⬜ Not used yet · 00:00:06:07 – 00:50:48:00 (50:42)
00:00:06:07 तो आपने बहुत लोगों से डिबेट किया। पॉइंट ये है आपने उन सभी के प्रति दुर्भाष नहीं किया। अगर लेटेस्ट डिबेट आप देखते आप आपके हैं योगदा वाले को कोई प्रतिक्रिया नहीं किया। ये वीडियो में है। ऐसे निग्रहाचार्य जी ने क्या कह दिया? आप ग्रहचार्य जी के प्रति इतना बातें बातें बोलते हैं। हम आपने एक आपत्ति जताई है कि भाई हमने भागवतानंद के साथ तू तड़ाक क्यों की? जिस पर कि मैंने कहा कि तू तड़ाक उसी ने प्रारंभ की थी। हमने तो ऐसा प्रकट करते हुए कि कुछ चीजों के बारे में उसे पूरी जानकारी नहीं है और उसने वीडियो बना दिए हैं तो हम वह जानकारियां ठीक कर दे रहे हैं और अब आगे इस मामले में इस बात को खींचा ना जाए ऐसा कहते हुए हमने वीडियो बनाया
00:01:09:25 में तुमको क्या लगता है कि निर्विकल्पानंद वहां इतने साल से क्या सेटिंग कर रहा है दिव्य चैतन्य को बनाने के लिए शंकराचार्य दिव्य चैतन्य जी अगर शंकराचार्य बन भी जाते हैं या बनने का चिंतन करते भी हैं ना तो इतने टुकड़े करके फेंकवा दिए जाएंगे निर्विकल्पानंद के गैंग के द्वारा कि पता नहीं चलेगा दिव्य चैतन्य जी कहां गए सोच लो कि 100 ऋषिकेश ब्रह्मचारी मरे होंगे तब एक निर्विकल्पानंद पैदा हुआ होगा कि स्वामी निर्विकल्पानंद सरस्वती का जिन महिलाओं के साथ यह अवैध संबंध बताया जाता है उनमें से बहुत सी महिलाओं के पुत्रवधुओं ने ही अपनी मर्यादा की सीमा में रहते हुए हमको परोक्षत यह संदेश भी भिजवाया था और सुनने में तो यह आया है कि वे बच्चों तक को नहीं छोड़ते। ऐसा कोई सन्यासी होता है क्या जिसे काम ने अपना ग्रास बना लिया हो। ऋषिकेश ब्रह्मचारी के विषय में भी हम पूर्व में यह कह चुके हैं कि यह समलैंगिक है और भ्रष्ट भी है। मात्र विचारों से समलैंगिक होना काम लोप होना भी पाप है। किंतु स्वनाम कलंक ब्रह्मचारी जी कृत्यों के रूप में भी अपनी समलैंगिकता का प्रदर्शन कर चुके हैं। पूरी शंकराचार्य जी को अपने क्लच में लेकर उनके भोजन में मिलावट करके उनको गुलाम बन के समान रखते हुए ये सारे संस्थाएं नचाने का प्रयास कर रही हैं। और यही अब इसमें पहली बात तो यही आती है कि मठ के परिकर अगर कोई दुराचरण कर रहे हैं तो क्या इसका कोई प्रमाण है? मेरे पास इसका कोई वीडियो रिकॉर्डिंग या फोटो
00:02:24:28 तो नहीं है दुष्कर्म करते हुए हम बिना प्रमाण के गंभीर निर्णय नहीं ले सकते लेकिन पूरी के ही दीक्षित करीब करीब अभी तक 40 से 50 शिष्यों ने मुझे व्यक्तिगत मिलकर या फोन पर इस बात के बारे में कहा है और 50 परिकरों ने ऐसा कहा 100 परिकरों ने ऐसा कहा उन परिकरों के नाम भी नहीं है और वो 100 लोग कितने [संगीत] क्रेडिबल कितनी उनकी क्रेडिबिलिटी है कितनी नहीं है ये भी सोचने वाली बात है जो बातें हम जान रहे हैं हम बता दी आपको आपको मानना है। आपकी इच्छा नहीं मानना है। आपकी इच्छा आपने स्वयं कई बार आपके ऊपर या आपके संबंधियों के ऊपर लगने वाले आरोपों के संबंध में आरोप लगाने वाले प्रश्न करने वाले की क्रेडिबिलिटी मांगी है। ना आयोजक थे, ना आचार्य थे, ना यजमान थे, ना वहां पर हम लोगों की तरह प्रवक्ता के रूप में आमंत्रित थे, ना जन समुदाय की तरह श्रोता के रूप में आमंत्रित थे। कुछ थे ही नहीं लेकिन वकारत सबसे अधिक यही लोग कर रहे हैं। वहां पर श्रवण किया ना आयोजन किया ना कथन किया। विषय वस्तु मामले से अवगत है नहीं। 500 किलोमीटर दूर बैठकर केवल विवाद को हवा दे रहे हैं और अशांति फैला रहे हैं। हां
00:03:40:00 तो बताओ ना उस डॉक्टर का नाम बताओ। मैं भी जानना चाहता हूं। आधिकारिक व्यक्ति हो ना प्रतिनिधि हो ना शंकराचार्य के द्वारा तुम कोई राजदूत या अधिवक्ता के रूप में प्रस्तुत किए गए हो ना पूरी मठ के किसी योग्य पद पर तुम अधिकारी के रूप में बैठे हो क्या तुम तो पूरी मठ पर आरोप लगाते समय कौन व्यक्ति है कहने वाला कौन है आरोप लगाने वाला किसने कब कहां किसको कैसे देखा इन डिटेल्स के बिना इस तरह से की जाने वाली बातों का इस तरह के आरोपों का क्या महत्व है केवल बयानबाजी तो ऐसी स्थिति में तो केवल बयानबाजी हो सकती है ना महाराज ऐसी स्थिति में ना कोई ठोस परिणाम देखने को मिलेगा ना कोई ठोस शोधन देखने को मिलेगा
00:04:28:28 कि आचार्य रामशंकर शुक्ल जी ने हमको 3 साल पहले ही यह बात बताई थी कि पूरी के शंकराचार्य को भोजन में कुछ मिलावट करके ये लोग बहुत समय से दे रहे हैं। उनकी मानसिकता और उनके व्यक्तित्व को अपने नियंत्रण में रखने के लिए कब बताया था? जब हम छत्तीसगढ़ के कोलारिया ग्राम में कथा सुधा कार्यक्रम में थे तो 12 फरवरी 2022 को आचार्य रामशंकर शुक्ल जी ने मुझे व्यक्तिगत रूप से बताया था। फोन में भी बात हुई थी कि ये लोग शंकराचार्य जी के भोजन में आपत्तिजनक मिश्रण कर रहे हैं। परिकर लोग क्या इस प्रकार [संगीत] की कोई बात आपने उससे कही है? हमारा उससे कोई लेनदेन नहीं है। मतलब आपने यह नहीं कहा है कि परिकरों के द्वारा भोजन मिलाके उनको कुछ दिया जा रहा है। कुछ नहीं है। ये [संगीत] अनावश्यक अनर्गल प्रलाप ज्यादा करते हैं। ये इनका प्रलाप है। ये अनावश्यक लोगों की कही बातों को बाग जाल बना करके जाल बिछा करके ऊटपटांग की बात कहना ये शोभनीय नहीं है। ये अशोभनीय बातें हैं। फिर हमारा नाम आप बार-बार क्यों जोड़ते हो? हम तो आपसे कोई बात [संगीत] नहीं कर रहे। आपने पुस्तक भी भेजी तो हमने धन्यवाद भी नहीं दिया। क्यों? क्योंकि आपने प्रथम वीडियो में ऐसी बातें सब कह दी जहां कि हमने उस बात को कोई ऐसा [संगीत] कुछ
