ़ेंगे वो इन्हीं की तरह समझेंगे और अपनी

00:41:36:00 जो अलग भावना से पढ़ेंगे वो अपनी तरह हम समझेंगे इस चीज को क्योंकि दो भावना होती है वो होती है कि हां वही है जो बताते हैं वोह देखते हैं तो वही देखेंगे मगर अगर अपन अपने हिसाब से पढ़ेंगे या अपने शास्त्रों के अनुसार पढ़ेंगे तो वो ऑटोमेटिक अपन को लगेगा कि यार गलत है मगर क्या आदमी क्या कर रहा है कि आजकल उ वो जो कुछ श्लोक दे दिए कुछ तो उसी को देख रहा है और कुछ देख ही नहीं रहा उसके ऊपर का श्लोक नीचे का श्लोक देख ही नहीं

00:42:11:03 रहा भाई वेद पढ़ना है तो फिर उसको पूरा पढ़ो मेरे को कम से कम महीना भर लगा है एक पूरा जैसे मैंने ज्यादा गहरा से नहीं पढ़ा बट जैसे कि उसका भावार्थ भावार्थ पढ़ा है पूरा प्रत्येक वेद का अपने शिव पुराण का विष्णु पुराण का और अपना य श्रीमद् भागवत का तो मुझे कहीं पर मिला ही नहीं कि भाई अपन को कोई डाउट ही नहीं हुआ अपने लिए तो सब वही भगवती गणेश सब एक ही मतलब सब एक है अभी इन्होंने पता नहीं रामपाल को सबसे बड़ी हसी किस बात पर आती है कि और लोगों ने धर्म के नाम पर जो अधर्म फैलाया वो पहले वेद लिए फिर उसका अर्थ कम से कम लिखा खुद लिखा गलत अर्थ गु कोई भी शास्त्र लिया तो उसका अर्थ खुद लिखा गलत उसके बाद उसको छपवा किताब के रूप में बेचा भी मगर इन्होंने तो वो भी नहीं किया है कि अपने वेद के भाष्य लिख दिए हो अपना पुराण पुराण का अर्थ लिख दिया हो गीता का अर्थ वो भी नहीं किया इय आज भी वेद आदि शास्त्रों के लिए डिपेंड उसी पर करते हैं जो पहले छपे हुए रखे

00:43:26:14 इन्होने म ले अपना वाला एक इतनी मेहनत कहां से करे भाई संस्कृत भी तो आनी चाहिए हमारे यहां पर प्रोग्राम था इनका तो मैं क्या थाने में गया था मैं खुद गया था मेरे साथ कोई गया भी नहीं मैंने 10 पाच आदमियों को इस चीज के बारे में बताया तो सारे गए फिर थाने में हमने वहां रिपोर्ट दर्ज कराई दूसरे दिन इनका प्रोग्राम बंद हो गया मगर कोई कोशिश ही नहीं करता ना कि क्या हो रहा है अपन को क्या मतलब है सब यह सोचते हैं और भोले बाले लोग फसते चले जाते हैं बस अब मैं जब थाने में गया तो थानेदार ने भी यही बोला कि भाई आप मेरे को प्रमाण दिखा दो सुबह मेरे पास भी पुस्तक देने आए थे तो मैंने ले ली मैंने पढ़ी

00:44:10:28 नहीं बी एस जय श्री राम भैया तो बोलिए पार्वती पटेल जी क्या आप बानते हैं वेदों में प्रमाण है और कबीर भगवान है जी जी मैं मानता हूं कहां लिखा है जी वेद में भी लिखा है और ना

00:44:46:28 जो भी भगवान है अरे वेद में कहां लि और कहां बताया और कहां लिखा है मेरे याद नहीं लेकिन लिखा है बोल रहा हू अरे यार आए क्यों कबीर जी रामपाल रामपाल वालों के मित्र हो या शत्रु हो रही

00:45:28:22 बोलो भाई नाम दीक्षा लिया हूं तो मित्र हुआ ना बोला अरे तो मित्र हुए तो मित्र कई बार ऐसे भी होते हैं ना जो गलत जगह पहुंच करके नुकसान करा देते हैं अब आप यहां पर आए हो और ऐसे वक्तव्य दे रहे हो कि मैं मानता हूं मैं याद नहीं है भाई आए क्यों फिर चलो बताओ था जो आप बोल रहे हो कि मतलब आप बोल रहे हो कि ब्रह्म ही आ आचार्य बनता है बोलके मतलब बोलते हो नहीं

00:46:05:12 हां क्या करूं इसका आप आप जैसे आप सुखदेव ऋषि को जानते हो ना आपका भाई साहब सुनो आपका नेटवर्क सही नहीं आ रहा है आप पहले तो एक ऐसी जगह पर रहो जहां पर आप हिलो नहीं आप नच नच के तो बात कर रहे हो ऊपर से आपका नेट नेक भी सही नहीं आ रहा है आप जाओ दोबारा आना ठीक है दोबारा आ जाना ले लेंगे आपको और कोई है

00:46:37:15 क्या हेलो रामपाल जी का मैंने ब हा एक मिनट एक मिनट आप स्टेज प आ गए क्या हा जी बोलिए जय श्री राम जय शी श्री राम जय श्री राम जय श्रीराम रामपाल जी का मैंने बहुत सारा बायोडाटा निकाला है अपने सनातन धर्म को इतना हानि पहुंचा रहा है सबको धर्म भ्रष्ट किया जा रहा है एक एक हर ग्रंथ से उसने पॉइंट निकाल के और ऐसा भ्रमित किया गया है हर ग्रंथ से हर ग्रंथ से सारे प्रमाण है मेरे पास मैं अपना नंबर भेजता हूं और आपको प्रमाण देता हूं उन्होंने कैसे भ्रमित को खुद को भगवान मान रहे हैं कबीरदास जी का एक लिखा हुआ है कि 5505 वर्ष बीतेगा कलयुग तब मेरा अंशा उतार होगा लेकिन अभी कलयुग को 5505 वर्ष हुआ भी नहीं है और उसके नीचे यह भी लिखा है कि उस शरीर की छाया नहीं होगी यह चीज इनको बताई नहीं है छुपाई गई है हर ग्रंथ से ऐसे भ्रमित किया गया अरे भाई सबसे बड़ी बात तो यह है कि

00:47:52:16 भगवान जो होते वो अजर होते हैं अजर अजर अजर अजर कबीर है कबीर की आप फोटो देखो बाल सफेद ठीक है जी और भगवान के भक्त इनको देख लो आप यह कहां से आपको 16 साल के लग रहे हैं जो भगवान के अवतार है उनका वर्णन आता है 16 साल जी हा हा किशोर ये कहां से आपको लग र है कि ये जो है 16 साल के हैं इनके भी बाल सफेद हो रहे हैं इनकी भी आख ही है उनके बारे में भी मैंने निकाला पहलाद जी का अवतार कबीरदास जी का ला जी भगत अपन होली मनाते हां उनका अवतार है और वो राम के भक्त थे श्री राम के भक्त थे राम जी के हां बहुत बड़े भक्त थे हां बिल्कुल सही बात है जी बहुत सारी जानकारी निकाली है और इनका प्रचार हर जगह फैल रहा है मैं अभी महाराष्ट्र में हूं इचल करण जी महाराष्ट्र में हूं कोई बात सुनिए कोई बात नहीं मेरी बात मेरी बात सुनिए प्रचार हर जगह फैल जाने दीजिए वो एक कहावत है कि झुंड में वार

00:49:07:16 करने वाला शेर नहीं ठग होता है

00:49:10:12 झुंड में वार करने वाला शेर नहीं ठग होता है और दुश्मन अगर कायदे का हो तो ही उसे मारने का मजा अलग होता है अलग

⬜ Not used yet · 00:49:20:22 – 00:59:26:03 (10:05)

00:49:20:22 होता है जी जी ठीक है तो जब तक और मैंने जब तक जो हमारी समस्या है वो एक रहद रूप धारण नहीं करेगी तो कैसे हिस्ट्री लिखी जाएगी कि भैया ऐसा ऐसा हो गया था उसको फिर ऐसे ऐसे सही किया गया हिस्ट्री तभी बनेगी जब जो समस्या हो वो भी एक विकराल रूप धारण कर ले तो इससे हमें डिमोटिवेट नहीं होना है यह तो हमारे लिए प्रोत्साहन है कि सामने हजारों की संख्या में कौरव खड़े हो और अर्जुन अकेला पांच पांडवों के साथ बोले कि प्रभु इसको कैसे हम लोग करेंगे तो भगवान कहेंगे कर्मन वादी कार से मा फले सु जी तो ऐसा कोई दिक्कत नहीं है और फिर अपने ही भाई है भटक गए थोड़ा थोड़ा उनको अपने भा अपने भाइयों को भ्रमित किया गया अपने हिंदू धर्म वालो को सबको भ्रमित किया गया मैं आज गया इनके जहां नाम दीक्षा है वहां पर आज मैं गया हूं और वहां की सारी रिकॉर्डिंग करके लाया हूं वहां का पूरा फोटो निकाल के लाया हूं मैं डायरेक्ट उनको फोन किया मैं बोला मुझे नाम दीक्षा चाहिए बोल रहे आ जाइए मुझे लेने के लिए आ गए और लेकर गए तुरंत नाम दीक्षा ऐसा होता है अंदर एक रूम में लेकर गए उधर टीवी चालू किया गया और रामपाल जी का व चालू किया गया पांच मंत्र बताता

00:50:35:22 है वो उसमें से अपनी देवी भागवत में वो सब मंत्र भी बताते हैं और मुस्लिम धर्म का भी मंत्र बताता है सोहम करके सुनो जी स्वेता सत्र उपनिषद में दूसरे अध्याय के 26 में मंत्र में लिखा है ना तस्य रोगो न जरा प्राप्त योगा योगा अगनि मयम शरीर और इसका अर्थ क्या है योगा अग्नि मय शरीर प्राप्त होने पर योगी को ना रोग होते हैं ना बुढ़ापा व्यापत है और ना ही मृत्यु प्रभावित करती है तो जी अजर होता उनके मछे दाढी य सब नहीं आती नहीं आती है कि अवस्था रहती है उनकी जी जी आगे श्रीमद भागवत में आया है पहला स्कंद सवा अध्याय 19 वा अध्याय और 26 इसमें क्या आया है जी कि राजा परीक्षित को श्रीमद् भागवत सुनाने जब सुखदेव जी पहुंचे तो वह 16 वर्ष के सुकुमार दिख पड़ते थे उनके चरण हस्त उरु भुजाएं कंधे और कपोल तादुर कोमल जान पड़ते थे वो हमेशा 16 वर्ष के दिखाई देते हैं भगवान अगर राम और की आज भी मूर्ति आप देखो हमारे मंदिरों में तो कहीं भी

00:51:50:24 वो दाढी मूच वाली मूर्तियां नहीं होती है होती है अगर है तो वो अशा स्त्रीय है अगर है तो व है भगवान का अवतार होता है पूर्ण अवतार वो हमेशा 16 वर्ष वाला रहता है जी बकुल अब मैं एक बात क रहा आपने अच्छा याद दिलाया इनका दीक्षा वाला मामला पॉइंट बताना भूल गया था अभी जो मैंने शुरू का आधा घंटा जो संक्षिप्त विवरण दिया था मैंने उसम ये भी एक बात थी की इनका जो दीक्षा प्रोग्राम है वो भी बहुत अटपटा वो भी अशा स्त्रीय पू तरीके से कहते हुआ बहुत बड़ा कहते य कि हम गलत है हम अशा स्त्रीय भक्ति करते हैं जबक हमारे पास परंपरा है गुरु परंपरा है परंपरा प्राप्त शास्त्र है हम मगर गलत करते हैं और इन्होंने संस्कृत नहीं पढ़ी है ब्रज का अर्थ इन्होने ये जाना नहीं कि कहा लिखा कहा नहीं लिखा ू दिया खैर ठीक है कबीर नाम है ही नहीं कहीं भी नहीं एक भी शास्त्र में मगर मगर मगर ये जो है ये कहते हैं कि हमारी जो इस समय गुरु दीक्षा हो रही है वो कैसे हो रही है कि गुरु को पता ही नहीं है मैं आज किसी को दीक्षा दे रहा

00:53:05:25 हूं हा गुरु को 10 दिन बाद पता लग रहा है गुरु दे रहा दा गुरु कहां से दे रहा है दीक्षा बताइए गुरु ने क पेन ड्राइव लगा के ऐसे हा ये भी य सिद्ध नहीं कर पाए कि भाई गुरु दीक्षा कैसे संभव हो जाएगी गुरु दीक्षा कैसे हो जाएगी जी शुभंकर शुभंकर पारिजात जी जय श्री राम हर हरर महादव आपके व क्या ठंड पड़ने लगी क्या काफी भारी भरकम कपड़े पहने जी जी बता उड़ी से हम तो आए थे बस ऐसे ही आपके दर्शन करने के लिए

