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00:00:03:20 तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे। और अलंकार समाजियों का स्वरूपभूत लक्षण क्या है? जिसके बिना उनका अस्तित्व संभव नहीं है। अभद्रता, नीचता, बौखलाहट, धोखेबाजी या कहें कि दोगलापन तो इन इन सबको मिलाकर के जो लक्षण बनेगा वो आर अलंकार समाज का लक्षण है या नहीं यह आज आपको इस लाइव चर्चा में पता चलने वाला है और चर्चा से कुछ लोग और भी जुड़ेंगे सनातन शंकर जी भी जुड़ेंगे उनका एक बात मैं बता दूं कि बहुत अच्छा एक वीडियो उन्होंने बताया सार गर्भवित एक वीडियो बनाया है। बहुत सारगर्भित वीडियो है वह। आप उनके चैनल पर जाकर अवश्य देखें। 12 मिनट में उन्होंने जो बातें कही हैं बिल्कुल टू द पॉइंट और जो कहते हैं कि जगुरु शंकराचार्य जी आपका स्वागत है सनातन शंकर जी हमारे चैनल पर।
00:01:20:00 जय श्री राम जी। जय श्री राम। जय श्री राम। तो मैं बता रहा था जनता जनार्दन को कि जगुरु शंकराचार्य जी कहते हैं कि जो शंकराचार्य के मुख्य कार्य होते हैं उसमें से एक उनका कार्य होता है विषद ज्ञान विज्ञान को सूत्रात्मक शैली में सुलभ कराना। तो कई बार ऐसा होता है कुछ बहुत बड़े-बड़े चैप्टर्स होते हैं। उनमें बहुत गहरी गहरी बातें होती है। मगर कभी-कभी कोई कोई आचार्य इस प्रकार के हमें प्राप्त होते हैं जो उन बड़ी विषद व्याख्या को इस प्रकार से सूत्रात्मक शैली में कहते हैं कि वो सिद्धांत बनके और हर व्यक्ति को रटाया जा सकता है। इस प्रकार से तो सनातन शंकर जी ने अभी जो रिसेंटली वीडियो बनाया है वो 12 मिनट का वो वीडियो अभी तक मुझे इनके द्वारा बनाए गए सभी वीडियो में सर्वश्रेष्ठ लगा अभी तक मैं उसकी प्रशंसा करता हूं बहुत हृदय से और बहुत सारगर्भित जी बहुत सारगर्भित और बहुत टू द पॉइंट सूत्रात्मक शैली में इन्होंने व्याख्या की है सभी को देखना चाहिए जो इन्होंने जो एक निर्भय के साथ जो हमारी बातचीत हुई है उसको लेकर के इन्होंने एक सारगर्भित
00:02:36:02 अपना पक्ष रखा है वहां पर कि किस प्रकार से जहां पर एक मिसिंग पॉइंट आता है जहां पर निर्भय जो है चर्चा के समय जब मैं उससे पूछता हूं कि भाई ईश्वर ने इच्छा की और यह है जड़ पदार्थ तो वह इच्छा जड़ पदार्थ को किस रूप में प्राप्त हुई क्योंकि इच्छा का अधिष्ठान चेतन है और ऐसा वैसा चेतन नहीं है ऐसा वैसा चेतन नहीं है। वो सुप्रीम कॉन्शियसनेस है। तो इच्छा का अधिष्ठान है ईश्वर चेतन। चलो मान लो कि ईश्वर नहीं भी है तो चेतन तो है मगर जड़ पदार्थ को कैसे प्राप्त हो रही है वो इच्छा? अच्छा दूसरी बात इच्छा अगर प्राप्त हो भी जाएगी तो जड़ को एनर्जी चाहिए होगी मूवमेंट के लिए। तो यह जो एक कनेक्शन है ना इस बीच में ईश्वर की इच्छा और जड़ पदार्थ इसके बीच में एक कनेक्शन बनता है। उस कनेक्शन को आर्य समाजी अलंकार समाजी और फिलहाल जो स्वयं को बताता फिर रहा है जो व्यक्ति तो वो इस पॉइंट पर मिस कर मिस करना चाहते हैं कि इस पॉइंट को मैं कुछ ऐसा उलझाऊं कि यह मुख्य बात मुझसे पूछी ही ना जाए कि इक्षा जो है प्राप्त किस रूप में हो रही है। जड़ पदार्थ को कैसे प्राप्त हो रही है? हालांकि
00:03:51:03 वहां पर भी सगुण अवतार की आवश्यकता हो जाएगी। जहां पर जो ईश्वर है वो अंतःकरण में जो है प्रकट होकर के उनके अंतःकरण का विषय बन जाता है। वहां पर भी ईश्वर के सगुण होने की आवश्यकता बन जाएगी। मगर जहां पर भी यह जो आध्यात्मिक जो पारमार्थिक स्वरूप है ईश्वर का जहां पर भी वो भले ही जड़ पदार्थों के लिए व्यवहारिक होगा या फिर जो चेतन पदार्थ है जीव उनके लिए वो होगा व्यवहारिक कहीं जहां पर भी व्यवहारिक होगा वहां पर यह कनेक्शन बताना आवश्यक पड़ जाएगा कि जो व्यवहारिक है ही नहीं जो व्यवहार में ना आ सकने वाला अध्यात्म जगत का है तो वो किस रूप में यहां पर व्यवहारिक हो रहा है। तो वहां यह जो कनेक्शन स्थापित करता है ना इसी कनेक्शन का नाम होता है अवतार। अवतार कि भगवान भगवान ऐसा रूप धारण करते हैं जो वो इनके व्यवहार का विषय बन सके। तो हालांकि जो चेतन जीव है उसके भी व्यवहार का विषय बनने के लिए अवतार की आवश्यकता हो जाएगी वहां पर। मगर फिलहाल जड़ पदार्थ को कैसे सिद्ध करोगे? चलो चेतन के पास तो थोड़ा बहुत चेतन है भी। है ना? शास्त्रवाद जी भी आ गए। तो इन्होंने सनातन शंकर जी ने इस पॉइंट को
00:05:06:09 वो जो मिस कर रहा है वो जो बोलना नहीं चाहता उस पर बात ही नहीं करने देना चाहता है। जितनी बार उस चीज पर बात आती है निर्भय के साथ बात करने पर उतनी बार निर्भय कोई ना कोई ऐसी बात करता है जिससे कि वो विषय जो है भटक सके। दूसरे विषयों पर बात हो सके। मगर वहां वो स्किप कर रहा है। उस कनेक्शन को बताने से वह मना कर रहा है कि उसने इच्छा की और जो है पदार्थ हिल गया। अरे भैया इच्छा का अधिष्ठान तो चेतन है ना। चेतन है। तो क्या जड़ को भी आप चेतन मान रहे हो? और अगर यह कहोगे कि ईश्वर उसमें भी व्याप्त है इसलिए वो हिला तो फिर इसका मतलब कि वो वहां पर उतना हिस्सा हिला भगवान का जो जड़ के अंदर है। दूसरी बात अद्वैत की स्थिति भी वहां पर सिद्ध होती है। है ना? जी। तो इस बात को वो स्किप कर रहा और ये मैंने उस वीडियो में कहा भी है एक आध बार कि तुम इस इसको मिस कर रहे हो। तुम यहां से जंप मार जाते हो कि जो वो इच्छा करता है तो वो जो मूव करता है तो उस मूवमेंट को हम वो करते हैं। कहते हैं बल पर वो बल होता नहीं है। अच्छा इसमें एक बात और आ जाती है वो बल होता नहीं है। ठीक है? पर हम उसे बल कह देते हैं। यानी कि प्रातिभाषिक जो आभास होता
00:06:21:13 है हमें है ना प्रतीति जो हम कहते हैं ना कि व्यवहार जगत के अनुसार जितना मेरी माताजी सत्य हैं जितना मेरे पिताजी सत्य हैं जितना मैं सत्य हूं व्यवहार जगत में उतना ही भगवान का अवतार भी सत्य मानना पड़ेगा। है ना? और ब्रह्म की दृष्टि से तो प्रतीति मात्र भी कह सकते हैं। ठीक है? हम तो इस जगह पर आकर के यदि एक अगला पॉइंट यह आता है कि आप जो है बल का बल के रूप में अवतार की प्रतीति मान रहे हो ना ईश्वर के चलो ठीक है आपने कहा कि भाई वहां पर कुछ हुआ नहीं हालांकि कुछ हुए बिना कुछ हो नहीं सकता इस पर आप जो है मौन है चुप है मगर एक कदम अगर हम आगे भी बढ़ जाएंगे तो क्या होगा एक कदम हम आगे बढ़ेंगे तो आपने कहा था जैसे हम आकाश के लिए एक शब्द यूज़ कर रहे थे। जब उसके साथ लाइव चर्चा थी तो उससे शब्द यूज़ कर रहे थे कि आकाश हमें दिखता है तो वो दिखता नहीं है। यह कहो मत। तो मैंने कहा था कि तुम्हारे यहां भी ऐसी कई चीजें हैं जिनके तात्विक व्याख्या पे जाएंगे तो कुछ और होगा। मगर व्यवहार में हम कहते हैं कि ऐसा है वैसा है तो व्यवहार में तुम क्यों कह रहे हो कि बल है केवल यही कहो केवल इच्छा करता है ना शक्तिमान है ना ईश्वर शक्तिमान है ना ईश्वर बलवान है वो केवल इच्छा करता
00:07:36:21 है हां अगर यहां पर हमें प्रतीति हो रही है शक्ति होने की कि कोई ठोस धक्का लगा जड़ पदार्थ को कोई ठोस धक्का लगा ये हमें प्रतीति हो रही है इसलिए हम उसको शक्ति और बल कह रहे हैं तो फिर यहां पर हमारा अवतार भी मान लो मगर नहीं अपने बल और शक्ति की प्रतीति पर उसको कहेंगे कि यह बल बल है, बलवान है, ईश्वर बलवान है। प्रतीति मात्र पर कहेंगे। ईश्वर शक्तिमान है। प्रतीति मात्र पर कहेंगे। पर प्रतीति मात्र पर अवतार ईश्वर लेता है ये नहीं मान सकते। क्यों? क्योंकि स्वरूप भूत लक्षण है विरोध। विरोध ही स्वरूप भूत लक्षण है। इसलिए ठीक है? तो जितनी बार भी निर्भय के साथ वो जो चर्चा हुई है उसमें जब मेन पॉइंट आया कि भाई जड़ पदार्थ को कैसे प्राप्त हुआ यद्यपि वो तो माया मानते नहीं है संसार को वो तो प्रपंच रूपी संसार वो तो सीधे फ्लैट तरीके से व्याख्या करते हैं अलग-अलग नहीं मानते व्यवहार परमार्थ को वो तो ये चीज कहना ही नहीं चाहिए कि वो लौकिक दृष्टि से कह दिया जाता है। ठीक है? दूसरी बात एक और है कि जितनी बार यह शब्द आया उतनी बार उसने कुछ ऐसी बात कही है जहां पर वो जो एक लोगों के अंदर उसने एक हवा बनाया हुआ है अपना अपने लोगों के अंदर कि बहुत बड़ा लॉजिक हूं पहली बार जब बात हुई थी तो उसने अंत में क्या कहा जब मैंने सब
00:08:51:25 सिद्ध कर दिया उसने कहा इससे आगे हम लोग यही मानते हैं इससे आगे नहीं मानते ये कहा इतना ही मानते हैं हम बोला इतना ही मानते हैं इतना ही मानते इतना ही मानते हैं का मतलब क्या है वो ये कह रहा है कि भाई हम इससे ज्यादा बात नहीं करनी है इस मामले में इतना ही मानते हैं अच्छा तो तो मैं थोड़ा सा सॉफ्ट लेकर के चल रहा था उसको उसके साथ तो मैंने उस पर ये व्याख्या दी भाई यहीं के आगे आचार्य शंकर ने बात कर दी जहां पर तुम स्टॉप हो रहे हो उसके आगे उन्होंने बात की है जब मैंने ये पक्ष बताया तो उसने ये नहीं कहा कि ये किस-किस प्रकार से गलत है बस वो ये कहने लगा इसका शास्त्र में दिया है कि नहीं दिया है ना शास्त्र को ले आया तो यानी कि यहां पर उनके लॉजिक पहली बार में यहां समाप्त होते दिखाई दिए दूसरी तीसरी बार जब मैंने बात करने की कोशिश की दूसरी बार में उसने एक जगह ये कह दिया कि जब ईश्वर तो ईश्वर की तो इच्छा ही प्राप्त हो रही है। जड़ को इच्छा प्राप्त हो रही है ईश्वर की। पहली बात और जड़ के पास जड़ के पास अपनी पावर है मूव करने की। अरे भैया कुछ बताओ तो वहां पर वो अचिंत शक्ति है जिसको डिफाइन नहीं किया जा सकता। वो है कुछ वहां पे। मगर हम ये नहीं बताएंगे कि क्या है। मगर बस इच्छा की वहां हो गया। हम बीच का गैप नहीं भरेंगे हम क्योंकि भरने में वो अवतार की सिद्धि हो जाएगी और ना भरना पड़े इसलिए लोगों
00:10:06:26 को दूसरे दूसरे विषयंतर करके ले जाएंगे। ठीक? तो दूसरी बार इसने क्या कहा? यह मुझे ग्रंथों में पढ़ना पड़ेगा। देखना पड़ेगा कि मनुष्य जो कार्य करता है वो शक्ति किस प्रकार से काम करती है वहां पर। क्या अंतर है दोनों शक्तियों में? ठीक है? ये हो गया। और तीसरा जब मोटी मोटी बात हुई उसके साथ तो जब शुरुआत मैंने की कि भैया उसने कहा फिर वो सिद्धांत पर बात करनी है। अच्छा एक बात और देखो अभी अभी इसको पूरा कर लूं फिर वो नया टॉपिक खुल जाएगा। एक बात और देखिए किस तीसरी वाली जब चर्चा हुई मोटी मोटी तो इसने कहा सिद्धांत पर चर्चा करनी। मैंने कहा हो तो गई तुम वहां पर ठीक-ठाक जवाब देते नहीं हो। अब मैं तुमको क्योंकि वह तुम मेरे उस सॉफ्ट वाले उसमें आ गए हो रेंज में तो अब मैं तुमको वहां पर ऐसे अटक नहीं सकता हूं तुमसे कि नहीं दो ठीक है तुम नहीं दे रहे हो मैं शांत हूं बस अपना काम करो तो फिर वो बोलता है कि नहीं मैंने जब वो बोला कि कहां किया तो मैंने उसको फिर बताया तो तीसरी वाली में भी आप देखो तो वो फिर जो है जब मैंने उसको कहा कि भाई बताओ ना जड़ को किस रूप में प्राप्त हुई ईश्वर की इच्छा कनेक्शन क्या है उसी कनेक्शन का नाम अवतार है। उस कनेक्शन का नाम ही अवतार है। सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर
00:11:22:26 भौतिक जो प्रकृति के पद है उनके लिए जब वो व्यवहारिक हो रहा है तो वो अपना एक दूसरा स्वरूप बना के अवतरित हो रहा है। ठीक है? इसी कनेक्शन का नाम अवतार है जो उनके बीच में मध्यस्थता करता है। आपकी आवाज नहीं आ रही। आपका म्यूट जी हां। या तो फिर यह मानना पड़ेगा कि फोर्स जो है वो अपने आप में स्वतंत्र रूप से एक अलग सत्ता है। फिर प्रकृति के अलावा आपको एक अलग फोर्स भी माननी पड़ेगी। अलग सत्ता जो कि बस क्योंकि क्योंकि इनका एक और आता है कि नियम बना दिए। अब नियमों को क्रियान्वित करने के लिए भी आपको एक अलग से सत्ता माननी पड़ेगी। आप उसको मिस नहीं कर सकते कि नहीं एक नियम बना दिए लेकिन क्रियान्वयन जो है वो स्वतः ही हो रहा है। तो यहां पर ये इनके मत में बहुत बड़ी कमी है। जी जी जी अच्छा मैं ये जो था मामला मैं ये लाया क्यों? निर्गुण सगुण लाया क्यों? हमारी ईश्वर की अवतार की सिद्धि वैसे ही है जो पैराडॉक्स लाओगे पैराडॉक्स का जवाब है। ठीक है? ईश्वर का अवतार का वो क्या कहते हैं? तुम हेतु हेतु कर रहे हो। हेतु का जवाब है। भैया हमने पूछा सर्वशक्तिमान ईश्वर है। अब तुमने कहा उसका हेतु क्या है? सर्वशक्तिमान का। अब मैं तुमसे कह दूं हेतु का हेतु क्या है भाई?
00:12:38:00 अच्छा। हेतु का हेतु क्या है? सर्वशक्तिमान का हेतु क्या है? अच्छा एक बात और है जब ये सर्वशक्तिमान का हेतु कहेंगे तो इसका मतलब है इनको सर्वशक्तिमान से आपत्ति है। तो यही तो हम कह रहे हैं कि घोषित करो हमारा ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं है। दुनिया को बताओ तो सही कि हमारा ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं है। तुम उन शब्दों का अर्थ अपने अनुसार लेकर के अपना जो ढिंढोरा पीटा हुआ है कि हम आपको ईश्वर दे रहे हैं। वो लोगों को पता चले ना वो कैसा ईश्वर है। किस प्रकार का घटिया ईश्वर है। लोग उसको तय करें ना जज करें कि वो घटिया है कि वह प्राप्तव्य है कि वह मोक्षदायक है या वो किस क्वालिटी का ईश्वर है जो आप दे रहे हो उसमें वो क्वालिटी घटित होती भी है कि नहीं ये वो लोगों को तय करने दो निर्णय करने दो कि वो सर्वोच्च पद है सर्वोच्च पद पर प्रतिष्ठित वो शक्ति है सार्वभौम सत्ता या फिर बहुत घटिया स्तर की शक्ति ये उनको तय करने दो तो बताओ उनको कि हमें सर्वशक्तिमान पर आपत्ति है। अच्छा तो कुल मिलाकर के पूरी चर्चा जब आप देखेंगे मैंने एक उसका समराइज वीडियो बना दिया है और वह सर्वशक्तिमान चैनल पर आएगा तो उसको समराइज करके बनाया तो उसमें आप जब देखेंगे ना मैंने खुद सुना तब मैंने अनुभव किया कि इसने
00:13:53:06 कितना ज्यादा बातों को बदला जब मैं उसमें इन्वॉल्व था तब मैं नहीं देख पा रहा हूं तब तो मैं देख रहा हूं कि भाई मेरा छोटा भाई मुझसे बात कर रहा है ना इस पर भी हम बात करेंगे तो मैं उसकी उस चीज को नहीं देख पा रहा हूं मगर जितनी बार वो अटक रहा है फंस रहा है तो उतनी बार वो क्या कर रहा है चैप्टर बदलने का प्रयास प्रयास अच्छा हम तो अब वो चैप्टर बदलते बदलते मगर फिर भी लास्ट वाला जो आप देखेंगे पार्ट उसमें मैंने पकड़ लिया उसे और जब पकड़ लिया तो लास्ट में जब मैंने उससे फिर आखिर में पूछा कि ये जड़ पदार्थ को कैसे प्राप्त हो रही है अगर तुम मान रहे हो कि मेरी जो मसल्स हैं मेरी जो हड्डियां हैं इन पर चिपकी हुई मसल्स है। ठीक है? अब जब मैं चाहता हूं कि ये मेरा हाथ मुड़े। मुड़ने का मतलब क्या कहते हैं? सिकुड़े। ठीक है? मेरी जो मसल्स हैं फैली हुई है। ये अभी फैली हुई है। फिर ये सिकुड़े। जब मेरी मसल्स सिकुड़ना शुरू होंगी तो मेरी जो ये बाह मुड़ती हुई दिखाई देगी। अब ये जो सिकुड़ना है इस सिकुड़ने के लिए मेरी मसल्स को एक एनर्जी चाहिए। वो एनर्जी कहां से आ रही है? जो मैं भोजन प्राप्त करता हूं मूल रूप से कार्बोहाइड्रेट वहां से एनर्जी आ रही है। तो वो जो एनर्जी तत्व है जो कि मेरे कहने पर जिसने काम किया वो और मैं एक भी नहीं है। ये भी ध्यान रखिए
00:15:08:09 मेरे को मेरे पर्सपेक्टिव में व्यवहारिक जगत में वो और मैं एक नहीं है। तो उस एनर्जी ने उस एनर्जी ने यह बल दिया इसको मेरी जो फ्लैक्स हो चुकी मसल्स हैं उनको वो बल दिया कि वो सिकुड़े और जब वो सिकुड़ी तो उनके साथ जो हड्डी चिपकी हुई है वो उठ के ऊपर आ गई तो इस तरह से मेरा हाथ मुड़ा। अब यहां पर निर्भय ने मान लिया कि यहां पर एक शक्ति है जिसने कि मेरे हाथ को मोड़ने में सहायता दी। तो फिर मैंने कहा कि वो जो शक्ति है जो उसको पुश एंड पुल कर रही है जड़ पदार्थों को तो वहां पर वो शक्ति क्या है? नहीं वहां तो फिर इच्छा है। इच्छा है। अब वो जड़ पदार्थों के ऊपर ऐसे ही नाच रही है। इच्छा है ना? इच्छा का अधिष्ठान चेतन है। और जड़ पदार्थ तो चेतन है। तो कैसे प्राप्त हो गई उनको? और प्राप्त हो भी गई तब भी जड़ पदार्थ को मूव करने के लिए तो शक्ति चाहिए। एट द नय से मान भी लिया जाए तो प्रतीति तो तुम भी मान रहे हो बल के रूप बल के अवतार की प्रतीति शक्ति के अवतार की प्रतीति मान रहे हो तो फिर अवतारवादियों से क्या दिक्कत है तो स्वरूप भूत लक्षण पहला क्या आया विरोधी विरोधी है ना स्वरूप भूत लक्षण हमारा विरोध है हम अपने लिए वही सब नियमों के अनुसार जो है तरह-तरह
00:16:23:25 की चीजें जो हम नहीं मानते कि उनका वास्तविकता में अवतार हुआ पर उनके अवतार को मान रहे हैं। बल को कह रहे हैं कि वहां पर बल है। जबकि वो बल की प्रतीति मात्र बल नहीं है। आपके अनुसार हमारे अनुसार तो है। व्यवहारिक जगत में बल है। ठीक है? और आपके अनुसार व्यवहार व्यवहार और परमार्थ अलग-अलग है नहीं। ये आपने कहा ठीक है। खैर अब ये इस चीज से इस पे आ गए। अब क्या है कि ये चीज क्लियर हो गई। इसके बाद अब वो व्यक्ति ऐसा बौखलाया हुआ है कि जगह-जगह फोन कर रहा है। आज एक रिकॉर्डिंग भी डाली है उसने। है ना? जगह-जगह फोन कर रहा है और आपसे भी इस बीच कुछ चर्चाएं हुई है किसी की तो वो भी हम अभी इस पर बात करेंगे। तो वो जो फोन कर रहा है उस फोन करने में भी उसकी बौखलाहट आपको साफ दिखाई देगी। जैसे उसने किसी जो हमारे एक हमें शंकराचार्य को मानने वाले ही हैं आशुतोष धर द्विवेदी जी उनको फोन मिलाया उसने ज्योतिषचार्य हां उनको फोन मिलाया अब वो अब उनका कहना है कि उनका उसी रिकॉर्डिंग में कहना है कि भाई मैं कहां क्या हूं अचानक से तुमने फोन किया अब उसने कहा मैंने तुम 510
00:17:39:01 मिनट चाहिए तो उनको लगा कि ज्योतिष के बारे में कुछ बात करनी होगी है ना तो उन्होंने कहा ठीक है बोलो तो बोला कि भाई कि मैं तो जो ज्योतिष से ईश्वर पे आऊंगा तुरंत चर्चा करने लगो वहां पर पक्ष विपक्ष करने लगो तो उसमें बौखलाहट जो इस व्यक्ति की है वो इतनी साफ दिखाई दे रही है अच्छा बौखलाहट कैसे और दिख रही है स्वयं के बोले हुए वचनों के विमुख जाता हुआ व्यक्ति स्वयं कुछ का कुछ बोल रहा है अपने ही सिद्धांतों को तोड़ रहा है मुझसे चर्चा में कहा गौरी शंकर का पीछे कोई गुरु हमें नहीं पता नहीं है अज्ञात है उस चर्चा में क्या कह रहा है कि ये इसके यह गुरु, इसके वो गुरु, इसके वो गुरु और और देखो बौखलाहट कि भैया
00:18:25:15 और किसी व्यक्ति में जैसे मान लीजिए मुझ में और सनातन शंकर जी में एक चर्चा हुई उस उन्होंने वहां पे कहा कि भाई तुम्हारी तुम चर्चा उनसे करो। तो इसने वहां दावा किया कि मैं चर्चा जीत चुका हूं। उन्होंने पूछा कैसे तय हुआ जीत चुके कि जनता ने तय किया। अच्छा जनता ने किस प्रकार से तय किया? तो जैसे ही वह यहां पर फंसने वाला था उसने फिर कह दिया कि ऐसे तय कर लो कैसे कि अभी तुम बता दो जवाब तो यह तय हो जाएगा उस चर्चा में कौन जीता भाई कोई व्यक्ति का सिद्धांत कमजोर भी हो ना वो भी कभी-कभी चर्चा जीत जाता है तो तुम कहीं पर अपने सिद्धांत की पुष्टि करते हुए तय नहीं कर सकते कि उस उस चर्चा में कौन जीता था कौन नहीं जीता था ये तुम्हारा खोखला सिद्धांत नंबर वन दूसरा तो तुमने अपना वो खुद ही कह ही दिया 12 वो जो गिना रहे हो अपने भूत प्रेत टाइप के जो क्या कहते हैं कौन से गुरु है हमारे काल्पनिक काल्पनिक काल्पनिक काल्पनिक गुरु अच्छा इसमें दिक्कत ये आती है ना ऐसे धूर्त व्यक्ति से चर्चा करेंगे तो क्या करें जो अपने ही सिद्धांत पर खड़ा हुआ नहीं है जैसे उसमें उन्होंने किसी की बात कही कि तुम्हारे फलाने तो ये कहते हैं कि अभी बात तो मुझसे हो रही है हम ये कहा ना बात तो मुझसे हो रही है यानी कि तुमको क्या मान के बात करें अच्छा तुम दयानंद ंदी
00:19:40:16 हो यह मान के बात करें कि नहीं करें तो दयानंद के पक्ष से जो जो बातें आएंगी दयानंद जी के पक्ष से वो वो बातें तुमसे पूछी जाएंगी पूछी जा सकती है उन उन बातों पे तुमसे बात की जा सकती है अगर जिस टॉपिक पर तुम बात कर रहे हो उससे रिलेटेड चीजें हैं तो फिर तुम वहां अपने आप को अलग कर लोगे नहीं दयानंद जी यहां कहां है तो फिर तुम हो कौन फिर तुमसे बात की जाए तो हम ये वाली बात आ गई तो वो जो है आप लोग सबसे पहले तो वो चर्चा सुन लीजिए जो इनकी की अच्छा वो एक-एक करके चर्चा सब सुनेंगे और एक-एक बात की समीक्षा भी करेंगे। अब एट दी एंड जब हमने देखा कि भाई यह बहुत थोड़ा सा मेंटली टॉर्चर शायद हो गया है वह अपनी रिकॉर्डिंग सुनकर के तो हमने फाइनली कहा कि हम जटा बाबा के पास जाना है हमें बनारस में एक दो दिन में जटा बाबा यानी कि जो वहां पर करपात्र धाम है ना वहीं पर जाना था तो क्या कहते हैं उनके साथ थोड़ा सा रामायण मीमांसा और उसके विषयों में थोड़ा सा उनका प्राप्त करना था यदि वो समय देंगे तो हम जाएंगे एक दो दिनों में तो हुआ क्या कि हमने कहा कि बनारस में इसने ही बताया था कि हम यह भी बनारस में है। तो हमने कहा भाई आ जाओ बनारस में। तो फिर इसका पक्ष
00:20:55:22 क्या आ रहा है वो आप अभी सुन लेते हैं और हम जवाब भी देंगे। उसके बाद आशुतोष जी की भी रिकॉर्डिंग सुनेंगे और उसके बाद एक बहुत बड़ा सरप्राइज भी है। जी वो लास्ट में आप लोग सुन लीजिएगा। सबसे पहले आप वह वाली रिकॉर्डिंग आप सुना दीजिए जो इस व्यक्ति का क्या पक्ष है जो यह बना घूमता है कि हम बहुत बड़े तुर्रम खान हैं और कहता है कि जो है हम चर्चा जीत गए हैं हम चर्चा कर लो ये वो जबकि हां एक बात और बता दूं वो जो रिकॉर्डिंग आप सुनोगे लास्ट वाला आप देखिए वहां पे इसने क्या बोला है लास्ट में इसने निर्भय ने क्या बोला है कि मैंने चार तरीके की बातें बताई थी और वो जो है ईश्वर कहता है ईश्वर ही करवाता है वहां जीव कुछ नहीं करता। यह भी बोला है। जब जीव इच्छा करता है ना कोई चीज उठाने की तो ईश्वर करवाता है। अब ऐसे व्यक्ति से क्या चर्चा करें जो अपने ही सिद्धांत पर नहीं टिक रहा है। उसका उद्देश्य ये नहीं है सत्य को स्थापित करना। उसका उद्देश्य तो ये है कि सामने वाले को कुछ भी बोल के किसी तरीके से निरुत्तर करना। तो दूसरा दूसरा दूसरा स्वरूप भूत लक्षण क्या आया? स्वरूप भूत लक्षण। स्वरूप भूत लक्षण वो लक्षण जिससे वो अपने आप को अलग नहीं कर सकते। अलग कर लेंगे तो उनकी जो उनका अस्तित्व ही नष्ट हो जाएगा। ठीक है? वो होता है स्वरूप भूत लक्षण। तो
00:22:10:24 दूसरा स्वरूप भूत लक्षण क्या आया? द्वेष कि भाई आप क्या-क्या बोल गए अपनी चीज के लिए? आप वहां मौन हो जाओ। आप कह दो कि मैं इस पर अध्ययन करके आऊंगा। पहले भी आपने कहा मगर फिर वहां पर आपने क्या बोला अंत में? अंत में आपने बोला ईश्वर करवाता है। ईश्वर की ही ताकत लगती है। और कोई स्पष्ट बात ही नहीं बोली। लास्ट वाले उसमें इतनी बातें बोल दी वहां पे तो कि अलग से कोई शक्ति होती नहीं है। शक्ति नहीं होती है तो भैया फिर हम लोग खाना क्यों खाते हैं? व्यवहार जगत में खाना खा के शक्ति प्राप्त होती है ना। तभी तो खैर वहां पर वो जो है ये तक बोल गया कि जब जब मैं इच्छा कर रहा हूं तो मेरे पास तो शक्ति है नहीं। ईश्वर मेरी मदद करते हैं कोई सामान उठाने में। तो इनका वो वाला जो तर्क है ना हम तो ये मानते हैं अद्वैत है भाई। ठीक है। हां तो वो चल भी जाएगा। मगर इनका वाला तर्क जो है काम करने में काम करने में स्वतंत्र है। ये है वो है। वहां कैसे चलेगा? खैर अब वो वो सबसे पहले तो इसका क्या जवाब आ रहा है वो वो रिकॉर्डिंग जरा जनता को सुनाइए। आप जब हमने ये कहा कि हम एकद दिन में बनारस आ रहे हैं। तो आप जो है हमने पहले भी कहा था इनको WhatsApp दिखा दो। एक मैंने एक