00:05:48:28 जिस स्त्री की बात चल रही थी जिसका नाम विजयाश्री बताया गया था। मैं इस स्त्री को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानता हूं। तो इस लड़की का Facebook हैंडल भी हमने बता दिया और इसका एक पडकास्ट का लिंक भी दे दिया। वहां आप स्पष्ट सुन सकते हैं कि यह विदेश इत्यादि भी आती जाती रही है। वहां से भी इसका उठना बैठना है। उसको सपोर्ट कौन कर रहा है? भाई मेसोनिक फ्री मैसरी के द्वारा फंडेड इंटरनेशनल योगा फेडरेशन। समझ में आ रहा है तुमको कनेक्शन? इससे पहले भी मृच्छराज से जुड़ी हुई संस्थाओं ने गोवर्धन मठ में घुसपैठ का व्यापक प्रभाव प्रयास किया था। मैसोरिक टेंपल शिकागो में 1893 में स्थापित इंटरनेशनल योगा फ्रेटरनिटी उर्फ़ इंटरनेशनल योगा फेडरेशन के द्वारा सपोर्ट की गई और फंडेड की गई संस्था युवाएसएफ की उत्तराखंड स्टेट प्रेसिडेंट मंच साझा किसके साथ कर रही है पूरी शंकराचार्य जी के साथ बहुत से लोग ऐसे विदेश के जुड़े हुए हैं यहां पर जिन्होंने जो इंटरनेशनल योगा फेडरेशन की स्थापना या उसके विस्तार में मदद की फेमस के जो डायरेक्ट सदस्य थे उन लोगों ने [संगीत] यही इंटरनेशनल योगा फेडरेशन अप्रूव करता है यूआईएसएफ को और इसी यूआईएसएफ की जो है स्टेट चीफ है उत्तराखंड में रिदिम कपूर या रिदिम कपूर का उपनाम है यहां पर विजयश्री आपको क्या लगता है आप अभी ये बैठे हो यहां पे आप किसी मल्टीीनेशनल [संगीत] कंपनी में जॉब कर रहे हो क्या आप गारंटी के साथ
00:07:04:02 कह सकते [संगीत] हो कि उस मल्टीीनेशनल कंपनी का कोई भी संपर्क पूरी मिशन से नहीं होगा हो सकता है आपने इस बारे में जानकारी तो की नहीं है। तो अगर आप जिस कंपनी में जॉब कर रहे हो अपनी आजीविकोपार्जन के लिए मल्टीीनेशनल कंपनी में अगर उसका कनेक्शन उस कंपनी का कनेक्शन अगर प्रीशंस नाम की संस्था से हो गया इसका मतलब आप जो है प्रीशंस के एजेंट हैं। हम लोग YouTube पर कार्य कर रहे हैं। और जिनका भी चैनल मोनेटाइज हो चुका है वो YouTube के पार्टनर पार्टनर हैं। ठीक है? जो भी Google एडसेंस से पैसे ले रहे हैं YouTube के वो प्रोग्राम के द्वारा वो सब Google के भी पार्टनर है। ठीक है? तो हम क्योंकि ऑफिशियली हम तो ऑफिशियली कनेक्टेड है तो जो भी कोई YouTube वो कर रहा है वो YouTube का पार्टनर है। और क्योंकि वो YouTube का पार्टनर है तो क्या आप गारंटी के साथ कह सकते हो कि YouTube का फ्री मेंशन से कोई संबंध नहीं होगा? कह सकते हो? तो इसका मतलब YouTube का जो जो व्यक्ति पार्टनर है वो सब प्रीमेशंस के एजेंट हैं। क्या हम यह
00:08:19:08 माने कि अगर मेरे पास आज एक सामान्य व्यक्ति के पास अगर कोई जॉब ऑफर आता है अगर कोई ऐसा ऐसी चीज आती है आप हमारे साथ कार्य कर लो तो हम एक सतही स्तर पर उसकी जांच करते हैं। पर हम यह नहीं जान पाते कि भैया उसका अंतरंग कितना ज्यादा अंतरंग उसके संबंध कहां है। ठीक है। मेरे जानने वाले कोई थे SPL कंपनी है दवाइयों की। उसके बहुत बड़े जनरल मैनेजर बन गए। बहुत बड़े पोस्ट पर बन गए। बहुत दिनों के बाद उन्हें पता चला कि उस SPL कंपनी का जो ओनर है वो तो मुस्लिम है।
00:08:58:14 हां हिमालय हिमालय कंपनी की आप लोग दवाइयां खरीदते हो, खाते हो, पीते हो या कई लोग ऐसे होंगे जिनका मेडिकल स्टोर होगा और उनके मेडिकल स्टोर पर वो हिमालय कंपनी की दवाइयां रखी होंगी और हिमालय कंपनी मुस्लिम के द्वारा संचालित है। ऐसा बताया जाता है कि वो अपने यहां पर हिंदुओं को नौकरी तक नहीं देता कि हम किसी ना किसी प्रकार से सब आपस में कनेक्टेड हैं। सब किसी ना किसी प्रकार से सबका संबंध एक दूसरे से इस तरह के विरोधाभास से निकल आएगा। ठीक है? जिस व्यक्ति का आप फ्री मिशन से होना सिद्ध कर रहे हो नकारात्मक रूप में। ठीक है? उस व्यक्ति का सनातन परंपरा प्राप्त आचार से जुड़ा होना भी तो सिद्ध है। तो यदि वह सनातन विरुद्ध कार्य करते हुए नहीं दिख रहा है तो यह क्यों ना माना जाए कि वो शंकर परंपरा के द्वारा फ्री में मिशन में भेजा गया एजेंट है। तो ऐसे में किस तरह का प्रमाण हमें आवश्यक होगा यह सिद्ध करने के लिए कि ये भाई फ्री मिशंस के उसी एजेंडे के लिए कार्यरत है जो एजेंडा उसका मूलभूत एजेंडा है फ्री मेंशन का। तो हमें प्रमाण ऐसा चाहिए होगा जिसमें कि ऐसा सिद्ध हो सके कि इनको प्री नेशंस के उसी कार्य
00:10:13:22 के लिए उसी कार्य के लिए नियुक्त किया गया था जो कार्य सनातन धर्म के विरोध में है। जो कार्य अधर्म के पक्ष में है। वरना इस तरह से अगर पीछे चलते चले जाएंगे तो शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति मिले जिसका संपर्क किसी ना किसी विवादास्पद संस्था व्यक्ति इत्यादि से ना रिधिमा कपूर के बहुत से ऐसे फोटो आपको सार्वजनिक मिल जाएंगे जहां ये कुत्ते को प्रेम कर रही है। कुत्ते के साथ लिफ्ट टू लिफ्ट किस कर रही है। कुत्ते के ओठ के साथ अपने ओठ को लगाकर बाकायदा किस कर रही है। और रिद्धिमा कपूर का एक फोटो है। जींस टॉप पहनी हुई स्त्री और कुत्ते को लिफ्ट टू लिफ्ट किस दे रही है। मुंह से मुंह लगाकर चुम्मा ले रही है। ऐसी स्त्री पूरी शंकराचार्य जी के साथ में साझा कर रही है। बताओ भूतकाल के पूर्व के वीडियोस है तो ये लांछन लगाना कि ऐसा कर रही है ये गलत है। और जब भूतकाल की बात आ गई तो हमने बता दिया कि व्यक्ति जब दिशाहीन है तो दिशाहीन ही तो दिशा पे आएगा। शंकर से दूर है वही तो शंकर के पास आएगा। सार्वभौम सिद्धांतों को नहीं जानने वाला ही तो सार्वभौम सिद्धांतों को जानेगा। हां कोई व्यक्ति अगर भूतकाल
00:11:28:28 में गलती से विदेश गमन कर लिया हो जिसको विदेश के गन का दोष ज्ञात ना हो और अब वो विदेश गमन की वकालत नहीं करता है कि हां बहुत अच्छा बहुत अच्छा गर्व में अनुभव नहीं करता ग्लानी अनुभव करता है वो संशय में हम उसका बहिष्कार नहीं करते हम ये नहीं कहते कि तुम जो है सो यहां से दूर भाग जाओ मेरी नजरों से हां अगर वो वकालत अभी भी कर रहा है तब तो भैया दूर जाओ लेकिन अगर वो वकालत नहीं कर रहा है गुरु जी हो गया गलती अब क्या करें [संगीत] इतिहास था बदल नहीं सकते लेकिन गलत है मुझे ग्लानी है पश्चाताप है लेकिन अब क्या करें तब उसको विविध प्रकार के व्रत का भगवान नाम संकीर्तन का उपदेश सदाचरण का मैं करता हूं जो तुम्हारे अधिकार बचा भैया वो करो।
