⬜ Not used yet · 00:00:03:08 – 00:05:19:00 (5:16)
00:00:03:08 सभी को जय श्री राम आशा करते हैं आप सब कुशल मंगल होंगे और जैसा कि अभी कुछ दिनों से एक धारा बनी हुई है जिसमें की रामपाल जी के द्वारा जो धाक शिक्षा का प्रचार प्रसार किया जा रहा है तो उस पर हम लोग प्रकाश डालने का प्रयास कर रहे हैं कि वह कितना मानने योग्य है कितना नहीं मानने योग्य है उसकी वास्तविकता को हम बाहर लाने का प्रयास कर रहे हैं और पिछले कई दिनों से इस बारे में लगातार कोई ना कोई वीडियो लाइव या चर्चा आपको देखने को मिलती है
00:01:07:19 तो जो हमारे आज के रामपाल जी की तरफ से जो आने वाले हैं बात करने के लिए वो 8 बजे आएंगे तब तक हम कुछ पूर्व में जो चीजें हो चुकी है उस पर हम डिस्कस कर लेंगे जी ज जय श्री राम सभी को ज श्रीराम सनातनी जिस जी हर हर महादेव हर हर शंकर जी हां बौद्ध लोगों को भी उनकी तरफ से कोई ऐसा व्यक्ति मिलता नहीं है जो इस तरह से प्रत्यक्ष वार्ता कर करता हो मगर समय निकालेंगे
00:01:57:24 और आपने स्पन पर वीडियो लाना बंद कर दिया मेरे पास एक बहुत लंबी लिस्ट है रफ लिखा हुआ है बहुत लंबी लिस्ट है वीडियोस की बहुत सारे चैप्टर्स है बहुत सारा काम धरातल पर भी बहुत सारे काम कर रहे हैं तो अभी जो मैं आधा घंटे पहले आया हूं उसका मुख्य कारण अ कुछ बातें हैं जो मैं वैसे कई बार अपने लाइव में बताता भी आया हूं मगर एक बार फिर से प्रकाश डाल देता हूं कि जैसे कल हमने एक व्यक्ति को हटाया था उसकी अनुमति के बिना तो उस व्यक्ति को की लिखी हुई कोई किब होगी ना उसमें भी कोई ना कोई एक लाइन ऐसी होगी जो मानव कल्याण के लिए सिद्ध हो जाएगी तो क्या हम उसको पवित्र ग कहेंगे सब मानव कल्याण सिद्ध हेतु है लेकिन उस नहीं समझ पाए संचार समझ नहीं पाए आप हा यह आपने वीडियो देखा
00:03:14:00 इसमें हम लोग जब चर्चा के लिए आए चर्चा का मतलब होता है कि हम अपनी बात बताए और सामने वाला अपनी बात बताए कम से कम निर्णायक ना बने हम अभी तक अपने किसी भी चर्चा में निर्णायक नहीं बने मगर सामने वाला पता नहीं कौन सा धर्मा आचरण उसको सिखाया जाता है हालांकि कहते स्वयं को धर्म धर्मावलंबी है मगर वह देखने में आचरण में दिखाई नहीं देता है जब हम किसी के साथ चर्चा कर रहे हैं चर्चा का मतलब ही है कि हम लोग किसी बिंदु पर नहीं पहुंचे हो सकता है आपका व्यक्तिगत कोई बिंदु हो जिस पर आप मानते हो कि आप पहुंचे हुए हैं तो उसको आप अपनी जहां पर आप है जहां पर व चर्चा का मंच नहीं है वहां पर आप रखें मगर जब हम तर्क और प्रमाण तथ्यों पर बात कर रहे हैं तो आप निर्णय सुनाने वाले होते कौन है वहां पर कोई बात नहीं हो रही थी शंकराचार्य की या रामपाल जी की भी कोई बात नहीं हो रही थी हमने आज तक अपनी वीडियो में कहा है कि रामपाल जी यह क्या कहते हैं चर्चा के समय हमने कहा कि रामपाल जी जो है वो निर्णय सुनाया किसी प्रकार से हम कभी भी कोई भी बात को आरोपित नहीं करते हैं कि ये लो प्रश्न उठाते हैं
00:04:29:09 अपना अपना पक्ष रखते हैं कि अगर आप यह कह रहे हो तो यह फिर इसका क्या करें तो यह चर्चा में निर्णायक बन कर के और अभद्र तरीके से बात करने पर जब हमने प्रतिक्रिया दी तो इस पर लोगों का कहना है कि भा आप सामने वाले को सुनते नहीं हो तो सुन कर के क्या करें अपने पिता समान अपने दादा समान गुरु के बारे में अभद्र भाषा अभद्र अमर्यादित भाषा शैली सुने बैठ कर के इसलिए उसको सामने वाले को सुने और यह करना भी हमारे तो आचरण में भी हम प्रयास करते हैं कि वो शास्त्रोक्त बात रहे यह करना भी जैसे जैसे हमने कल एक बात कही इसको लात मार के निकालो बाहर तो यह करना भी शास्त्र बोलते हैं गुरु की निंदा करने वाले को कि अगर
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00:05:19:00 जीवा ना काट सको तो उसको वहां से भगा दो भगा ना सको तो खुद
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00:05:27:20 हट जाओ तो निंदा वाली बात आई क्यों नहीं आनी चाहिए थी जो कल एक भाई साहब नेपाल से जुड़े हुए थे हालांकि दोनों ही नेपाल से थे तो उनको हमने लगभग एक ही प्रश्न के लिए लगभग एक घंटे का टाइम दिया था एक घंटे बार-बार बारबार हमको वही ये भाई साहब
00:06:04:09 इनको इसमें हमें कोई संचय नहीं लेकिन इसमें ज्ञान किस तरह के दिया गया किसने दिया गया है ये कैसे बताओ गीता से ज्ञान से ज्ञान कटेंगे ना तभी गीता से मिलेगा ना अरे क्या दिमाग खराब है क्या जो सही अनुवाद किया तो उसको क जो मिस्टेक किया पूछ रहा हूं मैं पूछ रहा हूं मैं पूछ रहा हूं क्या रामपाल जी की एक भी बात आप काट सकते हैं क्या क्योंकि पूरा सत्य बताता तो काटने योग्य नहीं है जो जहां पे कोई भी मिस्टेक करेगा वो काटने योग्य है सीध वो मिस्टेक बता कौन रहा है आपको मेरे भाई कोई प्रामाणिक सुनिए सुनिए मेरी बात सुनिए जैसे जब आपको ये लगा कि गीता में कुछ चीजें गलत है तो इसका मतलब ये गीता आपके लिए प्रॉपर प्रमाण नहीं है आपने वेद को ले आए वेद आपके लिए प्रमाण है अब जब वेद में भी आप ऐसा सोच रहे उस किसीने कुछ गलत लिख दिया होगा अगर वेद को भी आप ऐसा सोच रहे उसम किसी ने कुछ गलत लिख दिया होगा तो इसका मतलब है वेदों का भी वेरिफिकेशन आप किसी और से करते हैं वेद में क्या गलत है क्या सही
00:07:19:14 है उसका वेरिफिकेशन किसी और से करते हैं वो कोई सुनि तो सही जो चीज एक शास्त्र में लिख ही चीज अन्य शास्त्र में ख लिखी है ये कहा लिखा है जैसे या कोई और शास्त्र पुराण है कौन सा शास्त्र मैं गीता को भी मानता हूं वेद को भी मानता हूं कुरान को भी मानता हूं बाइबल को भी मानता हूं क्योंकि सबकी भगवान एक है उस चारों ग्रंथ में एक परमात्मा की ज्ञान द हुई आप टाइमिंग पर जरा नजर डालिए कि कहां से कहां तक यह व्यक्ति जो प्रश्न पूछा जा रहा है उस प्रश्न का उत्तर ना देते हुए बात को घुमा रहा है तो कुल मिलाकर के कितनी देर किसी को टाइम दिया जाए कितनी बार एक ही प्रश्न को रिपीट किया जाए यह एक सोचने वाली बात हो जाती है
00:08:30:00 अच्छा इसमें एक आप दृश्य ध्यान करिएगा जब उसने मुझसे पूछा कि त्रिलोकीनाथ किसे कहते हैं तो मैंने बात को घुमाया नहीं चाहता तो मैं भी घुमा सकता था बहुत देर तक घुमा सकता था कि त्रिलोकी का अर्थ क्या है उसमें संधि कैसे होगी और बहुत तरीके हैं घुमाने के सीधे बोला भाई त्रिलोकीनाथ तो तीनों को कहते हैं तीनों को जगह जगह पर कहीं ना कहीं त्रिलोकीनाथ बोला गया है तीनों लोगों का स्वामी तो कट टू कट बात आप कभी भी देखिएगा जब हमसे कोई सवाल पूछा जाता है तो हम उसका उत्तर देते हैं ना कि इधर उधर साइड वाइड से जो है इसीलिए आपको य आपने देखा होगा कि हमारा अपने पक्ष को प्रस्तुत करना कम समय में दिखा होगा क्यों क्योंकि हम बात को घुमाते नहीं है बहुत देर तक और यह भाई साहब जब इनसे पूछा जा रहा है कि एक शास्त्र में कुछ लिखा है दूसरे शास्त्र में कुछ लिखा है और उन दोनों में आपस में जो चीजें मिल रही है केवल वही मानने की है जो नहीं मिल रही है वह नहीं मानने की है क्या यही सिद्धांत है आपका शास्त्र को मानने और ना मानने के विषय
00:09:45:04 में तो भाई साहब नहीं बता पा रहे हैं और इतना सब होने के बाद अंततोगत्वा जब हमें उसे हटाना पड़ जाता है वह हमारा प्रश्न नहीं समझ पा रहा है और इधर उधर की बात कर रहा है ज्ञान से ज्ञान कटेगा यह कहां लिखा है यह कहां का नियम है ज्ञान से ज्ञान कटेगा यह नियम कहां का है गीता में लिखा है वेद में लिखा है भाई हमारे शास्त्रों में तो ये लिखा है यदि दो विपरीत शिक्षाएं हैं परस्पर विरुद्ध है तो दोनों धर्म या तो दोनों का अर्थ ऐसा निकाल लो कि एक ही आंसर आए और या फिर दोनों दोनों धर्म को अपना लो यह शास्त्र में लिखा है काटने का कहां से हो गया अगर हम किसी की एक बात को काट रहे हैं तो उस पर विश्वास होना हमारा सिद्ध नहीं होता हमारे लिए प्रमाण कुछ और है जिसके आधार पर हम उसमें चुनाव कर रहे हैं कहां सही है कहां गलत है मतलब उस शास्त्र से पहले हमारे पास कोई नियमावली है जिससे हम यह जांच रहे हैं कि इस शास्त्र के अंदर कौन सी बात हमारे लिए सही है और कौन सी सही नहीं है तो वह नियमावली
00:11:00:15 जो है वह उसका आधार है जैसे ये लोग कहते हैं दावा करते हैं कि भाई शास्त्र सम्मत भक्ति हम लोग करते हैं तो कहां रह गई शास्त्र सम्मत भक्ति शास्त्र में यह है क्या ज्ञान से ज्ञान कटेगा अगर गीता में एक जगह कुछ कहा जा रहा है दूसरी जगह कुछ कहा जा रहा है तो वह दूसरी जगह वाले से पहली वाली बात कट जाएगी दूसरी बात अगर दूसरी वाली से पहली बात कट रही है तो पहली से भी तो दूसरी कट रही है तो फिर वही बात क्यों जाए सेलेक्ट करके जो आप कह रहे हो क्योंकि वह तत्वदर्शी संत है और तत्वदर्शी संत कैसे प्रसिद्ध हुआ गीता से अरे भाई गीता की तो कौन सी बात माननी है कौन सी नहीं माननी है यही तो हमें पता करना है तो जब तक उसकी यह चीज सिद्ध नहीं हुई कि हमें इसकी कौन सी बात माननी कौन सी नहीं माननी तो उसके आधार पर किसी को तत्वदर्शी कैसे मान
00:11:54:16 लोगे तो कुल मिलाकर के यह है कि शास्त्रों में शास्त्र इनके लिए प्रमाण नहीं है क्योंकि ये पूरी तरीके से शास्त्रों पर विश्वास नहीं करते हैं इनके अपने विश्वास हैं इन्होंने अपनी ए बी सीडी कहीं से सीखी इन्होंने अपना व्रज शब्द का अर्थ कहीं से लिखा उसके अनुकूल जो अर्थ निकल रहा होगा शास्त्रों का ये वो मानेंगे और बाकी सब जो विपरीत अर्थ निकल रहे होंगे उसको कह देंगे काल ने लिखा है या ऋषियों की अपना मन से कह दिया या जो भी है मानने लायक नहीं है भाई अगर तत्वदर्शी ये निर्णय करेगा शास्त्र में कौन सी चीज माननी है कौन सी नहीं माननी है तत्वदर्शी को तत्वदर्शी बनाया किसने उसी शास्त्र ने जिस जो जिस शास्त्र का निर्णय तत्वदर्शी कर रहा है वाह तो अब इनकी एक बात आती है कि वेद में कहीं पर भी क प्लस बी प्लस र कबीर भगवान
00:12:52:20 है क प्लस बी प्लस र कबीर भगवान है ऐसा कहीं नहीं लिखा ठीक है अब यह भाई साहब क्या करते हैं अपनी बातों को सिद्ध करने के लिए रामचरित मानस लाते हैं और रामचरित मानस में बजरंग बली के बारे में बताते हैं कि जो हमारा मुख देख लेता है पहले एक पूरा दिन में तो वह जो है क्या कहते हैं उसका पूरे दिन उसको भोजन नहीं मिलता है और अब यहां पर सवाल य उठता है कि इन्होंने यह जो तुलसीदास जी का ज्ञान है यह कहां से प्राप्त किया तुलसीदास जी का ज्ञान इन्होंने कहां से प्राप्त
00:13:43:10 किया जाहिर सी बात है अपना मनमुक किया अब बात मनमुक आती है यह भले ही परंपरा को नहीं मानते हैं वो तो मानते थे तो उनके रेफरेंस से अगर हम कोई बात उठा रहे हैं तो हमें ये जानना होगा कि उनकी परंपरा के आचार्यों ने उस बात को माना है कि नहीं माना है नहीं माना है मगर फिर भी ये अपना रेफरेंस अब जैसे मान लीजिए कि आज की तारीख आज की डेट में अब क्योंकि ये तत्वदर्शी है तो किसी के द्वारा भी कही जा रही बात का अर्थ क्या है वो वो व्यक्ति नहीं बताएगा वो ये बताएंगे क्योंकि ये तत्वदर्शी है तत्वदर्शी क्यों है क्योंकि गीता में लिखा है और गीता में जो बात है वो मानने लायक कौन सी मा कौन सी नहीं है वो तत्वदर्शी तय करेंगे और तत्वदर्शी कौन है कौन तय करेगा गीता तय करेगी है ना तो यह जेल धाम से चलता है सब इनकी जो बातें हैं हम लोग हम लोग क्यों एक एक चीज को पकड़ रहे हैं हमने लगभग सभी बातों का प्रतिकार प्रस्तुत कर दिया है मगर अब सामना सामने रखते हुए क्यों एक एक बात को खोल रहे जैसे हमने अपने कई वीडियोस में केवल इस बात पर बात की वेदों बहुत पिछले छह सात वीडियो लाइव हुए जिसमें कि पूछा गया कि कबीर भगवान है यह बताओ कैसे कबीर
00:14:58:16 कहां लिख लिखा है क प्लस बी प्लस रा कबीर कहां लिखा है कि भगवान तो कई लाइव इसी बात प ठीक है एक एक टॉपिक को हम इसीलिए ले रहे हैं उसमें देर लगेगी मगर कंक्लूजन निकल के आएगा जैसे अय उसकी बात ज्यादा नहीं करते लाइव में आते हैं तो वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान पहले करते थे अब उस पर पीछे हट चुके सर्वशक्तिमान की तो बात ही छोड़ दो सर्वव्यापक सर्व शक्तिमान हो तो कभी नहीं होगी अच्छा फिर उसके बाद दूसरी बात आई थी कि ने बोला है कि नहीं बोला है है ना उस पर भी अब ज्यादा बात नहीं अब शास्त्र पर जब बात आई तो शास्त्र जब शास्त्र में बात आई तो अब धीरे-धीरे देखिएगा थोड़े दिन में शास्त्र को भी छोड़ देंगे ये बोलने लगेंगे कि भाई हम तो जो कबीर वाणी है उसके आधार पर सब मानते हैं तत्व दसी मानते हैं ये करते हैं वो करते हैं मगर प्रॉब्लम क्या है ना कि जो कबीर वाणी इत्यादि है जो कबीर जी के ग्रंथ है उनमें भी कुछ ऐसी बातें लिखी हुई है जो इनको काटती है उन परे तो हम बाद में बात
00:16:05:06 करेंगे तो इसीलिए एक एक टॉपिक को पकड़ रहे हैं जैसे पहले पकड़ा था वेद क्या वेदों में कहीं कबीर भगवान है लिखा है अब वह चैप्टर इनका क्लोज हो चुका है अभी दूसरे चैप्टर अच्छा यह कहते क्या है इनको नोट करते जाइएगा कि हम शास्त्र सम्मत भक्ति करते हैं और शास्त्र में शास्त्र के अनुसार कबीर भगवान नहीं है शास्त्र के अनुसार इनका दीक्षा कार्यक्रम नहीं है के अनुसार कौन सी बात माननी है ज्ञान से ज्ञान कट होगा यह भी शास्त्र सम्मत नहीं है यह अपना ज्ञान है कल वो भी बोला कि अपना ज्ञान है और जो दीक्षा वाले टाइम पर भी व्यक्ति को बोलना पड़ गया था य अपने मन से किया है और कबीर भगवान है उसमें भी व्यक्ति ने एक ना एक ने बोल दिया था कि हा ये अपने मन से किया है तो जब मन आ गया तो शास्त्र सतता कहां रह
00:16:53:01 गई तो इसलिए एक एक बाल की खाल निकालने के लिए वो जो आपको जो माथा पच्ची वाले जो दश वो दिखाई देते हैं आशा करता हूं सकारात्मक जो दृष्टिकोण से अगर आप देखेंगे तो उन स्थितियों को समझ पाएंगे अब इसके बाद हमने नहीं कहा कि भाई जो निर्णय निर्णायक बात थी हमने कभी नहीं कहा आरोपित नहीं किया कि भैया तुम अज्ञानी हो यह है वो है ऐसा आरोपित कभी नहीं किया मगर ये हमारे ही चैनल पर आकर के लाइव बैठ कर के और जो जगतगुरु शंकराचार्य हैं उनके बारे में अब शब्द बोल रहे हैं कि उसको ज्ञान नहीं था यह सब पता है क्यों है यह सब इसलिए है आसान किसी के लिए भी आज के डेट में बोल देना क्योंकि वह मैक्स मलर था ना उसने अपनी किस किसी को एक पत्र लिखा था हिंदुओं को अगर खत्म करना है तो आप हिंदुओं की शिक्षा व्यवस्था को नष्ट कर दो
00:18:00:06 जो परंपरा प्राप्त जो शिक्षा व्यवस्था है हमारे यहां गुरु शिष्य परंपरा प्राप्त उसको नष्ट कर दो आज आम जन समाज य जानता ही नहीं है कि आचार्य किसी को आचार्य के रूप में स्वीकार करने के लिए उसका परंपरा से होना आवश्यक है ये किसी को नहीं मालूम है आम जन को यह सब चीज नहीं मालूम और इसको बंद कर दो भाई इसको बंद कर दो खोलना नहीं इधर से है ना तो आम जन को नहीं मालूम है कि हमारा जो आचार्य है वो परंपरा से ही होना चाहिए तो यह शिक्षा व्यवस्था में वार है आज इतने तंत्र इस तरीके का तंत्र खड़ा हो गया है कि अ कोई भी आकर के जो सार्वभौम निर्णायक आचार गद्दिया है उनके लिए कुछ भी बोल सकता है स्वतंत्र है सब कोई डर नहीं है कोई भय नहीं है क्यों शिक्षा व्यवस्था पर वार करना था और किया गया अच्छे से इतने आचार्य खड़ा कर दिए इतने तंत्र बना दिए आजय देखिए आप कोई
00:19:15:13 भी कुछ भी बोलने के लिए फ्री है पिछले 100 डे स साल की कहानी है ये नहीं तो ऐसा भी शासन हुआ करता था जब जो राजा होता था शासक होता था उसके जो गुरु होते उस राष्ट्र के जो गुरु होते थे उनके लिए कुछ भी बोल पाना मृत्यु का भय हो जाता था और यह जो ज्ञान से ज्ञान काटने की बात है जाहिर सी बात है जो स्कोन के लोग हैं वह अपने आप को श्रेष्ठ समझते होंगे रामपाल वालों से आर समाज वाले भी श्रेष्ठ समझते होंगे अपने आप मगर अगर मूल में आओगे तो आप में और उनमें क्या भेद रहा रामपाल ज्ञान से ज्ञान काट रहा है आप भी कहीं पर भी अपने मन से प्रक्षिप्त कह देते हो स्कन वाले भी यही करते हैं यह जो है वो भ्रम फैलाने के लिए काट दो स्न वाले भी यही करते हैं कुल मिलाकर के कान को कैसे भी पकड़ो एक ही एक ही सोर्स ऑफ इंफॉर्मेशन से आप अपने व्यक्तिगत मत के द्वारा चयन करते हो कि कौन सी चीज को मानना है कौन सी चीज को नहीं मानना है इसका मतलब आपके धर्म और अधर्म का निर्णय कहीं और से हो रहा है हो सकता है वह आपका
00:20:30:22 जो बचपन से आपकी जो आपको जो संस्कार मिले उससे हो रहा है स्वविवेक से हो रहा है अपने मन से हो रहा है क्योंकि हमने जहां पर भी वह हमारे अकॉर्डिंग नहीं है वह हमने कह दिया य भैया यह प्रक्षिप्त यह जो है भ्रम फैलाने के लिए कहा है और यह जो है काल ने कहा है शास्त्रों से कैसे बचे एक कह रहा है काल ने कहा है एक कह रहा है यह व्यास जी ने भ्रम फैलाने के लिए कहा है और एक कह रहा है यह जो है मिला दिया गया है पिछले जो हमारे ऊपर जो आक्रमण हुए थे उसमें मिला दिया गया भाई मिला दिया गया है तो आप वो तो लाओ जिसमें मिला हुआ ना हो आपको कैसे पता चला कि मिला दिया गया है कि हमें हमारा स्वविवेक है ईश्वर किसी को मारने को थोड़ी ना कहेगा ईश्वर देवर के साथ नियोग करने को कह देगा बहन के पति के साथ नियोग ने को कह देगा वहां पर ये नियम अप्लाई हो जाएगा कि जिस धर्म ने आपको यह बताया है कि अच्छा और बुरा क्या होता है वही बता रहा है कि नियोग आप कर सकते हो वहां पर य तर्क नहीं आएगा कि ये जो व विचार जैसा लग रहा है आपके धर्म
00:21:46:01 और अधर्म का निर्णय ईश्वर ने किया है तो ईश्वर ही कह रहा है कि आप नियोग कर सकते हो यह तर्क है वहां पर सत्यार्थ प्रकाश में तो जब ईश्वर के विरोध में व्यक्तिगत तर्क नहीं लगा सकते उसी से हमारा धर्म धर्म का निर्णय है तो आप यह लाइने नहीं बोल सकते फिर कि ईश्वर किसी का किसी की प्राणों की आहुति कैसे ले सकता है यह लाइन नहीं बोल सकते दूसरे तर्क हो सकते हैं वो लाने चाहिए आप किसी बात को ना मानने के लिए आपके धर्म और अधर्म का पहले से कहीं से निर्णय है उसको आप अप्लाई करते हैं व तब आप निर्णय करते हैं तो क्या अंतर रह गया इसकन आर्य समाज और ये रामपाल में हमारे विरोध में टीम बिठाई गई है जो यह चेक करती है कि इनकी तरफ से कई बार हो जाता है जैसे अभी मैंने अपने एक लाइव में बोल दिया था कि आत्मा अनित्य है भाव था कि नित्य है मगर मुह से निकल गया अनित्य तो अब भैया उस पर भी कटिंग बना लेना इस तरह की जो वस्तुनिष्ठ कहीं पर जो एडिटिंग करते समय कुछ मंत्र का क्रमांक गलत हो गया कि ऋग्वेद का 3 53 आ की जगह वो कुछ और हो गया तो उसकी उसका चवा उड़ा दो भाई और ऐसा नहीं है कि इनके यहां
00:23:01:03 ऐसा नहीं हुआ है सत्या प्रकाश के बारे में करीब जहां तक मेरी जानकारी 50 से ज्यादा बार उसमें संशोधन हो चुका है इसकन का तो वह खुद कहते हैं वह जो पुराना वर्जन है भगवत गीता का उसका नया आ रहा है आज पुराना वर्जन आ ही नहीं रहा है है ना और तो इस तरह की जो वस्तुनिष्ठ चीज है उनको उठा कर के अब क्योंकि सैद्धांतिक वो तो रहा नहीं सिद्धांत भैया आप सिद्ध करो कि आपका ईश्वर सर्वशक्तिमान है कितनी बार मैंने बोल दिया सर्वशक्तिमान सिद्ध करो मुझे अपने साथ ले चलो कितनी बार बोल दिया मैंने कई बार कई बार ईश्वर को सर्वशक्तिमान कहो मेरी व्यक्तिगत धारणा जो भी रहेगी मैं आपको आपके साथ खड़ा मिलूंगा सर्वशक्तिमान होना चाहिए बाधित नहीं होना चाहिए ईश्वर तो इस पर तो बात बनी नहीं तो क्या करेंगे ऋग्वेद के मंत्र जो है दिखाएंगे कि इन्होंने वहा ऋगवेद का मंत्र भाई कई वीडियोस में हो जाता है हमें पता भी है कि हमसे ये वाली गलती होगई पर हम उसको
00:24:19:14 कटवर्क गलत हो सकता है मगर ऐसा नहीं है कि वो शास्त्रों में वो वचन है ही नहीं और एक बौखलाया अभी मुझे याद आ गया एक ब बौखलाया हुआ अलंकारी जिसकी रातों में हमने नींद उड़ा रखी है वो खटिया से रात के दो दो तीन-तीन बजे आजकल जाग जाता है क्योंकि उसको नींद नहीं आती है क्यों नहीं आती आवान आहवान को उत्तर क्या दें तो सैद्धांतिक उत्तर तो रहे नहीं तो यही उत्तर दोगे तुम्हारी संस्था का वो क्या है अरे भाई मैं क्यों बताऊं तुम्हें संस्था का क्यों बताऊं संस्था का ये यह संस्था का मेरे पास सब कुछ है मैं आपको क्यों बताऊं क्रमांक वगैरह नहीं
00:25:09:22 बताऊंगा पैन कार्ड में अपने साथ लेकर घूमता हूं संस्था मगर तुम होते कौन हो मुझसे पूछने वाले कि अपने संस्था का वो बताओ मेरा भाई कोई अधिकारी हो कौन हो मैं परतंत्र क्या तुम्हारा तुम जब पूछोगे तो मैं संस्था का वो दिखा दूं तुमको पैन कार्ड ये लोग नंबर नहीं बताऊंगा दिख रहा है संस्था का है देख लो नहीं बताऊंगा नंबर अरे हो कौन तुम यार जो मुझसे आक पूछोगे संस्था का रजिस्ट्रेशन क्रमांक बताओ जब कोई ऑथराइज अथॉरिटी जो बॉडी है वह प्रश्न करेगी कि आप अपना दिखाइए तो हम दिखाएंगे ना अरे तुमको तो तुम्हारी संस्था वाले नहीं पहचानते जिनका तुम लेटर दिखा रहे हो वो कह हम उसको नहीं जानते तुमको अपना माथा पीटना पड़ता है करण करण अर्जुन में जो राखी थी ना माथा पीटती है शिवलिंग पर जाकर के ऐसे माथा पीटना पड़ता है तुम्हें शंकराचार्य के जाकर के य आवान से बचा लो भैया किसी तरीके से आवान से बचा