00:23:25:27 स्क्रीनशॉट डाला था जिसमें मैंने लास्ट में इनसे 3 फरवरी को क्या बातें हुई थी वो एक बार दिखा दूं। मेरी और इनकी जब फोन पर वार्ता हो गई थी फरवरी में बहुत पर्याप्त और ये बार-बार उस चीज को मिस कर रहे हैं कि जड़ पदार्थ पर ये ईश्वर की इच्छा प्राप्त कैसे हो गई है? तो इस विषय पर बहुत विषद अच्छे से हो चुकी है। मौन है, निरुत्तर है। स्किप कर रहे हैं चीजों को। अब यह यह विषय आया क्यों है? यह विषय आया इसलिए है कि जब हम कहते हैं ईश्वर सर्वशक्तिमान है इसलिए वह अवतार ले सकता है। ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है। हम आज भी अपने इस स्टेटमेंट में बिल्कुल खड़े हुए हैं। कोई आ जाए माई का लाल और हमसे टकरा ले इस मामले में। ठीक? तो कोई अब जो है उनको समझ में आ गया निर्गुण सगुण में फंस रहे हैं तो अब खैर आना मुश्किल है।
00:24:17:20 तो मैंने ये बात की क्यों? निर्गुण सगुण की। निर्गुण सगुण की बात इसलिए की कि जब हम कहते हैं ईश्वर सर्वशक्तिमान है तो तरह-तरह की चीजें आती है। सर्व्यापक एक देसी कैसे हो सकता है? तो हमने बताया भैया वह ज्ञान देने तो आ रहा है। उसका ज्ञान एक देसी प्रकट हो रहा है। मंत्र के अच्छा उसको आवश्यकता क्या है? हमने बताया अलंकार की आवश्यकता क्या है? मंत्र की आवश्यकता क्या है? हमने ये भी कहा है। ठीक है? तो दो चीजें हो गई। इसके बाद जो है और भी जो नाना प्रकार के कुतर्क होते हैं हमने सबके उत्तर दे दिए। फिर ये ले आए पैराडॉक्स नास्तिकों का पैराडॉक्स कि ईश्वर अगर सब कुछ कर सकता है तो क्या वो ऐसा पत्थर बना सकता तो हमने उसका भी अविद्या के अविद्या के द्वारा उत्तर दे दिया। ये लो लेके जाओ अपना कुतर्क का उत्तर कुतर्क है ना कुतर्क कुतर्क करोगे तो कुतर्क ले लो। ठीक है? तुम्हारे हम वो लोग हैं ना जो घर में घुस के बात करते हैं। ऐसे बिल में दुबक करके और ऑनलाइन आके ऑनलाइन ऑनलाइन हमने बहुत बड़े झंडे गाड़ दिए। ये सब हम नहीं करते। घर में घुस के घर में घुस के सामने वाले के। ठीक है? जब बात आ जाती है कि घर में घुसने की जरूरत है तो जाते हैं। अच्छा तो यह बात आ गई पैराडॉक्स में भी हार गए अब ये। अब पैराडॉक्स के बाद ये क्या लेके आए? अंत में एक चीज आती है कि जो चीज अवतार ले रही है वो नित्य है कि नहीं? नित्य है तो
00:25:32:24 वो व्यवहार के अनुसार तो नित्य ही माना मानना पड़ेगा कि वो प्रकट और अप्रकट हो रही है और परमार्थ के अनुसार भगवान जो है अपना एक अवतार लेते हैं परमार्थ की दृष्टि से और हमें जब वो परमार्थ की दृष्टि से ऐसी है तो वहां पर ये कह रहे हैं कि नहीं नहीं वो तो नित्य नहीं है तो फिर उसको कैसे माने ईश्वर तो फिर वहां पर हमने ये बताया कि भैया जब तक वो अवतार नहीं लेंगे दूसरा रूप धारण नहीं करेंगे धारण जब कर रहे हैं दूसरा रूप तो आपका कहना है कि वो नित्य ता उसकी खत्म हो रही है। ठीक? तो यदि वो अवतार धारण नहीं करेंगे, दूसरा रूप धारण नहीं करेंगे, जो जो आपके सिद्धांतों के अनुसार नित्य नहीं है, तो सृष्टि की रचना ही संभव नहीं है। तब हमने उनको बताया क्योंकि उसका स्वरूप भूत लक्षण है सच्चिदानंद। नित्य सर्वत्र एक रस। तो पहली बार जब वो जब कोई पृथ्वी हिलती है कोई भी प्राकृतिक पदार्थ जो है उसको शक्ति प्राप्त होती है भौतिक जगत में और वो भौतिक रूप से कोई क्रिया होती है तो उसमें भौतिक जगत के व्यवहार भौतिक जगत के अनुसार व्यवहार में आ सकने वाली एक फोर्स होती है। अब वो फोर्स भगवान से अलग नहीं है। इसीलिए उस फोर्स को भगवान का अवतार मानना पड़ेगा। अच्छा
00:26:48:04 यह बताने के लिए केवल सगुण निर्गुण है। बाकी हम अपने पक्ष की जो चीजें हैं वह वैसे ही सिद्ध करे हुए हैं। उस उस जो चर्चा हुई थी जब धारणा पूछी गई थी तो हमने हर तरह के प्रश्न का उत्तर दिया था। उसने कहा लक्षण पहचानेंगे कैसे? तो हमने पूछा था गायत्री मंत्र को कैसे पहचान रहे हो? तो चर्चा में क्या बोल रहा है कि गायत्री मंत्र जपो पूरे दिन पूरे जीवन भर और देख लेना मुक्ति मिल जाएगी। मैंने भी कहा भाई राम की भक्ति करो मुक्ति मिल जाएगी। फिर क्या दिक्कत है? एक जगह पर आया कि भैया भगवान को ऐसे पहचाना कि उन्होंने वेद का ज्ञान दिया। तो अगर भगवान की पहचान यह है कि उन्होंने वेद का ज्ञान दिया तो इसका मतलब हमें पहले से पता हो वेद का ज्ञान क्या है तभी हम पहचान सकते हैं। तो वहां पे शब्द ही प्रमाण है। वहां पे शब्द ही प्रमाण है। ये हो गया। तो इसलिए यह जो सगुण और निर्गुण वाली बात है इसलिए आई है हमारा अपना सर्वशक्तिमान का जो पक्का खंभा है वो अभी भी है और आगे और भी दृश्य देखने को मिलेंगे अच्छे बड़े-बड़े हम ऐसे नहीं है ऑनलाइन ऑनलाइन खेल लो किसी को Facebook पे मैसेज मात्र कर दो ना सीधे दनधनाते हुए दुश्मन के इलाके में धड़धड़ाते हुए घुस जाने की आदत है हमारी ठीक है तो तो क्या कहते हैं फिर भी तुमने जो यह प्रश्न किया कि जिस स्वरूप से वह बना रहे हैं
00:28:03:10 वह स्वरूप ईश्वर का स्वरूप नहीं है क्योंकि वह नित्य नहीं है। तो हमने बताया कि भाई सृष्टि रचना के लिए ही ईश्वर पहली बार रूप लेते हैं। अब क्योंकि वही ले रहे हैं इसलिए उन्हें भी ईश्वर ही माना जाएगा। उस रूप को भी ईश्वर ही कहा जाएगा। अब इसमें मैंने एक उदाहरण भी दिया कि मैं जैसे अपने गिलास अपने हाथ से कोई गिलास उठाऊं तो ये थोड़ी ना कहा जाएगा मेरे हाथ ने उठाया। मैंने ही उठाया ना भाई गिलास। हम हम है ना? वो कह नहीं तुम्हारी चार तुम्हारी चार उंगलियों ने उठाया वो ये कह चार उंगलियों ने उठाया ठीक है तो तो ये सारी चीजें हो गई अब क्या है कि अ जब ये बौखलाते हुए हमने देखा इनको और मेरा जाना भी इधर हुआ तो हमने कहा भाई ठीक है हम आ रहे हैं तुम आ जाओ बनारस मुझे लगा था बनारस में ही मुझे भी नहीं पता था बनारस के आसपास कहीं है मुझे ऐसा ध्यान में था कि बनारस में है तो चर्चा हो जाएगी क्योंकि मैंने इनसे कभी भी जब पहली बार बात बंद हुई थी उस कारण से जब यह जो इनके चैनल से अभद्र चीजें होना चालू हुई थी तब भी मैंने इनसे सैद्धांतिक चर्चा के लिए मना नहीं किया था। आप वो स्क्रीनशॉट दिखाइए जरा।
00:29:17:03 यह मेरा इनको आखिरी मैसेज है 3 फरवरी को। ठीक है? इसमें देखिए लास्ट लाइन क्या लिखी है कि सैद्धांतिक विषय में यदि तुम कभी आमनेसामने करना चाहते हो चर्चा तो अवश्य हो जाएगी। ठीक फिलहाल मैं तुम्हारे निर्गुण सगुण वाले वीडियो तथा संदीपन जी के वो संदीपन जी की बात छोड़ दो। प्रतीक्षा कर रहा हूं। ठीक है? तो अब पहली बात तो यह है कि यदि हमारी सैद्धांतिक चर्चा बाकी थी और यह जो है इन्होंने इसके बाद हमसे तो नहीं कहा कि सैद्धांतिक चर्चा होनी है। है ना? क्यों नहीं कहा? क्योंकि यह 10 बार निरुत्तर हो चुके थे फोन में। अच्छा अब एक बात और है। इनका इनका कहना यह है ये अभी रिकॉर्डिंग चलेगी तो मैं जवाब दूंगा। इनका कहना यह है क्योंकि अब हमने इनसे संपर्क किया है सैद्धांतिक चर्चा के लिए। तो इसका मतलब है कि इन्होंने कुछ ऐसा किया है मतलब इन्होंने अपने ऐसे झंडे गाड़े हैं कि हमें इनसे सिद्धांतिक चर्चा करनी पड़ रही है। ठीक इनका पक्ष भारी है इस समय इनका ये कहना है। तो जब ये हमको फोन कर करके सैद्धांतिक चर्चा करने को कह रहे हैं। उस चर्चा के बाद
00:30:32:09 जिसके कारण ये लोग मामा आ गए मामा आ गए करते फिर रहे हैं। वही दयानंद जी वाला काम काशी के शास्त्रार्थ में हार गए तो पर्चे छपवाओ पर्च छपवाओ जिस हां जिस चर्चा के पर्चे ये लोग छपवा रहे हैं उसके बाद तुम्हारा निर्भय आकर के मुझसे क्यों कह रहा है भैया सैद्धांतिक चर्चा कर लेते हैं क्यों क्योंकि निर्भय के ही अनुसार जो व्यक्ति हारा हुआ है वही जाकर के कहता है सिद्धांतिक चर्चा कर लेते हैं। हालांकि मैं सिद्धांत नहीं मान रहा हूं। मगर वह तो मान रहा है कि सिद्धांतिक चर्चा करने प्राथमिकता से वह व्यक्ति पहुंचेगा उसके पास जिसका पल्ला भारी होगा। ठीक? तो इसका मतलब ये जो हमसे आ रहे थे फोन पर चर्चा करने बार-बार तो इनका पल्ला कमजोर था। तो उस चर्चा के आधार पर तो निर्भय के अनुसार ही ये सिद्ध हो जाता है कि ये हारे थे उस चर्चा में। तभी तो बार-बार आकर कह रहे थे और फिर जब वहां आए हैं तो वहां भी आ रहे हैं। इसीलिए जब मैंने इनको लास्ट में कहा कि सैद्धांतिक चर्चा के निमित्त तुम कभी भी चर्चा करना चाहते हो तो हो जाएगी आमने सामने से। अब आमने सामने क्यों कहा? फोन पे ये भाग रहे हैं तो जहां पे ये भाग रहे हैं ना मिसिंग पार्ट वाला तो वहां पे जब सामने से सबके भागेंगे तो दिक्कत होगी। एक तो ये है कि जनता को समझ में आ जाएगा जो वो स्किप कर रहे हैं। इच्छा
00:31:47:15 कैसे प्राप्त हुई जड़ को। हम दूसरा यह है कि या तो यह चर्चा करेंगे नहीं। तो इन्होंने कभी भी नाम नहीं लिया। फोन पर चर्चा कर रहे थे। इन्होंने कभी भी नाम नहीं लिया चर्चा करने का। वीडियो बनाने को कहा था। इन्होंने कहा मैं वीडियो बना चुका हूं। वीडियो बनाने को कहा था। ठीक है? इन्होंने अपने लाइव में कहा कि इन्होंने अपने लाइव में कहा कि मैं वीडियो बना चुका हूं। तो वो मैं बताता हूं आपको। मैं एक स्क्रीनशॉट और भेज रहा हूं। मैंने इनको वीडियो बनाने को भी कहा था ना तो जब मैंने इनसे पूछा कई दिनों के बाद कि भाई वह क्या हुआ तुम्हारा वीडियो क्यों नहीं आया हम तो
00:32:30:00 इन्होंने मुझे एक इन्होंने मुझे एक पेज का चित्र भेजा ऑपरेटर से निवेदन है कि वह मैंने अभी अभी भेजा है WhatsApp पर उन्हें तो वह दिखाएं स्क्रीनशॉट तो मैंने इनसे लगभग एक महीने के बाद ये पूछा कुछ दिनों के बाद ये पूछा कि क्या हुआ ना तो तुम्हारा वो निर्गुण सगुण पर वीडियो आया क्योंकि मैं चाहता था कि वहां पे स्किप करेंगे तो जनता देखे स्किप कर रहे हैं। जड़ को इच्छा कैसे प्राप्त हुई? तो इन्होंने निर्गुण सगुण के वीडियो में इनका कहना मैं पहले ही बना चुका हूं। तो भाई तुमने वहां WhatsApp पर मुझे उसका लिंक क्यों नहीं भेजा? क्यों तुम सत्यार्थ प्रकाश का पष् संख्या भेज रहे हो? कौन सा प्रश्न था? प्रश्न संख्या वही जहां उन्होंने निर्गुण सगुण की बात की है दयानंद जी ने। तो अगर तुम बना चुके हो तो वहां पे वो भेजो ना भाई। तुम सत्यार्थ प्रकाश के पीछे क्यों छुप रहे हो? सत्यार्थ प्रकाश के ऊपर ही तो बात हो रही है कि वो गलत है। सिद्धांत उसमें गलत है। कुतर्क किए गए हैं। तो नहीं तुमने वहां पर सत्यार्थ प्रकाश को आगे कर दिया। ये देखिए
00:33:43:15 जब मैंने काफी दिनों बाद पूछा तो तो इन्होंने ये सत्यार्थ प्रकाश का मुझको फोटो भेज दिया। जो अभी ब्लर है वो ऊपर कर दीजिए। तो मैंने इनको कहा यह पढ़ा है मैंने वीडियो बना दो इस पर। यह प्रश्न मैंने वीडियो में कई बार बोला है। फिर मैं देख लूंगा तुम्हारा पक्ष क्या है। ठीक है? तो इन्ह अगर इनका कहना है कि यह निर्गुण सगुण पे बात कर चुके हैं तो इन्होंने वो वीडियो मुझे यहां नहीं भेजा तो मैं क्या मानूं? मैं तो यही मानूंगा ना कि वीडियो नहीं बनाया। तुम जब वीडियो मांगे जाने पर कोई प्रश्न संख्या भेजोगे मुझे सत्यार्थ प्रकाश की तो मैं तो यही मानूंगा कि वीडियो नहीं बनाया। अच्छा तो ना तो इन्होंने वीडियो बनाया इस बीच ना इन्होंने सैद्धांतिक चर्चा की बात कही। कुल मिलाकर के अभी अगर यह माना जाए कि भैया जो अपनी ओर से कहेगा चर्चा करने के लिए उसका पक्ष कमजोर है। जिससे कहा जाएगा उसका पक्ष भारी है तो आप उस चर्चा में सुन सकते हैं। फोन कर करके जो हमें कहा गया कि भैया सैद्धांतिक चर्चा कर लें कर लें कर लें। कई बार कहा गया तो फिर समझ लो कि किसके अंदर हारा हुआ पहलवान जो होता है वो दोबारा भिड़ने के उसमें रहता है। अब मैं हार गया हूं। कैसे इस पे लीपापोती कर सकूं। तो वो घूमता है दोबारा भिड़ने के लिए। तो अब आप इस रिकॉर्डिंग
00:34:58:19 सुनाएं जो इन्होंने जो प्रतिक्रिया दी है जब हमने यह कहा है कि मैं बनारस आ रहा हूं तो आप आकर के जो है चर्चा कर सकते हो बनारस में सुनिश्चित कर लेते हैं कहां पर होगा कहां नहीं होगा तो उसमें इनका पक्ष क्या है सुनिए हेलो जय श्री राम बताओ नमस्ते नमस्ते नमस्ते तुम बनारस में हो अभी वैसे बनारस में तो एक्सक्टली नहीं हूं हूं थोड़ा सा बगल में ही हां तो आ जाना मैं एक दो दिन में आऊंगा कॉल कर दूंगा तुम्हें आपको अगर याद हो तो मैंने कुछ मैसेज किया था हमारी इस विषय में बात हुई थी किस विषय में बनारस आने में आने के विषय में बता दो क्या किया था क्या मुझे याद नहीं हुई हुआ ये था कि आपने कहा था मैं दिल्ली जा रहा हूं हम तो हम कर लेते हैं अगर वही कहीं हूं तो मैंने कहा नहीं फिलहाल तो मैं बनारस में हूं। आगे एक काम करिए अगर आप आ रहे हैं तो कल या परसों आ जाइए। मैंने दो दिन का समय दिया था या तो कल आ जाइए या तो परसों आ जाइए। तो आपने कहा था कि नहीं मैं अपने अभी समय नहीं अपने यथासमय बुलाऊंगा। तो उसमें मैंने आपको बताया था कि ऐसा है कि एक तारीख से मेरे यहां कंस्ट्रक्शन का काम लगने वाला है। अगर
00:36:13:20 आप WhatsApp मैसेज में चेक करेंगे आपको ये लिखा हुआ मिल जाएगा। मैंने बोला था कि उसके बाद से मैं हो जाऊंगा व्यस्त। तो अगर आपको आना है तो उसके पहले पहले आ जाइए। कंस्ट्रक्शन का काम कब खत्म होगा? देखिए अब जब हो तब हो नहीं बता सकते मतलब कुछ निश्चित नहीं बता सकते कि हम लोग चर्चा कब कर सकते हैं। देखिए एक तो इसमें दो तीन बातें हैं। मैं थोड़ा सा और स्पष्ट कर देता हूं। यहां पॉज पॉज करिए। एक तो पहली बात तो ये हो गई कि बनारस आने वाली यहां पे ये तो क्या था कि ये तो मैंने पहले ही हां अब देखिए हम क्या है ना झूठे की हद तक और चोर के घर तक वाली बात करते है ना सनातन जी जब उसने ये बताया कि कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है पहला जो एक्सक्यूज है चर्चा से पलायन का तो उसने जब ये बताया कि भाई क्या कहते हैं कि मेरे घर में कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है और ये मैं पहले ही बता चुका हूं। ठीक? तो मैंने सीधे क्या बात कही कब तक चलेगा कब तक चलेगा भाई अंदाजा बता दो तो उस हिसाब से हम अपनी यात्रा कोई देख लेंगे ऐसी जिसमें दोनों का समन्वय हो जाए तो व्यक्ति अब क्या कर रहा है अब वो आया अपनी दूसरी बात पे दूसरा बहाना अब दूसरा बहाना सुनिए चलिए
00:37:22:04 जैसा कि आपको बता दिया था WhatsApp मैसेज में एक तारीख से मैं हो जाऊंगा व्यस्त ठीक है तो उसके बाद अगर आप तीन चार पांच छ 10 15 दिन अगर कुछ भी बोलते हैं तो वो तो वैसे भी नल एंड वॉइड है हम उसके अलावा अलावा इसमें एक और बात थी कि अब जैसे एक ये बात आ जाती है कि अगर मान लीजिए आप कहीं भी जाते हैं। ठीक आप कहते हैं भैया मैं यहां आ रहा हूं आ जाओ जिसको चर्चा करनी हो आ जाओ उसमें फिर हमारे ऊपर स्थिति आ जाती है ना कि फिर हम जाना चाहते हैं करना चाहते हैं किसी और स्थान पे परेशान होना चाहते हैं दो घंटे तीन घंटे ट्रेवल करना चाहते हैं या नहीं एक ये भी बात आ जाती है है ना तो एक ये बात है पॉज कर तुम्हारी ये तो फिर तुम्हारी वो है स्वच्छ अब देखो यहां पे बात क्या आ रही है कि ये बंदा ये कह रहा है कि हम दो घंटे तीन घंटे परेशान होना चाहते हैं कि नहीं चाहते सबसे पहली बात क्या है कि हमने अभी तक यह तो डिसाइड किया ही नहीं है चर्चा कहां पे होगी हमने तो ये कहा नहीं हां दूसरी बात कि हम भी तो आ रहे हैं ना 400 किलोमीटर 400 किलोमीटर हम भी आ रहे हैं और इस चीज का ध्यान देते हुए आ रहे हैं कि चर्चा तुमसे भी हो जाए अगर हम किसी और कार्य से भी वहां जा रहे हैं फिर भी हम अपने ठिए पे तुमको नहीं बुला रहे हैं हमने तो नहीं कहा कि तुम लखनऊ आ जाओ ठीक है तो हम अपने घर से निकल के 400 किलोमीटर दूर
00:38:37:10 आ रहे हैं और इस तरह से आना चाहते कि तुम्हारा भी उसमें समन्वय हो जाए। दूसरी बात हमने यह नहीं कहा कि तुम भी आ वो कि अमुक जगह पर ही होगी। भाई हो सकता है वो तुम्हारा ही स्थान हो। तुम पूछो तो कि कहां पे बुलाओगे? हमने ये नहीं पूछा। अच्छा तुम तुम तुमने ये तक नहीं कहा कि मैं इस गांव में रहता हूं। यहां आ जाओ। चलो। इसको कहते हैं सीने पर जो घाव है वो फूलों के गुच्छे हैं। हमें पागल ही रहने दो। हम पागल ही अच्छे हैं। भगत सिंह जी ने कहा था। ठीक है। इसको कहते हैं झूठे की हद तक और चोर के घर तक। भाई मैं तो तुमसे सीना तान के कह रहा हूं। आ जाओ लखनऊ। लखनऊ आके फोन करो। मैं तुम्हें बुलाऊंगा अपने पास बैठ के चर्चा करना। तुमने क्यों नहीं कहा कि भाई मैं और भैया मुझे जो है वहां आने में दिक्कत है। मैं नहीं आना चाहता। आप यहां आ जाओ। या भैया मत कहो। तुमने जो भी कहा हो तुम्हारे हिसाब से जो भी हो। तुम वो बात बोलो ना कि मुझे आने में दिक्कत है। तुम यहां आ जाना। मेरे को आने में दिक्कत होगी दो-ती घंटे। तो क्या कह रहे हैं कि हम दो तीन दो तीन घंटे का सफर करके मैंने तो नहीं कहा कि यहीं पर आना है और बीच की स्थिति से ज्यादा मेरा ज्यादा आना हुआ तुम बनारस के पास में हो तो तुम्हारा कम आना हुआ उस हिसाब से बीच की स्थिति नहीं है ये तुम्हारे पक्ष की स्थिति है और उसमें भी अभी मैंने ये डिक्लेअ नहीं किया नहीं यहीं पे चर्चा होगी भाई जब मैं बनारस आऊंगा तो 500 किलोमीटर
00:39:52:24 और भी आ सकता हूं इधर-उधर मैंने कब मना किया मगर अब आपकी स्थिति क्या हो गई है कि आपका तो पलायन ही है स्पष्ट तो आप यह कहोगे नहीं कि भैया मेरा घर इधर है यहां आ जाओ वहां आ जाओ वो तो जो गुर्दा लेकर जन्म लेते हैं ना मां की कोख से वो ऐसी बातें कर पाते हैं ठीक है तो ये सब बातें जो है वो बाजार में बिकने वाली चीज नहीं बच्चों का खेलने खिलौना नहीं है ये मर्द लेकर के ये सीना जन्म लेते हैं कि आ जाओ यहां पे हूं है ना तो वो भी नहीं तुमसे हुआ तुमने तो इस चर्चा को टालने के लिए वो बात बोली सीधे कि भाई मैं भी जो है दो-ती घंटे ट्रेवल करके क्यों आऊंगा। यह एक्सक्यूसेस बहाने जो अच्छा दूसरी बात इन्होंने कहा कि आगे चला दो आगे चला दो। अब ये बोलेंगे कि क्यों इनको ये अपना अपनी ओर से वो नहीं प्रयास करना चाहते हैं। चलाइए आगे। अच्छा कि आना है तो आ सकते हो। हां हां वही वही मैं बात बता रहा था। अगर कोई मजबूरी है तो वो तो बात एक अलग है। फिर हम देखें कि भाई क्या कहते हैं तुम्हारा कंस्ट्रक्शन कब खत्म होगा? उसके बाद मेरी ट्रिप कब लगती है? तुम कहां पर हो उस समय? क्योंकि तुम दिल्ली होते तो दिल्ली भी मुझे जाना ही था। दिल्ली वाला अभी कैंसिल हुआ है।
00:41:07:25 मुझे वहां जटा बाबा के यहां आना ही है। अच्छा अच्छा। हां। तो वहां मैं आ रहा था। कुछ और संस्थागत कार्य भी थे। तो मैंने कहा कि वहां पे तुम वो बनारस में वाराणसी में तुमने अपने मैसेज में बताया था। जी जी मैंने साथ में ये भी बताया था कि एक तारीख से व्यस्त हो जाऊंगा मैं। नहीं तो उसमें तो यह हो सकता है कि अगर हमारे लिए कुछ विशेष ही है तो हम फिर उसके लिए समय निकालते हैं। वैसे तो ये बात फिर तुम अगर सुनिश्चित करोगे तो फिर बाद में देख लिया जाएगा। बाद में भी देख सकते हैं और फिलहाल मैंने जैसे बताया ना मैंने पहले ही ऐसा नहीं कि मैं अभी बोल रहा हूं कि मैं व्यस्त हूं। यह जिस समय हमारी चर्चा हुई थी उसी समय मैंने लिख दिया था और ध्यान नहीं है तो मैं देता हूं स्क्रीनशॉट वैसे तो कुल मिलाकर के मैंने एक बात कही कि बाद के लिए बाद की सुनिश्चितता दे दो इस व्यक्ति ने सुनिश्चितता के मामले में मौन धारण किया सुनिश्चितता नहीं देंगे है ना जी चलाइए
00:42:12:28 ठीक है मुझे मुझे ध्यान ब्लॉक नहीं हूं आज अनलॉक किया था अच्छा अच्छा ठीक है तो और एक और बात है कि ज्यादा अच्छा ये रहे कि अगर आप लाइव पे आ जाए मेरे साथ चर्चा में तो लाइव पे तो तुमने ऐसी बात बोल दी ना मैं तो आना चाहता था पर तुम पहले से पहले प्रेडिक्ट करके और कुछ का कुछ बोल देते हो इसलिए वो चीजें मैंने तो आपको आप देखिए लाइव देखिए मैंने तो आपको बोला कि मैं हाथ जोड़ के बड़े विनम्र भाव से विनय भाव से आपको आग्रह कर रहा हूं ये वो बोला ना वो बोला मगर तुमने जो पहला वीडियो जो बनाया था उसमें तुमने यह बोला कि भाई वो आपको जो है मैंने हिला दिया है। तुमने WhatsApp में भी बोला कि मैंने हिला दिया है और अब आपको लोग ट्रोल कर रहे हैं तो इसलिए आप मुझसे संपर्क कर रहे हो। ये तुमने अपने लाइव में बोला। देखिए इसमें इसमें एक बात मैं कभी भी प्रेडिक्टबल बातों पे नहीं बात करता हूं कि मैं मैं तुमको यह महसूस करा हूं कि तुम अब देखिए बात क्या है कि यहां पर यह वाली जो बात है कि आप मेरे से इसलिए संपर्क कर रहे हो चर्चा करने का क्योंकि मेरा पलड़ा भारी है। ठीक है? तो भाई पहली बात तो तुम्हारे सिद्धांत के अनुसार तुमने मुझसे बार-बार फोन कर करके कहा सिद्धांत विषय बात करनी है तो तुम्हारा पलला कमजोर है। उस चर्चा में तुम हारे सिद्ध होते हो। ये हमारी नजरों
00:43:28:00 में स्वतंत्र रूप से सिद्ध होते हो। बाकी तुम्हारे सिद्धांत के अनुसार भी तुम सिद्ध होते हो। दूसरी बात ये आती है कि अगर अब मैं बोलना नहीं चाहूंगा। यहां उदाहरण तो ऐसा कड़क वाला है ही है कि पुलिस किसी जगह छापा मारने जाती है तो वहां पुलिस की गरज होती है क्या अगर किसी चोर चक्कर को पकड़ने जाएगी कुछ करने जाएगी तो आवश्यक नहीं है कि उसका पल्ला भारी ही हो जब वो ऐसा हो है ना और तीसरी बात ये है कि तुम कोई विशेष व्यक्ति नहीं हो जो तुम्हारे जो तुम सोच रहे हो कि मैंने कुछ ऐसा कर दिया है तुमने क्या किया वो तुम्हारे लोग सुनेंगे और वो जवाब दें आकर के जड़ को कैसे प्राप्त हुई ईश्वर की इच्छा? हालांकि सर्वशक्तिमान की व्याख्या अलग है। ये तो केवल इस विषय में है कि ईश्वर अपने नित्य स्वरूप जो एक स्वरूप धारण करके ईश्वर की सृष्टि की रचना करता है कि नहीं। केवल इस विषय में क्योंकि वो स्वभाव के विरुद्ध जाता है कि नहीं ये बात आ जाती है ना। उसका तो स्वभाव है कि वो एक रस है। तो कैसे फिर वो एक जगह धक्के का विषय बन बन जाएगा। यही तो हार है इनकी आर्य समाजियों की पूरी। यही मौन है। पूरा आर्य समाज मौन है। सब जगह बातें कर लेंगे। फिर वो इधर-उधर की बातें करने लगेंगे। खैर कुल मिलाकर के क्या है कि एक
00:44:44:04 जो वैश्या भी होती है उसके यहां पर भी अगर कुछ आपत्ति प्रकट करने कोई जाता है तो इसका मतलब यह नहीं कि उस वैश्या का पलड़ा बहुत भारी है और यह किसी व्यक्ति व्यक्ति निष्ठ हो के बात नहीं कही है मैंने किसी व्यक्ति को केंद्र में करके एक सिद्धांत स्वतंत्र रूप से एक सिद्धांत बताया तो इसका मतलब यह नहीं कि वैश्या का पल्ला भारी है हम अगर आपत्ति करने जा ही रहे हैं ठीक ठीक है? ये सब तुम्हारी अपनी व्याख्याएं हैं कि किसी का पल्ला भारी था तो हम गए, नहीं गए। हां, ये बात हो सकती है कि हम ये कह सकते हैं कि भैया अगर वो चोर भी है और अपनी चोरी के क्षेत्र में बहुत बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। जैसे दाऊद है ना? अगर कोई दाऊद है या और कोई है कोई गलत व्यक्ति भी है और उस गलत के क्षेत्र में उसने बहुत बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। जैसे रामपाल रामपाल क्या है? रामपाल की बातें दो कौड़ी की है। उसका कोई पल्लावल्ला भारी नहीं है किसी जगह विषय में। मगर उसने प्रचार अपना ऐसा करके अपने आप को ख्यापित कर लिया है कि उसका वो जो तथाकथित जो ताना-बाना है उसको ब्रेक करना आवश्यक है। है ना? हम अब तुम ये कहो क्योंकि रामपाल का सैद्धांतिक पल्ला भारी हो गया था। उन्होंने शंकराचार्य को बुलाया था।