00:12:07:01 मैं इसी वीडियो में एक वीडियो अटैच करूंगा आप लोगों के लिए जिसमें आप देखिएगा कैसे पूरी के शंकराचार्य जी के मंच पर वो स्त्री बैठी हुई है और सम्मान के साथ बस बस क्या ये स्त्री आपको विजयश्री दिख रही है? कोई है जो आ के कोई है जो आ के ये कहेगा कि ये जो स्त्री है ये विजय श्री है। ये देखिए ये कौन से एंगल से आपको यही दिख रही है? वही मात्र शक्ति लग रही है जो ये बैठी हैं।
00:12:46:26 जबकि पूरी के शंकराचार्य जी स्वयं कहते हैं कि यम नियम निरपेक्ष योग करने वाले व्यापारी सब जगह घुस गए हैं। एक शिक्षिका के रूप में जो शारीरिक आसन होते हैं आध्यात्मिक लेवल पर नहीं शारीरिक लेवल पर सिखाने की अनुमति विजय जी ने स्वयं जगतगुरु शंकराचार्य भगवान से प्राप्त की है क्योंकि उन्होंने अपने पूरे जीवन क्योंकि एकमात्र उनका आज भी पार्जन का माध्यम यही था यही है तो उनके पास और अन्य कोई विकल्प नहीं है ठीक है और उन्होंने अपने पूरे जीवन इसी विद्या को सीखने में संघर्ष किया है। वो आध्यात्मिक लेवल पर योगाचार्य नहीं है। वो [संगीत] केवल भौतिक लेवल पर योग सिखाने वाली एक तरीके से व्यायाम [संगीत] प्रशिक्षिका मात्र है। ठीक है? और उस और उसके लिए भी उसके लिए भी उन्होंने गुरुदेव से अनुमति दी है क्योंकि ये संक्रमण काल है। हम बिल्कुल जीरो से अपने आप को सही करके वापस नहीं आ सकते। अब इनके पास वो समय इनका पूरा परिवार इन पर निर्भर करता है। इनके पास अब वो समय नहीं है कि पहले जाकर के पढ़ाई करें दूसरी और फिर उस पढ़ाई के में जो है कुशलता प्राप्त करें और फिर से दोबारा ये रीस्ट करें
00:14:01:27 कि भैया अब जो है हम ये वो नहीं है। ठीक है? पहली बात तो ये। दूसरी बात अगर यह है भी अशास्त्रीय तो भाई यह नहीं कह रही है कि यह जो है कोई शास्त्रीय योगाचार्य है या ये कहीं से किसी परंपरा प्राप्त उससे सर्टिफाइड है कि योग सिखा रही है भाई ये जैसे कई ब्राह्मण ऐसे हैं जिनको दवाई नहीं बेचनी चाहिए परचून की दुकान नहीं करनी चाहिए मगर वो कर रहे हैं विषम परिस्थितियों में विपरीत परिस्थितियों में तो शास्त्र के वह नियम जो मौलिक है उनका परित्याग तो नहीं कर सकते हैं जैसे कि सदाचार संयम व्यभचार ना करो और प्राणी पीड़न ना करो मदिरापान ना करो ऐसे नियम जो मूलभूत हैं फंडामेंटल कहते हैं ना मूलभूत नियम का परित्याग तो नहीं हो सकता है जिसमें वरना मोचित जो मौलिक कर्तव्य है उसमें कोई समझौता नहीं हो सकता है उसमें तो प्रयत्नपूर्वक अधिकाधिक आपको पालन करना है। कुछ ऐसे नियम जो मौलिक तो नहीं है, लेकिन लोकोपकारी हैं। यदि आपके मन में यह ग्लानी हो रही है कि उस नियम का हम पालन नहीं कर पा रहे हैं। तो इसका अर्थ है कि आप शोधन की इच्छा रखते हैं। और शक्य नियम ही व्यक्ति के लिए ग्राह्य होता है। यहां तक कि जिन व्रतों में कहा कि निर्जला करें। वहां भी अपवाद दिया कि शक स्थिति में करें। मर ना जावे
00:15:17:01 शास्त्र का नाम लेकर। विजय श्री नाम के लड़के ने कुंभ शिविर की बिक्री पूरी शंकराचार्य जी हां ₹55000 प्रति व्यक्ति की पहली बात तो गुरुदेव का नाम लिया नहीं मगर इन्होंने किया क्या था कुंभ में जो इनकी डेढ़ लाख की फॉलोइंग वाला पेज है उससे प्रभावित होकर किसी व्यापारी ने इनसे संपर्क किया कि हम लोग वहां पर शिविर अपने लगा रहे हैं जिनको हम जिनका हम किराया लेंगे अच्छा अच्छा और वो उन शिविरों का आप अपने सोशल मीडिया हैंडल से अपने सोशल मीडिया हैंडल से प्रचार प्रसार करिए। ठीक है? और उस प्रचार प्रसार को करने का इन्हें एक प्रॉपर उस कंपनी की ओर से उस व्यापारिक संगठन की ओर से एक मूल्य मिलने वाला था। ठीक है? तो इन्होंने भाई इनका आज भी पार्जन का माध्यम भी है ना वो तो इन्होंने उस कंपनी [संगीत] कंपनी से इन्होंने वो किया कि इन्होंने उसका अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म से प्रचारित किया मगर ऐसा नहीं है कि कहीं लिखा हो कि शंकराचार्य के शिविर में आपको जगह मिलेगी।
00:16:32:24 ठीक है। जी मगर इन्होंने किस तरीके से अपने उस आर्थिक उद्देश्य में भी अपनी गुरु निष्ठा दिखाई वो मैं आपको बता रहा हूं। जो चार लोग विदेश जात्यादी से आए थे जो उनमें से एक व्यक्ति आज की डेट में गुरुदेव का शिष्य है तो ये गलत किया इन्होंने और रिदमम कपूर को और रिदमम कपूर जो है वह पूरी शंकराचार्य जी के साथ मंच साझा कर रही है। उनका ब्रांड बनाकर उनके नाम का उपयोग करके खूब पैसा बना रही है। यह सब चल रहा है। के शंकराचार्य के शिष्यों के मध्य पैसा लेकर योगा क्लास देने के नाम पर ये पूरा का पूरा एक अपना इकोनमिक कल्ट तैयार कर रही है। गुरुदेव के नाम का व्यापार इन्होंने क्या किया? इन्होंने अपनी कौन सी प्रचार सामग्री में यह कहा कि आपको शंकराचार्य की शिक्षा जो है वो कराने वाली है योग। इन्होंने अपने कौन सी प्रचार सामग्री में शंकराचार्य का फोटो लगा दिया? क्या यह अपने आप को शंकराचार्य की शिष्या के रूप में बताते हुए अपनी चीजों को जो भी यह कर रही है धनोपार्जन का प्रयास करती है क्या? पहली बात तो इसका कोई प्रमाण दिखाए कि क्या इन्होंने ऐसा
00:17:48:02 किया जिससे झड़कता है गुरुदेव के नाम का उपयोग कर रही है। है ना? दूसरी बात यह है कि क्या गुरुदेव के संपर्क में आने से पहले इनका जो आजीविकोपार्जन था वो बंद था? वो चल नहीं रहा था। योगा क्लासेस नहीं हो रही थी। मैं तो यह कहूंगा कि इन्होंने अगर उस दृष्टिकोण से देखा जाए भौतिक वादिता के दृष्टिकोण से तो इन्होंने तो अपने बसे बसाए घर में आग लगाई है। मनुवाद के सिद्धांतों को अपने प्लेटफार्म पर लाके। कौन से लोग हैं जो शंकराचार्य का नाम सुनकर के मन जो मनुवाद का विरोध वो आज जो मनुवाद से जुड़े नहीं मनुवाद को जानते नहीं है। सनातन को जानते नहीं है। कौन से लोग हैं जो शंकराचार्य का नाम सुनकर के प्रभावित होंगे?