00:26:18:09 लो तुम्हें अपने चैनल का नाम बदलना पड़ता है हमसे तुम प्रश्न कर रहे हो आवान धर्म रक्षार्थ कैसे लिखा है तुमने कैसे लिख लिया है धर्म सम्राट ऑफिशल है रजिस्ट्रेशन इसका तुम्हारा तुम कौन हो भाई हु इज द हेल आर यू जो हम तुमको तुमको उत्तर दे कि मेरा रजिस्ट्रेशन नंबर इतना है मुझको एक आपने पत्र दिया मैंने आपको पत्र के माध्यम से उत्तर दे दिया जब हमें ऐसा लगेगा कि आपको जो है ऑथराइज लेटर हेड पर लिखना है उसमें पंजीकरण क्रमांक डालना है हमें लगेगा तो हम हम स्वतंत्र होकर करेंगे वह
00:27:04:09 कार्य मर जाएंगे मगर अपनी स्वतंत्रता का हनन नहीं होने देंगे समझे भूपति हो आए बड़े अगर सात दिनों में तुमने यह नहीं किया वह नहीं किया स्वयं को मनुवादी समझते हो वैदिक समझते हो पाला नहीं पड़ा है वास्तविक मनुवाद द सारी गलतफहमी दूर हो जाएगी प्रत्यक्ष सामना होगा ना जिस दिन सारे जितने भी भ्रम पाल रखे हैं वो सब दूर हो जाएंगे हा सिद्धांत की बात नहीं रह गई यह बात रह गई है कि भैया वो शिवांश नारायण द्विवेदी अपनी संस्था का वो दिखाए हो कौन भाई तो किसने तुम्हें अथॉरिटी दी है जो हम तुमको दिखाए जाकर के अरे भाई जब कोई पूछेगा तो बता
00:28:03:25 देंगे हल्के में ले रखा है गुरुदेव की लाइब्रेरी में कानून की किताब भी पढ़ी थी हमने समझे बचपन गुजरा है कोर्ट में न्यायालय में विद्यालय से जब छुट्टी होती थी ना तो माता जी का कार्यालय था न्यायालय वहां से चाबी लेने जाते थे और जो न होते थे व में चॉकलेट खिलाते थे टॉफी खिलाते
00:28:38:27 थे पूछते थे दूध पियोगे आइसक्रीम खाओगे खेले हम न्यायालय में तो यह सारी चीजें जो है ना हो सकता है कि आप अब तक बहुत खेल खेलते आए हो लोगों के साथ कानून का भय दिखा दिखा करके खेल इस बार भी अच्छा खेला है आपने आदमी गलत चुन लिया है समझ रहे हो तो अपने अपनी जेब में रखा करो य सब चीज कि हम यह कर देंगे वो कर देंगे कानून का भय दिखा रहे हो कानून केवल तुम्हारा नहीं है झूठे व्यक्ति को रख कर के और जो है ड्रामा करते हो तर्क वितर्क करते हो उसके साथ अपने आदमी को बिठा कर के अपने वीडियो में लाइव में बोल रहे हैं वो व्यक्ति पूछ रहा है कि भाई वो शंकराचार्य जी ने साकार विवेक चूड़ामणि में माना है हमने विवेक चूड़ामणि के मणि का जो वो दिया था रेफरेंस वो दिया था कि उन्होंने परमार्थ की बात की उसमें तो परमार्थ की बात नहीं की वो जो पूछने गया है वहां उससे वो पूछ रहा है
00:29:55:06 कि भाई साहब ये शंकराचार्य जी ने तो साकार की बात की है विवेक चुना मणी में तो फिर वो ड्रामा करके बोल रहा हैय आपको किसने बताया करपात्री जी के शिष्य है यही करो यह यह आपकी प्रत्यक्ष हार ही तो है और क्या है यह जब आपको झूठ का आलंबन लेना पड़ गया अपनी बात को रखने के लिए हा यह सब एक रजिस्ट्रेशन दिखाओ यह करना पड़ रहा है तो इसका मतलब है कि आपके पास आपकी सिद्धांतों का नहीं है
00:30:31:06 दमखम अभी भी सोचते हो अरे भाई किसके लिए लड़ रहे हो एक बार अंतरात्मा में झांक तो सही किससे लड़ रहे हो भाई है तुम्हारे सब क्यों लड़ रहे हो क्योंकि मैंने कुछ अगर बोल दिया है तो मैं उसी को सत्य सिद्ध करके दिखाऊंगा चाहे मुझे झूठ का ही सहारा क्यों ना लेना पड़े करवा लेना कटिंग विश्राम चौधरी
00:31:06:14 जी फेस दिखाए विश्राम जी विश्राम जी फेस दिखाएं आप सुन पा रहे हैं उनका नेट दिक्कत कर रहा
00:31:46:24 है अब भाई अभी तक बोलते रहे अलंकार वाले हमारी परंपरा ब्रह्मा से चलती है ब्रह्मा से चलती है और अब आ गए इस पर के वो डायरेक्ट ज्ञान भगवान ने दिया है ना बृजनंदन ये है देखो ये है इसीलिए पुरेते हैं अब आ गई मोहम्मद वाली बात डायरेक्ट भगवान ने वो फरिश्ता भेजा वहां पे यहां पे इनको भगवान ने ज्ञान दे दिया समाधि हो कर के ऐसे थोड़ी बात चलेगी सामना जिस दिन होगा उस दिन डिफीट खाओगे ये तर्क चलेंगे थोड़ी ना वो अकेले बैठ कर के कार्बो टारगेट गेम खेल लो अच्छा है मुंगेरी लाल के असीन सपनों में खोए रहो कि हमारे पास बहुत बढ़िया जब सामना होगा तो हर बात की वह आपकी जो आधुनिक गर्गी थी ना व बोल रही थी बाल की खाल होती नहीं है क्या बाल है और क्या खाल है यह कौन डिसाइड करेगा तो हम निकालेंगे ना बाल की खाल विश्राम जी आपका नेट नहीं आ रहा है आप नेट लेकर के आए और केदार धाम जी है आप जो है
00:33:00:22 केदार धाम जी अपना फेस दिखाएं विश्राम जी फेस दिखाएं तब तक आप पब्लिक कर दीजिए कोई और आना चाहे तो व आ जाएगा कबीर पंथ तरफ से अगर कोई आना चाहता है तो आ सकता
00:34:07:21 है कबीर पंथी वो वाले नहीं कबीर पंथी रामपाल वाले जेल धाम से जिनके ऑर्डर आते हैं इस समय जो जेल धाम है जहां पर इनके अनुसार रामपाल जी हैं वह इनके लिए तीर्थ स्थान है जेल धाम रामपाल जी का अनुगमन करने वाले वहां जाना बड़ा पुण्य का काम है अकॉर्डिंग टू रामपाल दास जी के
00:34:45:20 फॉलोअर्स है ना तो रामपाल दास जी के कोई अगर जवाइन करना चाहे तो जवाइन करें तब तक कोई अगर करना चाहे तो पंडित लोकी जी अगर आपके पास समय हो तो आप आ जाए हमारे पास बहुत सी चीजें हैं आज बताने के लिए मगर जब कोई आ जाएगा तभी हम उसको बताना चाह रहे हैं यह दिया है आप जवाइन कर लीजिए यह यह तीर्थ क्षेत्र भी लिखा होगा तत्वदर्शी ने कि जेल धाम भी एक धाम है क्योंकि इतने वर्ष तक वहां पर भगवान
00:35:30:02 वह भगवान जो अजर नहीं है उनका उनके भी वृद्धावस्था आ रही है धीरे-धीरे चश्मा लगाते ही हैं एक चेहरा उनका फड़कता है बात करते करते ऐसे करके ऐसे करके चेहरा फड़कता है उनका तो यह सब क्या है तकनीकी दिक्कतें है ना शरीर में आ रही है मगर ठीक है वहां क्योंकि इनके अनुसार भगवान है वो तो रहे थे काफी दिनों
00:36:09:21 तक मैं तो सुनके दंग रह गया उस दिन जब बोला कि जेल धाम अरे भाई यह तो मुझे लगता है इन्होंने नहीं बोला होगा तत्वदर्शी जी ने उन्होने नहीं बोला हो केदार जी आप अगर अपना चेहरा दिखा पाए तो यहां पर प्रतीक्षा करें अन्यथा आप जाइए जो भी व्यक्ति आ रहा है वह अपना चेहरा दिखाए दीपक राव जी जय श्री राम जय श्री राम राधे राधे राधे े भाई मैं रेवाड़ी हरियाणा से हूं बस मैं ये कहना चाहता हूं आप मतलब बहुत अच्छा काम कर रहे हो ऐसे करते रहो धर्म का आपके साथ है जी आभार आप और मैं एक एक एक क्वेश्चन और था बोलिए जो मतलब प्रेम भक्ति करते हैं मतलब भगवान का नाम जब एक निराकार और साकार मतलब दूसरी वो प्रेम भक्ति करते हैं नाम जप और वो उन्हें तो भगवान के मतलब नाम में से ही वो साक्षात्कार हो जाता है तो जो दूसरी भक्ति उन्हें मतलब क्या कैसे साक्षात्कार होता है मतलब उन्हें भी देखिए भवान दिखते हैं फर जो भगवान
00:37:24:27 की जो अ निराकार और अद्वैत रूप है जो भगवान का यह दोनों रूप केवल जानने के लिए है कि आपके माइंड के एक कोने में य बात होनी चाहिए मगर फिर आपको फोकस करना होता है द्वैत प और क्या कहते हैं साकार यह केवल एक माइंड के आपके कोने में होना चाहिए कि हां अंत तो गत्वा ये है उसको फिर उस पर ध्यान नहीं देना इसी को ने कहीं पर चिंत कहा है उस पर ध्यान क्योंकि उस पर ध्यान दोगे तो आप भक्ति नहीं कर पाओगे भक्ति में आपको प्रॉब्लम आएगी तो इसको जानना आवश्यक है इसको जानोगे नहीं तो उसको आप सर्वशक्तिमान नहीं कह पाओगे वह आपको ईश्वर नहीं लगेगा जैसे अगर य यह वाली इंफॉर्मेशन आप कट कर दो तो ईश्वर बाधित हो जाएगा जब ईश्वर बाधित हो जाएगा तो आपकी जो भक्ति की भावना है उसके प्रति वो प्रति नहीं रह जाएगी वो डिफीट खाएगी और भावना डिफीट खाएगी तो का जो निष्ठा है वो कम हो जाएगी भटके परेशान इसलिए यह एक ऐसी सच्चाई है जिसको जानने के बाद उसम ताला लगा करके रख देना है उस पर ध्यान नहीं देना है अब
00:38:40:04 यह जो बैलेंस बनाने वाली बात है यह आती है आपका मन लग रहा है चाहे नहीं लग रहा है रट्टा मारो जितना भगवत चरित्र पढ़ो रामचंद्र जी आए ऐसा ऐसा किया वो चरित्र पढ़ो तो इस सच्चाई से फिर आपका ध्यान हटेगा अच्छा है ना आपके मन के कोने में है आपके मन के कोने में है वो सच्चाई मगर उससे आपको ध्यान हटा ये थोड़ा सा कठिन होता है इसीलिए ये गुण विषय कठिन होता है कि भाई वो निराकार है तो ये हमारे उसका विषय नहीं होता है व्यवहार का अद्वैत इसलिए उसको जानना आवश्यक है सर्व शक्ति मत्ता के लिए उसके बाद एक कुंडी में ताला लगा के रख देना है और फिर हमको इसको ध्यान देना है ये सामने भगवान अलग है मैं अलग फिर इस पर धन इसको मना नहीं कर सकते क्योंकि क्यों इसको मना इसलिए नहीं कर सकते इसको हटा भगवान सर्व शक्तिमान सि नहीं होंगे वो बाधित हो जाएंगे जब वो बाधित हो जाएंगे तो भगवान सिद्ध नहीं होंगे फिर व जो का विषय जो मोक्ष का विषय वो नहीं सिद्ध होगा इसलिए दोनों चीजों को बैलेंस बनाना है कि
00:39:55:10 इसका यूज कैसे करना है और इसको कैसे करना यही सम कई ऐसी सइया है हा कई ऐसी सच्चा होती है जो हम जानते हुए भी उसको एक तरफ कोने में रख देते हैं कई ऐसी सच्चाई होती है और अपने जीवन को आगे बढ़ाते है ना ऐसी एक सच्चाई है कि आप इसको जान लो और एक कुंडी में बंद कर दो और फिर आगे सामने भगवान को प्रत्यक्ष रख कर के आप भगवत बज लग जाओ जितना लगोगे जितना लगोगे जितना लगोगे उतना ही आपका वो सुगम होता जाएगा भगवत चरित्र पढ़ो बाली को मारा ये किया वो किया सुंदरता उनका कंधा यहां से यहां तक था वो उनका जो वक्ष स्थल ता चौड़ा था और माचो पर्सनालिटी थी या भगवान श्री कृष्ण का अलग वर्णन है इतना सुंदर रूप था तो ये सब पढ़ोगे तो इसको धीरे धीरे धीरे धीरे आपका इस पर ध्यान जाना कम हो जाएगा फिर और लंबा आपका वो हो जाएगा जब जी एक चीज एक चीज और थी ये जो भगवान श्री राम और कृष्ण भगवान ये थे इनकी मतलब किशोरावस्था थी ना इनकी नहीं बढ़ती थी मल जैसे उम्र मतलब 16 17 साल तक ही थी ना इनकी किशोर किशोर अच्छा किशोर अवस्था का शरीर था आयु तो बहुत थी मगर इनका शरीर वहीं तक होता है किशोर अवस्था तक अच्छा ठीक है भाई धन्यवाद
00:41:10:13 आप अच्छा लगा बात करके बहुत प्र सही है सही समझ आपकी वीडियो देख के ऐसा है कि अब मतलब कोई ऐसा तर्क मिल जाता है आप ऐसा तर्क देते हो आपकी वीडियो देख के ये सीख जाता कि कोई मतलब ऐसे बहस करा ना उसको कर सके मतलब सामना ऐसा मतलब कॉन्फिडेंस आता है थोड़ा बहुत हा बहस नहीं बहस नहीं भगवत चर्चा कहिए बहस नहीं भगवत चर्चा कहिए सत्संग कहिए और उसका जो परवन है वह सकारात्मकता में हो ना कि नकारात्मकता में सकारात्मक में लेकिन पहले जैसे कोई भाई भगवान की बेज्जती कर दिया करता हमारे सामने कोई धर्म की तो हम मतलब बोल नहीं पता थोड़ी आपकी वीडियो देख पता लगे कैसे हैंडल करना है क्या मतलब है थोड़ा इसके लिए और भी अच्छा है आप क्लासेस में आइए प्रत्येक रविवार सुबह 8 बजे आयोजित होती है व फॉर्म भर दीजिए तो और स्टेप बाय स्टेप हम मतलब वहा बात करते हैं तो अच्छा रहेगा स्क्रीन पर नंबर आएंगे उसके उस हा उस कर दीजिए आपको फॉर्म मिल जाए भर दीजिएगा ठीक है जय श्री राम राधे राधे ध जय
00:42:17:16 श्रीम विकास मिश्र जी आप ही है जिनसे बात हो रही थी हां हां इसमें नाम पता नहीं कैसे चेंज होगा मेरा तो विकास चौधरी विकास चौधरी शरण ये नाम है ना विश्राम विश्राम चौधरी शरण मेरा राजकुमार मिश्रा नाम है और इसमें नाम पता नहीं कैसे लिख जा रहा है अच्छा जी बताइए जय श्री
00:42:55:15 राम हम राम राम मैं आपके वीडियो तो कई वसे आपको देखा हूं वीडियो इसमें आप संत रामपाल जी महाराज के जो श शमिल होते हैं आप एक जगह ठहर के बात करिए हिलते हिलते बात मत करिए [संगीत] हां पूछ आप रामपाल जी के श है रामपाल जी के शिष्य आप हा हा तो मैं आपसे एक बात यह पूछूंगा कि प्रमाण का मतलब क्या मानते हैं
00:43:47:19 आप प्रमाण मतलब जिसको जसे हमने जैसे हमने कहा कि फलानी चीज हमारे लिए प्रमाण है इसका अर्थ क्या है प्रमाण काथ यह होता है कि जिसको विश्वास नहीं है उसको प्रमाण दिखाना पड़ता है जिसको विश्वास है गुरु के जाता है उसको प्रमाण की जरूरत नहीं नहीं नहीं प्रमाण की जरूरत जरूरत नहीं पूछ रहा प्रमाण किसे कहते हैं आप प्रमाण हम किसे कहेंगे यह हमारे लिए प्रमाण है प्रमाण का अर्थ क्या है आपके लिए प्रण आप कहना क्या चाहते हो प्रमाण को किसम प्रमाण चाहिए हमको प्रमाण नहीं चाहिए हमको यह जानना है कि आप प्रमाण का अर्थ क्या लेते हैं प्रमाण का अर्थ मतलब की जो नाम जिसम मिल जाए उसको प्रमाण कहते हैं जिस चीज की आप खोज कर रहे हो अगर उसम वो चीज मिल जाती है तो उसको प्रमाण कहते हैं देखिए मैं आपको प्रमाण आप समझ नहीं पा रहे मेरा प्रश्न मैं आपको समझा दू जैसे कि हमने कहा रामपाल जी ने जो बात
00:45:02:26 कही वह हमारे लिए प्रमाण उन्होंने कोई बात कही तो इसका मतलब व सत्य यही तो होता है प्रमाण का अर्थ कि और कोई होता है नहीं प्रमाण तो देखो हर धर्म गुरु अपने हिसाब से प्रमाण दे भा जितने भी धर्म धर्म कहा से आ गया धम कहां से आ गया मैंने सिर्फ प्रमाण बोला है ना प्रमाण हो सकता है ए बी सीडी का हो प्रमाण हो सकता है कोर्ट का हो संविधान का हो उसम धर्म कहां से आ गया हा तो हां तो आप ये बताइए प्रमाण मांग रहे हो मैं मांग नहीं रहा हूं मैं मांग नहीं रहा हूं मैं आपसे क्लियर कर रहा हूं कि आपकी जानकारी में प्रमाण क्या है जैसे कि मैंने कहा कि मैं भारतीय प्रशासन के द्वारा जो आधार कार्ड उपलब्ध कराया जाता है उसको प्रमाण मानता हूं ठीक है ठीक है तो अब अगर मैं आपसे आपका नाम पूछूंगा आपने कहा कि मेरा नाम राजकुमार मिश्र है ठीक है तो जब मैं आपसे आपका नाम पूछूंगा मैं कहूंगा कि नहीं मुझे प्रमाण दिखाओ तो आप अगर अपना आधार कार्ड दिखाएंगे मुझे तो मैं उसको मान ल आधार कार्ड में लिखा है तो
00:46:17:28 फिर तो आपका नाम राजकुमार मिश्र ही है समझ गए यह प्रमाण की परिभाषा है सरल ठीक है [संगीत] बराबर ठीक है ना प्रमाण का अर्थ यह है कि यदि हम किसी चीज को प्रमाण मानते हैं तो हम उसकी किसी बात को ठुकरा नहीं सकते क्या यह बात सही है हा प्रमाण जिस चीज का मानते हो अगर व का प्रमाण है तो उसको स्वीकारना पड़ेगा हम अगर किसी चीज को मानते हैं तो प्रमाण मानते हैं तो हम उसकी किसी भी चीज को जैसे हम आप रामपाल जी को प्रमाण मानते हैं तो रामपाल जी की किसी बात को आप यह नहीं डाउट नहीं कर सकते कि नहीं यह हमारे भले के लिए नहीं होगी कर सकते हैं क्या आप डाउट डाउट करते
00:47:16:25 हैं नहीं कर डाउट नहीं करते ना किसी भी बात पर डाउट करते हैं क्या तो जब से हम लोग जुड़े हैं तब से हमसे कोई ना प्रमाण हम लोग देखते हैं वो करते हैं हा हमको विश्वास है कि हा भाई एक दो प्रमाण देखे भी तोव सत्य है तो वो ग्रंथों की बात बाद में करेंगे अभी हम केवल ये कर रहे हैं क्लियर कर रहे हैं कि प्रमाण का अर्थ क्या होता है प्रमाण का अर्थ य होता है कि जिसको हमने कह दिया कि यह इसकी बात हमारे लिए प्रमाण है पत्थर की लकीर है उसकी किसी बात को किसी भी बात को हमय डाउट नहीं कर सकते कि नहीं झूठ है सच पता लगाएंगे अगर हमने य कहा झूठ सच पता इसका मतलब वो व्यक्ति हमारे लिए वह वस्तु हमारे लिए प्रमाण नहीं है यह मानते हा जो प्रमाण चीज है उसको मानेंगे जो प्रमाण नहीं है उसको नहीं मा हा तो आपके लिए प्रामाणिक शास्त्र कौन सा है इसकी एक भी बात को आप मना नहीं करोगे कि नहीं ये मैं नहीं
00:48:32:25 मानूंगा अब प्रमाण शास्त्र जैसे अपने कोई है जिसको आप पूरा का पूरा मानते हो अपना जो कबीर साहिब का जो ग्रंथ है वो है और कबीर कबीर का ग्रंथ आप प्रमाण मानते हो है ना वेद गीता को प्रमाण नहीं मानते नहीं नहीं उनको भी मानते क्योंकि पूरा का पूरा एक भी बात को ठुकराना नहीं है हमको हम किसी भी चीज को ठुकराते थोड़ी है जो अपने चीज की मतलब की है जो वेद में जो मतलब कीज है वो ले लिए जो गीता में मतलब की चीज है वो ले लिए हा अपने को डाउट है कि भाई उसम ये चीज नहीं मिल रही है तो उसम दिक्कत यानी की यानी कि प्रमाणिक चीज पर भी डाउट हो सकता है प्रमाणित उस पर कैसे डाउट होगा जब प्रमाणित है तो आप ही तो कह रहे हो कि हम वेद गीता को प्रमाणिक मानते हैं मगर फिर कह रहे हो कि हम अगर डाउट होगा तो नहीं मानेंगे या तो वो प्रमाणिक नहीं है या फिर डाउट नहीं हो सकता कुछ और जैसे है उसम अगर जो जो परमात्मा की बात मेल खाता है वो बात मानने योग्य है बाकी इसका
00:49:47:26 मतलब कुछ कोई भी कारण हो मगर वो पूरी तरीके से प्रमाण नहीं है ना वेद गीता आपके लिए प्रमाण देखो आप यह कहना आप कहना क्या चाहते हो मेरे हिसाब से तो देखो हम लोग गुरुजी से जुड़े हैं परमात्मा से जुड़े हैं देखिए जैसे अभी आपने कहा मैं आपको समझा दूं मैं क्या कहना चाहता हूं जैसे अभी आपने कहा हम गुरु जी के ऊपर डाउट नहीं कर सकते कहा ना हम यह नहीं सोच सकते कि इनकी कोई बात जो है गलत हो सकती है [संगीत] बोलिए हा कोई बात नहीं गलत हो सकती क्या कोई स भी बात गलत नहीं हो सकती परमात्मा के नि क्या रामपाल जी की बातों में आपकी ऐसी बुद्धि है कि हम डिसाइड करेंगे इनकी कौन सी बात माननी है कौन सी नहीं माननी है नहीं हम अपने अपने कुछ अपने उसम से डिसाइड नहीं कर सकते कि बात माननी जो उन्होने आदेश दे दिया वही हमको मानने है वही सत्य है यह है प्रमाण ये आप अपने गुरु को प्रमाण मानते हैं क्या
00:51:02:28 ऐसी ही बुद्धि आपकी वेद और गीता के लिए है हा अरे जब जो गुरु जीने आदेश दे दिया वो गीता वेद में मिलता है पूछ रहा भाई साहब भाई साहब आप कितने अच्छे से बात कर रहे हैं बहुत अच्छे व्यक्ति है आप मैं पूछ रहा हूं आपसे जैसी बुद्धि आपकी रामपाल दास जी के लिए है कि हम उसमें यह नहीं सोच सकते कि कहीं पर रामपाल दास जी गलत भी बोल सकते हैं क्या वैसे ही बुद्धि वेद और गीता के लिए
00:51:39:06 है हा बुद्धि वैसे यानी की वेद और गीता की किसी बात को आप टकरा नहीं सकते किसी भी बात को कि यहां पर काल ने बोल दिया होगा यहां पर इसने झूठ लिख दिया होगा किसी भी बात को आप ठुकरा नहीं सकते नहीं ठुकरा सकते हा चाहे गीता में हो चाहे वेद में हो जो भी लिखा है एक भी एक भी बात को एक भी बात को आप टकराएंगे नहीं नहीं नहीं नहीं हम लोग क्यों ठुकराए हम जब कोई से भी ग्रंथ को ठुकराना नहीं चाहिए हा गुरु जी जो आदेश देते हैं कि भा देखिए राना चाहिए देखिए देखिए आप देखिए मैं बताऊ अपना क्लियर आपके लिए जैसे बाइबल भी प्रमाण है जहां तक मैं जानता हूं है ना बाइबल प्रमाण है ना आपके लिए देखो मानव धर्म के हिसाब से तो बाबल प्रमाण भाई साहब मैंने पूछा आप बाइबल को भी प्रमाण मानते हैं ना वो भी एक प्रमाण के तौर पर है कुरान भी प्रमाण है आपके लिए प्रमाण तो हम मैं अभी आपसे कह नहीं रहा हूं मैं वेद
00:52:54:19 जो बाइबल और कुरान है इसको मैं प्रमाण नहीं मानता हूं यह मेरे लिए प्रमाण नहीं है तो उसमें क्या लिखा है क्या नहीं लिखा है वो मैं डिसाइड करूंगा कौन सी चीज सही है कौन सी चीज गलत है इस आधार पर के वेद वेदों के द्वारा निर्धारित गीता के द्वारा निर्धारित जो सीमा है उससे मैच खा रही है कि [संगीत] नहीं है ना हा मगर वेद और गीता के लिए मेरी बुद्धि नहीं है कि उसकी किसी चीज के लिए मैं यह कह दूं कि यह वाली बात गलत है अब यह बताइए क्या ऐसी बुद्धि है आपकी गीता और वेद के लिए कि कोई भी बात को मैं मना नहीं करूंगा कि नहीं यह वाली बात नहीं मानूंगा दूसरी वाली बात
00:53:47:07 मानूंगा जो प्रमाणित चीज है उसको कोई नकार थोड़ी सकता है ना हम नकार सकते हैं ना आप नकार सकते हैं तो भैया इनको दिखा दो जरा वासद वाला शलोक वासुदेव वाला श्लोक दिखाओ वासुदेव वाला श्लोक दिखा दीजिए हां बड़ा
00:54:35:08 करिए यह भगवत गीता के दवे अध्याय का 37 वा श्लोक है इसमें लिखा हुआ है आपको दिख रहा है विशाल मिश्रा जी हा थोड़ा क्लियर कम दिख रहा है दिख रहा है प बाद में चेक कर लीजिएगा भगवत गीता का दसवा अध्याय 37 वा श्लोक है इसमें वृषण वंश में वासुदेव अर्थात मैं स्वयं तेरा सखा पांडवों में धनंजय अर्थात तू मुनियों में वेद व्यास और कवियों में शुक्राचार्य कभी भी मैं ही हूं
00:55:18:14 और इसमें एक श्लोक और था जो मैंने कल आपको दिया था वो भी आप दिखा दीजिए जो कल दिए थे श्लोक ऐसे ही कटिंग करके दिए थे संभवत सातव अध्याय के थे सातवा अध्याय और सातवा
00:56:16:15 श्लोक मुझसे भिन्न दूसरा कोई भी परम कारण नहीं है यह भगवत गीता में बोला जा रहा है भगवान श्री कृष्ण कह रहे हैं मुझसे भिन्न दूसरा कोई भी परम कारण नहीं है यानी कि जो यह बात बोल रहा है उससे बड़ा कोई नहीं है दुनिया में संसार में ब्रह्मांड में पूरे जगत में अब इस बात को आप मानते हैं कि नहीं भगवान विष्णु जी बोल रहे हैं हां भगवान श्री कृष्ण बोल रहे हैं विष्णु जी के जो रूप है या श्री कृष्ण बोल रहे हैं डायरेक्ट विष्णु जी बोल रहे हैं कुछ भी समझ लीजिए विष्णु और कृष्ण में अंतर नहीं है ये बोल रहे हैं कि मुझसे भिन्न संसार में दूसरा कोई भी परम कारण नहीं है मुझसे बड़ा कोई नहीं है यह श्री कृष्ण बोल रहे