00:45:59:10 पत्र लिखा था और वो गए नहीं थे। आज जो उसका पल्ला भारी है तो आप जो आप उनसे चर्चा करने जा रहे हो तो क्या यह बात उचित मानी जा सकती है? बिल्कुल भी नहीं। तो ये आवश्यक नहीं है कि यदि हम किसी का विरोध करने जा रहे हैं तो उसका सैद्धांतिक पल्ला भारी हो गया। हां उसने मामा आ गए मामा आ गए कर करके कर करके अपने आप को ऐसा जरूर बना लिया। पब्लिसिटी ऐसी जरूर कर ली है जो आवश्यक लगा तो गए। तो यह बात भी तुम पर लागू हो सकती है कि तुमने तुम्हारे और तुमने लोगों ने मामा आ गए। मामा अगर कर रहे हो तो हम भैया तुम्हें आईना दिखाने आ रहे हैं। ठीक है? हमने ये कभी नहीं कहा है। हमने ये कभी नहीं कहा है कि यही एक आधार हो सकता है किसी के पास चर्चा करने जाने का। हां। मगर तुम्हारे क्या कहते हैं? तुम्हारे क्षेत्र में हमारे अनुसार यदि तुम गलत हो और उस गलत में तुमने मामा आ गए मामा आ गए करके कुछ पिक्चर एक बना ली। उसको ब्रेक करने भी हम आ सकते हैं। इसका मतलब ये नहीं कि तुम्हारा सैद्धांतिक पल्ला भारी हो गया था। इसका मतलब ये है कि तुमने अपनी जो पीआरओ टीम है पीआर टीम है उसका सदुपयोग किया। जैसे स्पॉन कर रहा है और भी बहुत जगह किया जाता है। ठीक है? और तुम्हारे विषय की अगर बात करें स्वतंत्र रूप से तो तुम्हारे विषय में तो हमारा यह मानना था कि हमने आमने सामने की चर्चा के लिए बात रखी हुई थी बीच की कि भाई जब तुमने अपने चैनल के बारे
00:47:14:14 में तो ऐसी बातें कर दी है। तो आमने सामने चर्चा के लिए ऐसी बात की हुई थी तो हम वहां आ रहे हैं तो तुम्हारा भी समन्व में बिठा लेंगे। इस तरह से आ जाएंगे कि तुम्हारा समन्वय बैठ जाए। है ना? उसमें कोई ऐसा नहीं था कि हम 100 किलोमीटर और दूर नहीं जा सकते। मगर इनका इसका इसकी बौखलाहट देखो एक स्तर से किस तरह से गिर रहा है यह व्यक्ति। इसकी बौखलाहट देखना अभी आप अभी और भी रिकॉर्डिंग्स है। जी चलाइए। तुम अपने आप को हारा हुआ समझते हो ना। देखिए हां मैं मैं तुम्हें हारा हुआ समझता हूं। ये मैं मान सकता हूं। ये मैं कह सकता हूं। इसमें एक बात ये आती है। ठीक है? बात ये आती है कि एक होता है सामाजिक प्रभाव का। ठीक है? पहले जिस समय आपका सामाजिक प्रभाव मुझे लगा कि था तो मुझे आवश्यकता लगी तो मैं आपके यहां भी गया है ना फिलहाल जो स्थिति मेरे दृष्टिकोण में है वो आपका सामाजिक प्रभाव नगण्य है तो फिर मैं ऐसा कुछ जरूरत महसूस नहीं करता कि मैं आपके पास जाऊं ये एक बात है ये मैं अपना दृष्टिकोण बता रहा हूं आप व्यक्तिगत रूप से आपका क्या मानते क्या पहले मेरा सामाजिक प्रभाव अलग लगता था अब नहीं लगता हां परिव आप भी जानते हैं स्थिति परिवर्तित होती है कोई बड़ी बात नहीं ठीक है ठीक पॉज कर लीजिए अब देखिए सामाजिक प्रभाव की बात है तो हमारी जो चर्चा है कॉल वाली वो चर्चा सबने तो सुनी नहीं थी। ठीक है? अभी
00:48:29:15 जब तक जब तक वो लोगों ने सुनी नहीं है उससे पहले तक तो लोगों ने सुनी नहीं थी। तो सामाजिक प्रभाव इसका इसके हिसाब से मेरा जो सामाजिक प्रभाव जो कम हुआ है वो उस चर्चा की वजह से खत्म हुआ है। किस चर्चा की वजह से? वो जो मेरी और इसकी आमने सामने हुई है। उसी चर्चा की वजह से कम हुआ है। ठीक है? तो फिर जब कम हो गया तो ये फोन पे क्यों कह रहा है भैया सैद्धांतिक चर्चा कर लेते हैं बार-ब क्यों कह रहा है हम हम कह रहा है ना अगर इसको कहते हैं चाल इसको कहते हैं टेक्निक बदलना हम हम मैं दिखा देता हूं लोगों को सुना देता हूं भैया वो जरा वो वाला मेरा वीडियो लगाइए लास्ट वाला पार्ट है जो लास्ट वाला पार्ट है जो बड़ा वाला वीडियो दो ढाई घंटे का
00:49:22:14 ठीक है तब तक हम दूसरी बातें कर लेते हैं। आप तब तक खोल लीजिए। जी जी शास्त्रवाद जी कुछ बोलेंगे। आप बोले जी जी नहीं अभी ये जो रिकॉर्डिंग है इसमें तो यही लग रहा है कि ये चर्चा से जो भाग रहा है क्योंकि जब आप दिल्ली आए थे आपको याद होगा हमने चर्चा कहां पर बैठ के की थी अगर कंस्ट्रक्शन का भी काम हो रहा है तो चर्चा जरूरी नहीं कि कंस्ट्रक्शन वाली जगह पर ही हो उसके आसपास भी हो सकती है 1/2 किलोमीटर के दायरे में भी हो सकती है कहीं पेड़ के नीचे भी हो सकती है कहीं खुले में बैठकर भी हो सकती है ना तो वो सब बहाने होते हैं और आपके पास तो ट्राईपॉड है माइक है वो तो सारा पोर्टेबल सामान है ऐसा तो है नहीं कोई पूरा आपको कोई स्टूडियो बनाना है जिसको चर्चा करनी है वो कहीं खुले पे भी कर सकता है ये सब जो बहाने है जय श्री राम जी शास्त्र जी
00:50:35:08 जी भैया मेरे यहां पे थोड़ा नेटवर्क खराब है तो हो सकता है मेरा आवाज फसे बीचबीच में हां जी हां अपना पक्ष यहां पे आवाज आ रही है हेलो हम इसमें वो एक घंटे की चर्चा निकाल दीजिए आप लगभग लास्ट की जब ये दो घंटे की निकाल लीजिए लास्ट की 50 55 मिनट की रह जाएगी चर्चा वो सेकंड पार्ट चालू होगा प्ले करिए आज
✅ This part is already used · 00:51:11:08 – 00:52:13:06 (1:02)
→ Used in: A · Video परंपरा के विषय पर अब तक की सबसे स्पष्ट और निर्णायक वार्ता at 5:15 ↗
00:51:11:08 तक क्या आप ये मानते हैं? बिल्कुल हां तो मेरे पास इसका विरुद्ध मैं प्रमाण में दे देता हूं। बता दूं इसका आप खोलिए। निरुक्त एक 20 और आगे बढ़ाइए। निरुक्त एक लगभग आधा घंटा वहां पर जो बात हो रही है वो इस केस में हो रही है कि स्मृति क्षीण हो रही है। इसलिए ये वाला सहारा भी रख लो। है ना? मगर सहारा थोड़ी है। सुनो तो मेरी बात सुनो। मगर यह नहीं है कि अगर किसी को याद है तो उसका विरोध विरोध ही करो। हुई है। निरुक्त में ही मैंने खुद निरुक्त में जो भी परंपरा की बात हुई वेदार्थ की परंपरा की बात हुई है। और और आगे मैं कह रहा हूं निरुक्त में जो और एक मिनट एक मिनट
00:51:56:04 भाषा में लोग भाषा में निषेध अर्थ वाला यहां नहीं है वो वाली बात बहुत लंबा हो रहा है। 10 15 मिनट आगे ना तो ये जो लिख रहे हैं क्योंकि वेदांत की परंपरा आ रही है ना अद्वैत वेदांत की तो उन्होंने उसके आधार पे तो वेदांत को वेदांत को वेदांत को
⬜ Not used yet · 00:52:13:06 – 00:52:30:04 (0:17)
00:52:13:06 वेदांत है कोई बीच में मत कोई बीच में विश्वास पात्र है ना जो ये बोल रहा है उनका मनुस्क्रिप्ट है और 15 मिनट आगे उस वो निकल गया मुंह से मगर ऐसा कुछ नहीं कि मैं सोच समझ के कर रहा हूं मैं ये कह
✅ This part is already used · 00:52:30:04 – 00:53:02:21 (0:33)
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→ Used in: B · Video जड़ पदार्थों को ईश्वर की इच्छा किस रूप में प्राप्त हुई? अवतारवाद को निर्भय कर दे... at 12:48 ↗
00:52:30:04 रहा हूं कि जितनी बार निर्गुण सगुण की बात अभी तक हमारे बीच में आई आई है तुमने वहां से मतलब वहां पे और क्लियर कट तुम तुमने बोला क्या था छोड़ दो उसको हटाओ उसको डिलीट कर रहे हो मैं मैं उसको पीछे चलो सुनो मैं बता तुम क्यों पूछ रहे मैंने आपने जब वो बोला ना कि धक्का लगाता है आपने बोला ना कि धक्का लगाता है धक्का लगा मैंने उसी पे ही मैंने आपको धक्के वाले पे ही प्रश्न किया ना कि धक्का लगाने के लिए उसका सन देश होना जरूरी है तो क्या ईश्वर को तो क्या उनकी सही मानसिकता क्या थी अब उनकी उनकी परंपरा का व्यक्ति बता रहा है उनकी मानसिकता आप
⬜ Not used yet · 00:53:02:21 – 00:55:56:02 (2:53)
00:53:02:21 एक काम करिए तुम करिए गैप मत लीजिए फॉरवर्ड करिए वो जो करते हैं ना तीन की स्पीड पे चार की स्पीड पे वो प्ले कर दे वो करके फॉरवर्ड करिए मैं इसमें देखता हूं मोबाइल में एक मिनट मैं टाइमिंग निकालता हूं जरा अंतिम भाग में ही है वो सारा लास्ट हां अंत में ही है अंत में ही है
00:53:50:26 एक मिनट संविधान से ही है आपको उन्हें झूठा सिद्ध करना झूठा मानना पड़ेगा और बात की शाखाएं भी लुप्त हो चुकी है ये भी लीजिए तो कहना पड़ेगा ईश्वर की शाखा दे तो तुम सिद्ध करो तुम्हारा वैदिक वेदांत के ईश्वर ने वेद के रूप में कर रखी थी इसीलिए किसी भी है तो उसमें हमारा झूठ अगर आप
00:54:41:22 नहीं नहीं 247 नहीं रुकी पीछे उच्चारण करके अध्याय पाठ होने वाला कोई मानना पड़ेगा तो वो वेद भी दिखा देंगे बात ये है कि तुम जहां पे तुम्हारी बात आ रही है सबसे पहले मैं अभी जो वेदा दोबारा भगवान को आना पड़ेगा नहीं तो आप प्रज्ञा शक्ति ये आपने बोला ना की पॉइंट दूसरा पॉइंट ये की अगर मैं मानवी नेताओं के वेदार जो है वो किसी को याद नहीं हो रहा
00:55:19:25 है और कुछ और क्या ठीक का मतलब बात भाई कोई कोई आप लोगों में से कोई मदद कर दे वहां पर देख ले हमारा जो वीडियो है दूसरा वाला उसको देख करके टाइमिंग बताए यहां पर वो जो है जो है नाम क्या है देवताओं
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→ Used in: A · Video अलंकारी हेतु को अवतार का धक्का | बच्चे को अध्ययन की और आवश्यकता है at 1:36 ↗
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00:55:56:02 के लिए प्रयुक्त होती थी देवता विषय दृष्टियों द्वारा वैदिक मंत्र इसी भाषा में निबद्ध है इन मंत्रों के अध्ययन के लिए आगे आचार्य मंत्रों का करता करता था। उनके पीछे पीछे अध का उच्चारण करते हुए अध्ययन करता था। उसके पीछे पीछे उच्चारण करके अध्ययन करने के कारण वेद मंत्रों को अनुप सुरक्षित रखते हुए सगुण अवतार लेता है और अब वो जो है क्रियाशील होता है। क्रिया करने के लिए ही उसे कहीं कम कहीं ज्यादा होना पड़ेगा। मेरे भाई क्रिया हो ही नहीं सकती जब वो सही सब जगह है। उस दृष्टि से तत्व की दृष्टि से केवल इच्छा मात्र कर रहा है। मगर हमारी से तो हमें कुछ ना कुछ उसका बल प्राप्त हुआ ना कि हम किसके नहीं तो हमें मानना पड़ेगा केवल वो सोचता है उसके बाद
⬜ Not used yet · 00:56:34:24 – 00:57:51:13 (1:17)
00:56:34:24 मैं ये कह रहा हूं जहां पर वो चैप्टर बदलता है ना लास्ट इस पार्ट में एक जगह आता है डेढ़ घंटे पौने दो घंटे बाद एक जगह चैप्टर बदलता है ना बल है ना कुछ है ना फोर्स है कुछ जी ठीक है अब देखिए तो चलिए आपने अपनी व्याख्या कर दी ना अब तो अब अब तुम इस पे और करो आपकी बात सुनी जब मैं बोलना चाहूंगा है भाई मैंने तुम्हें बताया कर लो मैंने सोचा 15 मिनट और पीछे हो तो अब तो इस और करो और पीछे अब देखो सबसे पहली बात तो क्या है मैं कह रहा हूं कि मुझे चर्चा नहीं करनी ये व्यक्ति कह रहा है कि चर्चा करनी है मेरा दीूंगा वो है सर्वव्यापक एक रस है
00:57:21:27 ठीक है कुछ गुणों से सहित कुछ गुणों से रहित हल्का थोड़ा सा पीछे और करो। यहां पे ये कहेगा कि सैद्धांतिक चर्चा कर लो पहले। इसलिए उसको निर्गुणी से गुण बोला जाता है। पॉइंट आ जाता है। मतलब हमारा हर तरीके से एक रस नहीं है। पहली बात तो हम ये मान ले। कुछ गुणों में एक रस है। कुछ गुणों में जो है कम ज्यादा है। एक रस का मतलब क्या होता है? एक रस इसको ईश्वर को एक रस का मतलब समझा दो। एक रस की स्थिति हर तरह से नित्य बिल्कुल कहीं भी अभाव नहीं कि यहां इतना है यहां ज्यादा है यहां कम है ये नहीं बिल्कुल इक्वल हर तरह से एक रस 35 ये
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00:57:51:13 जो मैं थोड़ा सा इसमें और ओवरव्यू इसमें उधर बात करना चाहता था ये तो बिना अल्टीमेटम के आप विषय में घुस गए हां बस बस बस बस बस बस इससे थोड़ा इसमें जो टॉपिक रह रहे हमारे सिद्धांतिक चर्चा के एक तो हम उस पर चर्चा कर रहे थे परंपरा पे इससे लगभग दो तीन मिनट परंपरा वाला टॉपिक जीव हिल के हाथों को उठाता है क्या? तो आप वहां पर बताओ ना वहां बल है कि क्या है पीछे? जैसे जैसे जैसे मेरे शरीर में जीव है। ठीक है। मैंने चाहा
⬜ Not used yet · 00:58:22:14 – 00:59:14:28 (0:52)
00:58:22:14 मैं हाथ उठा। तुम होते वही क्या हुआ? प्ले करिए भाई। आ तो गए बिल्कुल पास में आ गए कल की वाले मुझे से बड़े खिस आए हुए हैं बस बस बस इधर उधर चलने दो इसको चलने दो सुनो यहां से सुनो मैं कहीं जा रहा हूं अपनी पैकिंग हमारे भगवान आए थे 2006 में गोली मारकर हत्या कर दी गई उनकी बताओ इनके भगवान का हानि पड़ गए पता भी नहीं चला चेलों को प्रचार करना पड़ रहा है और बताओ और भैया वही तैयारी चल रही थी तो हम निकलना था बस थोड़ी बहुत देर में ही तुम्हारी भाभी अच्छा कर रही है
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00:59:14:28 वही थोड़ा सिद्धांत वगैरह सोच रहा था चर्चा करूं अगर आपके पास समय हो तो अरे हो तो गई अपने भी
⬜ Not used yet · 00:59:21:22 – 01:01:03:20 (1:42)
00:59:21:22 ये क्या बोल रहे हैं भाई साहब ये जब उस चर्चा में ये परास्त कर चुके हैं हमको तो इनके किस बात की यहां पर वो बाकी रह गई है जो ये बार-बार कह रहे हैं सिद्धांत पे चर्चा करो थोड़ा सिद्धांत वगैरह सोच रहा था चर्चा करूं अगर भाई इन्होंने उन्होंने कहा हमारा सामाजिक प्रभाव क्षीण हो गया। क्यों हो गया कि उस चर्चा में इन्होंने जो है वो झंडे गाड़ दिए अपने तो जब सामाजिक प्रभाव हमारा क्षीण हो गया है तो फिर ये क्यों परेशान है सिद्धांत पे चर्चा करने के लिए और मैं मना कर रहा हूं कि भाई हो गया तुम अध्ययन करो जाकर के। नहीं नहीं मैंने कर लिया है। परेशान तो तुम हो भाई। बात बस ऐसी है कि अब तुम्हारे पास और कोई जगह नहीं रह गई है बच के जाने की। हर जगह से तुम फंस रहे हो। तो अब तुमने एक बीड़ा उठा लिया। कहा गया आना है तो हमारे चैनल पर आओ। और उसके भी कारण होते हैं। भाई चैनल पर व्यक्ति अपना कंफर्ट जोन देखता है। हम भी अपने चैनल पर बुलाते हैं। मगर हम उसके पास जाते भी हैं जिससे हमें दिक्कत हो रही होती। हम और तुम्हारे पास आने की वजह बस एक थी कि तुमसे अपनत्व था। जो मैंने कहा था कि सैद्धांतिक चर्चा कर ले। तुमने फर्स्ट टाइम अगर ये सब ना किया होता जो तुमने वो वहां पर जहर उगला था तो हम तुम्हारे चैनल पर आते। क्यों नहीं आते? पर तुमने इस तरह की बातें कर दी कि भाई आप तुम्हें ट्रोल कर रहे हैं
01:00:36:28 लोग इसलिए आ रहे हो आपके आपकी मैंने हिला दिया आपकी वो मैंने चट्टान हिला दी अरे भाई कहां हिला दी तुम तो आ रहे हो मुझसे बार-बार बार-बार यहां मिन्नतें कर रहे हो ना सिद्धांतिक चर्चा करने मैं मना कर रहा हूं नहीं करनी मैं संतुष्ट हूं भाई मैं संतुष्ट बैठा हूं देखो क्या कहूंगा मैं चलाना वो चलाना वहीं से जरा आपके पास
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01:01:03:20 समय हो तो अरे हो तो गई अपने बीच में चर्चा वही पॉइंट अटक जाता है वो सगुण निराकार में तुम इच्छा कर देते हो सगुण निराकार
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01:01:13:10 ये बताइए इच्छा हां ये बताइए जो व्यक्ति को डैमेज कंट्रोल करना होगा अपनी इमेज के लिए या जो भी चीज किसी भी चीज के लिए वो व्यक्ति ये क्यों कहेगा भाई ये क्यों कहेगा वो भाई मैं संतुष्ट हूं हम और यहां तक कि इसमें ये भी ये भी स्पष्ट हो रहा है ना कि मैं उस चर्चा से भी संतुष्ट हूं जिसके आधार पे ये कह रहा है कि मैं अपने आप को हारा हुआ समझ रहा हूं। बिल्कुल यही से स्पष्ट है पूरा देखो क्या कहूंगा मैं देखो हां
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01:01:48:19 तो वो तो सही पॉइंट है ना उसमें क्या उसके पास आर्गुमेंट क्या है आपके पास मतलब सही वहां पे वो संतुष्टिजनक नहीं है ना तुम्हारा ये कहना बल नहीं है वो इच्छा है तो उसमें तो सही पॉइंट है उसमें आपके पास फिर सर फिर उसको शक्तिमान क्यों कह रहे हो इच्छा मान
⬜ Not used yet · 01:02:02:07 – 01:02:22:04 (0:20)
01:02:02:07 कहो दो 24 दो 47 पे ले जाओ जरा इसको तो क्या होता है इनका बताएं इन्होंने क्या जवाब दिया लास्ट में 247 पे ले जाओ
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01:02:22:04 हूं वो जो कार्ब कार्ब इंटेक करता हूं एटीपी की बात कर रहे हैं। चलो एटीपी मान लो चलो एटीपी और को तो उसने इच्छा की उसने इच्छा की उस इच्छा के कारण जो मेरा सूक्ष्म शरीर है उसने एटीपी को यूज़ किया और मेरे स्थूल शरीर पे उसका जो है रिफ्लेक्शन दिखाई एटीपी एटीपी भी जो हो गया वो आपका स्थूल में ही आ गया ये होता है मैं इसको पूरा बोल देता हूं कि जैसे जीव ने चाहा और जीव का
⬜ Not used yet · 01:02:50:19 – 01:04:14:07 (1:24)
01:02:50:19 बहुत गरीब एटीपी भी स्थूल में ही आता है। अरे भाई आया मगर एटीपी का यूज़ किया ना जीव ने एटीपी का एक पावर का एक एनर्जी का जीव ने यूज़ किया ना अब इसी प्रकार से एक भौतिक शक्ति का यूज़ भगवान करेंगे ना तो उस भौतिक शक्ति का क्या वो भौतिक शक्ति को क्या कहोगे तुम जो ईश्वर यूज़ कर रहे हैं जड़ पदार्थों पे अगर तुम अलग कर दोगे तो जिहादी ईश्वर हो जाएगा और एक बात मैं कहना भूल गया यदि हम यह कहते हैं कि ईश्वर ने इच्छा की और यह मत पूछो कि वो इच्छा जड़ पदार्थों को प्राप्त कैसे हो रही है? तो फिर ईश्वर के सर्वव्यापक होने की आवश्यकता भी नहीं है। ब्रह्मा कुमारी और वो जो इस्लामियों का ईश्वर वो भी ले लो। उससे भी काम चल जाएगा। भाई वो नहीं है सर्वव्यापक मगर वो एक देश है। उसने इच्छा की सब जगह सब हो गया। लो क्या जरूरत है सर्वव्यापक होने की? सर्व्यापक होने की जरूरत क्या है? जब इच्छा से सब हो जाना है तो इच्छा से सब होना है हम ठीक है तो फिर तो वो ज्यादा अच्छा है जो नाली में नहीं है फिर तो नाली में नहीं है ये नहीं है वो नहीं उनकी व्याख्या है वो हम तो ज्यादा अच्छा हो गया फिर क्योंकि वो भैया साफ सुथरा बैठा है कहीं पे इच्छा करता है सब काम हो जाता है खैर इसको चलाइए जरा इनकी बातें देखिएगा कैसे
01:04:05:20 बौखलाए लास्ट में देखो चलाओ जीव के चाहने से जो है ये वो सूक्ष्म शरीर है ठीक है इसमें मन बुद्धि चेत अंकार आ
✅ This part is already used · 01:04:14:07 – 01:04:30:14 (0:16)
→ Used in: B · Video जड़ पदार्थों को ईश्वर की इच्छा किस रूप में प्राप्त हुई? अवतारवाद को निर्भय कर दे... at 22:23 ↗
01:04:14:07 जाता है इसमें प्रतिक्रिया होती है जब इसमें प्रतिक्रिया होती है तो इसके प्रतिक्रिया के अनुकूल शरीर में क्रिया होती है। अरे मेरे भाई फिर भी एक एनर्जी का तत्व लिया ना क्रिया कराने के लिए तो वो जो वो जो सारा कुछ एनर्जी का बता रहे हो ये पूरे शरीर के वो स्थूल शरीर में होगा ना तो
⬜ Not used yet · 01:04:30:14 – 01:06:08:24 (1:38)
01:04:30:14 पृथ्वी स्थूल नहीं है एक लेना देना नहीं होता जो जीव यहां क्या कह रहा है कि पावर का यूज किया स्थूल शरीर में होता है उससे जीव का लेना देना ही नहीं होता है भाई अभी तुम ही तो कह रहे हो जीव कमांड दे रहा है अभी तुम ही ना गाना जीव कमांड दे रहा है। अब कह रहे हो जीव का लेना देना नहीं है उस उस शक्ति से। इसको कहते हैं झूठे की हद तक चोर के घर तक। अब ये क्या है? बस ये सोच ये सोचता है कि हम अपनी बातें चार तरह की बोल देंगे। भाई हां भाई एप्पल की स्पेलिंग क्या है? एप्पल की स्पेलिंग में पहला अक्षर क्या है? ए बी सी डी एफ जी एच आई जे के एल एम ओ पी क्यू आर एस टी यू वी डब्ल्यू एक्स वाई जेड। लो अब इसमें घूम जाओ। तो स्थूल इसने अभी क्या कहा कि जीव जो है कमांड देता है। फिर वो जो क्या सूक्ष्म शरीर कमांड आगे स्थूल को देता है। स्थूल जो है स्थूल एनर्जी की चीजों को लेकर के और वो क्रिया क्रियान्वित करवा लेता है। तो यहां से मूल में कौन बैठा है? जीव ही तो बैठा है। और यदि ये मान लोगे और यदि ये मान लोगे कि जीव ने जीव ने आर्डर नहीं दिया है। जीव का कोई लेना देना नहीं है। तो क्रिया अपने आप हो रही है। फिर क्रिया अपने आप हो रही है। फिर तो मान लो वहां ईश्वर ने कुछ नहीं किया। सृष्टि अपने आप बन रही है। फिर
01:05:45:15 हो जाओ नास्तिक। यही चेहरा सामने लाना है। हो जाओ नास्तिक। फिर ईश्वर नियंत्रण करने वाला भी सिद्ध नहीं होता। क्योंकि इच्छा खाली इच्छा नहीं होती। इच्छा के बाद शक्ति है, फोर्स है और उसके बाद फिर क्रिया है। तो तीन स्तर पर वो जाके क्रिया में बदलता है। इच्छा इच्छा जो कर रहा है ईश्वर हां जी प्ले प्ले करिए। देखिए यहां पे कितनी तरह की बातें अभी ये करेंगे। चलाइए ये बहुत बढ़िया समय है ये वाला। दो लेना
✅ This part is already used · 01:06:08:24 – 01:06:40:12 (0:32)
→ Used in: A · Video अलंकारी हेतु को अवतार का धक्का | बच्चे को अध्ययन की और आवश्यकता है at 2:36 ↗
→ Used in: B · Video जड़ पदार्थों को ईश्वर की इच्छा किस रूप में प्राप्त हुई? अवतारवाद को निर्भय कर दे... at 22:44 ↗
01:06:08:24 देना नहीं होता। बिल्कुल सही कह रहे हो। बिल्कुल सही कह रहे हो। अब मुझे ये बता दो कि मेरी मसल्स चिपाक को सिकुड़ने अथवा इलास्टिसिटी होने के लिए एक तुमने एटीपी नामक वो मानी शक्ति। वो ऑर्डर्स कहीं से भी आए हो मगर उस शक्ति का उपयोग हुआ। हां। ठीक। हां। तो जो शक्ति का उपयोग हो रहा है पृथ्वी को खिसकाने इत्यादि में वो और ईश्वर अलग-अलग है क्या? अब देखो शक्ति का प्रयोग हो रहा है इच्छा तो उसका गुण है ना। मैंने
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01:06:40:12 यहां पर यह माना कि अगर तुम मेरे से उदाहरण ले रहे हो ईश्वर का कि जीव कैसे काम करता है तो जीव को एक शक्ति चाहिए जिसके लिए वो खाना खा रहा है जिसके लिए वो कार इंटेक कर रहा है जिसके लिए उसको एनर्जी मिल रही है ठीक है जिसके कारण तो जीव को एक शक्ति चाहिए अब क्या है मनुष्य और प्राणियों के विषय में ये जो शक्ति है ये उसको प्राप्त करनी पड़ती है कहीं और से जो सूर्य से हमें मिलती है एट द एंड है ना और फिर उसी शक्ति का हम हम लोग अपने चेतन के द्वारा ऑर्डर देते हैं। वही शक्ति यहां कमांड करती है। ठीक है? अब भगवान को तो कहीं से प्राप्त नहीं करनी पड़ती है वो शक्ति। तो भगवान के केस में क्या है कि भगवान ही उस शक्ति के रूप में वो जड़ पदार्थों को क्रियान्वित कर रहे हैं। तो मैं ये बात यहां पर मैंने यही बात इससे पूछी है। तो मेरे विषय में इसने मान लिया कि एक अलग से शक्ति है एटीपी नाम की। इसने मान ली मेरे विषय में। मगर जब ईश्वर के विषय में गए कि वह पृथ्वी को धक्का कैसे लगाया तो वहां पर फिर स्किप स्किप बटन दबा दो। चर्चा में जब जब यह बात आए कि जड़ पदार्थों को क्या कहते हैं? ईश्वर की वो इच्छा प्राप्त कैसे हुई? भाई इच्छा क्या है? इच्छा है विचार। उसका अधिष्ठान क्या है? चेतन। चेतन। जड़ पदार्थ। जड़ पदार्थ
01:07:55:18 में चेतन मानते हो क्या तुम? या तो अद्वैती बन जाओ। अद्वैती बन जाओ। फिर कोई दिक्कत नहीं है अवतार लेने में खंबा फाड़ के नरसिम्हा भगवान आ जाएंगे तो फिर देखो अभी देखना क्या क्या किया है इसने लास्ट में यहां पे 247 के बाद सब लोग ये चर्चा शुरू इसने क्या बोला है देखो
✅ This part is already used · 01:08:16:12 – 01:08:32:07 (0:16)
→ Used in: B · Video जड़ पदार्थों को ईश्वर की इच्छा किस रूप में प्राप्त हुई? अवतारवाद को निर्भय कर दे... at 23:16 ↗
→ Used in: A · Video अलंकारी हेतु को अवतार का धक्का | बच्चे को अध्ययन की और आवश्यकता है at 2:57 ↗
01:08:16:12 देखा बस क्या अब तुम अब फिर बात करेंगे अब मैं थक गया अब फिर बात करेंगे मुझे निकलना भी है यहां पे तुम थोड़ा वैसा दे रहे हो धुंधला आंसर क्लियर नहीं कर रहे हो नहीं धुंधला मतलब कैसे मैं समझ अब यहां तुम इच्छा पे क्यों ले आए तुमने माना मेरी
⬜ Not used yet · 01:08:32:07 – 01:09:37:13 (1:05)