00:18:35:10 बल्कि बुरा मानेंगे। हाउ डेयर यू? भगवान कभी भेद कर सकता है क्या पुरुष और स्त्री में? तुमने कहा कैसे? गायत्री मंत्र नहीं जप सकती। मैं तो जप लूंगी। और बुरा माना बुरा माना इनके जाकर के कमेंट्स देखिए कितना विरोध हुआ इनको। तब इनको पता चला कि विरोध होता क्या है? क्योंकि उससे पहले तक मनुवादी नहीं थी। तो प्यार ही प्यार मिलता था जनता का। हां। बहुत अच्छे। सुपर। वाओ। ये सब होता था। स्त्री स्त्रियों का जन्म हो रहा है तो लोग पहुंच जाते हैं वहां पर वाह कांग्रेट्स कांग्रेचुलेशन ये सब होता है ना तो यही सब होता था अब जब इन्होंने मनुवाद [संगीत] की चीजें बताई थोड़ी सी तो इनका विरोध हुआ तो इन्होंने तो अपने बसे बसाए घर में आग लगाई कहां से गुरुदेव का नाम लेकर के इनका प्रचार हो गया बढ़ गया इनका मामला और कौन से इन्होंने पोस्टर में जो है लिख दिया कि शंकराचार्य जी जो है वो है शंकराचार्य जी के हम शिष्य और हम तुम्हें योग सिखाने वाले हैं।
00:19:42:07 पहली बात उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति फ्रीशंस से जुड़ा हो सकता है। कोई भी व्यक्ति अपना [संगीत] कहीं से लिंक निकाल लेगा किसी का। तो बात ऐसी नहीं है कि कोई व्यक्ति कहीं जुड़ा हुआ है तो उसके लिए काम करेगा। ऐसा उनका पक्ष था। अब भाई जो व्यक्ति जुड़ा हुआ है वह काम नहीं कर रहा है तो क्या ऐसे लोग काम करेंगे जो जुड़े हुए नहीं हैं? दूसरी बात यह है कि जो व्यक्ति जुड़ा हुआ है वह जेनिटर है, रिसेप्शनिस्ट है, वर्कर है, झाड़ू पोछा लगाने वाला सिक्योरिटी गार्ड है। ऐसा तो नहीं है। बल्कि फ्रीशंस [संगीत] के जो उच्चाधिकारी रह चुके हैं, जो मास्टर मेसंस रह चुके हैं। ऐसे लोगों ने जिस संस्था को बनाया जो खुलेआम मेसोनिक ब्रांड लोगों और विचारधारा को प्रमोट करती है। जैसे कि आईवाईएफ जैसी संस्थाएं और उन आईवाईएफ जैसी संस्थाओं से प्रमोट किए जाने वाले ये रिदमम कपूर जैसे लोग तो यहां पर आप केवल काम कर रहे हैं। ऐसी बात नहीं है। वहां पर आपको रिसेप्शनिस्ट नहीं लगे हैं। कोई सिक्योरिटी गार्ड नहीं लगे हैं। जबकि जो अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स पर फ्री मेंशनंस के विषय में खुलेआम प्रचारात्मक शैली को अपनाते हुए मैसोनिक आइडियाज को एडवोकेट करते हैं। ऐसी संस्थाओं की हम बात कर रहे हैं ना कि किसी सामान्य वर्कर की बात कर रहे हैं। किसी जेनिर रिसेप्शनिस्ट या सिक्योरिटी गार्ड की हम बात नहीं कर रहे हैं। तो प्रॉब्लम यह आएगी कि अगर कोई किसी संस्था से जुड़ा कोई भी किसी संस्था से जुड़ा हुआ है तो उसमें
00:20:57:13 वह किस पद पर कार्यरत होना चाहिए यह कहां पर सिद्धांत मिलेगा कि भगवतानंद जी के द्वारा डिक्लेअर कर देने पर मान लिया जाए कि इस पद पर यदि उस संस्था के द्वारा नियुक्त होगा व्यक्ति तो यह मान लिया जाए कि वो उसी के लिए कार्यरत कर रहा है और उससे थोड़ा सा नीचे वाले पद पर जैसे आपने उदाहरण दिया कि वो कोई इसका रिसेप्शनिस्ट थोड़ी ना है। वो कोई उसका यह थोड़ी ना है। तो थोड़ा सा उससे नीचे वाले पद पर अगर कार्यरत होगा तो वह उसके लिए कार्य नहीं कर रहा है। यह सिद्धांत कहां से प्रतिपादित होता है? इसको हम कैसे मान ले? तेरे लिए कर्तव्य और अकर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है। आपको लगता है कि अगर उस संस्था से कनेक्टिंग किसी संस्था के द्वारा किसी पद पर जो आपके अनुसार है वो पद वो क्या था स्पोर्ट्स प्रेसिडेंट या योग योग प्रेसिडेंट मुझे याद नहीं उस पद का नाम। तो आपके अनुसार उस पद पर अगर कोई बैठा है तो वो प्रीमेशन के लिए कार्य कर रहा है। मगर उसी संस्था के रिसेप्शन पर कोई अगर बैठा है तो वो उस संस्था का एजेंट नहीं है। तो ये सनातन सिद्धांत नहीं है। अगर है तो आप मुझे दे दीजिए। मैं मान लूंगा।
00:22:07:27 ऐसा नहीं कि एक मात्र प्रमाण है और भी बहुत कुछ प्रमाण है और मैं आशा करता हूं ये आपके पास पहले पहुंच चुका होगा। लेकिन बाकी लोगों की सुविधा के लिए हम इला दे रहे हैं। तो जितना प्रमाण चिल्लाओगे तुम्हारी ही फजीहत होगी। तुम्हारी ही बदनामी होगी। फिर भी तुमने मांगा है तो एक सैंपल दे दे रहा हूं। आपने जो प्रमाण दिखाए हैं इससे हम किसी के ऊपर शक कर सकते हैं। बिल्कुल बात सही है। शक जा सकता है। डाउट हो सकता है मगर सिद्ध कुछ नहीं हो सकता। ठीक है? तुमको ज्यादा मन है तुम स्वयं जाकर मठ में रहो। देखो उनका कनेक्शन समझो। और जब हम फिर चीजों को जोड़ेंगे कि हम वहां जा रहे हैं। हम स्वयं वहां रह रहे हैं। और भी लोग वहां रह रहे हैं। वहां पर स्त्री भी रह रही है। हम लोग कुंभ में रह रहे हैं। हम लोग वहां पर रह रहे हैं। हमको ऐसी चीजें जब नहीं दिख रही और जब हमारे पूज्य गुरुदेव जो है जो हमारे लिए प्रमाण है वो उनके द्वारा संरक्षित हैं। जो अब बात जब ये आती है कि हम लड़ने मरने निकले हैं। जान देने निकले हैं। कुछ भी हो जाए हम ये बात पहुंचा कर ही रहेंगे। तो हम ऐसी चीज के लिए लड़ते मरते हैं जो अकाट्य हो। अगर कोई व्यक्ति गलत है तो उसके लिए आप ठोस सबूत लाइए। ठोस अकाट्य सबूत मगर वो नहीं है। काम चलाओ चीजें जिससे आप हाहाकार तो मचवा दोगे। मगर जब हम कहीं वास्तविकता में उन सबूतों के आधार
00:23:23:06 पर लड़ने खड़े होंगे तो हमें पराजय का मुख देखना पड़ेगा। हमने शिवशु नारायण द्विवेदी जी के समक्ष प्रस्ताव रखा है सोशल मीडिया के माध्यम से। हमने उन्हें हमारे साथ लाइव आकर उन्हीं के चैनल पर अह अपने इस प्रासंगिक पीठगत विवादों पर चर्चा करने का प्रस्ताव दिया है। जो इस विषय पर चर्चा जो है व्यक्तिगत रूप से अपेक्षित है। नीतिपूर्ण है और इस तरह से ठीक नहीं है कि हम लोग किसी मंच पर आकर के तो वो हमें ठीक नहीं लगा। इसने मुझे जो लाइव आने का ऑफर दिया था वो क्या था मालूम है कि कौन समलैंगिक है कौन नहीं है यह चर्चा लाइव डिस्कशन में करो कौन वैश्या है कौन वैश्या नहीं है ये चर्चा लाइव डिस्कशन में करो ये ठीक है आज ये जो हो रहा है अब मुक्तेश्वर जी महाराज जी से लोग सवाल पूछ रहे हैं माइक ले ले के अच्छा लगता है सुनने में भले ही वो निर्दोष है मगर ये सब तर्क वितर्क जो पर्दे पर होते हैं तो अच्छे लगते हैं क्या मैंने वही भाव दर्शाया साथ ही साथ ये भाव दर्शाया कि भाई तुम गुरुदेव का मेरे वो कर चुके तो मैं