00:54:02:15 भाई कोई आना चाहता हो कबीर वाला भगवान सिद्ध करे जो भगवान कबीर को तो आ सकता है यहां पर स्वागत है उसका कुल मिला कर के वेद में पुराणों में कहीं भी कबीर को स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा कि वो अविनाशी है स्पष्ट रूप से ये नहीं कहा कि उसकी देह जो है वो पांच तत्वों की नहीं बनी है स्पष्ट रूप से ये नहीं कहा कि वो भगवान है स्पष्ट रूप से उसका जिक्र ही नहीं है कहीं और यह कहते हैं कि हम जिस कबीर को पूछ रहे हैं वो वही कबीर है जिसका वेद में बात हो और अपनी बातों को बिना शास्त्र के आधार पर अपने जो है मनमुक व्याख्या सिद्ध करते हैं शास्त्र में जिनका प्रमाण है कि अविनाशी है ये परम तत्व हैय परम ब्रह्म है तो वहां पर शास्त्र लिखने वाले ने गलत लिख दिया है ये कह ते वो जी ने अपने मन की बात लिख दी है और ये अपने मन की बात जो कर रहे हैं वो नहीं वहां प जो व्यास जी है जिन्होंने बातें लिखी है वो गलत लिखी तो इनके पास कोई आधार नहीं है मगर कैसे पूरा एक तंत्र खड़ा हो गया है जो मैंने देखा है कि अभी तक जितने भी आए हैं उसमें से 90 पर थोड़ा इलिटरेसी की तरफ वाले

00:55:17:20 लोग है मतलब जिनका पढ़ाई शैक्षिक अध्ययन बहुत वीक है तो जो इस तरह इस लाइन के जो लोग है वो आसानी से प्रभावित हो जाते होंगे पढ़े लिखे भी होंगे इनके यहां मगर ज्यादा संख्या अभी तक जो मैंने देखी तो उनका जो शैक्षिक स्तर था वो बहुत बहुत ज्यादा अल्प था कल जो जैसे एक आए थे बोले में 2004 से कबीर कबीर की पूजा कर रहा हूं रामपाल जी से मैंने दीक्षा ले रखी है और बोला कि मैंने पूछा कि क्या कबीर सर्वशक्तिमान सर्वव्यापक है बोला हां है मैंने फिर पूछा सर्वव्यापक है बोला हां अच्छा सर्वव्यापक का अर्थ क्या है यह नहीं

00:56:02:12 पता तो ऐसे तो लोग उनकी वो एक दो दिन में आज फोन आया था उनका दोबारा कि मैं दोबारा आना चाहता हूं व बोले कि ठीक है मैंने कहा ठीक है आ जाइए मगर पहले आके आपको क्षमा मांगनी होगी हाथ जोड़ करके क्योंकि उन्होंने एक गलत शब्द उपयोग किया था कि क्या कहते हैं ये बेवकूफ हो तुम आप बेवकूफ हो ऐसे बोला तो जब हमने कहा क्षमा मांगनी होगी तो ठीक है मैं क्षमा मांग लूंगा मगर आज मैं अपने प्रश्न करूंगा आज आपकी बा आपकी बातें नहीं होंगी मैं अपने प्रश्न करूंगा तो मैंने कहा ठीक है कर लेना मगर मुझे बताओ कल किसके प्रश्न थे परंपरा तुमने पूछी परंपरा तुमने पूछी ब्रह्मचारी आचार्य बनता है वो तुमने पूछा शुरुआत किसने की पूछने की आपने ब्रह्मचारी आचार्य बनता है परंपरा तुमने पूछी ब्रज का भी तुमने पूछा ब्रज का भी आपने पूछा आपके सवाल थे हम उसका आपको उत्तर दे रहे थे और फिर भी आज कह र हो कि मेरे सवाल होंगे आपके नहीं तो जब मैंने ऐसे उनके सा और उनको [संगीत]

00:57:19:20 मैंने उनको मैंने फिर यह याद दिलाया कि आप जिसको तत्वदर्शी कह रहे हो उसी त को एक श्लोक छोड़ कर के कहा जा रहा है कि तत्वदर्शी जो के पास वैराग्य रूपी हथियार होता है 15.3 में मैं दिखाता हूं आपको यह कुछ भी सिद्ध नहीं होती इनकी एक बात ऐसी नहीं है जो सिद्ध हो जाए एक बात देखिए पहले इतना समझ लीजिए कि 4 34 में कहा गया है कि वो उस उस विन यज के ज्ञान को तू तत्वदर्शी के पास जाकर

00:58:06:04 ले अब हम लोग देखते हैं कि तत्वदर्शी के बारे में क्या 15.1 में बात हो रही है पहली बात तो यह है कि अगर मैंने आज उल्टे वृक्ष के रूप में कुछ अपनी मनगण व्याख्या कर दी तो मैं भी तत्वदर्शी हो जाऊंगा क्या उल्टे वृक्ष के रूप में प्रकृति रूपी संसार की जो व्याख्या करनी होगी उसके लिए वेदा शास्त्र द्वारा जो नियम बताए गए हैं उसकी सीमा में करनी होगी ऐसे थोड़ी ना कि किसी ने भी देख भाई उल्टा वृक्ष है इसके पाच इसके जो तने है पेड़ है पत्ते हैं यह रामपाल जी है कबीर है यह है वो ऐसे अपने मन से कोई भी कर दे वो तत्वदर्शी हो गया क्योंकि उसने उल्टे वृक्ष की बात की है यह कहा कहा का नियम भाई तो पवा अध्याय हम लोग लेते हैं

00:59:23:18 देखिए देखिए

00:59:26:03 वेद जिसके पत्ते कहे गए हैं उस संसार रूप वृक्ष को जो पुरुष मूल सहित तत्व से जानता

⬜ Not used yet · 00:59:33:21 – 01:30:46:25 (31:13)

00:59:33:21 है वह वेद के तात्पर्य को जानने वाला है वेद के तात्पर्य को जो उस वृक्ष को जानता है अच्छे से वो तत्वदर्शी नहीं है जो वृक्ष के तत्व को जानता है वह वेद के तात्पर्य को जानने वाला है और अगर फिर भी इसको तत्वदर्शी मान लिया जाए ये पहले देख लीजिए वेद वेद को जानने वाला कहा गया है तत्वदर्शी नहीं कहा गया देख लीजिए आप लोग क्या लिखा है वेद को जानने वाला लिखा वेद को जानने वाला तत्वदर्शी नहीं लिखा है ठीक है हालाकि वेद को जानने वाला तत्वदर्शी होता है मगर हम जब इन्हीं की बात ले रहे तो इन्हीं की बातों से चलेंगे है ना तो तत्वदर्शी नहीं लिखा है वेद को जानने वाला लिखा है अब वेद को जानने वाले पास क्या होना चाहिए यह 15.3 में बताया गया है क्या होना

01:00:33:09 चाहिए यह देखिए यहां से जरा भैया पढ़ दीजिए इसलिए से आप देख रहे हो तो इसलिए से पढ़िए इसलिए इसलिए इस हां उधर लेके जाइए देखा हा इसलिए इस अंता ममता और वासना रूप अति दृढ़ मूलो वाले संसार रूप पीपल के वृक्ष को दृढ़ वैराग्य रूप वैराग्य हां ण वैराग्य रूपी शस्त्र से काटकर हां कौन सा शस्त्र होना चाहिए वैराग्य रूप तो अगर इनके हिसाब से 15.1 में तत्वदर्शी है तो तत्वदर्शी के पास कौन सा शस्त्र होना चाहिए वैराग्य कहां है वैराग्य भाई है तो सही जेल में है ना वो वैराग्य तो वहा प हा तो उससे पहले वैराग्य नहीं था अब वैराग्य आ गया 6.2 भी देख लीजिए योगी किसको कहा गया है ब्रह्म को जानने वाले योगी को क्या कहा गया है 6.2

01:01:48:24 देखिए जिसको सन्यास कहते हैं उसी को तू योग जान परमात्मा के साथ जो योग अपना जोड़ करने वाला कौन होगा जिसके पास सन्यास होगा यह 6.2 में लिखा है सीधा सधा सन्यास लिखा है और कहीं जाने की आवश्यकता ही नहीं है तो ना तो इनके जो जो तत्वदर्शी सिद्ध होते हैं क्योंकि सन्यासी ब्रह्मचारी नहीं है समस्त सुति स्मृति शास्त्रों में सामंजस की शिक्षा नहीं देते हैं संशय दूर नहीं करते हैं कहां से हो गए तत्वदर्शी कहां से हो गए

01:02:38:02 आचार भाई परम और हरि ओम दास आप लोग अपना चेहरा दिखाएंगे तो आपसे बात होगी एक के सपना है सपना भाटिया सपना भाटिया जी को जरा ऊपर ले लीजिए स्ट्रीम में ले लीजिए इन्ह मुझे ऑप्शन नहीं दिख रहा है सपना जी आपका चेहरा रिवील करें हम बात उन्हीं से करते हैं जो अपना चेहरा लेकर

01:03:22:12 आए आप अपना विषय बता सकते हैं बिना चेहरा दिखाए उनका नेट सही नहीं अच्छा ठीक है भाई हिंदू भाई आप आइए राजकुमार हिंदू जी सर जी सर जी गुरुजी जी मेरा तो कहना यही है कि मैं क्या है कि जैसे कि अपने एक फाइनेंस कंपनी में काम करता हूं तो मेरे को बहुत सारे कस्टमर भी मिलते हैं मेरा तो एक ही मानना है कि मैं किसी भी समाज से परत नहीं करता पानी पीने में वहां पर मगर मुझको यह दिखते हैं मेरा तो यही है कि मैं इनके घर का तो पानी भी नहीं पीता और अपन को कुछ ना कुछ ऐसा करना पड़ेगा इनके लिए जैसे कि लोग क्या है कि पता नहीं यह सोचते हैं कि हमने कोई और कर लेगा जहां भी इनके प्रोग्राम होते किताबे बांटते तो बाटने से उनको कोई रोकता ही नहीं है ये चाहते को कोई और रोकेगा तो इसके लिए किसी ना किसी हां हां मैंने आपका देखा है मैंने भी इतनी जगह इनका विरोध किया है जिसकी कोई हद नहीं

01:04:41:18 है इनके चक्कर में दो तीन बार मतलब भारी हो गया उसका अब क्या बताऊ आपको पार्वती पटेल वापस आ गए भाई साहब आप फिर अंधेरे में इतना ज्यादा मतलब लाइट साइड मु करता हूं तो अच्छा सा इनकी जिंदगी में अधरा है उजाला होगा ही नहीं आप भाई साहब किसी और दिन आइएगा अच्छे से आपके नेटो रोशनी हो ठीक है

01:05:26:13 ठीक है तो और कोई है नहीं जो आ सके ऑलमोस्ट हमने एक एक बात का संदर्भ बता दिया है कहीं पर आपने यह नहीं दिखाया कि कबीर का जो शरीर है व पाच तव का नहीं सारी पीडीएफ है बहुत सारी हा थक जाते बोलते

01:06:09:26 बोलते बिल्कुल मेरे पास क्या प सारे तो हम चाहते हैं कि सभी लोगों को यह पहुंचे जब तक कोई नहीं आ रहा है मैं अपने एक बात बता दूं अभी रिसेंटली एक मैंने वीडियो देखा था जिसमें कि यह आर्य समाज को फॉलो करने वाले ये है गौतम खट्टर तो गौतम खट्टर जी का मैंने वीडियो देखा था वो मंच पर चढ़ कर के और चिल्ला रहे थे कि आज कोई भी ऐसा मौलवी नहीं होगा जो दूसरे मौलवी को क्रिटिसाइज करता हो आज कोई भी ऐसा पादरी नहीं होगा जो दूसरे पादरी को क्रिटिसाइज करता हो मगर सनातन धर्म के जो सर्वोच्च गद्दी पर बैठे हैं वह शंकराचार्य आज एक दूसरे की छीट कसी कस रहे इस तरीके से मतलब जो है मंच पर जाकर के शंकराचार्य और उनके जो गतिविधियां होती है उन पर आक्षेप लगाना और आक्षेप लगाने के रूप में ही अपने आप को वहां पर नेतृत्व करने वाले के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर अनमोल

01:07:27:24 अनमोल जी चेहरा दिखाएं परम जी चेहरा दिखाएं तो सबसे पहले मैंने अपनी एक लास्ट लाइव स्ट्रीम में भी बताने का प्रयास किया था कि यह जो कुछ लोग हैं अनमोल राणा जय श्री राम आवाज नहीं आ रही आपकी तो हमने अपनी एक लाइव स्ट्रीम में बताया था कि कुछ लोग ऐसे हैं जो जिनका अस्तित्व जो है किसी को व्यक्तिगत रूप

01:08:16:27 से क्रिटिसाइज करके और सामने वाले को पजेस करते हैं जैसे एक हो गए मैंने देखा कि भी कुछ ऐसी नेगेटिव थिंकिंग वाली बात समाज ने तुमको यह दिया है फेमिनिज म के आधार पर या हर चीज को क्र साइज करना जो समाज में पहले से चीज है उनको क्रिटिसाइज करना इसी प्रकार का य चल रहे हैं ये जो आचार्य प्रशांत है जो परंपरा प्राप्त जो चीज है उनको क्रिटिसाइज करना और ऐसी बातें करना वो बातें बताना लोगों को जो लोग अपने बारे में जानते बस जब उसको बहुत अच्छे शब्दावली में बहुत अच्छी पंक्तियों में भावपूर्ण तरीके से सुनते हैं तो वो कृतज्ञ हो जाते सुनाने वाले के और उसी प्रकार की स्ट्रेटजी पर यह आर्य समाज का तो अस्तित्व ही खड़ा है पूरा परंपरा प्राप्त जो सिद्धांत उनका विरोध करने के नाम पर आर समाज में ज्यादातर लोगों की जो भर्ती होती है व ऐसे ही होती है कि स्त्रियों का जने नहीं होता शूद्रों का जन नहीं होता हम जन करा रहे हैं यह फलाना फलाना आ जाओ आ जाओ हम करा देंगे तो वो सब बातें में नहीं जाऊंगा यह जो गौतम खट्टर जी है इनको मैं आज थोड़ा सा रिप्लाई दे रहा हूं कि जैसे सबसे पहले बात तो आपने यह कहा कि दुनिया में कोई मौलवी नहीं होगा जो दूसरे मौलवी को किसी गलत बात पर गलत