00:57:22:03 हैं श्री कृष्ण बड़े हैं ना कई देव बड़े मैं कह रहा हूं श्री कृष्ण से यहां पे यह बोल रहे हैं कि मुझसे बड़ा कोई भी नहीं है हाथ वो कृष्ण जी के उसम काल भगवान प्रवेश करके बोल ही रहे हैं पूरा गीता का ज्ञान बोल रहे हैं काल भगवान ये बात कौन बोल रहा है काल काल भगवान अलग है ना कृष्ण से ये ये ओम भगवान बोल रहा है ओम भगवान जो ब्रह्मांड का मालिक है ना वो बोल रहा है उनके शरीर में 1000 जो भुजा आप देख रहे हो जो फोटो में बोल रहा आपकी बात में समझ गया समझ गया आपकी बात आप ये कह रहे हो कि जो काल है जो जिसको आप सदाशिव भी कहते हो काल को है ना ब्रह्म भी कहते हो है ना के शरीर से बोल रहे वो श्री कृष्ण के शरीर में आकर बोल रहे हैं ठीक है ठीक है तो इसका मतलब अगर यह भी मान ले कि काल बोल रहा है तो काल यह कह रहा है मुझसे बड़ा कोई नहीं
00:58:29:06 है यानी काल ही सबसे बड़ा ईश्वर है काल तो यहां इस ब्रह्मांड का मालिक वो सबसे बड़ा है ही ले ये भी लास्ट में तो व भी बोल रहा है ना कि अगर अर्जुन तुझे सुख शांति चाहिए तू तत्वदर्शी संत के शरण में जा वो भी मेरा पूज्य देवता है वो तो ये भी बता रहा है ना वो तो यहां के लिए बोल रहा है मैं ये कह रहा हूं मैं यह कह रहा हूं इस लाइन को क्या करें माने के झूठ माने क्या करें नहीं यह बात सत्य है व जो जहां तक उसकी सीमा है अब दरोगा मुझसे दूसरा कोई परम कारण नहीं है मैं ही संपूर्ण जगत का सूत्र हूं मूल कारण हूं मुझसे परम मुझसे बड़ा कोई नहीं है वो यह कह रहा है
00:59:26:24 इसमें क्या है कि आप आप जो बोल रहे हो वह अपने स्तर पर जहां पर उसकी रेंज है अब मुख्यमंत्री र आप इस लाइन को मानोगे की नहीं मानोगे उससे बड़ा कोई नहीं है यह बताओ सीध बात अगर वह ऐसा बोल रहा है तो फिर लास्ट में गीता जी के अध्याय के लास्ट में क्यों बोल रहा है कि क रहा कह रहा हूं वो जो बोल रहा है उसका हम ऐसा अर्थ निकालेंगे से दोनों का मेल हो जाए मगर मगर अगर आप अलग अलग अर्थ निकाल रहे हैं तो मैं यह कह रहा हूं कि उसको क्यों माने इसको क्यों ना माने और वो छोड़ दो अगर इसको नहीं मानते तो फिर यह हमारे लिए प्रमाण नहीं हुई है गीता जो है हमारे लिए प्रमाण इसकी एक बात भी हमने अगर गलत कह दी तो यह हमारे लिए प्रमाण नहीं है क्योंकि हमने इसकी दूसरी बात से वो बात मैच नहीं खा रही के अनुसार आपको शायद मालूम होना चाहिए भगवत गीता में प्रकार का ज्ञान है एक तो व जब क जी उनके रूप में बोल रहेता में बात सुनो आप मेरी बात सुनो भगवत गीता में दो प्रकार का ज्ञान है एक तरफ तो व युद्ध करवाने
01:00:41:25 के लिए कृ भगवान के रूप में काल भगवान बोल रहा है कि त युद्ध कर ले अर्जुन तेरे अगर तू जीत गया तो त य का फर्ग भोगा ी बात आप मुझे बताए भाई साब लिखा है कि गीता में दो प्रकार का ज्ञान है दो प्रकार का ज्ञान है कहा लिखा लिखा नहीं लेकिन अपने आप बुद्धि से सोचिए स्वयं यानी कि आप अपनी बुद्धि से डिसाइड करेंगे कि कहां सही है कहां गलत है अपने मन से भाई देश करता रामपाल जी की बातों में आप अपनी बुद्धि लगाएंगे कि उनकी कौन सी बात माननी कौन सी नहीं माननी है ऐसा है अभी आपने कहा था जो हमारे लिए प्रमाण है उसकी हर बात प्रमाण है अब आप कह रहे हो अपनी बुद्धि लगाएंगे तो मनम हो गया यह कहना बंद करो कि हम शास्त्र सम्मत भक्ति करते हैं आप आपका क ठीक सकता जन बता रहा है कह सकता है कि मैं यहां का मालिक हूं या तीनों लोको का मैं मालिक हूं ब्रह्मांड का मालिक हूं मेरे य
01:01:56:03 जो लिखा है वो झूठ लिखा है काल काल से भी बड़ा कोई परम कारण है मगर यहां पर काल ने झूठ बोला है व काल फिर क्यों कह रहा है कि भाई अर्जुन ं चाहिए तो दूसरे परमात्मा की शरण में जा ये भी बता रहा है अभी आपसे देखिए आपसे मैं अभी यह कह रहा हूं मैं अभी आपसे यह कह रहा हूं कि जो काल है उसने यहां पर आगे जाकर के सही बोला है आपके हिसाब से यहां गलत बोला है
01:02:29:21 ना य सही बोल रहा है यछ आपसे मैं आपसे पूछ रहा हूं यह सच है या झूठ है बस ये बताइए मेरी बात आप समझो वह यहां भी सच बोल रहा है जो लास्ट में है वहां भी सच बोल रहा है वो यह बोल रहा है कि मेरे 2 ब्रहमांड में जितने भी जीव है वो सब मेरे रिमोट से चलते हैं मैं यहां का राजा हूं मेरे से उत्पत्ति होती है यह देवता और जितने भी नर नर ये मानव ये मुझे ये मेरे से उत्पन्न हुए हैं य पू परमात्मा की जानकारी बता ही नहीं सकते इसलिए जितने यहां का पूरा संपत्ति का तीनों लो का ब्रह्मांड का यहां का मैं मालिक हूं अगर अर्जुन तुझे तद चाहिए या तो इसलिए इसलिए मुझे दिक्कत होती है पूरा बोल देंगे मगर जो मुद्दे की बात है वो नहीं बोलेंगे मैं मुद्दे के बात बोल य काल ने झूठ ही तो बोला जब वो यह कह रहा है कि मुझसे परम कोई नहीं हैय कहा मुझसे बड़ा मूल कारण कोई नहीं है हा कुछ अटकल बाजी उसने की है युद्ध करवाने के लिए कुछ
01:03:45:14 कुछ की है ना कुछ अटकल बाजी की है ना हा कुछ अटल बाजी उसने इस मतलब भगवत गीता में कहीं पर ऐसा लिखा है जो मानने योग्य नहीं है और यह बात आप मानने योग्य नहीं है तो फिर भगवत गीता आपके लिए प्रमाण नहीं सिद्ध हुई आपने कहा था जिसको मानेंगे पूरा मानेंगे आपने कहा था ना प्रमाण वो है जिसको प्रमाण व है प्रमाण वो है प्रमाण वो है जिसको आप मानो तो पूरा मानो आप ही ने कहा जैसे रामपाल प्रमाण है ऐ नहीं है उसम
01:04:27:01 रामपाल प्रमाण है नहीं भाई साहब मैं जो पूछ रहा बताइए रामपाल प्रमाण है कि नहीं हा वो तो परमात्मा है व तो प्रमाण है ही प्रमाण है ना क्या उसकी बातो में कर सकते हैं कि इतनी मानेंगे इतनी नहीं मानेंगे देखो अगर मैं आपको उदाहरण के तौर पर एक बात आपको समझाता मुझे उदाहरण मत बताइए पहले मुझे बताए अगर अगर वो आपके लिए देखिए अगर वो आपके लिए प्रमाण है तोरा मानेंगे या अधूरा मानेंगे रामपाल की बात कर रहा हूं भाई किसी को विश्वास नहीं है तो हमारे लिए जो उसम प्रमाण की चीज है हमने वो निकाल लिया जैसे परमा अरे भाई यानी अगर तुम अगर तुम अपने मन से सोच रहे हो कि इसमें कोई चीज हमारे लिए नहीं है इसका मतलब तुम्हारे लिए कोई और नियमावली प्रमाण है जिसके आधार पर तुम यह डिसाइड करोगे कि इसमें कौन सी चीज हमारे लिए है और कौन सी चीज नहीं है हां तो जो हमारे गुरु बताते उस जो अपने लिए चीज है वो नि गु यानी की आपके सुनो यानी कि आपके गुरु जी के अनुसार य डिसाइड होगा गीता में कहां सही है गलत है भगवत गीता से मोक्ष नहीं होगा यह क्लियर बात है
01:05:43:02 हो अब सुन लो भैया यह है इनके अंदर की बात जो कहते हैं सद ग्रंथों में लिखा है सुन लेना अरे भाई जब भव गीता से मोक्ष नहीं होना है और क्या कहते किससे मोक्ष नहीं होना वेदों से मोक्ष नहीं होना है तो यह क्यों चिल्लाते हो वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है ये चिल्लाओ तर्शी प्रमाण है कबीर भगवान है परमात्मा की महिमा है प्रमाण है ही नहीं ना अपने मन से आप कहते हो हम श समत बात कर रहे हैं अब मुझे लिखा दिखा दो कि भगवत गीता में अगर दो अलग अलग बातें हो रही है तो दोनों में से एक को मानना एक को नहीं मानना है ये क सबसे सीधी बात है मैं आपको पा मिनट में बता देता हूं है व उल लेता हूं रुको नहीं नहीं नहीं ओम तत् पत यही तीन है य ईश्वर परमेश्वर ये तीन परमात्मा है ये जो आप बोल रहे ना काल काल ये ई है ईश्वर व भाई साहब देखिए आप अपने जो चीज देके आए हैं हम उसम पूछ ही नहीं रहे हम आपसे हम ये कह रहे हैं यह कहां लिखा है कि अगर भगवत में दो अलग अलग जगह दो बातें हो रही है
01:06:58:13 तो हम इसको मानेंगे इसको नहीं मानेंगे एक को मानेंगे दूसरे को नहीं मानेंगे य पूरी भगवत गीता में आप जो है लास्ट के आपसे भाने आपसे पूछ है मैंने आपसे य पूछा है भाई साहब की अगर भगवत गीता में दो प्रकार की बातें लिखी है तो एक को मानना है एक को नहीं मानना है यह कहा लिखा है जो उसम मानने अपने योग्य है वो मानना है जो मानने योग्य नहीं है उसको नहीं मानेंगे अब जो कोई कह रहा है अर्जुन ये ये जो मानने योग्य नहीं है ये जो सिद्धांत है यह कहीं तो लिखा होगा कि अपने मन से करोगे अब उसम लि मानने योग नहीं है क लिखा है क्या जो मानने योग्य नहीं होगा वो हम नहीं मानेंगे इसका कहां लिखा है मैं लिखा हुआ बताता हूं आपको वो व्यास स्मिति का मैंने अभी प्रमाण भेजा था व [संगीत]
01:08:03:08 खोलिए आप मु का भेजा था एक मिनट भाई साहब एक मिनट व्यास स्मति का भेजा था मैं इतना इसलिए बड़ रहा हूं कि इनकी यह वास्तविकता सामने आ सके कि इनके लिए वेद और गीता प्रमाण नहीं है ये नाटक करते हैं उसको प्रमाण मानने का ये देखो पढ़ना आएगा नहीं संभवत व्यास स्मृति पहला अध्याय पांचवा वचन है जहां परस्पर विरुद्ध जचने वाली दोनों प्रकार की बातें उपलब्ध होती हैं वहां दोनों को धर्म मानना चाहिए लो यह प्रमाण है आपके लिए यह व्यास जी लिख रहे हैं जिन्होंने गीता लिखी है
01:08:56:22 आप कहना क्या चाहते हो कि संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान मतलब व्यर्थ है व्यर्थ है बेसलेस यह मैं कहना चाहता हूं आप मैं कहना नहीं वाला था आपने पूछा तो बता दिया अब मैं आपसे पूछ रहा हूं आपके अ ब्रह्मा विष्णु महेश जो है व अविनाशी है कि नहीं है नावान नावान अब ये बताइए कि जो प्राणी है भगवान सृष्टि की रचना कैसे करते हैं शुरू में आपके य सृष्टि रचना में बताया गया ना सृष्टि रचना कैसे होती है ऐसा है परमात्मा ने हमारे ने बोल दिया है कि ब्रह्मा विष्णु महेश भी आ जाएंगे ना तो संत रामपाल जी महाराज के चेले को डगम नहीं कर पाएंगे जो आप आके य सर्वानंद की तरह किताबों को रख कुछ और रहा मैं आपको बोल रहा हूं जाने इनको हटाओ हटाओ इनको हटाओ अब आप अब आप बात सुनना नहीं चाहते हो
01:10:03:02 ना व्यक्ति क्रोध में आ चुके हैं भाई साहब देखिए क्रोध में आएंगे हम आपको ऊपर नहीं लेंगे आप तरीके से बात करेंगे आप अगर इस तरह से भविष्यवाणियां बताएंगे या यह जो गुरुरा कर के बात कर रहे हैं य सब मत करिए ऊपर आ जाइए स सम्मान कोई गलत थोड़ी बोल रहे है लेकिन आप थोड़ा आपका लजा बदल गया था आपका लहजा जो है बदल गया था हम अपने च हम अपने चैनल पर ये नहीं चाहते कि कोई अपशब्द हमारे बारे में आपके बारे में य रह जाए बोल भी नहीं रहे आपका लहजा बदल गया था ना भाई साहब जनता को दिख रहा रुक जाओ एक मिनट आपको कमेंट दिखाते इनका बोलने का ढंग बदला था या नहीं बदला था आप जरा कमेंट करके
01:10:51:06 बताइए कमेंट करके बताइए इनका बोलने का ंग बदल गया था कि नहीं अभ ऐसा लग रहा था कि नहीं कि यह कुछ गलत बोलने वाले हैं यह देखो ठीक है और कोई बता दो यह देखो पढ़ो भैया पढ़ा बदला था और देखो ये जी पढ़ रहे हैं कि नहीं इसलिए हमने कहा कि देखो कोई भी गलत बात आप बोलो इससे पहले हम आपको ना पड़ेगा गलत बात मत बोलो तरीके से बात करो त्मक अब बात य आती है हम आप कहा बात बोले गलत बो हम यही बो देखो गुरु परमात्मा होता है गुरु पूर्ण ब्रम होता है मैं आपसे पूछ रहा हूं ब्रह्मा विष्णु ब्रह्मा विष्णु महेश आपको जो है आप उनको कहते हैं अविनाशी नहीं है वो नाशवान ब्रह्मा विष्णु अब जो परमेश्वर है वो सृष्टि की रचना कैसे करता है थोड़ा मुझे बताइए मुझे पता है वो कैसे करता है आपको पता है तो बता दीजिए नहीं तो मैं बताऊ आपके अनुसार कबीर ने सृष्टि
01:12:06:09 की रचना कैसे की वो बताइए जब वो अकेला तक आते है ज्ञान गंगा पुस्तक आते है आप जो इतना पुस्तक है ज्ञान गंगा पुस्तक लीजिए उसम पूरा विस्तार से बताया हु आपको नहीं पता है हमको सब पता है आप ज्ञान पुस्तक लीजिए उस पढ आपको पूरा प्रमाण के साथ में आपको भा मैं इसलिए पूछ रहा हूं आपसे कि उसमें मेरी जानकारी में यह है कि कबीर जब अकेले थे तो उनके अंदर एक से दो होने की इच्छा आई ठीक है और इसी भावना से उन्होंने जो है जीवों को बना दिया ऐसा ही
01:12:49:18 है ऐसा ही है ना हा तो टोटल कितने प्रकार के है एक तो परम तत्व हो गया कबीर 16 तत्व जैसे है 16 तत्व है 16 तत्व में से अविनाशी कौन-कौन सा तत्व है अविनाशी तो वही पूर्ण परमात्मा है बाकी अविनाशी जो सतलोक में है वो अविनाशी है बाकी यहां जितने भी सात संग ब्रह्मांड के जो है ब्रह्मांड के है जितने भी जीव है वो अविनाशी नहीं है क्यों जीव के लिए तो ये रामपाल जी ने बोला है कि वो अविनाशी है किनके लिए बो जीव के लिए यहां के जीव कोई अविनाशी नहीं है सब जी जीव कोई चार पा थोड़ी है जीव अविनाशी है उनके शरीर अविनाशी नहीं है शरीर अविनाशी नहीं है जीव अविनाशी है अब य जो ब्रह्मा विष्णु महेश है यह किसम आते हैं जीव में आते हैं या जीव से ऊपर में आते हैं या जीव से भी गते में आते हैं यह भी जीव में ही है जैसे अपन पैदा होते यानी कि जिस तरीके से जीव अविनाशी है वैसे ही ब्रह्मा विष्णु महेश
01:14:04:24 भी अविनाशी है खाली शरीर ली शरीर व होता है शरीर का चेंज होता है अ शरीर च होता है मगर व त रूप से अना है शरीर चेंज होता है मगर तत्व रूप से वो अविनाशी है ब्रह्मा विष्णु महेश बोलो बताओ बताओ बोल के बताओ ब्रह्मा विष्णु महेश भी अविनाशी है ब्रह्मा विष्णु महेश य अविनाशी नहीं है यह भी
01:14:39:22 सब नासन मेरे भाई अगर ब्रह्मा विष्णु महेश आपके अनुसार जीव है ब्रह्मा विष्णु महेश आपके अनुसार जीव है जीव तो जीव तो अविनाशी कहा है ना अरे देखो मैं आपको उदाहरण के तौर पर बताता हूं जैसे एक मिट्टी का घड़ा होता है वह तुरंत गिरते ही फूट जाता है उसी तरह अपने जितने भी देवी देवता है यह समझो स्टील है इनको भी जंग लगेगा यह भी मरेंगे लेकिन यह अभी नहीं मरेंगे हमको हम तो उनके ने आप पूछा कि शरीर नष्ट होते हैं ब्रह्मा विष्णु महेश तत्व से अविनाशी है यह पूछ रहा हूं मैं है कि नहीं है उनके शरीर पूरे नष्ट हो जाते हैं व लाख पूछ रहा तव से मैं पूछ रहा हूं तत्व से अविनाशी है कि नहीं है तत्व से अना तो है ही ना व है यानी ब्रह्मा विष्णु महेश भी अविनाशी
01:15:41:01 है अना नहीं है वो दिक्कत है ना जन्म मृत तो है ही उनकी भी लेकिन बहुत देर में होती है ना उन म आप आपके जी ने बताया कि जीव अविनाशी है ठीक है ये जीव अविनाशी है हा तो ब्रह्मा विष्णु महे नहीं है ब्रह्मा विष्णु महेश की भी उनकी भी आत्मा मरती थोड़ी है वो तो दूसरी योनी पकड़ लेती है जैसे अपन लोगों की मरते हैं दूस मतलब ब्रह्मा विष्णु महेश भी तत्व से अविनाशी है ना बोलो इस बात को तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश भी अविनाशी है बोलो बोलो हा तो भी है पूरा बोलो तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी
01:16:33:12 है तत्व थोड़ी अविनाशी है हा जो आत्मा है जो तत्व है व तो अविनाशी है ही वो तो गधे के भी नहीं मरती आत्मा मैं आपसे य पूछ रहा हूं आपसे पूछ रहा हूं तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है कि नहीं यह बोलो तत्व से तो है जैसे अपन लोग भी तत्व से ही है तो एक बार आप कृपा करके बोल दीजिए तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है बोल दीजिए बोलिए तो तत्व से तो अविनाशी है ही ना जैसे अपन लोग त अ आपसे निवेदन कर रहा हूं एक बार इस सत्य को पूरा बोल दीजिए की तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है वो कभी नहीं मरते बोलिए सत्य बात है ना बोलिए तत्व मतलब आत्मा नहीं मरती हा तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है उनका कभी अंत नहीं
01:17:37:12 होता उनका तो अंत होगा यार त से मतलब वो तो मर जाएंगे तो फिर दूसरे ब्रह्म महे आएंगे ना नहीं बोल पाएंगे नहीं बोल पाएंगे जीव को बोल लेंगे मगर ब्रह्मा विष्णु महेश को बोलने में दिक्कत आएगी अरे भाई वो भी मरेंगे व भी मरेंगे तो दूसरे ब्रह्मा विष्णु महेश आएंगे ऐसा आपसे भाई साब ये पूछ रहा हूं तव से ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है कि नहीं यह पूछ रहा हूं से तो वो भी है ब्रह्मा वो भी
01:18:12:13 है आप एक बार बोलो तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी नहीं है त्व ब्रह्मा वि मना नहीं त से ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी नहीं है मैं रामपाल दास जी का शिष्य बोल रहा हूं तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी नहीं है आप तत्व किसको बोलते हो आत्मा को बोलते हो हा बिल्कुल को बोलते हो हा आप किसको बोलते हो तव वही मैं समझ नहीं पा रहा था आत्मा तव को बोलते हो ना आप ये बोलो मैं रामपाल दास जी का शिष्य सुनिए मैं रामपाल दास जी का शिष्य यह बोल रहा हूं कि तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है नाशवान नहीं है
01:19:15:18 बोलो ब्रह्मा विष्णु महिष को छोड़ो हम सब भी आत्मा अजर अमर है आत्मा कभी नहीं मरती है वो भी बोल लेना वो भी बोल लेना आत्मा भी अरमर है आप वो भी बोल लेना मगर आप ये बोलो पहले मैं रामपाल दास जी का मैं रामपाल दास जी का शिष्य बोल रहा हूं कि तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है बोलिए
01:19:47:12 बोलिए दिया अरे भाई एक बार ऐसे बोल दीजिए ना कि मैं संत रामपाल दास जी का शिष्य आज यह बोल रहा हूं कि तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है तत्व से तो व भी अविनाशी है ब्रह्मा विष्णु महेश तो अविनाशी है ही हा तो ऐसे पूरा बोल दीजिए जिससे की लोगों को पता चले कौन बोल रहा है मैं संत रामपाल दास जी का शिष्य आज यह बोल रहा हूं कि तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है बोलिए
01:20:26:12 त् से जितने ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है भाई साहब पीछे का तो बोलिए मैं रामपाल दास जी का शिष्य आज ये बोल रहा हूं कि तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है बोलिए आपको आपको शॉर्टकट में बता दिया है समझने वाले समझ जाएंगे नहीं नहीं आपको यह सत्य जो है आप बोलिए तब हम आगे बढ़ेंगे अगर ये बात सत्य है तो बोलने में घबराहट कैसी अपनी पहचान बताइए और बोल दीजिए मैं तो बता रहा हूं ना जितने भी ब्रह्मांड में जीव है सब नाशवान है आज मैं बोल रहा हूं मैं बोल रहा हूं आज मैं संत रामपाल दास जी का शिष्य बोल आज यह बता रहा हूं कि तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है
01:21:26:00 तत्व से जितने भी आत्माएं हैं इस काल लोक में सब अविनाश भाई साहब आपको ब्रह्मा विष्णु महेश आप यह बताइए आपकी जो किताबे है उसमें क्या छपा रहता है बार बार बार बार य बातें बोली जाती है क्या कि जी जीव जो है जीव का शरीर मरता है ये होता है व जीव के बारे में बात होती है ये बात होती ब्रह्मा विष्णु महेश नाशवान नाशवान नाशवान तो आज ब्रह्मा विष्णु महेश की जो सच्चाई है वो आप बोलिए कि मैं संत रामपाल दस जी का शिष्य आज ये बता रहा हूं कि ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है यह बोलिए ना और फिर आपको जो बोलना है वो भी बोलिए कोई दिक्कत नहीं ये मोटी मोटी लाइन है इसको बोल दीजिए उसके बाद अपना जो बोलना है बोलिए मैं सं रामपाल जी महाराज का जो शि बोल रहा हूं जितने भी ब्रह्मा विष्णु महे के आत्माएं हैं वो अविनाशी आत्माएं अविनाशी है शरीर मरते हैं उनके मैं आपसे पूछ रहा हूं आत्मा को तव नहीं कहते क्या आप आत्मा को ही तत्व बोलते तो आप बोलिए कि मैं संत रामपाल दास जी का शिष्य आज य बोल रहा हूं कि ब तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है
01:22:44:00 बोलिए मैं संत रामपाल जी महाराज के बोल रहा हूं ब्रह्मा विष्णु महेश के जो आत्मा तत्व है वो अविनाशी हां ठीक है चलो बहुत बढ़िया चलो अब मैं आपसे बोल रहा हूं अब मैं आपसे पूछ रहा हूं आपने मान लिया कि तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश का नाश नहीं होता अब मैं आपसे पूछ रहा हूं कि कबीर इसलिए श्रेष्ठ है क्योंकि ब्रह्मा विष्णु महेश का तो शरीर नाशवान है मगर कबीर का शरीर नाशवान नहीं
01:23:20:27 है हेलो हेलो उनका शर नावान नहीं हा अच्छा यह बताइए वो जैसे वहा सतलोक में रहते वैसे ही आते हैं ना नीचे उसी शरीर के साथ आते हैं शरीर बदल के आते हैं व तो बहुत कम अपने जैसे चर्म दृष्टि उनको देख सके हिब से यहा पर आते हैं सतलोक में उनका स्वरूप है कने का मलब है शरीर ही रहता है य माया रूप में आते हैं या वास्तविक रूप में आते हैं जो हमने उनका शरीर दे व असली है या नकली
01:23:58:18 है अभी जो वर्तमान में पूछ रहे हो मैं कबीर जी की बात कर रहा हूं रामपाल जी की नहीं हमारे लिए तो वही परमात्मा है हम कबीर जी जाते कबीर जी जिस शरीर में आए थे वह सत्य है या असत्य है व झूठा शरीर है कि असली शरीर है कबीर जी को हमने तो देखा नहीं था रामपाल जी महाराज शर दे फोटो आप जो फोटो देखी है फोटो तो नकली है उनकी कोई फोटो काल्पनिक सब बनाए हुए हैं कोई सर प मु मतलब आपने आपको नहीं पता कि कबीर जी कैसे दिखते थे साकार ईश्वर का आपको नहीं पता नहीं दिखते थे तो मनुष्य शरीर के जैसे ही थे व तो काल्पनिक फोटो बनाए हुए य यानी वो जब यहां नीचे आते हैं तो अपने वास्तविक स्वरूप में ही आते हैं वास्तविक रूप में नहीं आते हैं वो अपना जिस हिसाब से इंसान उनको देख सके एकदम नॉर्मल व अपने वो अपने तेज को कम कर लेते हैं वो ठीक है तेज को कम कर लेते हैं मगर ऐसा तो नहीं है दूसरा स धारण करते हो नहीं दूसरा शरीर दूसरा