01:08:32:07 मसल्स को एनर्जी नामक तत्व जिसको तुमने ही नहीं कर रहे तो मैं यहां पर थक चुका हूं। वही आंसर सुन सुन के ये स्किप करता है। अब मेरा सॉफ्ट कॉर्नर है इनको लेकर के तो मैं वहां पर इनको जो है धुन नहीं रहा हूं। बस इतनी बात है। जो धुनना है वो नहीं कर रहा हूं। मगर वो भी सॉफ्ट कॉर्नर होने की वजह से कि भाई मुझे ठीक है। अब ये नहीं बोलना चाहता। ठीक है। हम अन्यों के साथ चर्चा कर करके कर करके वो चीज हम समाज के समक्ष ले आएंगे। और मैंने कई लोगों से पूछा है ये वाला प्रश्न कि ये जो बल है ये अलग-अलग हो रहा है ना ये प्रश्न मैंने पूछा और सब निरत्तर है तो मैंने कहा कि इसको लेकर के मैं सॉफ्ट कॉर्नर था तो मैंने कुछ कहा नहीं और मैं थक चुका हूं तो मैं कितनी बार वही बात बोलू ये स्किप करते हैं अब मैं वहां बोलू यहां पे तुम स्किप कर रहे हो झूठ बोल रहे हो बचने की कोशिश कर रहे हो और जब मैं बोलता हूं तो बिगड़ जाएगा तो एक जो छोटे भाई की दृष्टि से भाई जो दुलार होता है चलो ठीक है तुम बिगड़ो मत नहीं करते चर्चा छोड़ो आगे बढ़ो है ना? तो देखो अभी क्या होगा। चलो टीपी नाम दिया। अब जैसे मैंने मैंने जो उदाहरण दिया था
✅ This part is already used · 01:09:37:13 – 01:09:48:00 (0:11)
→ Used in: A · Video अलंकारी हेतु को अवतार का धक्का | बच्चे को अध्ययन की और आवश्यकता है at 3:19 ↗
→ Used in: B · Video जड़ पदार्थों को ईश्वर की इच्छा किस रूप में प्राप्त हुई? अवतारवाद को निर्भय कर दे... at 23:42 ↗
01:09:37:13 वो क्या दिया था? मैंने उदाहरण ये दिया था कि जिस प्रकार इसीलिए मैंने उसमें दो तीन पॉइंट इसीलिए रखे हुए थे। अब इसमें मैंने उसमें बोला था विचार का भी बोला था। है ना? विचार अब इसमें ये होता है कि जैसे हाथ हिलाने पर
⬜ Not used yet · 01:09:48:00 – 01:10:44:09 (0:56)
01:09:48:00 जीव का डायरेक्ट नहीं होता है। इसकी और सुनने लायक है। पीछे करो। मैं भूल गया एक कमेंट पढ़ने लगा था। जरा सा पीछे करो हल्का सा। दिया नहीं अब अब जैसे मैंने मैंने जो उदाहरण दिया था मैंने क्या दिया था मैंने उदाहरण ये दिया था कि जिस प्रकार इसीलिए मैंने उसमें दो तीन पॉइंट इसीलिए रखे हुए थे अब मैंने उसमें बोला था विचार का भी बोला था है ना विचार अब इसमें ये होता है कि जैसे हाथ हिलाने पर जीव का डायरेक्ट पॉज करो मैंने क्या उदाहरण दिया था मैंने क्या उदाहरण दिया था अब इसमें ये होता है कि विचार विचार करने के लिए भी एक मिनट और जैसे वो सामाजिक विज्ञान का पेपर होता है ना उसमें जब आपको कोई ऐसा प्रश्न आ जाए जिसको आपको कुछ नहीं मालूम तो उसमें लाइनों को भरो नंबर प्राप्त करने के लिए खामखा दोबारा सुनाओ जरा ये दो मिनट हल्का सा इनका सुनाइए जरा हल्का सा मैंने उसमें बोला था विचार का भी बोला था इसीलिए मैंने उस जो उदाहरण दिया था
✅ This part is already used · 01:10:44:09 – 01:10:52:26 (0:09)
→ Used in: A · Video अलंकारी हेतु को अवतार का धक्का | बच्चे को अध्ययन की और आवश्यकता है at 3:09 ↗
→ Used in: B · Video जड़ पदार्थों को ईश्वर की इच्छा किस रूप में प्राप्त हुई? अवतारवाद को निर्भय कर दे... at 23:27 ↗
01:10:44:09 नहीं धुंधला मतलब कैसे मैं समझ यहां तुम इच्छा पे क्यों ले आए तुमने माना ना मेरी मसल्स को हिलाने के लिए एक एनर्जी नामक तत्व है जिसको तुमने एटीपी नाम दिया अब अब जैसे मैंने
⬜ Not used yet · 01:10:52:26 – 01:11:17:08 (0:24)
01:10:52:26 मैंने जो उदाहरण दिया था क्या दिया था? मैंने उदाहरण ये दिया था कि जिस प्रकार इसीलिए मैंने उसमें दो तीन पॉइंट इसलिए रखे हुए थे। अब मैंने उसमें बोला था विचार का भी बोला था। है ना? विचार होता है कि जैसे मैंने उदाहरण दिया था कि जिस प्रकार अब उदाहरण नहीं बता रहे हैं। विचार अब देखना आगे क्या बोलेंगे। अभी देखना क्या बोलेंगे आगे। चलो
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→ Used in: A · Video अलंकारी हेतु को अवतार का धक्का | बच्चे को अध्ययन की और आवश्यकता है at 3:29 ↗
→ Used in: B · Video जड़ पदार्थों को ईश्वर की इच्छा किस रूप में प्राप्त हुई? अवतारवाद को निर्भय कर दे... at 23:47 ↗
01:11:17:08 हाथ हिलाने पर तो जीव का डायरेक्ट कंट्रोल नहीं होता है। वो जैसा चाहता है उसके अकॉर्डिंग वो ईश्वर ही उससे सहायक होता है हाथ हिलाने में। ठीक है? लो मैंने मोटे भाषा में बोला
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01:11:27:03 हाथ उड़ाने में जीव का डायरेक्ट वो नहीं होता है। ईश्वर ही उसमें वो सहायक होता है। सहायक होता है। ठीक है। तो अब इनका वो भी खत्म हो गया कि भैया जो तलवार को मार रहा है और उनका वो पुतर्क था दयानंद जी का। अब ऐसे व्यक्ति से ऐसे धूर्त व्यक्ति से धूर्तता मुझे कहनी पड़ेगी। क्यों? क्योंकि आप अपने ही सिद्धांत का विरोध कर जा रहे हैं। केवल बकबक कर रहे हैं सामने वाले को किसी तरीके से गलत ठहराने के लिए और व्यक्ति आपको इतना प्रिविलेज दे रहा है और तब भी आपका ये व्यवहार है उसके लिए कि अब आपको ट्रोल किया जा रहा है तो आपकी गरज पड़ गई। सोचिए क्या कह रहे हो तुम? जीव का उस पर डायरेक्ट कंट्रोल नहीं होता है। भगवान ही उसमें ईश्वर ही उसमें सहायक होते हैं। यानी कि जब जीव ने चाकू उठाया किसी को मारने के लिए तो ईश्वर ही उसमें सहायक हुए। बन जाओ अद्वैति वेलकम टू अद्वैत क्या कह रहे हैं ये यही आना पड़ेगा
01:12:30:09 तो थोड़ा सोचने वाली बात है कि अब अब मतलब जीव का उस पर डायरेक्ट कंट्रोल नहीं होता है। ईश्वर ही उसमें सहायक होता है। तो मतलब ये कहना ये चाह रहे हैं कि जब जीव इच्छा करता है तो ईश्वर इच्छा करता है कि चाकू उठाओ और मारो सामने वाले को तो यहां पे हो जाता है। वहां कोई ना फोर्स होती है ना सूर्य से प्राप्त होने वाली कोई एनर्जी होती है जिस पर जीव का कंट्रोल होता है जीव आदेश देता है क्या कहना है इस आपका शास्त्र जी सनातन जी सनातन शंकर जी बोले नहीं बिल्कुल इसका मतलब जो जितना भी जीव कुछ कर रहा है वो सब ईश्वर की इच्छा से वो सब हो रहा है। है ना? तो तो फिर आप जो कर्म हां कर्म फल कर्म फल वाला कर्म फल वाला वो भी यहां पर खारिज हो जाता है जो कहते है ना ईश्वर कर्मों का जो फल देता है तो जीव यानी कि कर्म कुर कुछ नहीं कर रहा है बस ईश्वर के द्वारा कंट्रोल किया जा रहा है वो इच्छा के द्वारा और इच्छा जो है एक एक बात और है कि जीव ने जैसे ही इच्छा की मैंने इच्छा की तो अब हमारे यहां तो अद्वैत है तो बात अलग है भाई है ना एक मिनट ये क्या हो गया? कौन सा पर्दा था वो? कहां चला गया?
01:13:43:13 अरे इसको कैसे? आप लोग कुछ आप बोलिए सनातन शंकर जी मेरे को यहां कुछ टेक्निकल दिक्कत अच्छा अच्छा अच्छा नहीं इसमें जो लास्ट वाला पार्ट है वही सबसे ज्यादा सुनने वाला है उसमें सारी ही बातें क्लियर हो जाती हैं और जो आपस में विरोधाभास वाली बातें भी इसने की हैं निर्भय ने ईश्वर जो है केवल इच्छा करता है और इच्छा ही बल है। यह भी माना। अच्छा जो क्रिया हो रही है वो अलग हो रही है। क्योंकि जब भी आप बोलोगे इच्छा जैसे कि मैंने थोड़ी देर पहले ही कहा था कि जब भी आप बोलोगे ना इच्छा तो इच्छा जो है स्वतंत्र नहीं होती। इच्छा के बाद उसको शक्ति रूप पे या फोर्स रूप में आना पड़ता है। उसके बाद वो क्रिया होती है। क्योंकि सीधी बात है। सीधी सीधी बात है। जब भौतिक संसार में कुछ होगा तो वहां पर एक भौतिकी एनर्जी
01:14:58:21 आएगी। ये जो भौतिकी एनर्जी है जो ईश्वर की इच्छा के कारण आ रही है ये भौतिकी एनर्जी ईश्वर का अवतार है। ये जो एनर्जी आ रही है। नहीं तो आप बता दो जड़ पदार्थों को कैसे प्राप्त हो रही है उसकी इच्छा? पहली बात। हम दूसरी बात यह है कि इनका कहना यह है अब देखो अद्वैत की तो बात अलग है। अद्वैत को मान ले तो बात अलग है। मगर अब इनके यहां तो ऐसा है नहीं। मगर जीव ने जैसे इच्छा की ईश्वर आ गया सहायता करने भैया मोबाइल उठाना है। हम हम इनका ईश्वर ये है। है ना? हम और जिहादियों से किस तरह से मेल खा रहा है कि सर्व्यापक नहीं तो भी काम चल जाएगा। तो इससे अच्छा तो वही वाला है। हम इससे अच्छा तो फिर वही वाला है। फिर सेम टू सेम है। क्योंकि वर्क कोई आप ऐसे ही मान लो ना कि वर्क जब भी होता है तो हम वर्क किसको कहते हैं? वर्क में फोर्स मल्टीप्लाई बाय वो डिस्प्लेसमेंट जो एक फार्मूला आता है। तो जो वर्क मल्टीप्लाई बाय डिस्प्लेसमेंट है। यह एक ऐसा है जहां पर बल और कार्य इन दोनों का इंटरलिंक्ड है। आप ऐसे नहीं कह सकते कि भाई खाली इच्छा है तो उसके बाद वो काम नहीं होगा। तो पहले उसमें फोर्स लगेगी फिर उसका डिस्प्लेसमेंट होगा तभी वस्तुएं हिलेंग। तो हजारों टन अरबों टन बड़े जो ग्रह हिल रहे हैं
01:16:13:22 उसमें जो फोर्स लग रही है वो केवल इच्छा करने से नहीं लग रही है। क्योंकि वो इच्छा करने से कार्य होते ही नहीं है। खाली इच्छा जो है वो जब तक फोर्स और उसमें क्रिया में नहीं बदलेगी। उसके बदलने उसी को तो अवतार हम कह रहे हैं कि भैया यह बदलना ही अवतार है। दूसरी बात दुर्जन तोष न्याय से भाई मैं यह भी तो कह रहा हूं कि आप जो है आभास के कारण वहां बल कह रहे हो ना जहां सिर्फ इच्छा है सत्य तो ये है सिर्फ इच्छा है। फिर आप बल का अवतार मान रहे हो ना वहां आभास में तो कह रहे हो तो फिर तुम्हें अपने हिंदू भाइयों से क्या दिक्कत है? क्या दिक्कत है? क्या नफरत है? हम यहां भी मान लो। मगर तुम वहां तो बल का अवतार मान रहे हो। वहां तो बल ना होने पर भी बल कह रहे हो। फिर अगर दूसरा कह रहा है तो तुम्हें दिक्कत हो रही है। यह है स्वरूप भूत लक्षण विरोध द्वेष विरोध के लिए विरोध करना। और अभी बौखलाहट क्या है? बौखलाहट अभी आगे आएगी। अभी यहां पर देखिए पंचरंगी इनका ड्रामा चल रहा है। मैंने उदाहरण दिया था। विचार था। अब तीसरी बात कि ईश्वरी सहायक होता है। आगे क्या कहा है? देखें जरा। दिखाइए। यह बहुत सुनने लायक है। इसने लास्ट में जो किया है वहां पर। यह है इनके स्पष्ट जवाब।
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01:17:25:10 लेकिन मैंने इसलिए मैंने जानबूझ के उसके साथ में ये शब्द भी बोला था कि इच्छा मतलब चाहता है विचार करता है तो जीव के चाहने मात्र से मन में मतलब वो जो विचार होते हैं ठीक है और वो उसके खुद के सामर्थ से होते हैं उसमें कोई ऐसा आप ये नहीं दिखा सकते कि अलग से कोई एनर्जी कुछ ऐसा हो गया ये गलत बात है फिर तो खाना खाने की जरूरत ही नहीं है चाहने मात्र से हो जाना चाहिए
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01:17:42:28 अभी बोला ईश्वर सहायक होता है अब उसका खुद का सामर्थ्य होता है खुद का सामर्थ्य होता है तो मैंने कहा भाई भोजन क्यों कर रहा है सूर्य की एनर्जी प्राप्त कर रहा है ना व्यवहार जगत भोजन कर रहा है ना यहां मानना पड़ेगा ना व्यवहार जगत के अनुसार मुझे एनर्जी मिल रही है हम अब कह रहा है खुद का सामर्थ्य है पहले कह रहा है ईश्वर सहायक है भाई तय कर ले यार समाज कहता क्या है फिर आजा हम हम चलिए
01:18:16:24 एनर्जी तत्व को हो
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01:18:18:09 गया ना तो भाई पृथ्वी स्थूल है ना उसको एनर्जी चाहिए ना फिर हिलने के लिए करो
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01:18:24:00 पॉज करो पॉज करो पॉज करो इसने कहा स्थूल शरीर का विषय हो गया ना अरे भाई स्थूल शरीर पे के द्वारा वर्क करा जा रहा है जीव करवा रहा है तो जीव उपयोग में नहीं ला रहा है क्या और अगर ऐसा है कि जीव उपयोग में नहीं ला रहा है एनर्जी को स्थूल शरीर अपने आप ला रहा है तो वहां मान लो जड़ जड़ अपने आप वो बन गई सृष्टि बन जाओ नास्तिक वही बात कह रहा है ना चलो चलो
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01:18:54:24 तुम जीव के चाहने मात्र से स्थूल शरीर के ऊपर एक एनर्जी का काम नहीं कह रहा सूक्ष्म कह रहा हूं इसीलिए तो कह रहा
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01:19:03:06 हूं मेरी बात देखो मैं मैं स्थूल नहीं कह रहा मैं सूक्ष्म कह रहा हूं अरे मेरे भाई जीव के चाहने से सूक्ष्म और सूक्ष्म के द्वारा फिर स्थूल और स्थूल के द्वारा क्रिया उपयोग में आई एनर्जी सिंपल मगर इनको बात को किसी तरह ऐसा वहां पर घुमा घुमाना है कि वो जो पॉइंट फस रहा है ना एनर्जी का उपयोग और एनर्जी के रूप में ईश्वर का अवतरण उससे इनको बात करने से बच जाए तो कैसे कैसे बचेंगे व्याकरण हेतु पंचाव्य हम मेरे यहां आना पड़ेगा ये ऐसे बचेगी कितना सरल बताया इधर उधर की बात करके ये सत्य के पक्षधर नहीं है ये सत्य के पक्ष पक्षधर नहीं है। यह केवल अपने वर्चस्व के पक्षधर हैं ऐसे लोग। हम ठीक है? तो स्वरूपभूत लक्षण क्या-क्या प्राप्त हो गए अभी तक? पहला विरोध विरोध इनका स्वरूपभूत लक्षण। दूसरा द्वेष। ठीक है? और पक्षपाती क्योंकि जो अपने लिए स्वीकार नहीं है वो दूसरों के साथ कर रहे हैं। ठीक? और चौथा क्या आ गया यहां पे कि खुद ही संशय
01:20:18:19 में है। खुद ही अंधेरे में है। बोलना क्या है? स्पष्ट नहीं मालूम है। कुछ भी बोल रहे हैं। ईश्वर करवाता है। खुद का सामर्थ होता है। मगर वो स्थूल शरीर का विषय है। उसका जीव से कोई लेना देना है ही नहीं। उसमें एनर्जी है ही नहीं। कुछ नहीं। ठीक। अब इसके बाद तो हो गया। चलिए इसको वीडियो को हटा दीजिए। अब इनकी रिकॉर्डिंग सुनाइए दोबारा जहां पर रुकी थी। तो यह आपने यहां से स्पष्ट यह यहां पर स्पष्ट हो चुका है अभी तक कि वह जो चर्चा हुई है जिसमें आपने मुझे और निर्भय को आमने सामने देखा था उसके बाद से कौन चर्चा के लिए तड़प रहा था। ठीक है? और कौन जो है बार-बार जो है निरुत्तर हो रहा है इस तरीके के अपने ही सिद्धांतों का विरोध कर रहा है। और अब अब आप यह देखिए आगे की चर्चा जो इसने इससे जो कॉल पर बात हुई जो वाराणसी जाने के संबंध में हमने जब एक अपनी सूचना पहुंचाई और ये बोल रहे हैं कि आप अब जो है मेरा पल्ला भारी है। तो इस हिसाब से उस समय मेरा पल्ला भारी था और है क्योंकि हमारी तो वही चर्चा है। आखरी जो सार्वजनिक चर्चा तो वही है और तुम आके मुझसे चर्चा कर रहे हो फोन पे। भाई तुम तो सुकून में होने चाहिए थे। मैंने हरा दिया शिवश को। सुकून में तो मैं था। चलो
01:21:34:09 ठीक है। वो बात ठीक है। समझ में आ गई। मगर बात ये है ना कि जब मैं मैंने जब मैंने अपनी लाइव में भी मैंने बोला था मैंने क्या बात समझी? मैंने ये बात समझी कि भाई मैंने भी इसको यही बोला है कि तुम हमारे लिए नगन हो। तो हमारा तुम्हारे लिए कहीं पे आना कोई हमारी बाध्यता नहीं है जो हम आए। हां तुम छोटे भाई थे तो हम आ सकते थे। तो इसने जब यह बात कही कि आपके लिए मैं कहीं पर आऊं उसके लिए मैं बा नहीं तो मैंने इसको माना कि बदला उस चीज का इसने लिया तो मैंने उसको स्वीकार किया। हालांकि ये आ नहीं रहा है। आ तो मैं रहा हूं बनारस। आ तो मैं ना हूं। मैं रहा हूं बनारस। बनारस के पास में तो तुम हो ना भाई। तो आ तो सामने वाला रहा है। तो यहां आने वाली बात ही नहीं है। जिसमें तुम कहोगे हम नगण्य व्यक्ति के लिए क्यों ना जाए निकल कर। जब अच्छा दूसरी एक बात और है जब तुम्हारा पैरामीटर क्या है किसी को नगण्य मानने अथवा ना मानने का तुम अभी जो अभी जिनको महीने दो महीने हुए हैं चैनल चालू किए हुए उनको तुम मैसेज क्यों कर रहे हो वो कैसे गणमान्य हो गए किस रूप से हो गए गणमान्य अगर ऐसी बात है तो भाई तुम उनको अप्रोच कर रहे हो ना मुझे चर्चा करनी है ठीक है और वो लोग बुलाएंगे तुम्हें जाना उनके यहां पर हम तो गए हैं तुम्हारे यहां आचार्य हो गया जो तथाकथित आचार्य बन के घूमते हैं हम
01:22:49:13 तो गए हैं और आगे भी जाएंगे ये मत समझना कहानी यहां खत्म नहीं होती है तुम उस तंत्र का उस सनातना तंत्र का एक हिस्सा मात्र हो जिससे हमारा आमनासामना हुआ हमने अपने पक्ष को दृढ़ता के साथ रखा सिद्ध किया ठीक है चर्चा जो है स्थगित हुई स्थगित होने के बाद तुम चर्चा के लिए भिड़े रहे जो भी भाईचारा है बातें हुई सब ठीक ठीक है? मगर तुम सैद्धांतिक पक्ष को सिद्ध करने के लिए भिड़े रहे। तुमने ये भी मैसेज किया कि यदि मैं क्या कहते हैं? अगर सिद्ध कर दूंगा तो आप उसको अपना लेंगे दयानंद के मत को। तुमने जब ये कहा कि मैं सिद्ध कर दूंगा। यानी सिद्ध नहीं हुआ। तुम मुझसे चैट में बोल रहे हो। तुम मुझसे चैट में बोल रहे हो। यानी अभी कुछ बाकी था। फिर तुम क्यों कह रहे हो? उस चर्चा के आधार पर आपकी छवि डाउन हो गई। यह होता है अपने ही बात का विरोध। तो अब इससे आगे ये तो रिकॉर्डिंग खत्म होने वाली है। इसके बाद जो है स्वरूप भूत लक्षण में आएगी धर्तता अभद्रता। अभद्रता का दूसरा एक वो होता है नीचता है ना वो भी आएगी आगे की रिकॉर्डिंग में और बौखलाहट। अभी इसको सुनिए आप कि जब मैंने तुम्हें
01:24:04:16 मैसेज किया था तो मैंने कहा कि कहेगा तो मैं उसके चैनल पे भी जाऊंगा। चाहे वो संदीपन रॉय जी का चैनल हो, चाहे तुम्हारा चैनल हो। ये होता है विश्वास कि मेरा भाई है छोटा तो मैं जाऊंगा कोई दिक्कत नहीं मगर हुआ क्या कि तुमने तुमने जब वीडियो बनाया तो तुमने उसमें ऐसा कुराण दिखाया व्यवहार अपना कि मैंने कहा दूसरी दूसरी एक बात है आपके आपने Instagram पे स्टोरी डाल के एक नैरेटिव डालने का प्रयास किया तो मैंने उस विषय में लाइव किया अरे भाई तो तुम्हारे लोग कह रहे हैं ना मुझसे तुम्हारा नाम लेकर के जबकि हमारी चर्चाएं तो चल रही है तुम्हारे लोगों को तुम्हें रोकना चाहिए लोगों को निर्णय करना चाहिए नहीं वो अधूरा निर्णय कर रहे हैं ना तो फिर मैं क्या करूं फिर तो फिर मैं भी अपनी अपने अपने पक्ष को डाल रहा हूं फिर तुम्हें दिक्कत नहीं होनी चाहिए रोका क्या आपने कॉल रिकॉर्डिंग डाली मैंने रोका तुम कह रहे हो कि मैंने आपकी प्रतिक्रिया पर आपत्ति जताई आपने कॉल रिकॉर्डिंग डाली तो उससे कौन सा बहुत तोप चल गया और कौन सा स्थिति पलट गई कुछ भी तो नहीं हुआ जैसे जैसे ये मैं तुमसे कह रहा हूं क्या स्थिति पलट गई तो आप अभी तो बोल रहे हो कि मैं मैं अपने पक्ष के लिए डालूंगा और मैंने आपको मैंने कॉल रिकॉर्डिंग नहीं जो तुमने स्टोरी लगाने की बात कही तो मैंने कहा कि भाई वो लोग मुझे वो लोग उन लोगों ने मुझसे सबसे बड़ी गलत बात यह है कि जो लड़की मेरे सर पे चप्पल लगा मेरी फोटो को वो कर रही है और शौचालय के तो मैं दिखा
01:25:19:22 रहा हूं ना उसके बाद तो मैं आवाज गड़बड़ मुझे सुनाई दे रही है क्या सबको नहीं ठीक है ठीक ही ठीक है वो कहना चाहिए था अवॉयड करना उसके बाद तुम उसका पक्ष ले ले रहे हो अपनी लाइव में कह रहे हो कि दीदी दीदी बहुत अच्छे जवाब दे रही है बताइए देखिए मैंने एक आध रील ही देखी थी उसकी तो देखो ना बेटा पहले देखो तो एक एक मिनट एक मिनट अब देखो यहां पे क्या हो रहा है कि हुआ क्या है वो जो आई थी वो जो क्या नाम है इंटरनेट परंपरा वाली वो जब आई थी उसके बाद इन्होंने उन्हें प्रश्रय दिया क्यों दुश्मन का दुश्मन दोस्त ठीक है इन्होंने उसे प्रश्रय दिया उसने हमारे लिए एक रील बनाई इंस्टग्राम पर उसमें दिखाया कि चप्पल मेरे सर पर रखी हुई है तरह-तरह के व्यंग चित्र बनाए शौचालय इत्यादि से जोड़ के मुझे वहां उसमें चित्रण किया वो रील उसने डाली उसके बाद मैंने जब उसने उसके बाद भी यह कहा कि मां का दूध पिया है तो आ जाना तो मैंने यह कहा कि तुम्हारे चैनल पे तुम्हारे मंच पे वैश्यालय के समान दूषित वातावरण है। मैंने ये नहीं कहा तुम वैश्या हो। मैंने नहीं कहा। मैंने किसी महिला को अभी तक नहीं कहा कि फलानी वैश्य है। तो मैंने यह कहा वहां पर जो वातावरण है वो वातावरण उसी वातावरण के समान दूषित
01:26:35:03 है जैसा कि वहां पर होता है। मैंने ये नहीं कहा कि तुम तुम ही कारण हो वहां पर उस क्या कहते हैं उस वातावरण का। उस वातावरण का कारण भी तुम हो। मैंने नहीं कहा। मगर वो वातावरण दूषित है तुम्हारे मंच का। उसको पहले साफ करो। क्षमा मांगो। तुम मक्कार कह रही हो अपने यहां किसी को बुला के तो तुम चैलेंज करोगी। तुम वहां पर चैलेंज करके और कोई आएगा उसको मक्कार कहोगी तो कोई क्यों आएगा भाई तुमसे चर्चा करने तो मैंने तो यह कहते हुए मैंने कहीं से भी उसको व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की उसके मंच को मैंने वैश्यालय के समान कहा और क्यों कहा क्योंकि तुम्हारे उस चैनल पर गंदगी है गंदगी क्या है कोई शौचालय किसी का डायरिया बोल रही हो किसी स्थान विशेष की सफाई करवा रही हो ये सब बोल रही हो तुम तो वहां का वातावरण दूषित है ऐसे दूषित वातावरण पर कोई भी सभ्य व्यक्ति नहीं जाएगा मैंने यह बात कही अब यह बात इनको मैंने भेजी भी है चैट में। इनको यह बात नहीं मालूम है। ऐसी महिला को यह अपने यहां पर बिठा रहे हैं। बिाने के बाद उसकी वाहवाही कर रहे हैं। वाहवाही करने के बाद जो इनके लोग हैं उस महिला के द्वारा ऐसी स्टोरीज लगवा रहे हैं कि उस चर्चा में हमारी हार हुई थी। जबकि सत्य तो इनको पता है। यह तो अभी तक सिद्धांत अपना सिद्ध कर रहे हैं। तो मैंने उन लोगों को जवाब देने के लिए जब वह इनकी स्टोरी मुझे
01:27:50:07 दिखा रहे हैं। मैंने उन लोगों को जवाब देने के लिए स्टोरी लगाई। या तो तुम सही मैसेज भेजो कि अभी हमारी अब हमारी कटिंग वटिंग करके ना दिखाई जाए। प्रश्रय मत दो। गलत लोगों को प्रशय मत दो। सीधी बात। आपने प्रश्न दिया उस महिला को जो सिद्धांत विरोधी है। ना वो दयानंद जी की है ना वो अद्वैती है ना वो रामानुज है। किसी की नहीं है वो। हम ठीक है? तुम उसको प्रश दे रहे हो। क्यों? क्योंकि भाई चलो एक दो लाख फॉलोअ वाली लड़की का हमें साथ मिलेगा और जो है आान को आान की टांग खिंचाई करने में मजा आ जाएगा। तो भाई जब तुम उसको अपने चीजें दे रहे हो हमारे विरोध में जो चीजें अभी असिद्ध है तो हम वहां पर उनको स्टोरी में उन रीलों का जवाब दे रहे हैं। तो तुम्हें इस पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए थी। पर तुमने क्या किया? तुमने जो है वीडियो बनाया। वीडियो में अपना जो तहस थी, जहर था वो दिखाया। यह कहने की बजाय भैया अब आप हमारे चैनल पर आ जाओ। तुमने कहा कि अब आपको जो है ट्रोल हो रहा है तो आपकी गर्ज पड़ रही है आने की। ठीक है? तो इसके साथ ही साथ तुमने ये भी कहा कि वो बहुत अच्छे-अच्छे जवाब दे रही हैं दीदी। हम दीदी बहुत अच्छे-अच्छे जवाब तो अब यहां पर ये क्या कहेंगे कि दीदी बहुत अच्छे-अच्छे जवाब दे रही है। इस बारे में देखना क्या कहेंगे। देखो हम
01:29:03:03 तो बोलने से पहले तुम कह रहे हो बहुत अच्छे जवाब दे रही है। तो मैं तो यही मानूंगा। भेज देते ना मैं मैंने भेजा वहां पे तुम्हें वो तुम्हें उसमें चैट में मैंने भेजा हुआ है WhatsApp में देखो देखो ये इनकी तमीज है अपने से बड़ों से बात करने की यही है अलंकार समाजियों का स्वरूपभूत लक्षण है असभ्यता अभद्रता भाई एक तरफ तुम भाई करके बात कर रहे हो फिर वन ऑन वन जब बात हो रही तो तुम क्या मैंने ठेका नहीं ले रखा ठेका नहीं ले रखा तो उसको अपने आप बुला क्यों रहे हो जिसका ठेका नहीं ले रखा ठीक है। अभी देखना हमने किसका ठेका ले रखा है। तुम्हें सबूत देंगे। ये जो अभद्रता करते हो ना तुम इससे पूरी इस बात में माना जा सकता है कि तुमने अपने जीवन काल में वो गालियां दी होंगी जो तुम्हारे नाम से दौड़ रही है। वो बातें अलग है। ठीक है? मगर अभी फिलहाल तुम्हारी अभद्रता, धूतता, नीचता तुम्हारी दिखा रहा हूं। तुमने ठेका नहीं ले रखा तो बुला क्यों रहे हो उसके अपने यहां? उसको प्रश क्यों दे रहे हो? जब तुमने ठेका नहीं दे रखा है तो?