00:24:38:14 समानांतर रूप से स्वहार तरीके से आपके साथ निभा नहीं पाऊंगा तो आप दूर रहो वो तीसरा वाला जो पक्ष है जीवा ना काट सको तो भगा दो भगा ना सको तो दूर रहो तो मैंने दूर रहना तो तीन दिन लगातार वो है ना बिन ना मानस जल्दी जड़ गए तीन दिन भीत भोले राम सप्ता भय बिन होए ना प्रीत तीन दिन लगातार मैंने इससे विनम्रता पूर्वक कहा था कि भाई भाई आप अपना दूर रहो। आप अपना कार्य करते रहो। खामा खाकी चीजों को मत छेड़ो। मैंने तीन दिन लगातार इससे विनम्र भाव में बात की थी कि अमर्यादित आचरण मत करो। ये सब मत करो। तूक मत करो। दूर रहो। बहुत सारी चीजें हुई थी। इसने मुझको क्या कहा लास्ट में? लाइव बुलाता भैया तो तेरा करियर खा जाते हो। तुम लाइव नहीं बुलाया। ये तुम ग्रह दशा तुम्हारी अच्छी थी। जो विजयाश्री [संगीत] लड़की है उसके प्रति यह व्यक्ति इतना समर्पित हो गया है। विजय तुम्हारे समाज तो कोई योगाचार्य नहीं। तुम्हारी वाणी में तो मुझे स्वामी करपात्री जी की झलक दिखाई पड़ती। चाहे विजय जो है वो अंडरवियर में और ऊपर के ब्रेट में फोटो खिंचाई घूम रही हो क्योंकि विजय श्री के पास ऊपर [संगीत] और नीचे दोनों दृष्टिकोण से हर वो चीज है जो मेरे पास नहीं है। हम जी जैसे महान अह
00:25:55:18 धर्म सम्राट हां हां हां उनके सिद्धांतों का आपने खंडन करने का प्रयास किया प्रयास नहीं प्रयास नहीं खंडन किया प्रयास क्या होता है खंडन किया अब तू तड़ाक और गाली देते हो और अमर ज्यादा शब्दों का प्रयोग करता ये बहुत मैं सुन चुका मैं ऐसा ऐसे ही बोलता हूं और तेरे जैसों के साथ ऐसा ही बोलूंगा [संगीत] जैसे ही इसको पता चला कि शिवश नारायण द्विवेदी अब जो है बैक फुट पे नहीं है। डिफेंसिव नहीं है। अब वो आक्रामक भी है। फ्रंट फुट पे भी है। तब से इसने कन्ने काट लिए। भगवतानंद यदि तुमने निष्ठा पूर्वक माता जी का दूध उत्पादान किया है। यदि आपकी माता जी ने आपको निष्ठा [संगीत] पूर्वक दूध पिलाया है तो आके प्रत्यक्ष वार्ता करो और सिद्ध करो कि विजय श्री फ्री मेंशन से है। विजय श्री के बारे में जो तुमने आक्षेप लगाए हैं वो सत्य हैं। और फिर सिद्ध करो पीठ जो पूरी पीठ के परिकर हैं उन पर जो [संगीत] आक्षेप तुमने लगाए हैं वो वो सब सत्य हैं। और फिर सिद्ध करो तुम्हारा वो निग्राचार्य वाला पद परंपरा आओ शिवश कह रहा था लाय भाव लाए भाव जब क्या करो लाइव आकर तो अपने
00:27:10:21 संप्रदाय की प्रामाणिकता सिद्ध करो तुम हो कौन भाई तुम्हारे सामने हम संप्रदाय की प्रामाणिकता सिद्ध करें हो क्या तुम कहो कि शंकराचार्य दीक्षित शिष्य हैं तो 1 लाख दीक्षित शिष्य हैं तो क्या हम सबसे पर्सनली बात करते चलें तो भगवतानंद हमने तुमसे पहले ही कहा था कि इस विवाद को मत मत बढ़ाओ आगे। अब प्रत्यक्ष रूप से हमने यही दर्शाया था। मत बढ़ाओ, मत बढ़ाओ। हो गई ना? कहा था हमने खेल अच्छा है तुम्हारा। बहुत अच्छा है। सालों से खेल रहे हो। इस बार भी खेल अच्छा था। आदमी गलत चुन लिया। तो माता जी ने अगर निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया ना तो ये बहाने बनाने बंद करो और प्रत्यक्ष वार्ता करने का साहस प्रकट करो। प्रत्यक्ष वार्ता होगी। तो दृश्य बदल जाएगा।
00:28:10:21 ऐसा नहीं कि एक मात्र प्रमाण है और भी बहुत कुछ प्रमाण है। बाकी जितने लोगों को ऋषिकेश ब्रह्मचारी ने धमकी दी है जितने लोगों के सामने इस प्रकार के समलैंगिक गतिविधियां की है वो सारे लोग भी हमारे संपर्क में हैं और सारे लोगों के पास प्रमाण सुरक्षित हैं। अरे भाई आपने खुद क्लेम किया है ना कि ये केवल सैंपल के रूप में आपने प्रस्तुत किया है। बाकी प्रमाण जो है ठोस और साक्ष्य साक्षी वो सब आपके पास सुरक्षित हैं। तो क्यों नहीं प्रस्तुत कर दिया आपने उन प्रमाणों को उन साक्ष्यों को अब कीचड़ वाली होली की बात करते हैं तो जिस तरह से उसको लेकर के चवा उड़ाया गया है कि रगड़ रगड़ के होली खेली गई स्त्रियों के बीच भाई शास्त्रों में माताओं को बहनों को देवी कहा गया है माता देवी होती है बहन देवी होती है जहां पर वो होली खेली जा रही है। वहां उनकी माताएं हैं, बहने हैं और वह उनके साथ होली खेल रही हैं। जबकि वह शांत होकर के शांतित के साथ बैठे हुए हैं। यही नहीं स्वयं जगतगुरु शंकराचार्य गुरुदेव भी वहां पर विराजमान हैं। देख रहे हैं। और तो और उस दृश्य को कई पूरी पीठ के समर्थक YouTube
00:29:25:25 चैनल्स के द्वारा प्रचारित भी किया गया। और उस बात को उस दृश्य को कितना उपासात्मक रूप से आपने आरोप लगाए 50 और उनमें से केवल दो के समर्थन में तीन साल पुरानी ऐसी सामग्री प्रस्तुत की जिससे कुछ भी सिद्ध नहीं होता है। केवल उसके नाम पर ढिंढोरा पीटा गया है और ऐसी सामग्री का समर्थन लेते हुए आप अपने बाकी के 48 जो आरोप है उनकी पुष्टि करना चाह रहे हो। रिधिमा कपूर के बहुत से ऐसे फोटो आपको सार्वजनिक मिल जाएंगे जहां ये कुत्ते [संगीत] को प्रेम कर रही है। कुत्ते के साथ स्पर्श कर रही है। और इतना ही नहीं कुत्ते के साथ लिफ्ट टू लिप [संगीत] किस कर रही है। कुत्ते के ओठ के साथ अपने ओठ को लगाकर बाकायदा किस कर रही है। कुत्ते को लिफ्ट [संगीत] टू लिप किस दे रही है। मुंह से मुंह लगाकर चुम्मा ले रही है। वो चुम्मा का फोटो है। ये कह रहा हूं मैं कोर्ट में तुम्हें बुलाऊंगा। मैं कोर्ट में बुलाऊंगा तुम्हें। तुम चुंबक सिद्ध करोगे ना उसे कितना अंधभक्ति करोगे भाई एक महिला अपने कुत्ते के साथ जब वो अज्ञानी है पुराने जीवन में अच्छा मैं और वो उसको दुलार कर रही है तो उसको तुम चुम्मा कह रहे हो
00:30:40:28 इसके लिए मैं क्षमा चाहता हूं इसके लिए मैं क्षमा चाहता हूं पूरी के शंकराचार्य जी के कोई परिककर है जिन पर उनकी मात्र तुल्य मातृ शक्तियां है ना महिलाएं वो बैठे हुए हैं एक जगह और वो जो है पानी डाल रही है होली के रंग वाला हम इस व्यक्ति ने क्या कहा निर्लज्जता के साथ कि अंग मर्दन कर कर के होली खेली जा रही है हम और विद्या भास्कर जी महाराज को एक मात्र मात्र शक्ति स्पर्श पूर्वक माला पहना रही है तब ये व्यक्ति चुप रहता है।