01:25:13:20 शरीर तो ार नहीं करते ना दूसरा अरे वो एक से अनेक भी हो सकते हैं एक भी रह सकते हैं आपसे भाई साब पूछ रहा हूं जिस शरीर में व वहां पर बैठे हैं वोह उसी शरीर में नीचे आते हैं या शरीर बदल के आते हैं बस इतना बता दी शरीर बदल के आएंगे क्योंकि अपन तेज को कम करके आएंगे शरीर तो उनका वही रहेगा लेकिन तेज को कम करके आए शरीर बदल के नहीं आएंगे ना नहीं नहीं शरीर बदल के नहीं आएंगे पक्का आपने तेज तेज को कम करके यहां पर आ जाएंगे लेकिन शरीर बदल नहीं शरीर बदल नहीं आएंगे ये पक्का है ना शरीर शरीर वही है जो सतलोक आश्रम में सतलोक वो शरीर वही है जो सतलोक में है बस तेज को कम कर लिया नीचे आ गए शरीर चेंज नहीं किया ठीक है अब ये बताइए कि वो नीचे आ गए तो जो नीचे कबीर आए हैं जो ये कबीर हमें दिख रहे हैं ये सर्वशक्तिमान है या नहीं हम सर्वशक्तिमान
01:26:26:26 सर्वशक्तिमान सक्तिमान यानी कि ये सब कुछ कर सकते हैं हां कर सकते हैं करते भी है इनका शरीर इनका शरीर इनका शरीर शाश्वत है ना शाश्वत का अर्थ पता है आपको क्या होता है हां कभी नाश में ना आने वाला श कभी नाश में ना आने वाला कभी बदलने ना वाला [संगीत] हां जैसा शरीर है वैसा ही रहेगा वैसे ही हा अब यह बताइए वो शाश्वत शरीर में नीचे आ गए हैं तेज को कम करके थोड़ा फोकस उन्होंने कम कर दिया शाश्वत शरीर में वो नीचे आ गए अब हमें आप यह बात बताइए क्या वोह हाथी बन सकते हैं या
01:27:21:21 नहीं वो उनकी महिमा व अब हाथी बने या कुछ और बने सर्वशक्तिमान है कि नहीं हां सर्वशक्तिमान का मतलब ही यही होता है कोई सा भी रूप धारण कर सकते हैं कोई सा भी कार्य कर सते आप तो कह रहे हो उनका शरीर ऐसा है जो बदल नहीं सकता या तो वो रूप धारण नहीं कर सकते या फिर उनका शरीर बदलने वाला हो गया नाशवान हो गया अब आप शरीर का पूछ रहे है तो रूप बदलने का पूछ रहे हो अब उदाहरण जब आ जब वो आती बनेंगे जब वो हाथी बनेंगे तो मेकअप करेंगे क्या ओरिजनल हाथी वाला शरीर में शरीर बना सकते हैं अपने शरीर को कि नहीं वो सब कुछ कर सकते हैं जैसे अपने देवता हैर बदलने वाला हो गया ना फिर उनका शरीर बदलने वाला स हो गया अरे ऐसा नहीं है आप तो गलत पूछ रहे हो क्यों पूछ रहा हू गलत अब अपने रूप में भी रह सकते हैं कुछ भी सवन मतलब होता है अपने भी रूप में र सकते हैं दूसरे का रूप भी धारण कर सकते हैं अगर वो रूप धारण कर सकते हैं दूसरा तो उनका जो शरीर जिसे आप शाश्वत कह रहे हो व शाश्वत नहीं रहा क्योंकि वो बदल सकता है आप कह रहे
01:28:36:22 हो शाश्वत भी है आपको समझाना बहुत मुश्किल है परमात्मा ही आपको समझा सकते हैं चलिए ठीक है आने के लिए बहुत बहुत आभार आपसे बात करके अच्छा लगा नीरज शर्मा जी विकास मिश्र जी को हटा दीजिए जी जी जय श्री राम हेलो जी जय श्री राम व क्लियर है हां जी क्लियर है अब देखिए हमने अभी तक क्याक किया एक सराइज कर दू नीरा जी को एक मिनट में ले लीजिएगा हमने पहले य सिद्ध किया अच्छा नेट अटक रहा है तो मैं लीव करके दोबारा आता हूं
01:29:58:06 अब मैं एक सराइज कर देता हूं मैंने अभी क्या क्या बातें की है हम भी यही कहते हैं कि लीला पूर्वक ब्रह्मा विष्णु महेश शरीर धारण करते हैं और शरीर छोड़ते भी मगर तात्विक रूप से उनका नाश कभी नहीं होता है अब इनमें और हम में अंतर क्या रहा यह जो लीला करते हैं जो शरीर धारण करते हैं उसको छोड़ना और उसमें रहना वो उनकी इच्छा से होता है उनको पता होता है कि हम अजर अमर है मगर जो बद्ध जीव है अविद्या के कारण अज्ञानता के कारण उनमें और इनमें यही अंतर है कि वह अविद्या से ग्रसित है उनको यह सब नहीं पता है उनको लगता है कि हम मर जाएंगे इसीलिए भगवान उनको बताते हैं कि नैनम छिंदंति शस्त्राणि नैनम धरति पाव का न चन क्लेप न शोष मारुत अब तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश कभी भी नष्ट नहीं होते ठीक है मगर इनका कहना है कि कबीर इसलिए श्रेष्ठ है क्योंकि उनका शरीर कभी नष्ट नहीं होता अब बात ये आती है कि अगर उनका शरीर कभी नष्ट नहीं होता और जिस शरीर में वो नीचे दिखाई दिए हैं वही शरीर ऊपर सतलोक में है तो फिर ये बाधित ईश्वर है ये सब कुछ ना कर सकने वाला ईश्वर है यह रूप नहीं बदल पाएगा अपने हाथ को लंबा नहीं कर पाएगा अपना साइज नहीं बढ़ा सकता छोटा
01:31:13:06 नहीं कर सकता इतनी सारी बाधाएं लगेंगी इसके ऊपर के पूछो नहीं क्योंकि वो जड़ वो बिल्कुल शाश्वत शरीर है उसमें कोई बदलाव नहीं होना चाहिए ठीक है तो ब्रह्मा विष्णु महेश को ये हमारा नेट अटक रहा है अब बताइए क्या करें एक बार फिर से जाकर आते हैं अब
01:32:41:24 आ रहा है नेट ठीक से तो मैं समरा कर रहा था कि सबसे पहले क्या है कि शास्त्रों में अपने हिसाब से मनमुक रूप से चयन करना इसका कहीं नहीं बल्कि विरोध किया गया है कहीं इसका प्रमाण नहीं है कि ऐसा करेंगे अगर ऐसा कर रहे हैं तो अपने मन से कर रहे हैं और अगर कर रहे हैं तो फिर इनकी जो चीजें है वो शास्त्र सम्मत सिद्ध नहीं होती वो रामपाल सम्मत हो सकती है या इन्होंने अपना कोई ग्रंथ लिखा हो वो सम्मत हो सकती है मगर शास्त्र य जो वेद आदि शास्त्र है गीता वेद और पुराण इनके सम्मत नहीं दूसरी बात कि हमने यह सिद्ध किया कि ये जो बोला जाता है कि ब्रह्मा विष्णु महेश भी अविनाशी नहीं है तत्ता वो अविनाशी यही बात हम भी कहते लीला पूर्वक शरीर धारण करते छोड़ते मगर इनका कहना है कि कबीर जो है वह जो है उसका शरीर नष्ट नहीं होता जब शरीर नष्ट नहीं होता और वो उसको यहां ले आते हैं या तो वो ऐसा शरीर हो जिसको हम कभी देख ना सके जीते जी तो भी वही बात हो गई निर्गुण निराकार वाली जो हमारे
01:33:57:00 कर्मेंद्रियों का ज्ञानेंद्रियों का विषय ना हो व्यवहार में ना आ सकने वाला रूप ईश्वर का तो वो ठीक है मगर ये तो वहां साकार बैठा साकार ही नीचे आ रहा है साकार नीचे आ रहा है शाश्वत है तो यह तो ब्रह्मा विष्णु महेश से भी गया बता ईश्वर हो गया क्योंकि इसका शाश्वत शरीर है उसको बदल नहीं सकता इसका हाथ लंबा नहीं हो सकता कंधे चौड़े नहीं हो सकते अपने शरीर को ये हनुमान जी की तरह बड़ा नहीं कर सकता छोटा नहीं कर सकता जैसा वहां है वैसा ही रहेगा तो शाश्वत कहां रहा शरीर बदल रहा है और अगर बदलने वाले कोय शाश्वत ना माने तो मान लीजिए कि मानव देह में दिख रहा है कबीर और उसके बाद य हाथी बन गए कबीर अभी मानव जैसे दिख रहे हैं हाथी बन गए उतनी देर के लिए देह नाश हो गई इसका अस्तित्व नहीं रहा अगर ये बदलने वाले को वो नहीं मानते तो अगर बदल भी रहा है तो उतनी देर इसका अस्तित्व नहीं रहा जितनी देर हाथ फॉर्म में आया तो यह तो ब्रह्मा विष्णु महेश से भी ज्यादा गया बीता ईश्वर हो गया कबीर के रूप में क्योंकि वह बहुत सारे काम है जो नहीं कर सकता संसार के मगर ब्रह्मा विष्णु महेश कुछ भी कर सकते हैं अवाद जितने
01:35:12:06 कहो उतने शरीर बदल दे फटाफट फटाफट यह है ईश्वर का किसी भी नियम के नीचे ना आ सकने वाला अवाद ईश्वर ऐसा ही जो जैसा यहां कबीर है ऐसा ही ईश्वर स्कोन का भी है सेम ऐसा ही ईश्वर स्कोन का जैसे वहां बैठे हैं वैसे ही व नीचे आएंगे बस व नाम कृष्ण है इतना हमारे ऊपर उन्होंने जो है वोह कर दिया जो है क्या कहते हैं उसको आपका महान वो शब्द आ नहीं रहा रबली
01:35:53:22 कृतज्ञ हो गए हम उन्होंने हमें जो है दया कर दी हमारे ऊपर कम से कम नाम नहीं बदला उनका बाकी वह क्वालिटी वाइज वही है हां जी कौन है नीरज शर्मा जी आ [संगीत] जाइए आपकी जो पिक्चर है वो बहुत रुक रुक के आ रही है इंटरनेट का प्रॉब्लम है तो इंटरनेट जहां पर हो वहां से आइए
01:36:41:04 आप आप दोबारा आइए जब इंटरनेट में हो कोई और है जो चेहरे के साथ आ रहे हैं राज शुक्ल जी और एक तो वही नहीं दिखा अपना चेहरा किक फ्रॉम स्टूडियो कर देते हैं सात्विक नाम है इनका कहां गए भाई वेदों में प्रमाण है कभी कबीर भगवान है सारा निकल गया निकल गई सारी एकड़ी यही जि आले आए थे गब्बर के कैर से आजादी
01:37:46:01 लाने देखा इसको कहते हैं ज्यादा शास्त्रों की बात नहीं करके चीजें बिल्कुल साफ हो गई ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी नहीं है यह लोग बोलते रहते दिन भर आज बोला ब्रह्मा विष्णु महेश भी अविनाशी है इन्हीं के अनुसार बुलवा लिया कहां है
01:38:17:28 भाई जेल धाम वाले लोग कहां है जिनका तीर्थ जेल धाम है वह कहां है वोह लोग आए ऊपर आप ही के लोगों ने बताया वो जेल धाम है एक अमित दास जी आए थे वो बोले थे जेल धाम वाले लोग ऊपर आए देखिए आज कितनी अच्छे से बात हुई कोई हुआ क्या क्योंकि व्यक्ति ने कट टू कट बात की अगर थोड़ा बहुत इधर उधर हुआ भी तो समझाने पर आ गए विषय पर ईश्वर लीला क्यों करता है ईश्वर सृष्टि क्यों बनाता है यह उसका स्वरूप भूत लक्षण
01:39:01:15 है सृष्टि बनाना लीला करना उसका सब स्वरूप भूत लक्षण है ईश्वर के लिए कुछ भी आवश्यक नहीं है क्या जो कबीर जिसको आप मानते हैं जिसको आप कबीर मानते हैं वो जब सृष्टि बनाता है तो उसको दिक्कत होती है कोई परेशानी होती इसलिए सृष्टि बनाता है क्या कमी होती किसी चीज की नहीं व आपके अनुसार भी वह उसका स्वरूप भूत लक्षण है वह ईश्वर ईश्वर इसीलिए है क्योंकि वह ऐसा करता है अगर हम यह कह देंगे कि वो क्यों बनाता है तो उसका ईश्वर होना ही सिद्ध नहीं होगा फिर हमारा प्रश्न गलत हो जाएगा कि ईश्वर लीला क्यों करता है ईश्वर सृष्टि क्यों बनाता
01:40:00:12 है पहले ईश्वर तो सिद्ध करो उसे बिना सृष्टि बनाए बिना सृष्टि बनाए ईश्वर को ईश्वर सिद्ध करो हां जी नीरज जी अब आपका ठीक आ रहा है आपका [संगीत] नाम तो स्क्रीन पर आ ही रहा होगा सर नीर शर्मा जी मैं संत रामपाल जी महाराज का शिष्य हूं
01:40:40:01 अच्छा जी आप ही के पास से कानपुर से आप लखनऊ से हैं हां तो आप तो यही आ जाते चर्चा होती लखनऊ में
✅ This part is already used · 01:40:57:14 – 01:44:05:27 (3:08)
→ Used in: A · Video भागवतानंद का निगमानंद पर प्रलाप । इस्कॉन व रामपाल जैसी संस्थाओं द्वारा प्रशिक्षण at 58:34 ↗
→ Used in: B · Video रामपाल को शास्त्र सम्मत कहने वालों के गाल पर जोरदार तमाचा at 8:20 ↗
01:40:57:14 मैंने कल भी आपकी एक डिबेट सुनी थी जिस सं संत रामपाल जी महाराज के शिष्य से आप सवाल पूछ रहे थे कि क्या गीता को आप पूर्ण तरह से पूर्णत सत्य मानते हैं वेद को आप पूर्णत सत्य मानते हैं प्रमाण रूप में या नहीं अगर उसकी कुछ बातों को आप सत्य मानते हैं तो फिर वह प्रमाण कैसे तो शिवांश भाई संत रामपाल जी महाराज को कोई जरूरत नहीं थी वेद और गीता को खोलने की या 18 पुराणों को खोलने के मैं इसको चालू करने से पहले आपसे पहले परमा प्रमाण की परिभाषा पूछ रहा हूं प्रमाण का अर्थ क्या है प्रमाण का अर्थ जिससे सिद्ध किया जाए जिसे ये सिद्ध कर दिया जाए प्रमाण का अर्थ य है अगर हम किसी चीज को प्रमाण मानते हैं तो तो उसको हम कहीं पर भी उस पर डाउट नहीं कर सकते उसकी सारी चीजें हमारे लिए सत्य है आपके लिए संत रामपाल की जो वाणी है वो प्रमाण है कि नहीं बिल्कुल वाणी उनकी प्रमाण है एक एक वाणी प्रमाण प्रमाण है अब क्या हम उसम बुद्धि रख सकते हैं क्या इसकी भी कोई बात गलत हो सकती
01:42:12:14 है ना मानने योग हो सकती है नहीं हो सकती तो ऐसी बुद्धि अगर है आपकी किसी ग्रंथ में वो ग्रंथ आपके लिए प्रमाण अगर ऐसी बुद्धि नहीं तो जिस बुद्धि के आधार पर आप ये जांच कर रहे हो कि इसमें कहां सही है कहां गलत है वो बुद्धि प्रमाण है वो ग्रंथ आपके लिए प्रमाण नहीं है ठीक है देख जब आप ये कहते हो यह बात क्यों उठाई मैंने जब आप ये कहते हो कि हम जो है शास्त्र सम्मत भक्ति बता रहे लोगों को समझना मेरी बात जी तो और हम लोग शास्त्र सम्मत भक्ति नहीं कर रहे हैं मगर आप भी शास्त्र समत भक्ति नहीं कर रहे हो आप रामपाल जी स भ कर रहे हो या आपकी कोई सूक्ष्म वेद होगा उसके समत भक्ति कर रहे हो मगर शास्त्र समत भक्ति आपकी भी नहीं है क्योंकि आप भी कुछ चीज अपने मन से डिसाइड कर रहे हो यहां से रामपाल दास जी के अनुसार या कबीर वाणी इत्यादि के अनुसार आप भी डिसाइड कर रहे हो अपने मन से तो आपका यह कहना गलत हुआ कि आप शास्त्र सम्मत भक्ति दिखा रहे हो गीता वेद पुराण अगर आपके शास्त्र शिवांश भाई मैं यह जानना चाहता हूं शिवांश भाई मैं यह जानना चाहता हूं कि शास्त्र कितने हैं एक चीज क्लियर कर लीजिए पहले अच्छा ठीक है क्लियर की आप
01:43:27:18 आपकी भक्ति शास्त्र सम्मत है कि नहीं है इसीलिए तो मैंने आपसे य सवाल पूछा था कि क्या आप य बताइए कि शस्त्र आपकी है आपके अनुसार कौन कन से शास्त्र प्रमाण है प्रमाण जसे रामपाल जी की वाणी श जैसे रामपाल जी की वाणी प्रमाण है वैसे ही कौन से शास्त्र आपके ये प्रमाण है हमारे लिए अगर आप अगर आप शास्त्र की बात करें तो हमारे लिए सिर्फ एक ही है जो प्रमाणित है कबीर सागर या कबीर साहब से रिलेटेड जितने भी ग्रंथ
⬜ Not used yet · 01:44:05:27 – 01:47:58:09 (3:52)
01:44:05:27 है वो रिलेटेड है भया ठीक है बहुत बढ़िया न हो एक बार एक बार और बो सु हमारे लिए सिर्फ एक श प्रमा साग प्रमाण है कबीर सागर कबीर सागर कबीर सागर कबीर सागर प्रमाण है और सुनिए शिवांश भाई अगर आपने इस बात को मनवा लिया है हम मानने के लिए तैयार है और है इसलिए मानने के लिए तैयार है अब आगे सुनिए आप कि संत रामपाल जी महाराज को कोई जरूरत जब कोई जरूरत नहीं थी वेद और गीता में घुसने के लिए नहीं क रहा मैं उन आरोप नहीं लगा रहा कि आप क्यों घुसे शास्त्र में मैं आरोप नहीं लगा रहा अब बात अब बात य आती है कि जब आपके लिए शास्त्र एक ही शास्त्र प्रमाण है कबीर सागर और वो हमारे लिए प्रमाण नहीं है इतना तो मानोगे हमारे लिए आपका कबीर सागर प्रमाण नहीं है आपके लिए जी ये प्रमाण नहीं है ठीक है जी तो अब हम लोग शास्त्र से बात ही नहीं कर रहे नहीं नहीं सुनिए तो पहले अब आप एक बात बताइए डिबेट में डिबेट में डिबेट में दूसरा पक्ष बात रखेगा या नहीं या सिर्फ आप अपनी ही बात रखोगे रखिए रखिए बात रखिए अपनी कभी भी संत रामपाल जी महाराज को मैं बात पूरी कर लूं उसके बाद आप बोले तो मेहरबानी होगी
01:45:21:02 वरना मैं डिस्कशन को मैं ही बीच में छोड़ दू क्योंकि मैंने जो है आपको देखा है कि आप डिस्कशन में निकाल देख बात कर तुरंत हंगा व्यर्थ की बात म कर व्यर्थ की बात कैसे हो सकती ठीक ह रहा ठीक है हटाना पड़ेगा इसलिए इसलिए मुझे हटाना पड़ता है अब यहां पर क्या बोलेंगे य सारी चीज बोल कर के चले जाएंगे और फिर इसकी कटिंग करेंगे विषय पर रहिए बात को दूसरी बातों को य मत बोलिए अपने चैनल पर
01:46:02:20 बोलिएगा चले गए ठीक है हो गया आज इनका जय जय हो गई संदीप जी हा जी जय श्री जय श्री राम आज इन्होने खुल के कह दिया कि हमारे लिए गीता वेद पुराण जो है वो प्रमाण नहीं है हमारे लिए एक ही प्रमाण है कबीर सागर बताओ इनका कितना कितना बुरा हाल है इनका इसका मतलब हैय अगेंस्ट है सारे मतलब इसका मतलब फिर तो इनसे बात ही करके फायदा नहीं फिर गीता ऐसा ना मेरे को तो ऐसा लग रहा है इन लोगों पर केस डालना पड़ेगा कोर्ट के अंदर जिस से य लोग छेड़छाड़ करते हैं ना कोर्ट में केस डाल के इनको वहा घसीट के वहा इनका काम करना पड़ेगा मेरे को ऐसा लग रहा है अब इसकी हम इसकी ल एंगे जो इन्होने दो बातें बोली है आज एक व्यक्ति ने बहुत अच्छा काम किया बोला ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है जी जी जी जी जी ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है जी वो है ही है उसम अनली है नीर जी आपको आना है आपको आना है नीर
01:47:18:09 जी व्यर्थ की बातें ना बोलिएगा व्यर्थ की बातें छोड़ नहीं नहीं हमने हमने कौन सी वने चैनल प जाके खूब बोलिएगा कि आप ऐसा करते वैसा करते यहां प मत बोलिए आप विषय की बात करिए जैसे कि अभी अभी हम आपकी बात सुन रहे थे कि ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है उन भगत जी ने साब अभी हम लोग बात कर रहे थे कि आप कबीर सागर को प्रमाण मानते हैं बिल्कुल मानते हैं वो बात प आइए वहां से चालू करिए ठीक है उसी बात से हम चालू करते हैं कि जिस तरीके से संत रामपाल जी महाराज को कोई भी जरूरत नहीं थी वेद गीता और पुराण को उठाने की लेकिन कबीर सागर के अंदर जब कबीर जी खुद क्लेम कर रहे हैं कि
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→ Used in: A · Live तत्वदर्शी पर सनसनी खुलासा #rampaljimaharaj #kabir #exposed at 1:23:37 ↗
01:47:58:09 वेद मेरा भेद है पर मैं ना मिलू वेदन के माही जोन वेद से मैं मिलू
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01:48:03:26 यह वेद जानते ना कबीर साहब खुद इस चीज का क्लेम कर रहे हैं कि वेद मेरा भेद है वेद मेरा ही भेद बताते हैं कि उस वो परमात्मा उस सनातन यानी शाश्वत लोक से रिपीट कर रहे हैं आप अगली बात बोलिए आपने एक बार बोल लिया भेद मेरा भेद है आप अगली बात बोलिए रिपीट मत करिए सुनिए हां कि वो परमात्मा सतलोक से सह शरीर चलके बालक रूप में एक कमल के पुष्प पर मिलता है दंपति को और उसके बाद जो परवरिश की लीला होती है वह कुंवारी गाय के दूध से होती है यह वेद में प्रमाण है इस चीज का अब आप मंडल नंबर पूछे या भा साहब देखिए प्रमाण आप उस चीज को कहिए प्रमाण आप उस चीज को कहिए जिसे आप पूरा स्वीकारें जो आपके कबीर सागर सेती है जो ये सनातनी नहीं मानते हिंदू नहीं मानते कि जो कबीर सागर से मैच खाएगी वेद की केवल उतनी बात माननी है यह आप मानते हैं यह हम पर मत थोप हम नहीं मानते यह कबीर सागर में कबीर साहब कह रहे हैं कि वेद कते ज कबीर सागर मानती होगी हम नहीं मानते
01:49:19:06 हमारे लिए प्रमाण वेद है वेद आप के लिए प्रमाण है तो ठीक है वेद में अगर यह लिखा हुआ है कि उस शिशु की जो लीला होती है वह कुंवारी गाय के दूध से होती है और वो कवियों की तरह भूमिका निभाता है तो आप मुझे ये बता दीजिए कि वो कौन हुए ब्रह्मा विष्णु महेश राम कृष्ण गणे कोर ठीक है अब मैं बोलू बोलिए प्रश्न हो गया आपका मैं कह रहा हूं अगर होता क उतर नहीं देते आप क्यों कबीर आपको बात नहीं करनी है समझ गए बात नहीं करनी
01:50:05:24 आपको भैया आइए योगेश जी इनको हटा दीजिए इनकी आवश्यकता नहीं है भाई देखिए मान लिया वेद में प्रमाण नहीं है कबीर भगवान है यह कबीर को प्रमाण ये वेद को प्रमाण नहीं मानते हैं यह वेद का उपयोग करते हैं अपनी कबीर वाण को सिद्ध करने के लिए दूसरी बातों को य मत बोलिए अपने चैनल पर बोलिएगा चले ग ठीक है यह कहां से आ रही है
01:50:43:00 आ आपके य चल रहा है क्याय योगेश जी शायद यही से आ यही से आवाज को आवाज जी को हो रहा है बताइए आपका परिचय जय श्री राम बोलिए श्री हरिवंश ज श्री हरिवंश मे को इतना ही कहना था कि रामपाल वाले नहीं मानेंगे इनको सिर्फ कबीर वानी चलाना और मनना नहीं है हमें उनकी बात बाहर लानी है उन्होंने कहा वेद और वो हमारे लिए प्रमाण नहीं है अब वो हमारे धर्म ग्रंथों से जिनको वह खुद प्रमाण नहीं मानते उनसे वह बात दिखाएंगे जिससे उनका कबीर वाणी सिद्ध हो रही हो हम क्यों माने भाई कि वेद की केवल उतनी बात माननी है जितनी बात कबीर से मैच खाए क्यों माने हम यह भी तो देखेंगे कि शिव जी को क्या कहा गया ब्रह्मा जी को क्या कहा गया अगर तुम कवि का अर्थ परम ले रहे हो तो कवियों का कवि गणपति कहा गया इसको छोड़ देंगे क्या अगर दो जगह
01:51:58:12 दो तरह की स्मृति है अभी मैंने दिखाया अगर दो स्मति है दो स्मृति है तो उन दोनों को मानना पड़ेगा धर्म आप एक को भी काट नहीं सकते तो हमें ज्ञान देने तब आना वेद और पुराण का गीता का जब आप एक चीज को भी काटो नहीं फिर देना ज्ञान इनका एक ही प्रमाण है आखरी रामपाल और कोई प्रमाण हां प्रमाण रामपाल है हमसे कहते हैं शास्त्र समत भक्ति और जब इनसे पूछोगे तुम्हारी चीज कैसे वो कबीर सागर से वो सागर जो हमने कभी देखा नहीं जो हमने कभी पढ़ा नहीं हमें उससे कोई मतलब नहीं है अरे ठीक है भैया तुम अपनी कबीर वो कबीर सा सागर समत भक्ति
01:52:43:02 करो अमित जी दोबारा जो पहले एक बार आ चुके हैं आपको आना है ऊपर दास जी नहीं आना है तो क्यों जवाइन किया है जवाइन क्यों किया है फिर विश्राम सारण जी अपना चेहरा दिखाए जी योगेश जी आप कुछ कह रहे थे बताए मैं कह रहा था कि इनका सिफ एक ही प्रमाण आखरी राम पर और कुछ नहीं है बस यही बता र और नाटक करते हैं कि हम वेद को प्रमाण मानते हैं हां नाटक वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है भाई जब यह हो गया कि आप वेदों को प्रमाण नहीं मानते तो क्या बात कर रहे हो बात खत्म हो गई आप मानो कबीर की पूजा करो हम हमारे पास तब आओ जब वेदों को प्रमाण मानते