01:09:32:22 कहे तो यह तो आपका गलत बात है आप केवल वहां पर जनता के जो मन है जनता का सुनने वाली जनता का उसके मन पर अपना आधिपत्य जमाने के लिए ऐसे भाव में बोल रहे हैं कि वह आपकी सुनकर मदस हो जाए वाह वाह वाह वाह क्या बोल रहा है कितना इसके अंदर आग है हमारे हिंदू धर्म के लिए और इस आग में वो इतना उलझ जाए कि यह सोच भूल ही जाए कि जो बोल रहा है बिल्कुल कुतर्क है बिल्कुल निराधार है कैसे कि ऐसा नहीं है कि दुनिया में कोई मौलवी दूसरे मौलवी के बारे में कुछ अगर गलत बात उसको लगती है तो वो बोलता नहीं है ख बोलता है दूसरी बात क्या शंकराचार्य जी हाथी पर चढ़ कर के रोज यह बोल रहे हैं क्या कि फलाने जो है शंकराचार्य नहीं है ये है वो है अरे भैया एक बार कहीं पर इंटरव्यू हुआ तो उन्होंने जो उनको जो उनके दृष्टिकोण से उनको सिद्धांत है उनके अनुसार उन्होंने कोई वक्तव्य दे दिया कोई शंकराचार्य एक दूसरे की आए दिन बुराई नहीं कर रहा तुम जरूर कर रहे हो तुम जरूर उस बात को बुना करके अपनी वोटिंग कमाना चाह रहे हो और तीसरी बात तुमने कहा अब इसको छोड़ दे क्या आर्य समाज में एक दूसरे की सीटा कसी नहीं होती है जो

01:10:48:08 एक नस्क है कौन है अग्निवेश है जो विदेशों में सबसे ज्यादा जिन्होंने आर समाज का प्रचार कि दो दल बन गए थे क्या कहते हैं ये खूब क्रिटिसाइज किया गया उनको आर्य समाज अरे अभी मैंने देखा हवन यज्ञ की और बात में ही एक दूसरे की वो चल रही थी कि तुम गलत कर रहे हो य फिर भाई जहां गलत जो चीज हो रही है अधर्म हो रहा है आपके दृष्टिकोण से वहां मौन रहना है और यदि रहना है तो उसका निर्णय कौन करेगा ठीक है अब अगला पॉइंट आ जा आपने कहा कि आप सनातन धर्म की सर्वोच्च गद्दी पर बैठे हैं तो अगर सर्वोच्च गद्दी पर व बैठे हैं तो इसका अर्थ है कि क्या करना है और क्या नहीं करना है इसके निर्णय करने वाले वह है तो आप कौन होते हो य प्रश्न करने वाले और अगर प्रश्न करना है और आप मानते हो कि सनातन धर्म की सव सर्वोच्च गद्दी में बैठे हैं तो क्या आप उनके मठ में गए पूछने ऐसा क्यों कर रहे हैं जितने लोग इस तरीके से शंकराचार्य के नाम पर अपनी चीजों को सुनाते हैं वो क्या कभी शंकराचार्य के मठों में जाते हैं ये पूछने कि गुरुदेव ऐसा क्यों

01:12:03:12 हो रहा है या आपकी भाषा में जो भी उनके लिए संबोधन हो नहीं क्योंकि आपको सॉल्यूशन चाहिए ही नहीं ना जैसे आतंकवादी है ना टेररिस्ट उनसे कह दिया जा भाई कश्मीर ले लो पूरा भारत ले लो हम मुसलमान हो जाते हैं सब कुछ कर लो पूरी दुनिया को मुसलमान बना देते हैं तो वो टेररिस्ट मानेंगे नहीं नहीं हम तो तुम्हे कच्चा जवाए गे अब है ना अगर उनके अनुसार पूरी दुनिया हो गई आज की तारीख में तो उनको सुकून मिल जाएगा नहीं मिलेगा उनको तो विप्लव ही चाहिए इसी प्रकार से आपको समाधान नहीं चाहिए कि शंकराचार्य क्या और क्यों कर रहे हैं क्या शंकराचार्य हिंदू राष्ट्र के लिए पूरे भारत में भ्रमण नहीं कर रहे क्या मुक्तेश्वरा जी गौ माता राष्ट्र माता के लिए पूरे भारत में नहीं गमन कर रहे कितने उन्होंने अभी पिछले छ महीनों में कितने भाषण दे एक दूसरे के विरोध में बताइए या भारती कृष्ण तीर्थ जी ने दे दिया हो या जो यह द्वारका पीठ के नाम से ख्या पित है और क्या कहते हैं ज्योतिष पीठ के नाम से ख्या पित है इन्होंने दे दिया हो या पुरी पीठ वालों ने दे दिया हो कब दिया बताइए पिछले छ महीने में कोई वक्तव्य दिया है क्या आप उनके नाम पर रोटिया सेकी

01:13:19:09 हां कांग्रेस और नरसिंहा राव द्वारा जो खड़े किए गए ये जो है नकली शंकराचार्य प्र पयो जिनका शंकराचार्य जो आचार्य गण है उनसे भी कोई संबंध नहीं शिक्षा दीक्षा कहां से वो भी नहीं पता ऐसे खड़े किए शंकराचार्य को अगर नकली शंकराचार्य को क्या कहते हैं वो नमाज पढवा वाले शंकराचार्य को अगर मना कर रहे हैं तो वह आपको बुरा लग रहा है तो हम इस तरीके के व्यक्तिगत कटाक्ष करते नहीं है आर समाज में भी दू की छटा कसी होती है और सबसे बड़ी बात आप खड़े होने किसके पास जा रहे हो यह भी देखो आप कह रहे हो अभी थोड़े दिन पहले यह जो यति नरसिंहानंद जी है हम उनके बिल्कुल सपोर्ट में खड़े हैं ज आवश्यकता होगी खड़े होंगे मगर यति नर सिमान जी है जो इन्होंने कुछ दिनों पूर्व कोई बली का आयोजन किया था क्यार समाज ने उसे क्रिसा नहीं किया था हो गए थे खड़े साथ में और आज आप लोग यति नरसिंहानंद जी के यति नरसिंहानंद जी के पास जाकर के खड़े होकर के वोट कमा रहे हो हिंदूवादी होने का अपना चैनल चलाने का अपना

01:14:34:13 अपनी प्रसिद्धि पाने के लिए हा कितने लोगों को शारीरिक युद्ध का प्रशिक्षण दे दिया आपने स्वयं सिवाय इसके के मंचों पर जा जा कर के जो परंपरा प्राप्त जो चीजें उनको क्रिटिसाइज करने के अवतार को क्रिटिसाइज करा लो मूर्ति को क्रिटिसाइज करा लो जनव को स्त्रियों के जनव के रूप में परंपरा प्राप्त आचार्य क्रिटिसाइज करा लो और शंकराचार्य को क्रिसा करा लो यही तो है और दोगले पन की हद देखो आपकी जब आपसे साई के बारे में पूछा जाता है तो साई के लिए आप बोलते हो कि हमारे जो सबसे बड़े गुरु है ना शंकराचार्य वो साई को नहीं मानते अपनी बात को प्रूफ करने के लिए शंकराचार्य को ऐसे प्रूफ यूज करते हैं और उसके बाद शंकराचार्य पर ही आक्षेप लगाते हैं उनकी प्रमाणिक तर पर उनकी बातों पर कितने ले उस किताब को बेचते हो उस का प्रचार करते हो जिस किताब में शंकराचार्य का के बारे में बुराई लिखी हुई है उनके सिद्धांतों की काट की गई है और फिर शंकराचार्य के सिद्धांतों के आधार पर ुद पब्लिसिटी कमाते हो क्या दोगलापन है भाई हा फिर कहां खड़े हो मूर्ति पूजक के पास वो तो पापी है उसको बताया नहीं आपने हमारे लिए निराकार

01:15:49:20 वादी पापी नहीं है तुम्हारे लिए मूर्ति पूजक पापी है हमारे लिए भगवान के निराकार स्वरूप को स्वीकार करने वाला हमारा भाई है तुम्हारे लिए अवतार को स्वीकार करने वाला पापी है अधर्मी है कौन है कौन है सनातन को नुकसान पहुंचाने वाला कभी अंतर आत्मा में खड़े होकर के शीशे में देखना अभी बंगाल में इतने हिंदू मारे जा रहे थे इतनी मार काट हो रही थी य हो रही थी मगर राम भद्राचार्य जी ने एक जगह मूर्ति पूजा अवतारवाद के लिए जरा सा बोल दिया तो उनके पास बहुत टाइम निकल आया पूरे राम भद्राचार्य जी के लिए अनशन करने का वो बाहर आंदोलन खड़ा करने का उनके विरोध में बंगाल के लिए करने का टाइम नहीं था समय की बात है जिस समय बंगाल में हिंदू मर रहे थे कितने जुलूस निकाले कितनी शोभा यात्रा निकाल दी कोई नहीं राम

01:17:04:22 भद्राचार्य क्या विरोध करने के लिए आपने जरूर तमाशा किया बात मत करना फालतू की निरर्थक बातें आपके जो वही वाली बात मैंने बताई थी ना वो वाह वाह वाह वाह शुरू तो करने दो वही हाल है आप लोगों का भीड़ बैठ जाती है और साइकोलॉजी की किताब में लिखा है भीड़ के बुद्धि नहीं होती सामने भीड़ बैठ जाती है और उसको आपने कोई जुलत कारी बात बता दी हो सकता है वह भीड़ व मुनव्वर फारूकी की भीड़ थी ना वहा उन्हीं के राम सीता का मजाक उड़ा रहे भीड़ अस रही है वही है वही आपकी भीड़ है ना तथ्य ना तर्क ना प्रमाण बस एक हीरो दिख रहा है जत कारी बातें करने वाला क्या बात है

01:17:57:09 जिस दिन प्रत्यक्ष वार्ता होगी ना जब तक दूर हो तब तक खूब मुंगेरी लाल के हसीन सपनों की दुनिया में डूबे रहो कभी अगर प्रत्यक्ष वार्ता हुई तो दृश्य बदल जाएगा वास्तविकता से सामना होगा उस दिन आपका खूब अपनी प्रसिद्धि को इस समय बुना लो प्रसिद्धि को पोषित करो पापियों के पास जा रहे हैं जी उस समय मैंने देखा जब यह बांग्लादेश में हो रहा था कुछ भले आर्य समाजी ऐसे थे जो उस समय कुछ भले आर्य समाजी जो बोल रहे हैं भाई तुम रा राम भद्राचार्य में इतना ध्यान क्यों दे रहे हो बंगाल के लिए बोलो ना ऐसे थे कुछ मगर मैंने देखा कि उस समय बंगाल के लिए कुछ करने वाला नहीं वहा आप सड़को पर उतर आए राम भद्राचार्य ने इतने वीडियो बना डाले उसी दौरान बात करते हैं सनातन रक्षा की अरे मूर्ति को तो तुम खुद तुवाना चाहते हो मंदिरों को तो तुम खुद तुवाना चाहते हो क्यों बेचते हो ऐसी किताबें जिसमें लिखा

01:19:12:10 है कि मूर्तियों की आवश्यकता नहीं है और जब तुम ऐसी मेंटालिटी खुद फैला रहे हो तो फिर उस मूर्ति को बचाने कौन से मुंह से जा रहे हो यार तुम मतलब व्यक्ति को वैचारिक तौर पर तो नपुंसक बना दो कि नहीं मूर्ति किसी काम की नहीं है और फिर दिखावा करो देखो हम तुम्हारी मूर्ति बचाने आए इसलिए तुम हमारी सत्यार्थ प्रकाश पढ़ो हां भाई कोई है देखिए हरि ओम दास है बोल रहे थे अनमोल जी आइए बताइए हरिओम दास जी चेहरा दिखाए अनमोल राणा जय श्री राम हा जी मेरा एक क्वेश्चन था जी य आप अभी मैं देख रहा था आपका यह तो आप कह रहे थे गुरु जो होना चाहिए वह वैराग्य वाला होना चाहिए जो वैरागी हो आप किसके शिष्य है यह बताइए जी मैं तो हिंदू हूं आप किसके शिष्य है आपको आप हिंदू कैसे हो चलो यही बताओ कैसे हिंदू की परिभाषा क्या है आपकी किस आधार पर कह