01:30:05:22 अच्छा इन्होंने देखा नहीं था। इन्होंने देखा नहीं था। तो देखा नहीं है। अधूरी जानकारी पर राम जी क्या कहते हैं? राम जी दो प्रकार की बातें नहीं करते। जो भी बोलते हैं सोच समझ के बोलते हैं। ठीक है? राम जी का तो ये अब चलो हम मनुष्य हैं। हमारे पौरुष दोष हो सकता है कि हमसे गलती हो जाए। तो जब मालूम पड़ रहा है तो माफी मांगो। जब मालूम पड़ रहा है तो उसका त्याग करो। तुमको जब मैंने चैट में बता दिया कि यह रील भेजी है तुमने देखी क्यों नहीं खोल के तुमने मुझे जब दयानंद जी की फोटो भेजी तो मैंने उसमें जो भी कमी देखी तो सनातन शंकर जी को फोन करके कहा उन्होंने बदलाव किया तुरंत क्योंकि हम राम जी की तरह वो नहीं है दोष रहित पौरुष शिव का दोष है भाई हो गई गलती तो उसको हमने स्वीकार किया ठीक है और तुम क्या कर रहे हो तुम तो हमारे रील भेजने के बाद भी डटे हुए हो तुम वहां अपनी रील में कह रहे हो दीदी अच्छे अच्छे जवाब दे रही है। देखना क्या कहेंगे चले आइए प्ले करिए जिसमें मैंने इस पक्ष में आपसे चैट में भी कहा था कि आप उनको ये वैश्या को उठा पता नहीं क्या-क्या बनाइए और वो आपको चप्पल और क्या-क्या बनाए उसमें मेरा कोई वैश्या वाली बात चप्पल से बाद में कही है और मैंने उनको वैश्या नहीं कहा है आज भी बता रहा हूं। मैंने जो भी आपने बोला हो और सूअर
01:31:21:03 कुत्ता पता नहीं जो भी आपने अंड बोला हो कुछ नहीं बोला है कुछ नहीं बोला मैंने उनको ऐसे आप मुकर जाइए ऐसे वो मुकर जाए मैं क्या करूं फिर मेरे से क्या लेन देन है तुम समझ रहे हो सारी चीजें और इस पर भी कुत्ते वाली बात बता दूं कुत्ते वाली बात सुन लो पहली बात तो यह है कि इससे पहले वो इतना अपना विष उगल चुकी है वो जो मातृशक्ति है अपने पागलपन कि अपनी छवि बचानी है मैं बहुत बड़ी तुर्रम खाऊं 30 मरण खाऊं तो वो इतना इतना जहर उगल चुकी है कि पर्याप्त है। फिर भी अब मैं बताऊं जिस जगह पर वो स्ान का स्ान ध्वनित हो रहा है। मैंने मुंह से बोला नहीं। मैंने कहा वो जो ऐसा ऐसा होता है ना वो तुम हो। ठीक है? उस जगह पे मैं कौन हूं? मैंने अपने लिए क्या कहा? वो जो बड़ा सा जानवर होता है। तो मैंने जहां पर उनको कुछ कहा है वहां पर अपने आप को भी पशु योनि में ही बताया। पशु योनि की ही उपमा दी। हाथी। जहां पर ये बात आ रही ना कि कुत्ता बोला। कुत्ता शब्द तो यूज़ नहीं किया। अपने लिए हाथी शब्द यूज़ किया। यानी जहां पर मैं स्वयं को भी स्वयं के लिए भी पशु योनि की ही बात कर रहा हूं। उपमा दे रहा हूं। अब उपमा क्या होती है? उपमा ये होती है कि वहां पर हमने ओवरऑल नहीं ले लिया। कुत्ते के सारी चीजें हो गई। वहां पे केवल हाथी के बल और कुत्ते के बल की बात घनित हो रही है। जैसे हम किसी को कहे कि भाई वो तो शेर
01:32:36:12 है। शेर तो इसका मतलब क्या ये हो गया कि मैंने उनको जानवर कहा या शेर जैसी ताकत वाला कहां? हम किसी से कहते हैं चंद्रमुखी तो वो चंद्रमा ही है क्या चंद्रमा चंद्रमा जैसा मुख है उसका तो यहां पे बल की बल के बल के विषय में हाथी और शान का उदाहरण दिया है उनको कुत्ता नहीं कह दिया है मगर तुम्हें तार्किकता से वही सोचना है जहां तुम्हें द्वेष पालना है जहां विरोध करना है और वहां पे जाकर के अपनी तर्क को खत्म कर देना है लॉजिक को खत्म कर देना है बुद्धि को बेच खाना है जहां पर अपने पक्ष की बातें आ जाए अपने पक्ष पे जहां काउंटर हो जाए वहां मैंने मैंने विचार किया ईश्वर सहायक था और जीव का कोई संबंध नहीं होता। जीव का ही सामर्थ्य होता है। लो हो गया ए बी सी डी अपने पक्ष की बात आ जाए तो भैया तुमने इसलिए कहा उनसे ऐसा वो संदीपन रॉय जी से ऐसा इसलिए कहा इसलिए अब वो चर्चा नहीं करेंगे। उनका ऐसा कहना उचित है। हम तो जहां पर मैं उनको उनके लिए स्ान ध्वनित हो रहा है जहां पर वहां पर मैं अपने आप को भी हाथी में रख रहा हूं। इसका मतलब क्या है कि मैं उनको स्वान नहीं कह रहा हूं। वहां पर बल के विषय में एक उपमा दी जा रही है कि एक के अंदर हाथी जैसा बल है। उस समय पे एक के अंदर स्वान जैसा बल है। ठीक?
01:33:52:04 अब आगे चलिए क्या कहते हैं देखिए। नहीं इस पर तुम सामने से बात कर लो फिर इसी बात पे कि उसने पहले बोला है कि नहीं गलत? तो इसमें मैं क्यों वकील बनूं? अरे तो तुम तुम वकील बन रहे हो ना। तुम कह रहे हो अच्छे जवाब दे रही है। वो उन उनकी बात किसने छेड़ी? तुमने छेड़ी ना कि दीदी आई है वो अच्छे जवाब दे रही है अभी कॉल पे अपनी लाइव में ये बताओ तुमने अपनी लाइव में चला दो चला दो चला दो छेड़ी की नहीं छेड़ी सही सुनिए तो फस गए बस इसीलिए यही करते हो तुम अगर मैं बोल दूं आप फस गए तो अब पॉज करो अब पॉज करो अब देखो क्या हुआ जब मैं जब इसने बोला कि आपने स्टोरी लगाई है ना स्टोरी से बात शुरू हुई तो मैंने कहा स्टोरी इसलिए लगाई तुमने उसको प्रशय दिया और वो तुम्हारी चीजों का यूज़ यूज़ करके वहां पर मेरे लिए उल्टा सीधा बोल रही है। ठीक है? तो तुम्हें उसको प्रशय नहीं देना चाहिए। तो इसका कहना है कि आपने उसे गलत कहा। ठीक? पहली बात तो अगर यह बीच में नहीं है, ठेका नहीं ले रखा तो उसका ठेका क्यों ले रहा है? देखिए इसके ही सिद्धांत से इसकी कटौती होती है। जब तुम ठेका नहीं लेते हो तो उसका ठेका क्यों ले रहे हो? अच्छा। अब ये कहेगा आगे कि मैं मैं किसी का वकील थोड़ी ना हूं। तो देखना कैसे फसेंगे। देखो हम बम फट जाएगा। अरे तो मैं बोल तो रहा हूं। तो तुमने छेड़ी ना तुम अपनी लाइव में दीदी की बात बोले ना
01:35:07:15 बोलने से बचा कीजिए ठीक है फस गए आप आप फंस रहे हो तो विषयांतर करते हो मैंने अभी अभी क्या बोला अभी आपको बताया आपने अपनी लाइव में बोला कि दीदी दीदी अच्छे जवाब दे रही तो वकील तो तुम बने ना उनके इसने सवाल क्या किया इसने सवाल क्या किया वकील बनने से यहां पर इनका क्या तात्पर्य है कि मैं उनका वकील थोड़ी ना हूं ये कहा मतलब मैं उनका पक्ष क्यों लूं आ के आमने सामने की चर्चा में ये कहा ना तो इसका मतलब पक्ष लेने वाला वकील होता है। तो मैंने बताया कि तुमने कहां पर उनका पक्ष लिया है। तुम वकील बने। तुमने अपने वीडियो में सही ठहराया उस मातृशक्ति को। दिखावा बंद करो। भाई भाई भाई भाई बहुत हो गया। ठीक है? भाई के नाम पर तुम कलंक हो। सुन लो मेरी बात। और मेरे अंदर मेरे को बहुत बड़ा ये इस बात का दुख है कि मैंने कभी तुमको जो है वो भाव अंदर से आए थे। स्वाभाविक रूप से आए थे। मगर मैंने उन भावों को सत्य मान लिया तुम्हारे विषय में वो मेरी बहुत बड़ी गलती है। ठीक है? तुम कलंक हो भाई के मामले में। क्यों कलंक हो? क्योंकि तुम्हारे भाई के सर पर कोई चप्पल लगा के फोटो दे रहा है। उसको तुम अपने यहां बिठा रहे हो। उसको जो है तुम प्रशय दे रहे हो। वो तुम्हारी चीजों का उपयोग करके आगे चल रही है। और फिर जो
01:36:22:24 है तुम वहां पर जाकर के जो उसको ना तो उसको काउंटर कर रहे हो। अच्छा चलो तुम्हें पता नहीं था उसने क्या-क्या बनाया। उसके बाद भी जब पता चल गया तो तुमने क्या कर दिया? तुम्हारे भाई ने तुमको फोटो भाई हमारा सैद्धांतिक मतभेद अलग था। निर्भय मगर तुमने मुझे सम्मान तो दिया ही था ना भाई वाला और तुम्हारी बौखलाहट अभी मैं बताऊंगा क्या-क्या तुमने अपने लिए कुआं खोदा है वो भी बताऊंगा। तो खैर जब तुम किसी को सम्मान दे रहे हो उसके साथ कोई ये कर रहा है और तुम्हारे ही जरिए कर रहा है। तुम तो अपने आप को वहां से अलग हटाओ। तुम अलग हटाना तो दूर की बात है। तुम तो उसको और सहारा दे रहे हो। और फिर तुम्हारा अगर यह कहना मुझे पता नहीं था उसने क्या-क्या किया तो पहली बात तो पता करके बुलाओ। यह तुम्हारी जिम्मेदारी है। और जब पता चल जाए तो उस बात के लिए क्षमा मांगो और तब उसका त्याग करो। कुछ नहीं किया। चलाइए।
01:37:17:15 अब जो मैंने वीडियो देखे जो लगा उसमें मैंने बोला तो तुम अधूरी जानकारी पे क्यों बोल रहे हो सार्वजनिक? भाई मेरे को जो जानकारी मिलेगी उसी आधार पे बोलूंगा ना। तो अधूरी जानकारी पे बोलोगे। अगर बोल रहे हो तो अगर बोल रहे हो तो सामने वाला उस आपत्ति भी ना जताए तो आप जताओ मैं कहां मना कर रहा हूं तो जब जता रहा हूं तुमको तुम्हारी चीजें तुम्हारी चीजें जब तुमसे तुमको पता चल रही है तुमने गलत किया है आपत्ति तुम्हारी चीजें तुम्हारी चीजें जब तुमको पता चल रही है कि तुमको पता नहीं था तुमने उनका पक्ष गलत किया लाइव के अंदर आपने अपने लाइव ठीक है तुम मुझे बता दो तुमको आना है कि नहीं आना है आना हो बता देना जब तुम्हारे पास समय मेरे पास समय नहीं है पहले WhatsApp नहीं है ठीक है ठीक है कोई बात नहीं ठीक है आपके पास पता था पहले भी पहले भी पहले ही पता था तुम्हारे पास तुम्हारे पास निर्गुण त्रिकुण वाले विषय पर उत्तर है तो तुम बचोगे जय श्री राम
01:38:06:00 तो यहां पर मैंने अंत में यही बात कही कि जब तुम्हें नहीं पता तुम तुमने कुछ कर दिया वैसे ये भी दोष है नहीं करना चाहिए तो जब पता चले तब तो उसके लिए क्षमा पूर्वक आगे की चीज करो आगे की कारवाई करो मगर ये ऐसे उदंडी है ऐसे धूर्त लोग हैं तो इनका ये जो स्वरूप भूत लक्षण आया पांचवा क्या आया धूर्तता अब आगे आएगा बौखलाहट और नीचता ठीक है अब थोड़ा सा आप लोग कुछ बोलना है तो बोलिए नहीं तो फिर इनकी वो रिकॉर्डिंग सुने जो आशुतोष जी के यहां इन्होंने फोन किया है। जी जी जी जी नहीं इस पे तो पूरा स्पष्ट है के देखो जैसे आपने बोला कि मैंने छोटा भाई बोला था और आपने मुझे भी कई बार बताया कि भाई निर्भय से ऐसी मेरी बात हुई है और मैं उसे छोटे भाई की तरह देखता हूं लेकिन इनका जो व्यवहार है वो ऐसा नहीं है कि यह आपको बड़ा भाई समझते हैं। इनका व्यवहार तो ऐसे है जैसे इनको तो सब कुछ जो है वह ध्वस्त कर देना है। है ना? और जो सैद्धांतिक मतभेद एक अलग चीज होती है। लेकिन अगर आपने भाई बोला है जैसे मान लो मैं आपको बोलता हूं कि भाई है। अब मैं क्या करूं? आपके विरुद्ध कुछ करता रहूं। आपके जो विरोधी हैं उनसे मैं जाकर वहां पर जाकर सहयोग करूं और आपको नीचा दिखाने का प्रयत्न करूं तो फिर वो भाई वाला भाव जो
01:39:21:03 है वो वहां पर नगन्य नहीं है बिल्कुल शून्य है मतलब है ही नहीं वो चलो अभी अभी ठेका वाली बात को पहले क्लियर करें और लास्ट में इनकी बौखलाहट हो वो दिखाएंगे अभी मैं दिखा रहा हूं ठेका मेरी आपसे और एक सज्जन और है उनसे बात हुई कॉन्फ्रेंस कॉल में ठीक है जी निर्भय को किसी व्यक्ति ने कॉल किया है ठीक उस व्यक्ति ने निर्भय ने कुछ क्लेम किए थे अपने वीडियो में शायद अचिल्स नाम है। ठीक है। निर्भय ने कुछ कॉल किए थे। कुछ क्लेम किए थे अपनी वीडियो में कि अचिल्स को मैंने ये पीटा वो पीटा। और इस क्लेम से वो क्लेम झूठे हैं। ऐसा कहना है अचिल्स का। ठीक है? हम अब उसका रियल नेम क्या है वो मुझे नहीं पता। पर वो अचिल्स क्या कहते अचिल्स नाम से जाना जाता है। तो अचिल्स के लिए निर्भय ने यह क्लेम किए कि मैंने पुलिस में पकड़ाया, वो जेल गया, वह पीटा गया, यह हुआ, वह हुआ। अचिल्स को जब ये मालूम पड़ा तो अचिल्स ने निर्भय का कहीं से नंबर प्राप्त इत्यादि करके उसको फोन किया। फोन में मैं देख रहा हूं मेरे पास वो रिकॉर्डिंग आ गई तो उसमें क्या हो रहा है कि अचिल्स बहुत ज्यादा अभद्र गालियां दे रहे हैं। ठीक है? और बिल्कुल मर्यादा के बाहर जाकर के बातें कर रहे हैं। फिर यह सब जब मैंने सुन लिया तो बाद में वो
01:40:36:04 अचिल्स सनातन शंकर जी को बोला बाद में इनके पास फोन ऑन आया होगा इन्होंने भी सुन ली थी तो वो इस विषय में बात हो रही थी कि अचिल्स इनके चैनल पर आकर के इस विषय में वो क्या कहते हैं एक्सपोज करना चाहता है निर्भय की बातों को कि निर्भय ने क्या-क्या झंडे क्लेम किए हैं। वो मैसेज मैसेज आया था मेरे पास मैसेज आया था और मैसेज जब आया तो उन्होंने वो कॉल भी किया था उसके बाद फिर मैं तो पहले तो यह सोच रहा था कि भाई इसके पास मेरा नंबर कैसे चला गया क्योंकि मेरा नंबर तो है ही नहीं उनके पास आपके सिवा या और एक दो लोग हैं उनके सिवा नहीं एक बार बहुत पहले एक बार बहुत पहले मेरे पास उनका उसका फोन आया था अचिल्स का और मुझसे उसने कहा था कि कुछ हम लोगों ने कुछ लाइव की थी ना जब अचिल्स ने अपनी कुछ चीजें दिखाई थी शायद लाइव में 11 महीने महीने पहले की बात है। हां हां हां शायद ऐसा है। तो तब तब से आपका नंबर उसके पास है। और कहीं-कहीं पर अचिल ने अच्छी चीजें भी की है मेरी जानकारी में। परंतु क्या है कि वो मुझे उस विषय में ठीक नहीं लगता है वो व्यक्ति जब वो मर्यादा का उल्लंघन करने लगता है। किसी को कुछ भी कहने लग जाओ। ठीक है? तो अब ये जो कह रहा है ना मैंने ठेका नहीं ले रखा है। है ना? तो जब मुझे ये पता चला ना कि निर्भय को
01:41:51:06 इतनी गालियां दी है और हम तीनों में वो बात हो रही थी वो जो तीसरे व्यक्ति और हैं कन्हैया जी जब ये बात हो रही थी अचिल्स को इनके चैनल पे आना है। मेरा क्या कहना था आपसे सबसे पहले क्या कहा था मैंने इस बारे में? बस कल ही कल की बात है। कल कल दोपहर की बात है जब ये हुआ तो आपने मेरे को यही कहा कि भाई क्योंकि निर्भय को बहुत अभद्र गालियां दी हैं तो ऐसे व्यक्ति के साथ तो बिल्कुल कोई भी मंच साझा नहीं करना चाहिए। है ना? क्योंकि अर्चलीज के मैसेज मेरे को आए कि आपके साथ लाइव करनी है। आपको कोई आपत्ति तो नहीं है। और यह भी कल ही हुआ है। ऐसा नहीं कि अच्छा 11 महीने पहले नंबर उसको मिला होगा आपके जरिए। जब लेकिन उस वक्त उस वक्त से ले अब तक जो है अर्चलीज ने मेरे को ना कभी संपर्क किया। अच्छा मेरे पास तो उसका नंबर है ही नहीं। तो मेरा संपर्क करना तो मतलब ही नहीं बनता। लेकिन उसने भी मुझे इन इस दौरान कभी संपर्क नहीं किया। कमेंट के माध्यम से मे भी वो मेरे उसमें करता होगा कमेंट। लेकिन कल पहली बार उसने मैसेज किया कि उसे लाइव करनी है और कुछ चीजें स्पष्ट करनी है। तो उसने यह भी लिखा कि आपको कोई आपत्ति तो नहीं है। तो फिर वो मैसेज भेजा फिर उसके बाद हमारा हमारी तीनों की बात हुई थी। हां वो बताइए मैंने क्या कहा? मैंने क्या कहा? हां आपने कहा आपने यही कहा क्योंकि उसके वो किसी की माता को चाहे किसी की माता
01:43:06:09 है चाहे वो निर्भय की मां है किसी की भी है वो हमारी मां है और हम जिन सिद्धांतों के लिए लड़ रहे हैं हम सनातनियों के लिए लड़ रहे हैं अगर वहां पर अगर आप किसी की माता को गालियां देते हो तो कहीं ना कहीं हम अपने सनातन सिद्धांतों से नीचे गिर रहे हैं क्योंकि चाहे कोई भी है ऐसा तो है नहीं आर्य समाज वाले हमारे जानी दुश्मन है ये आपने कहा था कि जानी दुश्मन तो नहीं है और एक बात मैंने कहा हां बिल्कुल ठीक है जानी दुश्मन नहीं है सिद्धांतों की जो आप हमारी वो है लड़ाई है वो तो एक अलग तरीके से चल रही है लेकिन ऐसा तो है नहीं है तो हमारे ही भाई है ना तो वो हमारी बात हुई थी तो वहां पर यही फिर मैंने भी कहा कि भैया हां वो क्योंकि फोर्स कर रहा है कि मुझे लाइव करनी है तो मैंने कहा मैं भी अब देखो एक चीज का अंतर एक चीज का अंतर यहां पे देख लो निर्भय कि तुम कहते हो मैंने ठेका नहीं ले रखा जिसको तुम भाई कहते हो उसके सर पर वो चप्पल लगाती है उसको शौचालय से जोड़ के चित्रित करती है उसके चेहरे को बदल बदल के तरह-तरह से वो वहां प्रदर्शित करती है। क्यों? क्योंकि वो मुकी खाई और तुम उसके लिए तालियां पीटते हो। बहुत बढ़िया जवाब दे रही। क्योंकि नीच मानसिकता पहले से ही तुम्हारे मन में दौड़ रही है ना। इसलिए उसकी नीचता तुम्हें दिखाई नहीं दे रही। वो क्या नीचता करेगी? उससे बड़ी-बड़ी नीचताएं करके बैठे होगे तुम। इसीलिए वो नीचताएं सामान्य है तुम्हारे लिए। हमारे लिए तो सामान्य
01:44:21:15 नहीं थी। हमें पता चला कि अचल ने ऐसा ऐसा किया है। हमने सीधे कहा कन्हैया जी भी लाइन पे थे। मेरा पक्ष यही था भाई ऐसे व्यक्ति का साथ हम नहीं ले सकते जो इस तरह से बातें करें और मां मेरी जब जब आपने कॉल किया था जब आपने कॉल किया था बीच में क्योंकि तब मैं कन्हैया जी से और वो हम दोनों यही बात कर रहे थे कन्हैया जी कह रहे थे कि बस उसका बस यही है अर्शलीज का क्योंकि वो थोड़ा अभद्र गालियां देता है कह मैंने भी उसे बहुत बार समझाया था और मैं भी ये बात कर रहा था कि भैया अगर इतनी अभद्र किसी की मां बहन को गालियां तो भैया हम खुद ही नहीं सुन सकते हैं। इसी वक्त आपका भी फोन आ गया तो मैंने फिर आपको भी कॉन्फ्रेंस में ले लिया था। तो यह सारी हमारी बात हुई थी। जी। अब देखिए ठेका ना ले लेने की बात जब तुमने बताया कि दयानंद जी का चित्र गलत चित्रित किया गया उसको बदलवाया। ठेका तो नहीं लिया था मैंने। क्यों बदलवाया? क्योंकि हम धर्म का धारण हम धर्म को धारण करते हैं। हम राम का राम की मर्यादा का पालन करने की कोशिश करते। तुम जैसी नीच मानसिकता को अपने मन में लेकर के नहीं घूमते हैं। कि दुश्मन का दुश्मन दोस्त है। भले ही वह कितना भी नीच व्यक्ति हो। उसको प्रशय देना है। आप वो रिकॉर्डिंग सुनाइए जो आपने अचिल्स अचिल्स के साथ आपकी जो बातचीत हुई है।
01:45:34:24 मैंने एक मिनट नवीन जी चलाएंगे क्या? हां नवीन जी चला देंगे। आप WhatsApp करिए मुझे। मैं नवीन जी को WhatsApp कर दीजिए आप। कर दिया। कर दिया मैंने कर दिया। किसको किया? पहले वो पहले वो वो मैसेज दिखाना जो कॉल से पहले मैसेज किया था मेरे को अर्चली जी ने। इसको कहते हैं धर्म के पक्षधर तुम्हारी तरह नहीं मैंने ठेका थोड़ी ना ले रखा है ये तो इनकी बात ये तो इनकी भाषा है ठेका
01:46:13:20 उधर से दीदी भी बहुत अच्छे जवाब दे रही है वो दीदी हो गई भैया अच्छे जवाब देने वाली फिर कह रहे हैं मैं वकील थोड़ी ना हूं देख रहे हो और जहां फंसता है वहां विषयांतर करने लगता है व्यक्ति यह देखो यह यह मैसेज आया था मेरे को तो इनका मैसेज आया कि आज की लाइव से पहले आज लाइव करो कुछ टाइम निकाल कर तो ये कुछ लाइव कराना चाहते थे मेरे से उन्होंने अपना फिर वो परिचय भी दिया कि आनंद अक्का अर्चली क्योंकि मेरे पास इनका संपर्क सूत्र नहीं था ठीक है हम उसके बाद मैं आपको रिकॉर्डिंग सुनवाता हूं
01:46:54:04 इसको हटा दीजिए। रिकॉर्डिंग चलाइए। यह कोई देवाशी करके हैं। लगातार विरोधी कमेंट करते जा रहे हैं। देवाशी जी
01:47:34:19 ऐसा है सीधी बात है। यदि आपको लगता है कि आप पक्ष सत्य के पक्षधर हैं तो प्रत्यक्ष वार्ता करने का साहस प्रकट करें। अन्यथा मुंगेरी लाल के हसीन सपनों की दुनिया में डूबे रहने के लिए स्वतंत्र हैं। आप प्रत्यक्ष वार्ता होगी तो दृश्य बदल जाएगा। ठीक है? तो आप अपनी अगर कायरता को ऐसे ही प्रदर्शित करना चाहते हैं कमेंट के माध्यम से तो कर सकते हैं। अन्यथा साहस है तो हमारा नंबर दिया गया है। वहां आइए और चर्चा सुनिश्चित करिए और चर्चा में आकर के अपनी बातें रखिए। केवल क्लेम मत करिए। उसको सिद्ध भी करिए। ठीक है? क्लेम तो मैं भी कुछ भी कर सकता हूं। अभी देखो बहुत सारी चीजों पर बातें हो ही रही है आपके सामने। यहां पर आधी से ज्यादा भीड़ तो वो रहती है जो बड़े आवान से तुम्हें क्या बताएं। किस कदर चोट खाए हुए हैं। तो वो सारे चोट खाए हुए सब आ जाते हैं। कहीं कोई रामपालिया आ जाएगा। कहीं कोई आजकल बीके वाले चल रहे हैं। कहीं कोई बेचारा भागवतानंद के भी समर्थक आ जाएंगे। हमारे गुरु से भी तुमने पूछा था शास्त्र कहां है? शास्त्र कहां है?