01:53:42:18 हो जी हटा लीजिए मैसेज पढ़ लिया होगा जब वेदों में प्रमाण बुद्धि हो सनातनी किसे कहा जाता है जिसकी वेदों में प्रमाण बुद्धि हो प्रमाण बिल्कुल सही बात है सर इनको यह पूछो वेदों में अगर यह वेदों को मानते हैं तो वहां पर तो लिखा हुआ कि परमात्मा अजर है और यह कबीर दास तो बूढ़े बाबा है इनका बाल प रहे यह कल हम पोस्टर ला रहे हैं कबीर जी का बड़ा सा उसको हाथ में लेकर बताएंगे कि भैया बाल सफेद क्यों हो रहे हैं बिल्कुल बिल्कुल सही बात है सर ये मतलब अन्न ससरी घुमा रहे हैं चीज को कभी कहते हैं वो कुछ खाते नहीं है कुछ पीते नहीं है मतलब इवन यहां तक कह देते वो उनको मतलब हकते भी नहीं थे वो ऐसी बेवकूफ वाली बातें करते हैं भाई देखिए देखिए मैं एक बात क्लियर कर दूं हमारी बात ये हो रही थी कि वेदों के अनुसार कबीर भगवान है कि नहीं आप क्यों ताल ठोकते हो आपने कह दिया जितनी बात हमारी कबीर सागर से मैच खाएगी उतनी बात जो है हम वेदों की मानते हैं बाकी नहीं मानते तो बात खत्म हो गई के लिए प्रमाण नहीं है तो क्योंकि हम आपको दिखाएंगे
01:54:57:18 गणपति भगवान है मना कर देंगे आप संदीप जी आप जो है लाइव में तब आइए जब आप गाड़ी रोक लीजिए कहीं प तो जी आगे बो मेरे को सवाल पूछना कि इनका जैसे राम कुछ खिला देता है तो इनका बुद्धि काम करना बंद कर देते है इनका कुछ हो सकता है नहीं नहीं वो व्यक्तिगत आरोप मत लगाइए वो सब बातें हम नहीं करते वो क्या करते क्या नहीं करते छोड़ वो सब व्यक्तिगत है वो कैसे होता है क्या होता है वो ठीक
01:55:37:10 है भाई अभिषेक वर्मा नाम का कोई अभद्र कमेंट कर रहा है उसका जो है समय उसको जो है डिलीट कर दीजिए रिमूव कर हाइड फ्रॉम चैनल कर दीजिए उल्टे सीधे वो कर रहा है हां ठीक है जी बताइए गश जी ठीक है आज एक बढ़िया चीज हुई है अब कभी और कोई व्यक्ति आएगा तो अब वेद पुराण उस पर बात नहीं होनी है वो यहां ये लिखा वहा वो लिखा है अरे भैया एक बात नहीं मानोगे दूसरी मानोगे और उसका आधार क्या है मालूम है कबीर सागर भी आधार नहीं है उसका उसका आधार है सिंगल पॉइंट एजेंडा रामपाल दास जी कबीर सागर में भी जो बात होंगी रामपाल जी के विरुद्ध वो नहीं मानेंगे अभी कह दिया उन्होने कि हमारे लिए वो प्रमाण है उसमें भी कुछ बातें ऐसी निकल आएंगी जो इन्हीं के विरुद्ध हो
01:56:49:24 जाएंगी इनको यह बात मालूम है ना कबीर सागर में प्रमाण है कबीर भगवान है बोलेंगे तो हमसे कोई नहीं जुड़ेगा जब हम हाथी पर बैठ के चिल्लाए गे वेदों में प्रमाण है हमारी शास्त्र सम्मत भक्ति है जबक मनम कीी भक्ति है गीता में क्या सही है क्या गलत है कैसे डिसाइड करेंगे हम डिसाइड करेंगे अपने मन से वेदों में क्या सही है क्या गलत है कैसे डिसाइड करेंगे अपने मन से डिसाइड करेंगे गीता में ही लिखा है तेरे लिए धर्म और अधर्म के विषय में एक मात्र शास्त्र प्रमाण है तो अगर आप ये कह रहे ज्ञान से ज्ञान को काटेंगे तो लिखा लिखा दिखाओ शास्त्र में आप एक ज्ञान के आधार पर अपने मंसूबों का महल नहीं बना सकते आपको समस्त समस्त जितनी भी बातें उसम कही गई है उनका निजोर निकाल करके तब अपनी बात को रखना
01:57:50:01 है चक्र पानी जी तीसगढ़ से जय श्री राम आज का नजारा आपके लिए अच्छा होगा जय श्री राम मैं दो तीन दिन से लगातार देख रहा हूं आज का बहुत अच्छा है आज का बहुत अच्छा था आज निष्कर्ष प्राप्त हुआ है जी जी जी जी अच्छा लोग यह लोग क्या है ना यह लोग कुछ लाइनों को य लोग रटे हैं इन लोगों का मूल ग्रंथ क्या है कि जो वीडियो है य वगैरह है उसमें जो लाइन है ना बस उनको रटे हैं इसके आगे कुछ नहीं जानते जन गंगा इनको हा इनको यदि बताया जाए कि भगवत गीता तुमने कितनी बार पढ़ा है तो व इस चीज को नहीं बताएंगे वह जीवन में कोई भी मैं तो चैलेंज करहा करता हूं कोई भी इनका जितने भी शिष्य होंगे है ना तो वह कोई भी भगवत गीता को नहीं पढ़ा होगा आज मैंने इनका एक न्यूज चैनल देखा एमपी पा जी जी
01:58:56:01 उसम सब्सक्राइबर्स है करीब डेढ़ लाख जी जी और व्यूज आते हैं वीडियो पर आज मैंने देखा था एक दो एक दो दिन हो चुके हैं वीडियो को व्यूज आए थे उसमें डेढ़ दो हजार अच्छा हा जी जी अब बात ये है कि उसमें कोई वो भी मेरे बारे में चर्चा कर रहे हैं वहां प ऐसे ही लाइव अब उसमें क्या कर रहे हैं कोई व्यक्ति यहां से कुछ जान करके वहां गया प्रश्न करने जी जी कोई व्यक्ति यहां से जाना जी जी जी कि भाई शास्त्र में कोटि रुद्ध समता में शिवजी को भी महाकाल कहा गया है अब वो कह रहे हैं कि शिवजी अलग है काल अलग है ठीक है व अब उसको भी काल कहा गया शिव जीी को उनको भी कहा गया महाकाल कहा गया तो जब उसने पूछा कि यहां तो ये हो रहा है वो हो रहा है तो बिना किसी वो कोई बात भी नहीं थी झगड़े भगड़े की जैसे होता है ना कि माहौल गर्म हो गया तो हटाया जाता है वो कुछ नहीं वो ऐसी कोई वो बिना बिना बोले धीरे से धीरे से को आदमी वहा से गायब हो गया जो बोल रहा था महाकाल क्या बोले अच्छा व एक आदमी
02:00:11:01 है जो मतलब वही बोलता है एक भाई साहब कह रहे हैं कि रामचरित वाला क्लियर कर दो मैं सो मैं क्लियर है मगर हम इसको किसी कबीर पंक्ति के समक्ष क्लियर करेंगे इसलिए अभी रोका हुआ है अभी इसको ओपन कर देंगे ना तो फिर उस दिन व आनंद नहीं प्राप्त होगा आपको तो अभी और रुक जाइए आने दीजिए किसी ना किसी दिन वो मामला खोलेंगे रामचरित मानस वाला हनुमान जी वाला जी चक्र पानी जी अच्छा मेरा एक थोड़ा विचार यह था कि जैसे यह लोग वीडियो बनाते हैं ना कि वो दिखा करके यह पेज में यह लिखा हुआ है तो आपकी तरफ से उसी का प्रतिकार जो श्लोक में उन्होंने यह बताया उस प पिछले कुछ आप देखिए उसम यही चल रहा जी जी उसम शर्ट्स में जो बैकग्राउंड म्यूजिक दिए हैं आप बहुत ज्यादा मतलब क्योंकि उससे लोग थोड़ा सा इरिटेट हो जाते हैं तो जो मूल बात है जो हम बता रहे हैं या इंडिकेट कर रहे हैं उसका साउंड ज्यादा रहे बैकग्राउंड ठीक है अपनी जगह तो मैं एक बार ऐसे मैसेज भी किया था थोड़ा बैकग्राउंड ज्यादा है उसको
02:01:26:03 स्लो किया जाए अच्छा दूसरा चीज हा दूसरा चीज जो स्पीड से बिल्कुल दिखा देते फटाफट फटाफट तो वो भी नहीं मतलब आराम से मि एक मिनट की सीमा है ना वहां अच्छा एक मिनट की सीमा में यही दिखाना या तो फिर पूरा वीडियो बनाना पड़ेगा सब टाइम मेहनत सब टाइम टाइम ज्यादा लगेगा ओके ओके भाई कोई आना चाहता है रामचरित मानस वाले मामले पर बात करने के लिए देखिए कबीर सर्वशक्तिमान नहीं है आपकी दीक्षा शास्त्र सम्मत नहीं है आपका जो तत्वदर्शी का चयन है वह शास्त्र सम्मत नहीं है और आपका गीता में ज्ञान को काटना यह शास्त्र सम्मत नहीं है मनम है सब यह सब तो सिद्ध हो गया और हां ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है आपका व्यक्ति बोल गया अब बात आती है कि कोई आना चाहता है वो रामचरित मानस वाले मामले पर जो अभी उठाया गया है कि हनुमान जी का जो चेहरा देख लेता है वह जो
02:02:31:01 है हा अनिल कुमार जी जय श्री राम जय श्री राम जी बससे ही मैंने कि काफी दिन से मैं भी आना चाह रहा था ना लाभ के लिए मैं आज मैं मौका मिल गया मैं भी फिर आ गया अच्छा मैं ये कहना चाह रहा हूं
02:03:06:27 जी अरे भाई यह देखो रामपाल जी के पास पवित्र ज्ञान है इसलिए उनके ज्ञान से कट जाता है जब कबीर साहब जी अब के आप मूल ज्ञान चर्चा करेंगे तब सारी दुनिया ज्ञान समा जाएगा अरे भाई ये तुम मानते हो हमारे लिए प्रमाण नहीं है रामपाल हमारे लिए हमारे शास्त्र प्रमाण है यह आप मानते हो हमारे कोई आचार्य ऐसे नहीं है जो गीता वेद पुराण में से कहते गलत है वो गलत है अगर कहेंगे तो हमारे आचार्य नहीं है समस्त सुति स्मति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा देने वाला आचार्य है साधु सम्मत धर्म है मत्स पुराण में लिखा हैय जी अनिल कुमार जी बोलिए मैं य कहना चाह य लोग है ना रामपाल वाले पता नहीं कहां से ज्ञान पता नहीं से लाते है इनकी
02:04:09:10 आ अच्छा मैं एक बात जरा कह दू हमारे विभिन्न प्रकार के प्रकल्प चल रहे हैं जो हमें इन प्रकल्प में जैसे स् में सप्शन लेना है जो हमें इन प्रकल्प में मदद करना चाहे आर्थिक तौर पर या हमारे जो धर्म रक्षा अभियान चल रहे हैं उनसे जुड़ना चाहे नामा स्त्र से जुड़ना चाहे कक्षाओं से जुड़ना चाहे या फिर वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा करना चाहे नाम जप अभियान जो चला रहे हैं उससे जुड़ना चाहे इन सबके लिए आप हमें व कर सकते हैं ट नंबर है 7483 186 इसपे आप करें मैं जड़ाऊ अच्छा अच्छा आप जुड़े अच्छी बात उसम जुड़ा हूं मैं उसम जुड़ा हूं क टाइम मिलता है तो आ जाता हूं कभी नहीं आ पाता जी जी कोशिश करें निर कल तो आया था लेकिन आज नहीं आ पाया हा जी बताइए आप कोश तो जा रती निरंतर ले जी जी बताइए कता कुछ ऐसी है ना कुछ इनकी गलतिया आपको बता दू आपने ध्यान नहीं दिया हो इनकी गलतियों पर एक जगह है ना जो अध्याय
02:05:24:13 है ना 16 अध्याय में 15 अध्याय में उसमें लिखा है कि पुरुष और जीवा मा के बारे में तो इन लोगों ने क्या कर रखा है उसमें जीवात्मा जो पुरुष है ना जिसमें दो तरह के जीव है एक पुरुष एक प्रकृति तो उन लोगों ने क्या कर रखा उससे उस जगह पर भगवान बोल रखा है अब ये बताओ पुरुष अगर जीवन भगवान हो गया ये भगवान कौन है आपने साद उसमें ध्यान देना कि इनकी इनकी जो मिला के देखोगे आप तो आपको कुछ समझ में आ जाएगा कि इन लोगों ने क्या कर रखा है और एक आपको और बता दूं हमारे यहां एक लेडीस है जो मतलब इसी में रामपाल वाल में जुड़ी हुई है तो उन लोगों क्या कर रखा है उनको ऐसे भ्रमित कर रखा है और कि उनके है ना जब उनके सत्संग में जाते हैं ना मिलने जाते हैं ना तो उसम उन लोगों के ना बीच तरवा जाते है
02:06:23:19 जो स्त्री का स्वाग होता है ना तोव ना उसम जाते हैं तो बीच उतरवा जाते लोग समझ नहीं आती है कि य तो हमारा व्यक्तिगत संबंध है ना ये कहना चाह रहे हाथ के कय वो चीज संध है सिंधूर सिंदूर वगैरह लगाना मना कर देते हैं संबंध है एक चीज बताओ मिला वही रक्षा बंधन कर रखा है कि भाई बहन का संबंध है ना इसको रक्षा बंधन में उसको उसको रामपाल जी को मानो उनको रक्षा बंदर पहनाओ रक्षा का उसका राखी का पहनाओ अब एक चीज बताओ अब हम आप है ठीक है अब हम आपको एक चीज एग्जांपल दे रहा हूं अब आप है हम है ठीक है तो हम आपको एक के मैं आप मेरे को एक थप्पड़ मारो तो हम आपस में तो एक नि करेंगे कि अभी आपस में समाधान करेंगे और वो होता है बहन भाई के संबंध बहन भाई एक रक्षा के लिए उसको रक्षा बंधन उस राखी बांधती है ये लोगों ने क्या कर रखा है उसको रामपाल जी को राखी रामपाल जी को राखी बा पता नहीं कहां
02:07:38:19 कहा से क्या कर और उतरवाना सीधा सधा इस बात का दतक है कि वो अब्राम जो आचरण है उसमें ले जा रहे हैं सात आसमान पर बैठता ही है है ना एक जगह बैठ के दुनिया को ऑपरेट करता ही है ईश्वर ब्रिक हो रहा है मामला अरे वो वो ये भी चाहते हैं कि जो मुस्लिम धर्म के लोग हैं वो लोग भी इस चीज को थोड़ा सा फॉलो करें देख ये जो है इनका आ रहा है रामपाल की शिक्षाओं में ने बहू को कर दिया नास्तिक परेशान परिवार बागेश्वर दरबार की दरबार में पहुंच गया इसको देखा आपकी आवाज कट रही है जी संदीप जी आप बोले जी जी सर पता क्या है इनके दिमाग ना इस तरीके से हैक हो रखे हैं जैसे दुर्योधन का दिमाग हैक नहीं सामने श्री कृष्ण जी भी आ गए तब भी उसको पता लगा इनका दिमाग इस तरीके से हैक हुआ बड़ा कुछ तो लोग इनम से निकल गए हैं जैसे जैसे हम लोगों के प्रयासों से आप लोगों के प्रयासों से ना कई लोग इनके चंगुल से निकल भी चुके हैं ऐसी बात नहीं कई हमारे पास फ प आते हैं कई लोग निकल चुके हैं उन्होंने ना मिलान किया भाई साहब एक ये दया नाम
02:08:53:26 से एक कमेंट कर रहे हैं अवद्र है ये आर्य समाज जीयों के बारे में इनको हटा दीजिए रिमूव कर दीजिए गलत बातें बोल रहे हैं आर्य समाज के बारे में इनका ना दिमाग इस तरीके से हैक हुआ पड़ा है कि ये ना इनकी सोचने समझने की क्षमता खत्म हो चुकी है इनको ना कसमें दे रखी होती है जब ये जाते हैं ना वहां पे तो इनको कसमें देते हैं जैसे भी कसमें दे दी तुमने तुम्हें इसकी कसम है उसकी कसम है तुमने इनके खिलाफ बिल्कुल नहीं बोलना तो इनका माइंड ऐसे ब्रेन वश कर देते हैं जैसे आप देखते हैं ना दूसरे उसमें करते हैं ब्रेन वॉश कर देते तो जाकर वो जाकर क्या कर देता है बन जाते है कई बार उस तरीके का इनका माइंड मेकप कर रखा हैसा सिस्टम बना हुआ है आज वडियो देखा था कि आपकी जरा सी भी मेरे प्रति मेरी बातों में जरा सी भी अगर शंका बुद्धि हो गई तो इसका मतलब समझ लो काल आ गया है रेस हा काल आ गया और अब तुम्हारा जो मोक्ष नहीं हो सकता तुम फस जाओ जरा सा भी सोचना म प्रति गीता के प्रति सोचो वेद के प्रति सोचो मेरे प्रति मत सोचना जेल धाम सोचना अगर मैं जेल में रह तो बिल्कुल सही बो बता जी जी इनका ब्रेन बहुत तगड़ा अरे किया जाता है
02:10:10:25 हेलो एक एक वाकया हुआ है एक इन्हीं का राम भक्त का रामपाल का ही भक्त था उसके पिताजी जो है शित नहीं थे और वह मरणासन की स्थिति में थे तो वो लोग उनका परिवार लगा हुआ था कि यह दीक्षा ले ले अगर यह दीक्षा ले लेंगे तो इनकी जो है मृत्यु के बाद फिर से इनको जो है मानव शरीर मिल जाएगा इतना पावर है दीक्षा में उनकी अपनी पावर खतम हो रख मतलब गजब का ये लोग जो है ऐसे
02:10:49:09 अ एक दे दूं कि एक बार आपने देखा हो एक सीरियल चाणक्य नहीं चाणक्य नीति उसमें क्या करता है जो अशोक सम्राट है ना तो एक टाम है ना ऐसा फस जाता है तो उसको है ना जब धनानंद के ऊपर आक्रमण करता है ना तो वो सोचता है कि डायरेक्ट आक्रमण कर देता है तो एक बार एक उसकी किसी कुटिया में जाके मां और बेटे ना खाना खा रहे थे तो उसे मां ने उसके लिए खीर बनाई जब वो खीर बनाई है ना तो वो है तो वो क्या करता है गर्म होते बीच में हाथ डाल देता है तो जब उसने मां ने बोला अरे ये क्या कर रहा है ये तो ये तो वो साट से खाना ठंडी कर कर के ठीक है बीच में तो क्यों खा रहा है तो वो उसी चक्कर में वो चाणक वहां पर बैठा था मैं चंद्रगुप्त बैठा था उस चाणक्य ने सोचा ये तो मैं बहुत बड़ी गलती कर रहा हूं अगर मैं है ना चारों तरफ से अगर मैं आक्रमण करूंगा थोड़ा-थोड़ा करके तो तो मैं धन के ऊपर है ना अपना विजय प्राप्त कर लूंगा और बीच में तो लड़ाई लड़ता रहू मैं कभी नहीं चाणक्य को मैं कभी जीत नहीं आस कर पाऊंगा वही इन लोगों ने कर रखा है कि पहले है ना उल्टा सीधा जो है ना भ्रम दूर करो उसके बाद है ना
02:12:04:16 जो है ना अपना धर्म के शास्त्र है ना उनके ऊपर आक्रमण करोगे तो हमारे लिए आसान होगा अगर हम डायरेक्ट किसी का आकम कर देंगे तो नहीं होगा तो वही है ना इन लोगों ने नीति चला रखी है ड़ा छोटा छोटा खत्म करो पहले जो गांव के लोग है ना में उनको पता नहीं होता है व कभी शास्त्र पढ़ते नहीं है उनको पता कुछ होता नहीं क्या करें क्या ना करें मानोगे नहीं मिनट अल जी आप लोग मानो या नाना मानो गुरु गोविंद ग्रंथ की कृपा से इनके जो प्रचलित भोज थे ना नारे उन परे हमने वार कर दिया है जी जी बिल्कुल सही है जैसे इनका एक नारा था वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है अब कोई नहीं आ कर के बोल रहा जी जी हो गए इनका एक नारा आज हमने ध्वस्त किया कि ब्रह्मा विष्णु महेश नाशवान है इन्हीं से बुलवाया ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी तत्व से अविनाशी जी ब सही है है ना इनका एक नारा था कि हम लोग जो है शास्त्र सम्मत भक्ति करते हैं और ये लोग मनमुक भक्ति करते हैं हम लोग अब यही बोल रहे कि हम मनम भक्ति करते हैं हम अपने मन से निर्णय लेते हैं ये इनके नारे
02:13:19:18 थे ये इस तरह के नेटिव चलाए जाते हैं जो बार बार बार बार बोलते रहो तो लोगों के कान में पड़ पड़ के प्रमाण हो जाए हमने उसी पर चोट किया और अब इनका जो है धीरे धीरे वो सारे जो इनके नैरेटिव है वो धूल में मिल गए अभी और भी मिले थोड़े दिन पहले की बात है इन्होंने क्या करा कि जैसे यह जो लोगों को बुलाते हैं ना इन्होंने क्या करा कि रामपाल के कच्छे बनियान उसके गमछे वोने इनको बोल दिया कि हां तुम लोगों ने खरीदने है और अपने ये फोटो फ्रेम करके लगाने हैं मतलब इनको सा
02:13:53:20 नहीं पता सर अब मैं ये है येभी रिसेंट बता रहा हूं ये लगभग पा छ महीने पहले की बात है उसके उसका आपको वो भेजूंगा उस ये पीले पेज के ऊपर ये डालते हैं येलो पेज छोड़िए र वो हमारे पास जब सैद्धांतिक हमारे वो है तो हमें क्या करना है ये अपनी व्यक्तिगत इनका क्या है क्या नहीं है हमारे पास सिद्धांत है उनसे ही हम लड़ेंगे जी बिल्कुल बिल्कुल सही बात है नहीं इससे इनकी काट की जा सकती है ना हम लोग मूर्ति पूजा कर रहे हैं तुम कच्छे पूज रहे हो हम तो तुमसे बहुत बेटर हैं य ये बात है हमें पता नहीं है इस बारे में कैसा होता हैका पीला पेज मेरे पर्चा पड़ा वो भेजूंगा आपको वो देखना उस लिखा हुआ गमछे हमने पूछा तुमने इतने सारे बेच दिए इनको करोड़ों कितने डाले उसने आज तक रामपाल ने इतने इतनी इतनी 70 साल की उम्र में कितने कच्छे डाल लेगा कितने बनिया डाल लेगा बंदा तुमने करोड़ों कच्छे भेज मारे कहां से आए हैं वो और चप्पल चपल के जोड़े अभी हम लोगों ने न चार चैप्टर समाप्त किए एक करके एक करके अभी जितने इन्होने चैप्टर खोल रखे हैं सब पर एक एक करके बात करेंगे मैं कल से शास्त्र के पीछे इसीलिए पड़ा कल बहुत देर मगज मारी करनी पड़ी मगर मैं शास्त्र के पीछे इसलिए पड़ा कि मैं इनसे कबूल
02:15:12:06 करवाऊंगी 50 से 60 पर ध्वस्त हो चुके अंदर सेय अंदर से खत्म हो चुके हैं क्योंकि इसके पा ता नहीं आप शास्त्र से पू बात करते हो इनके पास त्र की अकल नहीं है ये फर्क होता है का आपने तो पीछे सारा सिस्टम रखा हुआ ना अपने पास इनके पास एक ही बुक है बस उसी के पीछे पड़े रहते आप य 50 बुक से एक मिनट में रेफरेंस निकाल देते हो इनके बस की बात नहीं है और जिसने पड़े होंगे वही तो निकाल पाएगा ये बात हो जा चक्र पानी जी आपको मैं संपर्क करने वाला था आप जो है ये जो हमारा ये प्रकल्प है ना थोड़ा सा योगदान में आए स्ट्रीम का चल रहा है एक दो दिन से बोल कल कल हम सुने है तो हमारे दिमाग में है जी जी जी वो रहेगा उसका दिक्कत नहीं जी जी जरूरी भी है सर जरूरी भी है बहुत ज्यादा जरूरी है एक इसीलिए मतलब जो काम करने का तरीका है वो यही है कि एक चैप्टर खोल लिया अब उसको बंद मत करो जब तक वो बिल्कुल क्लियर बाहर ना आ जाए नहीं बिल्कुल सर बिल्कुल हम लोग की वो और रहेगी भी हर तरह से रहेगी कोई कल हमने शास्त्र का इसीलिए छेड़ा उससे खूब एक डेढ़ घंटे मगज
02:16:27:10 मारी करनी पड़ी मगर तब ये समझ में आ गया अब इसको शास्त्र पर ही हम लोग क्लियर आज देखिए वो व्यक्ति आक के ये नहीं बोल रहा हमारे लिए प्रमाण है हमारे लिए पवित्र धर्म ग्रंथ है सद ग्रंथ हैय सब बोलना बंद बोलना बंद हो गए हमारे लिए एक ही धर्म ग्रंथ है कबीर सागर बोल दिया जी जी जी इसका मतलब है इनके लिए बस वो काम चला है ना वही तो लोगों को भ्रमित करने के लिए बो यार कबीर सागर में प्रमाण है और कबीर भगवान है हमारे वेदों में क्या लिखा है क्या नहीं लिखा तुम क्यों बता रहे हो उस दिन बताओ जिस दिन पूरा मानो उसको होते कौन तुम बताने बकुल इसम करेक्ट बात है हमारी बात है भाई हम दे किसे पढ़ना किससे नहीं पढ़ना है इन्होने बना र आप सच के साथ सच के साथ सागर में प्रमाण है और कवीर भगवान है जिसको मानना होगा मान ले हा क्यों बना रहे जनता को जी जी जी वेद गीता की बात ही मत करो ना जब उसमें तुम्हारा नाम ही नहीं है तो फिर किस लिए बात करते हो अरे नाम नहीं है प्रमाण नहीं है और तुम खुद वेद को प्रमाण नहीं मानते तो दूसरे से क्यों कह रहे हो कि तू इसको प्रमाण मान बिल्कुल बिल्कुल जब तुम उसे प्रमाण नहीं मानते
02:17:42:20 तो तुम क्यों कह रहे हो दूसरे को तू इस इस लाइन को जो ये मेरी बताई हुई लाइन है जैसा मैं अर्थ कर रहा हूं उस अर्थ के साथ इस लाइन को तू मान ले बाकी सब लाइनों को छोड़ दे बाकी लाइने छोड़ दे ये तो गलत बात है ना यह बात बिल्कुल सही आपके चलिए फिर आने का सबका आभार और समय देने का भार आज हमने फिर से दो तीन पॉइंट निकाल लिए अभी तक हम लोग इस उस पर कंक्लूजन पर पहुंचे हैं इनका जो दीक्षा चल रहा है वो शास्त्र सम्मत नहीं है मनमुक है वेदों में कहीं नहीं लिखा है कबीर भगवान है कबीर जो है इनके अनुसार जो कबीर है क्योंकि वो स शरीर नीचे आता है और ऊपर भी स शरीर है वो सर्वशक्तिमान नहीं है व और क्योंकि वो क नहीं एक मिनट क्योंकि वह कण कण में नहीं है तो वह सर्वव्यापक रूप से सर्व सामर्थ वान नहीं है और इनका य जो गीता में कहीं की बात को लेना कहीं की बात को ना लेना यह भी इनका मनम है शास्त्र य नहीं बोलते वेद और पुराण गीता य नहीं बोलती कि आपको जितना अच्छा लगे उतना ले लो जितना समझ