01:20:27:14 रहे हो हिंदू हम सनातन धर्म को फॉलो करते हैं इस वजह से सनातन धर्म की परिभाषा क्या है आपकी परिभाषा यह मेरा एक क्वेश्चन है देख रहा था तो आपका वीडियो आ गया तो मैंने सोचा मेरे क्वेश्चन आपसे पूछ लू कि जो गुरु वैरागी होना चाहिए ठीक है तो क्या आप अपना जो क्वेश्चन है वो हमें लिख करके भेजिएगा हम आपको वैसे देंगे जवाब य अभी हम बात कर रहे हैं कि अगर कोई संत रामपाल का फॉलोअर है तो वह आए और हमारी किसी बात से उसको विरोध है तो विरोध करे क्वेश्चन आंसर्स का वीडियो रखेंगे अभी नहीं है वो ठीक है होता क्या है क्वे आंसर के नाम पर वही विरोध करने वाले आते हैं और विरोध करने वाले क्वेश्चन आंसर करने वाले के रूप में आते हैं और अपने पक्ष को साबित मतलब वो यह सिद्ध करते हैं कि अगर हारू तो सिर्फ मैं हारू और अगर जीत जाऊ तो मेरा वो अगर सफल हो तो असफल हो तो केवल मैं असफल हू और अगर सफल हो गया तो मेरा जो पीछे कुटुंब है वो सफल हो जाए तो इस वजह से मेरा तो ये है सि गुरु तो वैरागी हो ग ठीक है तो उसके शिष्य है वो भी वैरागी होने चाहिए

01:21:42:14 अगर भगवान को पाना है तो फिर या नहीं या बिना वैरागी भी हो सकता है मैंने आपको क्या कहा आपने सुना नहीं मैंने तो सुन लिया अब एक बारी आप बता दीजिए दोहरा रहे हो ना जब आपने सुन लिया तो आप दोहरा क्यों रहे हो फिर आप मानोगे नहीं जो मैं कह रहा हूं ऐसा है मैंने आपको ये कहा कि आप किसी और दिन हम क्वेश्चन आंसर रखेंगे हम इसमें ऐसे डायरेक्ट क्वेश्चन आंसर नहीं रखते हैं आप आइएगा उस दिन क्वेश्चन करिएगा ठीक है हम लोग रखेंगे या फिर आपको जल्दी है तो आप हमारा ग्रुप है टेलीग्राम ग्रुप है वहां जाइए ये क्वेश्चन लिख दीजिए आपको जवाब पहुंच जाएगा लिखित में ठीक है ठीक ये जो लाइव स्ट्रीम है उसम हमय ले रहे कि हम रामपाल वालों की जो शिक्षा है उसका हम प्रतिकार किया हमने यहां पर पक्ष रखा वास्तविकता क्या है वो रखा तो हम यह आमंत्रित कर रहे हैं कि कोई जो अगर उसको इस जो हम बता रहे उससे दिक्कत है तो वह आए और

01:22:44:20 बताए ठीक चलिए फिर आज राम रामपाल वाले कोई नहीं आ रहा आज क्या बात डर रहे हैं सो गए उनके पास कु बचा नहीं ना हर बात का तो तोड़ मिल तोड़ मिल गया अब बोले क्या करके अब देखो शुरू में आप देखो कुछ लोग आते थे ना वेद में लिखा कभी कभी अब बोलना बंद कर दिया है देखो आप पिछली कुछ लाइव स्ट्रीम देखना अब वो आक के वो नहीं बोलते वेदों में प्रमाण है दूसरी बातें बोलते हैं वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है गायब हो गया इस स्लोगन बात खोज के लाते इस स्लोगन के पीछे ही हम पढ़े थे शुरू से ये जो इन्होंने बना लिया था मैंने क्योंकि पिछले साल जब वो मेले वाला जो वो बात हुई थी तब से कोई वीडियो चले ना चले वोह चलता रहता था और उसमें क्या होता रहता था कि वह ऐसे ऐसे गंदे गंदे कमेंट करते रहते थे और म जैसे कुछ मेंटली डिस्टर्ब हो एक ही कमेंट वेदों में प्रमाण है कबीर साहब भगवान है ब्रह्मा विष्णु महे और ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी नहीं है दुर्गा ये दुर्गा

01:23:59:26 से उत्पन्न हुए हैं और ब्राह्मण काल का काल सतयुग के राक्षस और कलयुग में ब्राह्मण है ना ये तो लाइव स्ट्रीम अभी लाइव चल रहा है ना तो उसम क्वेश्चन जरूर लिखेंगे वेदों में प्रमाण कबीर साहब पता नहीं मानते नहीं मगर बहुत कम हो गया है बहुत कम हुआ है 90 पर उसमें वो आया क्योंकि अब इनको उसम उस बात में दम नहीं दिख रही है पहले इनको लगता था हमने किला काढ लिया अब उसको खोदा गया तो निकला चुहिया इनको लगता था हमने पहाड़ तोड़ लिया अब उस पहाड़ को टोला गया तो उसमें तो चुइया है हां विशाल भाटिया जी जी मैं अभी एक सेकंड रुकेगा मैं आ रहा हूं है मैं इधर ही हूं दो मिनट बस मैं बस आ रहा हूं मुझे आ जाओ आ जाओ आ जाओ देख प्र को

01:25:02:09 जा आवाज आपकी आ रही है अरे कहां गए कहां गए सब के सब पंडित जी आ जाइए आप तो आ जाइए पंडित लोकी जी अरे कहां गए भाई मुझे पूरा गांव खाली हो गया क्या कहां गए वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है आओ ना अब ये ये कहेंगे थोड़े दिनों बाद वेदों में नहीं सूक्ष्म वेद में प्रमाण है कबीर भगवान है ये कहो ठीक है फिर इसको किसी और दि लपेटे में लेंगे सूक्ष्म वेद तो इनका खुद का ही लिखा हुआ है ना तो हा खुद का लिखा खुद चीज में तो खुद कुछ भी प्रमाण कर देंगे इसमें क्या है हमने इतनी बार कहा

01:26:17:15 इनके जो ट्यूबर्स हैं कि भाई हमारे चैनल पर मत आओ आपको लगता है कि हम हटा देते हैं बिना मर्जी के कोई बीच का चैनल ढूंढ लेंगे या बीच की जगह ढूंढ लेंगे आ जाओ आप लोग जो वीडियो बना रहे हो तो सामना नहीं कर सकते जो इनके यूट्यूब है जो वीडियो बना रहे हैं एक है एकम एव द्वितीयं एक है फैक्ट विथ अभिषेक वीडियो बना लेंगे बंद कमरे में बैठ के सामना करने में सब ढीला हो जाता है अरे आओ ना भाई मैंने तो यह भी कहा हमारे चैनल पर आवश्यक नहीं है आप संपर्क करो कोई बीच की चीज निकाल ली जाएगी इतना डर है सोचिए इतना भय है दूर दूर बैठे हो करके वीडियो बना लेंगे सामना करने नहीं आएंगे मालूम है कि पूरा जो ताना बाना है खोकला है नीचे का सब बेस लड़े किस पे किस परे सामना करें नहीं ये पता है कि ये रामपाल जी महाराज को बचाने में लगे हुए हैं कुछ महाराज क रहा रामपाल मैं अ ये कह रहा हूं रामपाल महाराज जी बचना चाहते

01:27:32:15 हैं कि नहीं यह भी तो सोचिए भाई उनके नाम से चल रहा है कौन दीक्षा के लिए प्रूव कर रहा है कोई सबूत नहीं है कि दीक्षा कैसे देनी है कैसे नहीं देनी है इस बारे में कल उस बंदे ने खुद कहा रामपाल जी का कहीं पर ऐसी कोई वीडियो नहीं है जिसमें उन्होंने कहा हो कि मैं दीक्षा इस तरीके से दूंगा क्या पता उनको पता भी ना हो कि उनके नाम से दीक्षा दी जा रही है और यह बोलते हैं कि जो भी लोग इनसे दीक्षा लेते हैं वीडियो पहली बात तो जब दीक्षा दे रहे तब गुरु को पता ही नहीं है मैं किसी को दीक्षा दे रहा

01:28:13:21 हूं और दूसरी बात मदेव दूसरी बात क्या है एक मिनट दूसरी बात कि यह पूरा डाटा कैसे जाता होगा रामपाल जी के पास कि आपने इस महीने इतने लोगों को दीक्षा दी है इतनी इतनी तो गड्डी बन जाती होगी इनके अनुसार तो बहुत है करोड़ों लोग है इस समय जो प्रतिदिन दीक्षा ले रहे हैं तो महीने भर का डाटा इतना हो जाता होगा फिर उसको ये लोग लेके जाते होंगे वहां जेल में वो जेल नहीं जेल धाम कल उसने बोला था जेल धाम तो जेल धाम में वो लेके जाते होंगे अब जेल धाम में भैया वो कैसे उसको एक एक को पहचानते होंगे मेरा शिष्य है और मैंने इसको भी शक्षा दी अच्छा इसको भी अच्छा इसको भी दे दी सबको कैसे उसको मेंटेन करते होंगे गुरु शिष्य का कैसा संबंध है जिसमें गुरु को पता ही नहीं चल रहा है और क्या प्रैक्टिकल दिख रहा है इसमें समझ नहीं आ रहा जी टिया जी बोलिए जय श्री राम जय श्री राम सभी को जय श्री राम पिछली बार भी जुड़ने आया था मैं जुड़ नहीं पाया था तो एक प्रमाण में दिखाने वाला जैसे देवी भागवत है उसमें दिखाते हैं कि विष्णु जी कहते हैं देवी से कि हम जन्म मृत्यु होती है हम अविनाशी नहीं है है ना अब एक पुराण है मेरे

01:29:28:26 पास 18 पुराणों में सबसे पहला पुराण ब्रह्म पुराण है यह देखिए यह ब्रह्म पुराण है और जो उनके फस है वो भी देखें गीता प्रस और संक्षिप्त है और सबसे पहला पुराण है ये अब मैं इस पुराण से आपको वो दिखाऊंगा कि इसमें भगवान विष्णु क्या कह रहे हैं ठीक है देखिए मैं आपको दिखाता हूं रुकिए इसमें इसमें भगवान विष्णु ने कुछ और बात कही हुई है सेकंड ये देखिए [संगीत] मुझको हा अब ये ब्रह्म पुराण पेज नंबर 166 मैं यहां से पढ़ूंगा इसमें देखिए भगवान विष्णु क्या कह रहे हैं आप सब सुनिए जो इनके फॉलो है वो भी देखिए सबसे पहला पुराण दिखा रहा हूं गीता प्रेस का और संक्षिप्त है य है देखो सब के सब जो फॉलोवर्स है रामपाल जी के वो तो खास के देख भगवान विष्णु यहां पर कह रहे हैं जो उनके भक्त थे महाराज इंद्रद जिन्होंने जगन्नाथ जी का मंदिर बनवाया था पुरी में महाराज इदमन अवंती देश के राजा थे उन्होंने जो मंदिर उनको बनवाया था तो भगवान विष्णु जो है उनको स्वप्न में आकर दर्शन देते हैं उनसे पता है क्या बोलते हैं भगवान विष्णु यहां पर इस ब्रह्म पुराण में मैं इसम पढ़ के सुना

01:30:43:26 रहा हूं भगवान विष्णु कह रहे हैं मैं

✅ This part is already used · 01:30:46:25 – 01:31:19:12 (0:33)

→ Used in: A · Live रामपाल के चेलों का दोगलापन #तत्त्वदर्शीसंत #rampaljimaharaj at 2:39:52 ↗

01:30:46:25 देवता यक्ष दैत्य देवराज इंद्र ब्रह्मा अथवा रुद्र नहीं हूं मुझे पुरुषोत्तम समझो भगवान विष्णु कह मैं समस्त लों की पीड़ा दूर करने वाला अनंत बल पौरुष से संपन्न और संपूर्ण भूतों का आराध्य हूं मेरा कभी अंत नहीं होता ये देख रहे हैं कह रहे हैं मेरा कभी अंत नहीं होता विष्णु जी कह रहे हैं जिसका सब शास्त्रों में उल्लेख किया जाता है सब शास्त्रों में जिसका उल्लेख किया जाता है वेदांत ग्रंथों में वर्णन मिलता है जिसे योगी जन ज्ञान गम्य एवं वासुदेव कहते हैं वह परमात्मा मैं ही हूं

⬜ Not used yet · 01:31:19:12 – 02:20:11:00 (48:52)

01:31:19:12 मैं कौन विष्णु जी विष्णु जी कह रहे हैं कि मेरा कभी अंत नहीं होता और वे में जिसका वर्णन उल्लेख मिलता है सब शास्त्रों में वो परमात्मा मैं ही हूं यहां पर विष्णु जी कह रहे हैं सबसे पहला पुराण अब ये पता है क्या कहेंगे इस पर ये वो विष्णु नहीं है हा हा तो अब इसके आगे पढ़ के बताता हूं ये देखिए अब जो इंद्र दमन है ना महाराज इंद्रम इसमें वो स्तुति करते हैं भगवान वासुदेव का ये वचन सुनकर राजा के शरीर में रोमांच हो आया इस प्रकार स्तोत्र गान करते हुए कहते हैं लक्ष्मी कांत लक्ष्मीकांत कौन लक्ष्मीपति लक्ष्मीकांत आपको नमस्कार है श्रीपति आपके दिव्य विग्रह पर पीत यानी पीतांबर वस्त्र शोभा पाता है आप लक्ष्मी प्रदान करने वाले और लक्ष्मी के स्वामी है आप आदि पुरुष सबके ईश्वर और सब और मुख वाले निष्कल एवं सनातन परम देव है आपको मेरा प्रणाम है अब यह देखिए आगे इसमें कह रहे सबसे लास्ट में आप देव देवेश्वर वरदाता व्यापक सर्व लोकेश्वर मोक्ष के साधक तथा अविनाशी अविनाशी भगवान विष्णु है अविनाशी भगवान विष्णु है आपको मेरा प्रणाम है ये देखि य पर आगे बोल दिया आप विष्णु जी है सबसे पहला जिसको वेदों में बताया गया