01:48:41:06 हम चलाइए पता है ना कि अब आप आपका जो एक मेरे को ऑडियो मिला था ना उसमें आपने निर्भय की जो माता बहन को बहुत गालियां दी थी। मेरी एक बात सुन लेना। ठीक है। अगर लाइव में मेरे को लेते हो तो मेरी तरफ तरफ से कोई भी शब्द या कोई भी मतलब एटीट्यूड इको वाली वाली बात होगी बिल्कुल भी। हां नहीं वो तो इतना समझदार हूं यार मैं इतनी टेंशन मत लिया करो नहीं वो तो ठीक है पर मैसेज ये जाएगा वो ये कहेगा कि आपने जो पहले दी है गालियां तो उसके लिए आपने कोई सार्वजनिक तो क्षमा मांगी नहीं है अब मेरे चैनल से अगर मैं ऐसा प्रमोट करता हूं मांगू ये बताओ ना मेरी गलती क्या है नहीं आपने आपने जो इतनी अभद्र गालियां दी है ना निर्भय को तो वो गलत है ना अगर उसकी तरफ से नहीं फिर ऐसे ऐसे क्या होगा ना ऐसे क्या होगा कि देख लूंगा एक दिन ठीक है याद रखना ये नहीं नहीं वो उसने गली अब उसने फोन काट दी अब ये बताओ निर्भय क्या हमने ठेका ले रखा है हमने ठेका ले रखा है तुमने नहीं ले रखा है तो हम धर्म के पक्षतर है भाई केवल धर्म रक्षक चिल्लाते नहीं है ठीक है धर्म को धारण भी करते हैं वो चाहे मां तुम्हारी हो या हमारी हो
01:49:56:28 उनके ऊपर बात आएगी तो हम लड़ेंगे वो मेरे को बोल के क्या गए हैं तुम्हें देख लूंगा याद रखना इस बात देख लूंगा और उन्होंने फोन काट दिया बीच में ही और ये सबको देखा करते कुछ दिन पहले निर्भय की वो जो निर्भय के नाम से वो निकल रही है ना रिकॉर्डिंग जिसमें अभी हम लोग रिपोर्ट वगैरह करा रहे हैं तो वो जो रिकॉर्डिंग्स हैं वो मेरे पास भेजी और मुझे बोला इस पर कारवाई करो अब भाई उसमें बहुत सारी चीजें चाहिए होती है सबूत चाहिए होते हैं किसी की कोई रिकॉर्डिंग है तो तुमने कैसे देखी अच्छा जिसने देखी है क्या वो गवाही देने आ रहा है जिसने जिसने जिसकी आंखों के सामने वो है जो निकाल के लाया है वो इसमें गवाह बनेगा कि नहीं बनेगा? नहीं तो मेरे पास उसका सोर्स क्या है उस रिकॉर्डिंग का। ठीक है? तो वो वाली बात हो जाएगी। दूसरी बात मैं अपने कामों में बहुत सारा बिजी हूं। और यह गालियां केवल अगर निर्भय दे भी रहा है तो केवल निर्भय नहीं दे रहा है। बहुत सारे लोग हैं जो डेली उठकर के सनातन धर्म को, सनातन धर्म के आराध्यों को, सनातन धर्माचार्यों को और सनातनियों को बहुत सारी गालियां देते हैं। अभी नव बौद्धों के वीडियोस देख लो। उसमें श्री राम जी को लातों से मारता हुआ दिख जाएगा कोई कार्टून। भीमरा भीम
01:51:12:02 भीमराव अंबेडकर के कार्टून के द्वारा श्री राम जी के कार्टून को मारा जा रहा होगा। तो यह रोज हो रहा है तो मैं सारा कामधाम छोड़ के इसी पर नहीं दौड़ सकता कि निर्भय ने किया तो इसलिए मैं पीछे पड़ जाऊं। हमें चुनना होता है कि हमें कहां पे अपनी एनर्जी के लगाना है। तो मेरी तो वो वाली भावना थी। अब वो बोला अरे तुम ये हो वो हो। मैंने कहा ऐसा है भाई गलत तरीके से बात करोगे बात नहीं। उसको लगता है कि हम सबको एक ही लकड़ी से आकेंगे। अचिल्स को उसको मालूम ही नहीं किस से बात कर रहा है। किससे नहीं कर रहा है। अभी पूछ लेंगे किसकी रक्षा कर रहे हो। धर्म क्या है? तो सारी चीजें होंगी गायब। धर्म क्या है? ईश्वर का स्वरूप क्या है? भाई धर्म की रक्षा कर रहे हो तो धर्म कौन क्या है धर्म? वो अभी पूछ लेंगे गायब हो जाओ भाई जो आई थी अभी मातृ शक्ति रामानुज दया दयानंद जी को क्यों नहीं मानते? तो यह है जो धर्म की जो रामो विग्रहवान धर्मा को अपने हृदय में धारण करके चलते हैं। कुछ सीखो केवल चिल्लाने से कुछ नहीं होगा। सीख भी लो कुछ। तुम कहते हो हमने ठेका नहीं ले रखा है। तुम्हारे हिसाब से हमको यह नहीं करना चाहिए था। हमने ये गलत किया है। और तुम इतने नीच मानसिकता वाले व्यक्ति हो कि हो सकता है अपने चैनल में बोल भी दो। हां हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। तुमने
01:52:27:06 किया तो कुछ अच्छा नहीं कर दिया। हो सकता है। यही बोलेंगे। यही बोलेंगे। ठीक है। नहीं वो तो है। अच्छा यह जो रिकॉर्डिंग है निर्भय की जो रिकॉर्डिंग है 28 सेकंड वाली तो आप हम और आप अगर उस पर कारवाई करते हैं तो हमें सबूत चाहिए। अच्छा जिसने वो प्रत्यक्ष देखा है वो भी चाहिए। बहुत कुछ चाहिए। लेकिन जिसकी ये रिकॉर्डिंग है चाहे फेक है उसे भी कारवाई करनी चाहिए थी। उसने तो कारवाई नहीं कर सकता है। वो कर सकता है बिल्कुल कर सकता। उस पे हम कारवाई करेंगे ना। वो कारवाई नहीं करेगा तो हम करेंगे कारवाई। बिल्कुल उसको हम जाएंगे। ठीक है। तो अब जो है आशुतोष जी को जी सनातन शंकर वो शास्त्रवाद जी आप कुछ बोलेंगे?
01:53:12:16 जी भैया यही बात जो है ना ये लोग बिना जाने किसी का भी पक्ष ले लिए। जैसे उस दीदी का ले लिए इंटरनेट परंपरा वाली और बाद में बोलते हैं कि हम उनके वकील तो नहीं है। ये बात बहुत ही हास्यास्पद है कि आप एक तरफ से बता रहे हैं और फिर बोल रहे कि हम उसके पक्षधर भी नहीं है। ये दोहर मापदंड हुआ उनका। दूसरा और जब जब फंस गए मैंने सिद्ध किया कि तुम वकील हो तुमने बोला कि दीदी अच्छे जवाब दे रही है। ये वकालत है। ये तो जब वकील हो सिद्ध किया तो दूसरा टॉपिक लाने लगा। अच्छा फिर बोल रहा है दीदी को लेके कौन आया? भाई तुम जब ये बोल रहे हो कि तुमने Instagram पे स्टोरी लगाई। तो वो स्टोरी क्यों लगानी पड़ी? क्योंकि तुम्हारी दीदी को तुम्हारी दीदी स्टोरी लगा रही है और उनको स्टोरी उनको सपोर्ट दे रहे हैं तुम्हारे लोग तो तुम वो एडिटिंग करके बनाया हुआ आधा अधूरा दिखा दिखा के प्रस्तुत किया जाने वाली चीजें रोको तुम तो यहां आकर के मुझसे कह रहे हो सिद्धांतिक चर्चा करनी है और अपने ईश्वर के विषय में कह रहे हो जो जीव ने जब कोई चीज की तो उसमें जो है विचार था उदाहरण था और ईश्वर सहायक था जीव का खुद का सामर्थ था जीव का कोई कनेक्शन नहीं था कौन सी बात है अजीब पंचरंगी ड्रामा है भाई
01:54:27:25 बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल एक और एक और बात है भैया कि ये लोग क्या कहते हैं कि ईश्वर जो है वो तो क्या बोलते हैं सभी में सभी जड़ पदार्थों में भी व्याप्त है। सब जगह व्याप्त है तो सर्वव्यापी यदि है तो वो इच्छा करता है तो सब कुछ अपने आप हो जाता है। ठीक है उसका मतलब यह है कि चेतना सब जगह है तो वह जब सोचा तो वह हो गया। ठीक है? तो मेरा मत यह है कि हमारे शरीर में भी चेतना है। ठीक है? अब हम उंगली से कोई चीज को टच करते हैं तो हमारा उंगली उसको फील करता है ना। हमारे पूरे शरीर में चेतना व्याप्त है ना? लेकिन फिर भी फिर भी जब हमें अपने हाथ को हिलाना होता है तो उसके लिए हम अपने हाथ में बल लगाते हैं कि नहीं लगाते हैं? तो यहां पे बल का आया ना कांसेप्ट। बिल्कुल। तो वही बात है अंतर है लेकिन बल का बस इतना अंतर है वो जो बस इतना अंतर है कि बल हमारा सीमित है ईश्वर का अनंत है बल हमसे अलग है और ईश्वर से अलग नहीं है। इतना अंतर है। ठीक है? तो और वैसे भी एक एक पॉइंट आपने भी बोला था उस रिकॉर्डिंग में मुझे याद आ रहा है। आपने कहा था जब इच्छा कभी करेगा और
01:55:42:28 कभी इच्छा नहीं करेगा। ऐसा भी तो होगा क्योंकि कभी फोर्स लगानी पड़ेगी और कभी फोर्स नहीं लगानी पड़ेगी। तो जब उसमें भी बदलाव हो रहा है यानी कि ईश्वर में भी चेंज आ रहा है। है ना? तो फिर वो शाश्वता भंग हो गई उसकी। बस अरे वो तो अभी बहुत सारी बातें हैं कि जो गुण है वो प्रकृति से आ रहे हैं यदि तो ईश्वर न्यायकारी न्यायकारी दया दयालु ये सब अगर ईश्वर के स्वरूप के गुण माने जाएंगे स्वरूप भूत तो फिर ईश्वर ये तो क्रिया पर डिपेंड है किसी द्वितीय सत्ता भी होनी चाहिए भाई जब कोई न्याय का पात्र है तब तो तुम न्यायकारी हो जब कोई दया का पात्र है तब तो तुम दयालु हो तुम अपने आप में क्या हो जब कोई क्रिया नहीं है दुनिया में तो अपने आप में क्या तो अगर उसको आप स्वरूप भूत लक्षण मान लोगे तो ईश्वर का नित्यता सिद्ध नहीं होगी क्योंकि वो आयातित है। वो जो गुण है जिनकी आप बात कर रहे हो वो आयातित है। उनका एक्सपोर्ट हो रहा है। इंपोर्ट हो रहा है। उनमें है ना? वो देश काल परिस्थिति पर आधारित है। ठीक है? तो यह बात समझने की है। दोबारा से इस पर आते हैं कि वह व्यक्ति ऐसी ऐसी धूतता कर रहा है कि हम उसको बता भी रहे हैं कि ये चीज हो रही है भाई और तुम उसको प्रशय दे रहे हो। मगर वो उसमें कह रहा है कि दीदी अच्छी बातें कर रही है। अच्छे जवाब दे रही है और
01:56:58:04 हम उनको हम उनके बाद में कह रहा है हम उनके वकील भी नहीं है। वकील भी नहीं है। और इसने इसने पहले भी यही किया था जो इससे मेरा बिगाड़ हुआ। जब अच्छे से बातचीत हो रही थी तो इसके लोगों ने जब शॉर्ट बनाने शुरू किए गलत तरीके से मेरी चीजों को मैनपुलेटिव तरीके से प्रस्तुत करना शुरू किया तो मैंने कहा भाई मैं अपने भाई को बताऊं मगर भाई तो न्याय का पक्षधर नहीं है वो तो ये देखता है कौन कौन मेरा सगा है कौन पराया है वो तो यह देख रहा है वो न्याय का पक्षधर नहीं है जो मुझे लगा था कि है वो मेरी वो मेरी गलती थी कि मैंने ऐसा सोचा ठीक चलो
01:57:34:21 जी जी भैया एक और एक और बात है भैया जी जी जी धन्यवाद अनुराग सिंह जी धन्यवाद आपका अच्छा भैया एक और बात है कि जी जी जी मैं बोलूं बोलो बोलो नहीं भैया एक और बात है कि इसने इसने क्या किया था। जब आपसे जब चर्चा कर रहा था तो ये क्या कह रहा था कि इच्छा जो है ना वो बल नहीं है। पहली बात ठीक है? इच्छा फिर बाद में बोलता है इच्छा ही बल है। ठीक है? वो बल का अस्तित्व स्वीकार नहीं कर रहा था। इच्छा का अस्तित्व स्वीकार कर रहा था। बाद में आते-आते बात करते आपके कॉल रिकॉर्डिंग में बोलता है कि इच्छा ही बल है। ठीक है? आप बोल रहे थे बल लगेगा पृथ्वी को घुमाने के लिए कोई भी जड़ पदार्थ को मूवमेंट देने के लिए कुछ भी तो उसमें बल लगेगा। तो वो बोल रहा नहीं इच्छा ईश्वर लगाता है बल नहीं लगाता लेकिन एट द एंड आतेआते बोल देता है कि हां इच्छा ही बल है तो फिर यहां पे तो आपका ही बात सिद्ध हो गया ना यदि इच्छा को ही बल मान लिया जाए अगर उसके उसके पर्सपेक्टिव से ही तो भी आपकी ही बात सिद्ध हो गई इच्छा बल ठीक है और पर वो
01:58:49:22 वो क्या सत्ता का जो हम वो वहां पर क्या कह रहा है कि जो जो बल ने प्रेशर दिया ना पुश किया उसे अगर हम ये कहेंगे पुश किया तो वहां पे ऐसा कुछ है नहीं बस बस वो हो रहा है। अब वो है नहीं में वो कनेक्शन तो है नहीं। अच्छा अब बल मान रहे हैं तो बल वो इच्छा ही है। अब क्योंकि वो अमुक अमुक तरीके से एक्सजीक्यूशन होना है। इसलिए वो ये नहीं कहा जा सकता कि ईश्वर जो है बल के रूप में अवतरित हुआ। ये नहीं कहा जा सकता। मगर फिर इच्छा को धारण कैसे किया चेतन पदार्थ ने? तो वहां पर वो कह रहा है अब हमसे मत पूछो। तो मैंने कहा तुम हमसे क्यों पूछ रहे हो? स्वरूप वो स्वरूप के विरुद्ध क्यों जाता है? बात तो यही से शुरू हुई। स्वरूप के विरुद्ध ईश्वर जाता है। यहां तुम चुप हो। हमने यहां से आगे की व्याख्या तुम्हें दे दी। ईश्वर अवतरित होता है। ठोस बनके पुश और पुल जैसी क्रियाएं वो क्रियान्वित करता है। यहां तुम मौन हो। जहां तुम मौन हो गए वहां खत्म। हो गया। हेलो टाटा बाय बाय। खत्म फिनिश हो गया। देख लेना वो वो है ना मीम है जो एक तो सब तो झुके हैं शंकर के सामने। इसीलिए शंकराचार्य अंतिम है। यही खत्म हो जाता है। बताओ नहीं तो क्या है वहां पर कनेक्शन कैसे हुआ जड़ पदार्थों से? तुम तो अद्वैती नहीं हो। अद्वैती
02:00:04:26 बन जाओ हो जाएगा कनेक्शन। हां बिल्कुल बिल्कुल भैया। ये जो आज आज का जो एक वीडियो कॉल रिकॉर्डिंग जो निर्भय ने अपने चैनल पे डाला था कृषि मंतव्य पे शायद डाला है जिस पे जो कॉल रिकॉर्डिंग है तो उस पे चला रहे हैं। उसकी सबसे अच्छा हां उसप जो उसकी मूर्खता पूर्ण वाली जो बात की ना सबसे पहला ही बात उसमें हेतु पूछा किसका सर्वशक्तिमान का हां जी जी बिल्कुल सही अब सर्वशक्तिमान का हेतु पूछ रहा है इसका मतलब तुम नहीं मानते वो सर्वशक्तिमान है बोलो ना पहले यार घोषित तो करो अपने आप को ठीक है अच्छा ठीक है अरे भैया उसका हेतु कार्य का होता है ना स्वभाव का थोड़ी होता है हेतु हम परिणाम का परिणाम
02:01:08:24 अभी एक मिनट एक मिनट इस विषय पर अभी बहुत सारी वृहद व्याख्याएं आनी है। आप देखते जाइए है ना अभी तो अंगड़ाई है। अभी तो बहुत सारे आचार्य बैठे हुए हैं इनके तथाकथित जो अपने तथाकथित मंदिरों में जो है जिहादियों के साथ विवाह भी करवा देते हैं। सर्टिफिकेट हमें मिले हैं ऐसे। इनका चैप्टर आज क्लोज है। आज क्लोजिंग चैप्टर है इनका। ठीक है। जी अब कोई जगह नहीं रह गई। अरे भैया खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे वाला बात क्यों शुरू से शुरू से लगाइए। खंबा शुरू से लगाओगे लेकिन प्रश्न का उत्तर नहीं दे रहा था शुरू से लगाओ ना ये शुरू से नहीं है शुरू से नहीं है ये आपके पास नहीं है क्या शुरू से मैंने वहां पे दिया है शुरू से मैंने दिया है वर्किंग वाले में वह चलाइए
02:02:25:06 अब यहां तक के स्वरूप भूत लक्षण दिख गए। हां तो सारे लक्षण क्लियर हो गए भैया। हम अब स्वरूप भूत लक्षण दो हैं। बौखलाहट और नीचता। यह स्वरूप भूत लक्षण देखिए। ये है मैंने आपको कर दिया सेंड देखिए
02:03:28:24 हेलो हां मेरे जय श्री राम शिवश जी निर हो चुका है ये तय किसने किया शिवश जी ने यह है मिला आपको ये भेजा आपको मैंने पर्सनल वाले में जी सनातन जी आप कुछ बोल रहे थे शास्त्रवाद जी
02:04:03:20 जी भैया अच्छा वही बात है जो एक बात यह है जैसे यह वाली एक बात देखिए जो कमेंट आ रहा है सर्वशक्तिमान सर्व इच्छावान मैंने यही कहा था कि वह इच्छावान है फिर उसको शक्तिमान मत कहो और यदि इच्छावान को शक्तिमान कह सकते हो तो हमें आभास को अवतार क्यों नहीं कहने दे रहे हो व्यवहार में प्रतीति को जैसे हम सबकी सब चीजों की प्रतीति है तो फिर हमें उसे अवतार क्यों नहीं कहने दे रहे हो क्योंकि ईश्वर के द्वारा हो रही इसलिए हम उसको कह रहे हैं ईश्वर का अवतार है तो व्यवहार और परमार्थ में ये अपने लिए तो सब कुछ अलऊ कर कर लेंगे और यहां मैं इनके हिसाब से बात कर रहा हूं। इनकी ही बात के हिसाब से मैं बात कर रहा हूं। ठीक है? तब भी यह नहीं तब भी इन्हें दिक्कत है। तो इन्हें दिक्कत किस बात से है? इन्हें दिक्कत इस बात से है कि इनको विरोध करना है, द्वेष करना है, पक्षपात करना है, अभद्रता करनी है। है ना? नीच मानसिकता को प्रश्रय देना है। और अब अब यहां पर देखिएगा और वो पंचरंगी ड्रामा विचार उदाहरण ईश्वर सहायक फिर जीव का सामर्थ्य और फिर जीव का कोई कनेक्शन नहीं। यह अंत में इन्होंने वहां बकलोली की है। हम
02:05:16:21 और ये सब होने के बाद में हम जीत गए। हम जीत गए। मामा आ गए। पर मामा आ गए। परंपरा की धज्जियां उड़ गई। अपने अपने चैनल पर लाइव में ये बस यही शब्द बोलेंगे। अगर कोई पूछे भाई कैसे तो कैसे का जवाब नहीं है इनके पास। इससे एक बात और याद आई मुझे। इसमें मैंने देखा था यह अपने लाइव में बोल रहा था बड़ा दांतों को पीसते हुए बोल रहा था कि आपने जो नरेटिव फैलाया है ना मैं उसको नाश कर दूंगा तो भाई मुझे तो बहुत अच्छा लगा मुझे पता चला कि मैंने कुछ किया जिससे लोगों मैं कहता नहीं हूं तुमने तो मेरी उस चीज पर ठप्पा लगा दिया ये कह करके जो मैं कहता हूं कि वो वो जो बंटी और बबली का वो नहीं रात को उसकी नींद नींद जो है उड़ गई थी रात में खटिया से उठ के खड़ा हो जाता है तो वो बात मैं कहता था ना ये हुआ है तो वो नरेटिव अपना काम कर रहा है। ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है। ईश्वर सर्वशक्तिमान है और जिस किसी माई के लाल में दम हो वो आ जाए अपना हेतु पेतु सब लेकर के उसको उसको हम व्यवहार से परमार्थ का सेतु बना देंगे। ठीक है? शिवश
02:06:28:00 हां जी प्ले करिए। शिवश जी निरुत्तर हो चुके हैं। ये तय किसने किया है? ये तो जनता ने तय किया है जी। कौन सी जनता ने नारा है? आपको कौन सी जनता से चाहिए सर्टिफिकेट? जनता मतलब कोई आपका पैरामीटर होगा जनता ने किया है। पॉज करिए पॉज करिए। देखिए इसका एक स्किल तो मानेंगे जहां ये व्यक्ति फंसता है तो वहां सामने वाले पे सवाल डालता है। ठीक है? इसने इन्होंने क्या पूछा? कौन सी जनता ने तय किया है? तो आपको कौन सी जनता यहां पे? क्योंकि सवाल होगा नहीं जवाब। तो क्या जैसे इसी प्रकार से जब जब मैंने यह कहा कि भैया वहां पर वो क्या आया जड़ पदार्थ पर क्या आकर के लगा जो वो क्रिया हुई तो उसने क्या कहा शास्त्र में दिया है कि नहीं आपके वाले या फिर जो है परंपरा ले आए दूसरा विषय खोद दिया आप देखिएगा लास्ट वाला चैप्टर यही वाला जो अभी सुनाया था वहां पे ऐसे जब मैं इसको बता दूंगा कि भैया ऐसे ऐसे तुम बार-बार निरुत्तर हो रहे हो तो वहां पर जवाब देने चलेगा मैं इसको समझा देता हूं फिर दूसरा विषय ले आएगा और अगर सामने वाले के मुख से शक्तिमान निकल गया तो फिर यह बोलेगा शक्तिमान से आप कैसे समझते हो क्या समझते हो मतलब वो चर्चा ही छोड़ दो जो हो रही थी तो कौन सी जनता आपको चाहिए भाई तुमने क्लेम किया है ना तुम अपना दावा बताओ स्वतंत्र रूप से
02:07:43:10 कि कैसे तुमने तुम्हारी क्या विधि है जनता को सेलेक्ट करने की अच्छा इसी इसी रिकॉर्डिंग में आगे ये क्या कहेगा यह तो आत्मश्रय हो गया आत्मश्रय का दोष आ गया कि मैंने अगर कोई क्लेम किया तो उसको उसको क्यों माना जाए? क्योंकि मैं कह रहा हूं इसलिए तो यहां पर यह जनता ने डिसाइड कर लिया है कि शिवश जो है उस चर्चा में हालांकि खुद ही पीछे पड़े सिद्धांतिक चर्चा के वो सब बातें हम बता रहे मगर मगर जब इनसे पूछा गया कौन सी जनता ने तय किया है तो इस पर इनका जवाब नहीं है। तो यहां भी तो आत्माश्रय का दोष है। जनता ने डिसाइड किया है तो यहां पर तुम इस विषय में तुम्हारे पास प्रमाण क्या है? जनता ने डिसाइड किया है। क्या प्रमाण है? आत्माश्रय मैं कह रहा हूं इसलिए मान लो ठीक से तुमको पाला नहीं पड़ा ना तुमको थोड़ा लाइटली ले लिया हमने डोमिनेटिंग तरीके से तुमसे बात नहीं की खाल खींचना किसे कहते हैं पता चलता है तुमको चलो शिवश जी निरुत्तर हो चुके हैं ये तय किसने किया है ये तो जनता ने तय किया है जी कौन सी जनता ने आगे बढ़ाओ आपको कौन सी जनता से चाहिए सर्टिफिकेट जनता मतलब कोई आपका पैरामीटर होगा ना कि कहां की जनता ने किया है। किस जनता ने किया