02:18:57:21 में ना आए वो मत लो यह कहीं नहीं बोलती बोलती है यदि दो विपरीत बात तो दोनों धर्म है या तो उसको समझ लो या दोनों को ले लो ठीक है जी जी जी जी और क्या है और एक और बात प हम लोग पहुंचे हैं कि शास्त्रों का चयन मनमुक है दीक्षा लेना मन्मुख है और हां एक और कंक्लूजन प पहुंच गए हम लोग कि अ क्या कहते हैं एक कंक्लूजन और है कि इनके लिए वेद पुराण गीता प्रमाण नहीं है यही मुझे बस ये बहुत मैं पिछले दो तीन दिन से मैं इस पर वर्क कर रहा था कि अब इनसे ये मनवाना है कि वेद और गीता पुराण आपके लिए ठीक है ठीक है गीता वेद पुराण आपके लिए जो है वो नहीं है इसका मतलब है ये लोग अधर्म के रास्ते पे हैं हां कोई आना चाहता है सिद्ध करने अब देखो शास्त्र की बात तो रह नहीं गई ठीक है अब अब जो असली पावर है ना क्योंकि शास्त्रों में आप भटका होगे इधर करोगे उधर करोगे उधर ये वो करोगे अब जो असली सार्वभौम
02:20:12:21 सिद्धांत है अब उस परे बात होगी आ जाओ कबीर को सर्वशक्तिमान सिद्ध कर दो बस बिल्कुल बिलकुल सही बात है बिल्कुल रामपाल की ज्ञान गंगा के अनुसार रामपाल वालों की जो ज्ञान गंगा पुस्तक है उसके अनुसार कबीर को ईश्वर सिद्ध कर दो सर्वशक्तिमान सिद्ध कर दो आ जाओ बिल्कुल उनकी कला कलाए गिनाए कलाए कितनी कलाए थी उनके अंदर वो भी गिनाए हमारे को व क कोई तो होगा जिसने इतना ग्रहण किया होगा निष्ठा पूर्वक जी जी जी
02:20:51:25 नास्तिक बाद का खंडन कर दो जो धर्म आप मान रहे हो कबीर सागर का उसको शाश्वत सिद्ध कर दो और कबीर सागर के ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध कर दो आ जाओ जी बिल्कुल सही बात है आ रहे क्या आना है आना है आना है हा बोलिए मैं ये कहना चाह रहा हूं कि संत रामपाल जी महाराज ने सबका ब्रेन वस कर रखा है आपने कहा सबका ब्रेन बस कर रखा है भाई मेरे अभी हमारा चैप्टर यह है आपसे हम यह बात करेंगे कि क्या रामपाल दास जी के अनुसार परिभाषित होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं बस बाकी बात कर लेे मैं वेद का ना वेद की बात कर रहा हूं ना ही मैं जो सदियों से सतयुग द्वापर से जो आज तक पंडितों ने नहीं रेन बस कर पाया वह एक क्षण में रामबास जी महाराज में ऐसा क्या था जो उन्होंने कर दिया ऐसा कुछ नहीं
02:22:03:15 है भैया पंडितो ने शुरू से ही आप जाइए भैया आप जा सकते अगर सीता माता का अप ण हो गया तो राम जी जो है निर्बल हो गए है ना सीता माता का अगर अपरण हो गया तो राम जी अपरण हो गए अब मैं पूछ रहा हूं कि रामपाल जी जेल चले गए तो क्या रामपाल जी निर्बल हो गए लीला लीला कहोगे ना अपनी बारी आने पर वो बात नहीं करोगे कि कबीर भगवान है उसम फस जाओगे फिर आ जाती इनकी 600 साल हो गए आपके कबीर को आए हुए और कितन कहां तुमने बदल लिया क्या बदल लिया बताओ जी जी देश का प्रधानमंत्री तुम्हें मानता है क्या जिस कोर्ट में बेल के लिए अप्लाई करते हो वो मानता है क्या कोर्ट आपको भगवान बिल्कुल सही बात है ग आपकी ताकत करो कंट्रोल उनके ब्रेन को इसलिए कहता हूं व्यर्थ बातें ना करो फिर उसम ढोल
02:23:18:24 का पोल निकल आएगा वोह उदाहरण देते हैं कि भगवान कृष्ण भी तो जेल में पैदा हुए थे तो मैं उनसे यही कहता हूं कि वो जो छोटे बढ है जिस जेल में पैदा हुए थे उस जेल को कंट्रोल करने वाले को मार दिया था जी जी जी में पैदा हुए थे तु मार दो क मारोगे बताओ सर वो तो सेकंडो के लिए आए और सेकंड में निकल गए इनको स्पेशल घर से निकाल के व डाला ये नहीं समझ में आता नहीं मैं कह रहा हूं जिस जेल में वो जन्म ली जिस जेल में वो जन्म लिया था उन्होंने उस जेल को जेल का जो नियंता था शासक था उसको मार दिया था बिल्कुल मार दिया आप क्यों नहीं मार देते आपके अंदर नहीं है क्या पावर व मारना क्या एक सिपाही से वहां नहीं लड़
02:24:17:27 पाए जेल के नहीं लड़ पाए किताबों में तोन उड़ने की आपको भाई साब मैं तो यह भी कहता हूं कभी कभी लोग जो है चमत्कार को नमस्कार करने लगते हैं कल एक व्यक्ति आया वो बोला कि उन्होने मरे हुए को जिंदा कर दिया था अभी आप भक्त माल उठा लो भक्त माल ले आओ इतने संतो के इतने चमत्कार है कि पूछो नहीं मान लो भगवान हम हम तो यह कहते कि मान लिया तुम्हारे जो जिसको तुम भगवान उसम चमत्कार है मगर नहीं लिखा है चमत्कार जो करेगा वो ईश्वर होगा एक ना इन्होने एक नकली कहानी बना रखी उन्होने भैसे से मंत्र बुलवा लिया है ना हमने श्री राम जी ने कितने कितने करोड़ों वानर के बुख से जय श्री राम निकलवा दिया उससे ऊपर बात करो राक्षस के जय श्री राम निकलवा दिया उस बात करो नहीं नहीं कुवारी कबीर दास जी कबीर दास जी कुवारी गाय का दूध पिए हैं वो तो न क किया हु तो एक एक से कहानी अब यह जो कहते हैं कि कुमारी गाय का दूध पिए यह ठीक है इन सब
02:25:32:28 पर हम काउंटर कर सकते हैं सर दूध पीना जो है क्या मैं तोय क अगर कबीर जी के अलावा किसी और ने भी कुमारी गाय का दूध पी लिया तो कुत्ता बिल्ली भी पी सकता है दू उसम क्या दिक्कत है दूध पीने में क्या दिक्कत है कुत्ता बिल्ली प सकता है नहीं ऐसा तो भाई ऐसे तो गोरखनाथ जी भी जो है भैसे जो है मंत्र बुलवा दिए थे तो गोरखनाथ जी को भगवान बोल दिया जाए प्रमाण देंगे देखिए वो आपसे अपनी बात तो मनवा लेंगे देखो देखो ऐसा हुआ हम लोग हम लोग सत्यवादी है तो हम मान लेंगे ठीक है शास्त्र में लिखा है जब आप प्र मार देंगे शास्त्रों से ये तो काल ने बोला है गय बात परफेक्ट है बात सही कह रहे बिल्कुल ये तो अनुवाद गलत है तो फिर मतलब क्या रहा शास्त्रों की बात करने का जहां तक इनका मंतव्य शिद्ध होता ये बोल रहे थे कबीर सागर जो है हमारे लिए प्रमाण है जरा वो दिखा दीजिए कबीर सागर में कहां पेन चलाया रामपाल जी ने कबीर सागर भी प्रमाण नहीं है ओनली सिंगल पॉइंट एजेंडा रामपाल जी प्रमाण है वो बताएंगे कहां क्या है बस कौन सी बात सही कौन सी बात गलत
02:26:48:18 अब उनको ये कबीर वाणी तो आ जाएगी क्योंकि वो हिंदी अक्षरों से है हिंदी शब्द है उसम संस्कृत में आपका कैसे अधिकार हो गया ना आपको व्याकरण आती है ना पाणिनीय सूत्र पढ़ा आपको कहां से अधिकार आ गया संस्कृत में बताने का कि य अनुवाद ने गलत कर दिया याय कर दिया है आपने ना पढ़ा ना कुछ पढ़ा कौन से अधिकार से आप कहेंगे कि मैं जो संस्कृत का सही अर्थ मैं बताऊंगा और वो गलत बता रहे हैं अच्छा रामपाल जी ने ब्रज का अर्थ क्या लिखा है वो आज मैंने आपको भेजा था रामपाल जी की गीता है देखिए क्या लिखा है दिखाइए जरा रामपाल जी की
02:27:28:07 गीता यह भी देख लो भैया अगर कोई कबीर पंथी हो तो वह देख लो अरे तो सामने आ जाओ ना भैया मीना मालविया जी आप ही आ जाओ सिद्ध करो वेद पुराण गीता को भैया देखिए इसमें लिखा है ब्रज का अर्थ मेरी शरण में आओ लो यह कभी य ये रामपाल जी की गीता है और इन्होंने ही अपनी गीता में लिख रखा है मेरी शरण में आओ देख लो
02:28:21:01 देखिए क्या लिखा हैते समस्त प्रकार के धर्मों का परित्याग करो और मेरी शरण में आओ मैं समस्त पापों से तुम्हारा उद्धार कर दूंगा डरो मत लो आओ अब अब बताओ अब तो आपकी तो प्रमाण बुद्धि है रामपाल जी में अब क्या करोगे ब्रज का अर्थ होने परित्याग का भी सर इन्होने परित्याग का अर्थ भी गलत किया उसम उन्होने देखो शब्द कुछ अलग किया हुआ इन्होने परित्याग में परित्याग का मतलब होता है छोड़ देना लेकिन इन्होने बोला हुआ मल की उसको अर्पण करने को बोल रहा है वहां पर वर्ल्ड का इन्होने गलत इस्तेमाल किया हुआ है अरे भैया क वो लो कहा गए विदों में प्रमाण ओ कबीर जी भगवान है कहां गए कहां है भाई आओ वि में प्रमाण दिखाओ विद में आराधना आप सर ध्यान से देखना वो जो परित्याग पर शब्द है ना उसका भी इन्होने गलत इस्तेमाल किया हा भैया जय श्री राम बताइए जी सर नमस्ते सर नमस्ते यार जय श्रीराम बोलने में क्या जाहा जय श्री राम बोल दो भाई नमस्ते क्यों बाबू
02:29:36:02 रामदास संत रामपाल जी महाराज के शिष्य मैं समझ रहा हूं मैं जय श्री राम बोलता ही इसीलिए हूं कि मैं सामने वाले को समझ सकू कौन आया है मैं बोलता ही जय श्री राम में क्या दिक्कत है राम नाम सत्य बोल दो कोई दिक्कत नहीं कर सकते हैं उसम कौन सी बड़ी बात चलो ठीक है ठीक है चलो कोई नहीं ऐसे य पड़ी ना करें जी बोलिए आपका सुनाम बाबू रामदास मेरा नाम है बाबू रामदास बाबू रामदास जी यह अभी कुछ दिनों से एक चर्चा चल रही है आपके द्वारा कि रामचरित मानस में लिखा है हनुमान जी खुद कह रहे हैं कि जो सुबह सुबह मेरा चेहरा देख लेता है वो जो है पूरे दिन उसको खाना नहीं मिलता है तो इसका अर्थ है कि हनुमान जी की भक्ति करना गलत है हनुमान चालीसा इत्यादि का पाठ करना गलत है आप इसको सत्य मानते हैं सर मैं इसके बारे में कुछ नहीं कहूंगा मैं आपसे कुछ जानना चाहता हूं कि आप हमें बताइए हां बोलिए हम हम संत रामपाल जी महाराज के भक्तों के और आप लोगों के बीच में विरोध क्यों हो रहा है भाई अगर मान लीजिए जो चीज सच्चाई है विरोध हो रहा है
02:30:51:02 कि वह वेदों को ना मानने का नाटक करते हैं वेदों को मानते नहीं है वेद में लिखा है शास्त्र में कि दो अलग-अलग बातें अगर है दोनों को मानना पड़ेगा या तो दोनों का ऐसा अर्थ निकालना पड़ेगा कि एक हो जाए वो कहते हैं इसको मत मानो इसको मानो इसलिए विरोध है बताए एक एक सुटी का भी एक सुटी का भी अगर आपने विरोध कर दिया तो आप नास्तिक हो इसलिए विरोध है देखिए हम आप बात से सम है कि अगर या हम लोगों में कमी है या आप लोगों में कमी है तो इस बात को हम लोग अगर आपस में बैठ करर चर्चा कर लिया जाए कि कहां पर कमी है अब मैं बताऊ आपको अब मैं बताऊ आपको कमी का सीधा सा रास्ता है जिसका ईश्वर सर्वशक्तिमान है वो सही है जिसका ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं है वो गलत है ईश्वर ईश्वर को ईश्वर सिद्ध करने के लिए उसका सर्व शक्तिमान होना आवश्यक है इतना तो मानते हो जी हम लोग मानते हैं हर हर किसी व्यक्ति को मोक्ष प्राप्ति करना है तो भाई मोक्ष प्राप्त मोक्ष का अर्थ
02:32:06:02 क्या मानते हो आप बताओ मोक्ष का मतलब यह होता है कि हमेशा के लिए जन्म मृत्यु से छुटकारा प्राप्त करना हा जो भौतिक त्रिविध पाप है उनसे छुटकारा प्राप्त कर लेना सत चित स चिता आनंद है ना मोक्ष और आपके अनुसार मोक्ष कहां पर है देखिए संत रामपाल जी महाराज ने जो भी ज्ञान अपना बताए हैं देखिए देखिए देखिए देखिए हमको अब आप शास्त्र का नाम मत लीजिए आप सिर्फ ये बताइए संत रामपाल जी के अनुसार मोक्ष कहां पर है तत चित आनंद कहां पर है बताइए सतलोक है सतलोक यानी कि जब सतलोक पहुंच जाएंगे तो कोई भी ऐसी आस मन रहेगी मुझे पाना है मुझे यह करना है खुश हो जाएंगे हम सदा के लिए जी है ना अच्छा यहां पर लोग आए कैसे जीव कैसे आए थे सतलोक में ही थे ना जी सर जी इसका तो सृष्टि रचना आपने ज्ञान गंगा से पढ़े ही है तो इसको जदा बताने की जरूरत नहीं है मैं आपसे पूछ रहा हूं जीव य आने से पहले सबसे पहले सतलोक में ही था ना जी सर जी रे
02:33:21:10 जितने भी समस्त जी यानी कि सतलोक में भी सतलोक में था सतलोक सतलोक में था तो ऐसा क्या हुआ कि उनको यहां आना पड़ गया जीव को बताइए मैं बताऊं जी बताइए मैं मैं बताऊ जी जी बताइए बताइए हां जब काल कुछ कर रहा था जब काल वहां पर कुछ कर रहा था उसको देख कर के जीव प्रभावित होने लगे उसकी ओर आकर्षित होने लगे यही सच्चाई है ना जी जी और उनके मन में लालसा आने लगी उसको फॉलो करने की काल को फॉलो करने की जी ठीक है आपके अनुसार तलोक वो है जहां पर कोई लालसा बाकी नहीं रह जाती वहां पर हमारे जी वहां पर हमारे गुरु जी ने बताया है कि वहां पर शब्द से हर चीज उपलब्ध हो जाता है वहां पर जि चीज की मैं पूछ रहा हूं मैं पूछ रहा हूं कोई लालसा बाकी रह जाती है मन में अतृप्त रह जाती है किसी चीज की कि नहीं रह जाती मोक्ष का मतलब है कि कोई भी अतृप्त ना रह जाए जरा भी किसी भी तरह का वो ना हो कि मेरे को अभी यह पाना
02:34:36:10 है वो है मोक्ष अब ये बताइए सतलोक में वैसा मोक्ष है क्या सतलोक में मोक्ष है वहां पर आपको किसी भी प्रकार का कोई संकट कोई कमी नहीं रगी अरे मेरे भाई जो मैं पूछ रहा हूं वो बताओ कोई कमी लगती है क्या सतलोक में कोई चीज की लालसा होती है क्या सतलोक जाने के बाद कि अरे अरे हमें वो पाना है नहीं रता कोई कमी नहीं रता तो फिर हमको काल के लिए यह लालसा क्यों आ रही है कि भैया मुझे उसके उसके साथ जाना उसके पीछे जाना है सर इसे आपने हमारे गुरु जी के ज्ञान गंगा से तो पढ़े ही है इसको हमको ज्यादा बताने की जरूरत नहीं है अब आपसे हम एकज और जानना चाहते हैं देखिए नहीं नहीं पहले इसको क्लियर करो पहले इसको क्लियर करो अभी अभी अभी क्लियर करो आपने कहा कि उसका ज्ञान सही होगा जिसका मोक्ष होगा आपने कहा मोक्ष वो है जहां पर किसी प्रकार की लालसा किसी प्रकार की तपती ना हो वहां पहुंच गए तो मोक्ष है अब मैं कह रहा हूं जो आप मोक्ष दे रहे हो सतलोक है सतलोक में उनको लालसा हो रही है तो क्या वो मोक्ष रहा क्या सतलोक पहुंचना अच्छा ठीक है मानते हैं मान लीजिए कि उनको लालसा क्या मानते हैं भाई साहब आप क्या मानते हैं बताइए
02:35:51:12 मैं बताऊंगा आप क्या मानते हैं मान लीजिए हम मानते हैं कि वहां जाने पर मोक्ष नहीं हुआ अब हम इस बात को स्वीकार करते हैं आपके अनुसार हम पूछना चाहते हैं कि आप लोग जिसके अनुसार से आप लोग मक्ष कराते हैं क्या उससे मोक्ष होता है इसका मार्ग हमें बताइए आप होता है बहुत होता है देखिए हमें आपका जोय ये गरुड़ पुराण जो है मैंने इसको अध भाई साब भाई साहब देखिए देखिए प्रमाण की बात तब करिए जब जो पूरा माने आप हमें हमारी चीजों के लिए मत बताइए य ये लिखा है पूरा मानो तो बताओ ठीक है हमने आपको कबीर सागर तो नहीं बताया कि पूरा मानो उसको आप मानते हो इसलिए हमने पूछा उससे आपका आपका ग्रंथ को पूरा मानते हैं उसमें हमारे आपके बीच में हम ये चाहते हैं कि दूरी ना हो जो सच्चाई है सबके साथ सच्चाई दूरी दूरी सुनिए दूरी इसलिए है क्योंकि आपकी तरफ से पाखंड होता है कि वेद में प्रमाण है कबीर भगवान है आज तक नहीं दिखाया कि वेदों में कहां लिखा है कि कबीर भगवान है दूसरी बात वेदों का मानने वाला होने का मतलब होता है कि उसकी हर बात को मानना जैसे रामपाल दास जी की बात को मानने का मतलब होता है मानने वाले का मतलब होता है रामपाल दास जी
02:37:06:14 की हर बात को मानना जी और अगर आप उनकी पूरी बातें नहीं मान रहे हो थोड़ी मान रहे हो थोड़ी नहीं मान रहे हो तो इसका मतलब रामपाल दास जी आपके लिए प्रमाण नहीं है उसी प्रकार से यदि आप वेदों की बात यदि आप वेदों की बात पूरी मान रहे हो पू और कुछ नहीं मान रहे हो तो फिर वो भी आपके लिए प्रमाण नहीं है इसलिए दूरी है जिस दिन आप ये कह के आएंगे मैं वेद को पूरा मानता हूं उस दिन हम आपसे शास्त्र में आपको समझा देंगे यह प्रमाण है ये प्रमाण है ये प्रमाण है कितने तो प्रमाण दिए देखिए भाई सुनो सुनो एक ही परम ब्रह्म को कहीं पर ब्रह्म कह दिया गया है कहीं पर काल भी कहा गया है और लीला पूर्वक कहीं पर उ उन लोगों ने यह भी कहा है मेरी तो देह नष्ट होती है मगर अपनी इच्छा से होती है ईश्वर की इच्छा से होती है हम लोगों की देह नष्ट अपनी इच्छा से नहीं होती हमारे कंट्रोल में नहीं है अच्छा व ईश्वर क्या निराकार है क्या वो व्यवहार में ना आ सकने वाला है हम इन आंखों से उसे देख नहीं सकते इन कानों से उसे सुन नहीं सकते इन हाथों से उसे छू नहीं सकते वो
02:38:15:28 ऐसात है इस बात इस बात से सहमत है कि वह किसी के सामने दर्शन नहीं देगा वो व्यवहार में ना सकने वाला है फिर वह अपना एक रूप बनाता है जिससे कि हम उसकी भक्ति कर सके सजन सर्जन करता है अपना तो क्या आया कि तत् मानम सजाम में हम मैं अपना सृजन करता हूं क्यों करते हैं परित प्राणाया साधु नाम विनाया चुकता साधु भक्तों के उद्धार के लिए दुष्टों के विनाश के लिए स करते ठीक है यह मेरी थ्योरी है जो आपको बता रहा हूं आपकी संतुष्टि के लिए तो वह आता है रूप बना कर के राम कृष्ण का रूप बना कर के आता है हा हा बिल्कुल
02:39:05:03 प्रमाण हमने पीडीएफ प्रमाण हमने पीडीएफ में ढेर सारे दे रखे हैं जी पहला प्रमाण तो मैं बोलही रहा हूं पहला प्रमाण तो मैं बोलही रहा हूं कि मैं अजन्मा अविनाश होते हुए भी संपूर्ण भूतों का ईश्वर होते हुए भी अपनी योग माया को अधीन करके प्रकट होता हूं अपना सृजन करता हूं लो हो गया प्रमाण अच्छा अच्छ गीता में बताइए की गीता का ज्ञान आप लोगों ने बोलते हैब आपको गीता से क्यों चाहिए आपको गीता में भरोसा है जी भरोसा है आप बीता आप लोग बोलते हैं कि कृष्ण भगवान नहीं बोला है हम भी सहमत है लेकिन इसका प्रूफ भाई आप लोग दिखाएंगे तब तो कोई समत होगा कि नहीं हकीकत गीता का ज्ञान कृष्ण भगवान ने ही बोला है आपको गीता प भरोसा है कि नहीं बिल्कुल अका रूप से बताइए तब तो पूछिए मेहनत करवाइए बकल बिल्कुल गीता में भरोसा है हम गीता गुरु जी ने हमारे ये देखो इधर देखो यजुर्वेद 31 19 ईश्वर अजन्मा है फिर भी अपनी माया द्वारा अनेक रूप बनाकर विचर है और यही
02:40:20:03 बात 3538 में भी लिखी है ऋग्वेद कि ईश्वर अपनी माया द्वारा अनेक रूप बनाकर विचर है जिस प्रकार एक दीप से सैकड़ों दीप जला दिए जाते हैं वैसे ही एक ही परमात्मा यत्र तत्र सर्वत्र लाना भैया सामने जरा जिस प्रकार एक दीप से सैकड़ों दीप जला दिए जाते हैं वैसे ही एक ही परमात्मा यत्र तत्र सर्वत्र सर्व रूपों में संकल्प योग से विलस होता है उसी को कहीं पर ब्रह्म कहीं पर परम ब्रह्म कहीं पर परमात्मा कहीं पर काल भी कहते हैं ऐसा नहीं है काल भी कहते हैं और इस बात को मैं आपको निरुक्त और ऋग्वेद से दिखाता
02:41:31:03 [संगीत] हूं चलो ऋग्वेद अभी नहीं खोलेंगे रात हो रही है निरुक्त काफी है इसको जानते हैं आप क्या होता है ये चले गए क्या वो भाई साहब वो भाई चले ग क्या निरुक्त पहली बार सुने हैं ना नाम वेद और गीता इसके अलावा जानते नहीं शास्त्र कितने होते हैं यह देखिए बिना बताए चले ही गए जितना रटा दिया गया बस उतना रटते हैं
02:42:11:03 बस राम ने नहीं नहीं राम ना कहे भैया राम ना कहे जय श्री राम जय श्री राम इसको देखो इसको क्या कहते हैय क्या है जी नमस्कार नमस्कार यय जो है नि निरुक्त व है जिसमें वैदिक इसको कहते वैदिक डिक्शनरी नि अगर आपको वेद के शब्दों का अर्थ करना है तो व अर्थ कहां से देखेंगे इसमें से देखेंगे अब देखिए इसमें क्या कहा गया है परम ब्रह्म और अक्षर इत्यादि के बारे में क्या कहा गया है
02:42:57:01 इसमें यह सब चीजें तो कभी सुनने को ही नहीं मिली होंगी वही नहीं जानते होंगे जो जेल धाम में बैठे हैं वही नहीं जानते हो जेल धाम उस दिन जो जेल धाम उन्होने बोला ना परसों जो आपको बेवकूफ बोल के चले गए थे मेरे को तो बहुत हंसी आई सुनके मेरी अगला वीडियो बनाओ अगला वीडियो जो बनाओ उसका टैग यही रखो भैया जेल धाम से ऑपरेट जेल दम से मिलती है दीक्षा नया तीर्थ भारत का जेल धाम मेरा सर पेट दुख गया था उसने हस हसके ये देखिए इसमें अक्षर के बारे में बताया गया है अक्षर देख लीजिए रामपाल वालों भाई अक्षर नहीं मानेंगे उनको हरियाली अरे तो भाई किसी भी चीज का अर्थ करोगे किस हिसाब से जब ये डिक्शनरी बोल रही है व अंदर चैट में है लेकिन वो अभी भी अपनी बातें ही लिखे जा रहे हैं उनको आपके प्रमाणों से पड़ेगा 00 शिवा जी नमस्कार आपको बीच में इटर करने के लिए माफ चाहूंगा जी जी बोलिए मेरा प्रश्न राम पालियो से है अगर सुन रहे
02:44:12:02 हैं तो मैं एक ही प्रश्न पूछूंगा कि परमाण की परिभाषा क्या है परमाण मानते क्या हो आपके लिए उन्होंने एक शब्द बोला था कि ज्ञान की दृष्टि से देखो तो ज्ञान क्या संधि विच्छेद क्या है ज्ञान उसके आधार पर ज्ञान का अर्थ बताओ दूसरी बात कबीर दास जी लिख के गए हो तो कतड़पत ख जाऊ कबीरा मेरा नाम तो उन्होने तो भक्ति में राम का मतलब जिनको आप पूर्ण ब्रह्म परमेश्वर कह रहे हो उन कोई है जब उनसे ऊपर कोई है तो मतलब पूर्ण ब्रहम तो है ही नहीं जो ब्रम को ये कहने की आवश्यकता क्यों पड़ी पूर्ण ब्रहम को कि भाई राम का कुत्ता हूं दूसरी बात गीता प ये बोलते हैं कि गीता राम कृष्ण ने नहीं कही काल ने कही थी जबकि काल तो ये तो आप स्वयं बोल चुके हैं काल तो भगवान कृष्ण के पुत्र है राम के पुत्र है ये तो उत्तर कांड वाल्मीकि रामायण स्ट बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल यह देखिए कबीर दास जी अभी इसको लेते हैं पहले अमित दास जी से थोड़ी बात कर
02:45:27:02 ले एक मिनट हटा दो अमित दास जी रामचरित मानस के बारे में फैलाया जा रहा है कि हनुमान जी का जो
✅ This part is already used · 02:45:35:27 – 02:45:41:26 (0:06)
→ Used in: A · Video रामपाल के ठोस बुद्धि भक्त #तत्त्वदर्शीसंत #rampaljimaharaj at 2:04 ↗
02:45:35:27 मुख देख लेता है सुबह सुबह उसको दिन भर भोजन नहीं मिलता इसलिए हनुमान जी की