01:32:34:15 है भागवत में भी आया है ना ये कि वेदों से जानने योग्य कौन है भगवान विष्णु य देखिए भागवत में बताऊ आपको पहला पुराण हैय संक्षिप्त है गीता प्रस का संप हा जो उनको पसंद है रामपाल जी को पहले पुराण में बोल रामपाल जी को संक्षिप्त बहुत पसंद है वो क्योंकि क्योंकि गीता ब श्लोक के साथ छापते नहीं थी ना देवी भागवत उनके समय में तो वो सारी थ्योरी गीता प्रस के आधार परही लिख गए हैं अब तो ये सबसे पहला पुराण है इसलिए पहले पुराण में लिखा है विदव में प्रमाण है ओए श्री हरि भगवान है और कबीरदास उ श्री हरि के भक्त है

01:33:18:27 हा मैं एक बात बता रहा था आपको कि विष्णु भगवान की बात बता रहा था इसमें तो कोई डाउट ही नहीं है कि भगवान विष्णु परब्रह्म है मैंने पुराणों को पढ़ना स्टार्ट किया है तो यह सबसे पहला पुराण आता है तो अभी इसको पढ़ रहा तो इसमें व्यास जी ने सबसे लास्ट में यह बताया कि यह पुराण विष्णु जी से संबंध रखता है हा श्रीमद भागवत

01:33:55:15 जय जगनाथ य ये देखिए ये ब्रह्म पुराण का पेज नंबर 10 देखिए जहा से स्टार्ट हो रहा है मैं इसम से बता रहा हूं को एक मिनट वेदों को जानने वाले को तत्वदर्शी कहा गया ठीक है 15 प 153 में को जानने वाले को वेदों को जानने वाले को इनके अनुसार तत्वदर्शी है अब वेदों को जानने वाले को देवी भागवत में कहा गया है जो माता को परब्रह्म मान लेता है व वेदों को जानने वाला ठीक है यह श्रीमद् भागवत महापुराण है और

01:34:37:24 इसका श्रीमद भागवत दो पा 15 अध्याय स्कंद दो और उसका पांचवा अध्याय पांचवा अध्याय और पवा श्लोक 15 से आ जाते हैं वेद जो है किसके परायण है नारायण के वेद किसके परायण है वेद किसके लिए है भगवान विष्णु के देवता भी नारायण के ही अंगों में कल्पित हुए हैं समवन इ ट्राइम टू एंटर देवता भी भगवान देवता भी भगवान नारायण के अंगों में कल्पित हुए समस्त यज्ञ भी नारायण की प्रसन्नता के लिए है समस्त यज्ञ मतलब यज्ञ मतलब होता है धर्म सभी धर्म भगवान की प्रसन्नता के लिए हैं नारायण विष्णु और सारी तपस्या नारायण की ओर ले जाने वाली है और सभी

01:35:54:09 प्रकार का जो वैदिक ज्ञान है उसके द्वारा कौन जाने जाते हैं नारायण कहां कबीर जाने जाते हैं भाई कबीर तो जानते हैं नारायण को जाने नहीं जाते हैं अ स्कंद पुराण है ना मेरे पास अभी स्कंद पुराण तो नहीं है ये गीता प कार्तिक और वैशाख का महात्म है ये छोटी पुस्तिका है इसमें जो स्कंद पुराण है उसमें कार्तिक मास का अभी मास चल रहा है ना उसका एक महात्म दिया गया है यहां पर भगवान श्री कृष्ण जो है वो जो उनकी पटरानी में एक सत्यभामा जी जो थी उनको वो कार्तिक मास की महिमा बतलाते हुए कहते हैं भगवान कृष्ण इसमें कह रहे हैं कार्तिक मास में स्कंद पुराण में लिया गया है इसमें लिखा है सूर्य शिव गणेश विष्णु तथा शक्ति के उपासक भी मुझे ही प्राप्त होते हैं मुझे किसको भगवान श्री कृष्ण को श्री कृष्ण खुद कह रहे हैं जैसे वर्षा का जल सब ओर से समुद्र में ही आ जाता है उसी प्रकार पांचों के उपासक मेरे ही पास आ जाते हैं मैं एक ही हूं तथापि लीला के अनुसार भिन्न भिन्न ना नाम धारण करके पांच रूपों में प्रकट हू ठीक उसी तरह जैसे कोई देवदत्त नामक एक ही व्यक्ति पुत्र पिता आदि भिन्न भिन्न नामों से पुकारा जाता है भगवान श्री

01:37:09:09 कृष्ण कह रहे स्कंद पुराण में और अगर वो देवी भागवत में अगर ये विष्णु देवी की स्तुति करें तो उसमें कोई बड़ी बात नहीं है क्योंकि वहा देवी को श्रेष्ठ ब बताया गया है इतनी सी बात पता नहीं इनको कहा इसमें कबीर कबीर पता नहीं कहां दिखता है ये पुराणों में भाई देवी भागवत में देवी बनी है विष्णु पुराण में विष्णु जी हर पुराण में अल यहां देख कार्य कारण की बात भी हो रही है भगवान के जो अलग-अलग रूप होते हैं कारण रूप होता है कार्य रूप होता है लीला रूप होता है उसकी भी यहां प बात हो रही है बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया मगर विशाल भाटिया जी मेरी एक शिकायत है आपसे जी क्या आप जब भी परब्रह्म लेकर आते हैं वो श्री हरि वाली लाते हैं वो मैं श्री राम जी का कुे दिख रहा है नहीं नहीं मैं मैं भी शिव और विष्णु में एक ही मानता हूं ऐसी कोई बात नहीं अच्छा अच्छा अा अच्छा अच्छा नहीं मुझे लगा थोड़ा सा कोई बात नहीं वो विष्णु में भी शिव है मगर मैंने देखा आप आज तक जितने प्रमाण लेके आए हो उसमें विष्णु की सुप्रीम एसी है कृष्ण की सुप्रीम एसी है शिवजी की भी है मैंने शिवपुराण से भी दिखा चुका हूं आपको अच्छा अच्छा मजा कर रहा हूं मज पहली बार जब आया था जी जी

01:38:25:22 जी संदीप बत्रा जी जय श्री राम जय श्री राम आपकी आवाज नहीं आ रही बत्रा जी माइक अन म्यूट कीजिए हां बोलिए आप जी हो गया अब आवाज आ रही है जी आवाज आ रही है आपको जी जी आ रही है आ रही है मैंने यह कहा कि आप जो ये सर धर्मिल की ये मैंने अपने लाइफ में पहली बार देखा कि आप इतना इन फ्रंट होके आप आ रहे हो तो मेरे को बहुत ही अच्छा लगा बोला अंदर से म तप लगा के वाकई कोई ना कोई मतलब परमात्मा ने अपना बंदा भेजा है आपको और वाकई इनको वि धर्मं को धोने का काम कर रहे हैं बिल्कुल

01:39:20:19 इसने की बात ना बोले ये कर अपने जो भाई है जो भटक गए हैं उनको वापस लाने के लिए उनके दिमाग का शोधन कर रहे हैं तो अच्छा रहेगा मगर जी जी जीय ये हमें ध्यान रखना है कि सनातन की रक्षा जो है वह केवल लाइव स्ट्रीम तक सीमित नहीं है हमें अपने मठ मंदिरों को अपने आसपास शिक्षा रक्षा का सेवा का दुर्ग बनाए जिससे कि य जो हुआ ये हुआ क्यों है यह हुआ इसलिए कि ये जो ये जो शिक्षा है ये लोगों तक नहीं पहुंची जी उसका फायदा उठाया गया तो अगर हमको एक अच्छा समाज तैयार करना है राष्ट्र का निर्माण करना है तो हमको इस शिक्षा को आम जन तक पहुंचाना है उसके लिए ही हमारे मट मंदिरों को उस छोटे से विद्यालय के रूप में ख्या पित करें हम लोग कि एक ही ईश्वर पांच रूप लेता है भगवान साकार भी है निराकार भी है ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है जन वही प्रमाणिक जो परंपरा से प्राप्त हो बच्चे बच्चे को रटा हम वहां से एक्चुअल में जहां हम लोकल में जहां पर है वहां पूरे आसपास के क्षेत्र में बोर्ड लगे हैं तरह तरह के उसम बोर्ड में लिखा गया कि संडे को यहां

01:40:35:19 पर आना है आपको संडे को आपको यहां पर आना है मैं जो ये समझ पाया हू ना इनका भी कहां पर लोग ना मतलब मिसगाइडेड कैसे हैं कि जैसे ना लोग थोड़ा ना मतलब अधूरे ज्ञान की वजह से हो जाता है य नहीं कि हर एक को किसी को भी पूरा ज्ञान नहीं होता अब जैसे कोई सकार मान रहा है कोई निराकार मान रहा है अभी अगोचर की बात नहीं अगोचर का मतलब है जो नजर नहीं आता है तो कहने का भाव इन्होंने इनको ना समझ नहीं आया इस चीज को कि परमात्मा तो कुछ भी कर सकते हैं वो तो चाहे वो सकार रूप में आ सकते हैं निराकार भी है वो अगोचर भी है इस चीज को समझने में थोड़ा सा जैसे आर्या समाज जी है आर्या समाज जी एक बात को पकड़ के बैठे हैं कि जी हमने तो निराकार की बात करनी है जबकि वो जब भी बात करेंगे गीता जी के 12वें अध्याय में उन्होंने स्पेशली बोला है कि निराकार भी मैं ही हूं और साकार भी मैं ही हूं पर वो लोग ना समझना नहीं चाहते प्रॉब्लम ये है सबसे बड़ी प्रॉब्लम एक ये है इसमें भी और एक प्रॉब्लम है जैसे रामो विग्रहवां धर्म जी जी जी ये तो आर समाजी भी मानते हैं जी जी जी

01:41:38:14 जी किसी बहस चल गई सुनिए तो इतनी बात इतनी बात आर समाजी भी मानते हैं कि रामो विग्रहवां धर्मा ठीक है जी राम धर्म का साक्षात स्वरूप है जी उन्होने राम को धर्म समझते हुए फॉलो किया नहीं किया क्योंकि राम स्वयं ज्ञान लेने जाते हैं गुरु के पास जी बिल्कुल जाते के पास इनका जो ज्ञान है वो अपना है वो गुरु का ज्ञान नहीं है जी जी जी जी राम जी ने शिवलिंग पूजा भी की थी जिस समय उन्होंने जब वो युद्ध में गए उस सम उने शिवलिंग रामेश्वरम बना हुआ उन्होने शिवलिंग की भी पूजा की थी उस सम तो यह एक दिक्कत है जहां पर सामर्थ वान गुरुओं से दूरी हो जाती है और मनमुक गुरु बनने लगते वहां समाज में इस तरह का अनुवाद होने लगता है मगर कोई बात नहीं हम लोग हम और आप मिलकर के ये उठाएंगे और आगे लेकर समाज के एक थे वो कहते बहस कर रहे थे मूर्ति पूजा के ऊपर हमने बोला आप भी साकार पूजा ही कर रहे हो जैसे आप ये ये बनाते हो जहा पर हवन हवन कुंड होता है हवन कुंड साकार पूजाही है हवन तो बनाया

01:42:53:21 पू निराकार तो ये होगा कि आप आसमान को पूज रहे हो जिसका कोई आकार नहीं है आकार नहीं या हवा को पूज रहे हो अगोचर निराकार हो गया वो समय लेकिन आप कर तो हवन कु से परमात्मा को वो प्रकट करने की बात कर रहे हो और गीता जी में लिखा हुआ कि जो हवन हवन कुंड भी मैं ही और उसकी आतिया भी मैं ही हूं व श्री कृष्ण जी ने श्री विष्णु जी ने श्री कृष्ण जी के रूप में आके बोला य चीज को इनको य समझ एक बहुत एक बहुत साधारण सी बात है कि आर समाज ने वेदा आदि शास्त्रों की उन स्थितियों को उन स्तुति हों को भी स्वीकार किया जिन स्तुति हों में भगवान की भक्ति करते हुए उनसे कुछ प्राप्त करने के निमित्त प्रार्थना हो रही है आ समाज का सिद्धांत है कि भक्ति का फल नहीं देता भगवान भक्ति करने से केवल इतना मिलता है कि उसके गुण आप में आएंगे आप अच्छे हो जाओगे ठीक मगर भगवान आपको भक्ति के स्वरूप कुछ ऐसे प्रदान आपके मांगने से नहीं करता तो जब कुछ देता नहीं है तो फिर मांगा क्यों जा रहा है व्यर्थ का कार्य क्यों कराया जा रहा है एक एक पॉइंट पर बात होगी ना तो गायत्री मंत्र जो है गायत्री मंत्र का जो अर्थ है कि सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर

01:44:08:22 मुझे आप सत बुद्धि की ओर प्रेरित करे प्रचोदय अब क्या है य भगवान से भक्ति करते हुए कुछ कर देने की कामना कर रहे हैं तो अकॉर्डिंग टू आर समाज का लॉ वो जो गायत्री मंत्र है उसको स्वीकार नहीं होना चाहिए उनसे बल्कि ये भी बहस हुई वो कहते आप शिवलिंग पर दूध डालते हो हमने कहा आप जो हवन कुंड में जो घी वेस्ट कर रहे हो इसका मतलब वेस्टेज है वो भी चीज अगर आप ऐसे बोलते हो तो फिर वो चुप कर ग कुछ और समझाना चाह रहे हैं मतलब समझने की बात होती है अब अब बात ऐसी है कि आर समाज के अनुसार भगवान की भक्ति होनी कैसी चाहिए जिसमें केवल भगवान का महिमा मंडन हो हे सर्वव्यापी तुम परमेश्वर हो हे तुम ऐसे हो हे तुम ऐसे हो जिसमें भगवान का केवल गान किया हो मगर उनसे कोई भी चीज मांगी ना जाए अगर मांग लिया तो व आर्य समाज के सिद्धांत के विरुद्ध है अच्छा हा और गायत्री मंत्र में मांगा जाता है भगवान हमको य करो तो गायत्री मंत्र तो उनके अनुसार गलत है फिर प्रॉब्लम यही है और उसी को फ्री में बाटना उनकी ड़ की हड्डी

01:45:21:28 है मैत्री मंत्र उनके सिद्धांत के अनुसार नहीं है मगर उसी को फ्री में हर हर किसी को बांट देने पर ही उनका वो है पूरा खड़ा हुआ है साम्राज्य जो भी है मैं तो हैरान य होता हूं आपना कोई भी किसी कोई भी वो उठाकर देख लो कोई भी धर्म की बात करते हैं धर्म तो नहीं मजहब की बात करते हैं हर मजहब के अंदर पत्थर पत्थर पूजन हो रहा है कोई लड़के बुत की पूजा कर रहा है कोई उसको चूम रहा है कोई कोई अपनी जैसे मान लो गुरु ग्रंथ साहिब है उसको गुरु मानते हैं है तो वो भी सकार पूज ना लेकिन यह बात मानते नहीं है लोग भाई वैकल्पिक वैकल्पिक भवान के हम मूर्ति को गुरु रूप में मानते हैं हम मूर्ति को जैसे मान लो कोई भी ध्यान लगाएगा तो अंदर कोई मूर्ति तो बनेगी ना कुछ ना कुछ ध्यान में लाना पड़ेगा कि परमात्मा का स्वरूप य है यह लोग समझते नहीं है भ भगवान का वैकल्पिक स्वरूप तो हर किसी ने कहीं ना कहीं माना है जैसे अगर आप को ले लो वो कहता है कि नहीं इस्लाम की कोई मूर्ति नहीं बन सकती उसको कुछ नहीं ठीक है मगर उसके यहां पर जो भावनाए है फिर इस्लाम को मानने वालों की वो जुड़ जाती है मोहम्मद जी से

01:46:38:02 वो चांद के उंगली से टुकड़े कर वो दिखता ही नहीं तो उंगली से टुकड़े कैसे हो गए अच्छा सुनिए क्या फिर जुड़ जाए क्या फिर वहां पर वैकल्पिक अवतार क्या हो गया ये जो मजारे बनी हुई है ये हो गया वैकल्पिक यहां माता र पैर हरवाते सेवा करते हैं वहां जाकर के एक्चुअल में मुझे ना जो लगता है ये टारगेट सिर्फ मूर्ति पूजा हम लोगों की टारगेट करते हैं ये ये ना करें हम लोग कर ले ये क्या मतलब हुआ इस गलत बात है ना वैकल्पिक इनके यहां भी अच्छा एक बात ये कहते हैं कि जब वो ईश्वर की वो मूर्ति हो सकती है तो फर जीसस की भी पूजा करोगे तुम या आर समा जीी कहते हैं जीसस की मूर्ति की पूजा भी करोगे क्योंकि वो कण कण में है तो इसलिए जीसस की पूजा करोगे तो भाई अगर भगवान कड़कड़ में है तो तुम्हारा तुम भी सर्वव्यापी मानते हो कड़कड़ में है दुनिया में फ जो भी नाम है सब ईश्वर के ही है जो भी नाम है सब ईश्वर के ही है तो तुम प्रणव में क्यों रुक गए हो तुम भी अपना लो को दूसरा नाम लोगों में नॉलेज की दिक्कत होती है जैसे हम कहते ना कण कण में परमात्मा है उल्टा परमात्मा में कण कण है उल्टा परमात्मा ने बोला कि मेरे मेरे बाहर कुछ भी नहीं है बाहर मैं ही हूं सारा य और उने अंदर सट की ना

01:47:53:04 होती है थ अध्याय 10 में लास्ट के शलोक में अध्याय 10 लास्ट शलोक में बोला ये जितना भी सारा सिस्टम है सारा मेरे अंदर ही है कय एक अंश मात्र जितना भी पूरी सृष्टि है जितना जी आप कुछ कह रहे जय श्री राम बोलिए बोल लिए जय श्री राम बोल बत जी थोड़ा सा सुन लीजिए परमात्मा में ही सृष्टि है और सृष्टि में भी परमात्मा है दोनों बात है आप एक को सही एक को गलत नहीं क परमात्मा के अंदर बात वाता ये है ये मैं शब्द तो अगर बहुत दर्शन की गहराई में जाएंगे तो मैं शब्द उचित ही नहीं है वास्तविकता य है परमात्मा ही सृष्टि है और सृष्टि ही परमात्मा है बकुल स्वरूप स्वरूप भू जैसे शिव पुराण में चचन आया कि भगवान ने अपनी स्वरूप भूता प्रकट को प्रकट किया स्वरूप भूत मतलब अगर हम यह कह देंगे कि भगवान में सृष्टि है तो भगवान खोखले है तभी तो सृष्टि उनके अंदर है और अगर यह कह देंगे सट में भगवान है तो सृष्ट खोक ली है तो स्वरूप भूत है एक दूसरे जी सूरज प्रकाश जी जय श्री राम आवाज नहीं आ रही माइक ऑन

01:49:08:09 कर लीजिए सूरज जी माइक ऑन कीजिए आप अपना उसके बाद बोलिए सुजीत जी आप बिहार से जुड़े हा जी हा है तो हम बिहार से ही है सुजीत उपाध्याय जी जी जी गुरु भाई हमारे बिल्कुल बिल्कुल अरे आज हम पहली बार आपको देख रहे हैं जय जगन्नाथ जय जगन्नाथ जी जय जगन्नाथ जी जी सूरज प्रकाश जी एक मिनट हम आपका माइक सही कर दे जी बोलिए हां अब बोलिए जय श्री राम भाई जी जय श्री राम जय श्री रामका भाई जी आप बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं और अपने मतलब की अच्छा मतलब की मैं हर बार सुनता हूं जब मुझे टाइम लगता है मैंने कह रहा हम तो नहीं समझा पाए पर आप अच्छी तरह से समझा पाए हम तो समझा समझा के थक गए थे हमने तो छोड़ दिया था आप कहते हैं कि हम मंगलवार को कहते हैं कि सभी जितने भी सनातन भाई हैं सब मंदिर में आए जुड़िए पर परंतु बार-बार कहने पर भी दो चार कट्टे होंगे हम सनातन में कमी क्या है एकता का बहुत बड़ा अभाव सब अपने इतने कामों में बिजी रहते भाई जी कितना कहो कितना भी कहो

01:50:23:13 पर तब जाकर 10 जुड़ेंगे 10 में से अगले दिन पांच अब्सेंट हो जाएंगे और हनुमान चालीसा का हमने यहां पर पाठ भी रखा था हम हिंदू उससे भी काफी जुड़े रहे मैंने कहा मैं पहले भी आपसे मिला हुआ हूं एक बार आपसे जो दिल्ली में मैंने कहा हम नहीं समझा पाए रामपाल जी ने जो आपने बहुत अच्छा कर रहे हैं उसके लिए मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं हम तो सड़कों पर ही वो हमसे बहुत बड़ते थे कि भाई बद में हमने कहा कहीं प्र ग गलत व्याख्या निराधार इसका कोई अर्थ ही नहीं कोई अर्थ ही नहीं जिसका अर्थ ही भी अर्थ है तो क्या समझाए अब आपने समझाया तो 100 में से 5 परट को लगता है और तब भी 95 पर वाले नहीं मानते क्या आप सही कह रहे जी जी जी औरन पर इतनी गलत व्याख्या इतनी गलत चर्चा मतलब पता नहीं कहां से वो ले आते हैं कहां से कॉन्फिडेंस लेवल देखो आप उनका मैं तो कहता इतना आत्मविश्वास हमारा हम हमें भी नहीं है अपने ऊपर जितना आत्मविश्वास उनके अंदर है झूठ बोलने में ये भी ये हरि हर गुरुदेव के दृश्य है पूरे भारत में जो भ्रमण करते हैं हिंदू राष्ट्र के लिए हम सब हिंदुओं को एक करना चाहते हैं गुरुदेव को

01:51:38:16 सुनते हैं गु समय मिलता है गुरुदेव को जरूर सुनते हैं हा तो आप सबसे यही निवेदन है कि अपने जो धर्म रक्षा की भावना है उसको यहीं तक सीमित ना होने दे बकल आप अपने गली मोहल्ले की रक्षा के बारे में सबसे पहला प्रणाम है कि साप्ताहिक एक मीटिंग हिंदुओं की शुरू कर दीजिए आपके घर के पास जो मंदिर हो उसमें एक साता मीने बिल्कुल कर रखी थी मीटिंग मंगलवार को शाम को मीटिंग तो रखी थी गुरुदेव ने कहानी सुनाई थी आप जो बात बता रहे हैं उसके संबंध में गुरुदेव ने बहुत अच्छी कहानी कही थी कथा थी वो वो मैं आपको बता रहा हूं एक बार एक नाविक जो था वह गंगा नदी में सवारियों को सवारी करवा रहा था गंगा मां की सर करवा रहा था अचानक से उसमें बाढ़ आ गई तो जो सवारी थी ना उसको तैरना नहीं आता था नाविक को तैरना आता था तो नाविक ने यह सोचा कि मैं जो है काम करता हूं यह लोग तो बच नहीं पाएंगे क्योंकि यह लोग तो तैरना आता नहीं है मुझे तैरना आता है मैं अपनी जान बचा लेता हूं तो ना जो है यह सोच

01:52:53:19 करके क्योंकि उनको तैरना नहीं आता है तो मैं काम खत्म मैं अपनी जान बचा लेता हूं वो कूद गया नदी अपने बचने के लिए मगर वह बच नहीं पाया बाढ़ इतनी भयंकर थी कि वह भी जो है वो भी उसकी देह का नाश हो ही गया अब यह लोग जो सवारी थी वो और यह नाविक यह तीनों चारों लोग पहुंचे यमराज जी के दरबार में यमराज जी ने कहा जो सवारी थी उसको देख कर के गंगाजल में गया है इनको सीधे स्वर्ग भेज दो और इसको नरक में भेजो नाविक को तो वो नाविक कहता है गंगाजल तो मेरे मुंह में भी गया है तो यमराज जी कहते हैं गंगाजल मुह में गया व हम बाद में देखेंगे भले आदमी जब तक नौका डूबती नहीं तब तक तुम्हारा काम था खेते रहना खेते रहना बिल्कुल तुमने अपनी प्राणों की रक्षा को प्राथमिकता देने के चक्कर में अपने कर्तव्य से मुख मोड़ लिया बकुल बिल्कुल सही बिल्कुल सही इसी भाव को भगवान ने कहा अर्जुन से कर्मन निवादी का रस्ते मा फले सु कदाचन तो हमें ये सिखाया गया है कि गोष्ठी में मंदिर में एक आदमी भी ना आए तुम अकेले

01:54:08:25 हो तो भी गोष्ठी करो वृक्ष हो भले कड़े हो घने हो बड़े एक पत्र छाऊ भी मांग मत बिल्कुल मैं तो हर जगह क्या बोलू मैं मेरे को तो मेरे तो फेक भी बंद रहा मुझे बहुत धमकियां भी आने लग गई थी और मुझे तो बहुत रात को भी फोन आने लग गए थे 12 एक एक बजे हमारी धर्म पत्नी बोलती है छोड़ दो आप आप तो मरोगे हमें भी मरवाओ गी मुझे इतने मतलब की मुझे इतने धमकी भरे फोन आते थे हर जगह मेरा फ बंद हो गया था चक्कर में अ क्या करें आप अच्छी तरह से कर रहे हैं आप अ एक बताने का आपका मैं आपसे ब बिल्कुल खुश हू एक प्रसन्नता है कि आप प्रसन्नता से इस काम को कर रहे हैं और सनातन को आगे लेकर के चल रहे हैं मैं भी समझाता हूं जहा य सनातन ही क्यों इन चक्र में पड़े हुए हो समझा समझा मैंने कहा हम तो थक गए जीी क र जी धमकियां क मतलब समझे नहीं जैसे कई बार जो अहम अपने ही भाई साथी लोग है उनसे भी कई बार बस हो जाती थी तो बोलते थे वहां आ जाओ

01:55:26:01 समझ ग होंगे वहा पर मिलो हमसे हम ये कर देंगे वो कर देंगे हमने कहा भैया जो सत्य है सत्य छुपने से नहीं छुपने वाला हमें जो बोलना है हम तो बोलेंगे हम तो अ रहे मुझको तो यह भी नहीं कहते वहा मिल लो अपना लोकेशन भेजो फिरने शिवा जी तो सीधे भि गए देख के हैरान रह गया कैसे के लिए एक ही जगह