02:08:58:12 है। जहां पे जैसे वो सोशल मीडिया प्लेटफार्म पे रहते हैं तो सोशल मीडिया प्लेटफार्म पे ही जनता उन्हें आईना दिखा रही है। जी तो आपको मेरा नंबर कहां से मिल गया? पॉज करो पॉज करो। पॉज करो। हमने दिया था। पॉज करो। एक बात बताओ संख्या की ही अगर बात कर ले। ठीक? तो संख्या के हिसाब से तो इनको जनता आईना दिखा रही है। क्योंकि हमारे पास ज्यादा संख्या है भाई। अगर संख्या से निर्णय होना है तो इनका सिद्धांत वो तो हमारे पास ज्यादा है तो उस हिसाब से तो हमने तुम्हें पुनरुत्तर किया अगर तुम्हारा ये सिद्धांत ले लिया जाए और दूसरी बात हां दूसरी बात वो पूछ रहा है स्पष्ट पैरामीटर कि जनता डिसाइड कैसे कर रहे हो तो इनके पास स्पष्ट पैरामीटर है नहीं हम इनके पास स्पष्ट पैरामीटर है ही नहीं वहां पर भी ये नहीं है कि इतने लोगों ने वोट दिया हमने वोटिंग कराई है ये है वो है ना चलो
02:09:50:00 जी जी आपने Instagram पर दिया था। आपने Instagram पर अपना नंबर दिया था। कब दिया था? कितने महीने पहले या कब दिया था? मैं आपको स्क्रीनशॉट भेज दूंगा। आपने अपना एक वीडियो उसके अंदर डाल रखा है जिसमें आपने नीले रंग की हाईलाइट है। पूरा नंबर लिख रखा है। अच्छा आपकी इंस्टा आईडी है। जी। मैं वही बता तो रहा हूं। मैं आपकी वो वीडियो ही देख रहा था। और फिर एक काम करिए ना। मुझे पूरी उम्मीद है पॉज करो। पूरी उम्मीद है कि इन्होंने अपना नंबर नंबर नहीं दिया है निर्भय को कभी भी। ठीक है? जहां तक है इन्होंने इनके किसी उस पर कमेंट किया है Facebook पर और Facebook पर कमेंट करने के बाद अ जो है निर्भय ने इनकी प्रोफाइल चेक की। प्रोफाइल में इनका नंबर मिल गया तो इन्होंने इनको निर्भय ने नंबर लगा लिया। अब निर्भय का यह कहना कि आपने नंबर दिया है। यह अपने आप में एक झूठ हो सकता है। पूरी संभावना है कि निर्भय को क्योंकि बहुत पहले यह कार्य नहीं कर रहे थे कि वो जो है किसी को फोन करें। अभी इन्होंने चालू किया। तो अच्छा बहुत पहले क्यों दिया होगा इन्होंने क्यों मांगा होगा यह भी बात है। तो जब इन्होंने कहा स्क्रीनशॉट भेज दो तो इन्होंने स्क्रीनशॉट ना भेजकर यह कहा अभी तो यह बता दीजिए। समझ रहे हो? तो इस विषय में भी वहां पर वहां से क्विट किया
02:11:05:10 तुरंत और सोचते हैं कि मैंने बहुत बड़ा तीर तीर मार लिया और अभी इसी लाइव में अपने ही बोले हुए वचनों से तुम विमुख जाओगे और फिर उसी ऐसी रिकॉर्डिंग को तुम अपने चैनल पर डालोगे और तुम्हारे लोग कहेंगे वाह वाह वाह वाह कैसी नीच मानसिकता है भाई ये तुमने अपनी ही बातों को यहां पर भंग किया है विरोध किया तुमने अपनी बातों का तुमने मुझे बोला था गौरी शंकर के बाद कौन गुरु नहीं अज्ञात है। यहां तुम अपनी वंश परंपरा गिनाने लगे हो गुरुओं में और उनको चेक किया जाएगा तो हो सकता है मूर्ति पूजक निकल आए। ये कैसी नीच मानसिकता है भाई? तो ये है स्वरूप भूत लक्षण। दूरता तक तो आ गए थे। पंचरंगी ड्रामे तक आ गए थे। अब बौखलाहट और नीचता यहां से आएगी। स्वरूप भूत लक्षण। हां भाई चलाओ। जी जी बताइए। आपको एक नंबर दे देता हूं। आप लाइव आ जाइए। लाइव जनता के सामने बैठ के और इस विषय पर निराकरण निकाल लेंगे तो आपसे चर्चा होगी लाइव में आपकी थोड़ी सुंदर आपका कॉन्फिडेंस अच्छा लग रहा है तो आप लाइव आइए आवाहन कॉल ऑफ ध चैनल है मैं बोल रहा हूं नंबर अच्छा लाइव पे हो चुकी है लाइव पे ही हो चुकी है आचार्य जी क्या नाम है आपका मेरा नाम निर्भय आर्य है तो ये तय अच्छा निर्भय
02:12:20:14 आर्य है आपका नाम तो ये तय आपने खुद कर लिया क्या कि वो निरुत्तर हो चुके हैं मैं कह तो रहा हूं मैंने तो तय नहीं करा मैं तो जनता का नाम लिया तो जनता आपसे फोन करके कह रही है क्या और एक मिनट इन्होंने जनता का नाम लिया और इन्होंने जनता का नाम लिया और जनता ने क्या तय किया ये ये कैसे तय हुआ कि यह मैंने कहा ये आत्मश्रय हैं ये आत्मश्रय ना अभी देखना आगे कहेंगे आत्मश्रय तो उस जनता में मान लीजिए अगर कोई दो व्यक्ति हैं अगर एक कहता है कि आप विजय है और एक कहता है आप पराजित है तो किसका मानेंगे आप मैं इसका सोलशन दे देता हूं। कैसे मानना है। देखो आप बताओ जिस सिद्धांत को आप मानते हो वो ठीक है कि गलत है? नारायण हम तो परंपरा से मानते हैं तो हमारे परंपरा से परंपरा से सही मानते हो ना तो उत्तर दे दो हो जाएगा सिद्ध हम आपसे बात करना थोड़ी चाहते फोन किए हैं अब देखो यदि कोई व्यक्ति पॉज करो यदि कोई व्यक्ति यह मानता है कि मैंने एक मैच देखा मान लो और मैंने देखा कि फलाना व्यक्ति उस मैच में जीत गया वो शास्त्रार्थ का मैच था डिबेट थी तो इसका मतलब यह हो गया कि उस डिबेट में कौन सा पक्ष जीता है। अगर उसका समर्थन करने वाला जो व्यक्ति है, वह उसी
02:13:35:18 पक्ष को यथावत रख दे उसी व्यक्ति के साथ जिस सामने जिस जिसके साथ वो डिबेट हुई है। यह सिद्धांत है यह निर्णय का कि उस मैच में कौन जीता था। भाई मैच में तो मुस्लिम पक्ष नास्तिक पक्ष पर जीत गया। हावी हो हावी रहा। तो इसका मतलब यह मान लिया जाए कि नास्तिकता को हराने में जो मुस्लिम पक्ष है वो समर्थवान है। नहीं है। नहीं हरा पाएगा। नास्तिकता को नास्तिक कोई प्रबुद्ध व्यक्ति तुम ही खड़े हो जाओगे मुसलमानों के सामने नहीं हरा पाएंगे नास्तिकता को क्यों तो कहने का मतलब यह है कि उस मैच में पर्टिकुलरली कौन जीता भले ही हारने वाले का जो सिद्धांत था वो वाकई में वो सिद्धांत बलवान है मगर उससे यह सिद्ध नहीं होगा कि उस मैच में पर्टिकुलरली कौन जीता तो यह तुमने जो यहां पर तरीका दिया कि मैच में अभी पता लगा लेते हैं यह कहां से आया बड़बोले बौख बौखलाहट जो बौखलाहट भरी हुई है जो तुम्हारा वो पगलप्पन दिखा है ना दो घंटे 47 मिनट के बाद जो पगलप्पन दिख रहा है जो तुम्हारी बकवास वहां पर सुनने में मिल रही है उस बौखलाहट को तुम यहां निकाल रहे हो ये कुतर्क करके कि तुम मुझे सिद्ध कर दो तो मान लिया जाएगा उसमें शिवश जीते अरे भैया अगर यहां पे तुम भी जीत जाते हो तब
02:14:50:19 भी यह सिद्ध नहीं होता कि वहां पर जो है तुम जीते या शिवश जीते यहां पर शिवश जी का पक्ष गलत हो जाता है तब भी वहां पर यह सिद्ध नहीं होगा कि निर्भय जीता और यहां पर निर्भय का पक्ष गलत सिद्ध हो जाएगा तब भी यह सिद्ध नहीं होगा कि वहां पर शिवांग जीता क्योंकि पर्टिकुलर उस मैच में किसका परफॉर्मेंस कैसा था वहां पर हारजीत इस बात पर निर्भर करती है बाद में कौन सा सिद्धांत सही है कौन सा गलत है वो बात अलग है उस मैच की बात अलग है ठीक है तो ये तुमने कुतर्क किया चला आओ आगे भैया दिखवाना है मैंने तो बोला नहीं मैंने मैंने ये शब्द बोले ही नहीं कि मुझे कुंडली दिखाना है मैंने तो ये पूछे कि ईश्वर से संबंधित है ये बता दीजिए ईश्वर कुछ भी कर सकता है तो इसका हेतु क्या है दे दीजिए देख लेते हैं परंपरा कितना ज्ञान ले रखा है आपने अभी दूध का दूध तो हमने तो कहा नहीं कि हम आपसे डिबेट करेंगे आप शिवश जी से डिबेट तो मैं कर ही नहीं रहा हूं आचार्य जी डिबेट की तो योग्यता परंपरा में है ही नहीं मैं तो बोल रहा हूं केवल प्रश्न नहीं तो आप ऐसे करो मैंने बीच में है कोई कोई कहीं पर भी हो उसने तुरंत फोन लगाया कि आप जो है मुझे प्रश्नों का उत्तर दो ठीक है और मैं डिबेट नहीं कर रहा हूं मैं तो प्रश्न कर रहा हूं ठीक है मैं डिबेट नहीं कर रहा हूं मैं प्रश्न कर रहा हूं और डिबेट किसे कहते प्रश्न किसे कहते हैं? चर्चा किसे कहते हैं? वह सब सोचने वाली बातें हैं। मगर व्यक्ति पर किस प्रकार से हावी हो रहा है कि यह
02:16:05:22 तरीका है। अच्छा उनका जो उनकी जो प्रोफाइल है ना Facebook की प्रोफाइल वो प्रोफाइल है ज्योतिष के रूप में। ठीक है? तो उनको जब कोई अनजान नंबर आता है तो उनको लगता है कि किसी ने ज्योतिष विषय में हमसे परामर्श के लिए फोन किया होगा। तो उनके पास आया। उन्होंने उनसे किसी ने कहा 510 मिनट का टाइम है तो उन्होंने कहा हां है भाई जिस विषय में वो रेडी है उस विषय के लिए है अगर और कोई विषय है तो हमें समय लगेगा मगर वो कह रहा है नहीं यही दो अभी दो समय भी नहीं है ठीक है समय भी नहीं है देखना अभी आगे ठीक है कोई वीडियो बनाने दिया है आपने नंबर दिया है ना आप स्क्रीनशॉट भेज दीजिए मैं देख लेता हूं मैं भेज दूंगा आपने कमेंट पॉज करो पॉज करो पॉज करो स्क्रीनशॉट मांग रहे हैं भेजने को कह रहे हैं पर झूठा व्यक्ति यह स्वरूप स्वरूप भूत लक्षण है दोगलापन और झूठा यह स्वरूपभूत लक्षण है इन लोगों का धोखाधड़ी झूठ नीचता द्वेष पक्षपात पक्षपाती विरोधी और अन्याय सहष्णुता ये सब इनके स्वरूपभूत लक्षण है। झूठ पर आधारित चीजें झूठ पर लड़ेंगे। वो कह रहे तुम्हारी परंपरा क्या है? तो झूठी परंपरा बता रहे हैं जिसका ना सर है ना पैर है
02:17:21:10 और ऐसे व्यक्ति से जाकर के चर्चा की जाए उसके लाइफ में जिस जो अपने सिद्धांतों को बदल रहा है बार-बार अब इसमें और भव्य राधा कृष्ण दास में क्या अंतर रह गया बताइए चलिए प्ले करिए भेज दूंगा आप प्रश्न का उत्तर दे दो पहले सुंदर विषय मैं कहां हूं कैसे हूं इसकी कोई प्रश्न का उत्तर पहले भेज दो क्यों दे दे भाई ये तय कौन कौन कर रहा है कि पहले किसकी बात मानी जाएगी? सबसे बड़ी बात है फोन तो तुमने किया है। चाहिए तो तुम्हें तो निवेदन तो तुम्हारा है तो निर्णायक तो सामने वाला हो गया। तो पहले और बाद में तो निर्णय वो लेगा फिर जिसके पास तुमने फोन किया है। नहीं तो रख दो फोन। भाई तुम आए हो ना हमारे द्वारे।
02:18:09:06 चलो व्यवस्था कोई जानकारी आपको है नहीं। आप एक समय तय कर लीजिए आपने लाइव पे आ जाइए। आपसे मैंने 510 मिनट इसीलिए मांगे ना मैंने जी आपने दिए आप आप किस परंपरा से हैं? मैं किस परंपरा से हूं? मैं तो वही ऋषियों की परंपरा से हूं। कौन सी परंपरा है? आप बताते हैं कौन-कौन सी परंपरा जानते हैं आप? नहीं मैं तो कुछ नहीं जानता। पॉज करो पॉज करो। पॉज करो। पॉज करो। देखो इसने क्या कहा? आप बताइए आप। देखो जहां पे अपना पक्ष कमजोर है वहां तुरंत सामने वाले पे क्वेश्चन। सामने वाले पे काउंटर। हां हां यही चाल है। काउंटर नहीं काउंटर नहीं क्वेश्चन। काउंटर नहीं क्वेश्चन। आप बताइए आप बताइए भाई तुमसे सवाल किया गया तुम्हारी परंपरा अब्बा डब्बा डब्बा हो गया मैं तो ऋषियों की परंपरा सामने वाले पे क्वेश्चन चिपका दिया कि नहीं जहां ढीला होते हैं वहां सामने वाले पे क्वेश्चन करते हैं ये क्वेश्चन करते हैं प्रश्न क्यों कर रहे हैं फोन तो आप किया ना नहीं तो आप जब जिस विषय में आपको जानकारी नहीं उस विषय में कैसे प्रश्न कर रहे हैं आप फोन तो आपने किया फोन मैंने किया तो मैं प्रश्न पॉज करो परंपरा के विषय में यह ना मालूम होना कि मेरी और कौन सी परंपरा उन्होंने यह कहा इसको दुर्जंतोषनाय कहते हैं। मेरी तो कोई नहीं है। अब बताओ। ठीक। मगर इसका मतलब परंपरा के विषय में ही जानकारी नहीं है। कहां से सिद्ध हुआ? भाई
02:19:24:14 परंपरा का मतलब है कि तुम किस चैन से वेदों को प्राप्त कर रहे हो? वो चैन क्या है तुम्हारी? अगर मुझको मेरी चैन नहीं पता है तो इसका मतलब ये थोड़ी ना है कि मुझे सिद्धांत ही नहीं पता। चैन का चैन का सिद्धांत चैन का सिद्धांत मालूम होना यह और मुझे मेरी पर्टिकुलर परंपरा का नाम ना मालूम होने में अंतर है। ठीक है? तो तुम्हारा जो प्रश्न है वहां पर कि तुमको जब ये तुमको जिस विषय में जानकारी नहीं है उस विषय में प्रश्न क्यों कर रहे हो? तो इस तरीके से तो वो भी कह देंगे। तुमको जिस विषय में जानकारी नहीं तुम क्यों प्रश्न कर रहे हो? वो भी कह देंगे। ठीक है?
02:20:02:02 तो पहली बात क्या है कि जब जब कठोर प्रश्न आया तो तुरंत जब कठोर प्रश्न आया तो तुरंत कौन सी कौन-कौन सी परंपरा को आप जानते हैं? ठीक है? चलाइए थोड़ा स्पीड बढ़ा दीजिए। डेढ़ की स्पीड में चलाइए आप। सुंदर हो ना कबूतर। नहीं तो मैं कह रहा हूं ना आप अपनी परंपरा बताइए अपना परिचय बताइए मैंने बताया तो मेरा नाम निर्भय आर्य है परंपरा इन लोगों से हम लोग डिबेट नहीं करते हैं अरे भैया आपके बस का ही नहीं है डिबेट बस का ही नहीं है डिबेट किसी के बस का नहीं मुझे खाली प्रश्न का उत्तर दे दो आप अच्छा डिबेट किसी के बस का नहीं है बस आप झूठ में क्यों परेशान हो रहे हैं फिर ये देखो देख रहे हो बौखलाहट बौखलाहट देख रहे हो ये बौखलाया इसीलिए इसकी वो रिकॉर्डिंग डाल दी गई ना इसकी चीजें डाल दी गई उसमें इसका वो पगलप्पन दिख रहा है लास्ट में अरे लोग कह रहे होंगे अरे निर्भय भाई तुम क्या करके चले आए हो वहां लास्ट में तो तुमने बिल्कुल मट्टी कुटवा दी हमारी विचार है और जीव है वो ये करता है जीव अपने सामर्थ्य से करता है ईश्वर ही सहायक है और जीव का कोई लेना देना भी नहीं है पांच छह बातें कह दी एक दूसरे परस्पर विरोधी हम
02:21:19:15 भले ही हो जाएगा क्या यहीं से मुझसे फिर आप जवाब दे दो प्रश्न का उत्तर मैं नहीं देना चाह रहा हूं मैं आपसे बात नहीं करना चाह रहा हूं जब तक आप अपने प्रश्न नहीं बताएंगे इतनी बहस करोगे लेकिन प्रश्न का उत्तर नहीं दे रहा था अरे भैया सानी बिल्ली खंबा नोचे वाला बात क्यों हो रहे हो खंबा सर क्यों नच हो रहे हो खंबा खंबा मत नचो कौन आपने किया है आप अपना परिचय बता नहीं रहा है किस परंपरा से आ रहे है बोल रहा हूं व्याकरण की परंपरा हो तो किस परंपरा से हो भाई व्याकरण की परंपरा सुनाई नहीं दे रही क्या व्याकरण की परंपरा है तो आपके गुरु का क्या नाम है बताइए अपने गुरु का मेरे गुरु का नाम है महर्षि दयानंद सरस्वती जी उनके गुरु जी का नाम बताइए उनके गुरु का नाम है दंड पॉज पॉज पॉज इनके गुरु का नाम इनके गुरु का नाम महर्षि दयानंद सरस्वती है समझ लो डायरेक्ट डायरेक्ट तो यहां पे इन्होंने क्या मान लिया कि जैसे ऋषि वशिष्ठ जो है वो एक लाख वर्ष तक जीवित रहते थे। ऋषि वशिष्ठ इत्यादि। ऐसे ही दयानंद जी भी अभी वो परलोक गमन उनका हुआ नहीं है। जहां भी वो गए हो वो हुआ नहीं है अभी और जो है वो वो जो है इनके डायरेक्ट इनके गुरु हैं। है ना? अच्छा बातें भी बदल रहे हैं। ये बातें बदल रहे हैं बहुत बहुत। हां हां देखो देखो देखो देखो इसकी बौखलाहट देखो। गुरु जी का नाम बताइए। उनका नाम है ओमानंद सरस्वती जी। उनके पूज्य गुरुदेव का नाम बताइए। उनका नाम है महर्षि पारायण जी। अच्छा हां जी। उनके गुरु जी का नाम बता दीजिए। उनके गुरु का नाम है यज्ञदेव जी। ये परंपरा कहां है? किस शास्त्र में है? ये परंपरा हमारे दादा जी के बताई थी। दादा जी ने हमें बता दी। और उनको कहां से ज्ञान मिला? अब
02:22:34:16 देखो अब पॉज करो। पहली बात तो ये अपने अपने घर पे ले गए परंपरा के लिए। ठीक है? दूसरी बात ये है ये परम उनका कहने का मतलब है कि इसका विवरण हमें किस प्रकार से प्राप्त हो सकता है। इस परंपरा का विवरण किस प्रकार फिर हम उसको देखेंगे। तो अभी बात वो आएगी कि भाई वो तुम्हारी परंपरा शास्त्रों में है क्या? भैया शास्त्रों में देने की बात आ जाएगी तो हम शास्त्रों में दिखा भी देंगे। ठीक है? बात यह है कि हमारे विरुद्ध जाते हुए अगर हम जो शास्त्र दिखाएंगे तुम कहोगे नहीं ये तो अभी 19वीं सदी में लिखा गया 18वीं सदी बात ये है कि हमारे विरुद्ध जाते हुए तुम्हारा स्वतंत्र रूप से वैदिक होना सिद्ध नहीं होगा। ये बात है और हमारा हम तुम्हारे इतिहास है। ये तुमने माना हुआ है। दिक्कत वाली बात ये भी है। चलो दयानंद जी ने अपनी किताब में लिखा ना होता। वेदों के मामले में हम तुम्हारा इतिहास हैं। समझ लो इस बात को। समझे? तो इस विषय में वो जो बड़ा वाला होता है ना वो हम है। और वो जो वो होता है ना समझ लो वो अलंकार है। ठीक है? तो हम तुम्हारा इतिहास है। ठीक है? तो अब ये बात आएगी ना जैसे इसमें आगे बोलेगा कि परंपरा कहां लिखी है? शास्त्रों में दिखा देंगे।
02:23:49:22 लिखी है शास्त्रों में परंपरा। शंकराचार्य जी के बाद की बाद की परंपरा भी लिखी है। मतलब पूरी यहां तक नहीं मगर शंकराचार्य जी के बाद के कुछ आचार्यों के नाम मेंशन है हमारे शास्त्रों में। मगर हम उनको ऐसे प्रमाण इन लोगों के समक्ष नहीं रखते। हम रखते ही नहीं वो वाले। क्योंकि वो सीधे कहेंगे भैया ये तो वो वो प्रमाण नहीं है। तो हम सीधे उस पर खेलेंगे। तुम्हारा प्रमाण है क्या? गुरु कौन है तुम्हारा? तो अब इन्होंने जो ये सब बताया है ना ओमानंद जी वगैरह ये अपने अपने घर परिवार पे ले गए। अभी इनहीं के यहां जाएंगे तो एक दो हो सकता है इस पीढ़ी में या इनके एक दो पीढ़ी पहले में ही इनके यहां मूर्ति पूजा हो रही होगी हम और अगर देख लेंगे तो पूरी तरीके से हो सकता है वर्तमान की पीढ़ी इनकी आर समाधि ना हो वर्तमान के माता पिता इनके कोई मूर्ति पूजक हो ये भी ये भी होता है पीछे से हां हां
02:24:40:07 बोला सबसे लास्ट में नाम उनको कहां से ज्ञान मिला है उनको उनके गुरु से ज्ञान मिला उनका नाम बताएंगे महर्षि वेद पारायण जी उनके पूज्य गुरुदेव का नाम बताएंगे यजदत्त पारायण जी उनके पूज्य गुरुदेव नाम बताएंगे इंद्रदेव शर्मा जी उनके पूज्य गुरुदेव का नाम बृहस्पति अच्छा तो ये किसी शास्त्र में होगा ना शास्त्र में लिखा होता है गुरु के नाम और क्या मुंडोपनिषद में ऋषियों ने अपनी परंपरा बताई है भैया अच्छा तो ये बताइए कि ये जो आपके पूरी शंकराचार्य प्रश्न का नाम दीजिए ना प्रश्न का जवाब है अरे मेरे इसी बात के अंदर हां अब देखो इन्होंने इतने गुरु बता दिए अब आप मेरी रिकॉर्डिंग सुन लीजिएगा उसमें इन्होंने वो क्या कहते हैं कोई ओमकारानंद जी है उनके बाद अज्ञात गुरु घोषित किए हैं वो बात और है कि दयानंद जी की जीवनी हमारे पास आ रही है। आ चुकी पीडीएफ में हार्ड कॉपी में आ रही है। उसमें दयानंद जी ने अपनी परंपरा के विषय में क्या-क्या बोला है वो इनहीं के ये बात है भाई धूर्तता है ये। आप दयानंद जी का नाम लेकर के कि मैं उनका फॉलोअर हूं। उनकी कही हुई बातों के विरुद्ध जा रहे हो। अपनी कही हुई बातों को बदल रहे हो। तो तुमसे चर्चा की किस बात पे जाए। पहले अपना कोई सिद्धांत तो पकड़ लो कि मैं ये मानता हूं। तुम तो कुछ मान ही नहीं रहे हो। बहुत तगड़े तरीके से बातें बदल रही है। बहुत तगड़े तरीके से। तुम जब तुम कुछ मान ही नहीं रहे हो तो तुम हो कौन? तुम्हारा अस्तित्व क्या है? अब ये नीच मानसिकता कैसे आएगी?