⬜ Not used yet · 02:45:41:26 – 02:59:08:15 (13:27)
02:45:41:26 भक्ति करना व्यर्थ है आपके अनुसार आप इस बात को मानते हैं या नहीं मानते मैं इस बात को इसलिए मानता हूं क्योंकि वहां पर लिखा है ठीक है ठीक है ठीक है इसका मतलब यदि कोई अपने बारे में इस तरह की बात बोलेगा तो क्योंकि वह खुद बोल रहा है अपने बारे में तो हम उसको नहीं मानेंगे उसकी पूजा करना व्यर्थ है क्योंकि वो खुद बता रहा है कि मैं ऐसा हूं है ना हां क्योंकि ये ये महान व्यक्तियों की पहचान होती है वोह अपने आप को छोटा ही बताते हैं तो हनुमान जी भी तो महान होंगे इसलिए बता दिया विश्वास मत करो इस बात पर क्योंकि वो स्वयं श्री राम के भक्त हैं और इसलिए वो बता रहे हैं कि भाई मैं तो उनका भक्त मैं अपनी मक्ष के लिए राम जी की भक्ति कर रहा हूं मैं यह कह रहा हूं यानी कि हनुमान जी की भक्ति की जा सकती है व्यर्थ नहीं है उनकी भक्ति नहीं किसी भी वेदों में और किसी भी शास्त्रों में लिखा भी तो नहीं है ना हनुमान जी की भक्ति करने से मोक्ष होगा लि दिखा दिया मान लोगे बदल दोगे अपना निर्णय मानूंगा बिल्कुल निर्णय बदल सुनो निर्णय में निश्चित ही बदल दूंगा अगर आप दिखा देते हैंते
02:46:57:03 अभी दिखाते रते हा क्यों क्यों यह रामचरित मानद नहीं है शास्त्र नहीं है ये और चारों वेदों का निचोड़ गीता में नहीं वेद की मा अभी आपने हनुमान जी की भक्ति मैं कह रहा हूं हनुमान जी की भक्ति ना करने के लिए प्रमाण आपने कहां से दिया क्योंकि हनुमान जी स्वयं कह रहे की देखो देखो भैया देखो भैया मेरा गला मत चलो ठीक है मैंने आपकी बात मानी आप कह रहे हैं कि हनुमान जी हनुमान जीनो मत मानो एक एक करके चलेंगे कर च मैं करूंगा मैं सही करूंगा मैं एक बात निका लूंगा भाई थोड़ टाइम तो दो मुझे दो बातें नहीं रहेगी एक ही रहेगी ठीक जैसे कि किसी महान व्यक्ति ने अपने लिए कह दिया कि मैं तो छोटा हूं बेकार हूं तो उसकी बात को हम ऐसे माने कि महान व्यक्ति ने कहा है मगर वास्तविकता में तो इसकी भक्ति सार्थक है ऐसा सोचे या ना सोचे जब भी कोई महान व्यक्ति यह कहता है कि मेरी भक्ति करने से लाभ नहीं होगा मैं खुद
02:48:12:10 राम जी की शरण में हूं हां तो यह अगर कोई और ये अगर वो कह रहे इसलिए उनकी भक्ति करना बेकार है ठीक है तो उनकी भक्ति करने ठीक अब मैं आपको दिखाता हूं अब मैं आपको दिखाता हूं कि कबीर कह रहे हैं मैं कुत्ता हूं राम का वह राम की शरण में है तो उनकी भक्ति करना बेकार है और रामपाल दास खुद कह रहे हैं कि मैं दो कड़ी का हूं यह देखो कबीर दास कह रहे हैं मैं राम का कुत्ता हूं मेरा नाम मुतियार मेरे गले में राम नाम का पट्टा बंधा हुआ है रस्सी बंधी हुई है ऊपर
02:48:56:02 करिए ऊपर करिए हां मेरे स्वामी राम जिधर मुझे तो फिर अब कबीर दास जी की भक्ति क्यों करें यह तो कह रहे हैं और वह दिखा दो भाई रामपाल दास अपने बारे में क्या कहते हैं अभिमान नहीं परमात्मा का लिखा हुआ सब लेख सब ज्ञान उन्हीं का दिया हुआ दास तो केवल एक लाउड स्पीकर का काम कर रहा है आप तक पहुचाने स्पीकर आपको जगाने के लिए बुला कर के मुझे कहा कि आज के बाद तू नाम देगा रे सिर पर हार दिया मेरे पसीना आ गया सारे शरीर में कि मैं दो कोड़ी का जीव और इतने पवित्र परमात्मा की करो दो कौड़ी का जीव पाल दास ने ये कहा कि वो दो कौड़ी के जीव
02:49:57:21 है जगाने के लिए बुला कर केने के लिए कुत्ते का काम करर आपको जने के लिए कुत्ते का काम करर आपको कुत्ते का काम कर रहा है रामपाल दास जी ने अपने लिए कह दिया मैं दो कौड़ी का हूं जीव हूं और का काम कर रहा हूं तो इनकी भक्ति भी बेकार हो गई बोलो भैया जी वो संकेत कर रहे हैं कि परमात्मा की सरण में कुता बन रहना चाहिए कर रहे हैं हां तो हनुमान जी की भक्ति लिखी है रामायण में हां लिखी है बताता हूं कहां लिखी है बताता हूं खाओ हनुमान चालीसा का आखरी लाइन क्या है भैया आप लोगों का एक लाइन मि एक मिनट एक मिनट अरे यार जब मुझसे बोल रहे हो दिखाओ तो दिखाने दो ना इन लोगों की एक टैग लाइन है कि बंदी छोड़ इसका अर्थ क्या है भाई आप लोगों बताओ एक मिनट मैं विशाल भाटिया जी आपको लूंगा यह लोग कहते हैं जय हो बंदी छोड़ बंदी छोड़ का मतलब क्या है मुक्ति ना बंदी छोड़ का मतलब क्या है अमित जी इनको जरा ऑन करो बंदी छोड़ का मतलबी छोड़
02:51:13:12 बता रहा बता रहा बंदी छोड़ का अर्थ यह है कि पांच तत्व तीन गुण से शरीर बना हुआ है और बंधा हुआ है इस बंदिश से निकलने के लिए कहते कि बंदी छोड़ परमात्मा की जय यानी कि बंदी छोड़ परमात्मा का बंदी छोड़ने का मतलब है कि मुक्ति हा हा अब भैया तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा के लास्ट में क्या लिखा जो सत बार पाठ कर जोई छूटा बंदी छूटा बंदी
02:51:49:18 बंदी वो तो तुलसीदास ने अप जी की रामायण मानेंगे हम तो तो फिर तो फिर हनुमान जी को ना मानने के लिए एक मिनट हनुमान जी को ना मानने के लिए रामचरित मानस का प्रमाण क्यों दिया हनुमान जी को मानने के लिए तुम्ह वेद चाहिए वाल्मीकि चाहिए और ना मानने के लिए तुम्ह रामचरित मानस चाहिए बोलो बोलो बोलो ति करने से हमें मोक्ष होगा हनुमान जी को ना मानने के लिए वाल्मीकि रामायण का प्रमाण दिया आपने हां कहां दिया अब रुको तुम्हारा मुह बंद कराते ही रहेंगे वाल्मीक रामायण संस्कृत में लिखा है इसलिए नहीं पढ़ पाए के सामने इनका खंडन करू एक मिनट एक मिनट अब ये भैया शिव पुराण को तो मानोगे हेलो शिव
02:52:54:02 पुराण अरे बोलो भैया हा बोल रहा आधी मानेंगे आधी नहीं मानेंगे हा जैसे बोलते चद समता हनुमान जी का इसमें बताया जा रहा है पूरा अध्याय शिव जी का हनुमान के रूप में अवतार शिव जी का हनुमान के रूप में अवतार और उनके चरित्र का वर्णन ठीक है रुद्र समता पूरा उनका जब चरित्र बन बता दिया इन्होंने शुरू से लेकर आखिर तक क्या किया लास्ट में उन्होंने क्या कहा मालूम है जो सावधान होकर भक्ति पूर्वक हनुमान जी की भक्ति पूर्वक इसे सुनता है भक्ति करता है उसका क्या होता है वो इस लो में सभी सुखों को भोग कर अंत में परम मोक्ष को प्राप्त करता है जय श्री राम हो गया बंदी छूट गया अब मैं आपसे अमित पहले बताओ य मानोगे कि नहीं पहले
02:54:09:18 सुनो नहीं पहले य बताओ आपकी बात मानूंगा अगर मेरा एक डाउट क्लियर कर देते हो तो उसके बाद अगला मैं आपको वचन देता हूं यदि मेरा एक डाउट क्लियर कर दिया तो मैं संत रामपाल जी महाराज को छोड़ दूंगा वचन देता हूं अच्छा चलो ठीक है चलो पूछो चलो आपका आप आप मैं यही देखता हूं कि आप मुझे यह बताइए ब्रह्मा विष्णु महेश क्या यह गुण है रगुण ब्रह्मा बमा विष्णु महे ब्रह्मा सुनिए जब ईश्वर रजोगुण कार्य करता है तो व विष्णु कहलाता है जब ईश्वर नहीं जब ईश्वर सतो गुण कार्य करता है तो विष्णु कहलाता है रजोगुण कार करता है तो ब्रह्मा कहलाता है और तमो गुण कार्य करता है सुनो मैंने मैंने वचन दिया मैंने वचन दिया है कि आज मेरे प्रश्नों का यदि आपने दे दिया उत्तर मैं छोड़ दूंगा भक्ति उनकी तो मैं दे तो रहा हूं अगर मेरे डाउट क्लियर कर देते हो तो गुण भी कहीं कहीं कहा गया है मगर उसका परवन इस बात में है कि उत्पत्ति स्थिति और
02:55:24:25 समार उत्पत्ति का अर्थ है रजोगुण कार्य ब्रह्मा जी स्थिति का अर्थ है सतो गुणी कार्य विष्णु जी और समार का अर्थ है तमो गुण का शिव जीी एक ही ईश्वर जब रजो गुण का करता है तो ब्रह्मा सतो गुण का कर रहा है तो विष्णु और तमो गुण का कर रहा है तो शिव कहला रहा है बो आपने आपने यह माना कि रजोगुण सतोगुण और तमोगुण ब्रह्मा विष्णु महेश है अरे भाई वो वो जब वो जब सृष्टि का उत्पत्ति स्थिति समार का कार्य करते हैं उस रूप में उन्हें कहा गया है कि वो गुण गुण भी है मगर इसके साथ ही साथ इसके साथ ही साथ वो परम ब्रह्म भी है वो परम ब्रह्म मान लिया मैं प्रमाण दे रहा हं क्लियर करोगे कर रहा हूं ड क्लियर कर रहा हूं प्रमाण दे रहान प्रमाण दे रहान अरे भाई प्रमाण दे रहा हूं सुनो य गुण वाला प्रमाण दोगे अच्छी बात है जो प्रश्न पूछ रहा हूं उस प्रश्न को तो क्लियर होने दो हां वो गुण भी है और बोलो गुण
02:56:40:01 भी है हा ब्रह्मा विष्णु महेश में सतोगुण रजोगुण और तमोगुण गुण है ब्रह्मा विष्णु महेश में नहीं वो स्वयं ही सब कुछ है एक ही त परम ठीक है ठीक है तो फिर गीता गीता अध्याय सात के श्लोक नंबर 12 से 13 में उनकी पूजा करने के लिए रजोगुण तमोगुण की पूजा करने वाले मनुष्य में नीच और दूषित कर्म करने वाले क्यों कहा गया है इसलिए कहा गया है कि वहा पर जब रजोगुण तमोगुण सतोगुण की बात हो रही है तो वो प्राणियों की बात हो रही है परम [प्रशंसा] य हो गया कि हमें ब्रह्मा विष्णु महेश की पूजा नहीं करनी चाहिए यह आप कह रहे हो यह आप कह रहे हो गीता क रही है भैया जी गीता क रही है भगवत गीता कह रही है विष्णु महेश की पूजा करने वाले मनु दूषित कर्म करने वाले होते हैं अरे तो ब्रह्मा विष्णु महेश अगर गुण है तो साथ ही साथ परम ब्रह्म भी तो है वो भी तो लिखा है हा तो उस परम ब्रम की बारे में गीता अध के शलोक नंबर में कहा गया है हे अर्जुन वो परमात्मा
02:57:55:12 तो अन है चुप करो शिवांशी सुनिए अब मुझे दो मिनट जाना है तो मुझे थोड़ी देर हो रही है तो मुझे बस दो मिनट दे दीजिए दो मिनट बस ठीक है हा पहले य बात पूरी कर लू एक बात पूरी करलो प्लीज यह नहीं तो रह जाएगी गुण वाली बात पूरी कर लो उसको केवल अपनी बात बोल के जाना था स्टेज प आपने शिव पुराण से दिखाया वो नहीं माना नहीं एक बात बताइए अगर कहीं पर लिखा है कि वह गुनातीत है सभी गुणों से परे हैं और कहीं पर लिखा है कि वह गुण है तो गुण वाली बात को क्यों मानेंगे और गुनातीत वाली बात को क्यों नहीं मानेंगे बात तो वही है ना वो दो लोक के अलावा रा अधूरा मानोगे सुने ही नहीं है दो श्लोक
02:58:51:21 वही मि एक मिनट में इनका गुणात बता दूं जरा क लिखा है व सभी गुणों से परे हैं वो दिखा दू हा विदेश संहिता में लिखा है यह देखिए विष्णु भगवान के लिए लिखा
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02:59:08:15 है भगवान माया के गुणों से रहित है अनंत है सृष्टि स्थिति और प्रलय के लिए रजोगुण सतोगुण एवं तमोगुण माया के तीन गुण उनकी इच्छा से उनके द्वारा स्वीकार किए जाते हैं श्रीमद् भागवत दो पा 18 इसके बाद शिव जी किसी भी प्रकार के गुण से रहित है वह एवं वही सृष्टि की उत्पत्ति पालन और समार तीनों करते हुए विश्व और शिव नाम धारण करते हैं अतः इस प्रकार भी शिवजी की श्रेष्ठता बताने वाले शास्त्र तामसिक नहीं है और भगवती देखो भगवती सगुणा या निर्गुणा केवल कार्य भेद से प्रतीत होती है जिस परम पुरुष को त्रिगुणा तीत कहा गया है वही उत्पत्ति स्थिति समार का कार्य संपादन करने वाली माया महा माया अर्थात भगवती है देवी भागवत
⬜ Not used yet · 03:00:04:27 – 03:10:22:24 (10:18)
03:00:04:27 नन 34 से 37 तो लीला भेद से यह गुणों को धारण करते हैं मगर वस्तुत तत्ता यह परम ब्रह्म भी है गुणों से परे भी हैं इसलिए इनके गुणों से पड़े वाले रूप की पूजा की जाती है सिंपल समझ गए समझ गए कि नहीं समझ गए भैया जी इनको सुनो हां ठीक है आपको नहीं समझ में आएगा आपके लिए प्रमाण है क्या गीता गीता प्रमाण है क्या नहीं कंफ्यूज में इसलिए हूं आपने कहा उस परम ब्रम की पूजा आपने फिर फिर हम रग की भक्ति क्यों या इनको क्यों लेते हो भाई क्यों लेते हो इनको क्यों लेते हो इन्ह मेरे भाई हटाओ इन्ह जाइए भैया आप अपने घर जाइए ब वो जेल धाम यात्रा करिए वहां दर्शन करिए तीर्थ करिए वहां
03:01:08:18 जाके एक ही व्यक्ति लीला पूर्वक अगर मैं कहीं पर किसी ऑफिस का या किसी जगह का पर वो हूं क्या कहते हैं बॉस मैं ही कहीं जाकर के किसी सेवक के रूप में भी दिख सकता हूं अब मैं अगर सेवक दिख गया तो मैं मेरी जो वहां पर जो स्वामित्व है वो खत्म हो गया अजीब बात है और कुल मिला कर के अगर गीता मान रहे हो तो पूरा पूरा मानो ना आधा अधूरा क्यों मान रहे
03:01:46:08 हो जी बोलिए विश्वजीत सिंह जी बना लेना कट कर लेना भाई जी सत श्री काल जी वा जी एक व्यक्ति यह कह रहा है चलो आज शिवांस हार गया ठीक है अब इससे क्या पता चलता है यह मानता है कि आज से पहले सारे लोग ध्वस्त हुए थे ठीक है और इसी व्यक्ति ने आज से पहले कई बार कहा कि तुझे ज्ञान नहीं तू हार गया
03:02:21:06 तो ये झूठ भीरी नहीं जी आ रही बोलिए अपना सत श्री अकाल जी सारन जीन पंजाबी नहीं पंजाबी नहीं आती भाई साब हिंदी आती मैं सुन रहा था आपका य प बड़ा बिया अच्छा अ विचार लगा आपका बड़े अच्छे से आप बता रहे हैं उसके लिए बड़ा बधिया है ना जी ते मैं भी इनके हमारे गांव में भी है संत रामपाल जी इनके शिष्य हैं तो मैं भी आपसे एक सवाल है जी जिदा आप बात कर रहे हैं तो आप क्या रामपाल जी से दीक्षित है क्या नहीं नहीं मुनके विचार उनके विचार अच्छे लगते हैं सुनने लगा था मैं भी तो आपसे अ देख रहा हूं चर्चाएं हो रही है आपकी उनके साथ में अच्छे विचार लग रहे थे तो आपसे देख रहे चर्चा होती है तो [संगीत]
03:03:38:19 स प्राप्ति ना तो यह शंका भी मोक्ष की प्राप्ति कैसे हो सकती है तो जो गुरु ग्रंथ साहिब जी है के उस वो गुरु ग्रंथ साहिब जी का तो सुना होगा आपने जी मोक्ष की प्राप्ति कैसे हो सकती है जी उसके लिए क्या करना पड़ता है राम कृष्ण की भक्ति करने से मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है क्या जाप करना पड़ता है नाम क्या कौन से नाम का जाप राम नाम का जाप करिए शिव नाम का जाप करिए कृष्ण नाम का जाप करिए हरे कष्णा हरे कृष्णा कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ये करिए ओ ठीक है और को जी बस और भी है और भी उपाय हैं राम नाम का जाप करना है आप जो है कहीं पर गाड़ी रोक लीजिए फिर बात करिए गाड़ी चलाते चलाते कुछ कोई नहीं गा घटना निती आपके साथ मुझे लग रहा है आप बस चला रहे हैं आपके साथ को ट्रक चलाना ट्रक चला
03:04:53:19 रहे हैं कहां पे हैं आप अमेरिका में है जी हा अमेरिका में है यस विश्वजीत जी य बताओ गुरु ग्रंथ साहिब में लिखा हुआ है एक ओंकार सतनाम इसका मतलब क्या है एक ओंकार का मतलब है जी एक ओंकार का संकेतक शब्द है मतलब के उसमें लिखा है नहीं नहीं एक कोकार ही सत्य नाम है उसमें लिखा हुआ है ये चीज और यही चीज गीता जी में लिखा हुआ है विष्णु जी बोला मैं ही एक ओंकार हूं आपको पता है इस बात का नहीं इसका तो सुना एक विष्णु जी ने कहा हंत नानक जी ने ये बोला है कि एक ओंकार ही सतनाम है उन्होने स्पेशल एक ओंकार सतनाम कर्ता पुर्ख ये सारा बोला हुआ है ना उने ये तो पता होगा आपको लपर की सिफत सला में बोला है ना गीता जी में विष्णु जी ने ये बात बोली कि एक ओंकार मैं ही हूं अच्छा ठीक जी जी जी गुरु ग्रंथ साहिब और से एक ओंकार का ही आप जाप करो तो उससे ही मोक्ष हो जाएगा वहा पर भी आप विष्णु भगवान को ओमकार है उसी का रूप परिवर्तित करते हुए भगवन नाम दिए गए हैं राम कृष्ण क्योंकि जो जो प्रणवा अक्षर है उसमें सबका अधिकार नहीं हो पाता जिने इत्यादि का मर्यादा का पालन करना पड़ता है
03:06:09:12 इसलिए भगवान ने कलयुग में सरल करने के लिए नाम जप दे दिया कि प्रणव का उच्चारण करना सबके लिए बस की बात नहीं तो आप जो है नाम जब कहीं भी कर सकते हैं ट्रक में बैठ कर के भी कर सकते हैं अपनी उंगली में आप जहां पर भी आपको समय मिले उंगलियों से गिन सकते हैं सबसे उत्तम होता है कि माला से गिन ले अगर नहीं गिन पा रहे उंगलियों से गिन ले या फिर जपा काउंटर भी आता उस पर भी गिन सकते हैं जय आपने बोला राम राम कृष्ण कृष्ण शिव शिव इसका गीता जी में प्रमाण है कहीं भी इसके जाप से मुक्ति होगी दूसरे अनेक शास्त्रों में प्रमाण है नहीं गीता जी में है जी कहीं नहीं गीता गीता जी गीता जी कहां से निकली है य बताइए किसने लिखी है गीता गीता महाभारत से मैं बता रहा गीता जो है महाभारत से निकली ना हा जी महाभारत किसने लिखी है वेदव्यास जी ने वेदव्यास जी ने ही 18 महापुराण लिखे उन्ही 18 महापुराण में जगह जगह राम कृष्ण शिव इन नामों का महिमा गान है
03:07:25:07 ठीक है ठीक है ठीक है मल गीता जी में नहीं हैगा तो आप भाई सारी बातें गीता जी में होंगी क्या कोई चीज कहीं पर है कोई चीज कहीं पर है इतने सारे शास्त्र य ही थोड़ी ना है ठीक है नवीर जी आप कब से जाप करना शुरू करेंगे नहीं जाप तोही करी द जी पाठ भी करी पाठ भी करते हैं जाप भी करते हैं नहीं आप गीता जी में निष्ठा दिखा रहे हैं ना तो इसलिए पूछ रहा हूं मैं कि गीता जी जिन्होंने लिखी है वेद व्यास जी उन्होंने ही 18 महापुराण भी लिखे हैं और उसमें उन्होंने जगह जगह भगवन नाम का वर्णन किया है जैसे अभी मैंने आपको बताया शिव पुराण में हनुमत चरित्र का वो लिखा है कि अगर आप हनुमत चरित्र का वो करेंगे यानी हनुमान चालीसा इत्यादि का पाठ करेंगे डेली तो आप मुक्ति हो जाएगी शिव पुराण में लिखा है शिव पुराण क्या है 18 महापुराण 18 महापुराण क्या है कि जब वेदव्यास जी ने महाभारत की रचना कर ली वेदों के चार टुकड़े कर दिए प्रकरण कर लिया वेदों का वेदांग को वेदांग का प्रथक्करण कर लिया उसके बाद उनको यह लगा कि अभी भी भक्ति के बारे में
03:08:40:09 लिखना बाकी है तो उन्होंने 18 महापुराण की रचना की यह भागवत में लिखा है श्रीमद् भागवत ठीक है भाई साहब अब आप गाड़ी चलाज मर्जी के भक्ति जिस मर्जी की नहीं शास्त्र शास्त्र की सीमा में शास्त्र में जो जो विकल्प शास्त्र में शास्त्र में जो जो विकल्प दिए गए हैं उनमें से किसी एक विकल्प की भक्ति करना ही शास्त्र समत भक्ति है तस्मा शास्त्रम प्रमाणम भगवत गीता साब बोल रहे थे ना एकम का के बारे में तो गुरु ग्रंथ साहिब जी तो इनकी ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति का खंडन करता है ब्रह्मा विष्णु महेश कार्य रूप से सुनिए ब्रह्मा विष्णु महेश का लीला रूप से जो उनका रूप है उनकी भक्ति करने को भले ही मना करता हो मगर जो उनका परम ब्रह्म रूप है जहां पर शिव जी कह रहे हैं मैं ही परम ब्रह्म हूं प्रणव के द्वारा जाना जाने वाला मैं ही हूं शिव जी ने भी कहा है राम ने भी कहा है विष्णु भगवान ने भी कहा है ओमकार के द्वारा जो जाने
03:09:55:10 जाने वाले हैं वह कौन है विष्णु तो आप उनके उस रूप की ना भी करो जो उनका लीला रूप है हम तो उसी की करते हैं क्योंकि वह सरल होती है भक्ति आप उनकी कर लो जो उनका वैसा रूप है परम ब्रह्म वाला रूप क्योंकि वह परम ब्रह्म ही इस रूप में आया है हम हमारी मुक्ति को सरल करने के लिए
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→ Used in: A · Live 25 अगस्त हरियाणा धर्मरक्षा या षड्यंत्र धर्मेंद्र हुड्डा को संदेश हिंदुओं को च... at 39:37 ↗
03:10:22:24 मैं और ब्रह्म एक ही है तो भी माया रूपी कार्य कारण की उपाधि भेद से हमारा प्रतिबिंब प्रथक प्रथक दिखाई देने लगता है दोबारा पढ़ लीजिए मैं और ब्रह्म एक ही है तो भी माया रूपी कार्य कारण की उपाधि भेद से
⬜ Not used yet · 03:10:44:20 – 03:36:36:00 (25:51)
03:10:44:20 कार्य कारण मतलब एक तो कारण मैं ही सबका और दूसरा कार्य कार्य करते समय वह लीला भद से दिखते हैं कि ब्रह्मा विष्णु महेश एक एक सतोगुण कार्य कर रहे रजोगुण कार्य कर रहे हैं कार्य कारण की उपाधि वेद से हमारा प्रतिबिंब प्रथम प्रथक पतक है बणी माधव जी आप क्लासेस में आइएगा
03:11:17:20 चलिए अब कोई है नहीं मुझे लगता है बहुत समय हो गया तीन घंटे से ज्यादा की स्ट्रीम हो चुकी है सबका आने के लिए आभार और शुभंकर पारिजात जी बोलिए आप सुन नहीं पाए ह जी बो था कि हम नास्त्र जो है ना उसके लिए फॉर्म भरे थे लेकिन अभी तक जवाइन नहीं हुए यह सब बातें तो आप कर देते इसके लिए लाइव में आने की आवश्यकता नहीं है आपने बोल दिया है किस नाम से भरा है आपने यही नाम से ठीक है मैं बोल दूंगा आपको तुरंत जोड़ लि मैं ही जड़वा दूंगा प्रकाश जी जय श्री राम नमस्कार जी देख लिया आरही हैरी जी बोलिए नमस्कार बोलिए हा आपने श चार्य जी का नाम लिया था और आपको अभी जो विषय चल रहे हैं उससे रिलेटेड अगर बात करनी तो कर लीजिए तीन घंटे 12 मिनट की स्ट्रीम हो चुकी है मैं थक चुका हूं अब सोने का समय हो गया है आपका हो सकता है भी जागना
03:12:32:27 हो हमें सुबह 4:30 बजे लगना रहता है आप जो विषय चल रहा है उसमें आपको कुछ समझ ना आया हो तो आप पूछ लीजिए नहीं तो फटाफट इसको क्लोज करें जी जी मुझे भी जाना है देखिए मैं चार्य जी के बारे में कर रहा हूं बात आपको सुन लीजिए आप नहीं सते अभी बात चल रही है क्या कबीर भगवान है क्या वेदा आदि शास्त्र रामपाल जी के लिए प्रामाणिक है क्या वेदा शास्त्रों के अनुसार कबीर भगवान है सिद्ध होता है क्या रामपाल दास के द्वारा बताई जाने वाली भक्ति शास्त्र सम्मत है वेदा शास्त्र सम्मत क्या उनके द्वारा दी जाने वाली जो दीक्षा है व शास्त्र सम्मत है देखिए हम इसको नकारते हैं हम जो भी बिल्कुल नहीं है जो भगवान शंकराचार्य कहेंगे उसी के अनुरूप हमें मानना होगा हमारे सबसे बड़े सबसे बड़े गुरु शंकराचार्य उनका अपमान किसी भी हालत में हम नहीं सहन कर सकते राम मंदिर के दौरान हमने देखा किस तरह से उन लोगों ने अपमान किया यह हमारे बहुत आघात पहुंचा है