01:55:57:12 की बमने दे ील किने का क्या कर गुरु से मिलती है के चरण में जा हिमत और बल सबब र्म हमारी रक्षा करेगा तो की रक्षा के लिए तत्पर है जिस मेले में वो लगा हुआ था इनका कैप रामपाल वालों का जिस मेले में कैंप लगा था उस मेले में एक इवेंट भी चल रहा था जहां पर इवेंट भी चल रहा था तो इनका स्टॉल लगा दूसरा दर दूर इवेंट चल रहा तो उसमें सिंगिंग हो रही है डांसिंग हो रही है य सब चल रहा है वहां जनता बैठ के अपना मनोरंजन कर रही है तो जब मैंने इनका स्टॉल देखा उस मेले में तो मेरे पास एक पोर्टेबल स्पीकर है वो मैंने मंगा लिया अच्छा वो लेकर मैं उस इवेंट में घुस गया और जैसे उसम ा प्रोग्राम बंद

01:57:04:26 हुआ मैं इस तरफ से माइक पर चिल्ला रहा हूं हिंदुओ तुम नपुंसक हो जी य बैठ डास देख रहे हो और तुम्हारी मां के बारे में किताब बेची जा रही है कि दुर्गा का पति य है दुर्गा का पति वो है तुमको नहीं आ रही बिल्कुल भीय मेरे पास वहा की थोड़ी सी रिकॉर्डिंग है वीडियो रिकॉर्डिंग वहा के सब जो प्रबंधक थे मुझको मतलब मेरे साथ जो है हाई टाइप की करने के लिए आ ग हो मेरे साथ य पर गाड़ी के स्टैंड पर मुझे बहुत लोगों ने उधर उनकी साइड मुंड का मुंड का एक जग है एक सतलोक आश्रम वहा है मैं तो अकेला पड़ गया मेरे से बहुत भीड़ गए और बस पर गाड़ी के स्टैंड पर बहुत दल हो गया वो कम से कम 50 60 लोग आ गए फिर इधर से भी लोग थे मैंने कहा देखो ऐसा जो सत्य है मैं तो सत्य कह रहा हूं बिल्कुल नहीं वेद में मैंने कहा ये वो दिखाने लग गई व किताबे बांट रहे थे वो ज्ञान गंगा पता नहीं कौन सी गंगा मैंने कहा ये बिल्कुल निरर्थक है बिल्कुल बेकार है बेकार है सारे मैं तो डंके की चोट प कह रहा हूं बो कहां है ये है वहां का बाइबल में ये लिखा वही अपने क्या बोलू मैं गलत व्याख्यान कर रहे थे तो मैं तो कई जगह से भिड़ गया अब क्या बताऊ ये झुंड में गिदों की तरह

01:58:19:27 आते हैं मैंने भी देखा है चीज हां और किताबे कहीं भी बांटने लग जाएंगे कहीं भी बाट बस पर मेट्रो में कहीं भी स्टंड पर आपसे ना रिक्वेस्ट है जबसे मिलो ना आप कम से कम ना मतलब की होने चाहिए बंदे कम से कम 50 ऐसे मिला करो आप अकेले मत मिला करो जी अच्छा एक बात कहना चाह रहा हूं जो लोग हमारा समर्थन कर रहे हैं बकुल सम यह जो स्ट्रीम यार्ड पर हम लाइव स्ट्रीम करते हैं और हम इसको चाहते हैं कि इसको आगे करते रहे जिससे लोगों के मन में सही बातें पहुंचे तो इसम का साल भर का सब लेना हो पढ़ लिखा होगा जो जानने वाला होगा व्या आपकी बात को समझ पाएगा अनथा उ तना भी सिर पट आया था फायदा य होता है जो लोग फसने के कगार पर होते वो बच जाते हैं जो फसने के कगार होते वो बच जाते हैं एक बात एक बात कहलू जरा कि हमको जो है यह जो स्ट्रीम यार्ड है इसका साल भर का सब्सक्रिप्शन है शायद मेरे ख्याल से 18 से 19000 का है तो हमको यह लेना है जिससे कि हम इस पर अपनी लाइव स्ट्रीम कर सके तो

01:59:35:01 अगर जो लोग इच्छुक है हमारी सहायता कर सकते हैं मासिक रूप से थोड़ा थोड़ा सा पे कर दे हम लोग उसका पेमेंट कुछ एक बार में हो करके उसकी इंस्टॉलमेंट बन जाती है तो जो लोग सहायता करना चाहते हैं वो हमसे संपर्क करें हम एक ग्रुप बना देंगे उसके लिए उसमें आप जो है मासिक रूप से छोटी छोटी सी राशि अगर देंगे तो हमारा ये सब्जेक्शन आ जाएगा है ना आप ना मेड कर ना करेंगे अवश्य अवश्य मेरे बहुत सारे मित्र हैं अच्छे विद्यालय परंपराओं से हम लोग आप ये हमारा नंबर है जो भी इस तरह से आर्थिक रूप से मदद करना चाहे इस मामले में आपका नंबर है आपका नंबर मेरे पास है जी जी जी व नंबर हां हा अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा आप आप आपसे अभिवादन प्राप्त होते हैं हमको हां जी और आप इस कार्य को निरंतर जारी रखें बिल्कुल रुकना नहीं है आपने इसको छेड़ा है तो जो अंत है वही वही जाकर रुकना है बिल्कुल इस कार्य को निरंतर करना है मैं अपने बारे में एक बात बताऊं कि मैं मैं जो है धर्म रक्षा के लिए भूखा घूम रहा था भूखा मैं इतना तड़प उठाता अंत आत्मा से कि मैं जो है फाड़ खाऊ यह जो धर्म को नष्ट करने

02:00:50:03 वाले लोग है अब उसके बाद भूका घूमते घूमते मैंने भगवान की बहुत भक्ति करी मतलब ऐसी नहीं कि कोई महापुरुष जितनी मगर बहुत भगवान का नाम लिया और लगभग मैंने दो तीन महीने नाम बस उनका लिया होगा ठीक प्रकार से तीन चार महीने और मेरे जीवन में गुरुदेव प्रकट हो गए वही बिल्कुल वही आप भक्ति को जब मैं देखने जा रहा हूं गुरुदेव को मैं सिर्फ यह देखने जा रहा हूं कि मैं शंकराचार्य को आज देख गा बस मुझे नहीं पता था वहां से मुझे मिलने क्या वाला है मैं केवल जो वो लिख के गए ना आदि शंकराचार्य के जो इस गद्दी में बैठेगा वो मुझ शिव का रूप मान्य होगा मैं उसको देखने जा रहा हूं कि वो शंकराचार्य को मैं आज देखूंगा इन आंखों से पागलों की तरह बकुल ब पहु और द संकल्प आपका संकल्प जरूर पूर्ण होगा जी जी जब मैं वहां पहुंचा और मैंने उनको देखा मैं अपने कॉपी में दो चार अपनी नोटबुक में प्रश्न भी लिख के ले गया पूछूंगा और वहां ऐसे हालत खराब हुई उनको मैंने देखा आंसू बह रहे हैं और पूछने का दम नहीं रहा उसके बाद मुझे वहां से सब कुछ मिल गया जो मैंने सोचा नहीं था कि मुझे यहां से क्या

02:02:05:08 क्या मिलना है मुझे मिला वहां पर सार्वभौम सिद्धांत ऐसा सिद्धांत जिको काटा ना जा सके मुझे मिला वहां से कि यह सारे जो तंत्र बन रहे हैं फल रहे फूल रहे जो समस्या हिंदुओं की इसकी रक्षा कैसे होगी एक ही उसका उपाय है हिंदू राष्ट्र मैं तबतक मैं तब तक ऊपर ऊपर काम काम करना चाहता था मुझे नहीं पता था एटली क्या करना है हां यह पता चल गया था कि लोगों को प्रमाणिक आचार के बारे में बताना है यह पता चल गया मगर जो गुरुदेव से वाक्य मिला हर हिंदू सेना हो हर हिंदू सनातनी हो यह जो वाक्य मिला मतलब मुझे समझ में आया कि भाई करना क्या है एटली तो मेरा जो जीवन है मैंने एक दिन और भी बताया था मतलब इतना संतुष्ट हो गया जीवन से उस दिन वहां पर गुरुदेव के दर्शन सार्वभौम सिद्धांत और जीवन का लक्ष्य तो अब कुछ शेष नहीं रह गया कि मुझको जो है फलाने कपड़े लाने हैं फलाना बंगला बनाना है फलाना मेरा जीवन का एक ही उद्देश्य है सिंगल पॉइंट एजेंडा सर सिद्धांतों का प्रचार धर्म की रक्षा बिल्कुल धर्म की रक्षा हमारा

02:03:20:16 बिल्कुल सर्वप्रथम सं विल्प है ये हम भी निरंतर लगे हुए हैं आप बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं और आप जितने भी पाखंड है अब आप बोलोगे इनको तो दूर करना बहुत जरूरी है जब तक पैर में कांटा रहता है वो दुख दुखी करता है जब उसको निकाल दो तो आदमी को शांति मिलती है है कि नहीं तो ये इस प्रकार ही है ये सनातन में ये जब लकड़ी पर लग जाता ना क्या लगता है तो दीमक तो ये दीमक की तरह है ये भी जब तक इसको साप किया जाए परमाण सहित तब तक ये धीरे धीरे धीरे धीरे वाह बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं बहुत बढ़िया हम बिल्कुल शकरा हम भी है उत्तराखंड भूमि के है शंकराचार्य जी की भूमि के है और शंकराचार्य के परम उपासक

02:04:07:14 है प्रकार अपना दृ संकल्प करि आपको भगवान जरूर आपको आगे का मार्ग करेगा हम भी आपसे कुछ सीख रहे हैं ये नहीं आप हमें भी सीखने को मिल रहा है ऐसी बात हमें भी सीखने को मिल रहा है और हमारे गुरुदेव भी कहते हैं जहां बेटा सीखने को मिलो वहा सीखो हमारे पूज्य पाद गुरुजी पारा सर जी है आप जानते होंगे आज कथा का उसम उनका और गुरु जी के कितने अच्छे परम मतलब की गुरुजी को व अपना वो मानते हैं गुरु मानते हैं हमारे गुरुदेव तो गुरु जी को परम मानते ज उनकी कथा थी परास आध्यात्म पीठ का उद्घाटन था तो गुरुदेव को विया हु था तो हम तो सुंदर प जी हा बिल्कुल

02:04:54:02 बकल ले को बुला लो रामपाल के आ जाएगा है नहीं कोई आसपास इतना गलत व्याख्या रामपाल वासे अंदर इतना कॉन्फिडेंस लेवल नहीं है जिन जी गल सनातन ध जी एक मिनट लोकी जी कुछ बोल रहे हैं जरा सुन लो जी जी थोड़ा रुक जाइए साइड कमेंट में प्रश्न पूछने है कुछ लोग वो सनातन धर्म डिकोडेड करके चैनल था यश कोई यश नाम के व्यक्ति का तो उसके बारे में आप कुछ क्या कुछ जानते हैं क्या तो बता दीजिए अगर आप जानते हैं तो मुझे जो लास्ट में न्यूज उनके बारे में प्राप्त है वो ये है कि उनके ऊपर एक केस हुआ था जिसका आर्य समाज की ओर से कराया गया था यह न्यूज मिली थी मुझे और उसके बाद व बेल वेल पर बाहर आ गए थे उनका नंबर है मेरे पास मगर व मतलब नॉट चेबल रहता है ट पर कांटेक्ट किया है पर वो नॉट चेबल रहता है वोह फ्रॉड केस हुआ था एक हमको भी जानकारी है उसके बारे

02:06:09:27 में हां कुछ था मामला जो केस हम लोगों पर हुआ था वैसा ही केस करके उन लोगों को कोर्ट में बुलाया गया अच्छा वो लोग वो लोग वो लोग जल्दी में एंटीसिपेटरी बेल लेने चले गए उसके चक्कर में पकड़े गए हमने हमने तो अच्छे से मंगा लिया माफीनामा रगड़ जी जी ठीक है रमेश प्रजापति बस अब बैक अप करते हैं दो घंटे हो चुके हम लोगों के है ना जी जी जी बोलिए बना है मेरे बगल में आर्य समाजिक गायत्री मंत्र का हम बोल उच्चारण नहीं करना वेद का मंत्र है जिस प्रकार समझाना हो वो भी वर्ण व्यवस्था को नहीं मानते वर्ण व्यवस्था में बड़े कुतर्क करेंगे वर्ण व्यवस्था पर बड़ा कुतर्क रहता है उनका भी और कुछ नहीं उनको मतलब की व अपना मन अपने अपने आप व्याख्या करके जो वेद में है वो महाभाष्य किया है स्वामी जी ने उसी और अपने हिसाब से शास्त्र के हिसाब से नहीं अपने हिसाब से व्याख्या करना अपने हिसाब से व्याख्या को प्रस्तुत करना चलिए चलिए प्रोफेट

02:07:24:28 कबीर साहब कुछ क्या कमेंट कर रहे हैं इनको क्या कबीर दस अरे भाई साप और बिू शेरो को काटा नहीं करते दूर ही दूर से रंग कर निकल जाते हैं वेदों में प्रमाण है कबीर साहेब भगवान है प्रोफेट कबीर साहेब लिख रहे हैं रमेश प्रजा जी बहुत से कर नकी बात सुन लेते रमेश प्रजापति जी बोले जी शिवांश भैया जी हेलो जय श्री आवाज आ रही है आपकी बोलिए बोलिए जय श्री राम बोलिए सर साहब बोलिए मैं ये कहना चाहता हूं कि आप बहुत झूठ बोलते हैं किसे आश्रम में जो कि ये आपके नाच गाना डांस दिखा रहा था हमारे आश्रम में कहां पर आप देखें ये चीज को अरे कहां बोला उन्होने मैंने कब बोला क कबीर साब वाले मच उने क्या