00:32:53:03 तब नहीं कहता कि अंग मर्दन कर करके जो है माला पहनाई जा रही है। फिर भी यदि इसको ऐसा लग रहा है कि शास्त्र का वहां पर वो हो रहा है उल्लंघन वहां पूरी के शंकराचार्य बैठे हैं और भी परिकर बैठे हैं। वहां पर ये बोल रहा है निर्लज्जता के साथ इसको होश नहीं अब क्यों नहीं कर रहा निग्रह अब क्यों तूती बंद हो गई इसकी इसीलिए हो गई निग्रह इसका हो गया है इसीलिए चुप है अभी कुछ दिनों पूर्व भागतानंद ने एक वीडियो निर्गत किया था जिसमें उसने यह बात कही थी कि जो लोग पीएन मिश्र जी के विषय में ऐसे लोग हैं जो सांकर पीठ से संबंध हैं और जिनकी जाति के लिए इसने संघर्ष किया जिनकी जाति को सिद्ध करने के लिए जिनके ब्राह्मणत्व को सिद्ध करने के लिए इसने संघर्ष किया वही लोग आज पीएन मिश्र जी वाले विषय में यदि चुप हैं तो जो ऐसा कर रहे हैं यानी मौन धारण किए हुए हैं वो लोग माता का भ्रूण खाने वाले पापी हैं। ऐसा उसने कहा था। कुछ दिनों पूर्व कुछ शब्दों का हेरफेर हो सकता है। पर लगभग यही बात
00:34:08:04 थी। अब इसमें एक बात और है कि जो माता का भ्रूण खाने वाले की उपमा जो है ज्योतिष पीठ वाले महाराज जी को ठीक नहीं लगी और इस बात को लेकर वो भागतानंद से रुष्ट हैं। अब भागतानंद का इसमें यह कहना है कि भाई क्या मैंने नाम लेकर के कही थी वो बात माता के भ्रूण की बात। हमने क्या कहा था? जिनकी जाति के सम्मान के लिए हम खड़े रहे। अगर वह हमारी जाति के सम्मान के लिए शास्त्र के अनुसार नहीं बोलते हैं तो अपनी माता का भ्रूण खाने के पाप के भागीदार होंगे। यह हमने कहा। [संगीत] हमने यहां कहीं अभिमुक्त स्वरानंद जी का नाम नहीं लिया किंतु वह मान लिए कि हमें ही बोला गया है। यद्यपि यह बात सर्ववेदित है कि उसने सांकर पीठ से जुड़े हुए सांकर पीठ के सांकर परंपरा के किस महानुभाव किस व्यक्तित्व के लिए वह वक्तव्य दिया था। यह सभी प्रबुद्ध जन वो जो है वह भली-भांति जानते हैं। पर यदि नाम ना लेने के कारण कुछ भी सिद्ध नहीं होता है तो यह अपने मंतव्यों की सिद्धि नाम लिए बिना कैसे कर लेता है। जैसे कि किसी ने इसको बताया कि जब मैं विद्या भास्कर जी महाराज के यहां गया था तो वहां पर पूरी
00:35:23:13 पीठ के किसी कुछ परिकरों को मोटू और पतलू कहा गया। मगर नाम नहीं लिया गया। पर इसने अपना वीडियो बनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि मोटू और पतलू कहा गया है अमुक अमुक जो पूरी पीठ के जो मुख्य परिकर हैं उनके लिए ये कैसे सिद्ध हुआ भाई शिवश गया था विद्या भास्कर जी के पास चाहिए वहां भी आश्रम के भी कौशले सदन के भी लोगों ने कहा कि भाई वहां तो दो परिकर हैं एक पतला है एक मोटा है और सारा खेल उन्हीं लोगों का है एक मोटे परिकर का और एक पतले परिकर का तो सब जानते हैं कि ऋषिकेश ब्रह्मचारी और निर्विकल्पानंद सरस्वती के कब्जे में किस प्रकार से पूरी के शंकराचार्य जी हैं। अच्छा मैंने अपने वीडियो में यह कहा था कि कुछ आचार्य गण हैं जिनके समक्ष भागतानंद स्तर का एक स्ान के जैसा है जो कोई पालतू स्ान होता है और अपनी आनंद विनोद प्रमोद के लिए आचार्य गण जो है कोई विवादित मामला आता है तो उसके सामने वह मामला डाल के और कहते हैं इसको भागतानंद को भेज दो और फिर हंसते हैं। यह मैंने कहा था। जिस प्रकार से विष्णु भगवान अपनी सैया पर लेट करके और अपने प्रपंच रूपी संसार की लीला को देखकर के आनंद लेते हैं। उसी प्रकार से
00:36:38:16 जिसका स्तर स्ान जैसा है। कुछ कई ऐसे प्रामाणिक आचार्य हैं जिनके समक्ष इसका स्तर स्ान जैसा है। तो वह अपने स्वान के सामने कोई एक ऐसा विवादास्पद मामला फेंक दे फेंक दे फेंक कर और फिर जैसे लोग अपने स्वान के समक्ष कहते हैं टॉमी छू उसका आनंद लेने के लिए उसी प्रकार से आचार्य गण विवादित मामले को भागतानंद के समक्ष डालकर उस दृश्य का आनंद लेते हैं कि अब देखो भागतानंद ऐसी चीजें करेगा जिससे आनंद आएगा। ठीक है? तो मैंने यह बात कही थी। मगर मैंने तो इसमें किसी आचार्य का नाम नहीं लिया था कि भाई वो विद्या भास्कर जी महाराज के समक्ष ही तुम स्वाहान [संगीत] हो या फिर राघवाचार्य जी महाराज के समक्ष ही तुम स्वाहान हो। तो फिर तुमने कैसे डिसाइड किया कि यह बात मैंने विद्या भास्कर जी महाराज या राघवाचार्य जी महाराज को लेकर के ही की है। अच्छा इसको भी छोड़ देते हैं। पूरी पीठ के शंकराचार्य जी ने पूरी पीठ में आने वाली योगाचार्य स्त्री का खंडन किया और उन्होंने एक कटाक्ष किया। योगाचार्य स्त्री कोई आती है यहां पर भी। तो बिना नाम लिए उन्होंने नाम नहीं लिया था। बिना नाम लिए इस व्यक्ति ने ये कैसे मान लिया कि पूरी पीठ में कौन सी स्त्री योग के रूप
00:37:53:18 में योग कराने वाली कौन सी स्त्री आती है ये हम सब जानते हैं और उसका जो है उसको जोड़ दिया विजय श्री सेरी बात यह है हम इसमें पूरी शंकराचार्य जी का भी एक वक्तव्य अटैच करने वाले हैं संलग्न करने वाले हैं सम्मिलित करने वाले हैं जिसमें वो स्पष्ट रूप से शास्त्र विरुद्ध योग [संगीत] अभ्यास सिखाने वाले लोगों की भसना करते हुए कह रहे हैं कि पूरी मठ में भी ऐसे लोगों का आना जाना है ये भी मैं वहां पर अटैच करूंगा [संगीत] और वो भी महिला इत्यादि का वहां पर उन्होंने वर्णन किया हालांकि वहां उन्होंने नाम नहीं लिया है लेकिन पूरी मठ में कौन सी महिला योगाभ्यास सिखाती है और सिखवाते हुए आते जाते रहती है इसके विषय में जानना कोई कठिन बात है। क्या गुरुदेव ने पूरी के शंकराचार्य जी ने वहां पर विजय श्री का नाम लिया था? यह कैसे सिद्ध होता है कि पूरी पीठ में केवल एक वही है जो योग सिखाने वाली महिला है। कैसे सिद्ध होता है? हमारी जानकारी में तो बहुत सी जाती है। यद्यपि मुझे बिल्कुल नहीं पसंद आया वह चित्र जिसमें विद्या भास्कर जी के समानांतर एक व्यंग चित्र बनाया गया था। मगर वहां नाम तो नहीं लिया गया था। फिर तूने कैसे विद्या भास्कर जी महाराज से जोड़ के उस चित्र को प्रस्तुत कर दिया। मतलब तुम जहां चाहो जब चाहो किसी से भी किसी भी वक्तव्य को जोड़ सकते हो। किसी चित्र को जोड़ सकते हो। पर ज्योतिष पीठ के महाराज अगर यह जानते हुए भी सर्वविदित होते हुए भी कि ये मुझ पर कटाक्ष कर रहा है मौन रहें। क्यों?