03:13:48:20 आज भी वह संघर्ष कर रहे हैं गौ यात्रा के ऊपर आप जानते होंगे कितनी वह हर राज्य के अंदर गए हैं और इसी गंदी राजनीति ने गौ माता को अभी तक कटने पर मजबूर किया हुआ है और यह लोग अलग-अलग पंथ चला कर के दुनिया को बेवकूफ बना रहे हैं एक तरफ अंबेडकर वाद दूसरी तरवा जब आप समर्थक है तो यहां मंच पर आकर के ऐसे क्यों बोल रहे कि हमें प्रश्न करना हैसे शंकराचार्य जी के बारे में और जब समर्थक है तो जो शंकराचार्य बोलते हैं जय श्री राम उसका उत्तर आप जय श्री राम ना दे कर के नमस्कार क्यों बोल रहे हैं
03:14:37:20 देखिए शंकराचार्य जब सभा में आते हैं तो सबसे पहले बोलते श्री राम जय राम जय जय राम जब आप उनके समर्थ है तो आपको बोलना चाहिए था जय श्री राम के उत्तर में जय श्री राम देखिए जय श्री राम भगवान राम तो हमारे हृदय में है उसको मैं भाह आडंबर के साथ प्रकट करूं मेरे को इतनी उचित नहीं है इसका मतलब आपके अनुसार शंकराचार्य आडंबर करते हैं शंकराचार्य भगवान ने कभी भी आडंबर नहीं किया वो स में आके सबसे पहले बोलते हैं श्री राम जय राम जय जय राम जी मेरे को मेरे को पता है लेकिन आपने क्या अभिवादन किया था उस समय मेरे को ध्यान नहीं तो ऐसे बोलिए ऐसे मत बोलिए आड है ऐसे मत बोलिए आडंबर है आप ये बोलिए मुझे ध्यान नहीं जी शायद मैं उसको सुना नहीं होगा लेकिन ऐसा कोई भी मैं इतनी मूर्खता नहीं दिखाऊंगा कि आप राम राम करेंगे हमारी किसी बात से शवा जी मुझे इजाजत दीजिए जय श्री राम अभी जरा मेरा केवल ये प्रश्न था आराधना जी आराधना जी आपका नाम क्या है आराधना
03:15:52:26 जी आपका नाम क्या है मैंने बताया था आपको मेरा डाटा कम रहने की वजह से कट गया था दोबारा आया हूं हट स्पोर्ट चालू करके नाम क्या है आपका बाबू राम दास है बाबू राम दास जी अब आप अगली बार आइएगा आज मत आइए अब समय हो गया कोई बात न घंटे 16 मिनट हो गए आप कल आ जाइएगा हो सका तो ड नोट कर लीजिए उस आप एक नंबर नोट कर लीजिए उस ट कर दीजिए हम जब अगली बार आएंगे तो आपको लिंक दे मान मान्यवर मेरा आपसे यही निवेदन है कि आप लोगों को जागरूक करें यह आपका कर्तव्य है आप बड़े प्रखंड विवान
03:16:40:14 भाईब प्रकाश जी आपको अगर कोई बात हमसे कहनी है तो हमारा ट नंबर नोट करिए वहां पर हमसे क जो भी आपको मार्गदर्शन करना है परामर्श देना है हम वहां पर आपसे बात करेंगे ठीक है प्रकाश जी विशाल भाटिया जी बताइए ट नंबर ले लीजिए प्रकाश जी को दे दीजिए प्रकाश जी 74836 इस पर आप संपर्क करिए हमें बताइए आपको क्या लगता है हमें क्या करना चाहिए ठीक है जय श्री राम जय श्री राम शिवा जी जी तो मैं बहुत दे सेना पक्ष कुछ प्रस्तुत करना चाहता था और आज हनुमान जी बात हो रही है हनुमान जी मैं भी खुद हनुमान एक हनुमान भक्त हूं वो हनुमान जी पर सवाल उठाए थे तो मेरा भी हक बनता है अपने इष्ट के लिए बोलने का जी जी बोलिए बोलिए अभी और भी कभ पंती है एक कभ पंती है विशाल वर्मा के नाम से वो भी है मैं उसको अगर वो आ सकता है तो आए ठीक है मैं अपनी कुछ बात मैं आज इनका एक खंडन करने वाला हूं अब जैसे इन्होने कौन कौन कौन आना चाहता है कौन नाम लिया चाता मतलब कमेंट कर र है वो आप अपनी बात बोलिए व तो देखि आप चाहे जो कर ले
03:17:55:22 वह जो बोलना है उनको वही बोलेंगे हम जो बिगड़ चुके उनको सुधार नहीं सकते बस बिगड़ने से बचा सकते हम बिगड़ने से बचा सकते हैं बस बो लोग समझ सकते हैं मूर्खों को नहीं समझा जा सकता देखिए आप कि आप किसी अज्ञानी को सही सकते किसी मूर्ख को भी सही कर सकते हैं मगर जिसने मूर्ख रहने की कसम खाई हो उसको नहीं कर सकते उसने कसम खा ली मुझे ऐसे ही रहना है जी बताइए पहली बात में कहना चाहूंगा कि अब जैसे भगवान श्री राम है इनको यह लोग अलग अलग मानते हैं कि कि हम हम लोग तो दशरत नंदन राम की पूजा करते हैं असली राम तो कोई और है ये लोग एक एक चौपाई कोई अपनी डालते हैं राम राम सब जगत बखान आदि राम कोई बि ने ठीक है कि मतलब वो कोई और राम है वो कबीर जी है तो मैं इनसे पूछना चाहता हूं यह लोग रामचरित मानस पर अभी बहुत बोल रहे थे ना ये लोग आप राम चित मानस का बालकांड पढ़ेंगे ना राम चित मानस के बालकांड में जब भगवान शिव से माता पार्वती राम कथा सुनने को कहती है ना तो वो भगवान शिव से पूछते हैं कि आप रामचरित मास पढ़ उसमें लिखा हुआ है
03:19:10:25 जो इनके फॉलोवर्स है ना शलोक वाले वो ध्यान से सुने जो राम जी को अलग मानते हैं सुनिए रामचंद से बहुत उछल रहे हो ना तो उसमें माता पाती भगवान शिव से पूछती है कि आप जिस राम का ध्यान करते हैं वह दशरथ नंदन राम है या कोई और राम है जिनका वेदों में यश गाया गया है वो दशरत पुत्र है कि कोई और राम है और अगर दशरत पुत्र राम ही भगवान राम है तो व ब्रह्म कैसे अगर वह भगवान थे परमात्मा थे तो व सीता जी के लिए मन में इधर उधर क्यों भटकते फिरे और एक दूसरा भी वर्णन आता है राम चित मानस के उत्तर कांड में जब मेघनाथ का नागपाश राम जी को लगता है राम रावण युद्ध में तो जब गरुड़ जी जो उनकी सहायता के लिए आते हैं वो तो नागपाश काट देते हैं वो चले भी जाते हैं लेकिन वो बाद में गरुड़ जी को मोह हो जाता है कि भगवान श्री राम अगर वो विष्णु ही है वो परमात्मा है तो वो एक राक्षस के नाग पाश से क्यों उसके उससे क्यों प्रभावित हुए खुद उसकी काट वो उन्होंने क्यों नहीं निकाली तो पहले नारद जी के पास गए नारद जी ने गौर जी को कहा आप शिव जी के पास जाओ शिव जी ने कहा कि मानसरोवर में कासुंडी जी रहते हैं जो बहुत से वृद्ध पक्षियों को राम कथा सुनाते हैं आप उनके पास जाइए आपको उनकी आपको आपके सारे शंकाओं का समाधान मिल जाएगा तो जो भगवान शिव ने माता पार्वती को जो उपदेश दिया था
03:20:26:00 जो बताया था राम जी के बारे में कि वोह कौन से राम है और जो का घुंडी जी ने उनको गरुड़ जी को जवाब दिया कि अगर वो परमात्मा तो उन्होने ये सब ऐसी चीजें क्यों की तो जो इन्होंने जो बातें की जो खंडन किए भगवान शिवने का जी ने ये लोग अगर रामचरित मास में अगर उसको पढ़ लेते ना इनको पता चल जाता कि राम कौन है ये लोग ऐसे राम राम में भेद नहीं करते वो तो कालने बोली है वो उनके अनुसार काल ने बोली है क्या बात कर रहे हैं वो उके लिए प्रमाण केवल रामपाल की वाणी है उनके लिए प्रमाण कबीर सागर भी नहीं है तो जब वो आपको बताएंगे कि इसको मान लो गीता से और तुम कहोगे यह क्या लिखा है यह गलत है अरे तो इसको क्यों माने अगर दूसरी चीज गलत है तो यह भी तो गलत हो सकता है मैं आपको जी आपकी बात पूरी हो गई तो मैं कुछ दिखाना चाह रहा
03:21:19:14 देखो य विशाल बमा जी बोल कांडी कबीर परमेश्वर के भक्त है लो भाई कहां लिखा है बताओ जरा कहा लिखा है अपने मन से वो मनम भक्ति है उनकी सामने कमेंट लिखने से कुछ नहीं होगा मेरे सवाल का जवाब दो सामने आ का अर्थ बताया गया है अक्षर का अर्थ निरुक्त रवा अध्याय दसवा खंड अक्षर अक्षर का अर्थ य पर निरुक्त ने किया है पर आत्मा परम ब्रह्म ठीक है और इसमें उन्होंने उदाहरण भी दिया है ऋग्वेद पहला मंडल 164 वा सूक्त और 39 वा मंत्र उसमें अक्षर शब्द आया अक्षरे परमे तो अक्षरे परमे का अर्थ उन्होंने वहां किया है परम अक्षर अक्षर का अर्थ भी परम अक्षर है अक्षरे परमे का अर्थ भी परम अक्षर है अक्षर का अर्थ ब्रह्म भी है अक्षर का अर्थ परम ब्रह्म भी है अब
03:22:20:24 हम अक्षर का अर्थ हमने सिद्ध कर लिया निरुक्त से कि अक्षर का अर्थ परम ब्रह्म भी है परमात्मा भी है और क्या कहते हैं वो भी है ब्रह्म यह ब्रह्म परम अक्षर और परम अक्षर ब्रह्म में कोई अंतर नहीं है अब हम राम जी को सिद्ध कर लेते हैं मैं सि कने वाला हूं मेरे पास आनंद रामायण है इनकी चीज का खंडन करना मेरे को ये बार मुझे भी मिला है इसी साल का अंक है ना हा इस वर्ष का अंक है कल्या मैं यहा सेरा अक्षर दिखा दू बस राम जी के लिए हा हा दिखाइए देखो विशाल वर्मा देखो जरा तुम भी कमेंट लिखने से कुछ नहीं होगा सामने आ जाओ कमेंट लिखना आसान होता है आप प्रभावित ना हो आप सशक्त उसमें है आपका पल्ला भारी है उन लोगों ने आज ब्रह्मा विष्णु महेश को अविनाशी मान लिया भक्ति अपनी मनमुक मान ली दीक्षा मनमुक मान ली हर बात तो उनकी खंडित खंड रही बक्स में बोल रहे हैं हमको मनमुक लिख रहे हैं वो लोग कमेंट में तो वो तो अच्छा आप क्या दिखा दोगे जो मान जाएंगे कि नहीं मनमुक नहीं हम सामने वाले को निरुत्तर और निराधार कर सकते हैं निरुत्तर कर देंगे
03:23:36:00 चुप हो जाएगा व्यक्ति और कितने हुए य पर चुप मानना कुछ है नहीं इनको बस बातें बना लो इनसे युद्ध कांड में आ जाते हैं जब वह सीता माता को ले आते हैं वो ब्रह्मा जी स्तुति करते हैं ना व पढ़ा मैंने हा वही दिखा दूं मैं इनको जरा एक मिनट बस दिखाइए भैया अब माने ना माने इनकी किस्मत दिखा दीजिए अलग से
03:24:15:10 624 विशाल बर्मा जी अंग्रेजी में कुछ मत लिखिए आ जाइए सामने हम बता देते हैं आपके सवाल का जवाब आराम से अरे आप प्रभावित ना होइए मैं कह तो रहा हूं उससे आप क्यों प्रभावित हो रहे हैं वो बहुत बोलते हैं हां भैया तो हमने देखा कि अक्षर का अर्थ परम ब्रह्म भी है परमात्मा भी है सब कुछ है ब्रह्म भी है और यहां पर श्री राम को वाल्मीकि रामायण के सपत दश
03:24:53:14 सत 17 में सर्ग के और 14 श्लोक में अक्षर ब्रह्म लिखा है अक्षर का अर्थ निरुक्त से किया हमने परम ब्रह्म और नीचे अनुवादक ने भी परम ब्रह्म लिखा है ठीक है मनमुक इसे नहीं कहते हैं ये है शास्त्र सम्मत जी है मेरे पास ये देखिए मैंने पढ़ा हुआ है ये देखिए जी जी अब मैं खंडन दिखाऊ जी इन्होंने एक भ्रांति फैलाई है कि अब इन्होने तो अब इन्होंने हनुमान जी को भी कबीर जी का भक्त बना डाला इन लोगों ने ठीक है अब ये एक कहानी बताते हैं कि रामायण में कबी जी कुता कह रहे हैं बता इसलिए दिखानी है मुझे बहुत अच्छा मौका हाथ लगा मेरे तो इन्होंने यह बताया कि जब हनुमान जी एक बार समुद्र से पार कर रहे हो समुद्र लंका से वापस जब जा रहे थे ना भारत में सीता जी से मिलने के बाद तो उनको रास्ते में एक टापू दिखता है उस टापू में एक ऋषि बैठे होते हैं ठीक है अब वो ऋषि और समुद्र और ऋषि के साथ कुछ बंदर
03:26:08:24 बैठे होते हैं ठीक है तो हनुमान जी को लगा मैं थोड़ा ठका हूं प्यास बुजा लू वो ऋषि के पास आते हैं एक कमंडल है वो उसमें कहते हैं मैं अपनी एक मुद्र यहां प रख के जा र हूं जो सीता मैया ने उनको दी थी तो मुद्रिका रखी वो स्नान करने गए इतने में कुछ बंदर जो बैठे हुए थे एक बंदर आया वो उस मुद्रिका को लेकर उस कमंडल में डाल दिया फिर जब हनुमान जी जब स्नान वगैरह करके वापस आए तो मैंने पूछा कि मेरी मुद्रिका का है ऋषि ने ऐसे इशारा कर दिया कि मुद्रिका इसमें इसमें है तो जब हनुमान जी ने उस कमंडल में चेक किया ना जाने इतनी कितनी सारी मुद्रिका हनुमान जी ऐसे निकाल रहे तो भी वो अनगिनत मुद्रिका उसमें निकलती जाई थी तो हनुमान जी ने पूछा की कितनी मुद्रिका है तो उन्होंने वो ऋषि ने कहा कि संसार में जितनी जितनी बार भगवान श्री राम आए उतनी उतनी बार हनुमान जी सीता माता की खोज करते हुए लंका से आ तो ये तब की मुद्रिका बहुत स आई है हनुमान जी ने पूछा कितनी मुद्रिका है वो ऋषि ने कहा कि जितनी बार हनुमान जी आए हैं जितनी बार श्री राम जी आए हैं उतनी मत्री काए हैं तो वो उनका अंत अंत ना पा सके तो हनुमान ने सोचा कि संसार में कितने कितनी बार प्रभु श्री राम जी आए तो फिर मैं किस गिनती में हूं यह सोच के वो आगे चले जाते हैं तो अब इन लोगों का मानना होता है कि वो जो ऋषि है वोह कबीर
03:27:23:24 जी थे जो ऋषि के रूप में हनुमान जी को असली ज्ञान देने आए थे फ वो हनुमान जी पहचान गए कि ये असली राम है तो फिर वो उ उन्हीं की भक्ति में लग गए फ और उनको हनुमान जी को मोक्ष हो गया अब मैं देखो इसका कैसे खंडन दिखाता हूं यह मेरे पास है आनंद रामायण ये पहले मुझे लगा कि आनंद रामायण का तो कॉपी नहीं है क्योंकि ये सेम जो स्टोरी जो है ये मैंने उसमें पढ़ी है गीता प्रस का एक अंक आता है हनुमान अंक आपने पढ़ा होगा तो उसमें मेरे को दिखी तो मैं उसमें लिखा है कि वो कथा आनंद रामायण से संकलित है मुझे लगा किय आनंद रामायण की कॉपी तो नहीं कर रहे हैं फिर मैंने आनंद रामायण ली मैंने इसमें पढ़ा और मुझको एक कबीर पंथी का एक वीडियो दिखा उसने उसने आनंद रामायण पूरा लाक दिखाया और बस इतना दिखाया कि हनुमान जी को मुद्रिका नहीं मिली और वो आगे चले गए लेकिन उसके आगे क्या हुआ वो नहीं दिखाया उसके आगे जब आप पढ़ोगे ना तो इनकी बात बिल्कुल झूठी हो जाएगी बताता हूं कैसे ये मैं इसमें पढ़ के सुनाता हूं जब श्री राम जी को जब श्री राम जी को हनुमान जी पूरा मैसेज वो दे देते हैं तो उनकी प्रशंसा करते हु हनुमान जी को श्री राम जी गले लगाते हैं और श्री राम जी यहां पर देखिए क्या कह रहे हैं इस संसार में तुम हे हनुमान इस संसार में तुम धन्य हो मुझ परमात्मा मुझ परमात्मा का लिंगन प्राप्त होना संसार में अति दुर्लभ है हे कपी श्रेष्ठ तुम मेरे
03:28:38:26 भक्त हो और मुझे अत्यंत प्रिय हो ठीक है य श्री राम जी कह रहे हैं कि मुझ परमात्मा का लिंगन मिलना दुर्लभ है रामायण में से फिर हनुमान जी ने की जब प्रशंसा की तब उसके बाद हनुमान जी तदनंतर भयभीत होकर अत्यंत कांपते हुए हनुमान जी ने श्री राम जी को अपने अपराध के विषय में मुद्रिका के कमंडल में जाने का वृतांत और मुनि का कहा वचन सब कुछ उन्हें क्या सुनाया कि कितनी बार राम आए हनुमान आए उतनी मुद्रिका है यह सब सुनने के बाद भगवान हस पने श्री राम जी और उन्होंने मारुती से कहा हे प्रिय हनुमान वो मैं ही था मैं ही मार्ग में मुनि रूप धारण करके तुम्हारे गर्भ को समाप्त करने के लिए मैंने वो लीला की थी मतलब उस हनुमान जी को एक वो थोड़ा सा एक गर्भ सा हो गया था तो उन्होंने कहा कि वो मुनि के रूप में वो मैं ही था यह देखो जिस अंगूठी को तुम लेकर आए हो वो पहले से ही मेरे हाथ की कनिष्का उंगली में है तब श्री राम जी के हाथ में उंगली में उस राम नाम से अंकित मुद्रिका को देखकर हनुमान जी ने उनको प्रणाम किया उनका जो अभिमान था वो जाता रहा और उन्होंने श्री राम जी को साक्षात विष्णु ही समझा यह माना कि इन्हीं की कृपा से मुझ में ये बल पहुचा है तो अब यहां पे तो उन्होंने उसकी कॉपी कर दी और बोल दिया कि वो मुनि जो थे वो कबीर जी थे और मैंने यहां से आपको दिखा दिया कि मुनि श्री राम जी थे उन्होंने श्री राम जी ने खुद हनुमान जी को बोला कि वो मुझे तुम्हारा गर्भ हरण करना था उनको शास्त्र आपको को उतना दिखाना है जिससे
03:29:54:04 वो अपनी बात सिद्ध कर सके बस बाकी उन्ह शत्र से कोई मतलब नहीं है ये भाई साहब पूछ रहे हैं भाई जब आपके राम समृत थे तो बाली को छुपके क्यों मारा इसके बहुत सारे जवाब है मगर मैं आपसे पूछता हूं कि आपके कबीर जब समरथ थे तो रामानंदाचार्य जी को गुरु क्यों बनाया क्यों उनके पास शिक्षा लेने इसका जवाब जब दोगे तो उसी में आपको आपके प्रश्न का जवाब भी मिल जाएगा जी बोलिए एक प्रश्न और पूछते य लोग अगर शिवजी सशक्ति मान थे तो जो भस्मासुर को शप दिया कि वो जिस पर अपना हाथ रखेगा वो भस्म हो जाएगा तो जब शिवजी पर हाथ रखे दरा तो शिवजी खुद क्यों भाग चले तो इसका कुछ आप जवाब देंगे इनको भागे क्यों भागे क वो हाथ डालने आ रहा था ना शिव जी के ऊपर तो आप पूछ रहे हो वो क्यों भागे ये उन लोगों का प्रश्न है मेरा नहीं है वो पूछ रहे ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है ईश्वर के ऊपर किसी भी प्रकार का नियम नहीं लग सकता है तो ईश्वर भागेगा भी ईश्वर रोएगा भी ईश्वर राज भी रचाए
03:31:09:15 ईश्वर मनुष्य दृष्टि से सोचा जा सकने वाला ऐसा कोई कार्य नहीं है जो नहीं कर सकता उसी का नाम ईश्वर है सत्यम ज्ञान अनंतम ब्रम सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रम अनंत है अगर हमने रोक लगा दी कि वो भाग नहीं सकता तो यह भी अंत है यह भी एक सीमा है वह सब कुछ करके दिखाएगा उसी का नाम ईश्वर है ये राम चित मास एक सेकंड रु किगा है मैंने जो अभी आपको मैंने जो अभी आपको बताया कि पार्वती मैया ने उनसे पूछा शिव जी से कि आप जिन राम जी का ध्यान करते हैं राम रामती रामती रमे राम मनोरम यह श्लोक उनका प्रसिद्ध है शिव जी का तो वो दशरत नंद नाम है की कोई और राम है तोय मैं कुछ इसमें आपको दिखा रहा हूं ठीक है एक
03:32:02:04 सेकंड एक मिनट रुगा बस अरे इसका भी वही जवाब है कि जब वो सर सर सार्थवाह अपने आप उनके पास सारा ज्ञान था तो गुरु के पास क्यों गए [संगीत] अब यह कहेंगे लीला थी उनको गुरु की आवश्यकता नहीं थी ऐसे ही लीला थी उनको भागने की आवश्यकता नहीं थी यह देखिए मुझको मिल गया यह देखिए अभय मैं उस रामचरित मानस के उस प्रसंग में पहुंचा हूं जब पार्वती जी ने पूछा राम कथा सुनाने के लिए प्रश्न किया भगवान शिव ने उनको पार्वती माता को अप्रिशिएट बहुत किया लेकिन अब आगे भगवान शिव बोलते हैं एक बात नहीं मोही सुहानी जत भी मोह बस क भवानी तुम जो कहा राम को आना ज शति गाव धरी मुनि ध्याना हे पार्वती एक बात मुझे तुम्हारी अच्छी नहीं लगी यद्यपि व तुमने मोह के वश होकर ही कही है तुमने जो यह कहा कि वे राम कोई और है जिन्हे वेद गाते मुजन जिनका ध्यान करते हैं तो अब इसमें आगे देखिए अब आगे जो कह रहे हैं ना शिवजी उन लोगों के लिए कह रहे हैं जो राम राम में ही भेद करते हैं य बोलते हैं ना दश नंदन राम कोई और आदि राम कोई बिल्ला जाने अब देखिए यहां प क्या कह रहे हैं शिव जी जो मोह रूपी पिशाच के द्वारा
03:33:17:04 ग्रस्त है पाखंडी है भगवान के चरणों से विमुख है और जो झूठ सच कुछ भी नहीं जानते ऐसे अधम मनुष्य ही इस तरह की बातें कहते सुनते हैं जो अज्ञानी मूर्ख अंधे और भाग्यहीन है और जिन्हें मन रूपी दप पर विषय रूपी काई जमी हुई है जो व्यभिचारी चली और बड़े कुटिल है और जिन्होंने कभी स्वप्न में भी संत समाज के दर्शन नहीं किए जिनको निर्गुण सगुण का कुछ भी विवेक नहीं है जो अनेक मन गंत बातें बका करते हैं जो श्री हरि की माया के वश में होकर जगत में भ्रम से फिरते हैं उनके लिए कुछ भी कह डालना संभव है अपने में अपने हृदय में ऐसा विचार कर संदेश छोड़ दो और श्री राम जी के चरणों को भजो हे पार्वती सगुण और निर्गुण में कुछ भी भेद नहीं है मुनि पुराण पंडित और वेद भी ऐसा ही कहते हैं जो निर्गुण अलख और अजन्मा है वह भक्तों के प्रेम वश सगुण हो जाता है जो निर्गुण है वो सगुण कैसे जैसे जल और ओले में कोई भेद नहीं है श्री राम सच्चिदानंद स्वरूप सूर्य है वहां मोह रूपी रात्रि का लवलेश भी नहीं है वे स्वभाव से से ही प्रकाश रूप और शरण शव्य युक्त भगवान है वहां जो विज्ञान रूपी प्रात काल भी नहीं होता है हर शोक ज्ञान अज्ञान अहं और अभिमान ये सब जीव के धर्म है श्री रामचंद्र जी तो व्यापक ब्रह्म परमानंद स्वरूप परात्पर प्रभु और पुराण पुरुष है
03:34:32:06 इस बात को सारा जगत जानता है जो पुरुष प्रसिद्ध है प्रकाश के भंडार हैं सब रूपों में प्रकट है जीव माया और जगत के स्वामी है वे रघुकुल मणि श्री रामचंद्र जी वे रघुकुल मणि श्री रामचंद्र जी ही मेरे स्वामी है ऐसा कहकर भगवान शिव ने उनको मस्तक नवाया बताओ बहुत बढ़िया ठीक है तो सभी को आने के लिए आभार और इसी प्रकार से बने रहे कमेंट्स के माध्यम से ही हमारा प्रचार करते रहे इसी तरीके से उसका एंगेजमेंट बढ़ाते रहे हमारा इसमें लाभ ही है और आज बहुत सारे तथ्य पकड़ में आ गए हम इन्होंने मान लिया वेद आदि शास्त्रों को प्रमाण नहीं मानते हैं इनका वो नाटक कबीर को ईश्वर नहीं मानते ये लोग बस वो तो बाद की बात है और यह आज तक नहीं दिखा पाए कि वेद में कहां लिखा है कबीर भगवान है ऐसे तो कमेंट बॉक्स में लिखते हैं ऋगवेद इतना मंडल इतना सूक्त तो बो ब सामने अब नहीं बोल रहे अब नहीं बोलेंगे अब बंद हो गया इनका बोलना ईश्वर इनका ईश्वर भी बाधित है सर्वशक्तिमान नहीं बहुत सारे काम वो नहीं कर सकता रूप नहीं बदल सकता हाथ
03:35:47:07 को लंबा नहीं कर सकता शरीर को छोटा बड़ा नहीं कर सकता कुछ भी नहीं कर सकता अच्छा और क्या है कि इनकी जो दीक्षा ले रहे हैं वह भी शास्त्र सम्मत नहीं है यह जो दीक्षा ले रहे हैं वो भी शास्त्र सम्मत नहीं है और इनके द्वारा ज्ञान से ज्ञान को काटना वो शास्त्र सम्मत नहीं है अगर एक जगह गीता में कुछ लिखा है और दूसरी जगह से उसका विरोध हो रहा है तो उनमें से कौन सी बात को मानोगे कौन सी बात को नहीं मान हो ग यह निर्णय आप कौन होते हो करने वाले मनमुक निर्णय हो गया ना ये मनमुक हो गया यह मनमुक भक्ति है चलिए सभी को जय श्री राम रामाय राम भद्र रामचंद्र रघुनाथा नाथ सीता पते नमः जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम
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