02:25:55:22 तो बौखलाहट है। देखो क्या खिसिया नहीं कौन खिसिया रहा है? देखो उल्टा सीधा कुछ भी बोलो। कुछ भी बोलो। ये सिद्धांतवादी है। ये धर्मरक्षक है। कुछ भी बोलो। ये धर्म रक्षक है। ठीक है? हम कहीं भी गए चर्चा में। हमने कभी भी अपने सिद्धांतों का विरोध थोड़ी ना किया। वहां पर यथावत उसी को रखा जो है जो है कभी भी कोई बात आती है ऐसा थोड़ी ना काम चलाने के लिए थोड़ी देर के लिए कुछ और बोल दिया भव्य राधा कृष्ण दास वो अपने ही गुरुओं के विरुद्ध जा रहा है वो जाकर के जाकिर नायक का भी सहायता ले रहा है चलो इसी का उत्तर है सुनिए अगर जैसे आपने बोला ना कि परंपरा शास्त्र के अंदर होना चाहिए वरना परंपरा परंपरा नहीं मानी जाएगी है ना आप ये जो 2500 साल पुरानी जो पूरी शंकराचार्य की परंपरा इस पूरी एक लिस्ट मेरे को दिखा दो परंपरा की लिस्ट तो है ना आपके पास तो वो कहां है वो तो वेबसाइट पे डली हुई है ना देख लीजिए है 2500 साल पुरानी परंपरा की लिस्ट है 2500 में आप क्यों ले रहे हो इधर 2500 में आप क्यों मेरे से ले रहे हो आपके भी धर्म से ले रहे हो तो फिर आप बता दीजिए ना आपकी पुरानी परंपरा अगर आपको 25 साल के अंदर अंदर की लिस्ट की नहीं चाहिए मेरे से मांग पूरा लिस्ट भेज देता हूं ना जैसे आप स्क्रीनशॉट कहां से भेजोगे वेबसाइट से उठा के भेजोगे भेज दूंगा जो शास्त्र वहां से भेज देते हैं आपके 25 साल के मुंड में आप जो नाम बोल देंगे वो सही हो जाएगा नहीं आप जो बोलेंगे वो भी सही हो जाएगा हमारे पास उनका कहने का मतलब यह है देखो वो
02:27:11:20 सामान्य व्यक्ति तो है। यह तो ठीक है। इस विषय में वो तैयार भी नहीं थे। मगर बात यह है कि व्यक्ति की बौखलाहट देखो कि कुछ भी बोल के सामने वाले को फंसा रहा है। कुछ भी बोल के भाई अपने सिद्धांतों को बोलना तू तब सामने वाले को फंसा। तब तो बात भी है। तू अपना अपनी चीजों को छोड़ के और सामने वाले को कह रहा है कि देखो देखो हमने ये मामा आ गए। मामा आ गए। ऐसे थोड़ी ना होता है। कौन जीता है यहां पे? बताओ। दयानंद दयानंद जी तो जीते नहीं। आर्य समाजी तो जीते नहीं। अगर मान लो कि वह यहां पर निरुत्तर हो गए तो आर्य समाजी जीते क्या? क्योंकि तुमने जो परंपरा बताई वह मेल नहीं खा रही। अच्छा यहां ये मान ले निर्भय आर्य जीता क्या? नहीं निर्भय आर्य तो दूसरी जगह कह रहा है ये परंपरा ओमकार इनके पीछे कौन जीता भाई? इसको कहते हैं फड़ता। और कुछ नहीं है। ये चीजें हां आधार हो गया ना। आत्मश्रय दोष लग गया। मैंने बोल दिया मैं बढ़िया हूं बस हो गया। नहीं तो
02:28:10:16 हां देखो इन्होंने कहा डिबेट में शिवाजी हार गए। यह भी तो आत्मश्रय दोष है। अब ये यहां क्या कहेगा कि मैंने तो जनता का नाम लिया। अच्छा जनता ने ये तय किया है ये कैसे ये कैसे सिद्ध हुआ? तो वहां पे मैंने तय किया। जनता ने ये तय किया है। वहां आत्मश्रय दोष हमसे डिबेट कर रहे हैं। मैंने जनता का नाम लिया। फिर कौन सी जनता मैं कह रहा हूं दो व्यक्ति बैठे हैं कह रहा है जब वह पूछ रहे हैं कौन सी जनता तो कह रहा है कि आप बता दो कौन सी जनता प्रश्न का जवाब प्रश्न क्योंकि वहां पे इनके पास उत्तर नहीं है कौन सी जनता तो आत्मश्रय जब उन्होंने कहा कि भैया आपने भी तो कह दिया कि शिवश नारायण द्विवेदी से मैं जीत गया हूं तो उसने कहा कि मैंने खुद से नहीं कहा मैंने तो जनता का नाम लिया उन्होंने कहा कौन सी जनता तो अब यहां पर उत्तर नहीं है आप बता दो कौन सी जनता तो यहां तू तू मान ना कि यहां आत्माश्रय दोष है मुझ पर भी कुतर्की
02:29:07:01 जी मुझे लज्जा आती है कि मैंने तुझे कभी अपना छोटा भाई समझा बहुत बड़ी गलती की मैंने क्या बौखलाहट है क्या नीचता है क्या कुतरकी है क्या अभद्रता है पक्षपाती धर्म विहीन लोग हो तुम लोग कुछ नहीं है तुम्हारे पास सिवाय मामा आ गए। सुनिए दो व्यक्ति बैठे हैं। एक विजय है एक पराजित है। कौन से की बात मानेंगे आप? आपको तो आप मैं देखो मैं बता देता हूं। जिसने प्रश्न का उत्तर दे दिया। ठीक है? वो विजय जो नहीं दे पाया प्रश्न का उत्तर प्रश्न सुनिए सुनिए। झूठ वही वाली बात मैच में कौन जीता था यह तय कैसे होगा कि सामने जो उसका समर्थन कर रहा है कि यह जीता था। हैं? वो सिद्ध कर दे उसका पक्ष। नहीं भाई यह कहां का शास्त्र का सिद्धांत है? मैच में तो कोई भी जीत सकता है कि वहां पर एक कह दिया जाता है भाई मेरा मत नहीं हारा है। मेरी मति हारी है। मेरा मत नहीं हारा। मैं मेरी मति ही हारी है वहां। ठीक है? तो ये तुम्हारा कुतर्क है कि अभी बता दो अभी सिद्ध कर दो वही वही जीता माना जाएगा।
02:30:18:12 हम करोगे कुछ कौन सा? समाज ये बताते हैं कि गुरु का नाम पूर्ण दूसरा ही कुछ नाम बता रहे हैं। अरे भैया वो क्या बता रहे क्या नहीं बता रहे? मेरे से चर्चा करोगे मेरे से बात करोगे। नहीं तो मैं कर रहा हूं ना आप फ़ करे अभी से बातें देखो अभी तो आपने किया अब देखो अब देखो अब उन्होंने एक सही बात कही कि सब लोग बताते हैं दयानंद जी के गुरु का नाम विजानंद है ठीक है विजानंद और सन्यास उनका पूर्णानंद जी से हुआ था पूर्णानंद सांकर मटके थे इनको सरस्वती टाइटल मिला वो भी वहां पर भी वही कुछ ऐसा है। मगर बात यह है जब उन्होंने ये बात कही कि उनकी बात क्यों कर रहे हो? तो भाई तुम भी तो उन्हीं की बात कर रहे हो। मैं दयानंदी हूं। तू खुद बोल रहा है ना मैं आर्य समाज हूं तो बात क्यों ना की जाए आर्य समाज क्या कहता है मूर्ख हो क्या यह है दोगलापन
02:31:03:18 ये दोगलापन देखो खुद को आर्य समाज ही बता रहा है फिर आर्य समाज की बात ना की जाए कि वो क्या कहते हैं तू अपने तू अपने आप में आर्य समाज है क्या आर्य समाज की किताबें क्या कहती है आर्य समाज के जो प्रतिष्ठित लोग हैं जो जो वहां की अगुवाई कर रहे हैं वो वो बताएंगे हमारे हिसाब से तो उसमें में भी गुरु शिष्य परंपरा नहीं है तो वहां पर वो भी फेल हो जाएंगे। मगर फिर भी तुम्हारे कंपैरेटिवली तो उनको ही प्रमाण माना जाएगा ना आर्य समाज के विषय में क्या क्या मूर्खता पूर्ण बातें हैं ये बौखलाहट है मैं कह रहा हूं बौखलाया है अभी नीचता देखना आगे क्या नीचता की है
02:31:44:28 दो मिनट और बचे हैं हमको चर्चा ही नहीं करनी है आप अगर अरे रगड़ लिए लोग रगड़ करके आ गया फिर बोल रहा हूं आपने अगर आपके गुरु शंकराचार्य में सामर्थ हो गुरु में सामर्थ हो मेरे को हेतु बता दो डिस्कस करने का बताओ भैया गुरु नारायण नारायण बस ठीक है ठीक है ठीक है सुन महोदय महोदय यही होता है यही होता है कि तरीके से वार्तालाप आप लोग उगरे हो जाते हो तो देखो खिसिया कैसे रहा है पूरी शंकराचार्य से बता दो सब कुछ कर सकने का हेतु बता दो हेतु बता दो ठीक है हेतु बता रहा हूं जा ईश्वर सर्वशक्तिमान है यही हेतु है ले यही हेतु है और जिसमें भी जिसने भी अपनी माता जी का निष्ठा पूर्वक दूध दूध पी जाओ वो आ जाना। ठीक है? खुला निमंत्रण है। और अब वो वाली बात नहीं होगी। अब सीधे हमला होगा। सर्जिकल स्ट्राइक। अब वो हो गया बस। सॉफ्ट कॉर्नर वाली बात हो गई खत्म। तुमने सब खत्म कर दिया। अब ठीक है। तुम्हारे अंदर सुनो। तुम्हारे अंदर क्षमता नहीं।
02:32:48:02 तरीके से तुम वार्तालाप कर पाओ। गाड़ी से कहीं जा रहा है। तुम जब मन करेगा फ़ करके डिबेट करने। आपने क्यों बोला किस में? ठीक है। आपने ओके क्यों किया? मैंने किया नहीं तुमने कहा ज्योतिष के मामले में जानकारी चाहिए भाई मैंने ईश्वर का नाम लिया कि नहीं लिया तुमने ये कहा है ना सुनो तुमने कहा है इसने उन्होंने समझा ज्योतिष वाली बात है ठीक है तो उन्होंने टाइम दिया उनको क्या मालूम भाई ये व्यक्ति खौर खाया हुआ है खौर खाया हुआ है दिल जले खौर खाया हुआ है वो जो है कहीं मैं तो अपनी वो गर्मी निकालूं
02:33:24:24 खैर चलो आगे चलते हैं। हां जी ये इसको मैं भी प्ले कर सकता हूं शायद कि मुझको आप ज्योतिषी बोल रहे हैं। मैंने कहा हां बोल रहा हूं। तुमने कहा आपसे ज्योतिष के बारे में बात करना चाह रहा हूं। मैंने उसके बारे में क्या बोला ईश्वर से आप कहां से बात कहां खींच रहे मैं आपको देख रहे हो तर्क देख रहे हो वो ज्योतिषी होने के नाते बात करना अलऊ कर रहे हैं तो ये बोल रहा है ज्योतिषी का संबंध ईश्वर से है इसलिए हर बात को ईश्वर तक ले जाएगा अच्छा ये बताओ अब ये कल को अंडे वाले के पास जाके कहेगा कि मुझे अंडे की बात करनी है तो वो कहेगा करो तो ये कहेगा क्योंकि अंडे का संबंध ईश्वर से है तो ईश्वर से ईश्वर की बात करनी है बता बता ईश्वर सर्वशक्तिमान कैसे है ये है अंडे वाले से पूछेगा है ना? फिर ये कोई कोई स्मैक किया जा रहा होगा उसको पकड़ लेगा। ये बता दुनिया में हर चीज तो ईश्वर ने बनाई है। उसका संबंध ईश्वर से है ना? तो भाई तू बता मुझे ईश्वर सर्वशक्तिमान कैसे ये देखो पागलपन देखो इस व्यक्ति का कि जो वो कह रहे हैं कि ज्योतिष के लिए अलव किया तो ज्योतिष का संबंध ईश्वर से तो ईश्वर सशक्तिमान कैसे सब कुछ कर सकता है कैसे? हम
02:34:40:24 नंबर दिया मैंने बात बोला क्या? मैंने कई बार तुमने कहा मैं स्क्रीनशॉट भेजूंगा। हां तो भेज दूंगा। कॉल कटिंग भेजोगे भैया बोल रहा हूं आप भेज दो ना अभी भेज दो क्यों कॉल कट अभी आप उत्तर दे दो मेरे को मेरे प्रश्न मुझको आपसे डिबेट ही नहीं करना आप उत्तर क्यों ले रहे हो ये तय कौन कर रहा है जबरदस्ती ये तय कौन कर रहा है कि पहले मैं स्क्रीनशॉट बाद में भेजूंगा पहले उत्तर दे दो पहले है कौन भाई तू है कौन उनके लिए जो तुझे पहले उत्तर दे जब वो कह रहे हैं मुझे पहले स्क्रीनशॉट दिखाओ तब मैं देखूंगा तो पहले उत्तर क्यों कौन तय कर रहा है यहां पे क्योंकि तुम अपने आप को स्वयंभू मानते हो स्वयंभू हम ठीक है अभी वो आगे पता चलेगा चीजें स्वयंभू जो है प्रश्न डिबेट में मैं क्यों तुमको उत्तर दूं यार तुम होगा तब तो दोगे तुम्हारी क्षमता है तुम लाइव आके करो लाइव आके कर चुका हूं मेरे को चुके हो तुम तय कर ले रहे हो क्या तुम विजय हो मैं विजय हार छोड़ दो मेरे को उत्तर दे तभी तभी तभी तभी तभी तभी तभी तभी तभी तभी हो जाएगा तुम अरे यार तुम जाके वहां डिबेट करो ना तुम किसी से भी डिबेट कर चुका हूं तुम दोनों तुम नहीं तुम नहीं हम कमेंट सेक्शन में क्यों चल रहे है फिर भाई क्या हो गया सत्यम जाना अनंत ब्रहम ईश्वर कुछ भी कर सकता लिखा था ना आपने कमेंट में लिखा था हां तो दो फिर बताओ सत्यम जान अनंत मेरे को हाथ तो बताओ सत्यम जान अनंत में से किसकी व्याख्या शंकराचार्य ने कुछ भी कर लिखा है बताओ क्या हो गया सत्यम जानम अनंतम जो शब्द है जिसकी व्याख्या आदि शंकराचार्य जी ने कर रखा है उपनिषद भाष्य में इन्हारी परंपरा क्या है परंपरा तुम अरे मेरे भाई बात सुन लो मेरी पहले मैं बता देता हूं कर ले मैं बता देता हूं
02:35:55:25 ऋग्वदा आद भाष भूमिका में देख ले अनंत सामर्थवान लिखा है ना वही है ईश्वर सब कुछ कर सकता है अनंत सामर्थ्यवान अनंत है उसकी अनंत अनंत सामर्थ्यवान है ना वो तो तुम भी तो बिना तुम भी तो इच्छा में केवल इच्छा मात्र से हिलाए दे रहे हो तब तुम नहीं देख रहे हो बीच का कनेक्शन भी नहीं बता रहे हो तुम्हारा जिहादियों से भी तगड़ा वो तगड़ी वाली स्टेज में जा रहा है ईश्वर कैसे बौखलाया हुआ है आदमी देखो अभी मैं नाम बताने लग गया हूं हवा खराब हो गई थी तुम प्रूफ तो करोगे भाई नहीं आप प्रूफ कर दो फिर तो ठीक है मैं लाइव पे आओ मैं प्रूफ करवा रहा हूं समय तक मैं गाड़ी में घुस रहा हूं यार कैसे प्रूफ करोगे रेशन स्टार नाम से चैनल है आज ही लाइव कर रहा हूं बताओ कितने बजे बोलूं आ जाओ तुम जो मैं नंबर दे रहा हूं आप माता उसी माता जी ने भी उसी ने उसी माता को रखा बताओ अरे भाई थोड़ा सा पीछे करो पीछे करो थोड़ा पीछे करो देखो अभी ये बोल रहा है जब उन्होंने कहा सारे नाम से चैनल है आज ही लाइव कर रहा हूं बताओ कितने बजे बोल आ जाओ तुम जो मैं नंबर दे रहा हूं आप कौन अगर तुम निष्ठा पूर्वक उसी माता जी ने उसी माता जी को बताओ अरे भाई देखो यह नीचता देखो अगर तुम पहली बात तो यह है कि तुम तुम्हारी जो नीचता है वो यहां प्रदर्शित हो गई
02:37:11:03 ठीक है कि तुमने भैया शिवश की मां का दूध भी पिया है। पहले तुमने कह दिया कि पिया उसके बाद तुमने उसमें प्लस्टर किया मेरा भाई है वह। पहली बात तो तुम भाई के नाम पर कलंक हो। तो ये छोड़ना ये बोलना छोड़ो कि मेरा भाई है वो। दूसरी बात यह है कि अगर भाई हो भी तब भी शिवश की मां का दूध पीना तुमने बहुत ही ऑफेंसिव चीज बोली है। ठीक है? और बहुत ही नीच बात बोली है तुमने। ठीक है? क्योंकि उसमें उनकी उसमें उनकी स्वीकृति होनी चाहिए। वो तो तुम्हें जानती तक नहीं है। है ना? और इसमें आगे एक बात और कहेगा नीच बात यह नीच व्यक्ति एक बात और कहेगा इसमें आगे देखिए क्या कहेगा ठीक है वो आपका आचरण दिख गया चलिए नारायण ठीक है थोड़ा पीछे कर दो थोड़ा पीछे कर दो थोड़ा पीछे कर दो यहां से
02:37:57:03 हां आज ही लाइव कर रहा हूं बताओ कितने बजे बोलूं आ जाओ तुम जो मैं नंबर दे रहा हूं कॉल कर अगर तुमने अपनी माता से निष्ठा पूर्वक माता की उसकी माता ने उसी माता की बताओ मेरे भाई अरे भाई ठीक है वो आपका आचरण दिख गया चलिए नारायण ठीक है का नहीं है तुम्हारे। अब एक बात बताओ इसने मुझसे कहा कि मैं तो नगन्य हूं। मेरी सामाजिक छवि ऐसी नहीं है कि मुझे उत्तर दिया जाए। तो इनकी सामाजिक छवि कैसी है जो इनके पास पहुंच रहे हैं? ये हम क्यों? इनकी सामाजिक छवि कैसी है जो इनके पास पहुंच रहे हैं। और जो अपने फोटोोटो डाल रहे हैं। देखो निर्भय अभी तुम बच्चे हो थोड़ा अध्ययन कर लो। थोड़ी और तैयारी करो। शुरू तुम करोगे। खत्म हम करेंगे। अभी तक बहुतों को बहुतों को पवेलियन वापस लौटा चुके हैं। ठीक है। लोग कहने लगे कि मैं जो है शनि शनिचर हूं। जिसको लग जाता है उसकी ग्रह दशा बिगड़ जाती है। गृह दशा बिगड़ भगवतानंद को लगे अभी तक उठ नहीं पा रहा बेचारा। भागवतानंद गए अज्ञातवास। रामपाल के सुर बदल गए और इस वाले यही अपनी करताल बजा रहे हैं। और आर्य समाज ने तो देखा ही था ना। पर्चा निकाला था हमारे नाम का। निकाला था निकाला था ये खतरनाक आदमी से बच के रहना कृपा
02:39:14:24 देख लेना जा के तो अभी तुम बच्चे हो ठीक है जो तुम शुरू तुम करोगे तो फिर हम आखिरी चाल हमारी होगी सदैव ये तुम्हें हम बता रहे हैं जाके पढ़ाई करो और थोड़ा अध्ययन और बढ़ाओ जड़ पदार्थ को कैसे प्राप्त हुआ ईश्वर की इच्छा फिर और खैर तुम्हारा तो चैप्टर हमारे साथ चर्चा करने का क्लोज हो गया है सुनकर के और हां इसको हां प्ले करो ये वाला तो पूरा हो गया ना नहीं पूरा हो गया वो लास्ट वाला जरा सुना दो क्योंकि मुझे ऐसा लग रहा है उसने कहा था कि मैंने सबकी मां का पिया ऐसा कुछ बोला उसने ये भी बोला शायद देखो जरा 9:40 के बाद आज ही लाइव कर रहा हूं बताओ कितने बजे करूं? आ जाओ। तुम जो मैं नंबर दे रहा हूं आवाहन कॉल ऑफ धर्मा अगर तुमने अपनी माता जी का निष्ठा पूर्वक माता जी उसकी माता जी ने भी उसकी मैंने तो उसकी माता जी का पी रखा और बताओ मेरा तो भाई अरे भाई ठीक है वो आपका आचरण दिख गया। चलिए नारायण ठीक है नारायण आपसे बात नहीं होती ठीक है ठीक है नहीं है तुम्हारी
02:40:26:26 पता नहीं शायद आशुतोष जी है क्या अभी आशुतोष जी आशुतोष जी अगर हो लाइव आ सकते हो तो आ जाए कुछ एक बात पूछनी थी मुझे। तो ये आपने इसकी नीचता देख ली। तो स्वरूप भूत लक्षण क्या-क्या रहे इनके? धूर्तता, अभद्रता। ठीक है? और पक्षपाती पंचंगी ड्रामा वाले खुद ही के सिद्धांतों को लेकर संशय में स्थित और अंत तक आते-आते बौखलाहट, पागलपन और अंत में नीचता
02:41:13:27 नीचता इसको नीचता कहते हैं। और जो तुमने ठेके की बात कही थी ना वो हमने दिखाया कि हम यह सब हम पीठ पीछे कर रहे हैं। तुमको पता भी नहीं है। ऐसी कितनी सारी चीजें की है हमने। जहां पर हमने कोई हमें क्रेडिट देने वाला नहीं है। मगर हमने किया है वह कार्य। लोगों को नहीं पता हमने क्या किया है। ठीक है और हम ग्राउंड लेवल बहुत सारी चीजें बहुत सारी ग्राउंड ग्राउंड लेवल की नहीं मैं इस तरह की बातें कर रहा हूं जो ये जो जो निर्भय की मां के लिए कुछ बोला गया और हमने वहां पे स्टैंड लिया हां स्टैंड लिया है ऐसी ना जाने कितनी चीजें हम लोग करते हैं आए दिन करते हैं और उसको हम तमाशा बना के प्रस्तुत नहीं करते तुमने कहा कि मैंने ठेका नहीं ले रखा तो हमने बताया भैया यह देखो यह तुम्हारे पीठ पीछे की बातें हैं निर्भय आत्मा में झांक लो अपने शीशे में देख लो खुद को शर्म आ जाएगी अपनी मां से जाकर पूछो इन विषयों में कौन सही है मैं शिवश पूछो जाके कि जब उसके सर पर चप्पल रखी गई शिवश भैया ने मुझे भेजा वो रील भेजा मैंने घमंड में पता नहीं कौन से नशे में उनकी उस रील को नहीं देखा और उनके लिए बोल रहा हूं दीदी बहुत अच्छे जवाब दे रही है और
02:42:28:28 शिवाश भैया को के बारे में मैं देख भी नहीं रहा हूं वो क्या कर रहे हैं क्या नहीं कर रहे हम लोग अकेले में जो बातें कर रहे हैं वहां पर हम तुम्हारी मां की इज्जत के लिए लड़ रहे हैं। बिल्कुल और इसलिए नहीं कि तुम हमारे भाई हो। क्योंकि इसलिए राम ने सिखाया है। धर्म ने सिखाया है। बिल्कुल पूछो अपने माता-पिता से जाके। कौन है इसमें सही? बात करते हैं धर्म रक्षक होने की। केवल चिल्लाने से कुछ नहीं होता है। धारण करो उसको मर्यादा को। ठेका नहीं लिया है। यह नीचता कर रहे हो तुम। प्रातत्व भाव से भी किसी की मां के लिए बोलना कि मैंने उसकी भी मां का पिया है। ऑफेंसिव चीज है ये। ऑफेंसिव चीज है। बिल्कुल। ठीक है। आज नहीं तो कल एक चीज इसकी सजा भुगतोगे। तुमने जो ये बोला है। नीच व्यक्ति शर्म आती है मुझे कभी। मैंने तुमको अपना भाई समझा। खत्म हो गया आज से सब। वही भाईचारा है। और तुम्हारा चैप्टर भी क्लोज है। तुम कहीं एकिस्ट ही नहीं करते हो। तुम करते रहना यही ढूंढते रहना अपने पागलपन को एग्जीक्यूशन के लिए ढूंढते रहना आज आशुतोष दर्जी को कल किसी और को क्योंकि शिवश नारायण द्विवेदी से सामना करने का तो था नहीं उससे तो कहा नहीं कि अभी कर लेते चलो फोन पे क्यों नहीं कहा
02:43:44:21 शिवश से जब फोन पे बात हो रही थी अभी अभी फैसला कर लेते चलो फिर क्यों नहीं कहा क्योंकि तूफान ही फैसला करेगा रोशनी का दिया वो जलेगा जिसमें दम हो बिल्कुल नहीं बहुत सारी चीजें क्लियर हो गई आज तो मतलब पूरा चैप्टर क्लोज खत्म और इनका एक जो एक और बंदा है जो 17 18 साल का होने का दावा कर रहा है वो व्यक्ति इतनी अभद्र गालियां देता है मुझे पहले पता नहीं था ये तो बृजदर्शन जी ने इन्होंने कन्हैया जी ने वीडियो मेरे को भेजे मैंने कहा अरे भाई ये क्या करता है जब इसके पास उत्तर नहीं होता है तो ये भी ऐसे ही गालियां देने लग पड़ता है भद्र गालियां अभी एक दो वीडियो और भेजे हैं उनके अच्छा ये उनके पब्लिक में जो वीडियो है ना अगर वो मैंने उसमें डाले तो पता है क्या कह रहे थे कि हमारी ना गोपनीय भंग हो रही है। मतलब गालियों की गोपनीयता भंग हो रही है इनकी। अगर इनके जो पब्लिक में वीडियो हैं वह अनलिस्टेड में डाले हुए हैं कई लोगों ने वह पब्लिक में नहीं है। अच्छा उसके लिंक शेयर किए किसी ने तो वह मैंने लगाए तो कहते हैं जी वो
02:44:45:18 हां तो उसमें भी इनकी गोपनीयता भंग हो रही है भैया हद हो गई भाई जो पब्लिक प्लेटफार्म पे चीजें हैं उसमें भी गोपनीयता भंग हो रही है और गोपनीयता भी कोई ऐसी कोई आपकी शालीन वो चीज नहीं है। वहां पर भी अब हदर गालियां दी जा रही है। बहुत ही नीच व्यक्ति है ये। बहुत ही नीच व्यक्ति है। आज इसने बहुत नीचता कर दी और इसकी नीचता में इसकी बौखलाहट समझ में आ रही है। जो इसकी जो चर्चा सुन ली ना जो लास्ट में इसने किया है हालांकि किया तो हर रिकॉर्डिंग में है मगर वहां पर बिल्कुल ही ढेर हुआ और फिर मैं कब तक एक बात एक व्यक्ति से वही बात बार-बार पूछता रहूं। हम भाई तुम वहां पर स्पष्ट नहीं। अपने लोगों को बताओ जाकर के जड़ पदार्थों पर कैसे इच्छा ने काम किया। हम ठीक है शास्त्रवाद जी आपको कुछ बोलना है?
02:45:35:10 जी भैया यह जो अभी आपने जो सुनाया पूरा रिकॉर्डिंग इसमें यही समझ आता है कि उसको ये जो सर्वशक्तिमान वाला जो है ना बात इसका उसको उत्तर चाहिए एनी हाउ ठीक है और वो जैसे तैसे कुछ भी करके कुछ भी उटपटंग भी बोल देगा उसको कोई उसका वो नहीं है लाज नहीं है उसको उस चीज का कि मैं क्या बोल रहा हूं बस कुछ भी बोल दूंगा सत्य है धर्म है अधर्म है कुछ नहीं देखना सीधा केवल अगर मुझे वो प्रश्न का उत्तर चाहिए तो कुछ भी बोल दूंगा। उसको उसको गलतफहमी हो गई है। दूंगा उसका वैसे ही है बस। इसको इसको गलतफहमी हो गई है कि ये बहुत बड़ा 30 मार्क का है और कुछ नहीं है। इसकी गलतफहमी बात नहीं है। बात ये नहीं बात ये नहीं है। बात ये नहीं है। बात ये है इसको गलतफहमी थी कि ये 30 मार्क कहां है। अब वो चीजें टूट गई। टूट गई। यहां सब खत्म हो गया। यहां तो भैया अकाट्य सिद्धांत वाले हैं ना। अब वो खत्म हो गई। अब वो उसको किसी तरीके से प्लस्तर कर रहा है तो ये बिल्कुल सही कैसे करेंगे प्लस्तर कैसे करेंगे शिवश नारायण द्विवेदी से दूर रहने का बहाने बना के और अन्यों को पकड़ पकड़ के किसी तरीके से अपना पोषण करने का और अगर अभी ये ज्यादा अगर बोलेंगे तो मैं ये बताऊंगा फिर लोगों को कि
02:46:50:12 भैया मेरे मन में इनके लिए इतना ज्यादा भ्रातत्व भाव क्यों आया मैं जहांजहां अटके मैंने क्यों वहीं पे इनकी खाल नहीं उधेड़ी मैंने क्यों एक सॉफ्ट कॉर्नर बना के रखा फिर आगे की चीजें अलग है। ठीक है? तो मैं उम्मीद करूंगा इस विषय को ज्यादा ना खींचे। नहीं तो और आपकी ही वो होगी। मैंने पहले ही कह दिया शुरू तुम करोगे खत्म हम करेंगे। बाकी ये ये सब बताना वीडियो बना के कि भैया वो आचार्य जी की छवि ऐसी कैसे है या आशुतोष धर जी की छवि ऐसे कैसे जो तुम तुरंत जो है चर्चा के लिए तैयार हो जा रहे हो। और या फिर तुम ये कैसे सोच रहे हो कि जिसको भी तुम बुलाओगे अपनी लाइफ पे ही आएगा। वो तुम्हारी लाइव पे क्यों आए भाई? वो अपने चैनल पर बुलाएगा। कौन से आधार पर तुम किसी को फोन करके कह रहे हो कि मैं लाइव रख रहा हूं और तुम मेरी लाइव पे आ जाओ। क्यों? कौन तय करेगा ये?
02:47:42:26 हम तो तुम्हारे गुरुकुलों में गए हैं भैया। गुरुकुलों में वहां बैठ के कोई मारधार नहीं की। केवल वैचारिक लड़ाई समाप्त करके आए। जाओ जाओ गुरुकुलों में तब पता चलेगा गुर्दा चाहिए होता है इन सब चीजों के लिए भैया ऑनलाइन ऑनलाइन खेला बच्चों की बातें हैं ये सब ऑनलाइन ऑनलाइन गुर्दा चाहिए ठीक है और वो गुर्दा मैंने बताया ना एक जो पुरुष होता है वो अपनी मां की कोख से लेकर जन्म लेता है गुर्दा बाजार में नहीं बिकता वो गुर्दा बिल्कुल हां जी शास्त्रवाद वो सनातन जी जी जी बिल्कुल बिलकुल और इनकी एक और जो इनका भ्रम है ना ये क्या कर रहे हैं जैसे अभी आशुतोष जी को और एक और आचार्य हैं उनका भी इन्होंने वीडियो बनाया है उनकी भी लाइव में ऐसे घुस गए थे उन्होंने कहा था कि भैया हमारा जो विषय है वो धर्म का प्रचार करना है हम ये डिबेटवेट में नहीं पढ़ते हैं तो उसने भी जबरदस्ती यही किया था उस लड़ उसमें भी उन्होंने ये कहा कि भाई अभी पहले ऑलरेडी ढाई तीन घंटे हो चुके हैं हां वो बंद करने वाले थे लास्ट और जो विषय तुम जो विषय तुम लेकर आए हो वो एक वृहद विषय हो सकता है तो भाई फिर तो उसको अपने मन से कुछ भी बस वहां से ये कंटेंट वो चेरी पिकिंग वाली बात चेरी
02:48:58:02 पिकिंग चेरी पिक कर रहे हैं और इससे सोच रहे हैं मामा आ गए मामा आ गए इससे सोच रहे हैं छवि डाउन कर ली और इस पीआरओ तरह की जो नकल है उसके आधार पर सोच रहे हैं कि मेरा पल्ला भारी है क्योंकि तुम्हारे सिद्धांतों के अनुसार तुम्हारा पल्ला हल्का है। ठीक है? सभी ने इतना समय दिया आने के लिए सबको आभार और इनके स्वरूप भूत लक्षण सबको सबको प्राप्त हो गए हैं। सनातन शंकर जी आपका बहुत-बहुत आभार। जी बहुत-बहुत धन्यवाद जी आपका। आज सारे विषय क्लियर कर दिए आपने। जी धन्यवाद। ठीक है। ठीक है शास्त्रवाल जी। जय श्री राम। जय जी भैया। जय श्री राम। जय श्री राम
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⬜Description
YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.
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⬜End Screen
YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.
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⬜Cards
YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.
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⬜Playlist Automatic
YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.
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⬜Thumbnail
YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.
"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.
Playlists
Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).
स्वयं को निर्भय कहने वालों में आह्वान का भय बौखलाहट अभद्रता और पलायन
% not set🔗 This video is made from parts of these videos
Description
(empty)
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End
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