02:08:30:25 बोला मिनट मिट मिनट मिनट इनको म्यूट करो एक मिनट भैया मैं अभी आपको सुन रहा क्या बोल क्या बोला था क्या किस बारे में बात कर रहे आप बताइए आपसे अरे अरे इनको म्यूट करो भैया अरे वो यह कह रहे हैं कि अभी आप थोड़ी देर पहले जब बता रहे थे कि एक स्पीकर लेकर जाते थे जब वो भगवती रामपाल वालो का इवेंट नहीं था वो वो मेले में एक दूसरा कार्यक्रम हो रहा था मेले में कई कार्यक्रम होते हैं ना रामपाल वालों का स्टॉल अलग लगा है और वह कार्यक्रम अलग है वो रामपाल वालों का कार्यक्रम नहीं था मैं तो वहां पर गया था जो जो नॉर्मल हिंदू थे उनको यह बताने के लिए कि तुम्हारी दुर्गा मां के बारे में किताबें बेची जा रही है वहा रामपाल वाले नहीं थे मैं रामपाल वाले होते तो वहा उनको जगाने क्यों जाता वहा तो उनसे मैं तर्क वितर्क करता भाई समझ रहे हो नहीं समझ

02:09:36:16 रहे एक मिनट जी हा बोलिए रामपाल वालो का कार्यक्रम नहीं था वो रामपाल वालों का कार्यक्रम नहीं था वो वो वहां जैसे मेले में केवल एक ही चीज नहीं होती है ना कई चीजें होती है तो मेले में एक स्टॉल रामपाल वालों का था वो जब मैंने देखा तो मैं वहां जो दूसरा एक कार्यक्रम हो रहा था वहां गया वहां के हिंदुओं को मैंने बोला कि तुम लोग कैसे लोग हो तुम्हारी मां के बारे में कोई उल्टी सीधी किताबें लिख कर के छाप रहा है और तुम यहां पर अपना मनोरंजन कर रहे हो ये हुआ था वो रामपाल वालों का कार्यक्रम नहीं था वो वो मेले वालों का कार्यक्रम था ठीक है ठीक है इसके अतिरिक्त आपको कुछ कना है तो बोलिए प्रजापति जी क्या क रहे क्या प्रजापति जी वास्तव में प्रजापति वाली पोजीशन में बैठे हैं ब ब ऐसा कोई बोलिए बोलिए प्रजापति जी समझे नहीं शायद ठीक है समझ गए अब उनके पास अब कुछ गुस्से में ऐसा नहीं है आपकी घरमा की रक्षा भी हम करेंगे चिंता ना

02:10:51:18 करें ऐसा मत सोचिए आप ऐसा मत सोचिए अभी देखिए कुछ दिन पहले क्रिश्चियन आया था बोला कि मैं इनकी इनकी पोल खोलने आया हूं राम पालियो की ऐसे बोला वो तो हमने उनको मना कर दिया कि हम देखो हमारा आपस में जो भी हो मगर हम बाहर वाले से अपने भाइयों की बुराई नहीं सुनेंगे यहां बैठ कर के मना कर दिया ब बक फिर हमने भी कहा फिर हमने उससे ये भी कहा तुमको अगर अपना ईश्वर स सिद्ध करना हो तो बताओ फर हमने ये कहा हमने कहा अगर बाइबल के ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध कर दो तो आओ उसके लिए खुला निमंत्रण अपने भाई अपने भाई है व हमारा आपस का मामला है तुम कौन होते हो य आ कर के भैया जो है हम अपने भाइयों की बुराई सुने तुमसे तो हमने मना कर दिया आप ऐसे ऐसे मत सोचिए ठीक है प्रोफेट

02:11:55:07 दीक्षित जी बहुत परेशान हो रहे हैं एक बंदा है रामपाल जी की तरफ से बोल रहा है कि गल में सर्च करो वर्तमान में सच्चा संत कौन है अभी यह थोड़े दिनों बाद कहने लगे वेदों में नहीं गल में प्रमाण है कबीर साहब भगवान है हद हो गई चलिए फिर बढ़ाते हैं कोई संघ वालों का रोग है गल से दिखाएंगे ठीक है आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद सभी का सुजीत जी आप जुड़े बहुत अच्छा लगा गुरु भाई हमारे और पंडित सूरज प्रकाश जी आपका भी बहुत-बहुत आभार संदीप जी आपका विशेष रूप से आभार आपने समय दिया इतना और हम लोगों ने जो स्ट्रीम यार्ड के बारे में बताया है उसके लिए आप लोग एक मासिक रूप से छोटी छोटी सहायता कर द तो हम एक ग्रुप बना देंगे तो उसमें इसका जो है स्ट्रीम का हमें सब्सक्रिप्शन लेना है क्योंकि इसमें पिक्चर क्वालिटी भी खराब आती है बिना सब्सक्रिप्शन के और दूसरी बात और भी कई सारी सर्विसेस है जिनका हम यूज नहीं कर पाते हैं तो आज सुबह ही जो हमारे टेक्निकल जो सहायक थे वो बता रहे थे हा तो ऐसे करके हा जो भी सहायता करना चाहते हैं उना

02:13:10:08 नंबर हमारा नोट कर ले जी का थोड़ा सा परिचय दीजिए तो जी पंडित फ्लोके जी थोड़ा परिचय करा दीजिए आप अपने ये आपके गुरु भाई हा वो तो समझ में आ रहा है पहले से ही लेकिन एक मिनट जो भी आर्थिक रूप से सहयोग वाले प्रक प्रकल्प में जुड़ना चाहते हैं य स्ट्रीम यार्ड इत्यादि के निमित्त तो वह इसमें ट करें और उनको जो है जोड़ दिया जाएगा आर्थिक रूप से सहायता वाले ग्रुप में 74836 ठीक है जी इनका परिचय आप ही बता दीजिए लोकी जी पंडित जी मैं भी गुरु भाई हूं और मैं शिवांश जी की तरह ही धर्म से जुड़ा हूं क्योंकि हम दोनों में एक ही कॉमन चीज है वो है गुरुदेव सबसे पहला कॉमन चीज और उसके बाद फिर सब बहुत सारी समानताएं मिलती गई और फिर मुझे लगा कि फिर मैं भी सोच रहा था कि इनको सपोर्ट करूं जैसे भी हो सकता था मैंने यथाशक्ति किया और उसके बाद अब चल रहा है बस धर्म की रक्षा चल रही है साथ में और क्या यही कहां से है मैं

02:14:25:08 मैं दिल्ली से हूं एनसीआर से तो दिल्ली से मैं दिल्ली में कार्यरत हूं मैं एमएनसी में करता ठीक व्यक्तिगत बत व्यक्तिगत जानकारिया फिर हो जाए ठीक है इलिए जय श्री राम सभी को जय श्री राम नारायण जय श्री राम हर हर महादेव ह ह हर महादेव अच्छा हां एक जाते जाते बात कर दूं मैं किसी को भी किसी प्रकार का वैचारिक मतभेद हो इस नंबर पर संपर्क करें धर्म रक्षा के लिए स शरीर सहयोग करना हो इस नंबर पर संपर्क करें नामा स्त्र हमारा नाम जब चल रहा है डेली लोग जुड़ रहे हैं बहुत अच्छा हो रहा है सवा सवा घंटे रामधुन में शिव धुन में हम लोग हो जाते हैं उसमें जुड़ सकते हैं 1515 मिनट में 1515 मिनट के पांच राउंड दिन भर में और अगर एक बार में करना है तो सवा घंटे का एक एक जो सवा घंटे वाला करते हैं उसमें स्वयं मैं रहता हूं और बाकी 1515 मिनट के जो होते हैं उसमें जो है अलग अलग गुरु भाई है वह सहयोग करते हैं जी इसके साथ ही साथ दिवाली के विषय में दिवाली कब बनानी है इसके बारे में इसके विषय में जो हमारे प्रामाणिक आचार्य उनका वीडियो

02:15:40:15 आ गया है वह वीडियो देख सकते हैं धर्म और धर्म और ब्रह्म को लेकर के कोई भी जिज्ञासा है तो उसके लिए गोवर्धन मठ का चैनल अपना प्रश्न लिखिए में और वहां आगे लिख दीजिए पूरी शंकराचार्य तो ज्यादातर संभावना है आपके प्रश्न का उत्तर आ जाएगा और यह आचार्य श्री का चैनल है इस पर विधि विधि निषेध इत्यादि के बारे में बहुत अच्छी जानकारियां सारी है प्रामाणिक तो आप इसको फॉलो करें यहां पर सुने आचार्य श्री को और एक मेरे पास प्रश्न बहुत आता है कि गुरु दीक्षा लेनी है तो गुरु दीक्षा के लिए यही है कि एक उपवत और एक धोती धारण करके गुरुदेव के सामने आपको तब खड़ा होना है जब उनका सुबह वाला प्रवचन पूरा हो चुका होगा आपने अपना नाम लिखा दिया होगा और गुरुदेव आपको देख कर के जब आप जब आप पर गुरुदेव की दृष्टि पड़े तो आप पारंपरिक वेशभूषा में हो पाश्चात्य वेशभूषा में ना हो और इसके लिए कोई शुल्क नहीं है कोई आपको बाध्यता नहीं है कि आपको यह लेकर जाना है बस पारंपरिक बेस में होना चाहिए आपको और

02:16:55:26 गुरुदेव का प्रवास कहां रहता है इसके लिए और भी अन्य कई प्रकार की सुविधाएं गोवर्धन मट पप आ गई है वो डाउनलोड कर लीजिए उसमें आपको गुरुदेव के प्रवास की जानकारी मिलती रहेगी ठीक है यह जो एक जी यह जो प्रोफेट कबीर साहेब एक ये कमेंट कर रहे हैं कमेंट को आप ब्लॉक नहीं कर सकते हैं क्या वो करते वो करते रहेंगे वो कुछ ना कुछ वो एक से एक कमेंट करेंगे भाई देखिए क पर आक्षेप कर रहे हैं इनके लिए इसके लिए इन पर बहुत कड़ा करवाई हम कर सकते हैं अरे ये लोग ऐसे ही गुरुदेव के लिए अपशब्द कहना इनको गुरुदेव के लिए पड़ सकता है बहुत भारी पड़ सकता है अगर ये सब ये सब लिख रहे हैं तो इनको खोज करके हम पहले हम तो आपके लाइव पर कुछ नहीं बोलना चाहते हैं लेकिन ली आईडी वाले हैं और इनका स्तर गिरना भाषा का इससे यह प्रूफ होता है कि इनके पास सिद्धांत नहीं है अपनी चीजों को बचाने के लिए हम आज भी अपनी मर्यादा पर क्यों टिके हैं क्योंकि हमें आवश्यकता नहीं लेकिन साठ समाचर भी है वो हम पूरा तरह से फॉलो करते हैं आप तो जानते

02:18:11:00 ही है रायण करेंगे करेंगे करेंगे करेंगे इसीलिए तो आपसे संपर्क किया था हमने ठीक है सभी को जय श जी सूरज जी कुछ कहना अन म्यूट करिए सूरज जी कोट पंडित जी आप म्यूट है एक मिनट एक मिनट जनता को दिशा भ्रमित कर रहे हैं इनकी जो किताब इनकी संपूर्ण जानकारी करके इनके गलत व्याख्यान के द्वा बैन होना चाहिए संपूर्ण रूप से बैन होना चाहिए तुम अपना लिखिए रा हो तब होगा वो सब अभी नहीं होने वाला है अभी आप जितना जगा सकते हैं जितन को बचा सकते बहिए वही कर हम तो बचा ही रहे भाई जी से जदा गुरुदेव के अभियान का यही लक्ष्य है कि जितने बच जाए उतने ठीक है बाकी सबका बंटाधार होना ही है बु थोड़ा शप है अभी भी बस बुद्धि का खेल है जिनकी बुद्धि में थोड़ा वो है धर्म संस्कार इत्यादि संस्कार नाम के व है तो ठीक है जब तक बुद्धि में एक और बात है एक और बात है जो लोग नहीं मान रहे हैं वो भी मानेंगे बस महत्व बुद्धि की बात है समय अभी उनके

02:19:26:15 मस्तिष्क में किसी और चीज के प्रति महत्व है वो उसको मान रहे हैं जब अधिक महत्व बुद्धि हो जाएगी असली विज्ञान के प्रति असली धर्म के प्रति असली ईश्वर के प्रति अपने आप लोग मानेंगे उसके लिए अच्छे से आपको जानकारी रहनी चाहिए ताकि आप लोगों को बता सके आशा करते हैं उम्मीद करते हैं प्रभु से कि सद्बुद्धि आए भगवान इनको जरूर जल्दी से जल्दी सद्बुद्धि दे वो हमारा आपका धर्म है ना हम लोग ब्राह्मण है हम लोग आप उसको बताइए सही से तोव जानेगा जानेगा तो मानेगा बिल्कुल बिल्कुल चलिए चलिए सभी को जय श्री राम आने के लिए समय देने के लिए सबको आभ श्री राम नारायण महादव हरर महादेव शव शंभु

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 2:20:11 · 23 Oct 2024

रामपाल पंथ और उनके अनसुलझे रहस्य #rampaljimaharaj #kabir

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