00:39:09:20 क्योंकि वो तुम्हारे निग्रह में है। निग्रह तुम निग्रह करोगे सबका। अगर सिद्धांत यह है कि नाम नहीं लिया गया है। इसलिए किसी भी कोई भी व्यक्ति अपने मतानुसार उससे जोड़ नहीं सकता। तो तुम नाम लिए बिना कैसे किसी से किसी वक्तव्य को जोड़ देते हो? आचार्य श्री रामचंद्र शुक्ल जी यदि एकांत में इसको यह कहेंगे इसके अनुसार कि पूरी मठ में अमुक अमुक गतिविधियां हो रही हैं तो वह बिल्कुल खरा सत्य होगा। मगर वही आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी यदि सार्वजनिक रूप से यह कह देंगे कि हमने ऐसा कुछ नहीं कहा हमारी जानकारी में ऐसा पूरी मठ में कुछ नहीं हो रहा है तो वो झूठे हैं। भागवतानंद का सिद्धांत क्या है? जो व्यक्ति उसके अनुसार बात करेगा जब बात करेगा वह व्यक्ति सही है। जो व्यक्ति उसके अनुसार बात नहीं करेगा जब भी बात नहीं करेगा वह व्यक्ति झूठा हो सकता है। वह व्यक्ति असत्यवादी हो सकता है। भले ही वह रामानुजाचार्य पीठ पर बैठने
00:40:24:21 वाले राघवाचार्य जी महाराज क्यों ना हो। इस व्यक्ति ने उनके लिए क्या कहा कि राघवाचार्य जी ने पूरी मठ के बारे में हमको ऐसा ऐसा कहा है कि उन्हें शंकराचार्य जी से मिलने नहीं दिया गया। जबकि उसी समय वो यह भी बता रहा है कि अब अगर वह पलट जाए तो भैया हमें नहीं पता। इसका मतलब इसे उन पर भरोसा नहीं है। राघवाचार्य जी पर भी भरोसा नहीं है। हां मगर जिस व्यक्ति पर इसको भरोसा नहीं है उस व्यक्ति की कही हुई बात को आधार बनाते हुए यह लोगों को बदनाम करेगा। यह लोगों पर गंभीर आक्षेप लगाएगा। लेकिन पूरी के शंकराचार्य जी से मिलने का असफल प्रयास तो राघवाचार्य जी भी कर चुके हैं। बात विद्या स्वामी जी ने भी हमको कही। राघवाचार्य स्वामी जी ने भी कही। जबकि ऑन रिकॉर्ड तो राघवाचार्य जी ने पूवी शंकराचार्य जी का विरोध नहीं किया है ना भैया ऑन रिकॉर्ड तो विद्या भास्कर जी ने विरोध नहीं किया है ना लेकिन उनको भी नहीं मिलने दिया गया और ऐसा उन्होंने ही मुझे कहा है। अब अपनी बात से बाद में पलट जाए तो अलग बात है। अब अपनी बात से बाद में पलट जाए तो अलग बात है। अब अपनी बात से बाद में पलट जाए तो अलग बात है। तो आचार्य के पद पर बैठा हुआ कोई वरिष्ठ आचार्य भी उसके भी सत्यवादी अथवा असत्यवादी होने का पैरामीटर क्या है? कि वह भागवतानंद के पक्ष में बोल रहा है या फिर विरोध
00:41:39:22 में। कि कोई व्यक्ति सिद्धांत के पक्ष में काम करे या विपक्ष में काम करे। अगर पर्सनली हमको टारगेट कर रहा है तो कितना भी सही हो उसका हम विरोध करेंगे और अगर नहीं कर रहा है तो कितना भी कुकर्मी हो हम उसका विरोध नहीं करेंगे। ये सेलेक्टिव पॉलिटिक्स होती है। पूरी के शंकराचार्य जी जो वर्णाश्रम व्यवस्था के इतने प्रौढ समर्थक हैं और इतने मुखर होकर निर्भयता पूर्वक शासन के साथ सीधे टकराते हुए ललकारते हैं उनको। वह भी बागेश्वर धाम जैसे व्यक्ति के मंच पर आते जाते रहते हैं। यहां तक कि उनके हाथ का पानी नहीं पिएंगे। ऐसा कहने के बाद भी उनके साथ उठने बैठने लग जाते हैं। तो इसके पीछे कौन है? बू अब्दुल्लाह जो अरब दुबई का व्यक्ति है। बू अब्दुल्लाह जाकिर नायक का परम मित्र है। जाकिर नायक कौन है? इसके विषय में परिचय देने की आवश्यकता नहीं है। और उसका उद्देश्य क्या है सनातन धर्म और हिंदुओं के विनाश से संबंधित? इससे भी आप अनभिज्ञ नहीं होंगे। तभी आप यह वीडियो देख रहे हैं। तो जाकिर नायक का पाकिस्तानी आतंकवादियों से क्या संबंध है? या पाकिस्तानी अधिकृत कश्मीर पाकिस्तान पीओके में जो प्रधानमंत्री बनकर बैठता है उस व्यक्ति के साथ जाकिर नायक का क्या कनेक्शन [संगीत] है और इन दोनों व्यक्तियों का आईएसआई
00:42:55:13 का क्या कनेक्शन है? पूरी के शंकराचार्य जी को एक और अलकायदा से धमकी मिलती है। इस बात को तुम लोग ग्लोरिफाई करते हुए प्रचार करते हो। जो कि जाकिर नायक और आए अलकायदा के आतंकवादियों से निकट संबंध सार्वजनिक रूप से रखता है। ऐसे बू अब्दुल्ला के साथ साठगांठ करके दुबई में जाता है। और उसी बागेश्वर धाम के साथ मंच साझा करते हैं। उसके यहां जाकर कौन? पूरी के शंकराचार्य। तो एक और अलकायदा से तुमको धमकी मिली है। गोवर्धन मठ को उठा उड़ाने की। ऐसी बात पूरी के शिष्य करते हैं और दूसरी ओर वही आए आतंकवादियों के साथ निकटवर्दी संबंध रखने वाले बू अब्दुल्ला के कार्यक्रम में सम्मिलित होने वाले धीरेंद्र के साथ मंच साझा करते हैं। तो ये क्या तुम लोग हिंदुओं को मूर्ख बना रहे हो? तुम देखो वो धीरेंद्र शास्त्री के साथ मिल रहा है। तुम देखो धीरेंद्र शास्त्री बू अब्दुल्ला के साथ मिल रहा है। तुम देखो बू अब्दुल्ला जाकिर नायक के साथ मिल रहा है। तुम देखो जाकिर नायक आईएसआई के साथ मिल रहा है। भैया तुम खुद रिसर्च करो ना। ये ना देखें कि तुम राघवाचार्य जी महाराज से मिल रहे हो। यह ना देखें कि राघवाचार्य जी महाराज बागेश्वर वालों से मिल रहे हैं। यह ना देखें कि बागेश्वर वाले भू अब्दुल्ला से मिल रहे हैं। यह ना देखें कि जो भू अब्दुल्लाह है वो जाकिर नायक से मिल रहे हैं। यह ना देखें कि जाकिर नायक जो है वो आईएसआईएस से मिल रहा है। मतलब जिस विधा
00:44:10:19 के आलंबन से पूरी शंकराचार्य जी या उनके परिकर दोषी सिद्ध होते हैं। उसी विधा के आलंबन से तुम महापुरुष सिद्ध होते हो क्या? बहुत से मामलों में हमने स्वामी विद्या भास्कर जी के साथ मंच साझा किया है। बहुत से मामलों में हमने स्वामी राघवाचार्य जी के साथ मंच साझा किया है। बहुत से मामलों में हमने स्वामी मुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी के साथ मंच साझा किया है। तुमने ही अपनी Facebook पर ये जानकारी प्रदान की थी ना कि जो पूज्य मुक्तेश्वर आनंद जी हैं वो बौद्धों के यहां पर एक वो कोई एकत्व वाली कोई सभा थी जहां पर बैठकर के आए थे। बौद्धों के साथ ये जानकारी तुमने ही अपनी एफबी की पोस्ट में साझा की थी ना। तो फिर तुम उनके साथ मंच साझा कैसे कर रहे हो भाई? बुरा मत मानिएगा किसी को यहां पर ये बात ऐसा भी मत सोचना कि पूज्यपाद जगत गुरु विद्या भास्कर जी विराजमान है तो उनको बोल रहे नहीं वो हमारे आत्मीय है सिर्फ हमारा प्रेम है। हम तो सिर्फ इसलिए ये बात बोल रहे हैं कि सब एक ही जुट हो। अब विवाद का समय नहीं है। संवाद का समय है। इस तरह सजा के भेजा है हमारे माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने उनको होली के शुभ अवसर पर बारंबार हार्दिक शुभकामनाएं। [संगीत] या फिर यहां पर यह माना जाए कि एक ही व्यक्तित्व का, एक ही संस्था अथवा व्यक्ति का,
00:45:26:00 एक ही अभियान का किसी अंश में समर्थन और किसी अंश में विरोध भी किया जा सकता है। समय आने पर इन लोगों के विरुद्ध भी जब शास्त्रीय बात पर हमको आपत्ति लगी तो हमने मुखर होकर विरोध किया है और उस वीडियो की लिंक सबसे पहले इनको ही भेजी है कि आप देखिए कि आपने यहां पर यह कहा है इसका हम इस प्रकार से खंडन कर रहे हैं। देहू और भगवती ने मुझे यही वरदान दिया। इस बात की भी मैं शपथ कर सकता हूं कि यदि तुम्हारी बुद्धि कभी अधर्म में लग रही होगी तो क्रिया पर तुम्हारा नियंत्रण होगा। बुद्धि खराब होने से तुम्हारा कर्म खराब नहीं होने दूंगी। [संगीत] और यदि कभी तुम क्रिया ही गलत करने जा रहे हो तो बुद्धि भ्रष्ट नहीं होगी। तुम्हारा विवेक तुम्हें रोक लेगा। यदि कभी कलयुग के प्रभाव से बुद्धि गड़बड़ा रही हो तो क्रिया नियंत्रित रह जाएगी। कभी क्रिया ही गड़बड़ होने जा रही हो तो बुद्धि वहां तुम्हें बचा लेगी। तो ये बहुत बड़ा एक रक्षा कवच माणसा ने हमें प्रदान किया है। ऋग संप्रदाय के अंतर्गत आखरी बात आपने कृपा कही है भगवती की। भगवती ने आपको वरदान दिया कि आपकी कर्मेंद्रियों से गलती नहीं होगी। हमारी भगवती ने यह कहा है कि अगर तुम्हारी बुद्धि भटकेगी तो क्रिया पर नियंत्रण होगा। क्रिया भटकेगी तो विवेक तुम्हारा वहां पर संभाल लेगा। यह रोक लेगा। ठीक है?
00:46:41:06 तो वाकलन क्यों नहीं रुका? वाकस्खलन अधर्म नहीं है ना भाई साहब। क्योंकि हम उसका वाकलन का मतलब क्या है? क्या है बताइए? आपकी जीवा से कुछ झूठ निकला ना। क्या असत्य निकला बताइए? कि वो जो आपने लेडी की पिक्चर दिखाई थी वो लेडी विजय श्री ने। तत्काल हम उसका शोधन किया कि नहीं? अरे तो उस समय तो अधर्म हुआ ना जीवा से। अधर्म को हम प्रोत्साहित करने के लिए झंडा गाड़ कर नहीं बैठ गए कि यह सत्य है। अरे बात ये हो रही है होगा ही नहीं। नहीं तुम्हारा करो हराम नहीं होने दूंगी। बात ये हो रही है होगा ही नहीं। नहीं तुम्हारा करो हराम नहीं होने दूंगी। बात ये हो रही है होगा ही नहीं। क्यों? अधर्म का हम समर्थन नहीं करते हैं। वो विवेक यही काम करता है ना। यानी कि क्रिया तो होगी मगर बाद में उसका शोधन करेंगे आप। बाद में क्या? क्रिया बहुत न्यूनतम गलत होगी। विजय की क्लिप ऐड करूंगा। वाकलन से हो गया होगा। वागस्खलन से मैंने वो बोलने के समय अलग-अलग विषयों में गड़बड़ हो गई थी। इस मानवीय त्रुटि को हम सुधार लेते हैं। लेकिन उसी त्रुटि के कारण बोलने में हो गया था वागस्थल। अब जिस स्त्री की बात चल रही थी जिसका नाम विजयाश्री बताया गया था। मैं इस स्त्री को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानता हूं। मैं इसी वीडियो में एक वीडियो अटैच करूंगा आप लोगों के लिए जिसमें आप देखिएगा कैसे पूरी के शंकराचार्य जी के मंच पर वो स्त्री बैठी हुई है और सम्मान के साथ वाकस्थलन से हो गया होगा। वाकस्थलन से बहुत न्यूनतम गलत हो गया। तो इस लड़की का
00:47:56:14 अह Facebook हैंडल भी हमने बता दिया और इसका एक पॉडकास्ट का लिंक भी दे दिया। वहां आप स्पष्ट सुन सकते हैं कि ये विदेश इत्यादि भी आती जाती रही है। वहां से भी इसका उठना बैठना है। और पूरी के शंकराचार्य जी के मंच पर एक संदिग्ध सूत्रों वाली स्त्री का अचानक से आना और अचानक से उसका मठ में इतने महत्वपूर्ण स्थान पर बैठ जाना। वाकस्थलन से हो गया होगा। वाकलन से या बहुत न्यूनतम गलत होगी। और पूरी के शंकराचार्य के मंच पर रिदमम कपूर को बैठने दिया जा रहा है। वाकस्थलन से हो गया होगा। यह बहुत न्यूनतम गलत हो गया। उसका है यूआईएसएफ यूनिवर्सल योगा स्पोर्ट्स फेडरेशन जिसकी उत्तराखंड प्रेसिडेंट है रिद्धिमा कपूर जो भू शंकराचार्य जी के साथ मठ पे मंच साझा कर अलग-अलग शिविरों में मंच साझा कर रही है। वाकस्थलन से हो गया होगा वाकस्थलन से। बहुत न्यूनतम गलत हो गया और यूआईएसएफ की उत्तराखंड स्टेट प्रेसिडेंट मंच साझा किसके साथ कर रही है? पूरी शंकराचार्य जी के साथ और वाकस्थलन से हो गया होगा वाकस्थन से। बहुत न्यूनतम गलत हो गया। रिदमम कपूर को और रिदमम कपूर जो है वो पूरी शंकराचार्य जी के साथ मंच साझा कर रही है वाकस्थलन से हो गया होगा वाकस्थलन से या बहुत न्यूनतम गलत होगी और कदाचित हो न्यूनतम का पैरामीटर क्या है इतनी गलत होगी आपको क्यों फिर मतलब हमने सुंशु नारायण द्विवेदी जी के समक्ष प्रस्ताव रखा है। हमने उन्हें हमारे साथ लाइव आकर चर्चा करने का प्रस्ताव दिया है। तुम हो कौन भाई तुम्हारे सामने
00:49:11:15 हम संप्रदाय की प्रामाणिकता सिद्ध करें? वो अपने आप को निग्रहचार्य लिखते हैं। क्या ये बात प्रामाणिक है? उनके संप्रदाय के विषय में हमारा उतना गहन अध्ययन नहीं है। लेकिन ये ये उनका विषय है। यह हम सिद्ध करने के लिए नहीं आए हैं। उनको सपने में दीक्षा मिली जो निग्रह संप्रदाय की उस दीक्षा को उन्होंने प्रमाणित किसी से सत्यापित कराया कि भैया ये जो मेरे को एक मंत्र मिला है यह वैदिक मंत्र है कि नहीं? सत्यापित मुझे नहीं मालूम। मुझे मालूम है। इसने एक बात कही थी रेलवे स्टेशन पर बैठकर। क्या कहा था इसने? हम प्रयास नहीं किया है। खंडन किया है। ऐसे बोला था तो सुन भागवतानंद तेरा खंडन करने का [संगीत] प्रयास नहीं किया है। खंडन किया है। ध्यान रखना खंडन प्रश्न है। आजकल एक परंपरा सुनने में आ रही है। निग्रह परंपरा छोड़। अच्छा आपने एक नाम अभी लिया है निग्रहचार्य। कौन है ये? मैं उनको अभी भी भागवतानंद
00:50:26:21 जी के रूप में जानता हूं। शास्त्र कहां से आए आपके पास? शास्त्र हमारे पास गुरु परंपरा से प्राप्त हुए। आचार्य परंपरा से प्राप्त हुए। किसी एक गुरु परंपरा को मानना पड़ेगा ना। इससे प्राप्त हुए किससे प्राप्त हुए? आता प्यारे आया आया गुरुवर
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